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                <title>Medicines - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Medicines RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान पर मंड़राया एक और बड़ा खतरा : युद्ध के बाद से दवाओं की भारी किल्लत, अब तक 25 फार्मास्युटिकल सुविधा केंद्र नेस्तनाबूद</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में अमेरिका-इजरायल हमलों ने फार्मास्युटिकल केंद्रों को निशाना बनाया है, जिससे जीवनरक्षक दवाओं का अकाल पड़ गया है। कैंसर और मधुमेह की दवाएं बाजार से गायब हैं और कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों को 'युद्ध अपराध' करार दिया है, जबकि नागरिक हेल्पलाइन और स्थानीय नेटवर्क के सहारे संघर्ष कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/another-big-threat-looming-over-iran-huge-shortage-of-medicines/article-151913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान पर अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमलों के बाद से ईरानी दवाखानों में दवाओं की भारी कमी हो गई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक अमेरिका-इजरायल ने देश के विभिन्न प्रांतों में लगभग 25 फार्मास्युटिकल सुविधा केंद्रों पर हमले किए हैं। लक्ष्यों की सूची में बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग, एनेस्थीसिया और मल्टीपल स्केलेरोसिस की दवाएं बनाने वाले फार्मास्युटिकल केन्द्र के साथ-साथ तेहरान में पाश्चर संस्थान (टीका निर्माता) भी शामिल है।</p>
<p>तेहरान के वलीअसर स्क्वायर के पास एक फार्मेसी में कार्यरत डॉ. पेजमान नईम ने स्पुतनिक को बताया, "मधुमेह और हृदय रोगों जैसी कुछ दवाएं बाजार में अत्यंत दुर्लभ हो गई हैं। युद्ध के दौरान भी इनकी आपूर्ति बहुत कम थी और नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है।" डॉ. नईम ने उल्लेख किया कि चुनौतियों के बावजूद स्थिति नियंत्रण में है। ईरानी अधिकारियों ने एक हेल्पलाइन स्थापित की है जिसके माध्यम से नागरिक यह जान सकते हैं कि कौन सी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं और वे किन फार्मेसियों में उपलब्ध हैं। फार्मासिस्टों ने मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वयं एक नेटवर्क तैयार किया है। ईरानी सरकार दवा क्षेत्र को सहायता प्रदान कर रही है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण कुछ विशेष विदेशी दवाएं बाजार में बहुत कम मिलती हैं।</p>
<p>डॉक्टर के अनुसार, इन दवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक कुछ कच्चे माल को लेकर भी समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने कहा, "युद्ध का विनाशकारी प्रभाव पड़ा है, जिससे फार्मेसियों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। दवाओं की बिक्री गिर गई है और आसमान छूती कीमतों ने आम नागरिकों के लिए आवश्यक दवाएं खरीदना असंभव बना दिया है।" डॉ. नईम ने आशा व्यक्त की कि युद्धविराम के दौरान या युद्ध के बाद दवाओं की बिक्री में सुधार होगा और वे जनता के लिए अधिक सुलभ होंगी। ईरानी अधिकारियों ने दवा संयंत्रों पर अमेरिकी और इजरायली हमलों को बार-बार 'युद्ध अपराध' करार दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 13:58:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिना डॉक्टर चल रहे पशु चिकित्सालय, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[बिगड़ा ढर्रा: कोटा सहित प्रदेशभर में चिकित्सक व स्टाफ के पद रिक्त।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/veterinary-hospitals-running-without-doctors/article-139787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(5)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशुपालन विभाग में स्टाफ संकट अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने लगा है। पूरे प्रदेश में विभाग में 9 हजार से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिसके चलते जिले सहित सैकड़ों पशु चिकित्सालय बिना पशु चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। कई केंद्रों पर तो हालात ऐसे हैं कि एक पशुधन सहायक या कंपाउंडर के भरोसे पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों की आय का प्रमुख साधन है, लेकिन समय पर इलाज, टीकाकरण और तकनीकी सलाह के अभाव में दुग्ध उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में स्थापित पशु चिकित्सालयों पर न तो नियमित पशु चिकित्सक हैं और न ही आवश्यक दवाइयां।</p>
<p><strong>कहीं पद रिक्त तो कहीं पर लटका ताला</strong><br />जिले के चेचट कस्बे में स्थित ए श्रेणी के पशु चिकित्सालय की हालत संतोषजनक नहीं है। यहां स्वीकृत पांच पदों में से दो पद रिक्त हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण यहां नियमित सेवाएं बाधित हो रही हैं। अस्पताल का संचालन सहायक कर्मचारियों के भरोसे किया जा रहा है, जिससे गंभीर बीमार पशुओं का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा। इधर कुंदनपुर ग्राम पंचायत के मंडीता गांव में बना पशु चिकित्सा उपकेंद्र बीते दो वर्षों से बंद पड़ा है। भवन तैयार होने के बावजूद आज तक यहां चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते उपकेंद्र पर ताला लटका हुआ है, जबकि आसपास के सात से आठ गांवों के पशुपालक इसी केंद्र पर निर्भर थे। रामगंजमंडी क्षेत्र के पशु चिकित्सालय में संसाधनों की कमी के चलते सीमित इलाज ही हो पा रहा है। विभाग द्वारा स्वीकृत पदों के बावजूद चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से स्टाफ पर अतिरिक्त भार है।</p>
