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                <title>हिंदी को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी : हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर करे प्रयास, भजनलाल ने कहा- यही हमारी असल पहचान </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हिंदी को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी बताते हुए कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/promotion-of-hindi-the-responsibility-of-everyone-should-try-together/article-104614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हिंदी को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी बताते हुए कहा है कि यह हमारे मन की अभिव्यक्ति का स्वरूप है और हिंदी न केवल हमारी राजभाषा है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रीय एकता की प्रतीक भी है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह केवल एक संवैधानिक निर्देश ही नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता भी है। </p>
<p>शर्मा केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित मध्य पश्चिम एवं उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी के सम्मान, प्रयोग और प्रसार में अपनी पूरी शक्ति और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए हमें हर स्तर पर, हर क्षेत्र में इसे प्रोत्साहित करना चाहिए। यही हमारी असल पहचान है। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की सामाजिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सकती है। </p>
<p>उन्होंने डिजिटल युग में हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के तकनीकी युग में हिंदीको डिजिटल प्लेटफार्मों पर भी समाहित करना आवश्यक है। इस सम्मेलन में कंप्यूटर पर हिंदी में कार्य करने के नवीनतम तरीकों और सुविधाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है जो सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, सोच और विचारों का सशक्त रूप है। हमारे प्रदेश में हिंदी का प्रशासनिक क्षेत्र में व्यापक प्रयोग हो रहा है। राजकीय विभागों में हिंदी के मानक प्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किए हैं। इनके नेतृत्व ने न केवल हमारी सुरक्षा व्यवस्था को सुढ़ किया है, बल्कि देश में आंतरिक सुरक्षा को लेकर अगाध विश्वास पैदा किया है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हिंदी के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले पुरुस्कृत सभी संस्थानों और व्यक्तियों को बधाई देते हुए कहा कि इन सभी का योगदान हिंदी के प्रति हमारे लगाव को और मजबूत करता है।  </p>
<p>इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने अपने संबोधन में कहा कि हमें देश की सभी भाषाओं का मान-सम्मान रखते हुए हिन्दी को राष्ट्रीय बोलचाल की भाषा बनाने के लिए प्रयास करना होगा। राजभाषा हिंदी का प्रयोग हमारी एकता का सूत्रधार है। उन्होंने कहा कि भाषा मानव समाज और देश की अंत: शक्ति है। यदि हम भाषा को उसके सीमित रूप में देखें तो यह केवल संप्रेषण का माध्यम मात्र है लेकिन यदि राष्ट्र के संदर्भ में देखा जाए तो भाषा और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है जिसमें देशवासी संवाद करते हैं। </p>
<p>राय ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को आखिरी सिरे तक पहुंचाना सरकारी तंत्र की सफलता की कसौटी है। हमारा लोकतंत्र तभी फल फूल सकता है जब हम जन-जन तक उनकी ही भाषा में उनके हित की बात पहुंचाएं और इसमें कोई संदेह नहीं कि राष्ट्रीय स्तर पर राजभाषा हिंदी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। उन्होंने कहा कि हमें व्यापक रूप से सरल और सहज भाषा का प्रयोग करके राजभाषा और जन भाषा के बीच दूरी को पाटना होगा ताकि देश का हर नागरिक देश की प्रगति से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि देश भर में राजभाषा को समृद्ध और सक्षम बनाने एवं भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाने के लिए बीते दस वर्षों में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। </p>
<p>उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि हिंदी भारत में ही नहीं नेपाल, सूरीनाम, फिजी, मारीशस, और गुयाना के साथ ही दूसरे बहुत से देशों में समान रूप से लोकप्रिय है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान हिंदी ने पूरे देश में राष्ट्र प्रेम और स्वाभिमान की भावना जागृत करने में अमूल्य योगदान दिया था। उन्होंने भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ साहित्यिक कृतियों का अनुवाद हिंदी में तथा हिंदी की श्रेष्ठ कृतियों का अनुवाद अन्य भारतीय भाषाओं में किए जाने पर बल दिया जिससे भाषा सछ्वाव के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत किया जा सकें। </p>
<p>सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं और राजभाषा हिंदी एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं है बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए जिससे जनहित की योजनाओं का लाभ आमजन तक सही मायने में पहुंचे। उन्होंने सम्मेलन का जयपुर में आयोजन करने के लिए जयपुर वासियों की ओर से आभार प्रकट भी किया। </p>
