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                <title>Paradigm - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Paradigm RSS Feed</description>
                
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                <title>ना IIT और ना IIM..फिर भी बने WhatsApp के नए CEO, जानें कौन हैं कुणाल शाह? </title>
                                    <description><![CDATA[मेटा ने CRED के संस्थापक कुणाल शाह को वॉट्सऐप का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है। वह विल कैथकार्ट की जगह लेंगे। बिना IIT या IIM डिग्री के, अपनी व्यावसायिक समझ के दम पर फ्रीचार्ज और क्रेड जैसे सफल स्टार्टअप बनाने वाले शाह अब इस वैश्विक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को नई दिशा देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/neither-iit-nor-iim-yet-he-became-the-new-ceo/article-157930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kunal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुंबई के उद्यमी और CRED के संस्थापक कुणाल शाह को मेटा ने WhatsApp का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ वे दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक WhatsApp की वैश्विक जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें यह दायित्व लंबे समय से कंपनी का नेतृत्व कर रहे विल कैथकार्ट की जगह सौंपा गया है। टेक उद्योग में इसे भारतीय प्रतिभा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</p>
<p>कुणाल शाह ने मुंबई में पले-बढ़े एक साधारण परिवार से निकलकर स्टार्टअप जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 2010 में डिजिटल पेमेंट कंपनी FreeCharge की स्थापना की, जिसे बाद में Snapdeal ने खरीद लिया। इसके बाद 2018 में उन्होंने फिनटेक प्लेटफॉर्म CRED शुरू किया, जिसने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। कुणाल शाह कई सफल स्टार्टअप्स में निवेशक और सलाहकार भी रहे हैं। अब WhatsApp की कमान संभालने के बाद उनसे प्लेटफॉर्म को नई दिशा देने और वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की उम्मीद की जा रही है।</p>
<p>आमतौर पर देखा जाता है कि किसी बड़े कॉर्पोरेट पदों पर रहने वाला व्यक्ति IIT या IIM जैसे इंस्टीट्यूट से पढ़ा लिखा होता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कुणाल शाह के पास में ये दोनों ही डिग्रीयां नहीं है। जी हां, कुणाल शाह ने न तो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और ना ही उनके पास MBA की कोई डिग्री है। उन्होंने सिर्फ BA किया है मगर इसके बावजूद उन्होंने अपनी सोच, अनुभव और बिजनेस समझ के दम पर इतना बड़ा स्टार्टअप खड़ा किया और उनकी मेहनत रंग लाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:25:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूपीईएस ने जयपुर में पेश किया ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ का विज़न, एआई-फर्स्ट शिक्षा मॉडल पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[शोध-आधारित यूपीईएस (UPES) विश्वविद्यालय ने खुद को 'एआई-फर्स्ट' संस्थान के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। ओपनएआई से साझेदारी के तहत 19,100 से अधिक छात्रों को उन्नत एआई टूल्स और पर्सनल एआई ट्यूटर मिलेंगे। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में यूपीईएस देश के निजी विश्वविद्यालयों में पहले स्थान पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/upes-presented-the-vision-of-%E2%80%98university-of-tomorrow%E2%80%99-in-jaipur/article-156596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत के अग्रणी बहुविषयक एवं शोध-आधारित विश्वविद्यालयों में से एक यूपीईएस (UPES) ने जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान खुद को ‘एआई-फर्स्ट’ विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की अपनी महत्वाकांक्षी पहल को विस्तार से प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ के अपने विज़न को साझा करते हुए बताया कि भविष्य की शिक्षा अब केवल पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उद्योग सहभागिता, शोध उत्कृष्टता और बेहतर करियर परिणामों पर आधारित होगी।</p>
