<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/isro/tag-7988" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>isro - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/7988/rss</link>
                <description>isro RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ क्रायोजेनिक इंजन सीई—20 का सफल परीक्षण किया, भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता वाले सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण कर अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास रचा है। नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम से लैस यह इंजन एलवीएम3 रॉकेट की पेलोड ले जाने की क्षमता को बढ़ाएगा। 165 सेकंड के इस परीक्षण ने भविष्य के भारी उपग्रह मिशनों के लिए भारत की शक्ति को और सुदृढ़ कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने क्रायोजेनिक इंजन सीई20 का 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सफल परीक्षण किया है। इसरो ने एक बयान में बताया कि क्रायोजेनिक इंजन सीई20 में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टमÓ(एनपीएस) और एक मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग करके 10 मार्च को समुद्र तल के स्तर पर सफल परीक्षण किया गया।</p>
<p>इससे पहले, एनपीएस का उपयोग करते हुए समुद्र-स्तर पर 19-टन थ्रस्ट क्षमता वाले परीक्षण किए जा रहे थे। सीई20 क्रायोजेनिक इंजन एलवीएम3 प्रक्षेपण वाहन के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है। इसरो एलवीएम3 की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ाने के लिए भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>इसरो ने बताया कि 165 सेकेंड के पूरे परीक्षण के दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा दोनों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप रहा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:03:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/isro.png"                         length="658699"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन की उल्टी गिनती शुरू, सोमवार सुबह 10:17 बजे पर होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीहरिकोटा में पीएसएलवी-सी62 से ईओएस-एन1 सहित 15 उपग्रहों के प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू। यह इसरो का नए साल का पहला लॉन्च होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/countdown-for-pslv-c62eos-n1-mission-will-start-at-1017-am-on/article-139216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/isro-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। आंध्रप्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र में पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह' अभियान और 15 अन्य उपग्रहों के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती रविवार सुबह शुरू हो गयी है। यह मिशन सोमवार सुबह 10:17 पर यह श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा।नये साल में इसरो का यह पहला लॉन्च होगा। ईओएस-एन1, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है, एक भारतीय हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे डीआरडीओ ने रणनीतिक रक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ कृषि, शहरी मानचित्रण और पर्यावरण मूल्यांकन में नागरिक निगरानी के लिए बनाया है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड (एलएबी) की मंजूरी मिलने और मिशन तैयारी समीक्षा (एमआरआर) से प्रक्षेपण की अनुमति मिलने के बाद, रविवार दोपहर 12:17 बजे 22 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गयी। इस अवधि के दौरान चार चरणों वाले इस रॉकेट में प्रणोदक (ईंधन) भरा जायेगा। </p>
<p>इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर  कहा, मिलिए पीएसएलवी-सी62 से - यह क्कस्रुङ्क की 64वीं उड़ान और पीएसएलवी-डीएल संस्करण का 5वां मिशन है। रॉकेट की मुख्य विशेषताएं: ऊंचाई 44.4 मीटर, उड़ान द्रव्यमान 260 टन, 4 चरण। इसरो ने कहा कि वाहन और उपग्रहों के एकीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है और प्रक्षेपण-पूर्व जांच और अंतिम जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी रही हैं। पीएसएलवी-सी62 मिशन सोमवार  सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। </p>