<p>केंन्द्रीय राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने कहा कि क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलनों के आयोजन का उद्देश्य देश में राजभाषा हिन्दी के प्रभावी कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रयोग में वृद्धि और भारतीय भाषाओं की समृद्धि से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को अब यह अहसास होने लगा है कि हमारा स्वाभिमान, संस्कृति और भाषा परस्पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन हमें अपनी विशिष्ट भाषाई विरासत पर गर्व करते हुए अपने संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम भी बना है।</p>
<p>इस अवसर पर सरकारी कामकाज में हिंदी में सर्वात्कृष्ट कार्य करने वाले मध्य, पश्चिम तथा उत्तर भारत के केंद्रीय सरकार के कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों को पुरस्कृत भी किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव डा मीनाक्षी जौली, प्रख्यात साहित्यकार डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष सहित 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से केंद्र सरकार के कार्यालयों, बैंकों व उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Feb 2025 16:50:38 +0530</pubDate>
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                <title>हिंदी के प्रति विश्वभर में जागरूकता का प्रसार हो</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदी इस समय विश्व के 61 करोड़ लोगों की भाषा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/awareness-about-hindi-should-spread-across-the-world/article-100247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(16)2.png" alt=""></a><br /><p>हिंदी इस समय विश्व के 61 करोड़ लोगों की भाषा है। विश्व भाषा के जारी आंकड़ों के अनुसार हिंदी भाषा तेजी से वैश्विक स्थान बनाती जा रही है। इसमें बड़ा योगदान उस तकनीक का भी है,  जिसमें हिंदी को बोलने, बरतने और उसके उपयोग को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने आसान किया है। विश्व हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य है, हिंदी के प्रति विश्वभर में जागरूकता का प्रसार। देश के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था। इस अवसर पर दुनिया भर के देशों के भारतीय दूतावासों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते है। हिंदी भाषा नहीं भारतीय संस्कृति का गौरव है। महात्मा गांधी इस बात को जानते थे कि राष्ट्र की अपनी भाषा से ही गुलामी की जंजीरों को पूरी तरह से तोड़ा जा सकता है। खुद गांधी गुजराती भाषी थे परन्तु उन्होंने राष्ट्र की एकता, राष्ट्र हित के लिए हिंदी को अपनी भाषा बनाया। स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए संविधान निर्माताओं ने 14 सितंबर 1949 के दिन ही हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद 14 सितंबर 1953 को आधिकारिक रूप से पहली बार राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी पहली बार 1949 में हिन्दी भाषा का प्रयोग हुआ था। </p>
<p>आज हिंदी दुनिया की तीसरी और भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। अंग्रेजी और चीन की मंदारिन के बाद दुनिया में इसी का सर्वाधिक बोले जाने वालों में स्थान है। यह बात समझने की है कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम ही नहीं होती है, वह नैतिक, सामाजिक,  सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की भी संवाहिका होती है। हिन्दी भाषा हिन्दुस्तान की संस्कृति है। विश्वभर की भाषाओं में तेजी से अपना स्थान बनाती जा रही हिंदी को यदि हमारे देश की धड़कन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं, भारत की संस्कृति, संस्कार, ज्ञान और परम्परा को देश-दुनिया में पहचाने जाने में हिन्दी की अहम भूमिका है। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान और भारतवंशियों को एकता के सूत्र में पिरोने में हिन्दी भाषा का ही योगदान महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र और जी-20 के सम्मेलनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंदी में अपनी बात रखकर इस भाषा के वैश्विक महत्व को स्थापित किया है। नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा के प्रयोग पर अधिक जोर दिया गया है। इस नीति में तीन भाषाओं का फॉर्मूला दिया गया है। </p>
<p>इसमें अंग्रेजी के अलावा दो भारतीय भाषाओं को स्थान दिया गया है। अब तक गैर-हिंदी भाषी राज्यों में स्थानीय भाषा के अलावा केवल अंग्रेजी को ही महत्व मिलता रहा है। इस दृष्टि से नई शिक्षा नीति में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को अनिवार्य करना महती कदम है। बहुत से स्तरों पर अब हिंदी में इंजीनियरिंग और डॉक्टरी की पढ़ाई की भी व्यवस्था की गई है। इस संदर्भ में मध्य प्रदेश के सभी 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हिंदी भाषा में पढ़ाई की शुरुआत हिंदी को बढ़ावा दिए जान की दिशा में बड़ी पहल है। हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के लिए भी केन्द्र सरकार के स्तर पर कई बड़े कदम उठाए हैं। इसी की परिणति रही है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जून 2022 में पहली बार हिंदी भाषा से जुड़े भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सभी जरूरी कामकाज और सूचनाओं को इसकी आधिकारिक भाषाओं के अलावा दूसरी भाषाओं हिंदी में भी जारी किया जाए।</p>
