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                <title>Bengal Election - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bengal Election RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव : पहले चरण में 16 निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक, 23 अप्रैल को होगी वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। 16 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिला वोटर ही चुनाव परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-first-phase-of-west-bengal-elections-the-number/article-151097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया है कि राज्य की 152 में से कम से कम 16 विधानसभाओं में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। ये विधानसभाएं दार्जीलिंग, जलपाइगुड़ी, अललिपुरद्वार और मुर्शिदाबाद के बीच फैली हुई हैं। चुनाव आयोग के क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुल 3,60,77,171 मतदाता हैं, जिनमें 1,84,99,496 पुरुष और 1,75,77,210 महिलाएं हैं। 465 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं। पहले चरण में मतदान करने वाले क्षेत्रों में मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। यहां महिला मतदाताओं की संख्या 83,430 है, जबकि पुरुष मतदाता केवल 78,004 हैं। यानी पुरुषों की तुलना में 5,426 अधिक महिला मतदाता हैं।</p>
<p>दूसरी ओर दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी में 99,920 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,00,844 महिला मतदाता हैं। यानी सिर्फ़ 924 मतदाताओं का मामूली अंतर। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है, उनमें से कई उत्तरी बंगाल और उससे सटे क्षेत्रों के हैं। इनमें कालचीनी (एसटी) भी शामिल है, जहां महिला मतदाताओं (1,11,742) की संख्या पुरुष मतदाताओं (1,09,713) से अधिक है। सूची में मदारीहाट (एसटी) का नाम भी है, जहां 96,262 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 97,695 महिला मतदाता हैं।</p>
<p>इसी तरह, नागराकाटा (एसटी) में महिलाओं को स्पष्ट बढ़त हासिल है, जहां 1,07,824 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,12,292 महिला मतदाता हैं। दार्जिलिंग ज़िले के विधानसभा क्षेत्रों, जैसे कि दार्जिलिंग, कर्सियांग, मातिगारा-नक्सलबाड़ी (एससी) और सिलीगुड़ी में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि दार्जिलिंग में 1,03,033 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 1,04,681 महिला मतदाता हैं, जबकि कर्सियांग में यह अंतर और भी अधिक है, जहाँ 1,06,014 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,10,135 महिला मतदाता हैं। मातिगारा-नक्सलबाड़ी में यह अंतर कम है, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण है। यहां 1,34,906 महिला मतदाताएं 1,33,571 पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनाव क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पार्टियां महिला वोटरों को ध्यान में रखकर बनायी गयी कल्याणकारी योजनाएं और संदेश के ज़रिए अपील करने के लिए अपने अभियान को तेज़ी से बदल रही हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से काफी नाम हटाये गये हैं, लेकिन चलन बताता है कि पुरुषों के नाम हटाने की संख्या थोड़ी ज़्यादा रही है।</p>
<p>एक विश्लेषक ने कहा, "ज़ाहिर है, कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां आने वाले चुनावों में महिला मतदाता एक निर्णायक कारक के रूप में उभरी हैं। हटाये गये नामों के सटीक आंकड़े अलग-अलग ज़िलों में अलग-अलग हैं, लेकिन व्यापक रुझान चुनावी सूचियों में लिंग अनुपात के धीरे-धीरे संतुलित होने की ओर इशारा करता है।" जैसे-जैसे मतदान के दिन से पहले चुनाव प्रचार तेज़ हो रहा है, पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां सामाजिक कल्याण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सहायता योजनाओं जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:57:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल चुनाव: अपनों के विरोध से बेहाल तृणमूल और भाजपा, कहीं भूमिपुत्र की मांग तो कहीं चरित्र पर वार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और टीएमसी दोनों ही आंतरिक कलह से जूझ रही हैं। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने बांकुड़ा से हावड़ा तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं, जिससे बागी नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने का खतरा बढ़ गया है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-and-bjp-are-troubled-by-the-opposition-of-their/article-147631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के विभीषण चुनौती बन गए हैं। टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल उम्मीदवार-कांटे से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास</strong></p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकतार्ओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है। </p>
