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                <title>Reassessment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद विपक्षी खेमे को एकजुट करने के लिए 6 जून को 'INDIA' गठबंधन की बैठक होगी। राहुल गांधी से लंबी बातचीत के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के इसमें शामिल होने की संभावना है। बैठक में भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-mamata-unite-the-opposition-again-speculations-intensified-after-meeting/article-155486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rahul1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छह जून को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने की संभावना है। इसे एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की तरह देखा जा रहा है। देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच बनर्जी के इस अहम बैठक में शामिल हो सकने की सूचना तब सामने आई, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बनर्जी से आधे घंटे से भी अधिक समय तक बातचीत की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी मोर्चे पर गठबंधन के कई मुख्य सहयोगियों को मिली लगातार हार के बाद विपक्षी खेमे की रणनीति निशाने पर है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी का इस बैठक में जाना सियासत के लिहाज से काफी मायने रखता है।</p>
<p>हालिया विधानसभा चुनावों में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद गठबंधन के भविष्य की रणनीति तय करने के लिए इस बैठक को बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसकी अहम वजह यह है कि हाल ही में आये चुनावी नतीजों ने देश के कई राज्यों में विपक्षी खेमे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। खेमे के दो बड़े दलों को हार मिली है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा और द्रमुक तमिलनाडु में सत्ता बचाने में नाकाम रही है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह जून की बैठक का ध्यान न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने की रणनीति पर होगा, बल्कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन के सहयोगियों के राजनीतिक वजूद और उनकी प्रासंगिकता को बचाये रखने के तौर-तरीकों पर भी रहेगा। ममता बनर्जी के शामिल होने की संभावना ने इस बैठक की अहमियत को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं, जो विपक्षी राजनीति में एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए इस बैठक को उनके नेतृत्व की कड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे एक ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, जब इसकी एकजुटता और भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रमों की वजह से भी 'इंडिया' गठबंधन की स्थिरता को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गयी हैं। हालांकि कांग्रेस और द्रमुक ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन ख़बरों के मुताबिक चुनावी नतीजों के बाद दोनों पार्टियों के रिश्तों में कड़वाहट आ गयी है, क्योंकि कांग्रेस कथित तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी टीवीके के करीब जा रही है। इस बढ़ते तनाव ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि द्रमुक गठबंधन के साथ अपने जुड़ाव पर दोबारा विचार कर सकती है।</p>
<p>इसी तरह केरल में वामपंथियों के हाथ से सत्ता जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक माकपा नेतृत्व के रुख पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। यह पार्टी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर सक्रिय रूप से जुड़ी रहेगी या नहीं, इस बात पर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। इस पूरे ताने-बाने के बीच छह जून की यह बैठक काफी ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि इसमें होने वाले मंथन से भाजपा विरोधी दलों की भावी दिशा और उनकी एकजुटता की एक साफ तस्वीर सामने आने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:41:24 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी रक्षा सब्सिडी का युग समाप्त: हेगसेथ की दोटूक, बोले- हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 23वें शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों को सुरक्षा सब्सिडी देने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को निर्भर राज्यों के बजाय साझा जिम्मेदारी निभाने वाले साझीदार चाहिए। हेगसेथ ने दक्षिण कोरिया के रक्षा खर्च बढ़ाने के मॉडल की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-era-of-american-defense-subsidies-is-over-hegseth-warned/article-155490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)53.png" alt=""></a><br /><p>सिंगापुर। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित 23वां शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी रक्षा सब्सिडी मुहैया कराने का युग अब समाप्त हो गया है। हेगसेथ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों को संबोधित करते हुए एक संशोधित राष्ट्रीय रक्षा रणनीति की रूपरेखा पेश की। यह रणनीति शीत युद्ध के बाद के अमेरिका की सुरक्षा गारंटी मॉडल से एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है।</p>
<p>हेगसेथ ने कहा, "अमीर देशों की रक्षा के लिए अमेरिका द्वारा सब्सिडी देने का युग अब समाप्त हो गया है। हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की। हम साझा जिम्मेदारी पर बने गठबंधन चाहते हैं, न कि निर्भरता पर।" पीट हेगसेथ ने कहा, "हम अपने गठबंधनों और साझेदारों के लिए एक नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। एक ऐसा रास्ता जो शक्ति और हितों की वास्तविकताओं पर आधारित है। यह एक ऐसा रास्ता है जो अमेरिका को और मजबूत, हमारे सहयोगियों और साझेदारों को और अधिक सक्षम और प्रशांत क्षेत्र को और अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाएगा।"</p>
<p>उनके संबोधन का सबसे तीखा संदेश उन सहयोगियों के लिए था जो लंबे समय से वाशिंगटन की सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहे हैं, लेकिन उसके निवेश के बराबर योगदान नहीं दिया है। हेगसेथ ने घोषणा की, कि अमीर देशों को अमेरिकी सुरक्षा का मॉडल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने दक्षिण कोरिया को बतौर मॉडल पेश किया कि असली 'बोझ साझा करने' जैसा दिखता है। उन्होंने राष्ट्रपति ली के रक्षा खर्च को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने और अपनी पारंपरिक रक्षा की अधिक जिम्मेदारी लेने के फैसले की सराहना की। यह एक ऐसा पैमाना था जिसे वे हॉल में मौजूद अन्य लोगों के लिए भी तय करते दिखे।</p>
<p>बीजिंग में पिछले महीने हुए ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन के बाद से चीन को लेकर वाशिंगटन का लहजा अधिक संयमित रहा है लेकिन सचिव ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्रीय प्रभुत्व के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा, "किसी भी एक महाशक्ति के प्रभुत्व वाला प्रशांत क्षेत्र क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बिगाड़ देगा और उस संतुलन को कमजोर कर देगा जिसे हम सभी बनाए रखना चाहते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 17:19:52 +0530</pubDate>
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