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                <title>Dissidence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक दल नहीं, गिरोह थी: दिलीप घोष का बड़ा हमला, बोले- जो हो रहा है वह तय था</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा नेता दिलीप घोष ने सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे राजनीतिक संगठन के बजाय 'गिरोह' करार दिया। उन्होंने कहा कि अवसरवादी लोग फायदे के लिए टीएमसी में आए थे और अब संकट देखकर पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ता से बाहर होते ही यह पूरा ढांचा ढह जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%A5%E0%A5%80--%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AA-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A4%B9-%E0%A4%A4%E0%A4%AF-%E0%A4%A5%E0%A4%BE/article-156675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dilip-ghosh.png" alt=""></a><br /><p>सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल के पंचायत मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को एक राजनीतिक संगठन के बजाय ‘गिरोह’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यह पार्टी जिस दौर और संकट से गुजर रही है, वह ‘तय’ था। घोष ने यहां संवाददाताओं से कहा, “ जिस तरह संगठित आपराधिक गिरोह होते हैं, ठीक उसी तरह तृणमूल कांग्रेस का भी एक गिरोह था। आज पार्टी के साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह होना ही था। अवसरवादी लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए इसमें शामिल हुए थे और अब वे इसे छोड़कर जा रहे हैं। हमने बहुत पहले ही कहा था कि अगर तृणमूल कभी सत्ता से बाहर हुई, तो इसके इर्द-गिर्द बना पूरा ढांचा ढहने लगेगा। आज बिल्कुल वैसा ही हो रहा है।”</p>
<p>दिल्ली में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों और तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के भविष्य को लेकर पूछे गये सवाल पर श्री घोष ने बेहद नपा-तुला जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “ पहले चीजों को सामने आने दीजिए। जब तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी, तब टिप्पणी करने के लिए काफी समय होगा।” घोष इस समय तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद के कामकाज और वहां के बुनियादी ढांचे की समीक्षा करने के लिए सिलीगुड़ी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य महाकुमा परिषद की जरूरतों का आकलन करना है। उन्होंने कहा, “ सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद में अभी भी बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। मैं यहां इसकी आवश्यकताओं को विस्तार से समझने आया हूं।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:27:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टीएमसी का संकट गहराया : कल्याण बनर्जी ने ममता को दिया अल्टीमेटम, अभिषेक के कारण पार्टी छोड़ने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट केस से हटाए जाने से नाराज कल्याण ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के रहते वे पार्टी में नहीं रहेंगे। उन्होंने अभिषेक पर अहंकार और पार्टी बर्बाद करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-crisis-deepens-kalyan-banerjee-gives-ultimatum-to-mamata-threatens/article-156700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चौतरफा संकटों से घिरी तृणमूल कांग्रेस अब एक और परेशानी में घिर गयी जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। कल्याण बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब 'दीदी' को उनके और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "दीदी को मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पार्टी छोड़ने का संकेत दे रहे हैं, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया, "अगर अभिषेक बनर्जी उसी पद और उसी ताकत के साथ पार्टी में बने रहते हैं, तो मैं तृणमूल कांग्रेस में नहीं रहूंगा।"</p>
<p>इस बड़े राजनीतिक टकराव की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' विवाद से जुड़े एक मामले में कानूनी पैरवी को लेकर पैदा हुआ विवाद है। कल्याण बनर्जी ने बताया कि वे बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर एक याचिका पर कानूनी सुरक्षा की मांग करने के लिए पेश हुए थे। अदालत ने उस दिन मामला नहीं लिया और गुरुवार को सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कल्याण बनर्जी का आरोप है कि बुधवार की देर रात करीब 12:30 बजे उनके बेटे के पास एक फोन आया, जिसमें सूचित किया गया कि अब इस मामले में उनकी जगह वकील अयान भट्टाचार्य अदालत में जिरह करेंगे।</p>
<p>अपने पेशे का हवाला देते हुए बनर्जी ने कहा, "मैं ऐसा अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूँ और मैं इस तरह के रवैये को कतई स्वीकार नहीं करूँगा। जिनकी बात की जा रही है, वे मेरे बच्चों की उम्र के हैं। अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं था, तो उन्होंने पहले मुझसे इस मामले को संभालने के लिए क्यों कहा? मैं लंबे समय से जानता हूँ कि अभिषेक मुझ पर भरोसा नहीं करते, लेकिन वे इस तरह मुझ जैसे वरिष्ठ वकील का अपमान नहीं कर सकते। क्या मैं कोई कूड़ेदान हूँ?"</p>