<p><strong>निजी चिकित्सकों से उपचार करवाने की मजबूरी</strong><br />जिले में पशुपालन विभाग की हालत चिंताजनक बनी हुई है। पशुपालकों की संख्या बड़ी होने के बावजूद पशुओं के उपचार, टीकाकरण और आपात सेवाओं के लिए न तो पर्याप्त पशु चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही कई स्थानों पर अस्पतालों के लिए भवन। संसाधनों की भारी कमी के चलते पशुपालकों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले के कई उपखंडों में पशु चिकित्सालय कागजों में तो संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कहीं चिकित्सक नहीं हैं तो कहीं भवन जर्जर या बंद पड़े हैं। परिणामस्वरूप पशुपालकों को बीमार पशुओं को निजी चिकित्सकों या दूर-दराज के शहरों में ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। इस दौरान समय और पैसा दोनों खर्च होता है, फिर भी कई बार पशु को बचाया नहीं जा पाता।</p>
<p><strong>पशुपालन विभाग में पदों की स्थिति</strong><br />पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त<br />पशु चिकित्सक: 4,800 2,100 2,700<br />पशुधन सहायक: 6,500 4,200 2,300<br />पैरावेट / कंपाउंडर: 3,200 1,900 1,300<br />तकनीकी व प्रशासनिक स्टाफ: 2,100 1,400 700</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु चिकित्सालयों में रिक्त पदों से परेशानी होती है। जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरा जाए, बंद पड़े उपकेंद्रों को चालू किया जाए और दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।<br /><strong>- भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>इस साल पशुपालन विभाग में छह हजार पशु परिचर, 2800 पशुधन निरीक्षक और 2200 चिकित्सकों के पदों पर भर्ती होगी। इस सम्बंध में प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति बेहतर हो जाएगी।<br /><strong>- डॉ. सुरेश कुमार, निदेशक, पशुपालन निदेशालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 15:01:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गुणवत्ता में  5 दवाएं, एक मेडिकल प्रोडक्ट फैल, बेचने पर रोक लगाई </title>
                                    <description><![CDATA[खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने जांच में गुणवत्ता मानकों पर खरे न उतरने पर पांच दवाओं और एक मेडिकल उत्पाद को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ घोषित किया है। विभाग ने संबंधित स्टॉक तुरंत बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5-medicines-banned-from-selling-a-medical-product-spread-in/article-136307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/medical.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य में जांच के दौरान मानक गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरने वाली पांच दवाओं एवं एक मेडिकल उत्पाद को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित किया गया है।  विभाग ने सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि इन उत्पादों का उपलब्ध स्टॉक तुरंत बाजार से हटाया जाए। </p>
<p>विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित निर्माताओं के अन्य बैचों की गुणवत्ता की भी समय-समय पर जांच की जाएगी। साथ ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।लेवोसेट्रीजिन डाइहाइड्रोक्लोराइड टैबलेट, वोग्लिबोज टैबलेट, ओफ्लॉक्सासिन टैबलेट IP 200 mg, टेल्मीसार्टन एवं एम्लोडिपिन टैबलेट, सेफिक्सिम ओरल सस्पेंशन, डिस्पोजेबल लेटेक्स सर्जिकल ग्लव्स शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 18:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने अफगानिस्तान को शुरू किया दवाओं का एक्सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तालिबान सरकार ने भारत से दवाओं का आधिकारिक आयात शुरू किया है। शुरुआत में 25 तरह की दवाएं मंगाई जाएंगी। इससे अफगान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-started-exporting-medicines-to-afghanistan/article-136212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-paksitan-and-afganistan.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब भारत से दवाओं का आयात शुरू कर दिया है। तालिबान सरकार ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता खराब है और वे अफगान लोगों पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब काबुल की एक प्राइवेट फर्म के प्रतिनिधियों ने एक जानी-मानी भारतीय कंपनी के ब्रांच ऑफिस के उद्घाटन के साथ भारत से अफगानिस्तान में दवाओं के ऑफिशियल इंपोर्ट शुरू होने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>25 तरह की दवाएं मंगा रहा अफगानिस्तान:</strong></p>
