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                <title>Bilateral - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पीएम मोदी का स्लोवाकिया दौरा: ब्रातिस्लावा में हुआ पारंपरिक स्वागत, अलग अंदाज में सुनाया वंदे मातरम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे, जहां ब्रेड और नमक भेंट कर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। पीएम मोदी यहां राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और पीएम रॉबर्ट फिको के साथ व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-slovakia-prime-minister-fico-welcomed-him/article-157034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को स्लोवाकिया की यात्रा पर पहुंचने पर कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और बढ़ती साझेदारी और गहरी होगी। पीएम मोदी ने स्लोवाकिया की राजधानी में उतरने के तुरंत बाद कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ होने वाली बैठकों को लेकर भी उत्सुकता जताई।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "ब्रातिस्लावा पहुंच गया हूं। यह यात्रा भारत-स्लोवाकिया संबंधों को गहरा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर देती है। राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ फलदायी बैठकों की उम्मीद है।" वहां पहुंचने पर प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया गया, जिसमें स्लोवाकिया की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार उन्हें ब्रेड और नमक भेंट किया गया। यह अनूठी परंपरा मेहमाननवाजी, सद्भावना और दोस्ती का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस स्वागत के लिए आभार जताया और कहा, "ब्रातिस्लावा में स्वागत के दौरान ब्रेड और नमक भेंट करने की पारंपरिक प्रथा देखने को मिली। यह स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वहाँ के लोगों की सद्भावना व दोस्ती की भावना को दर्शाता है।" इस यात्रा के दौरान स्लोवाकिया की लोक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने मियावा क्षेत्र के लोक दल 'कोपानिसियारिक' की एक मनमोहक प्रस्तुति देखी। उन्होंने किसी देश के इतिहास और पहचान को बचाए रखने में पारंपरिक कलाओं की भूमिका की सराहना की।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "स्लोवाकिया के मियावा क्षेत्र के कोपानिसियारिक दल की एक बेहतरीन प्रस्तुति देखी। इस तरह की लोक परंपराएं अपनी संस्कृति और इतिहास को संजोकर रखने में मदद करती हैं।" ब्रातिस्लावा में पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए भारतीय समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में जुटे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते आपसी रिश्तों को दर्शाता है। उन्होंने इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए प्रवासी भारतीयों का आभार व्यक्त किया और कहा कि समुदाय का यह स्नेह भारत और स्लोवाकिया को जोड़ने वाले मजबूत रिश्तों को उजागर करता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "मैं भारतीय समुदाय के लोगों के इस स्नेह और गर्मजोशी के लिए उनका आभारी हूँ। ऐसे भाव हमारे लोगों को जोड़ने वाले मजबूत रिश्तों को दर्शाते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत करते हैं।" प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत बदलते वैश्विक और आर्थिक हालातों के बीच मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को बढ़ाना चाहता है। यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य स्लोवाकिया, व्यापार, निवेश, विनिर्माण, रक्षा सहयोग, नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी और आवाजाही जैसे क्षेत्रों में भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है।</p>
<p>राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ पीएम मोदी की बैठकों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने, औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने, तकनीकी सहयोग में सुधार लाने और सांस्कृतिक व शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत और स्लोवाकिया के बीच दशकों से दोस्ताना राजनयिक संबंध रहे हैं और हाल के वर्षों में दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, जबकि भारतीय कंपनियों ने स्लोवाकिया में अपनी उपस्थिति मजबूत की है, खासकर ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में। वहीं स्लोवाकिया की कंपनियों ने भी भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में रुचि दिखाई है।</p>
<p>ब्रातिस्लावा की यह यात्रा पीएम मोदी के व्यापक यूरोपीय राजनयिक संपर्क का हिस्सा है। उम्मीद है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक बातचीत, आर्थिक सहयोग और जनसंपर्क को मजबूत करके भारत-स्लोवाकिया संबंधों को एक नई गति देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:12:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर कोरिया का बड़ा ऐलान: अमेरिका-दक्षिण कोरिया की निरस्त्रीकरण मांग ठुकराई; कहा- न्यूक्लियर ताकत के रूप में हमारी स्थिति अब स्थायी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर कोरिया ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की बैठकों के बाद परमाणु निरस्त्रीकरण को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इसे "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताते हुए साफ किया कि वह अपने परमाणु हथियार कभी नहीं छोड़ेगा और अपनी परमाणु शक्ति की स्थिति को बरकरार रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/north-koreas-big-announcement-rejected-us-south-koreas-demand-for-disarmament/article-156963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kim-jong.png" alt=""></a><br /><p>सोल। उत्तर कोरिया ने रविवार को परमाणु निरस्त्रीकरण को "हमेशा के लिए तय हो चुका" मामला बताया और कहा कि वह कभी भी अपने परमाणु हथियार नष्ट नहीं करेगा। उत्तर कोरिया का यह जवाब दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच हुई हालिया बैठक के जवाब में आया है, जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को फिर से दोहराया गया था। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच गुरुवार को हुई द्विपक्षीय 'परमाणु परामर्श समूह' की बैठक में साझा लक्ष्य को फिर से दोहराए जाने के बाद उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक अज्ञात प्रवक्ता ने इसकी आलोचना की।</p>
