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                <title>reason - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सड़कों पर टूटे स्पीड ब्रेकर व बड़े-बड़े गड्ढ़े बन रहे हादसों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के मुख्य मार्ग रावतभाटा रोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े और टूटे स्पीड ब्रेकर हादसों का कारण बन रहे हैं। गड्ढ़ों के कारण पूरी सड़क के हाल बेहाल हो रहे हैं। बरसात शुरू होने के साथ ही डामर की सड़कों पर गड्ढ़े होने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/broken-speed-breakers-and-big-potholes-are-the-reason-for-accidents-on-the-roads/article-13591"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/sadko-par-tute-speed-breakers.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मुख्य मार्ग रावतभाटा रोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े और टूटे स्पीड ब्रेकर हादसों का कारण बन रहे हैं। गड्ढ़ों के कारण पूरी सड़क के हाल बेहाल हो रहे हैं। बरसात शुरू होने के साथ ही डामर की सड़कों पर गड्ढ़े होने लगे हैं। नगर विकास न्यास द्वारा मुख्य मार्ग की सड़कों पर किए गए पेचवर्क भी उखड़ने लगे हैं। वहीं सबसे बुरे हाल रावतभाटा रोड के हो रहे हैं। सीएडी चौराहे से ही सड़क पर गड्ढ़ों से वाहन चालकों को दो चार होना पड़ रहा है जैसे-जैसे वाहन चालक आगे बढ़ते जाते हैं उन्हें हिचकोले खाते हुए ही जाना पड़ रहा है। <br /><br />चम्बल गार्डन के सामने से लेकर शिवपुरा और इंजीनियरिंग कॉलेज से संस्कृत कॉलेज के सामने और कोटा विवि के आगे व पुलिया के नीचे से नयागांव तक की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हैं कि उन पर चलना मतलब दुर्घटनाओं का शिकार होना है। वैसे तो डामर की यह सड़क देखने में नई बनी लगती है। कुछ दूर चलने के बाद जैसे ही बड़े-बड़े गड्ढ़े आते हैं तो वाहन चालकों को उसका अंदाजा भी नहीं हो पाता। सही सड़क पर अचानक आने वाले गड्ढ़ों के कारण ब्रेक लगाने पर उनसे हादसे हो रहे हैं। अकेलगढ़ के सामने और डाइट के सामने सड़क के दोनों तरफ गड्ढ़ों के यही हाल हैं। इतना ही नहीं संस्कृत कॉलेज के सामने तो स्पीड ब्रेकर ही टूटा हुआ है। <br /><br />सीएडी से नयागांव की तरफ जाते समय कॉलेज के सामने का यह स्पीड ब्रेकर दूर से तो सही नजर आता है। लेकिन उसके दूसरी तरफ का टूटा हिस्सा नजर नहीं आता। जिससे अचानक वाहन चालक उस पर या तो उछलकर गिर रहे हैं या फिर अचानक  ब्रेक लगाने से भी हादसों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि  रावतभाटा रोड मुख्य मार्ग व हाइवे है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में छोटे-बड़े सभी तरह के वाहन निकल रहे हैं। सड़क पर हुए गड्ढ़ों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क बनाने के बाद न्यास अधिकारियों द्वारा उसकी मरम्मत नहीं करवाने से ये गड्ढ़े हुह हैं। अभी यदि इन्हें ठीक नहीं किया गया तो बरसात में अधिक गड्ढ़े हो जाएंगे। फिर न्यास अधिकारी बरसात में डामर की सड़क पर न तो पेचवर्क करेंगे और न ही ठीक। जिससे पूरी  बरसात में लोगों को गड्ढ़ों से ही होकर गुजरना पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 16:18:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूजीसी ने छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान ना जाने की दी सलाह... जानें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान न जाएं छात्र: यूजीसी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/--ugc-advises-students-not-to-go-to-pakistan-for-higher-education----know-the-reason/article-8455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ugc_new.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान न जाने की सलाह दी है। इन दोनों संगठनों ने एक वक्तव्य जारी करके भारतीय नागरिकों और  प्रवासी भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षण के लिए पाकिस्तान न जाने की सलाह दी है।वक्तव्य में कहा गया है कि पाकिस्तान से किसी भी तरह का उच्च शिक्षण हासिल करने वाले छात्रों को वहां की डिग्री के आधार पर भारत में कोई रोजगार या अन्य उच्चतर अध्ययन संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।