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                <title>puja - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ताने सहकर भी नहीं टूटी पूजा, ट्रांसपोर्ट बिजनेस में जमाई धाक</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार मैं और छोटी बहन घर की चौखट पार कर पिता का बिजनेस संभालने छोटी सी दुकान में पहुंचे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-after-facing-taunts--puja-did-not-give-up--made-her-mark-in-the-transport-business/article-92209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  ‘<strong>‘त्वं हि सा परमा शक्तिरनन्ता परमेष्ठिनी। सर्वभेदविनिर्मुक्ता सर्वभेदविनाशिनी॥’’</strong><br /><strong>(हिन्दी अर्थ - तुम ही वह परम शक्ति हो, जो अनंत और परम स्थान की अधिष्ठात्री है। </strong><br /><strong>तुम सभी भेदों से मुक्त हो और सभी भेदों का नाश करने वाली हो।)</strong><br />यह पंक्ति नारी शक्ति की असीम और उच्चतम स्वरूप का वर्णन करती है। यह पद्य  महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में बहुत प्रासंगिक है। पद्य में कहा गया है कि महिला हर प्रकार के भेदभाव से मुक्त है और समाज में व्याप्त इन भेदों को समाप्त करने की शक्ति भी रखती है। महिला शक्ति न केवल दिव्य और अनन्त है, बल्कि वह समस्त भेदों को समाप्त कर समाज को एक नए और बेहतर भविष्य की ओर ले जा रही है। इसी सोच को लेकर दैनिक नवज्योति नवरात्र के नौ दिन तक समाज के  विभिन्न क्षेत्रों में  विशेष कार्य करने वाली  महिलाओं को पाठकों को रूबरू कराएगा।  पिता का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय था। 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, तब उनकी अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। बड़े भाई ने घर की जिम्मेदारी उठाई और पिता का बिजनेस संभाला। जिंदगी ठीक कट रही थी। हम तीनों बहनें भाई की छत्रछाया में सिविल सर्विसेज में जाने के ख्वाब देखने लगे। लेकिन, कू्रर नियति ने हमारा इकलौता भाई भी छीन लिया। परिवार बिखर गया।  खुद को व मां को संभालना मुश्किल हो गया। अब घर की जिम्मेदारी हम तीनोें बहनों पर थी। परिवार पर आर्थिक तंगी के बादल मंडराने लगे। बड़ी बहन की शादी भी नजदीक थी।   </p>
<p>पहली बार मैं और छोटी बहन घर की चौखट पार कर पिता का बिजनेस संभालने छोटी सी दुकान में पहुंचे। लेकिन, पुरूष प्रधान व्यवसाय होने के चलते लोगों को हमारा हमारा ट्रांसपोर्ट  क्षेत्र में आना पसंद नहीं था। तुम लड़कियों से यह काम नहीं होगा..., दिन-रात पुरूषों के बीच रहना होता है..., आधी रात को भी दौड़ना पड़ता है... कोई सनकी तो कोई सिरफिरा भी टकराएगा, तुम नहीं संभाल पाओगी....,तरह-तरह के ताने सहने पड़ते थे, आंसू आते पर छिपा लेते, गुस्सा आता, पी जाते। हालांकि, कुछ ट्रांसपोटर्स ने काम सीखने में हमारी मदद की।  संघर्ष की यह कहानी है, रामपुरा निवासी पूजा धमीजा की। पूजा, कोटा संभाग की एकमात्र महिला ट्रांसपोर्टर हैं, 24 सालों में उन्होंने अजमेर से हाड़ौती तक बिजनेस जमाकर अपना वर्चस्व कायम किया। </p>
<p><strong>जुनून ऐसा की पुरूष भी पीछे रहें</strong><br />24 साल से ट्रांसपोर्ट का बिजनेस कर रही पूजा 49 साल की हो चुकी है। काम के प्रति जूनून देख  पुरूष ट्रांसपोर्टर भी दंग रह जाते हैं। कई बार माल अनलोडिंग करने के लिए लेबर नहीं होती तो वह खुद ट्रक, मिनीडोर में चढ़ भारी-भरकम कार्टून कंधों पर उठा गोदाम तक पहुंचाती है। वहीं, डिलीवरी के दौरान गाड़ी खराब हो जाती तो तुरंत दूसरे वाहन का इंतजाम करने, नो-एंट्री में फंसे वाहनों को निकलवाने, समय पर बुकिंग पहुंचाने सहित कई चुनौतियां सामना आसानी से निपटा देती है। ट्रांसपोर्ट के काम में पूजा का कई बार शराबी व उत्पाती ड्राइवरों से भी पाला पड़ता है। लेकिन वह  उनकी दबंगता के कारण पंगा लेने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते।  </p>
<p><strong>आईपीएस बनना था, ट्रांसपोर्टर बन गई</strong><br />पूजा बतातीं हैं, आईपीएस बनना चाहती थी। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता व भाई की मृत्यु के बाद  घर चलाने की जद्दोजहद में आईपीएस ख्वाब ही बनकर रह गया। शुरुआती दौर में पुराने कर्मचारियों ने बिलों में फर्जीवाड़ा कर लाखों का नुकसान पहुंचा दिया। गलतियों से सबक लिया और बिजनेस को आगे बढ़ाने में जुट गई। इसी तरह से मैं ट्रांसपोर्टर बनकर रह गई।</p>