<p>पीएसएलवी 44.4 मीटर ऊंचा और 260 टन उड़ान द्रव्यमान वाला चार चरणों वाला रॉकेट है, जो ठोस और तरल प्रणोदकों (ईंधन) से संचालित होता है। यह इसरो का बहुमुखी, सबसे भरोसेमंद और सबसे अधिक काम आने वाला प्रक्षेपण यान है। ईओएस-एन1 और 14 अन्य उपग्रहों को 505 किमी की ऊंचाई पर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जायेगा, जबकि केआईडी कैप्सूल को पुन: प्रवेश पथ पर भेजा जायेगा।</p>
<p>ईओएस-एन1 और 14 उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित करने के बाद पीएस4 चरण (चौथे चरण) को गति कम करने के लिए फिर से चालू किया जायेगा, ताकि वह पुन: प्रवेश पथ पर आ सके। इसके बाद केआईडी कैप्सूल को अलग किया जायेगा। पीएस4 चरण और केआईडी कैप्सूल दोनों ही पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करेंगे और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेंगे।</p>
<p>पीएसएलवी-सी62 मिशन इसरो की चलाई जाने वाली सबसे लंबी उड़ानों में से एक है। रॉकेट की उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद इसके चौथे चरण का इंजन बंद कर दिया जायेगा और करीब एक मिनट तक जड़त्वीय गति से आगे बढ़ेगा और उड़ान भरने के करीब 17 मिनट बाद भारतीय उपग्रह 'अन्वेषा/ईओएस-एन1' और 14 अन्य उपग्रहों को अलग कर दिया जायेगा।</p>
<p>इस मिशन में छोड़े जाने वाले दिलचस्प उपग्रहों में से एक 'आयुलसैट' होगा, जिसे भारतीय कंपनी 'ऑर्बिटएड' ने विकसित किया है, जो अंतरिक्ष यानों के लिए एक प्रकार का 'अंतरिक्ष ईंधन टैंकर' है। पृथ्वी की कक्षा में ईंधन भरने की इस सुविधा से चक्कर लगा रहे उपग्रहों का जीवनकाल बढ़ जाएगा, जिससे कुल लागत और अंतरिक्ष कचरे दोनों में कमी आयेगी। इसरो ने कहा कि यह न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) संचालित 9वां समर्पित वाणिज्यिक मिशन है, जिसके तहत उपयोगकर्ता के लिए ईओएस-एन1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण और प्रक्षेपण किया जा रहा है। इसके साथ ही, इसके माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के 14 अन्य उपग्रहों को भी प्रक्षेपण सेवायें दी जा रही हैं।</p>
<p>पीएसएलवी-सी62 मिशन के दौरान एक स्पेनिश स्टार्टअप केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर का भी प्रदर्शन किया जायेगा, जो उस स्टार्टअप के विकसित किये जा रहे पुन: प्रवेश यान के एक छोटे पैमाने का प्रोटोटाइप है। केआईडी अलग होने वाला अंतिम  उपग्रह होगा, जिसके बाद इसे पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करने और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरने के लिए निर्धारित किया गया है। इस प्रक्षेपण में पीएसएलवी-डीएल संस्करण का उपयोग किया जायेगा, जिसमें ठोस ईंधन वाले दो 'स्ट्रैप-ऑन' मोटर लगे होंगे। यह पीएसएलवी-डीएल संस्करण का पांचवां मिशन होगा। यह मिशन पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। पीएसएलवी प्रक्षेपण यान ने अब तक 63 उड़ानें पूरी की हैं। इनमें चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान), आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे उल्लेखनीय अभियान शामिल हैं।</p>
<p>वर्ष 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के कई महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारी के बीच हाल के वर्षों में मिले कुछ झटकों के बाद इन आगामी प्रक्षेपणों का महत्व और भी बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/countdown-for-pslv-c62eos-n1-mission-will-start-at-1017-am-on/article-139216</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/countdown-for-pslv-c62eos-n1-mission-will-start-at-1017-am-on/article-139216</guid>
                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 18:25:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-11/isro-%281%29.jpg"                         length="172022"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो भेजेगा पीएसएलवी-सी62 मिशन : पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल की होगी 64वीं उड़ान, यह मिशन उपग्रहों को कक्षा में करेगा स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[यह मिशन प्राथमिक पेलोड के रूप में ईओएस-एन1 को ले जाएगा, जो रणनीतिक उद्देश्यों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेजिंग सेटेलाइट