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                <title>मैं तो खुद गायें पालता हूं, हर घर को पालनी चाहिए, फर्जी गौशालाओं का विरोध किया : मदन दिलावर</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेसी नेता मेरे बयानों को तोड़ मरोडकर पेश कर रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<br /><p>जयपुर। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा है कि वे खुद अपने गांव और जयपुर स्थित सरकारी बंगले पर गाये रखते हैं। अपने निवास पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके पास चार गाय और एक बछड़ा है, जिनकी खुद सेवा करते हैं। गौ माताओं को घर-घर पालना चाहिए। इस अभियान में मैं जुट गया हूं। मैंने साध्वी ऋतम्भरा से भी यह निवेदन किया है। गौमूत्र से मांगलिक कार्य किए जाते हैं। ऐसे में गौशालाओं का विरोध कैसे कर सकता हूं। कांग्रेसी नेता मेरे बयानों को तोड़ मरोडकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>मैंने फर्जी गौशालाओं के लिए बयान दिया था। जिनके पास जितनी गायें नहीं, लेकिन उससे ज्यादा अनुदान फर्जी तरीके से उठाते हैं। वे वास्तविक गौधन का फायदा रोकते हैं। उनके नाम पर धन हड़प रहे हैं। इसकी जांच भी हुई है। कई फर्जी गौशालाएं पकड़ी भी गई है। कांग्रेस राज में ऐसा हुआ। गाय की आड़ लेकर राजस्थान सरकार का पैसा उठाया। इन्होंने बूचड़खानों, गाय के हत्यारों को संरक्षण दिया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 13:13:09 +0530</pubDate>
                
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                        <![CDATA[Jaipur PS]]>
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                <title>आश्रय को तरस रहे निराश्रित नंदी, नहीं खुली नंदीशाला</title>
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                        <![CDATA[जिले में नंदीशाला के लिए एक भी नहीं आया आवेदन।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/destitute-nandis-are-yearning-for-shelter--nandishala-is-not-opened/article-116848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले सहित प्रदेश भर में सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित नंदी को आश्रय देने के लिए शुरू की गई नंदीशाला योजना जमीन के अड़ंगे से आगे नहीं बढ़ पा रही है। पिछले पांच साल में प्रदेश में सिर्फ 57 नंदीशाला ही खुल पाई हैं जबकि कोटा जिले में अभी तक एक भी नंदीशाला नहीं खुल पाई है।  यहां इस योजना में किसी भी संस्था ने आवेदन ही नहीं किया है। सरकार की ओर से सड़कों पर विचरण कर रहे नंदियों के लिए नंदीशाला खोलने की योजना शुरू की गई थी। जिसके तहत प्रदेश की सभी 426 तहसीलों में नंदीशालाएं खोली जानी थी, लेकिन, वर्ष 2021-22 से वर्ष 2024-25 तक केवल 57 नंदीशालाएं ही खुल सकी हैं। ये भी केवल 19 जिलों में खुली हैं। जबकि प्रदेश के 22 जिलों में अब तक एक भी नंदीशाला नहीं खुली है। इसमें कोटा जिला भी शामिल है। </p>
<p><strong>नंदीशाला में यह कार्य होंगे</strong><br />- ग्रेवल रोड एवं इंटरलॉकिंग टाइल्स<br />- प्रशासनिक भवन, पशु चिकित्सा सुविधा व अन्य निर्माण<br />- चारा भंडार गृह और काऊ शैड का निर्माण<br />- अंडर ग्राउंड वाटर टैंक/ट्यूबवैल की व्यवस्था</p>
<p><strong>नंदीशाला खोलने में यह आ रहा रोड़ा</strong><br />जानकारी के अनुसार नंदीशाला खोलने में सबसे बड़ा अड़ंगा जमीन का आ रहा है। आवेदन करने वाली संस्था आदि के पास 250 नंदी के लिए 10 बीघा जमीन होनी चाहिए। गोवंश की बढ़ोतरी होने पर उसी अनुपात में भूमि भी बढ़ानी होगी। 250 नर गोवंश की बीस साल तक देखभाल करना आवश्यक है। इतनी जमीन और लंबा समय होने के कारण अधिकांश संस्थाएं इस योजना  में रुचि नहीं दिखा रही है। अभी तक कोटा जिले में एक भी आवेदन नहीं आया है। इस कारण शहर सहित जिले की सड़कों पर निराश्रित नंदी विचरण कर रहे हैं। प्रदेश की बात की जए तो नंदीशाला खोलने के लिए वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक 256 आवेदन मिले। उनमें से 109 आवेदन स्वीकृत हुए। स्वीकृत आवेदनों में से 65 कार्य अभी चल रहे हैं। जबकि 10 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शेष में अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। वहीं कोटा जिले में कोई आवेदन नहीं आया है।</p>
<p><strong>यह है अनुदान का नियम</strong><br />तकनीकी मापदण्ड के लिए संस्था के पास निर्माण कार्यों के लिए विषय विशेषज्ञों की टीम होना जरूरी हैं। संस्था को 10 प्रतिशत अंशदान राशि का सीए की ओर से जारी प्रमाण-पत्र जमा कराना होता है। नन्दीशाला की स्थापना व निर्माण के लिए लागत 1.57 करोड़ है। जिसका 90 प्रतिशत राज्य व 10 प्रतिशत संस्था को देना है। सहायता राशि तीन किस्तों में 40-40 प्रतिशत व 10 प्रतिशत दी जाएगी। नवस्थापित नंदीशालाओं में एक वर्ष में न्यूनतम 250 नंदियों को संधारित करना अनिवार्य होगा, लेकिन भरण-पोषण के लिए सहायता राशि निधि नियमों के अनुसार 9 माह की देय होगी। इसमें 3 वर्ष से छोटे गौवंश के लिए 20 रुपए प्रतिदिन तथा 3 वर्ष से बड़े गौवंश के लिए 40 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। पंचायत समिति स्तर पर न्यूनतम 250 नर गोवंश की नंदीशाला के लिए 10 बीघा या 16 हजार वर्गमीटर जमीन संस्था के स्वयं के स्वामित्व/लीज/आवंटन की होना आवश्यक है। </p>
<p>सरकार ने नंदीशाला खोलने के लिए कई नियम बना रखे हैं। इनमें सबसे दिक्कत दस बीघा जमीन होने के नियम से आ रही है। अधिकांश गोशालाओं संस्थाओं के इतनी जमीन नहीं है। जिससे उन्होंने अभी तक इस योजना से दूरी बना रखी है। <br /><strong>- प्रकाश शाह, गोशाला संचालक</strong></p>
<p>सरकार ने सड़कों पर विचरण कर रहे नंदियों के लिए नंदीशाला खोलने की योजना चला रखी है। कोटा जिले में अभी तक एक भी नंदीशाला नहीं खुल पाई है। यहां इस योजना में किसी भी संस्था ने आवेदन ही नहीं किया है। इसके लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. मनोज भारती, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 17:00:01 +0530</pubDate>
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                <title>पेड़ों की नहीं चढ़ेगी बलि, गोकाष्ठ मशीन बनेगी सहारा</title>
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                        <![CDATA[बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-will-not-be-sacrificed--cow-wood-machine-will-be-the-support/article-114042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले के गौ-पालकों के लिए अच्छी खबर है। अब पेड़ों की लकड़ी की बजाय गोबर की लकड़ी जलाने के काम आएगी। इसके लिए सरकार गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराएगी। इस पूरी योजना में प्रदेश की सौ गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इनमें कोटा जिले की गोशालाओं को भी शामिल किया गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। जिन गोशालाओं में गोवंश 1000 से अधिक है, उनको बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<p><strong>हजारों पेड़ कटने से बचेंगे</strong><br />सरकार की इस योजना का उदे्श्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का है। अभी लकड़ी के लिए रोजाना पेडों को काटा जा रहा है। पेड़ों को बचाने के लिए सरकार ने गोबर से बनी लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय किया है। चयन उपरान्त लाभार्थी पात्र गोशाला द्वारा अपने हिस्से की कुल लागत की बीस प्रतिशत राशि संबंधित जिला संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग को जमा करवाई जाएगी। तत्पश्चात लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ मशीन चयनित फर्म की ओर से निर्धारित दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।  अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी मोक्षधाम में काम आएगी। अंतिम संस्कार के लिए ये गोबर से बनी लकड़ी बेची जाएगी। इससे गोशालाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी। </p>