<p>हुर्रियत रेडियो इंग्लिश के पोस्ट के अनुसार, शुरूआती दौर में, 25 तरह की दवाएं इंपोर्ट की जाएंगी। इसमें भविष्य में अफगानिस्तान की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रक्रिया को बढ़ाने की योजना है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान फार्मास्युटिकल सर्विसेज यूनियन के सदस्यों ने पुष्टि की कि देश में फिलहाल 400 से ज्यादा कंपनियां दवाओं के इंपोर्ट में लगी हुई हैं, जो हेल्थ स्टैंडर्ड के हिसाब से अच्छी क्वालिटी की दवाएं हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p><strong>अफगानिस्तान को दवा देता रहेगा भारत</strong></p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि एक भारतीय कंपनी के अधिकारियों ने दवा उत्पादन में अपने 90 सालों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए, हेल्थकेयर सेक्टर में अफगानिस्तान के साथ लगातार सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। तालिबान प्रशासित सरकार के पाकिस्तान से दवाओं के इंपोर्ट पर रोक लगाने के बाद, इंपोर्ट करने वालों को दवाएं हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते खोजने की सलाह दी गई थी, जिसके बाद भारत से दवाओं के इंपोर्ट की यह ठोस पहल शुरू हुई।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को बड़ा झटका</strong></p>
<p>पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियां हर साल अफगानिस्तान को बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात कर भारी मुनाफा कमाती थीं। उनकी दवाओं की गुणवत्ता निम्नस्तर की होती थी। इससे पाकिस्तानी कंपनियों की लागत कम आती थी, लेकिन वे अफगानिस्तान को पूरी कीमत पर दवाओं का निर्यात करती थीं। इससे अफगान लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता था। अब तालिबान सरकार के प्रतिबंध से पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार बंद हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे अल्टरनेटिव को देखना होगा, जहां माल पहुंचाने का लागत अफगानिस्तान के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:56:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नकली दवाईयों का जखीरा पकड़ा : फर्म से 3 करोड़ की दवाईयां जब्त, नहीं लिया लाइसेंस</title>
                                    <description><![CDATA[टेबलेट विनसेटकृएल दवा की जांच के दौरान फर्म के एक पूर्व भागीदार गिरिराज अजमेरा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में जी.के. एंटरप्राइजेज से अपनी भागीदारी छोड़ दी थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hoard-of-fake-medicines-caught-medicines-worth-rs-3-crore/article-135006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/6622-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने जयपुर स्थित एक फर्म से 3 करोड़ 73 लाख रुपए की नकली दवाइयां जब्त की गई हैं। विभाग के आयुक्त डॉ. टी शुभमंगला ने बताया कि जीके एंटरप्राइजेज में नकली दवाइयों का जखीरा पकड़ा गया है। औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने बताया कि यह फर्म नकली एवं गैर-मानक घोषित दवाओं टेबलेट विनसेट-एल और एल्गीविनकृएम की बिक्री में संलिप्त पाई गई है, जो कि हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित वाईएल फार्मा की ओर से निर्मित की गई हैं। </p>
<p>टेबलेट विनसेटकृएल दवा की जांच के दौरान फर्म के एक पूर्व भागीदार गिरिराज अजमेरा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में जी.के. एंटरप्राइजेज से अपनी भागीदारी छोड़ दी थी। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अनुसार फर्म की संरचना में परिवर्तन होने पर तीन माह के अंदर नया लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होता है, लेकिन शेष भागीदार खेमचंद द्वारा अब तक किसी प्रकार का लाइसेंस प्राप्त नहीं किया गया। इस आधार पर इसके विरुद्ध बिना लाइसेंस संचालित औषधीय गतिविधियों का प्रकरण दर्ज किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 10:31:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आयुर्वेदिक चिकित्सालय में दवाइयों का टोटा, दवाई नहीं मिलने पर आए दिन होती है मरीजों और डॉक्टरों में झड़प</title>
                                    <description><![CDATA[मरीजों को अकसर आधी दवाइयां अस्पताल से मिल जाती हैं, बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-medicines-at-the-ayurvedic-hospital-leads-to-frequent-clashes-between-patients-and-doctors/article-131163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/y-of-news-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के तलवंडी इलाके में स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में दवाइयों की किल्लत इन दिनों आम बात बन गई है। रोजाना यहां ओपीडी में 250 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन दवाओं की सीमित उपलब्धता के चलते कई बार मरीजों और डॉक्टरों के बीच नोकझोंक की स्थिति बन जाती है। चिकित्सालय में आयुर्वेदिक उपचार के लिए आने वाले मरीजों को अकसर आधी दवाइयां तो अस्पताल से मिल जाती हैं, जबकि बाकी दवाएं उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।</p>
