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                <title>Forgery - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Forgery RSS Feed</description>
                
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                <title>फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी सीआईडी के सामने पेश: भवानी भवन में कड़ी सुरक्षा, ईडी समन और अन्य जांचों के बीच बढ़ीं टीएमसी नेता की मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंच गए हैं। कोर्ट के निर्देशानुसार जांच में सहयोग कर रहे बनर्जी से पूछताछ के लिए रविवार को भी अधिकारी तैनात रहे। उनके आवास पर हुई हालिया पुलिस छापेमारी के बाद इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abhishek-banerjee-presented-before-cid-in-fake-signature-case-tight/article-156964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी रविवार को राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के सामने पेश होने के लिए विभाग के मुख्यालय पहुंच गये हैं। इसके मद्देनजर कोलकाता के भवानी भवन स्थित मुख्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था का कड़ी व्यवस्था की गयी है। इससे पहले डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी से सीआईडी ने गुरुवार रात को लगभग साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की थी। उस पूछताछ के बाद उन्हें दोबारा समन जारी कर रविवार सुबह पेश होने के लिए कहा गया था। अभिषेक बनर्जी ने पहले ही कहा था कि वह जांच में सहयोग करेंगे और निर्देशानुसार एजेंसी के सामने पेश होंगे।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें इन दिनों कई मामलों को लेकर बढ़ी हुई हैं। शुक्रवार को सीआईडी अधिकारियों ने उनके आवास पर जाकर साल्ट लेक में दर्ज एक शिकायत के मामले में एक और नोटिस चिपकाया है। यह मामला उनके एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्हें 16 जून को पेश होने के लिए कहा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी प्राथमिक स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में उन्हें 15 जून को तलब किया है। इन दोनों ही मामलों में उनके पास कोई कानूनी राहत या सुरक्षा नहीं है।</p>
<p>कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की सुनवाई करते हुए बनर्जी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत ने सीआईडी को उनके खिलाफ दो सप्ताह तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। अदालत से मिली इसी अंतरिम राहत के बीच बनर्जी रविवार को सीआईडी के सामने पेश हो रहे हैं। आज छुट्टी का दिन होने के बावजूद सुबह से ही सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी भवानी भवन पहुंचने लगे थे। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।</p>
<p>यह बढ़ी हुई सुरक्षा शनिवार तड़के अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई पुलिस की एक नाटकीय कार्रवाई के बाद देखने को मिली है। साल्बोनी थाने की पुलिस उनके करीबी सहयोगी सुमित रॉय की तलाश में वहां पहुंची थी, क्योंकि रॉय के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन इसी आवास की मिली थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने तड़के लगभग तीन बजे दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सुबह करीब पांच बजे ताला तोड़ने के लिए आपदा प्रबंधन कर्मियों को बुलाया गया, जिसके बाद पुलिस ने अंदर घुसकर तलाशी ली। इस कार्रवाई की खबर मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गयी थीं। पुलिस सुबह करीब आठ बजे वहां से लौट गई, हालांकि उन्हें वहां न तो रॉय मिले और न ही कोई संदिग्ध सामग्री।</p>
<p>हस्ताक्षर जालसाजी का यह पूरा विवाद तृणमूल कांग्रेस विधायक दल द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक पत्र से जुड़ा है। यह पत्र शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के संबंध में था। बाद में आरोप लगे कि पत्र पर किए गए कई हस्ताक्षर मेल नहीं खा रहे थे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि उन्होंने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं, जबकि कुछ नाम बड़े अक्षरों में लिखे हुए थे। पार्टी के महासचिव होने के नाते इस विवादित पत्र पर अभिषेक बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे। सीआईडी ने इससे पहले भी उन्हें कई समन जारी किए थे, लेकिन शुरुआत में वह पेश नहीं हुए और राहत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय चले गए थे। अदालत के आदेश के बाद ही वह नयी दिल्ली से लौटे और गुरुवार को भवानी भवन में जांचकर्ताओं के सामने पेश हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:42:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में गिरफ्तारी पर 21 दिनों की लगाई रोक, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों तक दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी है। कोर्ट ने सीआईडी जांच में पूर्ण सहयोग की शर्त पर यह राहत दी, जिसके बाद वे भवानी भवन मुख्यालय में पेश होने के लिए सहमत हुए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abhishek-banerjee-gets-conditional-relief-from-calcutta-high-court/article-156706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी राहत देते हुए कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में अगले 21 दिनों तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश अवकाशकालीन पीठ ने साथ में यह साफ कर दिया है कि यह राहत पूरी तरह से इस शर्त पर निर्भर करेगी कि वे राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में पूरी तरह सहयोग करें।</p>
<p>यह आदेश तब आया जब बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल गुरुवार शाम 6 बजे ही कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में जांचकर्ताओं के सामने पेश होंगे और भविष्य में भी जब भी जरूरत होगी, वे सुबह 10 बजे से रात 10 बजे के बीच एजेंसी के समन का जवाब देंगे। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आज शाम की पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वहां से जाने के लिए स्वतंत्र होंगे और अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें सीआईडी को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नामित करने वाले एक प्रस्ताव पत्र से जुड़ा है, जिसे 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था। इस पत्र पर बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे, लेकिन टीएमसी के ही दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि इस दस्तावेज़ पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि इस प्रस्ताव की तारीखों में भारी विसंगतियां हैं, क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार विधायकों ने 6 मई को हस्ताक्षर किए थे, जबकि बाद में कहा गया कि यह बैठक 19 मई को हुई थी। कई विधायकों ने जांचकर्ताओं को लिखित में दिया है कि 6 मई को ऐसी कोई बैठक ही नहीं हुई थी और न ही उन्होंने किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी द्वारा पहले भेजे गए तीन समन की अनदेखी की थी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद बार-बार मिल रहे नोटिस और गिरफ्तारी की आशंका के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:22:51 +0530</pubDate>
