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                <title>Framework - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में सख्त नया कानूनी ढांचा लाने की तैयारी में सरकार : आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक बनाएंगे सशक्त, एजेंसियों को मिलेंगे व्यापक अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार संगठित अपराध पर शिकंजा कसने के लिए सख्त 'पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक ला रही है। प्रस्तावित कानून में बिना वारंट गिरफ्तारी, गैर-जमानती अपराध, 12 माह तक निवारक हिरासत, संपत्ति जब्ती और आरोपियों को शरण देने वालों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। सरकार इसे अपराध नियंत्रण के लिए जरूरी, जबकि विपक्ष दुरुपयोग की आशंका जता रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-preparation-to-bring-a-strict-new-legal-framework-in/article-158283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/suvendu-adhikari.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट संचालन, रंगदारी, भूमि हड़पने और संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए शुभेंदु अधिकारी सरकार एक सख्त नया कानूनी ढांचा लाने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य असामाजिक तत्वों और आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी तथा सशक्त बनाना है। पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, जिसे सोमवार को विधानसभा में पेश किया जाना है, यदि पारित हो जाता है, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासन को असामाजिक तत्वों तथा संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार मिल जायेंगे। यह विधेयक न केवल आपराधिक गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल लोगों को निशाना बनाता है, बल्कि ऐसे लोगों को पनाह या मदद देने के आरोपी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान करता है। प्रस्तावित कानून के सबसे कड़े प्रावधानों में से एक उन लोगों से संबंधित है, जो आरोपियों को अधिकारियों से बचने में मदद करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस विधेयक के तहत, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी ऐसे व्यक्ति को शरण देता है, छुपाता है या उसकी सहायता करता है जिसके विरुद्ध कानून के तहत हिरासत या निष्कासन आदेश जारी किए गए हैं, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर, ऐसे अपराधों के लिए दो वर्ष तक की कैद और भारी जुर्माना हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस विधेयक में "गुंडा" शब्द की कानूनी परिभाषा भी दी गई है। मसौदे के अनुसार, किसी व्यक्ति को गुंडा तब माना जा सकता है जब वह व्यक्तिगत रूप से या किसी गिरोह, समूह या सिंडिकेट के सदस्य या नेता के रूप में नियमित रूप से असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह विधेयक कई मौजूदा कानूनों के अंतर्गत आने वाले अपराधों को कवर करता है, जिनमें शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के गंभीर प्रावधान शामिल हैं। इसके दायरे में सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाना, नागरिकों में डर पैदा करना, कारोबार में बाधा डालना, ज़मीन या संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, अवैध खनन, बिना मंज़ूरी के रेत और पत्थर निकालना और वन संसाधनों को नष्ट करने जैसी गतिविधियाँ भी शामिल की गई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों को 'संज्ञेय' (बिना वारंट गिरफ़्तारी योग्य) और 'गैर-ज़मानती' माना जाएगा। इससे पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी करने का अधिकार मिलेगा और अदालतों से तुरंत जमानत मिलने की संभावना कम हो जाएगी। इस विधेयक में 'निवारक हिरासत' (प्रवेंटिव डिटेंशन) के प्रावधान भी हैं, जो राज्य सरकार और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को काफी अधिकार देते हैं। पुलिस आयुक्त, ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस उप महानिरीक्षक रैंक के अधिकारियों समेत अन्य अधिकारियों को लोगों को 12 महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार होगा, अगर उन्हें लगता है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है या असामाजिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इन शक्तियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए, विधेयक में एक सलाहकार बोर्ड के गठन का प्रस्ताव है, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे। हिरासत से जुड़े मामलों को तीन सप्ताह के भीतर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना होगा और यदि हिरासत के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति को रिहा कर दिया जाएगा। </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मसौदा कानून पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को संदिग्ध स्थानों पर तलाशी लेने, व्यक्तियों या वाहनों को रोककर तलाशी लेने और असामाजिक गतिविधियों से कथित रूप से जुड़े या अवैध साधनों से अर्जित धन, दस्तावेज़ और संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राज्य प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, मौजूदा आपराधिक कानून अक्सर जबरन वसूली, गिरोह संचालन और भूमि हड़पने जैसे संगठित अपराधों से निपटने में अपर्याप्त साबित हुए हैं, और अपराधी कथित तौर पर कानूनी खामियों का फायदा उठाते हैं। </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों का दावा है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य प्रवर्तन तंत्र को  मजबूत करना और संगठित अपराध से अधिक प्रभावी ढंग से निपटना है।हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इससे प्रशासन को दी गई शक्तियों के दायरे और अधिकारियों द्वारा इसके दुरुपयोग की संभावना पर बहस छिड़ सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:26:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र पर तीखा हमला: जयराम ने लगाया ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में हेराफेरी की राजनीति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि सरकार ने सैंपलिंग ढांचे में बदलाव कर ग्रामीण मजदूरी में कृत्रिम वृद्धि दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक मजदूरी वृद्धि दर 4.3% के साथ चार साल के निचले स्तर पर है। इस आंकड़ों की बाजीगरी से उपभोग घटा है और निजी निवेश बुरी तरह प्रभावित हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-sharp-attack-on-the-centre-alleging-politics-of-manipulation/article-157731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ajiram-ramesh-17.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में हेराफेरी से कृत्रिम वृद्धि का भ्रम पैदा कर रही है, जबकि वास्तविक मजदूरी वृद्धि पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर स्तर पर है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि कांग्रेस ने 2024 में ही आगाह कर दिया था कि सरकार ने रिजर्व बैंक के माध्यम से रोजगार की परिभाषा बदलकर वित्त वर्ष 2018 के बाद 16.8 करोड़ नई नौकरियां सृजित होने का दावा किया था। अब सरकार ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों के साथ भी वैसा ही खेल कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती का मूल कारण वास्तविक मजदूरी का ठहराव है, जिससे उपभोग वृद्धि घटी है और निजी निवेश प्रभावित हुआ है। इसका असर देश के श्रमिक वर्ग पर भी पड़ा है। रमेश ने आरोप लगाया कि जून 2025 से मार्च 2026 के बीच ग्रामीण मजदूरी वृद्धि दर में दिखाई गई तेज बढ़ोतरी कार्यप्रणाली में बदलाव का परिणाम है। उनका यह भी कहना है कि श्रम ब्यूरो ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना के नया सैंपलिंग ढांचा अपनाया जिसके तहत पूर्वोत्तर के कई राज्यों, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और गोवा के श्रमिकों को नमूने में शामिल किया गया। </p>
<p>उनके अनुसार इन क्षेत्रों की औसत मजदूरी पुराने नमूने की तुलना में 50 से 55 प्रतिशत अधिक है, जिससे आंकड़ों में कृत्रिम उछाल दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक मजदूरी वृद्धि दर लगभग 4.3 प्रतिशत है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर वृद्धि है और यह पूरा मामला "आंकड़ों में हेराफेरी की राजनीति" को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ज्ञानेश कुमार ने किया बीएलओ और सुपरवाइजर्स से संवाद : BLO मेरे परिवार का हिस्सा, बोले- लोकतंत्र की सफलता में उनकी महत्ती भूमिका </title>
                                    <description><![CDATA[सीईसी ज्ञानेश कुमार ने जयपुर में 700 बीएलओ से संवाद करते हुए उन्हें निर्वाचन आयोग और मतदाताओं के बीच की अहम कड़ी बताया। उन्होंने राजस्थान द्वारा तय समय से 7 दिन पहले एसएसआर कार्य पूरा करने की सराहना की। सीईसी ने भारत की वैश्विक लोकतांत्रिक साख और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर बल दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gyanesh-kumar-interacted-with-blo-and-supervisors-blo-said-they/article-157624"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/gyanesh-kumar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि सभी बीएलओ मेरे परिवार का हिस्सा है। लोकतंत्र की सफलता में उनकी महत्ती भूमिका है। सीईसी शनिवार को सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (जेईसीसी)में बीएलओ संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग 700 बूथ स्तरीय अधिकारियों बीएलओ और सुपरवाइजर्स से संवाद कर रहे थे। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बीएलओज की तारीफ करते हुए कहा कि हमारे बीएलओ के मेहनत का ही परिणाम रहा कि हम एसआईआर का कार्य तय समय से 7 दिन पूर्व संपन्न कर पाएं।</p>
<p><strong>खम्मा धणी से की शुरुआत</strong></p>
