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                <title>Commemoration - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Commemoration RSS Feed</description>
                
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                <title>42 वर्षों से संस्कृति की पहचान बनी गुरुदेव की प्रतिमा, स्थापना दिवस पर मूर्तिकार डॉ. सुमहेन्द्र को भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ऐतिहासिक प्रतिमा के स्थापना दिवस पर कलाकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कलावृत्त और त्रिमूर्ति संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में दो दिवसीय लैंडस्केप शिविर का आयोजन हुआ, जहां वरिष्ठ कलाकारों और विद्यार्थियों ने गुरुदेव की प्रतिमा के ऑन-द-स्पॉट चित्र बनाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/emotional-tribute-to-sculptor-dr-sumhendra-on-the-installation-day/article-156492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की ऐतिहासिक प्रतिमा के स्थापना दिवस पर कला और संस्कृति जगत की हस्तियों ने वरिष्ठ चित्रकार एवं मूर्तिकार डॉ. सुमहेन्द्र को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कलावृत्त एवं त्रिमूर्ति संस्था के संयुक्त तत्वावधान में 9 जून 1982 को स्थापित इस प्रतिमा का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर द्वारा किया गया था।</p>
<p>स्थापना दिवस के अवसर पर कलाकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रगान के साथ गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के तहत कलावृत्त द्वारा दो दिवसीय लैंडस्केप शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें वरिष्ठ कलाकारों और राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों ने रवीन्द्र मंच एवं गुरुदेव की प्रतिमा के ऑन-द-स्पॉट चित्र उकेरे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:02:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साहित्य जगत में शोक की लहर: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन ; डिमेंशिया से थे पीड़ित, जानें कैसा रहा उनका जीवन?</title>
                                    <description><![CDATA[मोहब्बत और तन्हाई को खूबसूरत अल्फाज देने वाले प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र का बक़रीद के दिन 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। उनके जाने से साहित्य जगत में शोक की लहर है, लेकिन उनकी गजलें उर्दू अदब का गौरव बनी रहेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/wave-of-mourning-in-the-literary-world-famous-poet-dr/article-155275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bashir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी को अपने अल्फाजों में नई पहचान देने वाले मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का बकरीद के दिन 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने घर पर ही आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शो की लहर छा गई पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे काफी लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। लंबी बीमारी के कारण हालत ये हो गई थी कि वे अपने करीबियों और परिचितों को पहचान भी नहीं पा रहे थे। बशीर बद्र ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाई दी और यही कारण है कि उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं। </p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2021/01/07/bashirbadr26613968835x547-m_1609959067.jpg" alt="When Dr. Bashir Badr, a Padmashree poet of Bhopal wrote his PhD thesis, 87  lions of his own were included in it."></img></p>
<p>डॉ. बशीर बद्र (असल नाम सय्यद मुहम्मद बशीर) 15 फरवरी 1935 को कानपुर में पैदा हुए। उत्तर प्रदेश में उनका पैतृक स्थान फ़ैज़ाबाद ज़िले का मौज़ा बक़िया है। उनका वास्तविक नाम सैय्यद मोहम्मद बशीर था। उनके पिता सैय्यद मोहम्मद नजीर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर और इटावा में हुई। हाई स्कूल के बाद पिता के निधन के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो गई और उन्हें कम उम्र में ही 85 रुपए मासिक पर पुलिस विभाग में नौकरी करनी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा और साहित्य से अपना संबंध नहीं टूटने दिया।</p>
<p><img src="https://static.abplive.com/wp-content/uploads/sites/2/2021/01/06043521/basirbadra.jpg" alt="Urdu poet Bashir Badr received his PHD degree at the age of 85 | अज़ीम शायर बशीर  बद्र को 47 साल बाद मिली PHD की डिग्री"></img></p>
<p>बचपन से ही उन्हें शायरी का शौक था। सातवीं कक्षा में उनकी पहली गजल प्रतिष्ठित पत्रिका ‘निगार’ में प्रकाशित हुई थी। युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनकी गजलें भारत और पाकिस्तान की साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। बाद में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं। उनका शोध विषय ‘आजादी के बाद उर्दू गजल का आलोचनात्मक अध्ययन’ था।</p>
<p><img src="https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2017/06/11/bashir-badr_1497170073.jpeg?w=750&amp;dpr=1.0" alt="Padmshri Dr Bashir Badr; A Most Popular Shayer - Amar Ujala Kavya -  पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र:सिर्फ़ शायर ही नहीं एक नज़रिया भी हैं..."></img></p>
<p>वर्ष 1967 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी और साहित्य तथा शिक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1974 में पीएचडी पूरी करने के बाद वे मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में व्याख्याता नियुक्त हुए। वर्ष 1974 से 1990 के बीच उनकी शायरी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और वे देश-विदेश के मुशायरों में लोकप्रिय शायर बन गए। डॉ. बशीर बद्र ने उर्दू गजल को पारंपरिक फारसी और अरबी प्रभाव से निकालकर बोलचाल की भाषा से जोड़ा। उन्होंने गजल में ऐसे शब्दों और अनुभवों को शामिल किया, जिन्हें पहले उर्दू शायरी का हिस्सा नहीं माना जाता था। उनकी शायरी में गांव की मिट्टी की खुशबू भी है और शहर की जिंदगी की तल्ख सच्चाइयां भी।</p>