<p><strong>बहन मां को संभालतीऔर मैं बिजनेस</strong><br />पूजा ने मां और बिजनेस की जिम्मेदारी के चलते शादी नहीं की। जबकि, उन्होंने अपने दम पर बड़ी और छोटी बहनों की शादी की और अकेले बिजनेस भी संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी बहन की दिल्ली में शादी हुई थी, जो अब कोटा ही शिफ्ट हो गई है। ऐसे में दिन में वह मां के पास रहती है और में दुकान व गोदाम पर रहती हूं। बहनों के सहयोग से मैं इतना कुछ कर पा रही हूं। सुबह 11.30 बजे से दिनचर्या शुरू होती है। रात 12 बजे तक अजमेर, जयपुर व सोजत से आने वाली गाड़ियों को खाली करवाती हूं। इसी बीच बुकिंग भी जारी रहती है।  <br /> <br /><strong>चुनौतियां अपार, भरोसे पर टिका बिजनेस</strong><br />पूजा कहतीं हैं,  बुकिंग करवाने वाले को निर्धारित समय पर काम पहुंचाना, नोएंट्री से पहले लोडिंग वाहन गोदाम तक पहुंचना सहित कई चुनौतियां हैं। गत मंगलवार रात अचानक ड्राइवर भाग गया, वहीं, बाहर से आई गाड़ियों को अनलोडिंग करने के लिए स्टाफ भी गायब हो गया। ऐसे में रात 12 बजे घर से गोदाम पहुंची और दूसरी गाड़ी की व्यवस्था कर जिसको माल पहुंचाना था, वहां के लिए गाड़ी रवाना की। वहीं, लेबर के लिए हमारे सहयोगी ट्रांसपोर्टर से मदद मांग आधी रात तक माल खाली करवाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 15:32:50 +0530</pubDate>
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                <title>बेरोजगारों ने धरना स्थल पर मनाया भाई दूज का पर्व, अब तो मानों सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[बेरोजगारों ने धरना स्थल पर ही काली दिवाली व गोवर्धन पूजा कर मनाई तो वहीं आज भाई दूज का त्यौहार भी बेरोजगारों ने धरना स्थल पर ही मनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2150"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/bhaiduj.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 21 सूत्री मांगों को लेकर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के बैनर तले पिछले 24 दिनों से शहीद स्मारक  पर महापड़ाव जारी है। अपनी मांगों को लेकर 14 अक्टूबर से शहीद स्मारक पर शुरू हुआ यह धरना अब और उग्र होता जा रहा है। बेरोजगारों ने धरना स्थल पर ही काली दिवाली व गोवर्धन पूजा कर मनाई तो वहीं शनिवार को भाई दूज का त्यौहार भी बेरोजगारों ने धरना स्थल पर ही मनाया।</p>
<p><br /> धरना स्थल पर मौजूद महिला अभ्यर्थियों ने धरने में शामिल सभी भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर संघर्ष की जीत की कामना की तो वहीं प्रदेश के कई हिस्सों से धरना स्थल में शामिल हुए बेरोजगारों की बहनें भी  धरना स्थल पर पहुंचकर अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की।</p>
<p><br /> धरना स्थल पर मौजूद अन्य भाइयों को भी रक्षा सूत्र बांधकर उनकी जीत की कामना की। इस दौरान धरना स्थल पर मौजूद महिला अभ्यर्थियों ने धरने में शामिल सभी भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर संघर्ष की जीत की कामना की तो वहीं प्रदेश के कई हिस्सों से धरना स्थल में शामिल हुए बेरोजगारों की बहनें भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की। साथ ही धरना स्थल पर मौजूद अन्य भाइयों को भी रक्षा सूत्र बांधकर उनकी जीत की कामना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Nov 2021 15:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>दीपावली पूजन मुहूर्त </title>
                                    <description><![CDATA[लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त - 4 नवंबर शाम 6:32 से 6:45 बजे तक
प्रदोष काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 5 : 38 से रात्रि 8 : 15 तक