<p>कार्यक्रम में बताया गया कि दुनिया तेजी से एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रही है, जिससे उद्योगों की कार्यप्रणाली और रोजगार की प्रकृति में बड़े बदलाव आ रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि एआई दक्षता, विश्लेषणात्मक सोच, अनुकूलनशीलता और समस्या समाधान जैसे कौशलों से भी लैस करें।</p>
<p>इसी दिशा में यूपीईएस ने हाल ही में ओपनएआई के साथ साझेदारी की है। इस सहयोग के तहत विश्वविद्यालय के 19,100 से अधिक छात्रों और 1,500 फैकल्टी सदस्यों को उन्नत एआई टूल्स तक निःशुल्क और नियंत्रित पहुंच प्रदान की जा रही है। विश्वविद्यालय अपने सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों में 33 प्रतिशत तक एआई का एकीकरण कर रहा है। साथ ही प्रत्येक छात्र को एक उन्नत एआई ट्यूटर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन, अवधारणाओं की स्पष्टता, अभ्यास सहायता और बहुभाषी शिक्षण में मदद करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम में राजस्थान के संदर्भ को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि राजस्थान आज देश के तेजी से उभरते नवाचार और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल हो चुका है। राज्य में 5,200 से अधिक डीपीआईआईटी-पंजीकृत स्टार्टअप और 6,000 से अधिक आई-स्टार्ट पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। ऐसे परिदृश्य में उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो डिजिटल कौशल, उद्यमशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ रोजगार बाजार में प्रवेश कर सकें।</p>
<p>यूपीईएस के प्रो-वाइस चांसलर (स्टूडेंट सक्सेस) डॉ. अभिषेक सिन्हा ने कहा कि भविष्य की शिक्षा केवल पाठ्यक्रमों को अपडेट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सीखने, सोचने और तकनीक के साथ जुड़ने के तरीके को बदलने का समय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण तकनीक, उद्योग और अंतर्विषयक शिक्षा को जोड़कर छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार कर रहा है।</p>
<p>यूपीईएस ने कार्यक्रम के दौरान अपने मजबूत उद्योग सहयोग नेटवर्क की भी जानकारी दी। विश्वविद्यालय वर्षों से आईबीएम, इन्फोसिस, बजाज ऑटो, एचपी, बॉश, एचसीएल टेक, मर्क, सिस्को, ज़ेबिया, टाटा पावर और एलएंडटी जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है। इन सहयोगों के माध्यम से छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं, उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक अनुभव का अवसर मिलता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपीईएस ने कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी स्थापित की है। इनमें यूसी बर्कले, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स जैसे संस्थान शामिल हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक शिक्षा, छात्र विनिमय कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय करियर अवसरों का लाभ मिलता है।</p>
<p>विश्वविद्यालय ने छात्रों के समग्र विकास के लिए भी कई अभिनव पहल शुरू की हैं। ‘स्कूल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम छात्रों को नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और करियर तैयारी में सहायता प्रदान करता है। वहीं ‘डिज़ाइन योर ओन डिग्री’ पहल के तहत छात्र 50 से अधिक अनूठे संयोजनों के माध्यम से अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। यूपीईएस रनवे के जरिए अब तक 250 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जा चुका है।</p>
<p>विधि शिक्षा के क्षेत्र में यूपीईएस स्कूल ऑफ लॉ ने एआई एंड लॉ, ब्लॉकचेन, डेटा एनालिटिक्स, आर्बिट्रेशन और कॉर्पोरेट लॉ जैसे आधुनिक विषयों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। वहीं यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस छात्रों को एआई, फिनटेक, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रहा है।</p>
<p>क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के अनुसार यूपीईएस ने शैक्षणिक प्रतिष्ठा के आधार पर भारत के निजी विश्वविद्यालयों में पहला स्थान हासिल किया है। एनआईआरएफ 2025 में विश्वविद्यालय को यूनिवर्सिटी श्रेणी में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 50 से अधिक फैकल्टी सदस्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025-26 में लगभग 800 रिक्रूटर्स की भागीदारी के साथ मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी दर्ज किया है, जहां उच्चतम पैकेज 54 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा।</p>