<p> हिंदी भाषा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसने न केवल अपनी क्षेत्रीय बोलियों को अपने भीतर आत्मसात किया हुआ है, बल्कि विश्वभर की अन्य भाषाओं को भी अपने भीतर एक किया हुआ है। हिंदी भाषा का हृदय बहुत विशाल है। इसके भीतर संस्कृत, पाली, प्राकृत, फारसी, अरबी, तुर्की, अंग्रेजी, फ्रांसीसी इत्यादि भाषाओं के साथ भारत की ही अनेक बोलियों के शब्द समाहित हैं। हिंदी की लिपि सबसे वैज्ञानिक लिपि है। विश्वभर में इस समय 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी शिक्षण की व्यवस्था है। यह सच है, हिन्दी भाषा तेजी से वैश्विक भाषा बन रही है। जरूरत इस बात की भी है कि हिन्दी की जड़ों को हम ज्ञान-विज्ञान के नए क्षेत्रों से संपन्न करें। इसे आधुनिकता की दृष्टि से विकसित करते हुए इसमें साहित्य की विभिन्न विधाओं में ही नहीं विज्ञान,  वाणिज्य और कम्प्यूटर आदि विषयों से भी संपन्न करें। इसी से यह भविष्य की विश्व की अग्रणी भाषा बन सकेगी। विश्व हिंदी दिवस की सार्थकता भी इसी में है।</p>
<p><strong> -डॉ. अरुणा व्यास</strong><br /><strong>यह लेखक के विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 11:23:22 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान पुलिस में अब उर्दू के शब्दों का नहीं होगा इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस में अब मुल्जिम, इल्जाम और इत्तिला जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/urdu-words-will-no-longer-be-used-in-rajasthan-police/article-98175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस में अब मुल्जिम, इल्जाम और इत्तिला जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं होगा। उर्दू के शब्दों को हिन्दी में बदला जाएगा। शब्दों को बदलने के लिए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने पिछले दिनों गृह विभाग को पत्र लिखा है, जिस पर कवायद शुरू हो गई है। यह जिम्मेदारी प्रशिक्षण शाखा को सौंपी गई है। राजस्थान में पुलिस की शब्दावली में ज्यादा उर्दू शब्दों का उपयोग होता है। पुलिस की रपट और एफआईआर में उर्दू का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। इनमें मामला, फर्द, मुल्जिम, इल्जाम, इत्तिला जैसे कई शब्दों के हिंदी विकल्पों की जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p>बेढ़म ने इस संबंध में गत दिनों गृह विभाग को पत्र लिखा था। इस पर गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक यूआर साहू को पत्र भेजा है। पुलिस महानिदेशक ने पिछले दिनों अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) को पत्र लिखकर उन उर्दू शब्दों का ब्यौरा जुटाने को कहा था, जो पुलिस के काम-काज में आमतौर पर इस्तेमाल हो रहे हैं। मंत्री के निर्देश पर डीजीपी ने पत्र लिख कर रिपोर्ट बनाने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया था कि वे पता लगाएं कि पुलिसिंग में उर्दू के कौन-कौन से शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं और उनकी जगह कौन से हिंदी शब्द उपयुक्त हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2024 12:58:30 +0530</pubDate>
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                <title>हिन्दी सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है: शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि हिन्दी पर हमें गर्व होना चाहिए और हिन्दी को बोलने व लिखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hindi-connects-everyone-to-each-other-sharma/article-90551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/whatsapp-image-2024-09-14-at-18.16.29.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा के ओएसडी प्रो. राजेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को सभी भाषाओं को सीखना चाहिए, लेकिन अपने खुद की भाषा हिन्दी को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि हिन्दी सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है। वे एसएसजी पारीक शिक्षा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी दिवस पर ‘हिन्दी भाषा: वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिन्दी पर हमें गर्व होना चाहिए और हिन्दी को बोलने व लिखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर मुख्य वक्ता गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के गांधीवादी विचार एवं शांति अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जनक सिंह मीणा ने कहा कि हिन्दी को देश में आज भी राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि राजभाषा है। इसलिए सभी को मिलकर इस और प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रमिला दुबे ने कहा कि हिन्दी को हिन्दी दिवस के बजाए हर दिन याद करना चाहिए।</p>
<p>इस मौके पर डॉ. रामभजन कुमावत ने कहा कि आज हिन्दी भारत के अलावा विश्व के 150 देशों में बोली जा रही है और 200 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। कार्यक्रम में डॉ. कल्पना पारीक व कुलदीप पारीक सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 16:25:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार हमारे गले में हिंदी थोप रही है : स्टालिन</title>