वृषभ काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 6 :20 से रात्रि 8 : 17 तक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-2093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/diwali5.jpg" alt=""></a><br /><p>पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन पूरा दिन ही शुभ माना जाता है। इस दिन किसी भी समय पूजन कर सकते हैं लेकिन प्रदोष काल से लेकर निशाकाल तक समय शुभ होता है। जो इस दिन बही बसना पूजन करने हैं। उनको ही राहु काल का विचार करना चाहिए, जो लोग सिर्फ गणेश लक्ष्मी जी का पूजन करें उनको विचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अमावस्या तिथि पर राहु काल का दोष नहीं होता।<br />  <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्ष्मी पूजन मुहूर्त</strong></span></span><strong><br /> लक्ष्मी पूजा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त - 4 नवंबर शाम 6:32 से 6:45 बजे तक<br /> प्रदोष काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 5 : 38 से रात्रि 8 : 15 तक<br /> वृषभ काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 6 :20 से रात्रि 8 : 17 तक</strong><br /> <br /> लक्ष्मी पूजन चौघड़िया मुहूर्त<br /> दोपहर – (चर, लाभ, अमृत ) 4 नवंबर प्रातः काल 10: 48 से 02 : 53 तक।<br /> शाम – (शुभ अमृत, चर ) 4 नवंबर शाम 04 : 16 से रात्रि 08 : 53 तक।<br /> रात्रि - ( लाभ ) 4 नवंबर रात्रि 12 : 09 से 01 : 47 तक।<br /> <br /> महानिशीथ काल मुहूर्त<br /> सिंह लग्न मुहूर्त्त - रात्रि 00:50 से 03:06 तक<br /> <br /> व्यापारिक प्रतिष्ठान पूजन मुहूर्त<br /> सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 'अभिजित -  दोपहर 11:48 से 12 : 32 मिनट तक<br /> धनु लग्न मुहूर्त्त - प्रातः काल 9:51 से 11:50 तक<br /> <br /> गृहस्थों के लिए पूजन मुहूर्त<br /> सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त - 4 नवंबर शाम 6 : 32 से 6 : 45 बजे तक<br /> प्रदोष काल मुहूर्त -  4 नवंबर शाम 5 : 38 से रात्रि 8 : 15 तक<br /> वृषभ लग्न मुहूर्त -  4 नवंबर शाम 6 : 20 से रात्रि 8 : 17 तक <br /> सिंह लग्न मुहूर्त - 4 नवंबर  मध्य रात्रि 00 : 50 से रात 03 : 06 तक <br /> <br /> गुरुवार को दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक राहुकाल रहेगा।<br /> 27 साल बाद दीपावली पर बन रहा है चतुग्रही योग का दुर्लभ संयोग</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>दीपावली पर बन रहा चतुर्ग्रही योग</strong></span></span><br /> दीपावली पर इस बार चतुष्ग्रही योग का शुभ संयोग रहेगा। यह शुभ संयोग सत्ताइस सालों बाद बन रहा है। पंचाग अनुसार चार नवंबर गुरुवार को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि है। इस दिन गौधूलि बेला में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इस दिन एक साथ चार ग्रहों की युति बन रही है। दीपावली पर तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा मौजूद रहेंगे। यह संयोग सत्ताइस सालों बाद बन रहा है। चतुष्ग्रही योग बनने से दीपावली लोगों के लिए शुभ फलदायी रहेगी। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस बार लक्ष्मी-गणेश पूजन पर चार ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। इस योग में एक ही राशि में चार ग्रह गोचर कर रहें होंगे। इसी दिन सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे। चार ग्रहों की इस युति से दीपावली के दिन शुभ योग बन रहा है। इस शुभ योग में दीपावली का त्योहार बहुत शुभ रहेगा। सभी पर देवी लक्ष्मी की कृपा रहेगी।<br /> <br /> ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार हर साल खास होता है, लेकिन ज्योतिष की नजर से भी यह दीपावली खास होने वाली है। इस साल दीपावली का त्योहार 4 नवंबर को गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन चार ग्रह एक ही राशि में रहेंगे। इस वजह से शुभ योग बन रहा है, जो कई सभी राशियों के लोगों को फायदा पहुंचाएगा। दीपावली के त्योहार पर धन की देवी और गणपति बप्पा की पूजा की जाती है। इस शुभ योग में मां लक्ष्मी की पूजा करने से देवी बहुत प्रसन्न होंगी और अपने भक्तों पर दिल खलकर कृपा बरसाएंगी।<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> बन रहा शुभ योग</strong></span></span><br /> तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं। लक्ष्मीजी की पूजा से शुक्र ग्रह की शुभता में वृद्धि होती है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को लग्जरी लाइफ, सुख-सुविधाओं आदि का कारक माना गया है। वहीं सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति और बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है। इसके साथ ही चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। वहीं सूर्य पिता तो चंद्रमा को माता कारक माना गया है।