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                <title>Accord - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिका-जीसीसी गठजोड़ पर ईरान का पलटवार, विदेशी दखल को बताया खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के संयुक्त बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ही असुरक्षा और विभाजन का मुख्य कारण है। उसने अपनी संप्रभुता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-hits-back-at-us-gcc-alliance-calls-it-a-threat/article-158172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/trump1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने शुक्रवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और अमेरिका के जारी संयुक्त बयान की कड़ी निंदा करते हुए 'हस्तक्षेपकारी, गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाला' बताते हुए यह कहकर खारिज कर दिया है कि यह क्षेत्र में टकराव बढ़ाने वाली नीति है। यह बयान 25 जून को बहरीन में आयोजित जीसीसी-अमेरिका मंत्री स्तरीय बैठक के बाद आया है, जहां अमेरिकी विदेश मंत्री और जीसीसी के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी की थी। ईरान ने कहा कि इस दस्तावेज में शत्रुतापूर्ण रुख अपनाया गया है और क्षेत्रीय मामलों में दखलंदाजी को दोहराया गया है। उसने जीसीसी सदस्य देशों की सुरक्षा के प्रति अमेरिका की 'स्थायी प्रतिबद्धता' के दावे को 'महज बयानबाजी' और सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बताया। ईरान का तर्क है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति असुरक्षा और विभाजन का कारण बन गयी है।</p>
<p>ईरान ने कहा कि हाल ही में उस पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान क्षेत्रीय देशों में सैन्य ठिकानों और सुविधाओं का इस्तेमाल इस बात का सबूत है कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा को कोई अहमियत नहीं देता। क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ईरान ने कहा, "जीसीसी की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का अमेरिकी दावा सच्चाई को तोड़ना-मरोड़ना है।" उसने कहा, "इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति महज बोझ है, जो क्षेत्र के लोगों पर थोपा गया है और यह असुरक्षा तथा विभाजन का स्रोत रहा है।"</p>
<p>अपने बयान में मंत्रालय ने खाड़ी अरब देशों से ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को बढ़ावा देने से बचने का आग्रह किया। ईरान ने उनसे अपील की है कि वे 'अपने क्षेत्रों और सुविधाओं का उपयोग गैर-कानूनी कृत्यों की योजना बनाने, समर्थन करने या उन्हें अंजाम देने' के लिए न होने दें। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों के तहत इन देशों का यह दायित्व है कि वे किसी तीसरे पक्ष को ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए अपनी धरती का उपयोग करने से रोकें। उसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए क्षेत्रीय सरकारों पर 'परमाणु हथियारों से मुक्त' पश्चिम एशिया का समर्थन करने के लिए भी दबाव डाला।.</p>
<p>ईरान ने इसके साथ ही जीसीसी के सदस्य देशों से पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र स्थापित करने के लिए ईरान से सहयोग करने का आग्रह किया। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं की आलोचना करने के लिए जीसीसी-अमेरिका संयुक्त विज्ञप्ति पर तीखा हमला करते हुए ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और सैन्य प्रतिरोधक क्षमता की रक्षा करने में 'बिल्कुल भी ढिलाई' नहीं बरतेगा। उसने फिलिस्तीनी-लेबनानी सशस्त्र समूहों को 'ईरानी प्रॉक्सी' बताने के मामले में अमेरिका-इजरायल के सुर में सुर मिलाने वाले खाड़ी देशों के रुख पर भी सवाल उठाया। ईरान ने इसके विपरीत यह तर्क दिया कि इजरायल खुद इस क्षेत्र में प्राथमिक प्रॉक्सी के रूप में काम करता है।समुद्री सुरक्षा पर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख का बचाव किया। उसने कहा कि इस जलमार्ग में कोई भी व्यवधान हालिया अमेरिकी और इजरायली कार्रवाइयों का नतीजा था। उसने दावा किया कि यह जलडमरूमध्य ईरान-ओमान के क्षेत्रीय समुद्र तट के भीतर आता है और इसका प्रबंधन ओमान के साथ हाल ही में हुए एक समझौता पत्र (एमओयू) के तहत संचालित होता है।</p>
<p>ईरान ने जीसीसी देशों से अपने क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उसने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी स्थिरता विदेशी सैन्य उपस्थिति के बिना केवल क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है।ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सिंगापुर के नौवहन अधिकारियों ने रिपोर्ट दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर 'बिना उकसावे के और अनुचित' हमला किया गया, हालांकि चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और जहाज ने अपनी यात्रा जारी रखी है। ईरानी बयान में अपने इस पुराने रुख को भी दोहराया गया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बाहरी सैन्य उपस्थिति के बिना क्षेत्रीय देशों द्वारा ही संभाला जाना चाहिए, क्योंकि विदेशी संलिप्तता ने बार-बार स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 18:25:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान की कूटनीतिक पहल: आईएईए निरीक्षकों को मंज़ूरी देने से किया इनकार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान का किया खंड़न</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान आईएईए निरीक्षकों की वापसी पर सहमत हो गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड वार्ता में मिसाइल क्षमता पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, अमेरिका ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-diplomatic-initiative-to-deny-approval-to-iaea-inspectors-contradicts/article-157884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान का खंडन किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों (आईएईए) को देश में आने पर सहमति दे दी है। वेंस ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए हुई बातचीत के पहले दौर के बाद ईरान ने इस आशय की सहमति दी है। स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में हुई बातचीत दोनों पक्षों के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल थी।</p>
<p>बातचीत के बाद वेंस ने कहा कि निरीक्षकों की वापसी को लेकर आईएईए के साथ बातचीत आज ही शुरू हो सकती है। उन्होंने इस बैठक को भविष्य की प्रगति के लिए बहुत अच्छा नींव करार दिया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि, इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर कोई चर्चा नहीं हुई है और उसने परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने के लिए आईएईए के निरीक्षकों को अनुमति देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान ने परमाणु निरीक्षणों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों के साथ कोई भी सहयोग, ईरान की संसद और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा बनाए गए मौजूदा कानूनी एवं संस्थागत संरचनाओं के अंतर्गत सख्ती से जारी रहेगा। निरीक्षण को लेकर यह मतभेद अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान से जुड़ी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों के बीच सामने आया है।</p>
<p>मध्यस्थता करने वाले देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि बातचीत के शुरुआती दौर के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ही 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक योजना पर सहमत हो गए हैं। कूटनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ अमेरिका ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए ढील दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी है जिससे ईरान दशकों में पहली बार अमेरिकी डॉलर में तेल बेच सकेगा।</p>
<p>इस छूट से लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए छूट मिली है जिससे 21 अगस्त तक ईरान के लिए कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल का निर्यात, बिक्री एवं परिवहन करना संभव हो गया है। इससे ईरानी तेल को सीधे अमेरिका में आयात करने की भी इजाज़त मिली है और उन अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, इंश्योरेंस एवं नौवहन चैनलों तक पहुंच फिर से बहाल हुई है जिन पर पहले बहुत ज़्यादा पाबंदियां थीं।</p>
<p>अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ईरान से प्राप्त वादों के बदले प्रतिबंधों में ढील दी गई। इन वादों में रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनाए रखना और आईएईए निरीक्षकों की वापसी की इजाज़त देना शामिल है। उन्होंने अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलना और परमाणु पारदर्शिता को समझौते की मुख्य शर्तें कहा। उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत परमाणु मुद्दे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं तक भी हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावित व्यवस्था और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए समन्वय तंत्र जैसे विषय शामिल थे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान मुख्य हथियारों के निरीक्षण की इजाज़त देने पर सहमत हो जाएगा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस बात को सख्ती से खारिज कर दिया और दोहराया कि निरीक्षण के लिए किसी नई व्यवस्था पर सहमति नहीं बनी है। गौरतलब है कि ईरान और दुनिया की बड़ी शक्तियां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते हुआ था। 2015 के इस समझौते के तहत आईएईए को ईरान के परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने की इजाज़त थी लेकिन 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने इसे खराब समझौता बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया।</p>
<p>फरवरी 2026 में इज़रायल और अमेरिका के साथ हुए 12 दिनों के टकराव के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य हमले हुए। इसके बाद ईरान ने आईएईए निरीक्षकों की पहुंच पर रोक लगा दी और बाद में एजेंसी ने देश से अपने बाकी कर्मचारियों को वापस बुला लिया।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का बड़ा कदम: जहाजों के अनुरोधों पर होगी त्वरित कार्रवाई, 60 दिन तक नहीं वसूला जाएगा शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-अमेरिका ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद, ईरानी सुरक्षा परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए 60 दिनों तक मुफ्त आवाजाही की घोषणा की है। सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को घोषित मार्ग और समय का पालन करना होगा। यह कदम क्षेत्र में व्यापार और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-by-iran-immediate-action-will-be-taken-on/article-157442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/होर्मुज-जलडमरूमध्य.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएसई) ने घोषणा की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों के अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित एक समझौते के उद्देश्यों को पूरा करने के तहत उठाया गया है। एसएनएसई ने यह घोषणा ईरानी मीडिया की ओर से जारी एक बयान में की है। यह बयान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के कुछ घंटे बाद आया है।</p>