                                    <description><![CDATA[स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा कि जहां भारत का प्रत्येक नागरिक इसके विकास में योगदान दे रहा है, वहीं केंद्र सरकार और इसकी संस्थाएं हिंदी को अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में हर संभव तरीके से अनुचित और बेवजह लाभ दे रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/stalin-is-forcing-hindi-down-our-throats/article-48587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने केंद्र और उसके संस्थानों पर गले में हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए सोमवार को न्यू इंडिया एश्योरेंस की ओर से जारी परिपत्र को तुरंत वापस लेने और इसके अध्यक्ष से नीरजा कपूर से माफी मांगने की मांग की।स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा कि जहां भारत का प्रत्येक नागरिक इसके विकास में योगदान दे रहा है, वहीं केंद्र सरकार और इसकी संस्थाएं हिंदी को अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में हर संभव तरीके से अनुचित और बेवजह लाभ दे रही हैं। इसके अलावा, वे अपने मूल्यवान संसाधनों को लागू करने पर खर्च करने पर आमादा हैं।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">While each and every citizen of India is contributing to its development, the Union Government and its institutions continue to give an undue and unfair advantage to Hindi, over other Indian languages in every possible way. Also, they are intent on spending their valuable… <a href="https://t.co/2QSCISLqkX">pic.twitter.com/2QSCISLqkX</a></p>
— M.K.Stalin (@mkstalin) <a href="https://twitter.com/mkstalin/status/1668185271203155968?ref_src=twsrc%5Etfw">June 12, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदी हमारे गले में है, न कि लोक कल्याण के लिये। इस सूची में नवीनतम न्यू इंडिया एश्योरेंस द्वारा जारी अन्यायपूर्ण सर्कुलर है और इसके अध्यक्ष नीरजा कपूर को गैर-हिंदी भाषियों के और उसके गैर-हिंदी भाषी कर्मचारियों के प्रति दिखाए गए अपमान के लिए माफी मांगने की जरूरत है। उन्होंने कहा,''इस सूची में नवीनतम न्यू इंडिया द्वारा जारी अनुचित परिपत्र है। इसे तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए और इसकी अध्यक्ष नीरजा गैर-हिंदी व  के प्रति दिखाए गए अपमान के लिए कपूर को माफी मांगनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jun 2023 18:36:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपीएससी परीक्षा में हिन्दी ने लहराया परचम!</title>
                                    <description><![CDATA[हम यह बात कह सकते हैं कि हिन्दी की धमक अपने पूरे परवान पर है और अब यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी हिन्दी अपना परचम लहरा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/hindi-won-the-upsc-exam/article-47150"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/s-181.png" alt=""></a><br /><p>हाल ही में यूपीएससी यानी कि संघ लोक सेवा आयोग के इतिहास में हिन्दी मीडियम के सर्वश्रेष्ठ नतीजे आए हैं। यह दर्शाता है कि हिन्दी लगातार आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर हम यह बात कह सकते हैं कि हिन्दी की धमक अपने पूरे परवान पर है और अब यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी हिन्दी अपना परचम लहरा रही है। यहां जानकारी देना चाहूंगा कि इस बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे अपने आप में काफी खास और विश्व है। इसकी वजह यह है कि 2022 बैच में हिन्दी माध्यम से 54 उम्मीदवार सफल हुए हैं, जो कि बहुत बड़ी बात इसलिए है, क्योंकि अब तक यह समझा जाता था कि यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अंग्रेजी भाषा का अधिक महत्व है। <br />अब हिन्दी ने यह साबित कर दिया है कि भाषा कोई भी हो, कभी कोई भी भाषा कमजोर नहीं होती है और सभी भाषाओं का अपना-अपना अलग अलग महत्व व महत्ता है। जानकारी देना चाहूंगा कि हाल ही में यूपीएससी का जो परिणाम आया है, यूपीएससी के इतिहास में हिन्दी का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। बताता चलूं कि पिछले साल आए 2021 बैच के रिजल्ट में हिन्दी के 24 उम्मीदवार सफल हुए थे और इस बार यह आंकड़ा 54 के आंकड़े को छू गया है, यानी कि पिछली बार की तुलना में इस बार दुगने से अधिक कैंडिडेट हिन्दी के साथ सफल हुए हैं, यह हिन्दी का बहुत ही शानदार व अच्छा प्रदर्शन कहा जा सकता है।</p>
<p>दूसरे शब्दों में हम यह बात भी कह सकते हैं कि अब हिन्दी का ग्राफ  लगातार सुधर रहा है। इस बार टॉप-100 में 66वीं, 85वीं व 89वीं रैंक पर तीन उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। यह भी बताता चलूं कि हिन्दी माध्यम की टॉपर 66वीं रैंक हासिल करने वाली कृतिका मिश्रा कानपुर की रहने वाली हैं तथा दिव्या तंवर ने इस बार परीक्षा में 105वीं रैंक हासिल की है। यहां पाठकों को यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि 2021 बैच में भी दिव्या ने 438वीं रैंक हासिल की थी और तब वह सबसे कम उम्र (महज 22 साल) की आईपीएस चुनी गई थीं। अब वह आईएएस हो गई हैं। इन नतीजों में सबसे खास बात यह है कि 54 उम्मीदवारों में से 29 उम्मीदवारों ने वैकल्पिक विषय के रूप में हिन्दी साहित्य लेकर यह कामयाबी हासिल की है। दो छात्रों ने गणित विषय लेकर हिन्दी माध्यम से सफलता हासिल की, जिनमें से एक ने 120वीं रैंक हासिल की है। बहरहाल, हिन्दी को आज यदि हम विश्व भाषा कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्यों कि आज के समय में हिन्दी के बोलने, समझने वालों की संख्या विश्व में तीसरी है। </p>