<p><strong>मरीजों की परेशानी और झड़प का कारण</strong><br />दवाइयों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। कई बार मरीज यह कहते हुए नाराज हो जाते हैं कि जो दवा डॉक्टर ने लिखी, वह अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि वे उपलब्ध दवाइयों के आधार पर ही पर्ची बनाते हैं, ताकि मरीजों को बाहर से ज्यादा खर्च न करना पड़े। फिर भी जब जरूरी दवाइयां खत्म हो जाती हैं, तो मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती है।</p>
<p><strong>सीमित स्टॉक में करनी पड़ती है जुगत</strong><br />चिकित्सालय प्रशासन के मुताबिक, स्टॉक को सालभर चलाने के लिए कई बार आवश्यक दवाइयों को रोककर धीरे-धीरे वितरित किया जाता है। कुछ दवाएं इतनी जरूरी होती हैं कि उन्हें सुरक्षित रखना पड़ता है। चिकित्सालय स्टाफ आपस में सहयोग से भी कुछ दवाइयां मंगवाते हैं ताकि मरीजों को पूरी तरह से निराश न होना पड़े। जब स्टॉक खत्म हो जाता है, तो हमें निजी स्तर पर इंतजाम करना पड़ता है। हम हर बार कमी वाली दवाओं का इन्डेंट भेजते हैं, फिर भी सप्लाई में समय लगता है, एक कर्मचारी ने बताया। अगर आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को नियमित और पर्याप्त मात्रा में दवाइयां मिलें, तो मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही, मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत दवाइयों की सप्लाई शुरू होने से स्थिति में सुधार आ सकता है।</p>
<p><strong>दवाइयां अस्पताल में ही मिलनी चाहिए</strong><br />यहां इलाज अच्छा होता है, लेकिन दवाइयां नहीं मिलतीं। डॉक्टर जो पर्ची में लिखते हैं, उसमें दो दवा तो अस्पताल से मिल जाती है, बाकी तीन हमें बाहर से खरीदनी पड़ती है। गरीब मरीजों के लिए यह मुश्किल है। सभी दवाइयां अस्पताल में ही मिलनी चाहिए।<br /><strong>-हर्षित चौधरी, मरीज, स्टेशन</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू- साल में दो बार होती है आपूर्ति</strong><br />आयुर्वेदिक दवाइयों की आपूर्ति साल में केवल दो बार होती है। इसके लिए अजमेर स्थित निदेशक कार्यालय को मांग पत्र भेजा जाता है। दवाइयों की खेप भरतपुर और अजमेर की फार्मेसी से आती है। वर्तमान में चिकित्सालय में करीब 150 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्टॉक जल्दी खत्म हो जाता है। उनका कहना है कि हर बार आपूर्ति के लिए इन्डेंट भेजते हैं। कई बार ओपीडी का दबाव इतना बढ़ जाता है कि दवाइयां समय से पहले खत्म हो जाती हैं,  एक मरीज पर औसतन दो रुपए की दवा खर्च होती है, लेकिन जब तक मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत दवाइयों की सप्लाई शुरू नहीं होती, तब तक टोटे की स्थिति बनी रहेगी।<br /><strong>-डॉ. नित्यानंद शर्मा, निदेशक एवं प्राचार्य, आयुर्वेदिक अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 16:01:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाइयों का टोटा, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही</title>
                                    <description><![CDATA[मरीज उन एक दो दवाओं को लेने की जगह बाजार से मंहगी दवा खरीदने को मजबूर हो रहें है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medical-college-hospital-is-short-of-medicines--patients-have-to-buy-them-from-outside/article-119528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाओं का अभाव है। अस्पताल में दवाओं की कमी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डाक्टर द्वारा मरीजों की पर्ची पर जो दवाएं लिखी जाती है। उनमे से अस्पताल में केवल एक दो दवा ही मिल पाती है। मरीज उन एक दो दवाओं को लेने की जगह बाजार से मंहगी दवा खरीदने को मजबूर हो रहें है। वही जांच में भी देरी हो रही है और अगर कोई बड़ी जांच करवानी हो तो उसके लिए का कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में गैस्ट्रो, न्यूरो और बच्चों की जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही है जिससे लोगों बाहर से दवाईयां खरीदनी पड़ रही है। </p>
<p><strong>दवा नहीं, जांच करवानें में हफ्तों का इंतजार, इलाज अधूरा</strong><br />मरीजों का कहना है कि अस्पताल में पूरे हाड़ौती संभाग से मरीज इलाज करवाने आते है अस्पताल में जांच में भी समय लगता है वही एमआरआई की जांच के लिए कई हफ्तो बाद की तारीख दी जाती है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं में से अस्पताल में कुछ ही दवा मिल पाती है एक मरीज ने बताया कि अस्पताल में मुंह के छालों के इलाज के लिए आया था डॉक्टर ने देखने के बाद दवाईयां लिखी अस्पताल में स्थित दवा काउंटर पर एक घंटे लाइन में लगा जब जाकर मेरा नम्बर आया। लेकिन दवा काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने कहा की अभी यह दवा सप्लाई में नही आ रही है। <br /><strong>- राहुल जादोन, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>अस्पताल में केवल सस्ती दवा, महंगी दवा बाहर से </strong><br />मरीजों का कहना है कि अस्पताल में केवल वे दवाएं उपलब्ध है। जिनकी कीमत बहुत कम है। जिन दवाओं की कीमत ज्यादा है। वे अस्पताल में नही मिल पा रही है। मरीज मजबूरी में बाहर से महंगी दवा