<p>यूपीईएस का मानना है कि एआई, उद्योग और नवाचार आधारित यह नया शिक्षा मॉडल छात्रों को न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की नौकरियों और वैश्विक अवसरों के लिए भी तैयार करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:24:27 +0530</pubDate>
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                <title>डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 में मुख्य अतिथि होंगे बालमुकुंद आचार्य, युवाओं और नवाचार को मिलेगा नया मंच</title>
                                    <description><![CDATA[डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 के लिए आयोजकों ने हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 27 जून 2026 को होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के होनहार स्टार्टअप्स, डिजिटल क्रिएटर्स और तकनीकी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/balmukund-acharya-will-be-the-chief-guest-at-digimohe-future/article-156226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 के आयोजन के संबंध में आज जयपुर संभाग के आयोजकों पंकज गुप्ता जी एवं मानव जैन जी द्वारा हाथोज धाम के स्वामी एवं हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक  से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का सादर निमंत्रण प्रदान किया गया। श्री बालमुकुंद आचार्य महाराज ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति देने की सहमति प्रदान की।</p>
<p>बालमुकुंद आचार्य महाराज के कार्यक्रम में शामिल होने की स्वीकृति से आयोजन को विशेष प्रेरणा एवं गरिमा प्राप्त होगी। आयोजन समिति ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवाओं को राष्ट्र निर्माण, संस्कृति संरक्षण एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि डिजिमोहे फ्यूचर इम्पैक्ट टेक अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन आगामी 27 जून 2026 को जयपुर स्थित Rajasthan International Centre में किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजस्थान के युवाओं, स्टार्टअप्स, डिजिटल क्रिएटर्स, नवाचारकर्ताओं एवं तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>आयोजन समिति ने बताया कि इस मंच के माध्यम से राजस्थान के युवा उद्यमियों एवं डिजिटल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में तकनीक, नवाचार, डिजिटल मीडिया, स्टार्टअप एवं सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:39:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-यूएस व्यापार समझौता जल्द ; ट्रंप ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे दोस्त, हार्ले-डेविडसन का दिया उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ जल्द ही एक बड़े व्यापार समझौते की उम्मीद जताई है। ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ बेहतरीन तालमेल का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर यह डील करेंगे। वाशिंगटन में चार दिवसीय द्विपक्षीय वार्ता पूरी होने के बाद आया यह बयान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-said-that-prime-minister-modi-is-my/article-156062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि भारत और अमेरिका जल्द ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जायेंगे। ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देश् ही एक व्यापार समझौते पर पहुंच जायेंगे। उन्होंने कहा "हम एक समझौते तक जरूर पहुंचेंगे, क्योंकि मैं भारतीय प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं। वे मेरे अच्छे दोस्त हैं। हमारे बीच बेहतरीन तालमेल है और हम मिलकर यह डील करने जा रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब 'भारत के साथ काफी मुनाफा कमा रहा है।" पहले स्थिति अलग थी और भारत भारी टैरिफ लगाकर अमेरिका से पैसे कमाता था।</p>