<p><strong>गोशालाओं की आय में होगी बढ़ोतरी</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार गोवंश के गोबर से मशीन के माध्यम से गोकाष्ठ बनाई जाती है। गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन से दो किलोग्राम गोबर से एक किलोग्राम गोकाष्ठ (गोबर के लठ्ठे ) तैयार होते हैं। जिसका उपयोग ईंधन के रूप किया जा सकता है। लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की होगी, जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे। गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। इस दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा। गोकाष्ठ को मोक्ष धाम अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन आदि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, उसका बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>योजना में यह है नियम</strong><br />- कोई भी लाभार्थी गोशाला इस योजना के तहत प्राप्त गोकाष्ठ मशीन को 10 साल से पहले बेचान नहीं कर सकेंगी ना ही इन्हें किसी अन्य को सुपुर्द कर सकेंगी।<br />- लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की आय होगी जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे ।<br />- गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। उक्त दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा।<br />- गोकाष्ठ को मोक्ष धाम / अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन इत्यादि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, का बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p>लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग होने से रोजाना पेड़ों की कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण संतुलन को काफी क्षति पहुंच रही है। ऐसे में गोशालाओं में गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराने की सरकार की यह पहल अच्छी है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>-डॉ. राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा की थी। इनमें कोटा जिले की गोशालाएं भी शामिल हैं। पर्यारण संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की गई है।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 17:52:59 +0530</pubDate>
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                <title>लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान</title>
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                        <![CDATA[गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-cows-are-being-saved-every-month-with-the-help-of-cow-lifting-machine/article-98764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में बैठक लेने वाली करीब 100 गौवंश को हर महीने बचाया जा रहा है। यह संभव हुआ है काऊ लिफ्टिंग मशीन से। गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं। जिनमें भी बीमार व घायल और कमजोर गौवंश अधिक है। उनमें गाय हो या बछड़े या फिर सांड अधिकतर प्लास्टिक की पॉलिथीन खाई हुई है। जिससे गौशाला में आने पर वे भूसा व चारा कम खा पाती है।  जिससे कई कमजोर व बीमार गाय बैठक ले लेती है। एक बार बैठक लेने के बाद उन्हें प्रयास करने पर भी  खड़ा करना मुश्किल होता है। जिससे उनकी मौत निश्चित होती है। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा था। लेकिन कुछ समय से बैठक लेने वाले गौवंश की मृत्यु दर में कमी आई है।</p>
<p><strong>आधा दर्जन मशीनों का कर रहे उपयोग</strong><br />सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने के बाद अधिकतर गायों कीमौत  हो जाती थी। अब कुछ समय पहले कॉऊ लिफ्टिंग मशीनोंका उपयोग कर उनकी मुत्यु दर को कम किया गया है। गौशाला व कायन हाउस में ऐसी करीब आधा दर्जन मशीनें बनवाई गई है। पहले इनकी संख्या दो ही थी और पुरानी होने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है। कुछ निगम के स्तर पर और कुछ दान दाताओं के सहयोग से ली गई है। सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने वाली गौवंश की अधिक मुत्यु हो रही थी। वहीं वर्तमान में यह घटकर 4 से 5 ही प्रतिदिन हो पा रही है। </p>
<p><strong>काढ़ा पिलाया जा रहा, हैलोजन लगाई</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्दी में बीमार व कमजोर गायों के साथ ही छोटे बछड़ों को भूसे व चापड़ में पौष्टिक तत्वों का काढ़ा मिलाकर दिया जा रहा है। गौशाला व कायन हाउस में रोजाना यह काढ़ा बनाया जा रहा है।  इसके साथ ही बाड़ों में गर्माहट के लिए हैलोजन लाइटें लगाई गई है। हर 35 से 40 फुट की दूरी  पर लगाई गई है।</p>
<p><strong>कॉऊ लिफ्टिंग मशीन से कर रहे खड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर बीमार व कमजोर गाय है। यहां आने के बाद किसीकारण से यदि वह बैठक ले लेती है तो श्रमिकों की मदद से उन्हें दोबारा से खड़ा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय पहले प्रयास कर काऊ लिफ्टिंग मशीनें तैयार करवाई गई। जिनकी सहायता से बैठक लेने वाले गौवंश को खड़ा करने में सफलता मिली है। सिंह ने बताया कि लोहे की बनी इस मशीन को नीचे रखकर उस पर बैठक लेने वालीगाय या सांड को लिया जाता है। उसके बाद पट्टों  से बांधकर गिरारी की सहायता से उन्हें  उनके पैरों पर खड़ा किया  जाता है। उसके बाद उनके कमजोर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश की जाती है। जिससे उनके पैरों में ताकत आने पर उन्हें कुछ दूरी पर चलाया जाता है। ऐसा करके रोजाना 3 से 4 यानि हर महीने करीब 100 गौवंश की जान बचाने में सफल हो रहे है। बुधवार को भी 3 से 4  बैठक ले चुकी गायों को खड़ा किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:25:12 +0530</pubDate>
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                <title>सम्मान और समर्पण पर भारी स्वार्थ</title>
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                        <![CDATA[गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा मिलेगा तभी इसका ठीक से संरक्षण हो सकेगा। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/self-interest-outweighs-respect-and-dedication/article-93687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हमारे देश में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। धर्म ग्रन्थों में हमें कामधेनु गाय की महिमा से परिचित कराया जाता है। गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास बताया जाता है। धन-धान्य,दीर्ध जीवन, सम्पन्नता, स्वास्थ्य बल, बुद्धि,विद्या सबकुछ देने वाली गाय की हमारे देश में आज क्या स्थिति हो गई है। आज शहर की छोटी मोटी सड़क, गली,नुक्कड़ सब तरफ गायें नजर आती है।  इनको आवारा छोड़ देने के कारण प्रति वर्ष सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा देते हैं। स्वयं गाय भी हाइवे पर बैठे रहने से एक्सीडेन्ट का शिकार होती है। दूध देने तक गाय को रखा जाता है इसके बाद उसे रोड़ पर आवारा छोड़ दिया जाता है।  इनका कोई धणी-धोरी नजर ही नहीं आता। जहां जहां कचरा और गंदगी होती है भूखी गाय वहां मुंह मारती नजर आती है। यह सब तब हो रहा है जब गाय ना केवल लोगों के पौषण की कमी को दूर कर सकती है बल्कि वह लाखों का व्यापार खड़ा कर हजारों लोगों को रोजगार दे सकती है।</p>