<p>हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: बंगाल चुनावी मुकाबले में नजर आया 'सरप्राइज फैक्टर'; चमक बिखेर रहे सेलिब्रिटी, चुनौतियों से घिरी होंगी ममता </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए TMC और BJP ने सितारों पर दांव खेला है। राज चक्रवर्ती और सोहम जैसे पुराने चेहरों के साथ स्वप्न बर्मन जैसे नए खिलाड़ी मैदान में हैं। सोनारपुर साउथ में रूपा गांगुली और लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला तय है। इस बार दलों ने प्रयोगों के बजाय संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-surprise-factor-seen-in-bengal-election/article-147345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-mamta2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) फिल्म और खेल जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार रही हैं, लेकिन इस बार बहुप्रतीक्षित 'सरप्राइज फैक्टर' नजर नहीं आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों दलों ने खेल और फिल्मी दुनिया से नये चेहरों के बजाय आजमाये हुए उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। </p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में भले ही मनोरंजन और खेल जगत के कुछ जाने-माने चेहरों को जगह मिली है, लेकिन पार्टी ने अधिकतर ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो पहले चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। प्रमुख नामों में अभिनेता सोहम चक्रवर्ती को करीमपुर से, जबकि फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती को बैरकपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी को एक बार फिर बारानगर से टिकट दिया गया है, जो पार्टी के उनके प्रति भरोसे को दर्शाता है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस ने मनोरंजन जगत से जुड़े दो मौजूदा विधायक लोकगायिका अदिति मुंशी (राजारहाट गोपालपुर) और अभिनेत्री लवली मैत्रा (सोनारपुर साउथ) पर भी भरोसा जताया है। गायक इंद्रनील सेन, जो 2016 से विधायक हैं, को चंदननगर से फिर उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे पार्टी का अनुभव पर स्पष्ट जोर दिया जाना दिखता है। एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्न बर्मन को पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद राजगंज से उम्मीदवार बनाना एक चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इसी तरह फुटबॉलर बिदेश बोस सप्तग्राम से, जबकि क्रिकेटर से कोच बने शिब शंकर पॉल तूफानगंज से चुनाव लड़ेंगे, जिससे खेल जगत की चुनावों में भागीदारी भी दिख रही है।</p>
<p>एक अन्य उल्लेखनीय नाम श्रेया पांडे का है, जो दिवंगत तृणमूल कांग्रेस विधायक साधन पांडे की पुत्री हैं, वह मानिकतला सीट से अपना पहला बड़ा चुनाव लड़ेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुल मिलाकर मशहूर हस्तियों के उम्मीदवारों की संख्या सीमित है, जो यह संकेत देता है कि टीएमसी ने नये प्रयोगों के बजाय अनुभव और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा किया है। दूसरी ओर, भाजपा की उम्मीदवार सूची की अधिक चर्चा हो रही है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। पार्टी ने जहां पुराने चेहरों जैसे रुद्रनील घोष और श्री हिरण चटर्जी को मैदान में उतारा है, वहीं नये चेहरों को भी मौका दिया है।</p>
<p>अब तक जारी दो सूचियों में घोष को शिवपुर से और चटर्जी को श्यामपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चटर्जी को श्यामपुर से टिकट देना कुछ हद तक चौंकाने वाला है, क्योंकि उन्हें पहले उनकी जीत वाली सीट खड़गपुर सदर से हटाया गया था और उनकी शादी से जुड़े विवाद के बाद उनके टिकट पर सवाल उठ रहे थे।</p>
<p>नये चेहरों की बात करें, तो टॉलीगंज से अभिनेत्री पापिया अधिकारी और जादवपुर से शरबरी मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है। सोनारपुर साउथ सीट पर भाजपा की रूपा गांगुली और तृणमूल कांग्रेस की लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला होने की संभावना है। भाजपा अब तक दो चरणों के लिए 256 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, जबकि 38 सीटों पर नामों की घोषणा बाकी है। 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा और मतगणना चार मई को की जाएगी। उल्लेखनीय है कि करीब तीन दशकों में पहली बार राज्य में दो चरणों में चुनाव हो रहा है।</p>