<p>मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने संबोधन की शुरुआत राजस्थानी परंपरा के अनुरूप खम्मा घणी... कहकर की। उन्होंने कहा कि सभी बीएलओ उनके परिवार का हिस्सा हैं, और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार है। उन्होंने कहा कि 12 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में हुए एसआईआर में राजस्थान को प्रथम लाने में यहां के बीएलओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी चुनाव संविधान और विधि के अनुरूप स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न होते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि भारत इस वर्ष लोकतांत्रिक देशों के वैश्विक संगठन इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस की अध्यक्षता कर रहा है। यह संगठन विश्व के सभी देशों में स्थायी, सशक्त और समावेशी लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाली संस्था है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में चुनावों में मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि देश के नागरिकों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया एवं निर्वाचन आयोग पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>सेतु का काम करते हैं बीएलओ</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग एक संस्थागत ढांचे के रूप में कार्य करता है, किंतु चुनावों के दौरान लगभग 1.80 करोड़ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भागीदारी के साथ यह विश्व की सबसे बड़ी चुनावी संस्था बन जाता है। इस विशाल व्यवस्था में बीएलओ सबसे आधारभूत और महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो निर्वाचन आयोग और मतदाताओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं। कार्यक्रम के अंत में जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के बीएलओ से संवाद चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी कराने में नई दिशा देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:02:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;पीएम‑किसान&quot; के तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंचेंगे लगभग 18,880 करोड़ : शिवराज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल से पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत 9.44 करोड़ किसानों के खातों में राशि भेजी जाएगी। साथ ही, वे डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ग्रामीण सड़कों और मत्स्य बंदरगाह सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/under-pm-kisan-approximately-rs-18880-crore-will-reach-the-accounts/article-157383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/shivraj-singh-chouhan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले से कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, राष्ट्र को समर्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम‑किसान) की 23वीं किस्त जारी करने के साथ‑साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन तथा प्रधानमंत्री धन‑धान्य कृषि योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य आतिथ्य में पश्चिम बंगाल में होने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण समुदाय और युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार का संकल्प है कि पूर्वी भारत को कृषि, बुनियादी संरचना और औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र बनाया जाए और 20 जून का कार्यक्रम इसी विज़न को ज़मीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।</p>
<p>चौहान ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी हुगली ज़िले के तारकेश्वर से "पीएम‑किसान" की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके अंतर्गत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों की आय सुरक्षा और मज़बूत होगी। उन्होंने बताया कि केवल पश्चिम बंगाल में ही 45.35 लाख से अधिक लाभार्थी किसानों को लगभग 907 करोड़ रु. की किश्त प्राप्त होगी। इसके साथ ही राज्य में पीएम‑किसान योजना के अंतर्गत अब तक वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रु. से अधिक हो जाएगी, जबकि 2019 में योजना की शुरुआत से लेकर पूरे देश में कुल वितरण 4.46 लाख करोड़ रु. से ऊपर पहुंच जाएगा।</p>
<p>कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का भी शुभारंभ करेंगे, जिनकी संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रु. है। वित्त वर्ष 2026‑27 के दौरान इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत लगभग 28,140 करोड़ रु. मूल्य की फसलें बीमा संरक्षण के दायरे में आएंगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री मोदी एग्रीटेक प्लेटफॉर्म की शुरुआत करेंगे, जो उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित सरकारी खरीद जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराएगा। इससे किसानों को समय पर सूचनाएं, पारदर्शी सेवाएं और बेहतर बाज़ार अवसर मिलेंगे। चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का भी शुभारंभ करेंगे, जिसके तहत अनुमोदित कार्ययोजना के अनुसार वित्त वर्ष 2026‑27 में राज्य के 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। इन क्लस्टरों से 43,250 किसानों को जैव‑आधारित इनपुट, प्रशिक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच का लाभ मिलेगा, साथ ही जैव‑आधारित संसाधन केंद्रों और कृषि सखियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती की दिशा में बड़े पैमाने पर परिवर्तन को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी धन‑धान्य कृषि योजना की भी शुरुआत करेंगे, जो पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झारग्राम ज़िलों में लागू होगी। इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, भंडारण एवं प्रसंस्करण जैसी फसलोत्तर अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर पैदा होंगे।</p>