<p>अनुभवी सांसद बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के भीतर और कार्यकर्ताओं के बीच अभिषेक की लोकप्रियता लगातार खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, "अभिषेक को अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि जनता और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उनकी वजह से मुझे भी 'चोर' ब्रांड किया जा रहा है। मैं कामाक स्ट्रीट का कोई अदना कार्यकर्ता नहीं हूँ जो इस अहंकार को सहन करूँगा।"</p>
<p>कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी को पार्टी के 'नंबर-2' (अभिषेक) के इस व्यवहार और आचरण के बारे में सचेत किया था, लेकिन उस पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। ममता बनर्जी के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, " अभिषेक दीदी के खून के रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन हम लोगों ने भी पिछले 40-45 वर्षों से पार्टी के वफादार सिपाहियों की तरह उनके भाइयों के रूप में काम किया है। मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। इस बेहद कठिन समय में भी मैं ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा, और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? अगर यही स्थिति रही, तो मेरे लिए पार्टी में बने रहना असंभव होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- नेतन्याहू से हुईं गलतियां, हित हमेशा नहीं मिलते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू से कुछ चीजें गलत हुई हैं। लेबनान सैन्य कार्रवाई और ईरान तनाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतन्याहू अपने देश के हितों की पैरवी करते हैं, लेकिन जहां टकराव होगा, वहां अमेरिका अपने नागरिकों का हित चुनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-vice-president-jd-vances-big-statement-said-netanyahu/article-156671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोगी रहे अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कुछ हफ्तों से रिश्तों में तल्खी साफ देखने को मिल रही है। इस बीच, अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ‘निश्चित रूप से कुछ चीजें गलत हुई हैं।’ वेंस ने हालांकि इसका कोई खास उदाहरण नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि नेतन्याहू ‘अपने देश के हितों की आक्रामक रूप से पैरवी करते हैं’, लेकिन उनके हित हमेशा अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं होते। उनका यह बयान दोनों सहयोगियों के बीच हाल के दिनों में उपजे तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने जैसा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली नेता के बीच लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई थी। इजरायल की इस कार्रवाई के कारण क्षेत्र में नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं, जिससे ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है। बीती रात अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हवाई हमलों हुए जिससे अप्रैल महीने से दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम संकट में आ गया है। यह तनाव तब दोबारा भड़का जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने का ‘सौदा करने में बहुत लंबा समय ले लिया।’ ताजा संघर्ष की मुख्य वजह लेबनान के घटनाक्रम हैं, जहां इजरायल ईरान-समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान लगातार जारी रखे हुए है।</p>
<p>इस साक्षात्कार का प्रसारण आगामी रविवार होगा। इसमें वेंस ने कहा कि नेतन्याहू एक ऐसे देश का शासन चला रहे हैं जो निश्चित रूप से अमेरिका का बहुत करीबी भागीदार रहा है। लेकिन, बेहद करीबी सहयोगी होने के बावजूद, कभी-कभी हमारे हित पूरी तरह एक जैसे होते हैं और कभी-कभी उनमें टकराव होता है। मैंने प्रधानमंत्री के रुख में यही देखा है कि वह अपने देश के हितों को बहुत आक्रामक तरीके से सामने रखते हैं, कभी इसका मतलब यह होता है कि हम दोनों एक ही राह पर हैं, और कभी इसका मतलब होता है कि हम अलग हैं।”अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आगे स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य काम इस बात पर ध्यान केंद्रित करना है कि अमेरिका के सर्वोत्तम हित में क्या है। उन्होंने कहा, "जहां हमारे हितों में टकराव होगा, वहां इजरायलियों के लिए दुर्भाग्य से ही सही हमें अमेरिकी जनता का पक्ष चुनना होगा।” जब वेंस से उन उदाहरणों के बारे में पूछा गया, जहां नेतन्याहू से गलतियां हुईं, तो उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि ‘ऐसी बातचीत को निजी रखना ही बेहतर होता है।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:29:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुस्मिता देव के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे से तृणमूल संकट गहराया, सामूहिक दलबदल की अटकलों से बढ़ा गतिरोध</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट गहरा गया है। सुखेंदु शेखर रॉय के बाद सांसद सुस्मिता देव ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-crisis-deepens-due-to-susmita-devs-resignation-from-rajya/article-156583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/susmita.