है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-will-send-pslv-c62-mission-this-will-be-the-64th/article-138706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 12 जनवरी को पूर्वाह्न 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के शार रेंज से पीएसएलवी-सी62 मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। इसरो ने एक्स पर एक पोस्ट में घोषणा की। पीएसएलवी-सी62 मिशन का प्रक्षेपण 12 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:17 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के शार रेंज से निर्धारित है। पीएसएलवी सी-62 भारत के भरोसेमंद पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 64वीं उड़ान होगी।</p>
<p>यह मिशन प्राथमिक पेलोड के रूप में ईओएस-एन1 को ले जाएगा, जो रणनीतिक उद्देश्यों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेजिंग सेटेलाइट है। ईओएस-एन1 के अलावा यह अभियान 25 किलोग्राम के फुटबॉल के आकार के एक केस्ट्रेल इनिशियल डिमॉन्स्ट्रेटर (केआईडी) को भी ले जाएगा, जिसे स्पेन स्थित स्टार्टअप ऑर्बिटल डिमॉन्स्ट्रेटर द्वारा विकसित किया गया है।</p>
<p>यह मिशन साथ ही लगभग 18 उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित करेगा, जिनका कुल वजन 200 किलोग्राम है। ये पेलोड भारत, मॉरीशस, लक्जमबर्ग, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के हैं। अधिकारियों ने कहा कि पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के समर्थन से भेजे जाने वाला यह अभियान मुख्यत: अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन है, साथ ही इसमें भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों उपयोगकर्ताओं के कई पेलोड भी शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-will-send-pslv-c62-mission-this-will-be-the-64th/article-138706</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-will-send-pslv-c62-mission-this-will-be-the-64th/article-138706</guid>
                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 13:04:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-08/isro.png"                         length="29708"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एस. सोमनाथ ने कहा, इसरो का अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण वाहन 'सूर्या' को मिलेगी नई पहचान, जानें कैसे?</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो का नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल 'सूर्या' (NGLV) पुन: उपयोग योग्य तकनीक से लैस होगा। ₹8,240 करोड़ की लागत से बनने वाला यह रॉकेट 30 टन भार ले जाने में सक्षम होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/s-somnath-said-isros-next-generation-launch-vehicle-surya-will/article-138466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/isro-surya.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अगले पीढ़ी के प्रक्षेपण वाहन (एनजीएलवी), जिसे अनौपचारिक रूप से 'सूर्या' नाम दिया गया है, को पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य और मॉड्यूलर डिजाइन वाला रॉकेट बनाया जा रहा है जो मौजूदा रॉकेट्स की तुलना में काफी अधिक पेलोड क्षमता वाला होगा। यह जानकारी पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने दी। एनजीएलवी को ठोस ईंधन मोटर्स की जगह पूर्ण रूप से तरल प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित बनाया जा रहा है। एस. सोमनाथ के अनुसार, नए इंजनों को बड़ा आकार, नई तकनीक और थ्रॉटलिंग क्षमता वाला बनाना पड़ रहा है, इसलिए मौजूदा वेंडरों का उपयोग नहीं किया जा सका।</p>
<p>यह तीन-चरण वाला रॉकेट अपनी पहली दो स्टेजों में क्लस्टर्ड एलओएक्स-मीथेन इंजनों का उपयोग करेगा, जबकि तीसरी स्टेज क्रायोजेनिक होगी। पूर्ण समन्वय में इसका लिफ्ट-ऑफ वजन करीब 1,000 टन होगा और यह निचली पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में 30 टन तक पेलोड ले जा सकेगा। एनजीएलवी का विकास 8,240 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हो रहा है, जिसमें तीन विकासात्मक उड़ानें, बुनियादी ढांचा और लॉन्च अभियान शामिल हैं। </p>