<p>एक गाय से हमें दूध ही नहीं गौ मूत्र, गौबर के रूप में इतनी अद्भुत चीजें मिलती हैं कि हम उससे लाखों रुपए कि कमाई कर सकते हैं। गायों के माध्यम से उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। यदि उद्योग स्थापित होंगे तो गाय को वही पुराना दर्जा मिल सकेगा। इसी विषय को लेकर  परिचर्चा की श्रंखला के तहत हाऊ टू गिव काउ्स अरेस्पेक्टिव लाइफ अर्थात गाय को एक सम्मानजनक जीवन कैसे दें  विषय पर मंगलवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में  परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विषय वस्तु से जुडेÞ विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। परिचर्चा में पशुपालन विभाग, नगर निगम,देसी डेयरी, गौशाला संचालक,ह्यूमन हेल्प लाइन, ट्रैफिक पुलिस,एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, एडवोकेट, गृहिणी, गौ सेवक, पशु पालक आदि ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत है परिचर्चा के मुख्य अंश... </p>
<p><strong>कृष्ण को मानते हैं, लेकिन कृष्ण की नहीं</strong><br />गाय को गौमाता का दर्जा प्राप्त है। भगवान कृष्ण ने गाय को पाला था और गोवर्धन की पूजा की थी। उनके ऐसा करने का मतलब गायों को संरक्षण देना था। हिन्दू संस्कृति में लोग भगवान कृष्ण को तो मानते है लेकिन कृष्ण की नहीं मानते। यही कारण है कि लोग गायों का संरक्षण करने की जगह उनकी  दुर्दशा होते देख रहे है। जबकि गाय इतनी उपयोगी है कि उसके दूध के अलावा गोबर तक काम में आता है। कम दृूध देने वाली गायों को सड़क पर छोड़ देते है। गायों के महत्व को समझते हुए उन्हें सुरक्षित जीवन देने के लिए सभी को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।  <br /><strong>- मधुसूदन शर्मा, अध्यक्ष गायत्री परिवार गौशाला</strong></p>
<p><strong>हादसों का कारण बनते हैं सड़कों पर पशु</strong><br />ट्रैफिक पुलिस का  काम शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना है। वाहन चालकों को दुर्घटना से बचाना है। लेकिन कई लोग पशुओं विशेष रूप से गाय को दूध निकालने के बाद सड़कों पर खुला छोड़ देते है। जिससे तेज गति से आने वाले वाहन चालक इन पशुओं से बचने के प्रयास में कई बार हादसों का कारण बनते है। सड़कों पर घूमने वाली गायों व सांड को पकड़ने के लिए निगम अधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह ही कर सकते है। कई बार बिना हैलमेट दो पहिया वाहन चालक हादसों का शिकार होते है तो उनमें से 80 फीसदी मौत बिना हैलमेट के कारण सिर में चोट लगने से होती है।           <br /><strong>- पृूरण सिंह, यातायात निरीक्षक कोटा शहर पुलिस</strong></p>
<p><strong>अब गाय पालना आसान नहीं रहा</strong><br />हिन्दू संस्कृति में गाय को पूजनीय माना तो जाता है। उसके संरक्षण की बात भी सभी करते है। लेकिन गाय को पालना इतना आसान नहीं रहा।  पशु आहार से लेकर सभी चीज महंगी हो गई है। ऐसे में कम दृूध देने वाली गायों को लोग सड़कों पर छोड़ देते है। जिससे उनके द्वारा पॉलिथीन युक्त खाद्य पदार्थ खाने से उनमें कैल्शियम की कमी हो जाती है। इससे उनकीदूध की मात्रा कम हो जाती है। गाय भले ही दृूध कम दे लेकिन उसका संरक्षण होना ही चाहिए। उसे लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। वहीं पहले बैल का उपयोग खेती में किया जाता था। अब खेतों में बैल का उपयोग नहीं होने से वे सांड बनकर सड़कों पर घूम रहे है।                <br /><strong>- मीतू गुर्जर, पशु पालक </strong></p>
<p><strong>गाय माता है, इसे आवारा कहना गलत</strong><br />गाय को एक तरफ तो माता का दर्जा दिया जाता है। दूसरी तरफ उसे आवारा या लावारिस कहकर उसका अपमान किया जाता है। जबकि गाय को आवारा कहना गलत है। हर व्यक्ति को संभव हो तो एक गाय को पालना व उसका संरक्षण करना चाहिए। गाय को गौशाला व मंदिरों में पालकर संरक्षित व सुरक्षित जीवन दिया जा सकता है। हर परिवार में गाय के लिए एक रोटी जरूर निकलती है। लेकिन वह रोटी या खाद्य पदार्थ पॉलिथीन में फेकने से गायों के उसे खाने पर वह उनकी मौत का बड़ा कारण बन रहा है। गायों को सड़कों पर खुला छोड़ने की जगह उन्हें पालने के लिए सभी को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।                 <br /><strong>- आशा चतुर्वेदी, गृहिणी</strong></p>
<p><strong>गौ उत्पाद के लिए बने इंडस्ट्री</strong><br />वर्तमान समय में गौ माता के प्रति लोग लापरवाह हो गए है। सनातन धर्म में गाय ईश्वर के समान पूज्यनीय बताया है। जिसके घर, आंगन, चुल्हा चौका गोबर से लीपा जाता था उसके घर में लक्ष्मी निवासी करती थी। लेकिन वर्तमान में लोग गाय दूध नहीं देती तो उसको सड़कों पर छोड़ देते हैं। घर में जगह होने पर एक गाय तो हर व्यक्ति को पालना ही चाहिए। गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा मिलेगा तभी इसका ठीक से संरक्षण हो सके गा। गाय के दूध के अलावा उसके गोबर, गौमूत्र और अन्य फायदों के बारें प्रशिक्षण दिया जाए तो इंडस्ट्री तैयार हो सकती है। <br /><strong>- महामंडलेश्वर साध्वी हेमा सरस्वती </strong></p>
<p><strong>केवल दूध के दम पर नहीं चल सकती गौशाला</strong><br />गाय के दृूध देना बंद करने पर पशु पालक भी उन्हें सड़कों पर छोड़ देते है। कई पशु पालक तो दोबारा उन गायों को घर तक भी नहीं लाते। लेकिन जो लोग निजी गौशाला संचालित कर रहे है वे भी केवल गाय के दूध के दम पर गौशाला नहीं चला सकती। सरकार स्टाम्प पर गौ टैक्स वसूल कर रही है।  जिस तरह से सामाजिक क्षेत्र में वृद्धाश्रम संचालित हो रहे है। उसी तरह से जिन गायों की देखभाल करने वाला कोई नहीं हो उन्हें गौ अभ्यारण्य में रखा जा सकता है। जहां उन्हें प्राकृतिक रूप से चरने कीजगह व हरा चारा मिलेगा तो कम से कम उनकी जान तो बची रहेगी। साथ ही उनसे किसी को नुकसान भी नहीं होगा।  <br /><strong> - वीरेन्द्र जैन, संयोजक, ह्यूमन हैल्प लाइन</strong></p>
<p><strong>गाय के उत्पादों का हो अधिक उपयोग</strong><br />निजी गौशालाओं में सभी गाय दूध देने वाली नहीं होती।  बिना दूध देने वाली गायों के गोबर व गौमूत्र समेत गाय के अन्य उत्पादों का उपयोग  किया जा सकता है। गौमूत्र व गोबर की खाद से आय बढ़ाई जा सकती है। गाय के उत्पादों का जितना अधिक उपयोग होगा उससे आय के साथ ही गायों का संरक्षण भी किया जा सकेगा। गायों को चारा डालने वाले धर्म करने के लिए सड़कों पर ही चारा डाल देते है। जिससे ट्रैफिक में बाधा होती है। निगम के स्तर पर जमादारों से गायों का सर्वे कराया जाए। साथ ही पालतू पशुओं के टैग लगाए जाएं जिससे उनकी पहचान की जा सके।                <br /><strong>- सतीश गोपलानी, अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गौशाला </strong></p>
<p><strong>हर घर से निकले गौ ग्रास तो नहीं रहेगी भूखी गाय</strong><br />हर घर से गौग्रास निकाला जाए तो गायों को रोड पर प्लास्टिक थैलियां नहीं खानी पड़ेगी। गायों के पर्याप्त भोजन, पानी और आवास की व्यवस्था करने की हम सबको सामूहिक जिम्मेदारी उठानी होगी। हर समय सरकार की तरफ देखने बताए सभी को गाय को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होगे। उनको रोड पर घूमने से रोकने के लिए चरागाह भूमि तैयार करनी होगी। शहरों में गौशालाओं का संख्याा बढ़ानी होगी। सभी गायों को बचाया जा सकता है। <br /><strong>- बृजेश कुमार  बैरागी, सांवरिया गौशाला सदस्य जाखमुंड</strong></p>