<p>ग्रामीण विकास से संबंधित पहलों की जानकारी देते हुए चौहान ने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (तीन) के अंतर्गत 213 करोड़ रु. से अधिक लागत वाली 49 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। 315 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाली ये सड़कें राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों को कस्बों और शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिससे किसानों के कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक पहुंच सकेंगे और ग्रामीण छात्रों तथा मरीजों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच भी आसान होगी।</p>
<p>मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास को पर उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री दक्षिण 24 परगना ज़िले के फ्रेजरगंज में आधुनिकीकरण एवं विस्तार के बाद तैयार मत्स्य बंदरगाह और बीरभूम ज़िले में निर्मित आधुनिक मत्स्य बाज़ार का उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं से मत्स्य अवसंरचना मजबूत होगी, मछुआरों को बेहतर भंडारण एवं विपणन सुविधाएं मिलेंगी और निर्यात क्षमता में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर तैयार होंगे।</p>
<p>पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रधानमंत्री नादिया ज़िले के हरिणघाटा में 6 करोड़ रु. से अधिक लागत से स्थापित रीजनल सीमन प्रोडक्शन लैबोरेटरी एवं बकरी सीमन बैंक का उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत स्थापित यह पूर्वी भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा है, जो वैज्ञानिक पशु प्रजनन, आनुवंशिक सुधार और पशुधन उत्पादकता वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाएगी तथा बकरी पालन से जुड़े किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।</p>
<p>चौहान ने कहा कि मत्स्य, पशुपालन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी ये सभी योजनाएं मिलकर पश्चिम बंगाल में समावेशी और टिकाऊ ग्रामीण विकास का मज़बूत आधार तैयार करेंगी। इनके माध्यम से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बेहतर आजीविका अवसर और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को ठोस बल मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में लगभग 591 करोड़ रु. की लागत वाली महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे। ये परियोजनाएं रेल ढांचा को सुदृढ़ करने, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, सुरक्षा बढ़ाने और राज्य व पूर्वी भारत के संपर्क को और मज़बूत बनाने की दिशा में अहम योगदान देंगी। प्रधानमंत्री हावड़ा में 99 करोड़ रु. की लागत से बनने वाले 300 बिस्तरों वाले नए मंडलीय रेलवे अस्पताल का शिलान्यास करेंगे, जो आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना, उन्नत जांच सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन उपचार से सुसज्जित होगा। यह अस्पताल न केवल रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों, बल्कि आसपास के नागरिकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>इसी तरह, पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में हाउर और राधामोहनपुर के बीच 71 करोड़ रु. की लागत से बनने वाले रोड ओवर ब्रिज का शिलान्यास किया जाएगा, जो रेल और सड़क दोनों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने के साथ‑साथ निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, हावड़ा ज़िले में 421 करोड़ रु. की लागत से विकसित सांकराइल‑सांतरागाछी थर्ड लाइन प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा, जिससे देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में से एक पर रैकिंग में कमी, परिचालन क्षमता में वृद्धि और यात्री तथा मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी। ये सभी रेल परियोजनाएं माल एवं यात्री परिवहन को तेज और सुरक्षित बनाने के साथ‑साथ औद्योगिक निवेश, पर्यटन और लॉजिस्टिक क्षेत्र के विकास को नयी गति देंगी। इससे पूर्वी भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल के लिए 'गति‑शक्ति' की भावना और मज़बूत होगी तथा रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसरों में वृद्धि होगी।