<p><img src="https://resize.indiatv.in/resize/newbucket/1200_-/2026/05/bashir-badr-1779961586.webp" alt="मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, 91 की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा, आखिरी  दिनों में भूल गए थे खुद के शेर - India TV Hindi"></img></p>
<p>उनकी गजलें मोहब्बत, दर्द, अकेलेपन, रिश्तों और बदलते समाज की संवेदनाओं को बेहद सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबां पर हैं। ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ और ‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’ जैसे शेर उन्हें आम जनमानस से जोड़ते हैं।</p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/thumb/1200x900/web2images/521/2020/11/24/orig_35_1606165508.jpg" alt="Bashir Badr no longer recognizes even his wife, Iarshad-Irshad is said when  someone misses a Mushaira."></img></p>
<p>वर्ष 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था। इसके बाद वे भोपाल आकर बस गए। उन्होंने बाद में डॉ. राहत सुल्तान से विवाह किया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी स्मरण शक्ति कमजोर होती गई और वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित थे। डॉ. बशीर बद्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके प्रमुख गजल संग्रहों में ‘इकाई’, ‘इमेज’, ‘आमद’, ‘आस’, ‘आसमान’ और ‘आहट’ शामिल हैं। उर्दू गजल में नए प्रयोगों, सरल भाषा और मानवीय संवेदनाओं के कारण डॉ. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू शायरी का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों को भी लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:59:19 +0530</pubDate>
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                <title>परिंडा लगाओ अभियान: पक्षियों के लिए दाना-पानी का संदेश, समाजसेवियों का सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के महावीर उद्यान में संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में “परिंडा लगाओ अभियान” का शुभारंभ हुआ। आह्वान जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों को दाना-पानी उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में रमेश ओझा और बृजेन्द्र चौधरी को उल्लेखनीय समाज सेवा और गौसेवा के लिए सम्मानित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/parinda-laao-campaign-message-of-food-and-water-for-birds/article-155098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बजाज नगर स्थित महावीर उद्यान में आह्वान जनकल्याण एवं सेवा समिति की ओर से गौसेवा एवं मानव सेवा के लिए समर्पित प्रेरणास्रोत संत दुलाराम कुलरिया की स्मृति में “परिंडा लगाओ अभियान” का शुभारंभ किया गया। भीषण गर्मी में पक्षियों को दाना-पानी उपलब्ध कराने और आमजन में जीव दया का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान ने सामाजिक सरोकारों की अनूठी मिसाल पेश की। कार्यक्रम के दौरान संस्था संरक्षक एवं ऑल इंडिया ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय सचिव (समन्वय) रमेश ओझा तथा अंतरराष्ट्रीय फिटनेस मास्टर एवं किसान नेता बृजेन्द्र चौधरी को समाज सेवा, गौसेवा और जनहित के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्था सचिव नफीस ने कहा कि आज के दौर में मानव सेवा के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सेवा भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:55:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गुर्जर समाज मनाएगा देवनारायण भगवान राष्ट्रीय महोत्सव आरक्षण आंदोलन के शहीदों को दी जाएगी श्रद्धांजलि </title>
                                    <description><![CDATA[सवाई माधोपुर के कुशाली दर्रा में 28 से 30 मई तक तीन दिवसीय श्री देवनारायण भगवान राष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होगा। गुर्जर देवसेना द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देशभर से करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु जुटेंगे। महोत्सव में धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी और गुर्जर आरक्षण आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gurjar-community-will-celebrate-devnarayan-bhagwan-national-festival-tribute-will/article-154495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)--111.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद हुए समाज के नेताओं को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से सवाई माधोपुर के कुशाली दर्रा में 28 से 30 मई तक तीन दिवसीय श्री देवनारायण भगवान राष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होगा। कार्यक्रम में देशभर से गुर्जर समाज के लोग भाग लेंगे। अखिल भारतीय गुर्जर देवसेना एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता में बताया कि महोत्सव का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति, एकता और भाईचारे को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजन होंगे तथा आरक्षण आंदोलन के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।</p>
<p>महोत्सव की शुरुआत 28 मई को उद्घाटन समारोह एवं कथा कार्यक्रम से होगी। 29 मई को भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी, जबकि 30 मई को श्रद्धांजलि सभा, गुर्जर समाज संसद एवं समापन समारोह होगा। कार्यक्रम में भव्य कथा, हरिकीर्तन, समाज जागरूकता कार्यक्रम और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजकों के अनुसार महोत्सव में देशभर से करीब एक से डेढ़ लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न प्रदेशों की गुर्जर संस्कृति का प्रदर्शन भी किया जाएगा। समारोह में सर्व समाज, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है। आयोजन स्थल पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:30:23 +0530</pubDate>
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