<p><strong>गाय को उचित दर्जा मिले तभी होगा संरक्षणन</strong><br />इ पीढ़ी गाय को अब घरों में नहीं बांध सकती है। उनके अंदर गौवंश के संरक्षण के संस्कार देने होंगे। गौमाता को उचित दर्जा देना होगा। गोबर से बने उत्पादन का व्यापक प्रचार प्रसार करना होगा। गौकाष्ठ, गौमूत्र, गौ अर्क जैसे उत्पाद के लिए बाजार तैयार करना होगा।कोटा मेें जितने मंदिर है उनको तीन से चार गाय पालने के लिए दी जाए।  लोगों को गाय की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया जाए।  गौ पालने वाले को सरकार छूट दे जिससे गौ संरक्षण में वृद्धि होगी। गाये सड़को पर नहीं घूमेंगी।<br /><strong>- विवेक गौतम, गौ क्रांति गौ सेवा समिति कोटा</strong></p>
<p><strong>स्टाल फीडिंग विधि अपनाने की आवश्यकता</strong><br />पशुपालकों को स्टाल फीडिंग विधि को अपना होगा तभी बेहतर दूध का उत्पादन होगा और गाये रोड पर आने से रूकेंगी। गायों को घर पर ही खाने को हर समय उपलब्धता करानी होगी।  तभी स्टाल फीडिंग हो पाएगी । स्टाल फीडिंग नहीं होने से  उनसे ज्यादा दूध नहीं ले पाते है। खुला छोड़ने पर गाय दिन में क्या खा रही उसका आंकलन नहीं किया जा सकता है। घर समय पर पौष्टक आहार देने से दूध उत्पादन बढेगा। इसके अलावा नस्ल सुधार की आवश्यकता है। <br /><strong>- डॉ. महेंद्र सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक एव अध्यक्ष केवीके कोटा</strong></p>
<p><strong>पशु बीमा फिर से शुरू हो </strong><br />गायों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया जााता है। पहले पशुओं का 10 हजार रुपए का बीमा हुआ करता था उसको फिर से चालू किया  जाए। जिससे उसके लालच में लोग पशुओं ठीक से पालन पौषण करेंगे। पशुपालन चिकित्सालय में गायों को बेहतर इलाज हो इसके लिए सभी चिकित्सक पूरा प्रयास करते है। समिति संसाधनों के बावजूद गायों को बचाने का हर संभव प्रयास किया जाता है।  गायों की स्टाल फीडिंग विधि अपनाने की आवश्यकता है। तभी दूध का उत्पादन बढ़ेगा।<br /><strong>- डॉ. गिरीश सालफळे उपनिदेशक पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>इंडस्ट्री चल रही है, गौ पालन में रोजगार के अपार अवसर</strong><br />गौपालन में रोजगार की अपार संभावनाएं है।  हमने  गोपालन कर इसको एक इंडस्ट्री के रूप में तैयार किया है। दूध  के प्रोडक्ट के बिना  गोबर की खाद, जैविक खाद, केचुआ खाद, गौबर गैस से बिजली उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। गायों के नस्ल सुधारने की आवश्यकता है। गाय के वेष्ट से बेस्ट प्रोडेक्ट कैसे तैयार करें इसके लिए लोगों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। लोगों को बायो प्रोडेक्ट का प्रशिक्षण देकर इंडस्ट्री स्थापित की जा सकती है। नस्ल सुधारने और अच्छा दूध उत्पादन देने के लिए गायों को पौष्टिक आहार खिलाना होगा।                                    <br /><strong>-अमनप्रीत सिंह गौ डेयरी संचालक</strong></p>
<p><strong>कानून की सख्ती से हो पालना</strong><br />गौ संरक्षण के लिए सरकार की ओर से कई कानून बना रखे हैं लेकिन उनकी ठीक से पालना नहीं होती।  चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हो रहे है। गौचर भूमि बचेगी और वह सड़कों पर नहीं घूमेगी। उनकी असमय मृत्यु नहीं होगी।  गाय को राष्ट्रीय पशु की श्रेणी रखना होगा।  निगम की ओर से प्लास्टिक और कचरे का समय पर निस्तारण करें तो गाय प्लास्टिक और अन्य चीजें खाएगी नहींं तो उनकी मृत्यु रुक सकेगी। इसके लिए घर से शुरुआत करनी होगी। गाय की रोटी का नियम बनाएंगे तो गाये प्लास्टिक और अन्य चीजे नहीं खाएगी। <br /><strong>- शालिनी शर्मा, अधिवक्ता कोटा</strong></p>
<p><strong>नस्ल सुधार पर ध्यान देना जरूरी</strong><br />समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए चार बैसिक चीजों की आवश्यकता होती  है। गाय को जीवन पर्यंत सेवा की आवश्यकता है चाहे वो उत्पादन दे या नहीं दे। भोजन, पानी, छाया, घूमने की स्थान की आवश्यकता है। इन चारों चीजों में एक भी चेन को तोड़ा जाता है तो उसका जीवन खतरे में आ जाता है। नई पीढ़ी को गाय का महत्व ही नहीं पता है। बढ़ती जनसंख्या  के कारण गायों की चारागाह भूमि खत्म हो रही है।  गायों की नस्ल में सुधार नहीं होने से पशुपालकों लाभ नहीं मिलता है तो वो इनको सड़को पर छोड़ देते हैं। सबसे ज्यादा देसी नस्ल की गायें ही सड़को पर घूमते हुए मिलेगी।     <br /><strong>- डॉ. अखिलेश पाण्डेय उपनिदेशक पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>गायों के लिए बने गौ अभयारण्य</strong><br />गाय केवल दूध देने के काम आने वाला पशु नहीं है। यह पूजनीय भी है। इसका संरक्षण व गायों को सुरक्षित जीवन देने के लिए उन्हें खुली जगह पर घूमने व चरने की पर्याप्त जगह की आवश्यकता होती है। निगम की गौशाला में अधिकतर सड़कों पर घूमने वाली व पॉलिथीन गाय आती है। जिससे उनके बैठक लेने के बाद उन्हें उठा पाना मुश्किल होता है।गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश होने पर पुरानी गाय नएआने वाली व कमजोर पर हमला कर देतीहै। जिससे उनकी मौत हो जातीहै। यह गौ अभ्यारण्य बनाकर ही संभव है। गौशाला में गायों को रखने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।   हालांकि पहले की तुलना में गायों की मृत्यु दर कम हुई है। गायों का संरक्षण सिर्फ बात करने से नहीं होगा।इसके लिए सभी को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।    <br /><strong>- जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति कोटा दक्षिण निगम</strong></p>
<p><strong>टॉप  पॉइंट</strong><br />- गौवंश संरक्षण के लिए तैयार हो अभयारण्य।<br />- चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाकर गायों के लिए चरने की व्यवस्था हो। <br />- गांवों से शहर आने वाले पशुओं को रोकने चेक पोस्ट बने<br />- ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालकों को गाय के गोबर, गोमूत्र, गोकाष्ठ उत्पादन के लिए प्रशिक्षित करें। <br />- गायों की नस्ल सुधार पर ध्यान दें, दुधारू गायें होगी तो रोड पर नहीं छोड़ी जाएंगी। <br />- शहर  के हर मंदिर में 4 से 5 गाय को पालने के लिए दिया जाए।<br />- महाराष्टÑ की तर्ज पर  गाय को राष्ट्रीय पशु व गौमाता का दर्जा दिया जाए।<br />- गोबर से बने उत्पादन कर उनकी उपयोगिता लोगों बताएं जिससे इंडस्ट्री स्थापित हो। <br />- नगर निगम की ओर से टिपर का पहला फेरा, गाय के चारा, रोटी के लिए लगाए। <br />- अस्पतालों में गौवंश के इलाज के लिए संसाधन उपलब्ध कराएं।<br />- गौ उत्पादक के लिए इंड्रस्टीज तैयार हो। <br />- शहर में प्लास्टिक उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जिससे गाये प्लास्टिक नहीं खा सकें।<br />- पशुपालकों को बायो प्रोडेक्ट का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगारमुखी बनाए।<br />- गाय को माता का दर्जा तभी मिलेगा परिवार में इसके संस्कार डाले जाएं। <br />- स्कूलों में गाय के उपयोग उसके उत्पाद के बारे में पढ़ाया जाए। </p>]]>
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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2024 13:27:38 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में हर घंटे हो रही एक गाय की मौत, दिन में पांच से ज्यादा हो रही वाहनों से चोटिल </title>
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                        <![CDATA[जानकारी के अनुसार वर्तमान में शहर में रोजाना करीब 20 से 22 गायों की मौत हो रही है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/one-cow-is-dying-every-hour-in-the-city--more-than-five-are-getting-injured-by-vehicles-every-day/article-92808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हिन्दू धर्म में जिसे माता के रूप में पूजा जाता है। उसके दूध को अमृत समझा जाता है। उसी गाय की इन दिनों दुर्दशा हो रही है। हालत यह है कि देखरेख के अभाव में अधिकतर गाय लावारिस हालत में सड़कों पर घूमती देखी जा सकती है। जिससे पॉलिथीन युक्त खाद्य पदार्थ खाने से बीमार होने और हादसों में घायल होने से शहर में हर घंटे एक गाय की मौत हो रही है। सड़कों पर खड़े रहने से हर चार घंटे में एक गाय घायल हो रही है। घायल गाय का कोई धणी धोरी नहीं है। कोई उन्हें अस्पताल तक नहीं पहुंचाता।</p>