<p>जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज हो रहा है, सेलिब्रिटी उम्मीदवारों की मौजूदगी से ग्लैमर और चुनावों में भीड़ दोनों बढ़ने की उम्मीद है। व्यापक राजनीतिक संकेत हालांकि यही बताते हैं कि इस बार दलों ने नये और चौंकाने वाले चेहरों के बजाय अनुभवी और परिचित उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 16:02:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बीजेपी ने बंगाल में जारी की 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट: रूपा गांगुली-निशीथ प्रमाणिक को टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 111 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में रूपा गांगुली, निशीथ प्रमाणिक और प्रियंका तिबरेवाल जैसे दिग्गज चेहरों के साथ पूर्व आईपीएस अधिकारियों और टॉलीवुड सितारों को भी मौका मिला है। टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी ने अनुभवी और ग्लैमरस चेहरों का संतुलित दांव खेला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-released-second-list-of-111-candidates-in-bengal-ticket/article-147140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-bjp.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। बीजेपी ने अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है और इस बार चुनावी मैदान में 111 उम्मीदवारों के नाम फाइनल किए गए हैं। इस लिस्ट को देखकर साफ लग रहा है कि पार्टी ने जीत के लिए पूरी जान झोंक दी है। लिस्ट में सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि नामी चेहरे, पूर्व सरकारी अफसर और बंगाली सिनेमा के सितारे भी शामिल हैं। बीजेपी का यह दांव बंगाल की सत्ता में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।</p>
<p>इस बार की लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व लोकसभा सांसद रूपा गांगुली और निशीथ प्रमाणिक जैसे बड़े नामों की हो रही है। रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से टिकट दिया गया है, जो वहां की राजनीति में एक बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय निशीथ प्रमाणिक को माथाभांगा सीट से चुनावी दंगल में उतारा गया है। इन चेहरों को उतारकर बीजेपी ने यह संदेश दे दिया है कि वह बंगाल के हर कोने में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।</p>
<p>दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी मौका: दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में सिर्फ पुराने बीजेपी नेता ही नहीं, बल्कि हाल ही में दूसरी पार्टियों से आए चेहरों को भी जगह मिली है। पूर्व टीएमसी नेता तापस रॉय को मानिकतला से टिकट मिला है, तो वहीं बैरकपुर से कौस्तव बागची पर भरोसा जताया गया है। आईपीएस अधिकारी रहे डॉ. राजेश कुमार को जगतदल सीट से मैदान में उतारा गया है, जो बताता है कि पार्टी अनुभवी और पढ़े-लिखे चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p><strong>चुनावी दंगल में उतरे फिल्मी सितारे और फायरब्रांड नेता</strong></p>
<p>बात करें ग्लैमर और तेवर की, तो टॉलीगंज सीट से अभिनेता पापिया अधिकारी को टिकट दिया गया है, जिससे वहां मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। इसके अलावा, बीजेपी की फायरब्रांड नेता प्रियंका तिबरेवाल को एंटाली से मैदान में उतारा गया है। प्रियंका हमेशा से अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं। वहीं अर्जुन सिंह को नोआपारा से टिकट देकर पार्टी ने अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश की है। बीजेपी की इस दूसरी लिस्ट ने बंगाल चुनाव के माहौल को और भी गरमा दिया है। एक तरफ जहां टीएमसी अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी के इन 111 नामों ने विपक्ष के खेमे में भी खलबली मचा दी है। लोगों के बीच अब बस यही चर्चा है कि क्या ये बड़े चेहरे और पूर्व आईपीएस अधिकारी बंगाल की जनता का दिल जीत पाएंगे? या फिर ममता बनर्जी का किला भेदन इतना आसान नहीं होगा? </p>
