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                <title>Cultivation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Cultivation RSS Feed</description>
                
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                <title>खरीफ सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से लेकर डिजिटल खेती तक बनेगा नया कृषि रोडमैप: शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ अभियान का शुभारंभ करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3,765 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। भारत धान उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर विश्व में शीर्ष पर पहुंच गया है। अब बेहतर योजना के लिए 8 कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर सम्मेलन होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/from-climate-change-to-digital-farming-a-new-agricultural-roadmap/article-155285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भविष्य में कृषि-जलवायु क्षेत्र के आधार पर भी क्षेत्रीय सम्मेलनों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को यहां आयोजित खरीफ सम्मेलन के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश को मोटे तौर पर आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि पांच के बजाय इन आठ क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएं ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और रणनीतियां जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 28 और 29 मई यहां, पूसा परिसर में राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 पर कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया है जिसमें देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। इसमें खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिन तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बुवाई के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता और कृषि मिशनों को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने को लेकर सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जा रही है। सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई जिनमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी आधार पर राज्य अपनी तैयारियों के साथ सम्मेलन में पहुंचे हैं। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।</p>
<p>केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा देश बहुत बड़ा है, इसलिए इस बार केवल राष्ट्रीय सम्मेलन ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय सम्मेलन भी प्रारंभ किए गए हैं। अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे, जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की खेती और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा कि जब छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा होती है तो हर राज्य की समस्याओं और जरूरतों पर विस्तार से बात हो पाती है।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन के लिए अलग-अलग मिशन बनाए गए हैं। राज्यों के साथ मिलकर बेहतर बीज, सीड रिप्लेसमेंट रेट बढ़ाने, डेमोंस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बागवानी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और कॉटन मिशन पर भी चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि कई किसान जानकारी के अभाव में जरूरत से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं, इसलिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी। हमारे देश में खेतों का आकार छोटा है। ऐसे में किसान कम जमीन में ज्यादा लाभ कैसे कमा सके, इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए पर्याप्त वित्त पोषण भी जरूरी है। किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जोखिम से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। कृषि ऋण वितरण में अभी भी राज्यों के बीच असमानता है। कुछ राज्यों में कृषि ऋण बहुत कम है और कुछ में ज्यादा। यदि किसानों के पास केसीसी और निवेश के लिए पूंजी होगी तो वे बेहतर खेती कर पाएंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सम्मेलन में एग्री इंफ्रा फंड, पीएम-आशा योजना, डिजिटल कृषि, फार्मर आईडी और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके लिए राज्यों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, जहां दिनभर विभिन्न मुद्दों पर मंथन होगा। अगले दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों की मौजूदगी में विभिन्न विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और खरीफ फसल के लिए देश और राज्यों का संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में "खेत बचाओ अभियान" पर भी व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के परिश्रम, भारत सरकार की योजनाओं व विकसित नई बीज किस्मों के कारण इस बार देश ने रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। </p>
<p>वर्ष 2025-26 में देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 188 लाख टन अधिक है। वहीं, धान उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। धान का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और अब दुनिया में भारत नंबर-1 बन गया है। हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि गेहूं का उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है। उन्होंने कहा कि केवल खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि तिलहन उत्पादन में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष तिलहन का संभावित उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों का उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंच गया है जो रिकॉर्ड स्तर है। दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में उत्पादन में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'टुमॉरो मेकर्स' की शुरुआत: वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभावान छात्रों को मिलेंगे तरक्की के समान अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[गोदरेज फाउंडेशन ने असमानता को दूर करने के लिए राष्ट्रीय मंच ‘टुमॉरो मेकर्स’ लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ना है। यह पहल स्टेम (STEM), कला और रक्षा क्षेत्र में भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/godrej-foundations-tomorrow-makers-will-provide-equal-opportunities-to-underprivileged/article-155245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>भारत की शिक्षा व्यवस्था में, खासकर छोटे शहरों और वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए किस कमी को टुमॉरो मेकर्स दूर करना चाहते हैं?</p>