<p>जो लोग गाय को पाल भी रहे है तो उनमें से अधिकतर लोग सुबह-शाम दूध निकालने के बाद उन्हें सड़कों पर चरने के लिए छोड़ देते है। जिससे वे या तो हादसों का शिकार हो रही है या फिर पॉलिथीन में फेके जा रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमार हो रही है। वहीं दूध नहीं देने वाली गायों को तो कोई पाल भी नहीं रहा। उन्हें लावारिस हालत में छोड़ा जा रहा है। जिन्हें नगर निगम की गौशाला में रखा जा रहा है। वहां बीमार व घायल गायों की मौत हो रही है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में शहर में रोजाना करीब 20 से 22 गायों की मौत हो रही है। यानि हर एक घंटे में एक गाय की मौत हो रही है। इसी तरह पांच से ज्यादा गायं हर दिन घायल हो रही हैं।  </p>
<p><strong>गाय पूजनीय, उसकी सुरक्षा होनी चाहिए</strong><br />न्यू गोपाल विहार निवासी मेघना सक्सेना ने बताया कि घर में खाना बनाते समय सबसे पहली रोटी गाय के नाम की निकाली जाती है। घर के दरवाजे पर आने वाली गाय को रोटी खिलाते है। घर नहीं आने पर पहले उसे रोटी खिलाने के बाद ही खाना खाते है। समय-समय पर गायों को चारा डालते है। ऐसे में उन गायों की सुरक्षा व देखभाल होनी चाहिए।  तलवंडी निवासी राजेश गुप्ता ने बताया कि गाय के दूध देने तक तो लोग उसकी सेवा व खानपान अच्छा रखते है। दूध देना बंद करने पर उसे लावारिस छोड़ देते है। जिससे उन्हें सड़कों पर पड़ी चीजे ही खानी पड़ रही है। ऐसे में पॉलिथीन में खाद्य सामग्री होने से वह उस समेत खा रही है। जिससे उनकी मौत अधिक हो रही है। ऐसे में गायों की रक्षा के लिए खाद्य पदार्थ को पॉलिथीन में डालना बंद करना होगा।  </p>
<p><strong>वर्तमान में क्षमता से अधिक गौवंश से बढ़ा आंकड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिला कलक्टर के निर्देश पर नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से घेरे डालकर गौवंश को पकड़ा जा रहा है। जिन्हें पहले कायन हाउस में रख रहे हैं। वहां से कैटल वेन से उन्हें बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में पहुंचाया जा रहा है।   रोजाना करीब 80 से 100 गौवंश को गौशाला में लाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि गौशाला में गायों की क्षमता करीब एक से डेढ़ हजार है। लेकिन वहां वर्तमान में 27 सौ से अधिक गौवंश है। ऐसे में यहां बीमार व कमजोर गायों को सांड द्वारा व पुरानी गायों द्वारा मारने से उनकी मौत हो रही है। कुछ दिन पहले जहां गायों की मौत का आंकड़ा कम हो गया था। वह फिर से बढ़कर रोजाना 10 से अधिक हो गया है। गायों की मौत का अधिकतर कारण उनके बीमार व कमजोर हालत में आना है। जिससे वे बैठक ले लेती है। उसके बाद दोबारा उठ नहीं पाती और उनकी मौत हो जाती है। लम्पी रोग से भी कई गायों की मौत हुई है। </p>
<p><strong>पहले सौ-सौ मरती थी अब कम हुई है संख्या</strong><br />नगर निगम के मुर्दा मवेशी उठाने वाले संवेदक बाबू भाई का कहना है कि शहर में पहले से गायों की मौत की संख्या कम हुई है। पहले जहां रोजाना 80 से 100 गायों तक की मौत हो रही थी। वहीं अब इनकी संख्या कम हुई है। बरसात में यह संख्या बढ़ जाती है। वर्तमान में निगम की गौशाला व शहर में अन्य स्थानों पर मिलाकर कुल 20 से 22 गायों की मौत हो रही है। निजमें गाय, बछड़े, शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले सड़कों पर लावारिस गाय अधिक रहती थी। लेकिन देव नारायण योजना बनने से अधिकतर वहां शिफ्ट हो गई है। वहां  उनकी देखभाल होने व खाना अच्छा मिलने से मृत्युदर कम हुई है। गायों के हादसों के मामले भी अधिकतर हाइवे पर ही होते है। जिनमें गायों की मौत होती है। </p>
<p><strong>व्यवस्था सुधरने से कम हुई मृत्युदर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उपायुक्त व गौशाला प्रभारी महावीर सिंह सिसोदिया ने बताया कि निगम की गौशाला में पहले से व्यवस्थाओं में काफी सुधार किया गया है। भूसा, चारा, चापड़ के अलावा साफ सफाई व छाया पानी की भी व्यववस्था सुधरी है। बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा व उपचार की सुविधा भी की है। लेकिन जो अधिक बीमार व बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती उनकी मौत होना तो स्वाभाविक है। </p>
<p><strong>हादसों में घायल का उपचार कर पहुंचाते हैं गौशाला</strong><br />शहर में अधिकतर गायों की मौत का कारण बीमार व कमजोर हालत होना है। वैसे शहर में घायल गाय की सूचना पर उन्हें वाहन के माध्यम से पशु चिकित्सालय लाया जाता है। यहां से उपचार करके उन्हें कायन हाउस व गौशाला में पहुंचा जाता है। पहले घायल गायों की संख्या अधिक रहती थी लेकिन अब यह कम हुई है। <br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडे, उप निदेशक पशु चिकित्सालय  मोखापाड़ा </strong></p>
<p><strong>लम्पी से नहीं हुई कोई मौत</strong><br />शहर में पशुओं में लम्पी रोग फिर से आया है। वर्तमान में अब तक कुल 108 पशु इसकी चपेट में आ चुके है। जिनमें से 60 ठीक हो चुके है। लम्पी की चपेट में आने वाले अधिकतर बढ़डे है। इनकी संख्या कम होने से पहले निगम के किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में आईसोलेशन सेंटर बनाया था। संख्या बढ़ने पर बंधा धर्मपुरा गौशाला में भी एक सेंटर बनाया है। शहर में इस बार लम्पी से एक भी गाय की मौत नहीं हुई है। यह इस बार उतना अधिक खतरनाक भी नहीं है। <br /><strong>- डॉ. चम्पालाल मीणा, संयुक्त निदेशक, पशु पालन विभाग </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Oct 2024 15:54:45 +0530</pubDate>
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                <title>धर्म स्थल पर गाय की कटी पूंछ डालने का मामला, युवकों ने कराए बाजार बंद, तोड़फोड़, पथराव, पुलिस ने किया लाठीचार्ज</title>
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                        <![CDATA[इस घटना के बाद शहर में माहौल गरमा गया और तनावपूर्ण स्थिति हो गई। आसपास के लोगों के साथ ही हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी, संत महंत मौके पर पहुंच गए थे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/in-the-case-of-putting-the-chopped-tail-of-a/article-88749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। शहर में गाय की पूंछ काटकर मंदिर के द्वार पर रखने के मामले में लोगों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस ने मामले में अब तक आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। वहीं मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस गिरफ्त से दूर है। </p>
<p>उधर पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत से मिलकर महामण्डलेश्वर हंसाराम उदासीन व शहर विधायक अशोक कोठारी ने दो दिन में दोषियों को गिरफ्तार करने की मोहलत दी तथा बाद में महामण्डलेश्वर हंसराम व विधायक कोठारी जब गुस्साए नौजवानों को समझाइश करने पहुंचे तो युवाओं ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें दरकिनार करते हुए जेल तिराहे से बाजार बंद करवाने निकल पडे़। इस पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया। वहीं दूसरी ओर कई व्यापारियों ने स्थिति को भांप अपने प्रतिष्ठान स्वयं ही बंद कर दिये। </p>
