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                <title>Stalemate - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Stalemate RSS Feed</description>
                
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                <title>खेल के साथ संस्कार भी: जापानी समर्थकों ने स्टेडियम साफ कर पेश की अनोखी मिसाल, सोशल मीडिया पर सफाई अभियान वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[डलास में खेले गए फीफा विश्व कप मुकाबले में जापान और नीदरलैंड का मैच रोमांचक मोड़ पर 2-2 की बराबरी पर छूटा। मैच के बाद जापानी समर्थकों ने स्टैंड्स की सफाई कर अपनी अनोखी संस्कृति और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/japanese-supporters-set-a-unique-example-by-cleaning-the-stadium/article-157045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>इलास। डलास में खेले गए फीफा विश्व कप के ग्रुप-एफ मुकाबले में जापान और नीदरलैंड के बीच रोमांचक मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। मैच के बाद एक बार फिर जापानी समर्थकों ने अपनी अनूठी संस्कृति का परिचय दिया और स्टेडियम की सफाई कर दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसके बाद पूरे सोशल मीडिया पर जापानी समर्थकों का ये वीडियो वायरल हो गया। वायरल तस्वीरों और वीडियो में आप जापानी फैंस के द्वारा मैच खत्म होने के बाद स्टैंड्स से कचरा उठाते साफ़ देख सकते हैं।</p>
<p>सिर्फ स्टैंड्स में ही नहीं बल्कि मैदान पर भी जापान ने शानदार जज्बा दिखाया। नीदरलैंड ने वर्जिल वैन डाइक और क्रिसेंसियो समरविले के गोल की बदौलत दो बार बढ़त बनाई, लेकिन जापान ने दोनों बार वापसी की। मैच के 88वें मिनट में दाइची कामादा ने हेडर से गोल कर टीम को हार से बचा लिया। जापानी प्रशंसकों ने सफाई को अपनी संस्कृति और जिम्मेदारी का हिस्सा बताते हुए कहा कि वे खिलाड़ियों, दर्शकों और स्टेडियम सभी का सम्मान करते हैं। जापान की टीम अब अगले मुकाबले में ट्यूनीशिया से भिड़ेगी, जबकि नीदरलैंड का सामना स्वीडन से होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:56:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत में अड़चन: ईरान ने की जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग, हिचकिचा रहा ट्रंप प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में जब्त फंड की तत्काल रिहाई सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। ईरान $12 अरब की नकद राशि तुरंत जारी करने पर अड़ा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ठोस कदम उठाए बिना कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdle-in-us-iran-talks-iran-demands-immediate-release-of-seized/article-155993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी संभावित समझौते के तहत कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले उसकी अरबों डॉलर की जब्त की गई धनराशि को तुरंत जारी किया जाए। इस मांग को मानने में ट्रंप प्रशासन हिचकिचा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन ईरान को कोई बड़ी रियायत दिए बिना बड़े पैमाने पर धन जारी करने को मंज़ूरी देने में आनाकानी कर रहा है। खासकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार, परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर वह कड़ा रूख अपना रहा है।</p>
<p>जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी वार्ताकार चाहते हैं कि जैसे ही दोनों पक्ष शुरुआती सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करें, उन्हें जब्त हुए धन से "नकद धनराशि" तुरंत मिल जाए और इसमें किसी तरह की कोई देरी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों का रुख साफ है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस आश्वासन देगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चिंता सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है। अगर धनराशि को जल्दी जारी कर दिया गया, तो इससे ईरान को एक आर्थिक सहारा मिल जाएगा, जबकि अमेरिका के हाथ से उसका सबसे ताकतवर मोलभाव का हथियार,आर्थिक दबाव, जिसे बनाने में उसने कई वर्ष लगाए हैं, वह उसके हाथ से निकल जाएगा।</p>