<br /><br />संगठनों ने यह स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान से विस्थापित होकर यहां लौटे लोग और उनके बच्चे जिन्हें भारत की नागरिकता मिल गई है वे पाकिस्तान में हासिल की गई शिक्षा के आधार पर भारत में रोजगार पाने के योग्य होंगे लेकिन इसके लिए उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा  संबंधित मंजूरी लेनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 16:29:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IPL 2022 हार-जीत के मायने: सैमसन के हार के लिए ओस को बताया कारण, तो डु प्लेसिस ने फंसे मैच जीतने के लिए कार्तिक जैसे खिलाड़ियों पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[फंसे हुए मैच जीतने के लिए कार्तिक जैसे खिलाड़यिों की जरूरत : डु प्लेसिस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports--news--ipl-2022-meaning-of-defeat-win--dew-was-the-reason-for-samson-s-defeat--then-du-plessis-insisted-on-players-like-karthik-to-win-the-trapped-match/article-7494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sanju-samson-.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। IPL 2022 का घमासान जारी है। यहां हर मैच में हार-जीत के मायने बदल रहे है। राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन ने मंगलवार को यहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 2022 आईपीएल के 13वें मैच में हार के बाद कहा कि ओस ने मैच में कुछ हद तक भूमिका निभाई। ओस की वजह से गेंदबाजी करना मुश्किल रहा। सैमसन ने मैच के बाद कहा कि मैं कोई ऐसा एक क्षण नहीं बता सकता, जहां से हमने मैच पर अपनी पकड़ खो दी हो। हमने टॉस हार कर भी अच्छी बल्लेबाजी की और एक अच्छा स्कोर खड़ा किया, लेकिन ओस आने के बाद हमसे गेंद के साथ-साथ मैच भी फिसलने लगा। यह मेरी टीम का एक अच्छा प्रयास था। इस मैच से हमें काफी कुछ सकारात्मक चीजें मिली हैं और काफी कुछ सीखने को भी मिला है। <br /><br /><strong>फंसे हुए मैच जीतने के लिए कार्तिक जैसे खिलाड़यिों की जरूरत : डु प्लेसिस</strong><br />वहीं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने मंगलवार को  राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 2022 आईपीएल के 13वें मैच में रोमांचक जीत के बाद कहा फंसे हुए मैैच जीतने के लिए आपको दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़यिों की जरूरत होती है। <br /><br />उल्लेखनीय है कि विकेटकीपर दिनेश कार्तिक की 23 गेंदों पर 44 रन की नाबाद पारी की बदौलत बेंगलुरु ने हारा हुआ मैच पारी की पांच गेंदें शेष रहते हुए चार विकेट से जीत लिया था।<br /><br />डु प्लेसिस ने मैच के बाद कहा कि यह कमाल का मैच था। ऐसे मैच को दूसरी टीम के जबड़े से खींचने के लिए आपको दिनेश कार्तिक जैसे खिलाड़यिों की जरूरत होती है, जो ऐसे पलों में सकारात्मक रवैया दिखा सकें। वह बहुत शांत थे, जिससे सामने वाले खिलाड़यिों पर भी दबाव नहीं बना। हमने गेंदबाजी भी अच्छी की थी, लेकिन जॉस ने 19वें ओवर में बेहतरीन बल्लेबाजी की और अपनी टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। हमें वैसी शुरुआत नहीं मिली, जैसी मिलनी चाहिए थी, लेकिन हमें विश्वास था कि हम मैच को जीत सकते हैं। शाहबाज के पास अपना गेम प्लान था और वह भविष्य में गेंदबाजी में भी अपना योगदान दे सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 16:32:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में कोई भी सरकार कभी 5 साल पूरे क्यों नहीं कर पाई, समझिए कारण</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान की राजनीतिक हालत ये है कि वहां पर आज तक कोई भी सरकार अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे नहीं कर पाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/why-no-government-could-ever-complete-5-years-in-pakistan--understand-the-reason/article-7397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/pak1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की आजादी एक साथ हुई। दोनों मुल्कों का पहले बंटवारा हुआ और फिर एक देश धर्म के नाम पर पाकिस्तान बन गया और एक धर्मनिरपेक्ष देश भारत बन गया। पाकिस्तान की राजनीतिक हालत ये है कि वहां पर आज तक कोई भी सरकार अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे नहीं कर पाई। पाकिस्तान की सरकार में हमेशा से ही सेना का दखल रहा है। यहां पर भले ही अपनी सरकार का चुनाव आवाम करती हो मगर सत्ता में सेना का दखल हमेशा से रहा है।</p>