<p>अब मुकाबला दिलचस्प हो गया है क्योंकि टिकट मिलने के बाद अब असली जंग जमीन पर शुरू होगी। कार्यकर्ताओं में उत्साह है और उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में बंगाल की सड़कों पर चुनावी रैलियों और नारों का शोर और तेज होने वाला है। देखना होगा कि 111 उम्मीदवारों की ये फौज बीजेपी की नैया पार लगा पाती है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:01:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: प्रत्याशी की घोषणा में देरी, कांग्रेस की सुस्ती या कोई नई रणनीति, 26 साल बाद विधानसभा में वापसी की तैयारी में अधीर </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा में देरी कांग्रेस की आंतरिक दुविधा को दर्शा रही है। जहां अभिषेक मनु सिंघवी गठबंधन के पक्ष में हैं, वहीं पार्टी अब अधीर रंजन चौधरी को बहरमपुर से उतारने की रणनीति बना रही है। 'अकेले चलो' की नीति और गुटबाजी के बीच, दिग्गज नेता अधीर की राज्य की राजनीति में वापसी त्रिकोणीय मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delay-in-announcement-of-west-bengal-assembly-election-candidate-congresss/article-147146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/wb-congress.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद जहां भाजपा, वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस ने तेजी दिखाते हुए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, वहीं कांग्रेस अब तक असमंजस की स्थिति में नजर आ रही है। चुनावी बिगुल बजने के तीन दिन बाद भी कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा न होना पार्टी की आंतरिक कमजोरी और रणनीतिक भ्रम को उजागर करता है। प्रदेश नेतृत्व, खासकर शुभंकर सरकार, पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि संगठनात्मक ढांचा कमजोर है और कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी साफ दिख रही है।</p>
<p>पिछले चुनाव में वाममोर्चा और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ गठबंधन के बावजूद खाता न खुलना भी पार्टी के आत्मविश्वास पर असर डाल चुका है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी का बयान कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को सामने लाता है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन की वकालत की। सिंघवी का यह भी कहना कि सही आंकड़े पर गठबंधन ही एकमात्र विकल्प है, इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर रणनीति को लेकर एकमत नहीं है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की देरी के पीछे तीन बड़े कारण हैं-पहला, गठबंधन बनाम अकेले लड़ने की दुविधा; दूसरा, मजबूत और जीताऊ उम्मीदवारों की कमी और तीसरा, केंद्रीय नेतृत्व का अंतिम निर्णय लेने में विलंब। इसके अलावा, बंगाल में पार्टी का सीमित जनाधार और संसाधनों की कमी भी निर्णय प्रक्रिया को धीमा कर रही है।</p>
<p>बंगाल की राजनीति में बहरमपुर के राबिनहुड कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर राज्य की सियासत में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस उन्हें बहरमपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है। 1996 में विधायक रहने के बाद अधीर ने 1999 से 2024 तक लगातार लोकसभा में बहरमपुर का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 2024 में तृणमूल उम्मीदवार यूसुफ पठान से हार के बाद अब पार्टी उन्हें राज्य की राजनीति में उतारने की रणनीति बना रही है। यदि अधीर चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो बहरमपुर सीट पर भाजपा, तृणमूल और कांग्रेस के बीच हाई-प्रोफाइल त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जो इस चुनाव का सबसे दिलचस्प मुकाबला बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:33:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा का मिशन बंगाल शुरू : 5 प्रमुख जोनों में सिपहसालार तैनात </title>
                                    <description><![CDATA[बिहार में एनडीए की बड़ी जीत के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए व्यापक रणनीति लागू कर दी है। केंद्र ने छह राज्यों के संगठन मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को बंगाल के पाँच जोनों में तैनात किया है। ये नेता पाँच महीनों तक बूथ नेटवर्क, सामाजिक समीकरण और जमीनी राजनीति पर काम कर चुनावी रणनीति तैयार करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjps-mission-bengal-started-in-5-major-zones/article-133156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/bengal-mission-2026.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बिहार में एनडीए सरकार की प्रचंड जीत के बाद अब केंद्र की भाजपा सरकार ने पश्चिम बंगाल में आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है और इसके लिए मेगा ऑपरेशन भी शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो, केंद्र सरकार ने करीब 6 माह पहले ही बंगाल के 6 राज्यो के संगठन मंत्रियों और 6 वरिष्ठ नेताओं को पश्चिम बंगाल के करीब 5 प्रमुख जोनों में रणनीतिक रूप से तैनात कर दिया है ताकि वहां पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके और बिहार की तरह बंगाल को भी जीता जा सके।</p>