<p>रॉकेट के बड़े आकार के कारण प्रमुख कंपोनेंट्स का निर्माण श्रीहरिकोटा लॉन्च साइट के पास ही किया जाएगा, क्योंकि इन्हें सड़क से लाना संभव नहीं होगा। इसरो ने उद्योग भागीदारी मॉडल अपनाया है, जिसमें साझेदार लंबे अनुबंध के तहत उत्पादन सुविधाएं स्थापित करेंगे। उन्होंने बताया कि सही साझेदार चुनना महत्वपूर्ण है, जो निवेश और जोखिम लेने में सक्षम हों। इस दिशा में कई संभावित साझेदारों से चर्चा चल रही है।</p>
<p>वर्तमान में इसरो की प्रक्षेपण क्षमता सीमित है, क्योंकि एलवीएम3 का उत्पादन सालाना सिर्फ 2-3 रॉकेट्स तक है। तरल इंजनों से उत्पादन तेज होगा। एनजीएलवी उपग्रह नक्षत्रों, संचार उपग्रहों, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य के चंद्र मानव मिशनों के लिये लाभकारी साबित होगा। एस. सोमनाथ ने चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने के लिए मॉड्यूलर दृष्टिकोण को सबसे लागत-प्रभावी बताया, जिसमें पहले मानवरहित फिर मानवयुक्त मिशन शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/s-somnath-said-isros-next-generation-launch-vehicle-surya-will/article-138466</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/s-somnath-said-isros-next-generation-launch-vehicle-surya-will/article-138466</guid>
                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 17:34:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/isro-surya.png"                         length="969911"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ने एसएसएलवी के उन्नत तीसरे चरण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो ने SSLV के तीसरे चरण (SS3) के उन्नत संस्करण का स्थैतिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस नए डिजाइन से रॉकेट की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम बढ़ गई है, जिससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण और प्रभावी होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-conducts-static-test-of-advanced-third-stage-of/article-137907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के तीसरे चरण (एसएस3) के उन्नत संस्करण का सफलतापूर्वक 'स्थैतिक परीक्षण' किया। यह परीक्षण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में हुआ। एसएसएलवी इसरो का नया रॉकेट है। यह तीन चरणों वाला पूरी तरह ठोस ईंधन से चलने वाला उपग्रह प्रक्षेपण यान है, जो 500 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम है। इसका तीसरा (ऊपरी) चरण रॉकेट को लगभग चार किमी प्रति सेकंड की गति देता है। इसमें हल्का लेकिन मजबूत कंपोजिट मोटर केस और विशेष नोजल डिजाइन है, जिससे इसका वजन कम हो जाता है।</p>
<p>इस रॉकेट के तीसरे चरण में 'कार्बन-एपॉक्सी मोटर केस' इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसका वजन काफी कम हुआ है और यान की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम तक बढ़ गयी है। साथ ही, इग्नाइटर और नोजल सिस्टम में सुधार किया गया है, जिससे प्रणाली अधिक प्रभावी और मजबूत बनी है।</p>
<p>नोजल नियंत्रण के लिए कम बिजली खपत वाली 'इलेक्ट्रो-मैकेनिकल' प्रणाली का उपयोग किया गया है। उच्च मजबूती वाला कार्बन फाइबर से बना मोटर केस विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में तैयार किया गया, जबकि सॉलिड मोटर की ढलाई एसडीएससी में की गयी। परीक्षण के दौरान मोटर में 233 से अधिक मापक उपकरण लगाये गये थे, जिनसे दबाव, धक्का, तापमान, कंपन और नियंत्रण प्रणाली के मापदंड अंकित किये गये। 108 सेकंड के परीक्षण समय में सभी पैरामीटर अनुमान के बहुत करीब पाये गये।</p>
<p>इस सफल परीक्षण के बाद, एसएस3 मोटर का उन्नत संस्करण उड़ान में इस्तेमाल के लिए योग्य घोषित कर दिया गया है। इस वर्ष देश में सॉलिड मोटर निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई नयी सुविधाएं शुरू की गयीं। जुलाई 2025 में श्रीहरिकोटा में सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाएं शुरू की गयीं। इसके अलावा, सितंबर 2025 में केरल के अलुवा स्थित अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र में दूसरी उत्पादन लाइन शुरू की गयी, जिससे सॉलिड मोटर के लिए जरूरी अमोनियम परक्लोरेट का उत्पादन दोगुना हो गया।</p>
