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                <title>Forgery - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Forgery RSS Feed</description>
                
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                <title>टीएमसी में विभाजन की अटकलें तेज: ऋतव्रत बनर्जी के समर्थन में आये 59 विधायक, नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर गहरा संकट पैदा हो गया है। निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधानसभा में करीब 60 विधायकों की अहम बैठक हुई। असंतुष्ट गुट ने दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिससे विपक्ष के नेता चयन और हस्ताक्षर जालसाजी विवाद के बीच पार्टी में विभाजन की अटकलें तेज हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speculation-of-split-in-tmc-intensifies-59-mlas-come-in/article-155851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/tmcc.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में बुधवार को राज्य विधानसभा स्थित नौशाद अली भवन में करीब 60 विधायकों की बैठक हुई, जिसके बाद पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलें और तेज हो गयीं। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी हालांकि नहीं हुई है, लेकिन अभिषेक बनर्जी सुबह विधानसभा पहुंचे और उनके पास 59 विधायकों के समर्थन वाला एक पत्र होने की चर्चा रही। इस बीच एक अन्य निष्कासित तृणमूल विधायक ने कहा, “बैठक के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा। हमारे साथ दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है।”</p>
<p>उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल उसके पास 78 विधायक हैं, क्योंकि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया है। बैठक में अरूप राय, शिउली साहा, अखुज्जमान और सबीना यास्मीन सहित कई विधायक शामिल हुए। सबीना यास्मीन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता के चयन के लिए विधायकों की यह बैठक बुलाई गयी है। उनसे जब पूछा गया कि बैठक किसने बुलाई, तो उन्होंने कहा, “हम सभी ने।”</p>
<p>यह घटनाक्रम विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कथित जाली हस्ताक्षरों के विवाद के बीच सामने आया है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर तनाव बढ़ गया है। विवाद उस समय और गहरा गया, जब विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने विपक्ष के नेता पद के लिए किसी भी उम्मीदवार को मान्यता देने से परहेज किया। विधानसभा पहुंचने के बाद ऋतव्रत बनर्जी ने पूरे घटनाक्रम को ‘अटकल’ बताते हुए महत्व कम करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इस बीच, भाजपा विधायक तपस राय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ऋतव्रत बनर्जी को बड़ी संख्या में तृणमूल विधायकों का समर्थन प्राप्त है।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने हालांकि बाद में इस पोस्ट से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा में अपने काम के लिये आये हैं और इस मामले से जुड़ी तमाम खबरें महज अटकलें हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या लगभग 50 विधायक उनके साथ हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं केवल अपने और संदीपन के बारे में ही जिम्मेदारी ले सकता हूं।” विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब तृणमूल कांग्रेस ने ऋतव्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दोनों विधायकों का आरोप है कि छह मई को हुई पार्टी बैठक में विपक्ष के नेता के चुनाव संबंधी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उनका दावा है कि उपस्थिति रजिस्टर पर लिये गये हस्ताक्षरों को बाद में प्रस्ताव के दस्तावेज में बदल दिया गया।</p>
<p>मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को नावन्ना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत देकर विधानसभा अभिलेखों में हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप लगाया है। करीब 60 विधायकों के ऋतव्रत बनर्जी के साथ खुलकर खड़े होने के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े विभाजन की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं। पार्टी नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:39:15 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा हस्ताक्षर विवाद: गिरफ्तारी से बचने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी, शुक्रवार को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हस्ताक्षर विसंगति मामले में सीआईडी की दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े इस पत्र में 14 विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/assembly-signature-dispute-abhishek-banerjee-reaches-calcutta-high-court-to/article-155858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/high-court.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से संबंधित पत्र में कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। अभिषेक बनर्जी ने आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए एजेंसी की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से कानूनी संरक्षण देने की मांग की है, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है।</p>
<p>मामले की सुनवाई शुक्रवार को न्यायमूर्ति अपूर्ब सिन्हा राय की पीठ के समक्ष होने की संभावना है। न्यायालय ने उन्हें याचिका दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी है। विवाद उस पत्र को लेकर है, जिसे तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की ओर से विधानसभा में प्रमुख पदों के लिए पार्टी नेताओं के नाम प्रस्तावित करते हुए प्रस्तुत किया गया था। पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की अनुशंसा की गयी थी।</p>
<p>आरोप है कि इस दस्तावेज में कई हस्ताक्षर या तो गायब थे, अथवा उनमें अनियमितताएं थीं। सूत्रों के अनुसार, पत्र में 70 विधायकों के नाम दर्ज थे, लेकिन इनमें से कम से कम 14 नाम केवल बड़े अक्षरों में लिखे गये थे और उनके साथ हस्ताक्षर नहीं थे। कुछ अन्य हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाये गये हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी। अभिषेक बनर्जी चूंकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, इसलिए पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद थे।</p>
<p>सीआईडी अधिकारियों ने शनिवार को उनके आवास पर जाकर जांच में सहयोग करने के लिए नोटिस दिया था और उन्हें सोमवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होने को कहा गया था। बनर्जी हालांकि निर्धारित तिथि पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने कथित तौर पर अतिरिक्त समय की मांग की थी। बुधवार को उन्होंने सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए तथा गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इससे पहले भी उन्होंने संकेत दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ वह कानूनी उपाय अपनाएंगे।</p>
<p>विवाद उस समय और गहरा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कथित हस्ताक्षर विसंगतियों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद विधानसभा ने मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आरोप सार्वजनिक होने के कुछ ही समय बाद तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस बुधवार को विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न गतिरोध पर चर्चा करने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:25:30 +0530</pubDate>
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