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                <title>Constraint - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Constraint RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मटन व्यापारियों का उत्पीड़न : महबूबा ने की सीएम भगवंत मान से बात, कार्रवाई का आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पंजाब के मुख्यमंत्री से माधोपुर और शंभू बॉर्डर पर कश्मीरी मटन व्यापारियों के उत्पीड़न को लेकर बात की। व्यापारियों का आरोप है कि अवैध रूप से ₹15,000–₹25,000 प्रति ट्रक वसूले जा रहे हैं। पंजाब सीएम ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिससे शादी के सीजन में संभावित मटन किल्लत टल सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/accused-of-stopping-kashmiri-mutton-traders-mehbooba-spoke-to-bhagwant/article-157838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/mahboba-mufti.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को कहा कि कश्मीरी मटन व्यापारियों को रोके जाने और उन्हें परेशान किये जाने संबंधी रिपोर्टों को लेकर उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से बात की है। यह बातचीत उन रिपोर्टों के बाद की गई है जिनमें कहा गया है कि माधोपुर और शंभू बॉर्डर पर ठेकेदार पशु मेला अधिनियम के नाम पर कश्मीरी मटन व्यापारियों को रोक रहे हैं और उन्हें परेशान कर रहे हैं।</p>
<p>महबूबा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में जानवरों का परिवहन करने वाले पशु व्यापारियों को हो रही दिक्कतों के बारे में मुख्यमंत्री मान से बातचीत की और सीएम मान ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर में मटन की कमी की बढ़ती आशंकाओं के बीच सामने आया है जब मटन डीलर्स एसोसिएशन की समन्वय समिति ने दूसरे राज्यों से पशुओं के आयात को अनिश्चित काल के लिए रोकने की घोषणा की।</p>
<p>एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि पंजाब में ठेकेदार एवं स्थानीय अधिकारी जम्मू-कश्मीर जाने वाले हर उस ट्रक पर 15,000 से 25,000 रुपये तक का गैर-कानूनी शुल्क लगा रहे हैं जिनमें पशुओं का परिवहन किया जाता है। इसके कारण दिल्ली, राजस्थान, अंबाला, अमृतसर और अन्य जगहों की मंडियों से पशुओं वाले ट्रकों की लोडिंग रोक दी गई है। समिति के सदस्यों ने कहा कि पंजाब से होकर पशुओं को ले जाना जोखिम भरा हो गया है जिससे व्यापारियों को तब तक सप्लाई रोकनी पड़ी है जब तक कि इस समस्या का स्थायी समाधान न हो जाए।</p>
<p>जम्मू-कश्मीर में हर साल 60,000 टन से ज़्यादा मटन की खपत होती है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब से रोज़ाना लगभग 50 ट्रकों में 5,000 से ज़्यादा जानवर इस केंद्र शासित प्रदेश में लाए जाते हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि इस रुकावट से शादी-ब्याह के मौसम में आपूर्ति पर असर पड़ सकता है क्योंकि इस दौरान मांग में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 16:05:56 +0530</pubDate>
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                <title>रुपया में मजबूती, 20 पैसे की बढ़त के साथ 94.20 प्रति डॉलर पर खुला</title>
                                    <description><![CDATA[यूएस-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारतीय रुपया लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ है। शुक्रवार को रुपया 20 पैसे चढ़कर 94.20 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि, डॉलर इंडेक्स में 0.5% की तेजी ने रुपये की बढ़त को थोड़ा सीमित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-strengthened-by-20-paise-and-opened-at-9420-per/article-157421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dollar-vs-rupee2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। कच्चे तेल में जारी गिरावट के कारण रुपया शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया आज 20 पैसे चढ़कर 94.20 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। इससे पहले पिछले कारोबारी दिवस पर भी भारतीय मुद्रा 10 पैसे की बढ़त में 94.50 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। रुपये की शुरुआत आज 20 पैसे की मजबूती के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद से ही कच्चा तेल दबाव में है।</p>
<p>आज लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा ढाई फीसदी टूटकर 77.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे भारतीय मुद्रा को मजबूती मिली है। दुनिया की अन्य छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक में 0.5 प्रतिशत की बड़ी तेजी से रुपये की बढ़त सीमित रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:55:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों का बड़ा फैसला : चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी, 5 जुलाई को होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूएई के बाहर होने के बावजूद ओपेक के 7 प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सदस्य देश जुलाई 2026 से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएंगे। बाजार स्थिरता के लिए दिसंबर 2026 तक का नया शेड्यूल तय किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-opec-countries-amid-hormuz-crisis-approval-to/article-156308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/opecc.