<p>कितनी बड़ी बात है कि विश्व के 132 देशों में जा बसे भारतीय मूल के लगभग 2 करोड़ लोग हिन्दी माध्यम से ही अपना कार्य निष्पादित करते हैं। लेकिन विडंबना की बात तो यह है कि आज भी बहुत से लोग हिन्दी की तुलना में अंग्रेजी भाषा को ही अधिक तवज्जो या महत्व देते हैं और वे समझते हैं कि आज अंग्रेजी भाषा के बिना काम नहीं चलाया जा सकता है। बहुत से लोग अंग्रेजी भाषा सीखने, बोलने को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं और वे यह सोचते हैं कि यदि वे हिन्दी बोलेंगे, पढ़ेंगे, लिखेंगे या सुनेंगे तो उन्हें दूसरे लोग अधिक महत्व नहीं देंगे। जबकि ऐसा नहीं है। अंग्रेजी भाषा भी बुरी नहीं है, कोई भी भाषा कभी भी अच्छी या बुरी नहीं होती है, हम सभी को विश्व की अनेकानेक भाषाएं सीखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन अपनी मां बोली, अपनी मातृभाषा को छोड़कर दूसरी भाषा को नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि यदि हम स्वयं ही अपनी भाषा को, भाषाओं को महत्व नहीं देंगे तो हमारी भाषा, भाषाएं आखिरकार कैसे पनपेगी? सबसे पहले हमें अपनी भाषा को महत्व देना चाहिए, क्योंकि अपनी मां बोली, अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति हमेशा सहज, सरल व सुबोध होती है। </p>
<p>कोई भी व्यक्ति जितनी सहज अभिव्यक्ति अपनी मातृभाषा, अपनी मां बोली में दे सकता है, उतनी सहजता, सरलता से वह दूसरी भाषा में अपनी अभिव्यक्ति कभी भी नहीं दे सकता है। यहां जानकारी देना चाहूंगा कि एशियाई संस्कृति में अपनी विशिष्ट भूमिका के कारण हिन्दी एशियाई भाषाओं से अधिक एशिया की प्रतिनिधि भाषा है। एक भाषा के रूप में हिन्दी न सिर्फ  भारत की पहचान है बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों, हमारी संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। यह भारत की एकता व अखंडता की प्रतीक है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिन्दी विश्व की संभवत: सबसे वैज्ञानिक भाषा है जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं। हिन्दी की शब्दावली वैज्ञानिक है और यह हमारे पारम्परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है। हिन्दी भारत संघ की राजभाषा (आफिशियल लेंग्वेज) होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की भी प्रमुख राजभाषा है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिन्दी का एक विशेष स्थान है। जानकारी देना चाहूंगा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में क्रमश: असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी,कोंकणी, गुजराती,डोगरी, तमिल, तेलगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोडो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथाली, संस्कृत व सिंधी को शामिल किया गया है। <br />           </p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 10:30:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिन्दी के ह्रदय में राजस्थान का अहम स्थान</title>
                                    <description><![CDATA[हिन्दी की आधारशिलाएं राजस्थान की ही हैं। रासो साहित्य हो या महाकाव्य या दोहे। हिन्दी के दस प्रमुख महाकाव्यों में अधिकतर यहीं के हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthans-important-place-in-the-heart-of-hindi/article-22725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/555555555555.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिन्दी हमारी राज भाषा है; पर राजस्थान के बिना यह अधूरी है। हिन्दी की आधारशिलाएं राजस्थान की ही हैं। रासो साहित्य हो या महाकाव्य या दोहे। हिन्दी के दस प्रमुख महाकाव्यों में अधिकतर यहीं के हैं। ढोला मारू के दोहे हिन्दी में पढ़ाए जाते हैं, जो राजस्थान से हैं। बिहारी सतसई, पद्मावत, वृंद सतसई, वीर सतसई जैसे काव्य ग्रंथ हों या स्वामी दयानंद सरस्वती का लिखा सत्यार्थप्रकाश। ये सभी राजस्थान में रचे गए। हिन्दी भाषा का जो चदरिया आज पूरा हिंदुस्तान ओढ़ रहा है, उसके धागे राजस्थान के चरखों  पर कतने के बाद भी ही खड्डी तक पहुंचे। <br /><br /><strong>दुनिया की पहली बागी कवयित्री!</strong><br />हिन्दी साहित्य में मीरा की पदावलियां निधि हैं। वे नागौर के कुड़की में 1377 में जन्मी।  कृष्ण भक्त थीं। उन्होंने कहा था, कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, मैं तो लियो है री आंखीं खोल। मीरा संत रैदास की शिष्य थीं और दुनिया की पहली बागी कवयित्री! उन्होंने जहर का प्याला पिया।<br /><br /><strong>बिहारी सतसई</strong><br />बिहारी और उनकी सतसई के बिना हिन्दी साहित्य की कल्पना ही नहीं की जा सकती। यह जयपुर में मिर्जा राजा जयसिंह के शासनकाल में सोलहवीं सदी में जयपुर में रची गई। <br /><br /><strong>पद्मावत</strong><br />पद्मावत मलिक मुहम्मद जायसी की लिखा अवधी का महाकाव्य है।  इसमें सूफी जीवन दर्शन का वर्णन है, लेकिन इसकी कहानी चित्तौड़ के राणा रतनसेन और पद्मिनी की प्रेम कहानी है। <br /><br /><strong>उसने कहा था</strong><br />यह हिन्दी की पहली आधुनिक कहानी मानी जाती है। इसे अब सौ साल हो चुके हैं। इसके लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी अजमेर स्थित मेयो कॉलेज में संस्कृत के विभागाध्यक्ष थे। <br /><br /><strong>धागा प्रेम का </strong><br />अब्दुदर्रहीम खानेखाना प्रसिद्ध कवि तो थे ही, वे अकबर के सेनापति भी थे। यह कम लोगों को जानकारी है कि वे रणथंभौर के जागीरदार भी रहे हैं। उनके दोहे प्रेम के धागे बुनते हैं। <br /><br /><strong>वृंद सतसई</strong><br />वृंद हिन्दी के प्रख्यात कवि थे। वे नीति के दोहे लिखकर प्रसिद्ध हुए। वे मूलत: मेड़ता के थे। वृंद के पूर्वज बीकानेर के निवासी थे। वृंद की सतसई हिन्दी साहित्य में बेहद प्रसिद्ध है। <br /><br /><strong>वीर सतसई</strong><br />वीर पुरुषों पर हिन्दी के प्रख्यात साहित्यकार वियोगी हरि की लिखी वीर सतसई का उल्लेख सभी इतिहासकारों ने प्रमुखता से किया है। यह हिन्दी की अनुपम निधि है। <br /><br /><strong>हल्दीघाटी</strong><br />इस महाकाव्य को श्यामनारायण पांडेय ने रचा। यह  हिन्दी के प्रसिद्ध महाकाव्यों में एक माना जाता है। इसकी पृष्ठभूमि हल्दीघाटी का युद्ध और प्रताप तथा चेतक का शौर्य है। <br /><br /><strong>सत्यार्थ प्रकाश</strong><br />उदयपुर में यह ग्रंथ रचने वाले दयानंद सरस्वती ने हिन्दी को आधुनिक बनाने का काम किया। हिन्दी के साहित्यकारों ने मानक भाषा के रूप में इसी ग्रंथ को शुरू में माना। <br /><br /><strong>गोली</strong><br />आचार्य चतुरसेन शास्त्री किसी समय जयपुर में रहे थे और उन्होंने राजस्थान के रनिवासों का काफी अध्ययन किया था। इसी पर उनका यह उपन्यास हिन्दी भाषा की बड़ी निधि है।