<p><br /><strong>आजादी के बाद क्या हाल रहा?</strong> <br />पाकिस्तान और भारत एक साथ आजाद हुए थे। पाकिस्तान में पहले 10 साल में 7 प्रधानमंत्री बन गए। इसमें सबसे ज्यादा समय तक पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की सरकार चली जिनके चौथे साल 1951 में हत्या कर दी गई।</p>
<p><br /><strong>सेना की क्या भूमिका रही है</strong><br />जिस तरह पहले 10 साल के आखिरी 6 साल में छह प्रधानमंत्री बने उससे साफ  था कि जनता में नाराजगी बढ़ रही थी और लोगों का लोकतंत्र से भरोसा ही उठ रहा था। इसी का फायदा सेना प्रमुख अयूब खान ने उठाया। उन्होंने 1959 के आम चुनाव से पहले तत्कालीन राष्टÑपति इस्कंदर मिर्जा के साथ मिलकर सैनिक शासन लागू कर दिया। 1959 से 1969 तक पाकिस्तान में सैन्य शासन ही रहा।<br /><br /><strong>भुट्टो का दौर और जिया उल हक का शासन</strong><br />अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते अयूब खान को सत्ता से हटना पड़ा लेकिन बीच में 13 दिनों को छोड़कर सेना का ही शासन रहा। इसके बाद 1973 से 77 तक पाकिस्तान में जुल्फि कार अली भुट्टो का दौर 4 साल तक चला। जिन्हें 1977 में सेना प्रमुख मोहम्मद जिया उल हक ने हटाकर सेना का शासन लागू कर दिया। बाद में भुट्टो को फांसी दे दी गई इसके बाद जिया उल हक का सैनिक शासन 1985 तक चला।</p>
<p><br /><strong>बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ का दौर कैसा रहा</strong><br />पाकिस्तान के लोकतंत्र के इतिहास में साल 1988 के चुनाव बेहद अहम रहा इन चुनाव में वोटों की बेटी बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्री बनीं। वह पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बनी। 2 साल बाद 1990 में पाकिस्तान में फिर आम चुनाव हुए इस चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) को सबसे ज्यादा सीटें मिली और नवाज शरीफ  प्रधानमंत्री चुने गए। इसके बाद 1999 तक नवाज और बेनजीर भुट्टो का दौरा 1999 में एक बार फिर मुशर्रफ  ने शासन लागू कर दिया। यूसुफ  रजा गिलानी और नवाज शरीफ  का 2017 में नवाज शरीफ  की नियुक्ति को कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहरा दिया गया और 2018 में इमरान खान प्रधानमंत्री बने।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 14:15:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाने के पीछे क्या है कारण</title>
                                    <description><![CDATA[ तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/what-is-the-reason-behind-india-withdrawing-from-security-council-resolution-condemning-russian-attack-on-ukraine/article-5080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/news.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के लिए रूस की निंदा करने के लिए  देर रात एक प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने खुद को दूर रखा और संबद्ध पक्षों का हिंसा को तुरंत रोक कर कूटनीतिक उपायों पर लौटने और देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन को लेकर शुक्रवार देर रात अमेरिका एवं अल्बानिया द्वारा पेश प्रस्ताव पर मतदान 11 सदस्यों ने पक्ष में मत दिया और तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव पर रूस ने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया और इस प्रकार से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। पक्ष में मतदान करने वालों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, अल्बानिया, ब्राजील, गैबोन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको एवं नॉर्वे हैं।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद भारत के निर्णय को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया जिसमें संबद्ध पक्षों का हिंसा तुरंत रोकने, विवाद के समाधान के लिए कूटनीतिक उपायों पर लौटने तथा देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बातचीत में भी इन्हीं बिन्दुओं पर जोर दिया था।