खरीदने पर मजबूर हो रहे है। डॉक्टर ने पांच दवाए लिखी लेकिन मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटर पर तीन दवाएं ही मिली दो दवाएं बार से लानी पड़ी। अस्पताल में बच्चों सिरप तक नहीं है। गरीब आदमी के लिए बाजार से मंहगी दवाएं खरीदना आसान नहीं है। गरीब आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है। <br /><strong>- दिनेश सोलंकी, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दवाईयों की सप्लाई समय से हो रही है, कई बार कुछ दवा जल्दी खत्म हो जाती है। जो दवाइयां नही आ रही उसे हम आरएमसीएल से खरीदकर मरीजों को उपलब्ध करवाते है। जिससे मरीजों को परेशानी न हो। <br /><strong>- आशुतोष शर्मा, अधिक्षक मेडिकल कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 16:29:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकारी अस्पताल में दवाओं का टोटा, मरीजों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ मरीज की पर्ची में पांच दवा में मुश्किल से तीन दवा ही मिल रही दो दवाओं के लिए मरीजों को इधर से उधर भटकना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-medicines-in-government-hospital--patients-are-facing-problems/article-115510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(4)22.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। एमबीएस अस्पताल में मरीजों को पहले डॉक्टर को दिखाने के लिए घंटों लाइन में लगना मजबूरी बना हुआ है। वहीं अब मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में कई रूटिन के साथ गंभीर बीमारियों की दवाओं की सप्लाई कम आने से मरीजों को एनओसी दी जा रही है। एक मरीज की पर्ची में पांच दवा में मुश्किल से तीन दवा ही मिल रही दो दवाओं के लिए मरीजों को इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से जो दवाएं काउंटर पर नहीं मिल रही उनकी एनओसी देकर दूसरे काउंटर से दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन यहां पर लंबी कतारों के चलते कई मरीज बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर हो रहे है। हार्ट, बीपी, शुगर थाइरॉयड प्रोस्टेट की दवा के लिए एक काउंटर से दूसरे काउंटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>एनओसी जटिल प्रक्रिया</strong><br />कोटा निवासी शहनाज ने बताया कि वो बीपी, शुगर और थायराइड की दवा लेने के लिए एक घंटे तक दवा की लाइन में लगी लेकिन पांच दवाओं में से  तीन दवाए ही मिली। दो दवाओं के लिए एनओसी बनाने के लिए इधर उधर चक्कर काटने में समय पूरा हो गया । मौसमी बीमारी के चलते रोज बड़ी संख्या मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे है। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर जाते उन्हें पूरी दवा नहीं मिल रही है। एनओसी की जटिल प्रक्रिया से लोग बाहर से दवाएं ले रहे है। </p>
<p><strong>छह में से तीन दवा ही मिली</strong><br />अशोक ने बताया कि पहले तो घंटो डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में खड़ा रहा उसके बाद दवा लेने पहुंचा वहां भी लंबी कतारे थी। आधे घंटे बाद नंबर आया डॉक्टर ने छह दवाएं लिखी काउंटर से तीन दवाएं ही मिली तीन की एनओसी बनाने के लिए कहा। वहां काउंटर 124 पर लंबी लाइन लगी थी। बाकी तीन दवाएं बाजार से खरीदी।</p>
<p><strong>प्रोस्टेट की दवा नहीं मिली</strong><br />अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज विजय ने बताया कि उसके डॉक्टर चार दवाएं लिखी जिसमें दो दवाएं मिली दो दवाएं नहीं मिली प्रोस्टेट की दवा टेमसूलिन नहीं मिली बाजार से खरीदनी पड़ी।</p>
<p><strong>काउंटर 124 पर लग रही लंबी कतारें</strong><br />नि:शुल्क दवा केंद्रों पर जो दवाएं नहीं मिल रही उनकी एनओसी बनाई जा रही है वो दवाएं काउंटर 124 पर मिल रही है लेकिन वहां पर बहुत सी दवाएं नहीं मिल रही है। मरीजों लंबी कतारें लगी है। नंबर आने पर वहां भी एक दो दवाई मिलती है बाकी सप्लाई नहीं है कहकर टाला जा रहा है।</p>
<p><strong>लंबी कतार में घंटों खड़े रहने का दर्द अब आम हो गया</strong><br />शहर के कुन्हाड़ी निवासी 70 वर्षीय रामभरण शर्मा  ने बताया कि सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क इलाज और दवा लेना बहुत मुश्किल काम है। एक तो डॉक्टर को दिखाने में घंटो लग जाते उस पर दवाए पूरी नहीं मिलती सीनियर सिटीजन का भी लोग लिहाज नहीं करते है।  मेडिसीन विभाग में दिखाया वहां से दवा लेने के लिए काउंटर पर पहुंची तो एक घंटा लाइन में खड़ी रही उसके बाद मेरा नंबर आया छह दवा में तीन दवा ही मिली तीन दवा नहीं मिली। दवा काउंटर वाले ने बताया कि बाकी दवा की एनओसी दे दी। एमबीएस में नि:शुल्क दवा लेना आसान काम नहीं है। प्रोस्टेट की दवा नहीं मिली। टेमसूलिन दवा नहीं मिली। </p>