त्र</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:10:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली : LG ने दी पुनर्वास नीति-2026 को मंजूरी, हजारों परिवारों को मिलेगा स्थायी आशियाना</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के उपराज्यपाल ने 'झुग्गी पुनर्वास नीति-2026' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत डीडीए (DDA) और डूसिब (DUSIB) अगले 45 दिनों में पांच जेजे क्लस्टरों के लिए टेंडर जारी करेंगे। योजना के तहत झुग्गीवासियों को आधुनिक आवास के साथ स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/good-news-for-slum-dwellers-in-delhi-lg-approves-rehabilitation/article-157261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/d-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को कहा कि दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 'दिल्ली स्लम एवं जेजे क्लस्टर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2026' को मंजूरी दी गयी है। संधू ने एक्स पर आज इसकी जानकारी देते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पहल को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) अगले 45 दिनों के भीतर पांच जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास के लिए टेंडर जारी करेंगे। यह योजना के पहले चरण का हिस्सा होगा और इसके जरिए झुग्गीवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। उपराज्यपाल ने कहा कि पहले चरण के बाद हर महीने कम से कम पांच नए टेंडर जारी किए जायेंगे, ताकि पुनर्वास कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सके। इससे राजधानी की विभिन्न झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। </p>
<p>इन पुनर्वास परियोजनाओं में आधुनिक आवासों के साथ स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और अन्य आवश्यक सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी। यह नीति न केवल वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करेगी, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और नियोजित शहरी विकास को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ 'विकसित दिल्ली' के लक्ष्य , को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राजधानी के भविष्य-केंद्रित शहरी विकास को नयी दिशा देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:27:21 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज: RSS पर सवाल उठाने पर भड़के विजयेंद्र, नेशनल हेराल्ड विवाद फिर गरमाया</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा नेता विजयेंद्र येदियुरप्पा ने आरएसएस पर टिप्पणी करने वाले मंत्री प्रियांक खरगे को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड विवाद में घिरी कांग्रेस से पारदर्शिता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। विजयेंद्र ने बाढ़ राहत और समाज सेवा में आरएसएस के योगदान को अतुलनीय बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/political-conflict-intensifies-in-karnataka-vijayendra-angry-over-raising-questions/article-157156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)29.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजयेद्र येदियुरप्पा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाले प्रदेश के मंत्री प्रियांक खरगे के बयान पर तीखा पलटवार किया जिससे नेशनल हेराल्ड विवाद मंगलवार को एक फिर से सामने आ गया। विजयेंद्र ने आरएसएस पर विजयेंद्र की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह "विडंबना" है कि कांग्रेस नेता पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ऐसे व्यक्ति से आती है जिसकी पार्टी को अभी भी नेशनल हेराल्ड विवाद पर साफ जवाब देने हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विजयेंद्र के बयान राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने कहा, "यह चुनिंदा नैतिक गुस्सा आला कमान को खुश करने और राजनीतिक पोजीशनिंग को सही ठहराने की एक हताश कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।" उन्होंने आरएसएस का बचाव करते हुए कहा कि संगठन की विश्वसनीयता दशकों की जनसेवा और ज़मीनी स्तर पर जुड़ाव से बनी है, न कि राजनीतिक मंज़ूरी से। उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस को कांग्रेस पार्टी से वैधता के प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है और यह पहले से ही करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने शाखाओं, आपदा राहत प्रयासों, रक्तदान अभियान और आदिवासी कल्याण कार्यक्रम के ज़रिए संगठन की पहुँच पर ज़ोर दिया और कहा कि इसका काम एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार चल रहा है। सौ से भी ज़्यादा सालों से आरएसएस के कार्यकर्ता देश भर में बाढ़ राहत कैंप, रक्तदान अभियान और समाज सेवा की पहल में शामिल होते रहे हैं।</p>
<p>विजयेंद्र ने आगे कहा कि संगठन सामुदायिक स्तर पर खुले तौर पर काम करता है। उन्होंने कहा, "कोई भी बिना किसी सूचना के अपने चुनाव क्षेत्र में आरएसएस शाखा में जा सकता है और ज़मीन पर हो रहे काम को देख सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस की आलोचना करने से उसकी जनता में पहचान नहीं बदलेगी। आरएसएस पर हमला करने से राजनीतिक नेतृत्व कुछ समय के लिए खुश हो सकता है, लेकिन इससे शासन की नाकामियां नहीं छिपेंगी या कांग्रेस पार्टी के विवादों का लंबा रिकॉर्ड नहीं मिटेगा। इस विवाद से कर्नाटक में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है, और नेशनल हेराल्ड विवाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही विचारधारा की लड़ाई में एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:55:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा बनेगा छात्र आंदोलन का केंद्र: 'छात्रों की गूंज' महारैली में जुटेंगे युवा ; राहुल गांधी ने किया देशव्यापी आह्वान, युवाओं से मांगा समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक और रद्द परीक्षाओं के खिलाफ युवाओं से 17 जून को कोटा पहुंचने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अधूरी भर्तियां युवाओं के सपनों पर प्रहार हैं। गांधी ने न्याय की आवाज बुलंद करने के लिए 'छात्रों की गूंज' महारैली में शामिल होने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kota-will-become-the-center-of-student-movement-show-of/article-157071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देशभर के युवाओं से छात्रों के हक की हुंकार बुलंद करने के लिए 17 जून को राजस्थान के कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महारैली में पहुंचने का आह्वान किया है। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा और हर अधूरी भर्ती केवल व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों पर प्रहार है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि युवा थक चुके हैं और उनमें गुस्सा है, लेकिन जब सरकार सुनने को तैयार नहीं हो तो आवाज ऊंची करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से वह युवाओं को 17 जून को कोटा में होने वाली 'छात्रों की गूंज' महारैली के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कोटा से शुरु होने वाली यह आवाज देश के हर कोने तक पहुंचेगी। उन्होंने युवाओं से बड़ी संख्या में महारैली में शामिल होकर अपने अधिकारों और भविष्य की लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "यह आपके भविष्य की लड़ाई है और मैं आपके साथ हूं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:52:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पवन कल्याण का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: जन सेना का 'सेना प्रस्थानम्' मिशन शुरू, राष्ट्रीय मुद्दों पर बनेगी रणनीति</title>
                                    <description><![CDATA[जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्' दिल्ली में शुरू हुआ। पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण के नेतृत्व में आयोजित इस अधिवेशन में दक्षिण भारत के 150 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संगठनात्मक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसके बाद कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pawan-kalyans-big-show-of-strength-jana-senas-sena-prasthanam/article-157015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pawan-kalyan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्–फॉर नेशनल इंटीग्रेशन' सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण ने उद्घाटन संबोधन दिया। दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में जन सेना पार्टी के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, विभिन्न निगमों के अध्यक्ष, निर्वाचित जनप्रतिनिधि तथा देश के दक्षिणी राज्यों से आए लगभग 150 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के प्रतिनिधि भागीदारी कर रहे हैं। बैठक के दौरान संगठनात्मक मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न सत्रों में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पेश किए जाने की संभावना है।</p>
<p>सम्मेलन के समापन के बाद जन सेना पार्टी अध्यक्ष्य कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) जायेंगे। इस दौरान वह देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जन सेना पार्टी के अनुसार, 'सेना प्रस्थानम्' पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, दक्षिणी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है। पार्टी का मानना है कि यह सम्मेलन देश की एकता और समावेशी विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयराम रमेश का बड़ा बयान: हॉर्मुज खुलने से भारत को फायदा, लेकिन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को ऊर्जा और व्यापार में बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की सुस्त निजी निवेश और रिकॉर्ड व्यापार घाटे जैसी ढांचागत समस्याएं हल नहीं होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-of-jairam-ramesh-india-benefits-from-opening-of/article-157004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jairam-ramesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने की दिशा में यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। रमेश ने आशा व्यक्त की, कि अमेरिका, ईरान और इजराइल इस समझौते का पालन करेंगे तथा यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य संबंधों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरुमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के पुनः खुलने से भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उनके अनुसार रुपया लंबे समय से दबाव में है, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है तथा