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>चार ग्रहों की युति</strong></span></span><br /> विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस बार चार नवंबर को दिवाली बेहद शुभ संयोग में मनाई जाएगी। इस बार दीपावली पर चार प्रमुख ग्रहों की युति हो रही है जिसमें इस दिन सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा तुला राशि में मौजूद रहेंगे। तुला राशि में सूर्य मौजूद रहेगा, जो 17 अक्टूबर 2021 को दोपहर 1 बजे प्रवेश करेगा और 16 नवंबर 2021 को दोपहर 12:49 मिनट तक रहेगा। सूर्य ग्रहों का राजा है। इसके कारण ये हर किसी के लिए शुभता लेकर आएगा।  तुला राशि में बुध ग्रह भी रहेगा। यह 2 नवंबर 2021 की सुबह 9:53 मिनट पर तुला राशि में गोचर करेंगे। मार्गी अवस्था में गोचर करते हुए ये 21 नवंबर की सुबह 04:48 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर जाएंगे। बुध ग्रहों के राजकुमार हैं, जिसके कारण धन लाभ और बिजनेस में बढ़ोतरी होगी। तुला राशि में मंगल ग्रह भी प्रवेश कर रहा है। यह ग्रह तुला राशि में 22 अक्टूबर 2021 को सुबह 1:13 मिनट बजे से 5 दिसंबर 2021 तक सुबह 5:01 मिनट तक रहेगा। मंगल ग्रहों का सेनापति है। तुला राशि में चंद्रमा भी प्रवेश कर रहा है। चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। वहीं सूर्य को पिता और चंद्रमा को माता का कारक माना जाता है।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>अमावस्या तिथि </strong></span></span><br /> अमावस्या तिथि प्रारंभ: 04 नवंबर 2021 को सुबह 06:03 मिनट से<br /> अमावस्या तिथि का समापन: 05 नवंबर की सुबह 02:44 मिनट पर समाप्त<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> इस विशेष संयोग में लक्ष्मी पूजन का महत्व </strong></span></span><br /> विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली के दिन सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे। तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं और लक्ष्मी जी की पूजा के लिए शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि लक्ष्मी जी की पूजा से शुक्र ग्रह के शुभ परिणाम और बढ़ जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह अच्छी जिंदगी, सुख-सुविधाओं आदि का कारक होता है, जबकि सूर्य ग्रहों के राजा, मंगल को ग्रहों के सेनापति और बुध ग्रहों के राजकुमार माने जाते हैं। वहीं चंद्रमा को मन का कारक होता है। इसके अलावा सूर्य पिता तो चंद्रमा को माता माना गया है। ऐसे में जब ये सभी शुभ ग्रह एक साथ एक ही राशि में रहते हैं तो सभी लोगों के लिए बहुत ही शुभ परिणाम देते हैं।<br /> <br /> <br /> <span style="color:#ff0000;"><span style="background-color:#ffff99;"><strong>दीपावली के दिन जरूर करें ये उपाय</strong></span></span><br /> विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली पर लक्ष्मी जी और गणेश महाराज की पूजा का विधान है। इसके अलावा आप इस दिन हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और अपने पितरों का पूजन भी जरूर करें। वहीं धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजा करें। इसके साथ ही दीपावली पूजा में आप श्रीसूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> लक्ष्मी पूजन मुहूर्त</strong></span></span><br /> लक्ष्मी पूजा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त - 4 नवंबर शाम 6:32 से 6:45 बजे तक<br /> प्रदोष काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 5 : 38 से रात्रि 8 : 15 तक<br /> वृषभ काल मुहूर्त: - 4 नवंबर शाम 6 :20 से रात्रि 8 : 17 तक<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> लक्ष्मी पूजन चौघड़िया मुहूर्त</strong></span></span><br /> दोपहर – (चर, लाभ, अमृत ) 4 नवंबर प्रातः काल 10: 48 से 02 : 53 तक।<br /> शाम – (शुभ अमृत, चर ) 4 नवंबर शाम 04 : 16 से रात्रि 08 : 53 तक।<br /> रात्रि - ( लाभ ) 4 नवंबर रात्रि 12 : 09 से 01 : 47 तक।