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                <title>Intermediary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Intermediary RSS Feed</description>
                
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                <title>बड़ी खबर: ज़ेलेंस्की बातचीत के लिए कभी भी आ सकते हैं रुस ?</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यदि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की शांति वार्ता चाहते हैं, तो वे कभी भी मॉस्को आ सकते हैं। जेलेंस्की ने राष्ट्रपति पुतिन को पत्र लिखकर पूर्ण युद्धविराम के साथ आमने-सामने की बैठक का प्रस्ताव दिया था, जिस पर रूस ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-news-zelensky-can-come-to-russia-for-talks-any/article-156095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ukreen-jalensky.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रुस ने कहा है कि अगर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की बातचीत करना चाहते हैं, तो वे कभी भी यहां आ सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस आशय की घाेषणा की है। ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को एक पत्र जारी करके शांति प्रक्रिया पर चर्चा के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने की बैठक का प्रस्ताव रखा, जिसमें यूरोप और अमेरिका भी शामिल हों। ज़ेलेंस्की ने पत्र में लिखा, "यूक्रेन हमारे और आपके बीच सीधी बातचीत के ज़रिए इस युद्ध को खत्म करने का प्रस्ताव देता है। मैं एक बैठक का प्रस्ताव रख रहा हूं।"</p>
<p>ज़ेलेंस्की ने बैठक के लिए एक स्पष्ट तारीख तय करने की भी मांग की और कहा कि बातचीत के दौरान पूरी तरह से युद्धविराम के लिए यूक्रेन तैयार है। उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड, तुर्की और कुछ अरब देशों ने ऐसी बातचीत की मेज़बानी करने की इच्छा जताई है। पेस्कोव ने कहा कि क्रेमलिन ने पत्र की समीक्षा कर ली है और अपनी कामकाजी बैठक के बाद पुतिन को इसकी जानकारी देगा। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि अगर ज़ेलेंस्की बातचीत करना चाहते हैं, तो वे मॉस्को आकर ऐसा कर सकते हैं।" प्रवक्ता ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका की कोशिशों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रूस ने कभी भी अमेरिका की भूमिका को आदर्श नहीं माना है और उसके लिए राष्ट्रीय हित ही सबसे ऊपर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 16:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत में अड़चन: ईरान ने की जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग, हिचकिचा रहा ट्रंप प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में जब्त फंड की तत्काल रिहाई सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। ईरान $12 अरब की नकद राशि तुरंत जारी करने पर अड़ा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ठोस कदम उठाए बिना कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdle-in-us-iran-talks-iran-demands-immediate-release-of-seized/article-155993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी संभावित समझौते के तहत कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले उसकी अरबों डॉलर की जब्त की गई धनराशि को तुरंत जारी किया जाए। इस मांग को मानने में ट्रंप प्रशासन हिचकिचा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन ईरान को कोई बड़ी रियायत दिए बिना बड़े पैमाने पर धन जारी करने को मंज़ूरी देने में आनाकानी कर रहा है। खासकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार, परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर वह कड़ा रूख अपना रहा है।</p>
<p>जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी वार्ताकार चाहते हैं कि जैसे ही दोनों पक्ष शुरुआती सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करें, उन्हें जब्त हुए धन से "नकद धनराशि" तुरंत मिल जाए और इसमें किसी तरह की कोई देरी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों का रुख साफ है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस आश्वासन देगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चिंता सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है। अगर धनराशि को जल्दी जारी कर दिया गया, तो इससे ईरान को एक आर्थिक सहारा मिल जाएगा, जबकि अमेरिका के हाथ से उसका सबसे ताकतवर मोलभाव का हथियार,आर्थिक दबाव, जिसे बनाने में उसने कई वर्ष लगाए हैं, वह उसके हाथ से निकल जाएगा।</p>
<p>वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि जब तक ईरान पहले कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाता है खासकर अपनी परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर,तब तक कोई बड़ी रकम जारी नहीं की जाएगी। श्री ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ-साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेंगे जो ओबामा के 2015 के समझौते जैसा हो, जिसके तहत ईरान के लिए 1.7 अरब डॉलर का फंड जारी किया गया था।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब करीब 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, और ट्रंप की ऐसी कोई मंशा नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों ने ऐसे इंतज़ामों पर विचार किया है, जिनके तहत कोई तीसरा देश जैसे कि कतर ईरान को फंड जारी करेगा, ताकि अमेरिका किसी भी सीधे भुगतान से दूर रहे। मध्यस्थों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें कई अरब डॉलर का एक "मानवीय फंड" बनाना भी शामिल है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ भोजन, दवा और कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। लेकिन अब तक, दोनों में से कोई भी पक्ष इतना झुकने को तैयार नहीं हुआ है कि यह गतिरोध टूट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
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