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                            <item>
                <title>मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना बनी लक्ष्मणराम के लिए वरदान,  नि:शुल्क हुआ जोड़ का आपरेशन  </title>
                                    <description><![CDATA[ पांच साल पहले खेजड़ी से गिरकर चोटिल हुए लक्ष्मणराम सीकर-डीडवाना सहित अन्य निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के पास घूमे, लेकिन निजी अस्पताल में दो से तीन लाख रूपए ऑपरेशन का खर्चा बताया। लक्ष्मणराम ने बताया कि रूपयों का अभाव होने के कारण वे जोड़ का समय पर ऑपरेशन नहीं करवा सका। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/chief-minister-chiranjeevi-yojana-became-a-boon-for-laxmanram--free-joint-operation/article-12001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/12-june-sujangarh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुजानगढ़।</strong> मालकसर गांव निवासी लक्ष्मणराम के लिए राज्य सरकार की मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना वरदान साबित हुई है। पांच साल पहले खेजड़ी से गिरकर चोटिल हुए लक्ष्मणराम सीकर-डीडवाना सहित अन्य निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के पास घूमे, लेकिन निजी अस्पताल में दो से तीन लाख रूपए ऑपरेशन का खर्चा बताया। लक्ष्मणराम ने बताया कि रूपयों का अभाव होने के कारण वह जोड़ का समय पर ऑपरेशन नहीं करवा सका। </p>
<p>इसके पश्चात लक्ष्मणराम ने सुजानगढ़ के राजकीय बगड़िया अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.रविन्द्र भामूं से उपचार लिया। डॉ.भामूं ने लक्ष्मणराम को मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत नि:शुल्क ऑपरेशन होने की जानकारी दी। इस पर उन्होंने अस्पताल के पीएमओ डॉ.सुरेश कलानी से मिलकर मरीज के ऑपरेशन करने की जानकारी दी। डॉ. भामूं ने डॉ.अनुराग, डॉ.जेबी नांगल, नर्सिंग अधिकारी मनोहर, राजेश, सुमन की मदद लेते हुए लक्ष्मणराम का सफल ऑपरेशन कर उसे फिर से चलने के काबिल बना दिया। लक्ष्मणराम ने गहलोत सरकार की मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना की तारिफ करते हुए चिकित्सकों का सफल ऑपरेशन के लिए आभार जताया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 13:49:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> विज्ञान संकाय में नागौर और सीकर संयुक्त रूप से टॉपर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए परीक्षा परिणाम में विज्ञान वर्ग में नागौर और सीकर जिले प्रदेशभर में टॉप पर रहे, जबकि वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिला अव्वल रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/nagaur-and-sikar-joint-toppers-in-science-faculty/article-11018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bb.jpg" alt=""></a><br /><p> अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए परीक्षा परिणाम में विज्ञान वर्ग में नागौर और सीकर जिले प्रदेशभर में टॉप पर रहे, जबकि वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिला अव्वल रहा। विज्ञान में नागौर और सीकर ने 98.30 प्रतिशत और वाणिज्य वर्ग में बूंदी जिले ने शत प्रतिशत परिणाम देकर लोहा मनवाया है। </p>
<p>विज्ञान वर्ग में दूसरा स्थान झुन्झुनूं ने 97.54 प्रतिशत के साथ प्राप्त किया। वहीं 97.31 अंक हासिल कर जालोर को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वाणिज्य वर्ग में दूसरे स्थान पर डूंगरपुर 99.32 फीसदी एवं तीसरे स्थान पर झुन्झुनूं जिले ने 99.27 प्रतिशत के साथ प्राप्त किया। विज्ञान संकाय में सबसे नीचे के पायदान 30वें स्थान पर सिरोही 92.10 प्रतिशत एवं वाणिज्य में सबसे कम अंक बांसवाड़ा जिले को 94.30 प्रतिशत के साथ 33वां स्थान मिला। </p>
<p><strong>ये रहा जिलेवार परिणाम</strong></p>
<p>विज्ञान वर्ग में चौथे स्थान पर राजसमंद, पांचवें पर अलवर, छठे पर दौसा, सातवें पर जोधपुर, आठवें पर बारां, नवें पर भीलवाड़ा, दसवें स्थान पर जैसलमेर एवं ग्याहरवें पर कोटा और बीकानेर संयुक्त रूप से रहे। बारहवें स्थान पर करौली, तेहरवें पर बांसवाड़ा और डूंगरपुर संयुक्त रूप से एवं 14वें पर धौलपुर, पन्द्रहवें पर जयपुर, सोलहवें पर सवाई माधोपुर, सत्रहवें पर श्रीगंगानगर, बाड़मेर अठारहवें, हनुमानगढ़ उन्नीसवें, चुरू बीसवें, टोंक इक्कीसवें, झालावाड़ बाइसवें, भरतुपर तीइसवें, अजमेर चौबीसवें, बूंदी पच्चीसवें, उदयपुर छब्बीसवें, चित्तौड़गढ़ सत्ताइसवें, पाली अठाइसवें, और प्रतापगढ़ उनतीसवें एवं सिरोही तीसवें स्थान पर रहे। </p>