<p>अस्पताल में सभी दवाओं की सप्लाई नियमित की जा रही है। कुछ दवाओं की आगे से सप्लाई आने देरी होने पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से लोकल स्तर पर ही एनओसी के माध्यम से कांउटर 124 पर दवाओं उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी काउंटर पर डिमांड के अनुसार सप्लाई की जा रही है। <br /><strong>- सुशील सोनी, प्रभारी औषधी भंडार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 May 2025 17:53:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिना डॉक्टरों के चल रही खेड़ारसूलपुर की आदर्श पीएचसी, डॉक्टर के अभाव में फार्मासिस्ट दे रहे दवाइयां</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा कर्मियों के आधे से ज्यादा पद खाली, मरीजों को हो रही परेशानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/khedarsoolpur-s-aadarsh-phc-is-running-without-doctors/article-106863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/2457rtrer-(1).png" alt=""></a><br /><p>खेड़ारसूलपुर। राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने को लेकर सरकार चाहे जितने दावे करे, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज आज भी लोगों के लिए सपना बना हुआ है। सरकार की उदासीनता के चलते अस्पतालों की स्थितियां बद से बदतर हो रही हैं। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में ना तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और ना ही अन्य स्टाफ। ऐसे में मरीजों को कई बार बिना उपचार के ही वापस बैरंग लौटना पड़ता है। इतना ही नहीं डॉक्टर के अभाव में यहां कार्यरत फार्मासिस्ट ही बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाइयां दे रहा है। ग्रामीणों को चिंता है कि किसी दिन यह लापरवाही कहीं भारी नहीं पड़ जाए।  ऐसा ही एक अस्पताल खेड़ारसूलपुर का आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जो बिना डॉक्टर के सिर्फ भगवान भरोसे चल रहा है। खेड़ारसूलपुर पीएचसी डॉक्टर का अन्यत्र स्थानांतरण हो गया है। उसकी जगह अभी तक खाली पड़ी हुई है। जिसके चलते ग्रामीणों को इलाज में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण प्रवीण नामा व अनूप मेहरा ने बताया कि खेड़ारसूलपुर हॉस्पिटल में न तो कोई डॉक्टर है, ना ही पूरा स्टाफ है। कुल स्टाफ में से 5 चिकित्सा कर्मी ही अपनी सेवाएं दे रहे है। पीएचसी में डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आदर्श पीएचसी में फैली अव्यवस्था चिंता की बात है।</p>
<p><strong>इलाज के लिए जाना पड़ रहा कोटा </strong><br />पीएचसी में खेड़ारसूलपुर व आरामपुरा पंचायत की करीब 20 हजार की आबादी जुड़ी हुई है। इसके साथ ही आपपास के गांवों के सैंकड़ों ग्रामीण हॉस्पिटल में दिखाने आते हैं। डॉक्टर के अभाव में मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ता है। हॉस्पिटल में करीब 100 से अधिक प्रतिदिन की ओपीडी रहती है। डॉक्टर व अन्य चिकित्सा स्टॉफ नहीं होने के कारण बुजुर्ग पुरुष व महिलाओं तथा गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए कोटा जाना पड़ रहा है। गांव में इन दिनों खांसी, जुकाम, बुखार आदि मौसमी बीमारियां फैली हुई हैं। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार चिकित्सा विभाग के उच्चाधिकारियों व प्रशासन से शिकायत की। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जिला कलक्टर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p><strong>पीएचसी में रिक्त हैं इनके पद </strong><br />खेड़ारसूलपुर पीएचसी में पीएचसी प्रभारी डॉक्टर,1 फस्ट ग्रेड चिकित्सा कर्मी, सैकंड ग्रेड चिकित्साकर्मी, लैब टेक्नीशियन व एलएचवी स्टॉफ के पद रिक्त हैं। जिसके चलते ग्रामीणों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। हॉस्पिटल में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>दवा काउंटर पर फार्मासिस्ट दे रहे दवा </strong><br />पीएचसी खेड़ारसूलपुर में डॉक्टर व चिकित्सा कर्मियों के पद खाली होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी हॉस्पिटलों का रुख करना पड़ रहा है। जिससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हॉस्पिटल में स्टॉफ के नाम पर 5 कर्मचारी कार्यरत हंै। वही मरीजों को दवा दे रहे हैं। फार्मासिस्ट व चिकित्सा कर्मी बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाइयां दे रहे हैं। जबकि नियमानुसार डॉक्टर की लिखी पर्ची से ही मरीजों को दवाइयां दी जा सकती हैं। चिकित्सा विभाग की लापरवाही किसी दिन मरीजों पर भारी पड़ सकती है।</p>
<p> मरीजों को हो रही परेशानियों से स्थानीय विधायक व चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा। जल्द ही हॉस्पिटलों में चिकित्सा कर्मी व डॉक्टर लगा दिए जाएंगे।<br /><strong>-मुकेश वर्मा, जिला परिषद सदस्य</strong><br /> <br />लाडपुरा ब्लॉक में चारों पीएचसी पर वर्तमान में डॉक्टर के पद खाली हैं। खेड़ारसूलपुर पीएचसी पर डॉक्टर व अन्य चिकित्सा कर्मी के पद रिक्त चल रहे हंै। रिक्त पदों को भरने के लिए जयपुर उच्च अधिकारियों व चिकित्सा विभाग को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। जहां से आदेश आने पर ही खेड़ारसूलपुर पीएचसी में डॉक्टर व अन्य चिकित्सा स्टॉफ लगाया जाएगा। इसके साथ ही बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाई दी जा रही है तो ये गलत है। <br /><strong>-प्रभाकर व्यास, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, लाडपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:52:56 +0530</pubDate>