<p>इस बीच अजमेर रोड पर प्रदर्शनकारियों ने कुछ जगह तोड़फोड़ कर दी तथा कलक्ट्रेट के समीप जमा होकर धरने पर बैठने लगे, इस पर पुलिस ने बल प्रयोग कर यहां से भी उन्हें खदेड़ा। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फैंकना शुरू कर दिया । पथराव से एक थानेदार सहित एक दर्जन पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए निरोधात्मक कार्यवाही कर प्रदर्शन कर रहे 22 के करीब प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं 50 के लगभग दुपहिया वाहन जब्त कर लिए। दिनभर पुलिस व प्रदर्शनकारियों में टकराव चलता रहा। गौरतलब है कि कोतवाली थाना क्षेत्र के बड़ला चौराहा के समीप भवानीनगर पुलिस चौकी के सामने वीर हनुमान मंदिर के प्रवेश द्वार पर रविवार सुबह गाय की कटी हुई पूंछ मिली थी। वहीं गाय भी समीप ही लहूलुहान हालत में मिली थी। इस घटना के बाद शहर में माहौल गरमा गया और तनावपूर्ण स्थिति हो गई। आसपास के लोगों के साथ ही हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी, संत महंत मौके पर पहुंच गए थे। </p>
<p><strong>हमने बंद का आव्हान नहीं किया</strong><br />एसपी से मिलने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल में शामिल संत-महंत और विधायक अशोक कोठारी ने पुलिस अधीक्षक से कहा कि उन्होंने बंद नहीं बुलाया है। न मार्केट बंद करने की किसी से अपील कर रहे हैं, आरोपियों को गिरफ्तार करने की ही मांग है। एसपी दुष्यंत ने लोगों से शांति की अपील की है। वहीं शहर में  एडिशनल एसपी विमल सिंह के साथ ही पुलिस उपाधीक्षक शहर व सदर, शहरी क्षेत्र के थाना प्रभारियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के थाना प्रभारियों को भी शहर में तैनात किया गया है। इसके अलावा पुलिस लाइन व आरएसी के जाब्ते को भी शहर में तैनात किया गया है। </p>
<p>गौवंश को घायल करने वाले आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस इसके प्रयास कर रही है। शहर में शांति व्यवस्था कायम है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है, जो हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। <br />नमित मेहता, जिला कलक्टर, भीलवाड़ा। </p>
<p>आमजन किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान ना दें, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखें। भ्रामक वीडियो तथा सूचनाएं सोशल मीडिया पर शेयर न करें। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दे। मंदिर के बाहर गौवंश की कटी हुई पूंछ डालने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 8 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है तथा इस निंदनीय घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। <br />-राजन दुष्यंत, जिला पुलिस अधीक्षक, भीलवाड़ा </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Aug 2024 11:09:08 +0530</pubDate>
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                <title>भीलवाड़ा में असामाजिक तत्वों ने गाय की पूंछ काट कर मंदिर के बाहर डाली</title>
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                        <![CDATA[सड़कों पर उतरे हिन्दू संगठन, पुलिस से टकराव, पथराव, तोड़फोड़, साधु-संतों ने दिया धरना, पथराव से डीएसपी की गाड़ी का फूटा शीशा, पुलिस ने फटकारी लाठियां ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/in-bhilwara-anti-social-elements-cut-off-the-tail-of-a/article-88643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। कृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले अज्ञात असामाजिक तत्वों ने औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर बीती रात एक गाय की पूंछ काटकर भवानीनगर पुलिस चौकी के सामने स्थित हनुमान मंदिर के द्वार पर डाल दी।</p>
<p>सुबह जब महिलाएं मंदिर पहुंची तो वहां गाय की कटी पूंछ देखकर सहम गई। वहीं  सूचना के बाद बड़ी संख्या में हिन्दू संगठनों के लोग मंदिर के वहां जमा हो गए। वहीं गाय भी वहां से कुछ दूरी पर बैठी मिली तथा खून बिखराथा। इस बीच हिन्दू संगठनों के लोगों ने दोषियों की  तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते देखते भीड़ उग्र होने लगी जिसे पुलिस ने समझाइश का प्रयास किया। लेकिन उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस ने भी भीड़ को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। वहीं पथराव से डिप्टी के वाहन का कांच टूट गया। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन शाम 8 घंटे तक चला। इसके चलते शहर में तनावपूर्ण माहौल रहा।</p>
<p>सांसद दामोदर अग्रवाल, कलक्टर नमित मेहता, एसपी राजन दुष्यंत ने हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों से बात की और दोषियों की अतिशीघ्र गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया। तब जाकर माहौल शांत हुआ। वहीं महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन ने घटना को लेकर विरोध जताते कहा कि पुलिस को बार-बार मोहलत दी गई फिर भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होने पर बेमियादी भीलवाड़ा बंद की भी चेतावनी दी। </p>
<p><strong>पुलिस कर रही समाज कंटकों की तलाश<br /></strong>पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने कहा कि घटना को लेकर कोतवाली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं उनकी तलाश के लिए भी टीमें गठित कर दी गई है। टीमें घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। वहीं कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 10:50:27 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर अकाल मौत मर रहे गौवंश</title>
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                        <![CDATA[रोज दुर्घटना का शिकार हो रहे मवेशी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/cows-are-dying-premature-deaths-on-the-roads/article-87746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>देवरी। क्षेत्र के लोग लंबे समय से गौशाला बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं देने के कारण जानवर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्येक कस्बे में एक गोल साल का निर्माण कर दिया जाए तो सड़कों पर फैलने वाले आवारा मवेशियों को अकाल मौत नहीं मरना पड़ेगा। देवरी कस्बे सहित क्षेत्र के आसपास गोवंश के लिए गौशाला नहीं होने के कारण दुर्घटना से ग्रस्त जानवर सड़कों किनारे पड़े रहते है। जिनका रोज आर एस एस के लोग दुर्घटना से ग्रस्त जानवरों का इलाज कर रहे हैं।  गोलू पाल, मयंक सोनी,राहुल राठौर, लक्की सिंह ने बताया कि बारिश के दिनों में जानवरों के लिए अधिक समस्या हो रही है। खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर अति कृमियों ने अतिक्रमण कर रखा है। तो वहीं चारागाह भूमि पर भी अतिक्रमण होने के कारण जानवरों के लिए सड़कों के अलावा कोई स्थान नहीं है।  कस्बे के नेशनल हाईवे से लेकर सभी छोटे बड़े मार्गों पर वाहनों से गोवंश दुर्घटना का शिकार हो रहा है कई जानवर इलाज और देख-देख की आवाज में जान गवा रहे हैं कस्बे के आसपास दर्जनों गांव आते हैं लेकिन किसी भी गांव या कस्बे में गौशाला नहीं है जिसके चलते गोवंश की देखभाल नहीं हो पा रही है </p>
<p><strong>गौशाला बने तो मिले राहत</strong><br />बारिश में चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ होने के कारण जानवरों को बैठने तक के लिए स्थान नहीं होने के कारण सड़कों की शरण लेकर जानवर पड़े हुए हैं।  ग्रामीण लंबे समय से गौशाला बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन स्थानीय नेताओं की अनदेखी के कारण यह मांग यही तक सीमित रह जाती है। अगर जनप्रतिनिधि विधानसभा में इन मुद्दों को उठाएं तो बड़े सभी कस्बे में गौशाला निर्माण हो जाए तो गोवंश को अकाल मौत का शिकार होने से बचाया जा सकता है। </p>