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                <title>टीएमसी में विभाजन की अटकलें तेज: ऋतव्रत बनर्जी के समर्थन में आये 59 विधायक, नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर गहरा संकट पैदा हो गया है। निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधानसभा में करीब 60 विधायकों की अहम बैठक हुई। असंतुष्ट गुट ने दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिससे विपक्ष के नेता चयन और हस्ताक्षर जालसाजी विवाद के बीच पार्टी में विभाजन की अटकलें तेज हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speculation-of-split-in-tmc-intensifies-59-mlas-come-in/article-155851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/tmcc.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में बुधवार को राज्य विधानसभा स्थित नौशाद अली भवन में करीब 60 विधायकों की बैठक हुई, जिसके बाद पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलें और तेज हो गयीं। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी हालांकि नहीं हुई है, लेकिन अभिषेक बनर्जी सुबह विधानसभा पहुंचे और उनके पास 59 विधायकों के समर्थन वाला एक पत्र होने की चर्चा रही। इस बीच एक अन्य निष्कासित तृणमूल विधायक ने कहा, “बैठक के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा। हमारे साथ दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है।”</p>
<p>उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल उसके पास 78 विधायक हैं, क्योंकि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया है। बैठक में अरूप राय, शिउली साहा, अखुज्जमान और सबीना यास्मीन सहित कई विधायक शामिल हुए। सबीना यास्मीन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता के चयन के लिए विधायकों की यह बैठक बुलाई गयी है। उनसे जब पूछा गया कि बैठक किसने बुलाई, तो उन्होंने कहा, “हम सभी ने।”</p>
<p>यह घटनाक्रम विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कथित जाली हस्ताक्षरों के विवाद के बीच सामने आया है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर तनाव बढ़ गया है। विवाद उस समय और गहरा गया, जब विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने विपक्ष के नेता पद के लिए किसी भी उम्मीदवार को मान्यता देने से परहेज किया। विधानसभा पहुंचने के बाद ऋतव्रत बनर्जी ने पूरे घटनाक्रम को ‘अटकल’ बताते हुए महत्व कम करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इस बीच, भाजपा विधायक तपस राय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ऋतव्रत बनर्जी को बड़ी संख्या में तृणमूल विधायकों का समर्थन प्राप्त है।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने हालांकि बाद में इस पोस्ट से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा में अपने काम के लिये आये हैं और इस मामले से जुड़ी तमाम खबरें महज अटकलें हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या लगभग 50 विधायक उनके साथ हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं केवल अपने और संदीपन के बारे में ही जिम्मेदारी ले सकता हूं।” विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब तृणमूल कांग्रेस ने ऋतव्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दोनों विधायकों का आरोप है कि छह मई को हुई पार्टी बैठक में विपक्ष के नेता के चुनाव संबंधी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उनका दावा है कि उपस्थिति रजिस्टर पर लिये गये हस्ताक्षरों को बाद में प्रस्ताव के दस्तावेज में बदल दिया गया।</p>
<p>मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को नावन्ना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत देकर विधानसभा अभिलेखों में हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप लगाया है। करीब 60 विधायकों के ऋतव्रत बनर्जी के साथ खुलकर खड़े होने के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े विभाजन की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं। पार्टी नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:39:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विधानसभा हस्ताक्षर विवाद: गिरफ्तारी से बचने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी, शुक्रवार को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हस्ताक्षर विसंगति मामले में सीआईडी की दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े इस पत्र में 14 विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/assembly-signature-dispute-abhishek-banerjee-reaches-calcutta-high-court-to/article-155858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/high-court.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से संबंधित पत्र में कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। अभिषेक बनर्जी ने आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए एजेंसी की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से कानूनी संरक्षण देने की मांग की है, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है।</p>
<p>मामले की सुनवाई शुक्रवार को न्यायमूर्ति अपूर्ब सिन्हा राय की पीठ के समक्ष होने की संभावना है। न्यायालय ने उन्हें याचिका दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी है। विवाद उस पत्र को लेकर है, जिसे तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की ओर से विधानसभा में प्रमुख पदों के लिए पार्टी नेताओं के नाम प्रस्तावित करते हुए प्रस्तुत किया गया था। पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की अनुशंसा की गयी थी।</p>
<p>आरोप है कि इस दस्तावेज में कई हस्ताक्षर या तो गायब थे, अथवा उनमें अनियमितताएं थीं। सूत्रों के अनुसार, पत्र में 70 विधायकों के नाम दर्ज थे, लेकिन इनमें से कम से कम 14 नाम केवल बड़े अक्षरों में लिखे गये थे और उनके साथ हस्ताक्षर नहीं थे। कुछ अन्य हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाये गये हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी। अभिषेक बनर्जी चूंकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, इसलिए पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद थे।</p>
<p>सीआईडी अधिकारियों ने शनिवार को उनके आवास पर जाकर जांच में सहयोग करने के लिए नोटिस दिया था और उन्हें सोमवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होने को कहा गया था। बनर्जी हालांकि निर्धारित तिथि पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने कथित तौर पर अतिरिक्त समय की मांग की थी। बुधवार को उन्होंने सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए तथा गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इससे पहले भी उन्होंने संकेत दिया था कि एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ वह कानूनी उपाय अपनाएंगे।</p>
<p>विवाद उस समय और गहरा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कथित हस्ताक्षर विसंगतियों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद विधानसभा ने मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आरोप सार्वजनिक होने के कुछ ही समय बाद तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस बुधवार को विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न गतिरोध पर चर्चा करने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:25:30 +0530</pubDate>
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