<p>मीडिया द्वारा जारी एक बयान में प्रवक्ता ने कहा, "दूसरे युद्धरत पक्ष के परमाणु हथियारों को खत्म करने की बात करना बेतुका और कोरी कल्पना है।" प्रवक्ता ने कहा, "उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की बेकार की बयानबाज़ी और उसे परमाणु ख़तरे में डालने के लिए उनका सहयोग, परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर हमारी पक्की स्थिति को कभी नहीं बदल सकता। 'परमाणु हथियारों को खत्म करने' (निरस्त्रीकरण) का मामला हमेशा के लिए तय हो चुका है।"</p>
<p>प्रवक्ता ने पिछले हफ़्ते अमेरिका और जापान के बीच हुई 'एक्सटेंडेड डेटरेंस डायलॉग' पर भी आपत्ति जतायी, जिसमें दोनों देशों ने उत्तर कोरिया को "पूरी तरह परमाणु-मुक्त" बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया चाहे कितनी भी बहस कर लें, वे परमाणु हथियार वाले देश के तौर पर उत्तर कोरिया की मौजूदा स्थिति को कभी नहीं बदल पाएंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:00:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: प्योंगयांग पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, किम जोंग उन ने हवाई अड्डे पर किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे। प्योंगयांग एयरपोर्ट पर किम जोंग उन ने स्वयं उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहयोग, कोरियाई प्रायद्वीप और रूस के साथ रणनीतिक समन्वय पर द्विपक्षीय वार्ता होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/xi-jinping-visits-north-korea-after-7-years-north-korea/article-156371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>प्योंगयांग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे। करीब सात वर्षों बाद प्योंगयांग की उनकी यह यात्रा हो रही है। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने स्वयं हवाई अड्डे पर पहुंचकर उनका स्वागत किया, जो एक दुर्लभ और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किम के निमंत्रण पर शी प्योंगयांग पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव कार्यालय के निदेशक छाई ची तथा विदेश मंत्री वांग यी भी मौजूद थे।</p>
<p>चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी द्वारा प्रसारित दृश्यों में किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल-जू को प्योंगयांग हवाई अड्डे पर शी जिनपिंग और पेंग लियुआन का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करते हुए देखा गया। विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया, जबकि उत्तर कोरियाई बच्चों ने चीनी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को फूलों के गुलदस्ते भेंट किये। शी के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर लाल कालीन बिछाया गया था और टर्मिनल भवन पर चीन तथा उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किये गये थे। शी ने प्योंगयांग के किम इल-सुंग स्क्वायर में आयोजित भव्य स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उत्तर कोरियाई सेना ने 21 तोपों की सलामी दी, जबकि सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाये।</p>
<p>किम के साथ शी ने उत्तर कोरिया की तीनों सेनाओं के सम्मान गार्ड का निरीक्षण भी किया। स्वागत समारोह के बाद चीन के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को कुमसुसान स्टेट गेस्ट हाउस ले जाया गया। रास्ते में बड़ी संख्या में लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर उनका स्वागत करते नजर आये। दिन में दोनों नेताओं के बीच वार्ता होने की संभावना है। बातचीत में आर्थिक सहयोग, कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति तथा रूस के साथ दोनों देशों के रणनीतिक समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं।</p>
<p>दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, शी की यात्रा से पहले पूरे प्योंगयांग को विशेष रूप से सजाया गया था। शहर की सड़कों पर शी के चित्र, चीन और उत्तर कोरिया के झंडे तथा दोनों देशों की पारंपरिक मित्रता का उल्लेख करने वाले बैनर लगाये गये थे। शी इससे पहले 20-21 जून 2019 को उत्तर कोरिया गये थे। वह दिसंबर 2012 में चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली प्योंगयांग यात्रा थी। दोनों नेताओं की सबसे हालिया मुलाकात सितंबर में बीजिंग में हुई थी, जब किम जोंग उन चीन के विजय दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। उस अवसर पर वह शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सैन्य परेड में मौजूद थे। दिसंबर 2011 में अपने पिता किम जोंग-इल की मृत्यु के बाद सत्ता संभालने के पश्यात किम जोंग उन अब तक पांच बार चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात कर चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:35:53 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष: अमेरिका का रूस के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी, बोले- मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ राजनयिक संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई द्विपक्षीय मुद्दों का यूक्रेन से संबंध नहीं है। रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में वापसी की इच्छा जताते हुए कहा कि अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-ukraine-conflict-america-needs-to-maintain-relations-with-russia-says/article-155969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/macro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। रुबियो ने संसद की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई में कहा, “कम से कम, हमें रूसियों के साथ संबंध और बातचीत जारी रखनी ही होगी। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में ऐसे मुद्दे हैं, जिनका यूक्रेन से कोई लेना-देना नहीं है।” अमेरिकी विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान होने के बाद अमेरिका-रूस संबंध अधिक दोस्ताना और संभालने में आसान हो जाएंगे। उन्होंने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।</p>