<p><strong>रोज दुर्घटना का शिकार हो रहा गौवंश</strong><br />बीते एक माह से आए दिन इलाज करा कर जानवरों को राहत पहुंचाने का कार्य कस्बे के युवा कर रहे हैं। सोमवार को कस्बे में एक गाय की बछिया को अज्ञात बहन ने टक्कर मार दी जिसका इलाज डॉक्टर रिंकू मीणा से कराया गया। इससे पूर्व मुख्य बाजार में गे बीमारी से दो दिन तक रोड पर पड़ी रही जिसे कस्बे के युवाओं ने इलाज करा कर दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया। अगर क्षेत्र में सरकार द्वारा गौशाला का निर्माण कर दिया जाए तो सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होने वाले जानवरों सही प्रकार से देखभाल हो सकेगी। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से गौशाला बनवाने की मांग की। </p>
<p>बीते कई दिनों से जानवर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। जिनका इलाज कस्बे के युवा अपने स्तर पर कराकर सड़कों से दूर जानवरों को कर देते हैं।  क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस बात को गंभीरता से लेते हुए गौशाला निर्माण करना चाहिए। <br /><strong>- गोलू पाल, कस्बेवासी।  </strong></p>
<p>चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, जानवरों को बैठने के लिए भी स्थान नहीं बचा है।  अगर क्षेत्र में जानवरों को अकाल मौत से बचाना है तो गौशाला निर्माण करना चाहिए।<br /><strong>- लकी शक्तावत, ग्रामीण युवा</strong></p>
<p>बरसात के दिनों से लेकर बारह महीने ही गौवंश दुर्घटना का शिकार हो रहा है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं होने के कारण कई जानवर मौत का शिकार भी हो रहे हैं। दुर्घटना में घायल गोवंश का रोज निजी खर्चे पर इलाज कराया जा रहा है अगर गौशाला का निर्माण हो जाये तो राहत मिलेगी। <br /><strong>- राहुल राठौर, ग्रामीण युवा। </strong></p>
<p>गौवंश की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर गौशाला निर्माण करने के प्रयास किए जाएंगे। जिससे अकाल मौत मरने वाले गौवंश पर अंकुश लग सकेगा।  करण सहरिया, सरपंच, देवरी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 18:21:09 +0530</pubDate>
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                <title>गौ मूत्र व गोबर पर सरकारी फोकस की जरूरत, बन सकती है इंडस्ट्री</title>
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                        <![CDATA[गौपालन को बढ़ावा देने से जहां गौशालाओं में गायों को रखने की जगह की कमी की समस्या दूर होगी वहीं गायों की दर्दनाक मौत के सिलसिले में भी कमी आएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-focus-needed-on-cow-urine-and-dung--industry-can-be-formed/article-69276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/cow.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशुपालन कर्म रोजगार के साथ ही किसानों की दैनिक आय का अच्छा जरिया भी है। ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि गाय के दूध के जरिए ही आय अर्जित की जा सकती है। गाय के दूध से कई उत्पाद बनाए जाते हैं जिनमें पनीर, दही, घी, आइसक्रीम और मक्खन शामिल हैं। किंतु अब गाय के गोबर के उपयोग से कई तरह के उत्पाद बनाए जाने लगे हैं। पशुपालन के महत्व को देखते हुए ही सरकार को गोपालन के लिए किसानों व आमजन को बढ़ावा देने के  लिए सब्सिडी प्रदान करना चाहिए जिससे वह अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। कुछ किसान बड़े स्तर पर गोपालन कर रहे हैं लेकिन आमजन व किसान भी पशुपालन को व्यवसाय के तौर पर अपनाए इसके लिए सरकारी प्रयास जरूरी हैं। गौपालन को बढ़ावा देने से जहां गौशालाओं में गायों को रखने की जगह की कमी की समस्या दूर होगी वहीं गायों की दर्दनाक मौत के सिलसिले में भी कमी आएगी। हमारे यहां गायों को पूजा जाता है। अगर अनुदान पर व्यवसाय शुरू होगा तो उसका फायदा यह होगा कि किसानों व आमजन की आय बढ़ेगी, इससे बनने वाले बाय प्रोडक्ट्स की इंडस्ट्री डलेगी तो लोगों को रोजगार मिलेगा। गोबर की बर्बादी भी नहीं होगी। दूध देने वाली गाय एवं दूध न देने वाली गाय दोनों ही इसमें उपयोगी रहेगी। आज सड़कों पर आए दिन गौवंश की मृत्यु हो रही है, खाने को चारा नहीं मिलता, गौ शाला में गौवंश की हालत ठीक नहीं है। कुपोषण का शिकार हो रही है, सड़कों पर आवारा छोड़ दी जाती है। यदि काऊ डंग इन्डस्ट्री का विकास होगा तो  गौवंश का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और गोबर से बनने वाले उत्पादों  का कारोबार भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में कारगर साबित होगा।</p>
<p><strong>गाय के गोबर व गौमूत्र से बनने वाले उत्पाद </strong><br />गौमूत्र से  कैंसर की दवाएं तक बनाई जा रही है। गोबर का इस्तेमाल रसोई गैस से लेकर देसी खाद और जैव उर्वरक बनाने में किया जा रहा है।   गोबर से ऑर्गेनिक पेंट, कागज, कैरी बैग, मैट से लेकर गमले, ईंट, लेंटर की सामग्री, हवन सामग्री,प्लास्टर का मसाला और दीवार एवं फर्श को लीपने के लिए सामग्री तैयार की जाती है। इसे गौ क्रीट तकनीक कहा जाता है। गोबर के जरिए पत्तल,चप्पल,मूर्तियां, मच्छर मार अगरबत्ती ,बायोगैस प्लांट, बर्तन, धूप, अगरबत्ती, दीपक, पर्स, अबीर गुलाल, बायोगैस कार कई इको-फ्रैंडली प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं, जो कैमिकल प्रोडक्ट्स का अच्छा विकल्प हैं। गोबर का उपयोग करके  सीएनजी प्लांट, जीवामृत, बीजामृत, पंचगव्य, संजीवक, नाडेफ कंपोस्ट आदि बनाए जाते हैं। गौमूत्र और नीम की पत्तियों से नीमास्त्र बनाया जाता है, जिसे प्राकृतिक कीटनाशक भी कहते हैं। गोबर से गौअर्क, दंत मंजन, साबुन, सजावट के सामान, माला, चूड़ियां, मोबाइल स्टीकर, नेचुरल पेस्टीसाइड, कैमिकलमुक्त फिनाइल, घर की सजावट का सामान, फोटो फ्रेम, दीवार की घड़ी, ट्रॉफी, लकड़ी आदि कई तरह के प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं । गोबर से बनी लकड़ी का उपयोग पूजा पाठ के दौरान हवन में अग्नि जलाने, अंतिम संस्कार एवं अन्य कामों में भी किया जाता है। गोबर की लकड़ी काफी समय तक जलती रहती हैं, इसलिए अग्नि जलाने के इसका उपयोग होता है।</p>
<p>गोबर से सामान बनाने के फायदे: गोबर के जरिए कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं। जिसके जरिए प्रदूषण कम हो सकता है। इसके अलावा ट्रॉफी जैसी चीजों के लिए बहुत से पेड़ काटे जाते हैं। अगर गोबर के जरिए ये चीजें बनाई गई तो इससे न केवल पेड़ कम कटेंगे बल्कि प्लास्टिक का इस्तेमाल भी घट जाएगा। गाय के गोबर से कई उत्पाद बनते हैं। आज जब गोबर से विभिन्न उत्पादों को बनाया जा रहा है, ऐसे में गाय से आर्थिक विकास में भी सहायता हो रही है तो सरकार और प्रशासन को इनकी तरफ ध्यान दिए जाने की जरुरत है।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने लोगो की राय को जाना </strong><br />गौशाला को सरकार की तरफ से अनुदान दिया ही जाता है। गौशाला में गोबर का व गौमूत्र का उपयोग कर ही रहे है। इनके लिए प्रशिक्षण भी गौशाला वाले आयोजित करते रहते हैं। जयपुर से गौशाला वाले आते हैं इनको प्रशिक्षित भी करते हैं। आम आदमी जिनके बड़ी डेयरी फार्म है उनके पास गोबर गैस प्लांट स्वयं के है। वर्मी कंपोस्ट का भी प्लांट है। सब्सिडाइज्ड रेड पर पशुपालको को जमीन दे तो यह सरकार का पॉलिसी मैटर है। लोन इनको मिल ही रहा है। लोन की सब्सिडी भी सरकार की योजनाओं में आती हैं। डेयरी के लिए लोन मिलता है।  सामान्य गोपालक जिनके पास बड़ी संख्या में गोवंश है। वो तो गोबर गैस प्लांट, वर्मी कंपोस्ट प्लांट चला ही रहे है। मिल्क प्रोडक्ट्स  दूध, दही, पनीर  छाछ सभी बना रहे है। सारे मॉर्डन डेयरी फार्म है। मैकेनिज्ड है। अभी सेन्ट्रल गवर्नमेंट का ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म का प्रोजेक्ट भी आया है। उसके लिए भी हमारे पास गाइडलाइन है । अगर कोई बड़ा फार्मर लेना चाहे तो वह ले सकते है। इसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी है।<br /><strong>- डॉ. गिरीश विट्ठल राव सालफले, उपनिदेशक पशुपालन विभाग कोटा</strong></p>