<br /><br />भारत ने कहा कि सभी सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इसी से आगे का रचनात्मक मार्ग खुलता है। भारत ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि कूटनीति का मार्ग त्याग दिया गया और ङ्क्षहसा का रास्ता अपनाया गया। भारत ने कहा कि वह यूक्रेन के हाल के घटनाक्रम से बहुत व्यथित है। उसका मानना है कि इंसानों की जान की कीमत पर कोई समाधान पर नहीं पहुंचा जा सकता है। मतभेदों एवं विवादों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद ही है।<br /><br />भारत ने इस मसले पर एक सुसंगत, दृढ़ एवं संतुलित रुख अख्तियार किया है। भारत इससे जुड़े सभी पक्षों के संपर्क में है और सभी से लगातार अनुरोध कर रहा है कि वे बातचीत की मेज पर आएं। सूत्रों ने बताया कि भारत ने मतदान में भाग नहीं लेकर संबद्ध पक्षों से संपर्क करने और संवाद एवं कूटनीति के लिए बीच का रास्ता निकालने का विकल्प बरकरार रखा है।<br /><br />इससे पहले प्रस्ताव के एक मसौदे में संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अध्याय 7 के अंतर्गत समाधान की बात कही गयी थी जिसमें सुरक्षा परिषद को बलप्रयोग का अधिकार मिलता लेकिन अंतिम मसौदे में इस बात का हटा दिया गया।    इस बीच एयर इंडिया भारतीयों को निकालने के लिए शनिवार सुबह तीन उड़ानें भरी गयीं हैं। आज तड़के मुंबई से एक और सुबह दिल्ली से दो बोइंग 787 विमान रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए रवाना हो चुके हैं जो आज शाम से देर रात तक लौटेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 17:47:13 +0530</pubDate>
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                <title>रूस और यूके्रन के विवाद की क्या है असली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर रूस और यूक्रेन में युद्ध क्यों हो रहा है? यह विवाद शुरू कहां से हुआ और क्यों अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी नाकाम रहे।  विवाद यह है कि यूक्रेन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो का सदस्य देश बनना चाहता है और रूस इसका विरोध कर रहा है। नाटो अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन है, इसलिए रूस नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश नाटो का मित्र बने। <br /> <br /> <strong>यूक्रेन का इतिहास </strong><br /> यूक्रेन के नाटो देश में शामिल होने की वजह 100 साल पुरानी है, जब अलग देश का अस्तित्व भी नहीं था। 1917 से पहले रूस और यूक्रेन रूसी साम्राज्य का हिस्सा थे। 1917 में रूसी क्रांति के बाद, यह साम्राज्य बिखर गया और यूक्रेन ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. हालांकि यूक्रेन मुश्किल से तीन साल तक स्वतंत्र रहा और 1920 में यह सोवियत संघ में शामिल हो गया। यूक्रेन के लोग हमेशा से खुद को स्वतंत्र देश मानते रहे। 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो यूक्रेन सहित 15 नए देशों का गठन हुआ। सही मायनों में यूक्रेन को साल 1991 में आजादी मिली। हालांकि, यूक्रेन शुरू से ही समझता है कि वह रूस से कभी भी अपने दम पर मुकाबला नहीं कर सकता और इसलिए वह एक ऐसे सैन्य संगठन में शामिल होना चाहता है जो उसकी आजादी को महफूज रख सके। नाटो से बेहतर संगठन कोई और नहीं है जो यूक्रेन की रक्षा कर सके।<br /> <br /> रूस के सामने चुनौती यह है कि उसके कुछ पड़ोसी देश पहले ही नाटो में शामिल हो चुके हैं। इनमें एस्टोनिया और लातविया जैसे देश हैं, जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे। अब अगर यूक्रेन भी नाटो का हिस्सा बन गया तो रूस हर तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी हो जाएंगे। अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस भविष्य में उस पर हमला करता है तो समझौते के तहत इस समूह के सभी 30 देश इसे अपने खिलाफ हमला मानेंगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता भी करेंगे।</p>