<br /><br /><strong>ये है बेहतरीन गीतकार</strong><br />राजस्थान ने हिन्दी सिनेमा को बेहतरीन गीतकार भी दिए। इनमें हसरत जयपुरी और भरत व्यास तो थे ही, विश्वेश्वर शर्मा और शमीम जयपुरी भी प्रमुख रहे हैं। इन्होंने कमाल गीत लिखे, जो हिन्दी साहित्य में अहम हैं। भरत व्यास का आधा है चंद्रमा, रात आधी, रात आधी तेरी मेरी बात आधी जैसे गीत दुर्लभ हैं। <br /><br /><strong>हिन्दी के नभ में राजस्थान के रचियता</strong><br />हिन्दी के कवियों या साहित्यकारों में एक अहम नाम है : नंदकिशोर आचार्य। वे प्रदेश के अकेले ऐसे साहित्यकार हैं, जिन्हें केंद्रीय  साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला हुआ है। आचार्य मूलत: बीकानेर से हैं और उन्होंने कविता, नाटक, कहानी, समालोचना और अनुवाद संबंधी बहुत उल्लेखनीय काम किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Sep 2022 10:35:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिन्दी : अंतस की सचेतन अभिव्यक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[साहित्यिक हिन्दी का प्रसार भारतेन्दु हरिश्चन्द के पदार्पण से प्रारम्भ होता है। इसके साथ ही शुरू होता है दौर लघु पत्रिकाओं का। स्वयं भारतेन्दु कविवचनसुधा के साथ सम्पादकीय परम्परा को प्रारम्भ करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/english-conscious-expression-of-the-inner/article-22723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/p-61.jpg" alt=""></a><br /><p>साहित्य विधाओं के भीतर आकार लेता है और विधाएँ विभिन्न मनोभावों और जीवन-यथार्थ के ताने-बाने से आगे बढ़ती हैं। हिन्दी का सफर किसी भी अन्य भाषा की ही तरह सतत विकासशील रहा है। इसका विकास यों तो संस्कृत-पालि-प्राकृत-अपभ्रंश की विकास-सरणियों से गुजरता है, परन्तु साहित्यिक हिन्दी का प्रसार भारतेन्दु हरिश्चन्द के पदार्पण से प्रारम्भ होता है। इसके साथ ही शुरू होता है दौर लघु पत्रिकाओं का। स्वयं भारतेन्दु कविवचनसुधा के साथ सम्पादकीय परम्परा को प्रारम्भ करते हैं। गद्य के साथ-साथ हिन्दी पद्य की भी भाषा बनती है। भारतेन्दु व उनके मण्डल में बालकृष्ण भट्ट, हिन्दी प्रदीप (1877ई.), प्रताप नारायण मिश्र, ब्राह्मण (1880 ई.), अम्बिकादत्त व्यास (पीयूष प्रवाह), ठाकुर जगमोहनसिंह आदि अनेक पत्रिकाओं का संपादन कर साहित्यिक पत्रकारिता की नींव रख रहे थे।<br /><br />हिन्दी की अनेक पत्र-पत्रिकाएँ वीणा, बनासजन, हंस, नया ज्ञानोदय, पहल, पक्षधर, वसुधा, पाखी, कथादेश, अनुसंधान, वाङमय, मधुमती आदि प्रतिबद्धता के साथ महत्त्वपूर्ण व संग्रहणीय अंक निकाल रही हैं, जिससे हिन्दी की  विधाओं, समकालीन लेखन और विविध विमर्शों केन्द्रित रचनाओं का व्याप तो अनवरत बढ़ ही रहा है, साथ ही साथ पाठकों की सांस्कृतिक समझ भी विकसित हो रही है। ऐसे में हिन्दी के लिए लघुपत्रिकाओं का होना एक वरदान है; परन्तु वे भी पाठकों की कमी का शिकार हैं। वे सम्पूर्ण बौद्धिक खुराक हैं, लेकिन पहुँच उतनी नहीं। <br /><br />हिन्दी साहित्य में हिन्दी भाषा की स्थिति को देखें तो जहाँ पहले लेखकों का ध्यान इस ओर रहता था कि हिन्दी परिष्कृत और प्रांजल रूप से सामने आए अब साहित्यिक रचनाएँ दैनन्दिन भाषिक प्रयोग पर अधिक जोर दे रही हैं।  हिन्दी भाषा के साथ-साथ उसका साहित्य वंचितों और उपेक्षितों को केन्द्र में लाने की ओर लगातार ध्यान दे रहा है। इस कड़ी में असगर वजाहत, मंजूर एहतेशाम, चित्रा मुद्गल, नासिरा शर्मा, मैत्रेयी पुष्पा, बजरंग तिवाड़ी, मृणाल पांडे, प्रियदर्शन, वंदना राग, सुजाता आदि रचनाकार  महत्त्वपूर्ण साहित्यिक अवदान देकर साहित्य, आलोचना  और सरोकारों को अपनी आवाज दे रहे हैं। आज हिन्दी की 200 से अधिक पत्रिकाएँ हैं, परन्तु इस से कई गुना अधिक वेब और ई-पत्रिकाएँ हैं। ऐसे में भाषिक सजगता के आग्रहों को लेकर कितनी पत्रिकाएँ संचालित हो रही हैं, कौन प्रतिबद्धता के साथ साहित्यिक सरोकारों पर बात कर रहा है, यह विश्लेषण का विषय है। इस दौड़ में शब्दाकंन, समालोचन, कविताकोश, रेख्ता, हिन्दवी आदि महत्त्वपूर्ण सामग्री पाठकों तक पहुँचा रहे हैं। <br /><br />हिन्दी का लेखक वही हो सकता है जिसे हिन्दी की समझ हो’, यदि  महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के इस सूत्र वाक्य को वर्तमान हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता अपना लेते हैं तो भाषिक दुराग्रहों और भाषाई अड़चनों से सहज ही बचा जा सकता है। भाषा को लेकर मौजूदा लेखक अतिउत्साही हैं, वे शब्द की प्रकृति को जाने बगैर ही उस पर आधिकारिक तौर पर लिखने और प्रकाशित होने की बात करते हैं जो हिन्दी के लिए चिंताजनक है। <br />यदि हिन्दी का प्रयोक्ता हिन्दी के शुद्ध प्रयोग का यदि आग्रही हो जाता है तो बात कुछ बन सकती है। आधुनिक हिन्दी  में तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी और संकर शब्दों का प्रचलन है। इन भिन्न- भिन्न स्वरूप वाले शब्दों की सम्यक् प्रकृति का याथातथ्य  ज्ञान ही हमें, हिन्दी के प्रयोग, उसकी शब्द-सम्पदा के माहात्म्य को सुरक्षित व संरक्षित करने में सहायता प्रदान कर सकता है। <br /><br />जन-आंदोलनों की भी भाषा रही हिंदी के महत्त्व को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने बड़े सुंदर रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा था, ‘भारतीय भाषाएँ नदियाँ हैं और हिंदी महानदी’। हिन्दी में भोजपुरी, राजस्थानी, मराठी आदि के शब्द आज लेखन में भी प्रयुक्त हो रहे हैं।  