<p>उमर मोमिन, गोदरेज फाउंडेशन हेड ने मीडिया को बताया कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी है, तो एक समान अवसरों की। देश में सबसे अधिक आय वर्ग वाले परिवारों के 51 प्रतिशत युवा उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं, जबकि सबसे कम आय वर्ग वाले परिवारों के केवल 8 प्रतिशत युवा ही उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुँच पाते हैं। बिना सपोर्ट के कम आय वर्ग वाले परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का विकास करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए गोदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले समाजसेवी ट्रस्ट, गोदरेज फाउंडेशन ने टुमॉरो मेकर्स की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचानने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह इन विद्यार्थियों को एक मजबूत पार्टनर ईकोसिस्टम के माध्यम से मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ता है तथा अवंति फैलोज़, दक्षणा, स्लैम आउट लाउड, मेकरघाट, और डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन जैसे संगठनों के सहयोग से उन्हें अवसर उपलब्ध कराता है। हमारा लक्ष्य उन्हें केवल शिक्षा प्राप्त करने में मदद करना ही नहीं है, बल्कि हम स्टेम (साईंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स), इनोवेशन, कला और रक्षा सेवाओं में नेतृत्व का विकास भी करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए, न कि बैकग्राउंड या पिन कोड के आधार पर।</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स के अंतर्गत स्टेम के साथ कला और रक्षा को शामिल करना जरूरी क्यों था?</p>
<p>जैसा मैंने पहले बताया कि टुमॉरो मेकर्स की बुनियाद यह विश्वास है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए। लेकिन प्रतिभा कोई एक क्षेत्र में नहीं होती, इसलिए अवसर भी भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मिलने चाहिए। माता-पिता अक्सर इंजीनियरिंग या मेडिसीन की ओर झुकाव रखते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बच्चे में कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा होती है। स्टेम के लिए हमारा सहयोग अवंति फैलोज़, दक्षणा और जेनवाईज़ कर रहे हैं। कला के क्षेत्र में हमें स्लैम आउट लाउड की मदद मिल रही है। वहीं रक्षा क्षेत्र में डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन और युवातेजस हमें सहयोग दे रहे हैं। विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में गहरी विशेषज्ञता के साथ ये पार्टनर जमीनी स्तर पर गहरी पकड़ और समुदाय का विश्वास भी रखते हैं। इससे हमें विभिन्न प्रतिभाओं और महत्वाकांक्षाओं वाले विद्यार्थियों को अनेक अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी। </p>
<p>आज वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किन सबसे बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है?</p>
<p>इन विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी बाधाएं पहुँच और एक्सपोज़र की हैं। उदाहरण के लिए, 27 से 37 प्रतिशत विद्यार्थी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पेड कोचिंग सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे अवसर की उपलब्धता आर्थिक क्षमता पर निर्भर हो गई है। छोटे शहरों के विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध नहीं होती हैं। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, मिलकर तैयारी करने वाले साथी, प्रतियोगिताओं का एक्सपोज़र और उनके लिए मौजूद अवसरों का मार्गदर्शन भी नहीं मिल पाता है। नतीजा यह होता है कि इस सिस्टम द्वारा विद्यार्थी प्रतिभा नहीं बल्कि सुविधा की उपलब्धता के आधार पर आगे बढ़ जाते हैं। टुमॉरो मेकर्स के माध्यम से हम सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थी, चाहे किसी भी स्थान से आए हों, उन्हें समान रूप से वो अवसर प्राप्त हो सकें।</p>
<p>भारत के युवाओं के लिए टुमॉरो मेकर्स का क्या दीर्घकालिक प्रभाव होगा?</p>
<p>हमारा लक्ष्य साफ है। हम वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं ताकि वो अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें। पहले साल, हम संरचनाबद्ध तरीके से 5,000 से 10,000 विद्यार्थियों तक पहुँचेंगे। हमारी इस पहल में हमारे पार्टनर हमारी मदद करेंगे। इसके बाद हम क्वालिटी को बनाए रखते हुए अपनी इस पहल का विस्तार करेंगे। व्यापक स्तर पर यह हमारे देश के भविष्य से जुड़ा है। भारत का भविष्य केवल औसत सुधारों द्वारा तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से तय होगा कि क्या विभिन्न आय, भौगोलिक क्षेत्रों और पहचान वाली असाधारण प्रतिभाओं को प्रभावशाली पदों और नेतृत्व तक पहुँचने का अवसर मिलेगा या नहीं। इसलिए हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य विभिन्न स्थानों और सामाजिक आर्थिक बैकग्राउंड वाली प्रतिभाओं को आगे लाकर भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक पाईपलाईन तैयार करना है।<br />साथ ही, हम पहली जनरेशन के सफल लोगों का ज्यादा बड़ा समूह बनाना चाहते हैं। क्योंकि जब एक युवा सफल होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है।</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पार्टनर संगठनों और मेंटर्स के साथ सहयोग कितने महत्वपूर्ण हैं?</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स का काम करने का तरीका पार्टनरशिप पर आधारित है। हम शुरू से ही हर काम अपने आप करना नहीं चाहते हैं। इसलिए हम उन संगठनों के साथ साझेदारी कर रहे हैं, जो प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। उदाहरण के लिए अवंति फैलोज़ 7,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँच चुके हैं। स्लैम आउट लाउड ने 4.7 मिलियन से अधिक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया है और मेकरघाट 1.4 मिलियन से अधिक युवाओं से जुड़े हैं और 20,000 से अधिक एजुकेटर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं। इससे साफ हो जाता है कि इस ईकोसिस्टम के पास प्रमाणित और प्रभावशाली मॉडल है, पर वो सब टुकड़ों मंल काम कर रहे हैं। टुमॉरो मेकर्स इस प्रमाणित ईकोसिस्टम को उच्च क्षमता वाले विद्यार्थियों से जोड़ेंगे, जिन्हें पहचान से लेकर तैयार और करियर में आगे बढ़ने तक हर चरण में मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं हो पाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:05:11 +0530</pubDate>
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