<p><br /> रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने एक बार कहा था कि यूक्रेन को खोना रूस के लिए एक शरीर से अपना सिर काट देने जैसा होगा।  यही वजह है कि रूस नाटो में यूक्रेन के प्रवेश का विरोध कर रहा है। यूक्रेन रूस की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। जब 1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस पर हमला किया गया तो यूक्रेन एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जहां से रूस ने अपनी सीमा की रक्षा की थी। अब अगर यूक्रेन नाटो देशों के साथ चला गया तो रूस की राजधानी मास्को, पश्चिम से सिर्फ 640 किलोमीटर दूर होगी। <br /> <br /> <strong>विवाद का असली विलेन कौन?</strong><br /> रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है। अमेरिका ने अपने 3000 सैनिकों को यूक्रेन की मदद के लिए भेजा है और उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि वे यूक्रेन की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सच्चाई यह है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना बुलानी पड़ी थी। ईरान में अमेरिका कुछ हासिल नहीं कर पाया और प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया  मिसाइल परीक्षण भी कर रहा है। इन घटनाओं से अमेरिका की सुपर पॉवर इमेज को नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि बाइडेन यूक्रेन-रूस विवाद के साथ इसकी भरपाई करना चाहते हैं।<br /> <br /> अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी यूक्रेन का समर्थन किया है। इन देशों का समर्थन कब तक चलेगा यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि यूरोपीय देश अपनी गैस की एक तिहाई जरूरत के लिए रूस पर निर्भर हैं। अब अगर रूस इस गैस की आपूर्ति बंद कर देता है तो इन देशों में भयानक पॉवर क्राइसिस होगा।<br /> <br /> <strong>किसके साथ खड़ा है भारत?</strong><br /> रूस-यूक्रेन के विवाद में भारत की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है। रूस और अमेरिका दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अभी भी अपने 55 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है जबकि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। जिस देश में यूक्रेन ने सबसे पहले फरवरी 1993 में एशिया में अपना दूतावास खोला वह भारत था। तब से भारत और यूक्रेन के बीच व्यापारिक, रणनीतिक और राजनयिक संबंध मजबूत हुए हैं। यानी भारत इनमें से किसी भी देश को परेशान करने का जोखिम नहीं उठा सकता। रूस ने अब तक भारत-चीन सीमा विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया है।</p>
<p><br />  अगर भारत यूक्रेन का समर्थन करता है तो वह कूटनीतिक रूप से रूस को चीन के पक्ष में ले जाएगा। शायद यही कारण है कि हाल ही में जब अमेरिका सहित 10 देश संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर एक प्रस्ताव लेकर आए भारत ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि इस समय यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें से 18 हजार मेडिकल के छात्र हैं। यूक्रेन और रूस के रिश्ते को समझना बहुत मुश्किल है। यूक्रेन के लोग स्वतंत्र रहना चाहते हैं, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के लोगों की मांग है कि यूक्रेन को रूस के प्रति वफादार रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:24:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title> दो बेटों का गला दबाकर हत्या के बाद खुद फंदे से झूली मां</title>
                                    <description><![CDATA[ एक बार टूटा फंदा, वापस फिर लगाई फांसी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/financial-crisis-and-domestic-dispute-became-the-reason-for-murder-and-suicide--mother-hanged-herself-after-strangling-two-sons-to-death--once-the-noose-was-broken--hanged-again/article-4739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/1_1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सोडाला इलाके में फुटल्या बाग पोस्ट ऑफिस के पीछे किराए के मकान में रहने वाली महिला ने रविवार शाम को दो बेटों की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद महिला खुद फंदे से झुल गई। बेटों के मारने के बाद फंदे से लटकते समय एक बार फंदा टूट गया, लेकिन महिला ने वापस दूसरा फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया।</p>