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव और कई सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद ओपेक के सात प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक समूह के अनुसार सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की तथा उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि अप्रैल 2023 में घोषित अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के तहत 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि जुलाई 2026 से लागू की जाएगी। समूह ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इन स्वैच्छिक कटौतियों को आंशिक या पूर्ण रूप से वापस लिया जा सकता है। सदस्य देश वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार उत्पादन बढ़ाने, रोकने या वापस घटाने का निर्णय ले सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया कि नवंबर 2023 में लागू उत्पादन समायोजन सहित सभी व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। सदस्य देशों ने कहा कि यह कदम उन देशों को भी मदद करेगा जिन्होंने पहले निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन किया था और अब उसकी भरपाई करनी है। समूह ने 'डिक्लेरेशन ऑफ कोऑपरेशन' (सहयोग घोषणा) के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उत्पादन अनुपालन की निगरानी संयुक्त मंत्रिस्तरीय निगरानी समिति (जेएमएमसी) द्वारा जारी रहेगी।</p>
<p>सदस्य देशों ने यह भी पुष्टि की कि जनवरी 2024 से हुई अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई पूरी तरह की जाएगी और इसके लिए निर्धारित अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। ओपेक समूह ने बाजार की स्थिति, उत्पादन अनुपालन और भरपाई व्यवस्था की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। अगली बैठक 5 जुलाई 2026 को होगी। इस बीच, लगभग छह दशक तक सदस्य रहने के बाद संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने संगठन के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:04:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का: अमेरिकी हमलों पर तेहरान का बड़ा आरोप, युद्धविराम उल्लंघन बताकर संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना (सेंटकॉम) द्वारा ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने IAEA पर भूमिका के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए तकनीकी रिपोर्टों को दबाव का साधन न बनाने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-america-tension-flares-up-again-tehrans-big-allegation-on-american/article-156259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर अपनी भूमिका का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उसे तेहरान पर दबाव बनाने से बचने की सलाह दी। ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी बलों ने ईरान के गोरुक शहर और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया, जिससे मौजूदा युद्धविराम के बावजूद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि आईएईए परमाणु विवाद के समाधान में कूटनीतिक भूमिका निभाना चाहता है तो उसे अपनी तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए। यह टिप्पणी उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आई, जिसमें ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार उसकी सेनाओं ने होरमुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार एकतरफा हमलावर ड्रोन मार गिराए और इसके बाद गोरुक तथा क़ेश्म द्वीप के तटीय निगरानी रडार स्थलों पर हमले किए।</p>
<p>सेंटकॉम ने दावा किया कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे और रडार ठिकानों पर हमले आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए किये गये। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "यदि एजेंसी कूटनीतिक समाधान का हिस्सा बनना चाहती है, तो उसे तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का साधन बनाने से बचना होगा।" उन्होंने आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की निंदा नहीं की। उनके अनुसार एजेंसी एक ओर हमलों के प्रभावों पर रिपोर्ट जारी करे और दूसरी ओर हमलावरों पर चुप्पी साधे रखे, यह स्वीकार्य नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "एजेंसी हमलों के परिणामों की रिपोर्ट दे, ईरान से तकनीकी और राजनीतिक कीमत चुकाने की अपेक्षा करे और हमलावर के बारे में मौन रहे, यह उचित नहीं है।" ईरान ने तड़के हुए अमेरिकी ड्रोन हमलों को अप्रैल में हुए युद्धविराम का "स्पष्ट उल्लंघन" करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। साथ ही उसने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार को दोहराया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिरिक क्षेत्र और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार एवं तटीय निगरानी सुविधाओं पर हमला युद्धविराम का खुला उल्लंघन और देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य आक्रमण है। मंत्रालय ने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया वे देश की सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करते हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया, "यह कार्रवाई इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी शासन के शत्रुतापूर्ण और उकसावेपूर्ण व्यवहार की निरंतरता है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के प्रति अमेरिकी प्रशासन की पूर्ण अवहेलना को उजागर करती है।" ईरान ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उसकी सशस्त्र सेनाओं ने अमेरिकी कार्रवाई का "अनुपातिक और प्रभावी" जवाब दिया और हमलावरों को अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होने दिया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन यह साबित करता है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने या स्थिरता बहाल करने का इच्छुक नहीं है। बयान में कहा गया, "संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन एक बार फिर साबित करता है कि वह न तो तनाव कम करना चाहता है और न ही स्थिरता की दिशा में लौटना चाहता है, बल्कि अपनी उकसावेपूर्ण कार्रवाइयों से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।"</p>