<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> महानिशीथ काल मुहूर्त</strong></span></span><br /> सिंह लग्न मुहूर्त्त - रात्रि 00:50 से 03:06 तक<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> व्यापारिक प्रतिष्ठान पूजन मुहूर्त</strong></span></span><br /> सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 'अभिजित -  दोपहर 11:48 से 12 : 32 मिनट तक<br /> धनु लग्न मुहूर्त्त - प्रातः काल 9:51 से 11:50 तक<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> गृहस्थों के लिए पूजन मुहूर्त</strong></span></span><br /> सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त - 4 नवंबर शाम 6 : 32 से 6 : 45 बजे तक<br /> प्रदोष काल मुहूर्त -  4 नवंबर शाम 5 : 38 से रात्रि 8 : 15 तक<br /> वृषभ लग्न मुहूर्त -  4 नवंबर शाम 6 : 20 से रात्रि 8 : 17 तक <br /> सिंह लग्न मुहूर्त - 4 नवंबर  मध्य रात्रि 00 : 50 से रात 03 : 06 तक <br /> <br /> गुरुवार को दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक राहुकाल रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Nov 2021 12:50:43 +0530</pubDate>
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                <title>धनतेरस पर विशेष तैयारी के साथ करें पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[धन के देवता के मंत्र, पूजा के मुहूर्त, आरती, तस्वीर और पूजा विधि पहले से तैयार रखें ताकि उस दिन सब समय पर उपलब्ध हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-2061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/k1.jpeg.jpg" alt=""></a><br /><div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">घर के हर कोने से धूल मिट्टी गर्द आदि सब निकाल कर बाहर करें। घर को जितना हो सके फूलों और रंगबिरंगी चीजों से सजाएं, विशेषकर द्वार, आंगन और ड्राइंग रूम,रंगों से सजी रंगोली का इस दिन विशेष महत्व है। हैप्पी चटख और सुंदर कलर की रंगोली बनाएं। काले और मटमैले कलर से बचें।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">धन के देवता के मंत्र, पूजा के मुहूर्त, आरती, तस्वीर और पूजा विधि पहले से तैयार रखें ताकि उस दिन सब समय पर उपलब्ध हो सके।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">इस दिन बर्तन, सिक्के, सोना, चांदी, रत्न,गहने, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि खरीदने का महत्व है। पर्व से पहले ही पूरा परिवार राजी खुशी मिलकर तय कर लें कि इस बार क्या लाना है,और पहले से ही मानस भी बना लें और उससे संबंधित सर्च भी कर लें,जो भी वस्तु लाएं उसे खुशी खुशी लेकर आएं, किसी तरह का तनाव, क्लेश न हो और जितना हैसियत हो उतना ही खर्च करें।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">सोने.चांदी के सिक्के नहीं खरीद सकते वे लोगों आज पीतल का कोई बर्तन खरीदें और उसमें कुछ मीठा या चावल के दाने डालकर लाएं। इस दिन घर में किसी चीज से भरा हुआ पीतल का बर्तन लाना बड़ा ही अच्छा माना जाता है । दरअसल इसके पीछे एक मान्यता छुपी हुई है। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान धन्वन्तरि का अवतरण हुआ था, तब वो अपने हाथों में अमृत से भरा पीतल का कलश लिये हुए थे अत आज पीतल का बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ होता है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू को घर लाने से स्वयं मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। झाड़ू से हम अपने घरों की साफ.सफाई करते हैं और घर का सारी नकारात्मकता दूर करते हैं। यही कारण है कि झाड़ू का महत्व बेहद ही खास माना जाता है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> धनतेरस के दिन अक्षत यानी चावल को भी घर लाना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि अन्न में चावल यानी कि अक्षत को सबसे शुभ माना जाता है। अक्षत का मतलब होता है धन संपत्ति में अनंत वृद्धि। इसलिए धनतेरस के दिन अक्षत लाने से धन में वृद्धि होती है। इस दिन मिट्टी के खिलौने, मां लक्ष्मी-गणेश दीये व अन्य सजावटी सामग्री खरीदना भी बड़ा ही शुभ होता है। धनतेरस के दिन धनिया खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन धनिया लाकर मां लक्ष्मी को अर्पित करनी चाहिए और कुछ दाने गमले में भी बो देने चाहिए। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Nov 2021 13:28:45 +0530</pubDate>
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