<p>वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि जब तक ईरान पहले कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाता है खासकर अपनी परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर,तब तक कोई बड़ी रकम जारी नहीं की जाएगी। श्री ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ-साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेंगे जो ओबामा के 2015 के समझौते जैसा हो, जिसके तहत ईरान के लिए 1.7 अरब डॉलर का फंड जारी किया गया था।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब करीब 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, और ट्रंप की ऐसी कोई मंशा नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों ने ऐसे इंतज़ामों पर विचार किया है, जिनके तहत कोई तीसरा देश जैसे कि कतर ईरान को फंड जारी करेगा, ताकि अमेरिका किसी भी सीधे भुगतान से दूर रहे। मध्यस्थों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें कई अरब डॉलर का एक "मानवीय फंड" बनाना भी शामिल है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ भोजन, दवा और कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। लेकिन अब तक, दोनों में से कोई भी पक्ष इतना झुकने को तैयार नहीं हुआ है कि यह गतिरोध टूट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप की 'ईरानी नीति' ने अमेरिका को &quot;अंधेरे गलियारे&quot; में धकेला, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण : मोहसिन रज़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के वरिष्ठ राजनेता मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि अवैध युद्ध शुरू करने के बाद अमेरिका पूरी तरह गतिरोध में फंस गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापक युद्ध अमेरिका के लिए 'अंधेरा गलियारा' साबित होगा। रज़ाई ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है और वहां जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-iran-policy-pushes-america-into-a-dark-corridor/article-154943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)33.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व सैन्य कमांडर मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों और ईरान के खिलाफ "बिना उकसावे के छेड़े गए युद्ध" के बाद क्षेत्र में हुए हालिया घटनाक्रमों ने अमेरिका को पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में पहुंचा दिया है। तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला में रविवार को अमेरिका-इजरायल युद्ध में मारे गये लोगों की स्मृति में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बल, जो संभवतः अल्पकालिक युद्ध के भ्रम के साथ क्षेत्र में आए थे, अब वह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की वास्तविकता का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने ख़ोर्रमशहर की मुक्ति और इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन की पराजय का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष की वर्षगांठ पिछले 12 महीनों में अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मनों के खिलाफ ईरानी राष्ट्र द्वारा किए गए दो और धार्मिक-राष्ट्रीय रक्षा अभियान प्रतिरोधों के साथ संयोगवश आई है। रज़ाई ने अमेरिकी और इजरायल के शासन के खिलाफ सड़कों से लेकर युद्धक्षेत्र तक ईरानी जनता और सेना की दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि विचार, आस्था और प्रेरणा में परिवर्तन के कारण ईरान को अपने दुश्मनों पर विजय मिली है।</p>
<p>इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ईरान के प्रति अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का उल्लेख करते हुए रज़ाई ने कहा कि 1980 के दशक में हुए पहले "थोपे गए युद्ध" के दौरान अमेरिका ने गुप्त रूप से हथियार भेजकर सद्दाम हुसैन का समर्थन किया था और उसे यह भरोसा दिलाया था कि अमेरिका, ईरान पर इराकी हमले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई निर्णय नहीं होने देगा। रज़ाई ने कहा कि उस समय अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने ईरान को हथियार और मिसाइलें भेजने से परहेज किया, ताकि उसकी सैन्य क्षमता कमजोर हो सके, जबकि अरब देशों ने सद्दाम को उसके नुकसान की भरपाई के लिए 80 अरब डॉलर से अधिक की सहायता प्रदान की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अवैध युद्ध शुरू करने के बाद अमेरिका पूरी तरह से गतिरोध में फंस गया है। उन्होंने अमेरिका को "समुद्री डाकू" बताते हुए कहा कि उसने ईरान पर हमला किया, लेकिन भागते समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गया। रज़ाई ने अमेरिका को व्यापक युद्ध में प्रवेश करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि इससे अमेरिका के लिए एक "अंधेरा गलियारा" तैयार होगा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से शुरू होकर फारस की खाड़ी, ओमान सागर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और हिंद महासागर तक फैलेगा।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में उन्होंने कहा कि यह ईरान के नियंत्रण में है, क्योंकि ईरान ने फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियों और असुरक्षा को रोका है। उन्होंने कहा कि आईआरजीसी नौसेना जहाजों की पहचान और पंजीकरण कर विभिन्न देशों के वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:51:06 +0530</pubDate>
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