<p>वाणिज्य वर्ग में चौथे स्थान पर प्रतापगढ़, पांचवें पर दौसा, बाड़मेर छठे पर, सातवें पर हनुमानगढ़, आठवें पर अलवर, नवें पर नागौर, दसवें पर पाली, ग्यारहवें पर श्रीगंगानगर, बारहवें पर भीलवाड़ा, तेहरवें पर करौली, जयपुर चौदहवें, बीकानेर पन्द्रहवें, अजमेर सोलहवें, कोटा सत्रहवें, राजसमन्द अठाहरवें, सीकर उन्नीसवें, बीसवें पर धौलपुर, इक्कीसवें पर जालोर, जोधपुर बाइसवें, चित्तौड़गढ़, तेइसवें, झालावाड़ चौबीसवें, उदयपुर पच्चीसवें, सवाई माधोपुर छब्बीसवें, भरतपुर सताइसवें, बारां अठाइसवें, चुरु उन्नतीसवें और सिरोही ने तीसवां स्थान प्राप्त किया। जबकि टोंक 31वें, जैसलमेर 32वें और बांसवाड़ा 33वें स्थान पर रहे।  </p>
<p><strong>अर्से बाद शिक्षा मंत्री के बगैर ही निकाला परिणाम</strong></p>
<p>शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने लम्बे अर्से बाद बुधवार को इस वर्ष के पहले दो परीक्षा परिणाम जारी किए, जिसमें शिक्षामंत्री के बगैर ही परिणाम घोषित किया गया। गत वर्षों से चली आ रही परिपाटी के तहत शिक्षा बोर्ड का पहला सालाना परीक्षा परिणाम शिक्षामंत्री द्वारा ही जारी किया जाता है। यह प्रदेश की सत्तारुढ़ कांग्रेस सरकार और पूर्ववर्ती भाजपा व उससे पूर्व की सरकारों में भी परिपाटी रही है। लेकिन यह लम्बे अर्से के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि मौजूदा शिक्षामंत्री बी.डी.कल्ला को बुलाए बगैर ही परिणाम जारी हुआ। कल्ला का इस सरकार में शिक्षामंत्री रहते हुए यह पहला अवसर था, जब बोर्ड का परीक्षा परिणाम जारी हुए हैं। ऐसे में भी उनके बगैर परिणाम जारी होना दिनभर बोर्ड एवं राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। जबकि इनसे पूर्व शिक्षामंत्री रहे गोविन्द सिंह डोटासरा एवं भाजपा राज में शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी परिणाम जारी करते रहे। यह भी संयोग ही रहा कि बोर्ड के इतिहास में पहली बार फुल टाइम प्रशासक के रूप में नियुक्त आईएएस अधिकारी ने परिणाम जारी किया। इससे पूर्व भी प्रशासक रहे, लेकिन उनके पास बोर्ड प्रशासक का स्वतंत्र जिम्मा नहीं रहा।  </p>
<p><strong>विज्ञान में 9 और वाणिज्य में 6 विषयों में मिले 100 प्रतिशत अंक</strong></p>
<p>परीक्षा परिणाम में विज्ञान संकाय में 9 एवं वाणिज्य में 6 विषयों में पूरे में से पूरे अंक अर्जित किए हैं। जबकि अन्य विषयों में भी 99 एवं 98 अंक भी लाए हैं। परीक्षार्थियों ने विज्ञान में हिन्दी और अंग्रेजी अनिवार्य के साथ ही गणित, एग्रीकल्चर केमेस्ट्री, एग्रीकल्चर बायोलॉजी, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, एग्रीकल्चर में सौ में से सौ अंक प्राप्त किए। आईटी एण्ड आईटीईएस में 99 एवं आॅटोमोबाइल, रिटेल एवं इलेक्ट्रिकल एण्ड इलेक्ट्रोन में 98 अंक भी प्राप्त किए। इसी तरह वाणिज्य वर्ग में भी हिन्दी अनिवार्य के साथ कम्प्यूटर साइंस, इकॉनोमिक्स, गणित, अकाउण्टेंसी, बिजनस स्टेडीज में पूरे में से पूरे अंक एवं अंग्रेजी अनिवार्य, इन्फो.प्रेक्टिस में 99 अंक मिले हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 13:00:27 +0530</pubDate>
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                <title>नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त को आजीनव कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने अभियुक्त पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-draft--add-your-title/article-2046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/pocso_jail.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण ने शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक की ओर से नियमों के विपरीत जाकर किए गए करीब एक दर्जन द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला आदेशों को रद्द कर दिया है। अधिकरण के चैयरमेन रविशंकर श्रीवास्तव और सदस्य मातादीन शर्मा की खण्डपीठ ने प्रेमलता शर्मा व अन्य की अपीलों पर दिए। अधिकरण ने अपने आदेश में कहा है की तबादला आदेशों को देखने से लगता है कि इनको जारी करते समय टीए नियमों की पालना नहीं की गई है।<br /> <br /> अपीलों में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने अधिकरण को बताया की शिक्षा विभाग के अजमेर मंडल के निदेशक ने गत 30 सितंबर को प्रशासनिक हित का हवाला देते हुए संभाग के करीब एक दर्जन द्वितीय श्रेणी शिक्षकों का अलग-अलग जगह तबादला कर दिया। नियमों के तहत प्रशासनिक हित में तबादला करने पर संबंधित कर्मचारियों को टीए, डीए का भुगतान किया जाता है। कर्मचारी की इच्छा पर तबादला होने पर ही इसका भुगतान नहीं किया जाता। इसके बावजूद तबादले के लिए ना तो अपीलार्थियों से उनकी इच्छा पूछी गई और ना ही उन्हें टीए, डीए का भुगतान किया गया। ऐसे में तबादला आदेशों को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने तबादला आदेशों को निरस्त कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 13:50:59 +0530</pubDate>
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