निजी निवेश की दरें कई वर्षों से सुस्त बनी हुई हैं, जबकि यही निवेश आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। कांग्रेस नेता ने मांग में कमजोरी के लिए तीन प्रमुख कारण बताए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव रहा है, चीन से आयात की डंपिंग पर रोक लगाने में केंद्र सरकार विफल रही है जिससे रिकॉर्ड व्यापार घाटा पैदा हुआ है और रोजगार सृजित करने वाले एमएसएमई क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अत्यधिक शक्तियों के कारण निवेश का समग्र वातावरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p>विदेश नीति के मुद्दे पर रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद जिस पाकिस्तान को भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता प्राप्त की थी, वह अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की मांग करते हैं। रमेश के अनुसार, मानवीय सरोकारों और भारत की पारंपरिक विदेश नीति प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अधिक संतुलित रुख अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>माइंडमाइन सम्मेलन 2026 : सीतारमण ने कहा- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग से मिल रहा अर्थव्यवस्था को समर्थन, वित्त मंत्री ने जताई स्थिरता की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'माइंडमाइन सम्मेलन 2026' में कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। मानसून और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है तथा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए आरबीआई के साथ रणनीतिक उपाय किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/mindmine-conference-2026-sitharaman-said-domestic-demand-is-supporting-the/article-156999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nirmala-sitharaman.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि इस समय वैश्विक स्तर पर व्यापार और आपूर्ति को लेकर कई प्रकार की अनिश्चतताएं भारतीय अर्थव्यस्था के लिए चुनौती पेश कर रही हैं, हालांकि घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है। सीतारमण ने यहां "माइंडमाइन सम्मेलन 2026" के एक संवाद सत्र के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यापार में काफी अनिश्चितताएं हैं। हमारा निर्यात मजबूत है लेकिन अचानक आयात शुल्क बढ़ा दिया जाता है। हम जिन तीन वस्तुओं का सबसे अधिक आयात करते हैं उनकी कीमत और आपूर्ति दोनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके लिए विदेशी मुद्रा का भंडार मजबूत होना चाहिये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन सबके बीच भारत के लिए राहत की बात हमारा घरेलू बाजार है, जो काफी बड़ा है। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि विनिर्माताओं के समक्ष आयातित कच्चे माल की ऊंची कीमत की चुनौती भी है। घरेलू स्तर पर मानसून की चुनौती को लेकर उन्होंने कहा कि इस बार अल-नीनो प्रभाव के कारण कम बारिश होने का अनुमान है। देश के पास अनाज का काफी बफर भंडार है, इसलिए खाद्यान्न की कमी जैसी स्थिति तो नहीं होगी, लेकिन किसानों की आमदनी पर कम मानसून का असर जरूर होगा। उर्वरकों की कमी के बारे में उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी सत्र को लेकर चिंता थी लेकिन अब चीन से उर्वरक आने से वह चिंता भी दूर हो गयी है।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और उससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर विदेशी मुद्रा जुटाने के उपाय किये हैं। बॉन्ड बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। साथ ही बैंकों और सार्वजनिक कंपनियों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति दी गयी है और इसके लिए जोखिम को कम करने की रणनीति की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक उठायेगा। इससे बैंक विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:16:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपीईएस ने जयपुर में पेश किया ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ का विज़न, एआई-फर्स्ट शिक्षा मॉडल पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[शोध-आधारित यूपीईएस (UPES) विश्वविद्यालय ने खुद को 'एआई-फर्स्ट' संस्थान के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। ओपनएआई से साझेदारी के तहत 19,100 से अधिक छात्रों को उन्नत एआई टूल्स और पर्सनल एआई ट्यूटर मिलेंगे। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में यूपीईएस देश के निजी विश्वविद्यालयों में पहले स्थान पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/upes-presented-the-vision-of-%E2%80%98university-of-tomorrow%E2%80%99-in-jaipur/article-156596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत के अग्रणी बहुविषयक एवं शोध-आधारित विश्वविद्यालयों में से एक यूपीईएस (UPES) ने जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान खुद को ‘एआई-फर्स्ट’ विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की अपनी महत्वाकांक्षी पहल को विस्तार से प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ के अपने विज़न को साझा करते हुए बताया कि भविष्य की शिक्षा अब केवल पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उद्योग सहभागिता, शोध उत्कृष्टता और बेहतर करियर परिणामों पर आधारित होगी।</p>
