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                <title>Reforms - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए हाई लेवल कमेटी का गठन कर बनाएं एसओपी: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने परीक्षाओं में गलत प्रश्नों और त्रुटिपूर्ण उत्तर कुंजी को गंभीरता से लिया है। जस्टिस आनंद शर्मा ने मुख्य सचिव को वरिष्ठ आईएएस अफसरों की कमेटी बनाने और लापरवाह विशेषज्ञों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि बेरोजगारी के इस दौर में अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-court-should-form-sop-by-constituting-a-high-level/article-154094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षाओं में त्रुटिपूर्ण प्रश्नों और गलत उत्तर कुंजी को लेकर बार-बार याचिकाएं आने को गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही अदालत ने मुख्य सचिव को कहा है कि वे कार्मिक सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ आईएएस अफसरों की एक हाई लेवल कमेटी का गठन करें। कमेटी इस विषय पर गहन परीक्षण कर भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुचिता सुनिश्चित करने के लिए एसओपी बनाने के साथ ही अन्य सुधारात्मक उपाय भी निर्धारित करे। अदालत ने कहा है कि कमेटी यह भी परीक्षण करेगी कि क्या ऐसे प्रश्न और उत्तर कुंजी तैयार करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की जा सकती है। </p>
<p>जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2022 लेवल द्वितीय को लेकर दायर 45 याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने आदेश में कहा कि वर्तमान में बेरोजगारी ने गंभीर रूप धारण कर लिया है और प्रतिस्पर्धा असाधारण स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में एक-एक प्रश्न भी अत्यधिक महत्व रखता है और सैकडों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए प्रश्न पत्र तैयार करने और उत्तर कुंजी बनाने में अत्यधिक सावधानी, निष्पक्षता व सतर्कता जरूरी है। अदालत ने कहा कि भर्ती एजेंसियों को परीक्षा संचालन में लापरवाही करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। </p>
<p>उन पर संवैधानिक दायित्व है कि वे सक्षम विषय विशेषज्ञों के माध्यम से प्रश्न पत्र व उत्तर कुंजी पूर्ण शुचिता से तैयार करें, ताकि किसी भी गलती की संभावना नहीं हो। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने बताया कि साल 2022 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल 2 के परिणाम के बाद नियुक्तियां हुई। वहीं बाद में कोर्ट के आदेश से संशोधित परिणाम जारी हुआ।  इसके याचिकाकर्ताओं के अंक पूर्व में नियुक्त अभ्यर्थियों से अधिक हो गए, लेकिन नई कट आॅफ में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में उनसे कम अंक वालों को मिली नियुक्ति के चलते उन्हें भी नियुक्ति दी जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 09:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केंद्र सरकार का प्रौद्योगिकी आधारित श्रम सुधारों को लागू करने पर जोर, सुचारू कार्यान्वयन के लिए राज्य और उद्योग जगत की भूमिका : श्रम सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने नए श्रम संहिताओं के तहत 29 कानूनों को 4 संहिताओं में समेकित करने की घोषणा की है। इस डिजिटल सुधार से 1,228 धाराओं को घटाकर मात्र 480 कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना, अनुपालन बोझ कम करना और श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-governments-emphasis-on-implementing-technology-based-labor-reforms-role-of/article-153704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vandana.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी ने बुधवार को कहा कि सरकार अनुपालन के बोझ को कम करने, श्रमिक कल्याण में सुधार लाने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उद्देश्य से नए श्रम संहिताओं के सुचारू और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए सरकार राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रही है। वह "नए श्रम संहिता: कार्यान्वयन, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए अनुपालन और उद्योग की तैयारी" के विषय में राजधानी में उद्योग मंडल संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं ।</p>
<p>संगोष्ठी में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, मानव संसाधन पेशेवरों, कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए गुरनानी ने कहा कि केंद्र ने श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में सामंजस्य स्थापित करने के लिए राज्यों के साथ व्यापक परामर्श किया है, साथ ही नियमों और अनुपालन ढाँचों को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है है। उन्होंने कहा, "श्रम संहिताओं की सफलता सरकार, उद्योग और श्रमिकों के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करेगी।"</p>
<p>श्रम सचिव ने बताया कि इन सुधारों के तहत 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है, 1,228 धाराओं को घटाकर 480 धाराएं कर दिया गया है और 1,436 नियमों को सुव्यवस्थित करके 357 नियम बना दिए गए हैं, जिससे भारत की श्रम अनुपालन प्रणाली में काफी सरलता आई है। सरकार के डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्रम सचिव ने कहा कि श्रम संहिता के तहत भविष्य में होने वाले निरीक्षण जोखिम-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और हस्तक्षेपकारी प्रवर्तन के बजाय सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित होंगे। उन्होंने कहा, "उद्देश्य अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना है।"</p>
<p>केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश कृष्णमूर्ति ने कार्यक्रम में कहा, "ईपीएफओ नए श्रम संहिता के अनुरूप डिजिटल सेवा वितरण का तेजी से विस्तार कर रहा है।" उन्होंने बताया कि ईपीएफओ नियोक्ताओं और श्रमिकों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के लिए एपीआई-आधारित रिटर्न फाइलिंग सिस्टम, स्वचालित खाता हस्तांतरण और सरलीकृत निकासी तंत्र शुरू कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:13:30 +0530</pubDate>
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