<p>इस साल एसडीएससी में 10 टन क्षमता वाला स्वदेशी 'वर्टिकल मिक्सर' भी शुरू किया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा 'सॉलिड प्रोपेलेंट मिक्सिंग उपकरण है। एसडीएससी की सॉलिड मोटर उत्पादन और परीक्षण सुविधाओं में एक भारतीय स्पेस स्टार्ट-अप द्वारा विकसित प्रक्षेपण यान के पहले कक्षीय प्रक्षेपण के लिए सॉलिड मोटर भी बनायी और परखी गयी। इसरो ने उस कंपनी का नाम नहीं बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-conducts-static-test-of-advanced-third-stage-of/article-137907</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-conducts-static-test-of-advanced-third-stage-of/article-137907</guid>
                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:56:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-09/isro.png"                         length="387198"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लूबर्ड-6 सफलता की कहानी में भारतीय मूल के दो लोगों का खास योगदान, इसरो का चौकाने वाला खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो (ISRO) ने बुधवार को अपने शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M6 के जरिए अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के उपग्रह ब्लूबर्ड 6 को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/lvm-6.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। इसरो ने भारतीय रॉकेट एलवीएम 3 की मदद से बुधवार को  जिस उपग्रह ब्लूबर्ड 6 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है,  उसकी निर्माता अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल में भारतीय मूल के दो लोग बड़े ओहदे पर काम कर रहे हैं। ये हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के शांति गुप्ता जो इस कंपनी में मुख्य परिचालन अधिकारी के पद पर हैं और दूसरे हैं आईआईटी मद्रास के छात्र रहे श्रीराम जयसिम्हा जो कंपनी के वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के मुख्य वैज्ञानिक के पद पर हैं। </p>
<p>गुप्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बैचलर ऑफ कॉमर्स (ऑनर्स) के छात्र रहे थे और बाद में उन्होंने  इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से चार्टर्ड अकाउंटेंट का कोर्स भी किया। वह अमेरिका में एक लाइसेंस प्राप्त 'सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट' भी हैं।</p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल के सीओओ के रूप में गुप्ता आपूर्ति श्रृंखला, योजना, लागत प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन संचालन सहित कंपनी के वैश्विक कार्यों की देखरेख करते हैं। वे कंपनी के परिचालन को विस्तार देने के लिए रणनीतियों को विकसित और कार्यान्वित करने के लिए जिम्मेदार हैं। </p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल के अनुसार गुप्ता के पास विकास रणनीतियों को लागू करने, संचालन के विस्तार, व्यावसायिक परिवर्तन, वित्त और लेखा, जोखिम प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन करने वाली टीमों के निर्माण का 25 वर्षों का वैश्विक अनुभव है। वे सितंबर 2021 में मुख्य लेखा अधिकारी के रूप में कंपनी में शामिल हुए थे। एएसटी स्पेसमोबाइल से जुडऩे से पहले गुप्ता 2014 से न्यूयॉर्क में अन्सर्ट एंड यंग के साथ बतौर पार्टनर कार्यरत थे।</p>
<p>दूसरी ओर, श्रीराम ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियङ्क्षरग में बी.टेक और और रेंसलेयर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट, यूएसए से एम.एस. की डिग्री प्राप्त की है। उनके पास वैश्विक दूरसंचार बाजारों के लिए आईपी निर्माण और उत्पाद डिजाइन का 30 वर्षों का सफल ट्रैक रिकॉर्ड है। एएसटी स्पेसमोबाइल के अनुसार, श्रीराम ने डिजिटल सिग्नल प्रोसेङ्क्षसग अनुप्रयोगों (जैसे मोबिलिटी, उपग्रह संचार, मोडेम और वीएलएसआई) के क्षेत्र में 42 शोध पत्र और सम्मेलन प्रकाशन लिखे हैं। वे 21 अमेरिकी और यूरोपीय पेटेंटों के नामित आविष्कारक हैं और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में सेंटर ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग स्टडी के फेलो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:53:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/lvm-6.png"                         length="709138"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो के एलवीएम3एम6 रॉकेट ने भरी उड़ान, अमेरिका के सबसे भारी ब्लूबर्ड-6 उपग्रह को सफलतापूर्वक एलईओ में किया स्थापित </title>