<p>ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग करेगा। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय देशों से भी अपील की कि वे अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का पालन करें और अपनी भूमि या सुविधाओं का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई की योजना बनाने या उसे अंजाम देने के लिए न होने दें। बयान में कहा गया, "विदेश मंत्रालय क्षेत्रीय देशों से आग्रह करता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के उस मूल सिद्धांत का सम्मान करें जिसके तहत किसी भी देश को अपनी भूमि और सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए नहीं करने देना चाहिये।"</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अपील की कि वे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघनों पर तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया दें तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को सामान्य बनने से रोकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 15:25:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹29 महंगा: दिल्ली में अब ₹942 हुई कीमत, पश्चिम एशिया संकट का असर</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली में अब इसकी कीमत ₹942 हो गई है। पश्चिम एशिया संकट के बाद यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। हालांकि, 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/domestic-lpg-cylinder-costlier-by-%E2%82%B9-29-now-priced-at/article-156246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/lpg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर रविवार से 29 रुपये महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज से 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये का हो गया है। हालांकि वाणिज्यिक इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से घरेलू रसोई गैस के दाम दूसरी बार बढ़ाये गये हैं। इससे पहले 07 मार्च को इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गयी थी।</p>
<p>इस दौरान, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी-भरकम वृद्धि हो चुकी है। गत 01 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 42 रुपये बढ़ाकर 3,113.50 रुपये कर दी गयी थी। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से दिल्ली वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम 1,373 रुपये बढ़ चुके हैं। इस साल फरवरी में इसकी कीमत 1,740.50 रुपये थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 10:35:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्यूबा पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल सहित कई अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए कड़े प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल, चार अधिकारियों और पांच संस्थाओं को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-big-action-on-cuba-strict-sanctions-imposed-on-many/article-156070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us-cuba-1.webp" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल और कई अन्य लोगों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। अमेरिकी वित्त विभाग की वेबसाइट पर गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार विभाग ने डियाज़-कैनेल, चार अन्य लोगों और पांच संस्थाओं को विशेष रूप से नामित नागरिकों और प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। डियाज़-कैनेल ने 2018 में राउल कास्त्रो की जगह क्यूबा के राष्ट्रपति का पद संभाला था।</p>
<p>मई में अमेरिकी सरकार ने क्यूबा के 11 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे और 1996 में क्यूबा से निर्वासित लोगों से जुड़ी एक घटना को लेकर राउल कास्त्रो पर आरोप लगाए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- जनता पर डबल मार कर रही डबल इंजन सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परियोजनाओं में देरी को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन राज में देश के 1981 और राजस्थान के 53 प्रोजेक्ट्स लेट चल रहे हैं। बाड़मेर रिफाइनरी की लागत 84% बढ़कर 79,459 करोड़ पहुंच चुकी है, जिससे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ashok-gehlots-attack-on-bjp-government-said-double-engine/article-155609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ashok-ggehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: कई प्रोजेक्ट्स में देरी से लागत बढ़ने से आर्थिक भार पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकारों पर हमला बोला है। गहलोत ने कहा है कि डबल इंजन के राज में डबल इंतज़ारशास्त्र  चल रहा है। इंतज़ारशास्त्र के माध्यम से हमने राज्य सरकार को जगाने का प्रयास किया कि किस प्रकार योजनाओं और प्रोजेक्ट्स में देरी न सिर्फ सरकार बल्कि आमजन की जेब और उसको मिलने वाले लाभ पर भारी पड़ता है। मीडिया में आई  खबर दिखाती है कि इंतज़ारशास्त्र सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे देश में चल रहा है। </p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे 1981 प्रोजेक्ट्स में से अधिकतर इंतज़ारशास्त्र का शिकार हैं जिसके कारण उनकी लागत 5.65 लाख करोड़ रुपए बढ़ चुकी है। प्रदेश में 81 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें से 53 प्रोजेक्ट्स लेट हैं और 10 का बजट बढ़ चुका है। राजस्थान रिफाइनरी जो 2022 में पूरी होनी थी, वह अब 2026 तक खींच दी गई है और उसकी लागत 84.23 प्रतिशत बढ़कर 79,459 करोड़ रुपए पहुंच चुकी है। यदि ये प्रोजेक्ट्स समय पर प्रारम्भ किए जाते या समय पर पूर्ण किए जाते तो 5.65 लाख करोड़ रुपए देश और प्रदेश की जनता की भलाई के काम आते। पीएम जिस डबल इंजन की बात करते हैं वो डबल इंजन जनता पर डबल मार लाता है महंगाई की, डबल भ्रष्टाचार और विकास कार्यों के डबल इंजतार की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:10:19 +0530</pubDate>
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