<p><br />पुलिस की शुरुआती जांच में सुसाइड और हत्या की वजह घरेलू विवाद और आर्थिक तंगी सामने आई है। घटना के समय महिला का पति ऑटो ठीक कराने चार नंबर डिस्पेंसरी गया हुआ था। पुलिस ने एफएसएल टीम की मदद से साक्ष्य जुटाने के बाद पोस्टमार्टम के लिए शव एसएमएस अस्पताल में रखवाया है। मौके पर पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है। एसीपी भोपाल सिंह भाटी ने बताया कि मृतका कन्या देवी (37), उसके बेटे रोहित (12) और पवन (8) फुटल्या बाग में लालचंद शर्मा के मकान में किराए से रहते थे।</p>
<p><br />महिला का पति महावीर प्रसाद साहू मूल रूप से कालीतलाई बूंदी का रहने वाला है। वह यहां ऑटो चलाता है। फुटल्या बाग में करीब पांच महीने से परिवार सहित रह रहा है। इससे पहले महावीर दस साल सुशीलपुरा में किराए के मकान में रहा था। महावीर का ऑटो करीब सात दिन से खराब था। रविवार को उसका व्रत था। इसलिए सुबह ऑटो ठीक कराने लिए चार नंबर डिस्पेंसरी गया था। व्रत होने पर वह शाम को दाल-बाटी बनाने की कहकर गया था।<br /><br /><strong>पानी भरने बाहर नहीं आई महिला, तब चला पता</strong><br />पुलिस के अनुसार महिला दिनभर से बेटों के साथ कमरे में थी। शाम करीब 6:30 पानी आया था। जब मृतका पानी भरने बाहर नहीं आई तो मकान मालिक को शक हुआ। उसने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से बंद था। इसके बाद पति को बुलाया गया। पति के आने के बाद लोहे के सरिए से दरवाजा चौड़ा कर देखा तो महिला फंदे से झुली हुई थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा तब दोनों बेटे पलंग पर मृत अवस्था में पड़े थे। बड़े बेटे राहुल के मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ था और कन्या देवी फंदे से झुल रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 10:38:50 +0530</pubDate>
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                <title>  कोख चीर रहे प्राइवेट अस्पताल : हर चौथी डिलिवरी ‘सिजेरियन’ </title>
                                    <description><![CDATA[एक्सपर्ट बोले : मोटी कमाई के साथ सुरक्षित प्रसव का फोबिया बड़ा कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-hospital-tearing-womb--every-fourth-delivery-caesarean--not-even-one-lakh-on-13-47-lakh-deliveries-in-government--1-08-lakh-on-4-lakh-in-private-only--expert-said--phobia-of-safe-delivery-with-big-earnings-is-a-big-reason/article-4553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/6_news.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में प्रसव के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क के साथ सामान्य प्रसव के आंकड़े सुखद हैं। हर 13-14 प्रसव में से केवल एक प्रसव सिजेरियन हो रहा है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में इसका आंकड़ा डराने वाला है। हर चौथा प्रसव सिजेरियन ही करवाया जा रहा है। हालांकि जांचों में गर्भ में जटिलताएं एक कारण हो सकता है,लेकिन सामान्य के मुकाबले सिजेरियन प्रसव से मोटी कमाई को भी प्रदेश के सरकारी डॉक्टर इसका एक बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br />राजस्थान में सालाना करीब 17.50 लाख गर्भवती महिलाओं का प्रसव हो रहा है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनमें से 77 फीसदी यानी 13 लाख 47 हजार 500 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक इनमें से 7.2 फीसदी मतलब 97,020 हजार की ही जटिलताओं के कारण मजबूरन सिजेरियन कर प्रसव कराया जा रहा है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी के मुकाबले प्रसव का आंकड़ा तीन चौथाई (23 फीसदी) 4,02,500 ही है, लेकिन आॅपरेशन से 26.9 फीसदी यानी एक चौथाई से ज्यादा 1.08 लाख का प्रसव सालाना हो रहाी है। एक्सपर्ट डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों के पैसा कमाने के लिए सिजेरियन प्रसव कराने को अधिक प्रायिकता देने के साथ ही गर्भवती, परिजन और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव के पैदा हुए फोबिया को भी इसका बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br /><br />प्राइवेट में इलाज के साथ पैसा कमाने का प्रोफेशनलिज्म तो होता ही है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन प्रसूता-परिजनों और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव का यहां फोबिया ज्यादा होता है। गर्भवती, परिजन भी डॉक्टरों पर बिना परेशानी प्रसव कराने का दबाव बनाते हैं। -<strong>डॉ.