                                    <description><![CDATA[सटीक रूप से 520 किमी की वृत्ताकार निचली पृथ्वी कक्षा में स्थापित हो गया। इसरो ने घोषणा की, एलवीएम3एम6 ब्लू बर्ड ब्लॉक 2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-lvm3m6-rocket-successfully-places-americas-heaviest-bluebird-6-satellite-in/article-136984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/6622-copy64.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। अंतरिक्ष यात्रा में एक और मील का पत्थर स्थापित करते हुए भारत के भारी-भरकम रॉकेट एलवीएम3एम6 (जिसे बाहुबली उपनाम दिया गया है) ने अमेरिका स्थित एएसटी मोबाइलस्पेस के 6.2 टन वजनी ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उन्नत संचार उपग्रह को आज क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सफलतापूर्वक पृथ्वी की निम्नतम कक्षा (एलईओ) में स्थापित कर दिया। यहां शार रेंज से दूसरे प्रक्षेपणपथ से 24 घंटे की सुचारू उलटी गिनती के बाद एक विशेष वाणिज्यिक मिशन में, स्वदेशी रॉकेट ने निर्धारित समय पर सुबह 8:54 बजे शानदार उड़ान भरी। सैकड़ों दर्शकों ने प्रक्षेपण गैलरी से इस मिशन को देखा। निसार उपग्रह के बाद अमेरिका द्वारा किया गया दूसरा मिशन यह उपग्रह, 16 मिनट की उड़ान अवधि के बाद सफलतापूर्वक और सटीक रूप से 520 किमी की वृत्ताकार निचली पृथ्वी कक्षा में स्थापित हो गया। इसरो ने घोषणा की, एलवीएम3एम6 ब्लू बर्ड ब्लॉक 2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<p>बाद में एक ट्वीट में कहा कि मिशन सफल रहा। एलवीएम3-एम6 मिशन ने ब्लू बर्ड ब्लॉक 2 उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। आईएसआरओ की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्लू बर्ड ब्लॉक 2 को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 के सफल प्रक्षेपण के लिए टीम प्तआईएसआरओ को बधाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी संरक्षण में आईएसआरओ एक के बाद एक सफलताएं हासिल कर रहा है, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।</p>
<p>यह अब तक भारतीय धरती से लॉन्च किया गया सबसे भारी उपग्रह है। इसरो के अनुसार, क्रायोजेनिक अपर स्टेज सहित तीनों चरणों के प्रज्वलन और पृथक्करण के बाद, उपग्रह को भूमध्य रेखा से लगभग 53 डिग्री के झुकाव वाले 520 किमी के वृत्ताकार भू-परिस्थिति (एलईओ) में सटीक रूप से स्थापित किया गया।इसका प्रक्षेपण-भार 640 टन है, इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर है, और यह भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में 4,200 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है। इसने बताया कि यह भारतीय धरती से एलवीएम 3 द्वारा लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है।</p>
<p><strong>सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में एक गौरवशाली उपलब्धि : मोदी</strong><br />प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में  एक गौरवशाली उपलब्धि बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया में जारी एक संदेश में कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की  एक और महत्वपूर्ण प्रगति। एलवीएम3-एम6 का सफल प्रक्षेपण, जिसके माध्यम से भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह अमेरिका का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गौरवशाली उपलब्धि है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मिशन भारत की भारी वजन ले जाने वाले रॉकेटों की क्षमता को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में हमारी बढ़ती साख का प्रतीक है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारे प्रयासों का भी प्रतिबिंब है। हमारे परिश्रमी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बहुत-बहुत बधाई। भारत अंतरिक्ष की दुनिया में नई ऊंचाइयों को छूना जारी रखेगा। यह एलवीएम3-एम6 रॉकेट की छठी परिचालन उड़ान है और भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-lvm3m6-rocket-successfully-places-americas-heaviest-bluebird-6-satellite-in/article-136984</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-lvm3m6-rocket-successfully-places-americas-heaviest-bluebird-6-satellite-in/article-136984</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:32:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/6622-copy64.jpg"                         length="195706"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO के एलवीएम-3 प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू, बुधवार को होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो का एलवीएम3-एम6 रॉकेट बुधवार सुबह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होगा। यह 6.5 टन का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एलईओ में स्थापित करेगा, जो अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक पेलोड है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro-harikota.