हिन्दी के इसी समरसताजन्य महत्त्व, सर्वव्यापी प्रयोग-प्रसार और लोकप्रयिता को देखते हुए आज कम्प्यूटर पर हिन्दी पठन-पाठन-लेखन के अनेक सॉफ्टवेयर ईजाद हो चुके हैं। <br />भाषा का व्यावहारिक पक्ष हो या सैद्धान्तिक, आज अंतर्जाल पर हिन्दी की अनेक दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध हैं। यू ट्यूब पर भी हिन्दी कविता चैनल, साहित्य जगत में काफी लोकप्रिय है। फेसबुक और ट्वीटर पर लेखकों के पेज हंै। विविध भारती और आकाशवाणी पर हिन्दी भाषा और साहित्य को लेकर बहुत कुछ है। स्पष्ट है हिन्दी की इस लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इस भाषा के प्रयोक्ता ही तो हैं, जिनमें सतत इजाफा हो रहा है। गीतांजली श्री की रेत समाधि को बुकर पुरस्कार हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है और भाषा के प्रयोक्ताओं और साहित्यकारों के लिए एक जिम्मेदारी भी तय करता है।  हिन्दी भाषा के सौन्दर्य को अक्षुण्ण रखने के लिए और साहित्य को कालजयी बनाने के लिए बुद्धिजीवी वर्ग और रचनाकारों को चिंतन  करना होगा। साहित्य से पहले भाषा पर विचार करना होगा, उसकी व्याकरणिक कोटियों के प्रति सटीक जानकारी प्राथमिक शिक्षा से ही बच्चों को देनी होगी ताकि सटीक प्रार्थना-पत्र और अशुद्धियाँ नहीं लिख पाने का दोष हम युवापीढ़ी को न दे सकें। उसके भाषिक प्रयोगों को समृद्ध बनाकर उसका सुचिंतित प्रयोग कर ही हम भाषा का सहेजन-संरक्षण और संवर्धन कर सकते हैं। <br /><br />-विमलेश शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Sep 2022 10:11:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस स्थापना दिवस पर  सोनिया गांधी का देश और कार्यकर्ताओं के नाम हिंदी सन्देश</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस केवल एक राजनीतिक पार्टी का ही नाम नहीं है, बल्कि एक आंदोलन का नाम कांग्रेस पार्टी है: सोनिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-3607"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/soniya.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के 137 वें स्थापना दिवस के मौेके पर  सोनिया गांधी का देश और कार्यकर्ताओं के नाम हिंदी सन्देश जारी हुआ। सोनिया ने अपने संदेश में कहा कि हमारे प्यारे देशवासियों और कांग्रेस के जांबाज साथियों! आज हम सब 136 साल पुरानी अपनी कांग्रेस का स्थापना दिवस पूरे देश में बड़े व्यापक रूप से मना रहे हैं। कांग्रेस केवल एक राजनीतिक पार्टी का ही नाम नहीं है, बल्कि एक आंदोलन का नाम कांग्रेस पार्टी है। कांग्रेस की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई, यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है।</p>
<p>आजादी के आंदोलन में कांग्रेस और उसके तमाम नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, संघर्ष किया, जेलों में कठोर यातनाएं झेली और बहुत से देश भक्तों ने अपने प्राणों तक का बलिदान दिया, तब जाकर कहीं हमें आजादी मिली। आजादी के बाद हमें जो भारत मिला उसकी कल्पना करना कठिन है, लेकिन हमारे महान नेताओं ने बड़ी सूझबूझ और दृढ़ निश्चय के साथ भारत के नव-निर्माण की एक मजबूत बुनियाद रखी, जिस पर चलकर हमने एक सशक्त भारत खड़ा किया। एक ऐसा भारत जिसमें सभी देशवासियों के अधिकारों और हितों का ध्यान रखा गया। जिन लोगों ने आजादी के आंदोलन में भागीदारी नहीं दिखाई, वह इसकी कीमत कभी नहीं समझ सकते। आज भारत की उस मजबूत बुनियाद को कमजोर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।<br /> <br /> -इतिहास को झुठलाया जा रहा है।<br /> -हमारी विरासत गंगा-जमुना संस्कृति को मिटाने की नापाक कोशिश हो रही है।<br /> -देश का आम नागरिक असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहा है।<br /> -लोकतंत्र और संविधान को दरकिनार कर तानाशाही चलाई जा रही है।<br /> <br /> ऐसे वक्त में कांग्रेस चुप नहीं रह सकती। देश की विरासत को किसी को भी नष्ट करने की इजाजत नहीं देगी। आम जनमानस के लिए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए, देश विरोधी, समाज विरोधी साजिशों के खिलाफ हर संभव संघर्ष करेगी, हर कुर्बानी देगी।<br /> <br /> आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर एक-एक कांग्रेस जन को यही संकल्प लेना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाना है।<br /> इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को कांग्रेस के स्थापना दिवस पर और आने वाले नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।<br /> <br /> जय हिंद, जय कांग्रेस</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 16:51:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>टीम पूरी : राज्यपाल ने 11 कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों को दिलाई शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[सबसे पहले हेमाराम चौधरी ने हिन्दी में और अंत में जाहिदा ने ली अंग्रेजी में शपथ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-11-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B6%E0%A4%AA%E0%A4%A5/article-2599"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/gehlot-mantrimadal-oath-new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत टीम के 11 कैबिनेट और चार राज्यमंत्रियों को राज्यपाल कलराज मिश्र ने रविवार को शपथ दिलाई। राजभवन में आयोजित समारोह में इन 15 मंत्रियों ने 35 मिनट में शपथ ली। इससे पहले मुख्यमंत्री ने शपथ दिलाने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया। मुख्य सचिव निरंजन कुमार आर्य ने राज्यपाल से समारोह शुरू करने की अनुमति मांगी। शाम को चार बजे आयोजित इस समारोह में राज्यपाल ने सबसे पहले हेमाराम चौधरी को शपथ दिलाई। सबसे अंत में जाहिदा को शपथ दिलाई गई। दूसरे नंबर पर महेंद्रजीत सिंह मालवीय और तीसरे नंबर पर रामलाल जाट ने शपथ ली।  समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, भाजपा के उप नेता राजेन्द्र राठौड़ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। <br /> <strong><br /> ये बने कैबिनेट मंत्री</strong><br />  हेमाराम चौधरी, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, महेश जोशी, विश्वेन्द्र सिंह, रामलाल जाट, रमेश मीणा, ममता भूपेश बैरवा, भजनलाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविंद राम मेघवाल और शकुंतला रावत।<br /> <strong><br /> ये बने राज्य मंत्री</strong><br /> बृजेंद्र सिह ओला, मुरारीलाल मीणा, राजेंद्र गुढ़ा और जाहिदा खान।<br /> <strong><br /> यह था तीसरा शपथ ग्रहण समारोह</strong><br /> मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार का यह तीसरा शपथग्रहण समारोह था। इससे पहले 17 दिसम्बर 2018 को राजभवन से बाहर रामनिवास बाग में आयोजित समारोह में केवल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने शपथ ली थी। उसके बाद 24 दिसम्बर 2018 को राजभवन में हुए समारोह में 23 मंत्रियों ने शपथ ली थी। दोनों बार ही पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने शपथ दिलाई थी।<br /> <br /> <strong>अब बीस काबीना और नौ राज्यमंत्री</strong><br /> जयपुर। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंत्रियों की फुल टीम बन गई है। इस टीम में 20 काबीना मंत्री और नौ राज्य मंत्री हैं। टीम के मुखिया गहलोत समेत मंत्रिपरिषद में कुल तीस सदस्य हो गए हैं। अब मंत्रिपरिषद में एक भी पद खाली नहीं है।</p>
<p><strong><br /> फुल टीम में ये हैं काबीना मंत्री</strong><br /> बीडी कल्ला, शांति धारीवाल, परसादीलाल मीणा, लालचंद कटारिया, प्रमोद जैन भाया, उदयलाल आंजना, प्रताप सिंह खाचरियावास, सालेह मोहम्मद, हेमाराम चौधरी, महेन्द्रजीत मालवीय, रामलाल जाट, महेश जोशी, विश्वेन्द्र सिंह, रमेश मीणा, ममता भूपेश बैरवा, भजनलाल जाटव, टीकाराम जूली, गोविन्दराम मेघवाल और शकुंतला रावत।<br /> <strong><br /> ये हैं राज्य मंत्री</strong><br /> भंवर सिंह भाटी, सुखराम विश्नोई, अशोक चांदना, राजेन्द्र सिंह यादव, डॉ. सुभाष गर्ग, बृजेन्द्र सिंह ओला, मुरारीलाल मीणा, राजेन्द्र गुढ़ा और जाहिदा खान।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Nov 2021 11:01:53 +0530</pubDate>
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                <title>JOB Alert डिप्टी रजिस्ट्रार, हिंदी officer समेत कई पदों पर निकली भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 16 नवंबर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/6180d8de56523/article-2058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/job-alert.jpg" alt=""></a><br /><div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">कानपुर ने जूनियर टेक्नीशियन,जूनियर टेक्निकल सुपरिंटेंडेंट, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, हिंदी आॅफिसर, स्टूडेंट्स काउंसलर,फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर, जूनियर असिस्टेंट, ड्राइवर और अन्य पदों पर 95 रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन पत्र संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 16 नवंबर है। उम्मीदवारों को आवेदन पत्र के साथ ग्रुप ए पदों के लिए 500 रुपये और ग्रुप बी और सी पदों के लिए 200 रुपये जमा करने होंगे। एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को आवेदन फीस का भुगतान करने से छूट दी गई है। महिला उम्मीदवारों को फीस का भुगतान करने से छूट दी गई है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">आॅनलाइन आवेदन करने के लिए  डायरेक्ट लिंक पर जाएं। </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">डिप्टी रजिस्ट्रार- 3 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">असिस्टेंट रजिस्ट्रार- 9 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">हिंदी आॅफिसर- 1 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">स्टूडेंट्स काउंसलर- 1 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">जूनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट- 12 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">जूनियर सुपरिटेंडेंट- 15 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर- 4 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">जूनियर टेक्निशियन- 17 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">जूनियर असिस्टेंट- 31 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">ड्राइवर- 1 पद</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को शैक्षिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य आवश्यकताओं के मानदंडों के माध्यम से जाना चाहिए। विस्तृत नौकरी विज्ञापन आईआईटी कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong>आखिरी तारीख :16 नवंबर 2021</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Nov 2021 12:38:09 +0530</pubDate>
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