<p>सरकार ने देवनारायण योजना में गौपालकों को जगह दे दी है। सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा पशुओं की भी समस्या नहीं हैं। मुख्य समस्या गौशालाओं में गायों की हैं। सबसे ज्यादा वहां गायों की  मौत हो रही है। हमें गायों के दूध पर फोकस नहीं करके उनके वेस्ट प्रोडक्ट यानि गाय के गोबर व गौ मूत्र से बनने वाले जो प्रॉडक्ट्स हैं उन पर फोकस करना चाहिए। उनकी ज्यादा से ज्यादा अवेयरनैस होगी तो लोग उन्हें खरीदेगें, डिमांड  बढ़ेगी तो कहीं ना कहीं मैन्यूफैक्चरिंग भी होगी। आमदनी भी अच्छी मिलेगी। वहीं गायों की बीमारियों की समस्या भी हल होगी। उनकी सेहत भी सही रहेगी। लोग भी आॅर्गेनिक लाइफ स्टाइल, पशुधन को सपोर्ट करेगें, तो उनकी सेहत के लिए भी अच्छा रहेगा।<br /><strong>-अमनप्रति सिंह, को-फाउंडर, गौ आॅर्गेनिक्स</strong></p>
<p>किसानों की आय को बढ़ाने के लिए सरकार की दो पॉलिसी है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग और आॅर्गेनिक फार्मिंग हैं । इन दोनों मुख्य इश्यू का निराकरण हो सकता है अगर हम गौ संरक्षण कर सके। गायों को पालने के लिए किसानों को प्रेरित करें चाहे सब्सिडी देकर, जमीन उपलब्ध करवाकर या अन्य संसाधन उपलब्ध करवाकर। किसानों को इस तरफ मोटीवेट करें तो  किसान खेत के साथ-साथ गौ पालन भी करेगा तो इंटीग्रेटेड फार्मिंग नेचुरली हो जाएगी। ये पहले भी होता था। गाय के  बाय प्रॉडक्ट्स  चाहे गोबर या गौमूत्र या उसके सींग के रूप में मिले  उससे भी आॅर्गेनिक फार्मिंग  में काफी फायदा मिलता है। आॅर्गेनिक खेती में जो इनपुट उपयोग किए जा रहें हैं वो गाय के पालन से बायप्रॉडक्ट के रूप में मिलेगें जिससे हम आॅर्गेनिक कल्टीवेशन की तरफ भी किसान को मोटीवेट कर पाएंगे। इन दोनों से उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। सड़कों पर घूम रही गायों  को कोई किसान  पालने को तैयार नहीं होता । इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। सरकार का कहीं ना कहीं उन गायों को पकड़ने, गौशाला उपलब्ध कराने व दूसरे मैनेजमेंट में कई सारा खर्चा हो रहा है। उस खर्चे को सरकार किसानों की तरफ डायवर्ट करें और एक नीति बनाए कि जो किसान इतनी गायों के झुंड को अपने यहां पालेगा उसे लगभग इतनी सब्सिडी पर गाय के हिसाब से सब्सिड़ी मुहैया कराएंगे।ऐसा करने पर  किसान निश्चित रूप से उन्हें पालेगा ।  सरकार को ब्रीडिंग इंप्रूवमेंट पर भी ध्यान देना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. एम.सी. जैन, डीन, कृषि महाविद्यालय, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 15:47:58 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गौशाला में कई दिन बाद पहुंचा 85 क्विंटल हरा चारा</title>
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                        <![CDATA[निगम की गौशाला में हरा चारा नहीं होने से आ रही समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---85-quintals-of-green-fodder-reached-the-cowshed-after-several-days/article-65790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/asar-khabar-ka1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में कई दिन बाद मंगलवार को 85 क्विंटल हरा चारा पहुंचा। जिससे गायों को भरपेट चारा मिला। नगर निगम द्वारा संवेदक को गौशाला व कायन हाउस में हरा चारा सप्लाई का ठेका दिया गया है। जिसके तहत संवेदक को दोनों जगह पर रोजाना पर्याप्त मात्रा में चारा सप्लाई करना है। साथ ही गौशाला के स्टोर में भी चारे का पर्याप्त स्टॉक रखना है। लेकिन पिछले कई दिन से गौशाला में संवेदक द्वारा चारा सप्लाई ही नहीं किया जा रहा था। जब भी सप्लाई किया गया तो उसकी मात्रा काफी कम थी। इसे लेकर निगम अधिकारियों को भी गौशाला समिति अध्यक्ष ने अवगत कराया था। साथ ही महापौर ने भी आयुक्त को यू ओ नोट लिखकर संवेदक को पाबंद करने व कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि संवेदक द्वारा गौशाला में मंगलवार को लोडिंग वाहनों से 85 क्विंटल हरा चारा भिजवाया गया। जिससे गौशाला में गायों को भरपेट चारा मिल सका। सिंह ने बताया कि संवेदक द्वारा बीच-बीच में गड़बड़ी कर पर्याप्त चारा नहीं दिया जाता। जिससे गौवंश को चारा नहीं मिल पाता। ऐसे में या तो उन्हें भूसे से ही काम चलाना पड़ता है। साथ ही दान दाताओं के सहयोग से हरा चारा लेकर  किशोरपुरा से बंधा धर्मपुरा गौशाला तक पहुंचाया गया था। जिससे इतने दिन से काम चल रहा था। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि निगम की गौशाला में हरा चारा नहीं होने से आ रही समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था। समाचार पत्र में 26 दिसम्बर के अंक में चार दिन से गौशाला में हरा चारा नहीं, भूसे से चलाना पड़ रहा काम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद अगले ही दिन कोटा दक्षिण महापौर ने भी आयुक्त को यू ओ नोट लिखा था। गौशाला समिति अध्यक्ष ने दान दाताओं से सहयोग से हरा चारा पहुंचाया था। गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अधिकारियों द्वारा संवेदक को पाबंद करने के बाद ही गौशाला में कई दिन बाद इतनी मात्रा में हरा चारा पहुंचा है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jan 2024 14:05:45 +0530</pubDate>
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                <title>गाय को बचाने में बाइक सवार दंपती घायल, गाय भी गंभीर चोटिल </title>
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                        <![CDATA[रूपवास मोड के पास अचानक एक गाय सडक पर आ गई। उसको बचाते समय बाईक असन्तुलित होकर गाय से टकरा गई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/in-order-to-save-the-cow-the-couple-riding-the/article-29913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/57.jpg" alt=""></a><br /><p>उनियारा।  उनियारा क्षेत्र के ककोड़ गांव के समीप रूपवास मोड के पास एक बाईक पर सवार दंपति सड़क दुर्घटना में गाय के अचानक सडक पर आ जाने से उसे बचाने के प्रयास मे घायल हो गए। जिन्हें टोंक से आ रही एम्बुलेंस ने वापस मोड़ कर घायलों को टोंक ले जा कर उपचार के लिए भर्ती करवाया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे ककोड़ चौकी प्रभारी सुखलाल ने बताया कि राधेश्याम बैरवा अपनी पत्नी राज बाई बैरवा को बाईक पर बैठाकर टोंक से उनियारा की तरफ अपने गांव जा रहा था। इसी मध्य एनएच 116 ककोड़ गांव के समीप रूपवास मोड के पास अचानक एक गाय सडक पर आ गई। उसको बचाते समय बाईक असन्तुलित होकर गाय से टकरा गई।</p>
<p> जिसमें बाइक चालक राधेश्याम बैरवा व उसकी पत्नी राज बाई बैरवा गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनको मौके पर ही टोंक तरफ से आ रही एंबुलेंस ने वापस मुड़ कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया । जहां घायलों का उपचार जारी है। इधर बाईक के टकराने से गाय भी गंभीर रूप से चोटिल है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 11:39:14 +0530</pubDate>
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