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                <title>अब बीमार पशुओं के उपचार में भी नकली दवाइयां</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा से 2 हजार वायल होंगे रिटर्न, कम्पनी का भुगतान रोका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oh-god---now-fake-medicines-are-also-being-used-in-the-treatment-of-sick-animals/article-105747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)84.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश में एलोपैथिक दवाओं के बाद अब पशुओं के उपचार में उपयोग की जा रही कई दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इसकी बानगी है कि हाल में औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से की गई जांच में कई सैंपल अमानक पाए गए हैं। चिंताजनक बात है कि पशुओं को स्क्रब टाइफस जैसी बीमारी से बचाने के लिए काम में ली जाने वाली साइपर मेथ्रिन, डेल्टा मेथ्रेन जैसे दवाओं के 11 सैंपल जांच में अमानक मिले हैं। चिकित्सकों के अनुसार इससे पशुओं के साथ मानव जीवन पर असर पड़ रहा है। यही कारण है कि इस बार जिले सहित प्रदेश में स्क्रब टाइफस के मरीज पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं। इस खुलासे के बाद पशुपालन विभाग और दवा निमार्ताओं में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन दवाओं की सप्लाई और बिक्री पर रोक लगा दी है। वहीं संबंधित बैच की दवाओं की आपूर्ति वापस मंगवाने के लिए कंपनी को निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>स्क्रब टाइफस बीमारी में आती है काम</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार पशुओं को स्क्रब टाइफस जैसी बीमारी से बचाने के लिए इन दवाइयों की आपूर्ति कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में की गई थी। कई जिलों में तो इनका उपयोग भी कर लिया गया था। कोटा जिले में साइपर मेथ्रिन और डेल्टा मेथ्रिन की करीब दो हजार वॉयल मौजूद थे, जिनका उपयोग नहीं किया गया था। ऐसे में पशुपालन निदेशालय के निर्देश पर इन दवाओं का उपयोग नहीं किया गया। वहीं इन दवाइयों को वापस कम्पनी को भेजा जाएगा। वहीं विभाग ने इन दवाइयों का भुगतान भी रोक दिया है। इसके अलावा अमानक दवा बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में कंपनियां दोषी पाई जाती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p><strong>दवाओं में सक्रिय तत्वों की कम मिली मात्रा</strong><br />जानकारी के अनुसार गत दिनों औषधि नियंत्रण विभाग ने विभिन्न जिलों से पशुपालन विभाग में उपयोग हो रही दवाओं के नमूने लिए थे। इनकी प्रयोगशाला जांच में डेल्टामेथ्रिन और साइपर मैथ्रिन सहित पेंटप्राजोल और मल्टी विटामिन की दवाओं में सक्रिय तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से कम थी। एक्सपर्ट के अनुसार गुणवत्ता विहीन दवाओं के उपयोग से पशुओं में संक्रमण देरी से ठीक होगा। वहीं इससे बीमार पडऩे की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा, इन दवाओं के सेवन से पशुओं से मिलने वाले दूध और मांस पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जांच में दवाएं अमानक मिलने के बाद पशुपालन विभाग में हड़कम्प मच गया और विभाग के आला अधिकारियों ने इसे गम्भीरता से लेते हुए दवाओं का उपयोग रोकने के निर्देश जारी किए। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />जिले में कुल पशु        -6.40 लाख<br />जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां    -180 <br />प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय  -16 <br />पशु चिकित्सालय        - 36 <br />पशु चिकित्सा उप केंद्र    - 124 </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बीमार पशुओं के उपचार में काम आने वाली दवाइयों के अमानक मिलने से पशुपालकों में चिंता व्याप्त हो गई है। इन दवाइयों के उपयोग से पशुओं के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। विभाग को अन्य दवाइयों की भी जांच करानी चाहिए ताकि पशुओं को खतरे बचाया जा सके।<br /><strong>- मनीष धाबाई, पशुपालक</strong></p>
<p>कोटा पशुपालन विभाग में साइपर मेथ्रिन और डेल्टा मेथ्रिन की 2 हजार वॉयल उपलब्ध हैं, जो अमानक हैं। इन दवाइयों को वापस कंपनी को भिजवाया जाएगा। जांच में दवाइयां अमानक मिलने के बाद विभाग ने कंपनी का भुगतान रोक दिया है। <br /><strong>- डॉ. मदन परिहार, एसवीओ, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 16:22:51 +0530</pubDate>
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                <title>निजी मेडिकल स्टोर की हड़ताल से आरजीएचएस में नहीं मिल रहीं दवाएं</title>
                                    <description><![CDATA[आरजीएचएस के तहत दवाईयां नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medicines-are-not-available-in-rghs-due-to-strike-of-private-medical-stores/article-87741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस 1 -</strong> परिवहन विभाग के कर्मचारी कृष्ण कुमार सक्सेना का घुटनों का इलाज चल रहा है। ऐसे में उन्हें हर महीने डॉक्टर को दिखाना होता है। सक्सेना पिछले हफ्ते भारत विकास परिषद अस्पताल में घुटनों को दिखाने गए तो डॉक्टर ने उन्हें तीन तरह की दवाईयां लिखी जिनमें से एक तो अस्पताल के ड्रग काउंटर पर उपलब्ध थी लेकिन दो दवाईयां उन्हें बाहर से लेनी पड़ी। सक्सेना ने बताया कि मेडिकल स्टोर वाले से आरजीएचएस के तहत भुगतान के लिए कहा तो स्टोर संचालक ने मना कर दिया। ऐसे में उन्हें नकद पैसे देकर दवाईयां लेनी पड़ी। सक्सेना ने कहा कि आरजीएचएस में हर महीने फीस जमा होती है फिर भी पूरी दवाईयां नहीं मिल रही हैं।</p>
