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                <title>Supply-chain - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मोदी ने किया आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक में हालात पर मंथन, पश्चिम एशिया संकट से पड़ रहे प्रभावों पर विशेष चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इसमें पश्चिम एशिया संकट के घरेलू अर्थव्यवस्था, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव पर चर्चा हुई। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों पर आयकर छूट जैसे बड़े कदम उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modi-brainstormed-on-the-situation-in-the-economic-advisory-council/article-156228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक की अध्यक्षता की जिसमें पश्चिम एशिया के संकट से घरेलू अर्थव्यस्था पर पड़ रहे प्रभावों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।  बैठक के बाद मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि बैठक में देश में आर्थिक बदलाव और लंबे समय के विकास की प्राथमिकताओं से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, सुधारों की प्रक्रिया को और गति देने तथा ‘ईज आॅफ लिविंग’ (जीवन को सुगम बनाने) और ‘ईज आॅफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार की सुगमता) को सुनिश्चित करने पर अपने विचार साझा किए।  </p>
<p><strong>प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने लिया हिस्सा</strong></p>
<p>बैठक में प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके भारतीय अर्थव्यवस्था तथा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभावों पर विशेष रूप से चर्चा की। इसके अलावा वैश्विम ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा जैसे मुद्दों पर भी गहन विचार विमर्श किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश में आर्थिक वृद्धि को गति देना और व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना था।  </p>
<p><strong>सरकार ने एक दिन पहले ही उठाए हैं कई सुधारात्मक कदम</strong></p>
<p>गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार को ही देश में विदेशी पूंजी का प्रावह बढ़ाने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश पर लागू कर व्यवस्था में बड़ा सुधार लागू किया। ऐसे निवेश से होने वाली ब्याज आय या पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट दे दी गई है। इसमें 15, 30 और 40 वर्षों की अवधि के सरकारी प्रतिभूतियों के नए निर्गमों के साथ-साथ एफएआर-पात्र प्रतिभूतियों की अवधि के संप्रभु हरित बांड (एसजीआरबी) में निवेश को भी शामिल किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:44:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में क्वाड देशों की बैठक जारी, जयशंकर ने कहा-हिन्द प्रशांत क्षेत्र के मुद्दों के समाधान के लिए विश्वसनीय और पारदर्शी साझेदारी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में क्वाड देशों (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। बैठक में समुद्री सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक विश्वास बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/meeting-of-quad-countries-continues-in-delhi-jaishankar-said/article-155007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना क्वाड देशों की साझा जिम्मेदारी है और विश्वसनीय तथा पारदर्शी साझेदारियों के बल पर ही इसे बेहतर ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता, संपर्क मार्गों के अवरोध बिंदु, विनिर्माण एवं संसाधन तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में कमी जैसे मुद्दों पर भी क्वाड देशों को ध्यान देना होगा।</p>
<p>जयशंकर ने मंगलवार को यहां भारत की मेजबानी में हो रही क्वाड देशों की बैठक में वहां के विदेश मंत्रियों, आस्ट्रेलिया की पेनी वोंग , जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो का स्वागत करते हुए यह बात कही। विदेश मंत्री ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विशेष फोकस रहेगा इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता, संपर्क मार्गों के अवरोध बिंदु, विनिर्माण एवं संसाधनों को बढाने तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में कमियों जैसे मुद्दों का समाधान भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अपनी विशिष्ट चिंताएँ भी हैं। इसके लिए रणनीतिक विश्वास को बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक विकल्पों को प्रोत्साहित करना तथा गहरे सहयोगात्मक दृष्टिकोण को विकसित करना आवश्यक होगा। उन्होंंने कहा कि यह कार्य विश्वसनीय तथा पारदर्शी साझेदारियों को बढ़ावा देकर सबसे बेहतर ढंग से किया जा सकता है। जयशंकर ने कहा कि बीते समय में हमारे अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, आर्थिक सुदृढ़ता तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा,"हमने अनेक पहलों में उत्साहजनक प्रगति देखी है। समुद्री लोकतंत्रों, बहुलतावादी समाजों और बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, एक स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने की साझा जिम्मेदारी हमारी है। यह क्षेत्र वैश्विक विकास और स्थिरता का प्रेरक बना रहना चाहिए। हमें विश्वास है कि आज हमारी विचार-विमर्श प्रक्रिया इस बात को रेखांकित करेगी और उपयोगी एवं फलदायी सिद्ध होगी।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 13:23:19 +0530</pubDate>
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