<p>बताया जा रहा है कि, ये सभी नेता अगले पांच महीनों तक वहां रूककर बूथ नेटवर्क, सामाजिक समीकरण और जमीनी राजनीति पर काम करेंगे और आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तैयार करेंगे। इसके साा ही बता दें कि, ये पहला ऐसा मौका है जब भाजपा ने इतने बड़े स्तर पर बाहरी राज्यों के नेताओं के साथ मिलकर लॉन्ग टर्म में तैनाती की हैं।</p>
<p><strong>कहां किसकी तैनाती ?</strong></p>
<p>उत्तर बंगा के लिए अनंत नारायण मिश्र, सिलीगुड़ी में अरुण बिन्नाडी और कैलाश चौधरी को काम करने के लिए कहा गया है।</p>
<p>राढ़बंगा ज़ोन के लिए पवन साई और धन सिंह रावत को पुरुलिया, बांकुड़ा, वर्धमान इलाके में लगाया गया है।</p>
<p>हावड़ा–हुगली जोन के लिए पवन राणा के साथ संजय भाटिया हावड़ा और हुगली में बूथ नेटवर्क, सामाजिक समीकरण और जमीनी स्तर पर काम करेंगे।</p>
<p>मेदिनीपुर जोन के लिए यूपी मंत्री जेपीएस राठौर को शुभेंदु अधिकारी वाले क्षेत्र में तेज़ राजनीतिक मोर्चा संभालने के आदेश जारी किए गए है।</p>
<p>कोलकाता–दक्षिण 24 परगना जोन के लिए एम. सिद्धार्थन और सीटी रवि को टीएमसी के गढ़ में सेंध मारने के लिए कहा गया है ताकि आने वाले चुनाव में कोई कसर नहीं रह जाए।</p>
<p>नवद्वीप–उत्तर 24 परगना जोन के लिए एन. मधुकर व सुरेश राणा को संवेदनशील क्षेत्रों पर बारिकी से काम करने और जनता के बीच जाकर उनकी आवाज को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का काम दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:46:49 +0530</pubDate>
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                <title>कोरोना टीके की कीमत पर ममता बनर्जी का केंद्र पर निशाना, कहा- देश में एक वैक्सीन एक दाम क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर को मोदी निर्मित आपदा करार दिया है। दक्षिण दिनाजपुर में एक जनसभा को संबोधित करते कोविड वैक्सीन के मुद्दे पर बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोरोना संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-04/ezj154tvkaakrwr.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर को मोदी निर्मित आपदा करार दिया है। दक्षिण दिनाजपुर में एक जनसभा को संबोधित करते कोविड वैक्सीन के मुद्दे पर बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोरोना संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि दूसरी कोविड लहर पहली कोरोना लहर से ज्यादा खतरनाक है। मैं कहूंगी कि यह मोदी निर्मित विपत्ति है। कोई इन्जेक्शन या ऑक्सीजन नहीं है। वैक्सीन और दवाएं देश से बाहर भेज दी गईं जबकि देश में इनकी कमी थी। इतना ही नहीं ममता ने वैक्सीन के दामों को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा।<br /> <br /> ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि भाजपा हर समय एक राष्ट्र, एक पार्टी, एक नेता की बात करती रहती है, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए टीके की एक कीमत तय नहीं कर सकती। देश में क्यों नहीं वन वैक्सीन वन प्राइस होना चाहिए। क्यों केंद्र खरीदे तो 150 रुपए और राज्य खरीदे तो 400 रुपए। ये राज्यों के साथ भेदभाव नहीं तो क्या है। ममता बनर्जी ने कहा कि हर भारतीय को उम्र, जाति, पंथ, स्थान की परवाह किए बिना मुफ्त वैक्सीन की आवश्यकता होती है। भारत सरकार को कोविड-19 वैक्सीन के लिए एक मूल्य तय करना चाहिए, चाहे केन्द्र या राज्य कोई भी इसके लिए भुगतान करे। और वैसे तो इसे मुफ्त में देना चाहिए।<br /> <br /> मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की राज्य में एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी लॉकडाउन लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ऐसा करने से लोग अपनी आजीविका कैसे चलाएंगे। रात्रि कर्फ्यू भी इसका कोई समाधान नहीं है। ममता बनर्जी ने दक्षिण दिनाजपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें राजनीति का अच्छा खासा अनुभव है और वह बंगाल को दिल्ली के दो गुंडों के हाथों में नहीं जाने देंगी। मैं कोई खिलाड़ी नहीं हूं, लेकिन मैं यह अच्छी तरह से जानती हूं कि कैसे खेलना चाहिए। मैं इससे पहले लोकसभा में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थी। हम दिल्ली के दो गुंडों के समक्ष बंगाल का आत्मसमर्पण नहीं करा सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Apr 2021 17:59:33 +0530</pubDate>
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