<p><strong>केस 2 -</strong> शिक्षा विभाग के कर्मचारी श्रीनाथपुरम रोहित मीणा की मां का इलाज भी आरजीएचएस के तहत चल रहा है। रोहित ने अपनी मां को पिछले बुधवार को मेडिकल कॉलेज में दिखाया जिसके बाद दवाई लेने गए तो एक दवा बाहर से लेने के लिए कहा। लेकिन बाहर मेडिकल स्टोर संचालक ने भुगतान नहीं होने पर आरजीएचएस के तहत दवाई देने से मना कर दिया। ऐसे में आरजीएचएस कार्ड होने के बाद भी पैसे देकर दवाई लेनी पड़ी।</p>
<p>केस 3 - इसी तरह दादाबाड़ी निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी राजेन्द्र कुमार ने बताया कि उन्हें डायबिटीज व बीपी की शिकायत है। फिजिशियन को दिखाया तो उन्होंने एक माह की दवा लिखी, लेकिन विज्ञान नगर कैमिस्ट के पास पहुंचे तो दवा देने से मना कर दिया। वे बोले हड़ताल चल रही है। जिसके बाद नकद में दवाइयां लेनी पड़ी।</p>
<p>राजस्थान सरकार की ओर से आरजीएचएस का भुगतान नहीं होने के बाद निजी मेडिकल स्टोर चालकों ने दवाईयां देना बंद कर दिया है। आरजीएचएस के तहत दवाईयां नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोई दवा अस्पताल और उपभोक्ता भंडार पर नहीं मिलने पर उसे बाहर मेडिकल स्टोर से ले लिया जाता था लेकिन मेडिकल स्टोर संचालकों की ओर से बहिष्कार करने के कारण लोगों को नकद पैसे देकर दवाईयां लेनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>पिछले साल से हो रही समस्या</strong><br />आरजीएचएस के तहत सरकार की ओर सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इलाज मुहैय्या कराया जाता है। जिसमें कर्मचारियों की ओर से हर महीने फीस जमा कराई जाती है। लेकिन पिछले साल से इस स्कीम के तहत ईलाज कराने में लोगों को काफी समस्याएं आ रही हैं। क्योंकि सरकार की ओर से कई फर्मों और मेडिकल स्टोर का बकाया भुगतान नहीं किया गया है। जिसके चलते उन मेडिकल स्टोर और फर्मों ने आरजीएचएस के तहत ईलाज और दवाईयां मुहैय्या कराना बंद कर दिया है।</p>
<p>आरजीएचएस के तहत भुगतान नहीं होन से संबंधित शिकायत प्राप्त है ये सरकार के स्तर का मामला है। इसके लिए उच्च स्तर के अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है। <br /><strong>- संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य व नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>आरजीएचएस के तहत कॉ-ओपरेटिव स्टोर और उपभोक्ता भंडार पर दवाईयां मिल रही हैं। वहां कोई समस्या नहीं आ रही है, यहां दवाई नहीं मिलने पर ही बाहर लेनी होती है जहां भुगतान के चलते संचालक मना कर रहे हैं।<br /><strong>- नवनीत महर्षि, अध्यक्ष, राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी संगठन</strong></p>
<p>आरजीएचएस के तहत उपभोक्ता भंडार तथा कॉ-ओपरेटिव स्टोर में निजी मेडिकल स्टोर की तुलना में भुगतान का तरीका अलग है। उपभोक्ता भंडार तथा कॉ-ओपरेटिव स्टोर में पैसा सीधा लाभार्थी के अकाउंट से कटता है वहीं निजी क्षेत्र में हर माह का बिल सरकार को भेजना होता है। आरजीएचएस पहले राज्य बीमा भविष्य निधि विभाग के पास था लेकिन अब यह स्वास्थ्य विभाग के अधीन हो गया है।<br /><strong>- अतिका आजाद, अतिरिक्त निदेशक, राज्य बीमा भविष्य निधि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 17:03:49 +0530</pubDate>
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                <title>दवाओं पर लागू होगी जीरो एक्सपायरी पॉलिसी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में दवा की जीरो एक्सपायरी पॉलिसी के तहत काम होगा। जिसमें जो दवाइयां एक्सपायर होने वाली है, उनको पहले मरीज को दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/zero-expiry-policy-will-be-applicable-on-medicines/article-78249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(4)25.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द ही दवाओं पर जीरो एक्सपायरी पॉलिसी को लागू किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार चिकित्सा विभाग में राजस्थान मेडिकल एवं सर्विस कॉरपोरेशन की ओर से प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों के लिए निशुल्क दवा खरीद की जाती है और इनकी आपूर्ति अस्पतालों में होती है। इनमें से कई दवाइयां एक्सपायर हो जाने के कारण सरकार को बड़ा नुकसान होता है । ऐसे में अब राजस्थान में दवा की जीरो एक्सपायरी पॉलिसी के तहत काम होगा। जिसमें जो दवाइयां एक्सपायर होने वाली है, उनको पहले मरीज को दिया जाएगा। राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक नेहा गिरी जल्द ही इसके आदेश जारी कर सभी अस्पतालों को इसके लिए पाबंद करेगी। यह तय किया जा रहा है कि पॉलिसी के आदेश जारी होने के बाद अगर अस्पतालों में दवाइयां एक्सपायरी हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:20:25 +0530</pubDate>
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