<p>अपनी बात को समझाने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिल ब्रांड 'हार्ले-डेविडसन' का उदाहरण दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अतीत में भारत के लगाये गये ऊंचे टैरिफ के कारण इस प्रतिष्ठित निर्माता के लिए भारत में अपने वाहन बेचना बेहद मुश्किल हो गया था। ट्रंप ने कहा, "अतीत में, वे हार्ले-डेविडसन को अपनी मोटरसाइकिलें नहीं बेचने देते थे। उन्होंने 200 प्रतिशत का टैरिफ लगा रखा था, जिससे हार्ले-डेविडसन के लिए रास्ते बंद हो गये थे। आखिरकार कंपनी को भारत जाकर अपने खुद के प्लांट लगाने पड़े। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन ऐसा हुआ। यह सब मेरे कार्यकाल से पहले की बात है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "वे भी यहां मोटरसाइकिलें बेचते थे। क्या आप जानते हैं कि हम उनसे कितना शुल्क लेते थे? कुछ भी नहीं। और अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। हम भारत के साथ काफी मुनाफा कमा रहे हैं।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि भारत सालों से अमेरिकी नीतियों का फायदा उठा रहा था और भारी-भरकम टैरिफ वसूल रहा था। उन्होंने कहा, "वे हमारी कंपनियों से भारी मात्रा में टैरिफ वसूलते थे और हम उनसे कुछ भी नहीं लेते थे।"</p>
<p>ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नयी दिल्ली में एक अंतरिम द्विपक्षीय समझौते पर चार दिनों तक चली बातचीत को गुरुवार को पूरा किया है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने इस वार्ता के बारे में कहा कि व्यापार वार्ता सहयोग और व्यावहारिकता की भावना से भरी रही। दोनों पक्षों ने एक ऐसे पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर पहुंचने की प्रतिबद्धता दोहरायी, जो द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी रक्षा सब्सिडी का युग समाप्त: हेगसेथ की दोटूक, बोले- हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 23वें शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों को सुरक्षा सब्सिडी देने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को निर्भर राज्यों के बजाय साझा जिम्मेदारी निभाने वाले साझीदार चाहिए। हेगसेथ ने दक्षिण कोरिया के रक्षा खर्च बढ़ाने के मॉडल की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-era-of-american-defense-subsidies-is-over-hegseth-warned/article-155490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)53.png" alt=""></a><br /><p>सिंगापुर। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित 23वां शांग्री-ला डायलॉग में स्पष्ट किया कि अमीर देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी रक्षा सब्सिडी मुहैया कराने का युग अब समाप्त हो गया है। हेगसेथ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों को संबोधित करते हुए एक संशोधित राष्ट्रीय रक्षा रणनीति की रूपरेखा पेश की। यह रणनीति शीत युद्ध के बाद के अमेरिका की सुरक्षा गारंटी मॉडल से एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है।</p>
<p>हेगसेथ ने कहा, "अमीर देशों की रक्षा के लिए अमेरिका द्वारा सब्सिडी देने का युग अब समाप्त हो गया है। हमें साझेदारों की जरूरत है, न कि संरक्षित राज्यों की। हम साझा जिम्मेदारी पर बने गठबंधन चाहते हैं, न कि निर्भरता पर।" पीट हेगसेथ ने कहा, "हम अपने गठबंधनों और साझेदारों के लिए एक नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। एक ऐसा रास्ता जो शक्ति और हितों की वास्तविकताओं पर आधारित है। यह एक ऐसा रास्ता है जो अमेरिका को और मजबूत, हमारे सहयोगियों और साझेदारों को और अधिक सक्षम और प्रशांत क्षेत्र को और अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाएगा।"</p>
<p>उनके संबोधन का सबसे तीखा संदेश उन सहयोगियों के लिए था जो लंबे समय से वाशिंगटन की सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहे हैं, लेकिन उसके निवेश के बराबर योगदान नहीं दिया है। हेगसेथ ने घोषणा की, कि अमीर देशों को अमेरिकी सुरक्षा का मॉडल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। उन्होंने दक्षिण कोरिया को बतौर मॉडल पेश किया कि असली 'बोझ साझा करने' जैसा दिखता है। उन्होंने राष्ट्रपति ली के रक्षा खर्च को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने और अपनी पारंपरिक रक्षा की अधिक जिम्मेदारी लेने के फैसले की सराहना की। यह एक ऐसा पैमाना था जिसे वे हॉल में मौजूद अन्य लोगों के लिए भी तय करते दिखे।</p>
<p>बीजिंग में पिछले महीने हुए ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन के बाद से चीन को लेकर वाशिंगटन का लहजा अधिक संयमित रहा है लेकिन सचिव ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्रीय प्रभुत्व के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा, "किसी भी एक महाशक्ति के प्रभुत्व वाला प्रशांत क्षेत्र क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बिगाड़ देगा और उस संतुलन को कमजोर कर देगा जिसे हम सभी बनाए रखना चाहते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 17:19:52 +0530</pubDate>
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