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संकट बुधवार को उस समय और गहरा गया, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव ने उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया। वह दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय के बाद एक हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद बन गयी हैं। इस घटनाक्रम ने हाल ही में मिले चुनावी झटके के बाद सुश्री बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह की अटकलों को तेज कर दिया है, जिससे संसद में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गयी है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार देव ने उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से मुलाकात की और सदन की सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। उनका यह इस्तीफा सुखेंदु शेखर रॉय की पार्टी और राज्य सभा दोनों से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने तृणमूल के भीतर 'बेलगाम भ्रष्टाचार' और 'अराजक शासन' का हवाला दिया था। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम कर रहीं देव के इस्तीफे को तृणमूल नेतृत्व के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो पहले से ही आंतरिक असंतोषों से जूझ रहा है।</p>
<p>महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रहीं देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उन्होंने सिलचर से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार राजदीप रॉय से हार गयी थीं। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें राज्य सभा के लिए नामित किया गया और वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरीं। उनके इस्तीफे से जुड़े राजनीतिक संशय को बढ़ाते हुए बुधवार को कुछ तस्वीरें सामने आयीं, जिनमें देव नयी दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात करती दिख रही हैं। इसने उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।</p>
<p>इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर न तो देव और न ही भाजपा की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी की गयी है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आये हैं, जब तृणमूल के संसदीय दल के भीतर बड़ा विद्रोह पनपने की सूचनाएं आ रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के करीब 20 सांसद संसद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने पर विचार कर रहे हैं। अभी तक ऐसा कोई औपचारिक पत्र सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इन रिपोर्टों ने दिल्ली-कोलकाता दोनों जगह राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।</p>
<p>इस सामूहिक दलबदल की संभावना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की एकजुटता पर नये सवाल खड़े कर दिये हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक के बाद एक दो वरिष्ठ सांसदों का इस्तीफा और सांसदों के एक धड़े में असंतोष की सूचनाएं, पार्टी के भीतर गहरे संगठनात्मक संकट की ओर इशारा करती हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से तृणमूल को पहले ही बड़ा झटका लग चुका है। अपने इस्तीफे में और उसके बाद दिये सार्वजनिक बयानों में इस दिग्गज सांसद ने पार्टी नेतृत्व की तीखी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि संगठन के भीतर भ्रष्टाचार और मनमाना कामकाज पूरी तरह हावी हो चुका है। हालिया चुनावी झटकों के बाद उनके जाने को व्यापक स्तर पर होने वाले विद्रोह के पहले प्रत्यक्ष संकेत के रूप में देखा गया था।</p>
<p>तृणमूल ने अब तक इन इस्तीफों के महत्व को कम कर आंकने की कोशिश की है और उसका दावा है कि बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी पूरी तरह एकजुट है। लगातार हुए इन इस्तीफों ने हालांकि भाजपा को एक नया हथियार दे दिया है, जो पश्चिम बंगाल में अपना प्रभाव बढ़ाने और अपनी पार्टियों से असंतुष्ट विपक्षी नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटी है। इस बदलते घटनाक्रम ने संसद में विपक्षी खेमे के भविष्य के स्वरूप पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। यदि तृणमूल सांसदों के एक धड़े के दलबदल की ये सूचनाएं अगर हकीकत में बदलती हैं, तो इससे विपक्ष के संख्या बल पर बड़ा असर पड़ सकता है और संसद के दोनों सदनों में राजग की स्थिति और मजबूत हो सकती है।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर खुद को भाजपा के मुख्य चुनौती देने वालों में से एक के रूप में पेश करने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए ये इस्तीफे हाल के वर्षों में सबसे गंभीर आंतरिक चुनौतियों में से एक हैं। आगे और दलबदल होने की अटकलों के बीच, अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि क्या तृणमूल नेतृत्व इस संकट को थामने में सफल रहता है या फिर यह मौजूदा गतिरोध आने वाले हफ्तों में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का सबब बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:32:45 +0530</pubDate>
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