<p>कार्यक्रम में बताया गया कि दुनिया तेजी से एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रही है, जिससे उद्योगों की कार्यप्रणाली और रोजगार की प्रकृति में बड़े बदलाव आ रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि एआई दक्षता, विश्लेषणात्मक सोच, अनुकूलनशीलता और समस्या समाधान जैसे कौशलों से भी लैस करें।</p>
<p>इसी दिशा में यूपीईएस ने हाल ही में ओपनएआई के साथ साझेदारी की है। इस सहयोग के तहत विश्वविद्यालय के 19,100 से अधिक छात्रों और 1,500 फैकल्टी सदस्यों को उन्नत एआई टूल्स तक निःशुल्क और नियंत्रित पहुंच प्रदान की जा रही है। विश्वविद्यालय अपने सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों में 33 प्रतिशत तक एआई का एकीकरण कर रहा है। साथ ही प्रत्येक छात्र को एक उन्नत एआई ट्यूटर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन, अवधारणाओं की स्पष्टता, अभ्यास सहायता और बहुभाषी शिक्षण में मदद करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम में राजस्थान के संदर्भ को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि राजस्थान आज देश के तेजी से उभरते नवाचार और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल हो चुका है। राज्य में 5,200 से अधिक डीपीआईआईटी-पंजीकृत स्टार्टअप और 6,000 से अधिक आई-स्टार्ट पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। ऐसे परिदृश्य में उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो डिजिटल कौशल, उद्यमशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ रोजगार बाजार में प्रवेश कर सकें।</p>
<p>यूपीईएस के प्रो-वाइस चांसलर (स्टूडेंट सक्सेस) डॉ. अभिषेक सिन्हा ने कहा कि भविष्य की शिक्षा केवल पाठ्यक्रमों को अपडेट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सीखने, सोचने और तकनीक के साथ जुड़ने के तरीके को बदलने का समय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण तकनीक, उद्योग और अंतर्विषयक शिक्षा को जोड़कर छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार कर रहा है।</p>
<p>यूपीईएस ने कार्यक्रम के दौरान अपने मजबूत उद्योग सहयोग नेटवर्क की भी जानकारी दी। विश्वविद्यालय वर्षों से आईबीएम, इन्फोसिस, बजाज ऑटो, एचपी, बॉश, एचसीएल टेक, मर्क, सिस्को, ज़ेबिया, टाटा पावर और एलएंडटी जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है। इन सहयोगों के माध्यम से छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं, उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक अनुभव का अवसर मिलता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपीईएस ने कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी स्थापित की है। इनमें यूसी बर्कले, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स जैसे संस्थान शामिल हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक शिक्षा, छात्र विनिमय कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय करियर अवसरों का लाभ मिलता है।</p>
<p>विश्वविद्यालय ने छात्रों के समग्र विकास के लिए भी कई अभिनव पहल शुरू की हैं। ‘स्कूल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम छात्रों को नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और करियर तैयारी में सहायता प्रदान करता है। वहीं ‘डिज़ाइन योर ओन डिग्री’ पहल के तहत छात्र 50 से अधिक अनूठे संयोजनों के माध्यम से अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। यूपीईएस रनवे के जरिए अब तक 250 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जा चुका है।</p>
<p>विधि शिक्षा के क्षेत्र में यूपीईएस स्कूल ऑफ लॉ ने एआई एंड लॉ, ब्लॉकचेन, डेटा एनालिटिक्स, आर्बिट्रेशन और कॉर्पोरेट लॉ जैसे आधुनिक विषयों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। वहीं यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस छात्रों को एआई, फिनटेक, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रहा है।</p>
<p>क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के अनुसार यूपीईएस ने शैक्षणिक प्रतिष्ठा के आधार पर भारत के निजी विश्वविद्यालयों में पहला स्थान हासिल किया है। एनआईआरएफ 2025 में विश्वविद्यालय को यूनिवर्सिटी श्रेणी में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 50 से अधिक फैकल्टी सदस्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025-26 में लगभग 800 रिक्रूटर्स की भागीदारी के साथ मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी दर्ज किया है, जहां उच्चतम पैकेज 54 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा।</p>
<p>यूपीईएस का मानना है कि एआई, उद्योग और नवाचार आधारित यह नया शिक्षा मॉडल छात्रों को न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की नौकरियों और वैश्विक अवसरों के लिए भी तैयार करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:24:27 +0530</pubDate>
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