<p>मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन फिर से शामिल होने के लिए तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के अब तक के प्रयास ‘कम फलदायी’ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में संघर्ष को सुलझाने की बातचीत में अमेरिका ‘साफ तौर पर’ यूक्रेन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने समिति से कहा, “हम उस युद्ध में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हैं। हम रूस को हथियार नहीं देते, हम केवल यूक्रेन को हथियार देते हैं। हम यूक्रेन पर प्रतिबंध नहीं लगाते, हम केवल रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए हमने स्पष्ट रूप से एक पक्ष लिया है।” मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को आवश्यकता सूची (पर्ल) कार्यक्रम के माध्यम से हथियार बेचना जारी रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी: नार्वे पीएम योनास स्तोरे ने किया गर्म जोशी के साथ हवाई अड्डे पर स्वागत, द्विपक्षीय वार्ता आज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में ओस्लो (नॉर्वे) पहुंचे, जहां पीएम योनास गार स्तोरे ने उनका स्वागत किया। 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला नॉर्वे दौरा है। पीएम मोदी आज द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और कल तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-reaches-oslo-norwegian-pm-jonas-storey-welcomes-him/article-154251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi7.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में सोमवार को यहां गार्डमॉन हवाई अड्डे पहुंचे जहां नार्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्तोरे ने उनका गर्म जोशी से स्वागत किया। दो दिवसीय यात्रा पर ओस्लो पहुंचे पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में विश्वास व्यक्त किया कि उनकी यात्रा भारत-नॉर्वे मित्रता को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। चार दशकों से भी अधिक समय में यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, नॉर्वे के ओस्लो पहुँचा। मैं प्रधानमंत्री योनास गार स्तोरे का हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभारी हूँ। चार दशकों से अधिक समय के बाद यह नॉर्वे की पहली प्रधानमंत्री स्तरीय यात्रा है। मुझे विश्वास है कि यह भारत-नॉर्वे मित्रता को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। मैं महाराज राजा हाराल्ड पंचम और महारानी सोन्या से भेंट करूँगा तथा प्रधानमंत्री स्तोरे के साथ बातचीत करूँगा।</p>
<p>पीएम मोदी तीसरे भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा, कल, 19 तारीख को, ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा, जो मेरे नॉर्डिक समकक्षों से मिलने का एक शानदार अवसर प्रस्तुत करेगा। प्रधानमंत्री का नार्वे के अपने समकक्ष के साथ आज द्विपक्षीय बातचीत का कार्यक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:38:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वियतनाम राष्ट्रपति टो लैम का तीन दिवसीय भारत दौरा: पीएम और राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात, रणनीतिक संबंधों की मजबूती सहित अन्य मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम तीन दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच रहे हैं। अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया से करते हुए, वह रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी में 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को मजबूत करेंगे। यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और द्विपक्षीय संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/vietnam-president-to-lams-three-day-visit-to-india-will-meet/article-152742"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/to-lam.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर मंगलवार को भारत पहुंचेंगे। वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव टो लैम भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों में नयी ऊर्जा भरना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नये रास्तों को तलाशना है। राष्ट्रपति टो लैम आज गया (बिहार) पहुंचेंगे। अप्रैल में वियतनाम के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश अपनी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के एक दशक पूरे कर रहे हैं।</p>
<p>उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल सहित एक उच्च स्तरीय दल भी आ रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव को बताता है। गया के बाद वह आज देर शाम नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वियतनामी नेता का छह मई को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जायेगा। उनके प्रधानमंत्री मोदी के साथ व्यापक चर्चा करने का कार्यक्रम है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों को भी शामिल किया जायेगा।</p>
<p>अपनी यात्रा के दौरान वियतनामी राष्ट्रपति भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा भारत के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी उनसे भेंट करने की संभावना है। राष्ट्रपति टो लैम बोधगया और मुंबई की यात्रा भी करेंगे। भारत और वियतनाम के बीच दीर्घकालिक ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध हैं। इनकी जड़ें उपनिवेशवाद विरोधी साझा संघर्षों में निहित हैं। 1972 से दशकों के कूटनीतिक जुड़ाव ने इन रिश्तों को और मजबूती प्रदान की है। प्रधानमंत्री मोदी की 2016 में वियतनाम यात्रा के दौरान इन संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर ले जाया गया था और यह रिश्ता 'शांति, समृद्धि और जनता के लिए 2020 के साझा विजन' से संबंधित है। वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' में प्रमुख भागीदार है। वर्तमान में यह भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और आसियान देशों में चौथा सबसे बड़ा भागीदार है।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। 2025-2026 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर (1,524.8 अरब रुपये) रहा है, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। नियमित विचार-विमर्श, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी गहरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टो लैम को वियतनाम के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर हार्दिक बधाई दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और वियतनाम के बीच समय की कसौटी पर खरी उतरी यह दोस्ती लगातार और अधिक मजबूत होती रहेगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वह दोनों देशों और इस क्षेत्र के लोगों की प्रगति एवं समृद्धि के लिए 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और गहरा करने की दिशा में मिलकर काम करने के प्रति आशान्वित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:36:39 +0530</pubDate>
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