<p>परिषद ने कहा कि इस समझौते के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने का अनुरोध करने वाले जहाजों से 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इसका पूरा खर्च ईरान सरकार उठाएगी। बयान में कहा गया है कि इस जलमार्ग से गुजरने के इच्छुक जहाजों को अपने अनुरोध ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ (पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी) को भेजने होंगे। परिषद ने कहा, “विशेष परिस्थितियों और मार्ग में कुछ सुरक्षा खतरों को देखते हुए तथा सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और समुद्री दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जहाजों का घोषित मार्ग और घोषित समय पर ही गुजरना आवश्यक है।” इसके साथ ही परिषद ने भरोसा दिलाया कि इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ेगी।</p>
<p>संस्था ने कहा कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने के प्रशासनिक प्रबंधों और तकनीकी विवरणों की घोषणा ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ के माध्यम से की जाएगी। ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से इस समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। पेज़ेशकियन और ट्रंप ने गुरुवार तड़के इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:05:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : अमेरिका-ईरान समझौते के करीब, कुछ दिनों में हस्ताक्षर होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ एक शानदार युद्धविराम समझौता तय हो गया है। व्हाइट हाउस में उन्होंने बताया कि दस्तावेज़ अंतिम रूप में हैं और इस सप्ताहांत यूरोप में उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी में हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-claims-us-iran-agreement-expected-to-be-signed-in-a/article-156739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ‘ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार समझौता तय किया है’ और अगले कुछ दिनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ट्रंप ने गुरुवार को ह्वाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सप्ताहांत पर यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जायेगा। इसमें अमेरिका के उप राष्ट्रपति जे डी वेंस शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज ‘अंतिम रूप’ में हैं और यह समझौता प्रक्रिया ‘बेहद जल्द' पूरी हो जायेगी।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समझौते के लिए सहमत हो गये हैं? ट्रंप ने कहा, “मेरी समझ से इसका जवाब हां है।” इस संभावित समझौते को ‘थोड़ा वैचारिक’ करार देते हुए ट्रंप ने कहा कि यह ‘एक बेहद मजबूत सहमति पत्र’ है और ‘ऐसा कुछ है, जो पूरा होने जा रहा है।’</p>
<p>ईरान ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह युद्ध विराम के लिए अमेरिकी शर्तों पर सहमत हो गया है। गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यह युद्ध शुरू किया था। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमला करने का संकल्प लिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका ने इस कार्रवाई को रद्द कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:40:47 +0530</pubDate>
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                <title>नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान समझौता स्वीकारने के अलावा कोई विकल्प नहीं : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा इजरायल के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि फैसले लेने का अधिकार सिर्फ उनका है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर ईरान की नाकेबंदी या सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/netanyahu-has-no-option-but-to-accept-us-iran-agreement-donald/article-156334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा 'कोई विकल्प' नहीं होगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल इन वार्ताओं के परिणाम तय नहीं करता है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, "फैसले मैं लेता हूं। सारे फैसले मैं ही करता हूं। वह फैसले नहीं लेते।"</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि इजरायल पर ईरान के किये गये हाल के मिसाइल हमलों का ईरान से बातचीत जारी रखने की उनकी इच्छा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, "इस घटना का समझौते पर कोई प्रभाव नहीं होने वाला है।" इसके साथ ही, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि यह बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका या तो ईरान की नाकेबंदी जारी रख सकता है या सैन्य बल का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक नाकेबंदी उस देश पर किये गये 'किसी भी हमले से कहीं अधिक शक्तिशाली' रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:44:54 +0530</pubDate>
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