पुष्पा नागर, अधीक्षक, जनाना अस्पताल</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में व्यावसायिकरण ज्यादा सिजेरियन का कारण मान सकते हैं, लेकिन दोषी तो परिजन-गर्भवती खुद हैं। परिजन-प्रसूता चाहती हैं कि प्रसव बिना दर्द के आसानी से हो। परिजन पैसे देकर चिकित्सा सुविधा ले रहे हैं, इसलिए डॉक्टर उनकी इस संतुष्टि को ज्यादा महत्व देता है। -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव ज्यादा क्यों हो रहे हैं। बिना वजह तो नहीं हो रहे, इसकी समीक्षा करेंगे।<br />-<strong>आशुतोष ए.टी पेंडणेकर, शासन सचिव, चिकित्सा विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 12:33:33 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदी को लेकर शाह का बड़ा बयान : कहा, मूल भाषा में शिक्षा दी जाती तो देश पिछड़ता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।''-अमित शाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%9B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-2349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/amit-shah-sambodhan.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आजादी के बाद देश पर पिछड़े होने का धब्बा लगने के पीछे अपनी मूल भाषा में शिक्षा दीक्षा नहीं होने को मुख्य वजह बताते हुये कहा है कि ''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।'' शाह ने शनिवार को यहां राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को स्वराज तो मिल गया अब इसे 'सुराज' में बदलना है, मगर, स्वदेशी और स्वभाषा, पीछे छूट गये हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम पीछे छूटे इन लक्ष्यों को पूरा करें। <br />  </p>
<p> शाह ने देश को आजादी मिलने के बाद भी मातृ भाषा सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने को ऐतिहासिक भूल बताते हुये कहा कि अब वह समय चला गया है जब अपनी मूल भाषा जानने वालों को शर्म का अहसास करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी भाषाओं को भुला देता है वह देश अपना मौलिक ङ्क्षचतन भी खो देता है। इसीलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात अपनी राजभाषा में ही रखी। <br />  </p>
<p>दो दिन के वाराणसी प्रवास पर आये शाह ने यहां स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद राजभाषा सम्मेलन को दिल्ली से बाहर ले जाने का जब फैसला किया तो यह सौभाग्य की बात है कि यह सम्मेलन अपने पहले पड़ाव के रूप में भाषाओं के गोमुख कहे जाने वाले शहर वाराणसी में पहुंचा।  <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 16:06:57 +0530</pubDate>
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                <title>आसमान में चक्कर लगाती रही फ्लाइट</title>
                                    <description><![CDATA[ दिल्ली से जयपुर इंडिगो की फ्लाइट जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड नहीं हो सकी इसका मुख्य कारण जयपुर एयरपोर्ट पर रनवे नोटम के चलते परमिशन नहीं मिलना बताया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/617fabe7b16e8/article-2049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/jpr-airport.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। दिल्ली से जयपुर इंडिगो की फ्लाइट जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड नहीं हो सकी इसका मुख्य कारण जयपुर एयरपोर्ट पर रनवे नोटम के चलते परमिशन नहीं मिलना बताया जा रहा है। इस विमान में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने भी मौजूद थे।<br /> <br />इस विमान को दिल्ली से रवाना होकर दोपहर 1:50 बजे जयपुर पहुंचना था। लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट से इस फ्लाइट को उडान भरने में देरी हुई। बाद में फ्लाइट दोपहर करीब पौने तीन बजे के करीब जयपुर पहुंची। इस दौरान जयपुर एयरपोर्ट पर रनवे नोटम होने के चलते फ्लाइट को लैंड करने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर यह विमान आसमान में चक्कर लगाता रहा। काफी देर तक अनुमति नहीं मिलने के बाद यह विमान वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 16:06:12 +0530</pubDate>
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