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नैस्डैक में सूचीबद्ध एएसटी स्पेसमोबाइल इंक के 6.5 टन के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को ले जाने वाले भारत के एलवीएम3-एम6 रॉकेट के बुधवार सुबह होने वाले प्रक्षेपण की उलटी गिनती मंगलवार सुबह लगभग 8.55 बजे शुरू होने की उम्मीद है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह मिशन एलवीएम3 की छठी परिचालन उड़ान है।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने बताया है कि एलवीएम3 बुधवार को सुबह 8:24 बजे श्रीहरिकोटा के दूसरे प्रक्षेपण पैड से उड़ान भरेगा। मिशन शुरू होने के लगभग 16 मिनट बाद, 43.5 मीटर ऊँचा और 640 टन वजनी यह प्रक्षेपण यान ब्लूबर्ड-6 उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित कर देगा। यह एलईओ में स्थापित किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह होगा और भारतीय धरती से एलवीएम3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया सबसे भारी पेलोड होगा। उलटी गिनती के दौरान, रॉकेट के तरल और क्रायोजेनिक चरणों में प्रणोदक भरे जाएंगे और इसके सिस्टम की अंतिम जांच की जाएगी।</p>
<p>आईएसआरओ द्वारा विकसित एलवीएम3 एक तीन-चरण वाला भारी-भरकम वाहन है, जिसमें दो एस200 सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर, एक एल 110 लिक्विड कोर स्टेज और एक सी25 क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल हैं। इसका लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 640 टन, ऊंचाई 43.5 मीटर और भूतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में 4,200 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। </p>
<p>अपने पिछले मिशनों में, एलवीएम3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और दो वनवेब मिशनों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है, जबकि सबसे हालिया एलवीएम3 मिशन, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03, 2 नवंबर, 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 11:48:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/isro-harikota.png"                         length="1224386"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा ISRO का 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sri-harikota.png" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। 15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है और इसके साथ ही शुरूआत होगी अतंरिक्ष सहयोग के नए अध्याय की। इस कमर्शियल सैटेलाइट के लॉन्च होने से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मिशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि LVM3—जिसे इसकी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है, अमेरिका की टेक्सास-आधारित कंपनी AST SpaceMobile द्वारा निर्मित किया गया है और इस उपग्रह को कक्षा में पहुंचाएगा। AST का लक्ष्य अंतरिक्ष आधारित मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दुनिया के दूरदराज इलाकों में भी सीधे मोबाइल डिवाइस तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा।</p>
<p>इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस मिशन के बारे में बताया कि यह सैटेलाइट अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल एंटीना लेकर जाएगा, जो वैश्विक संचार प्रणाली में क्रांति ला सकता है। उन्होंने कहा कि सफल प्रक्षेपण के बाद वहां भी नेटवर्क कवरेज मिलना शुरू हो जाएगा, जहां फिलहाल नेटवर्क कवरेज लगभग न के बराबर है। इसी बीच खबर समाने आ रही है कि अमेरिका द्वारा भारत पर कई उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाए जाने के बावजूद दोनों देशों का अंतरिक्ष सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। यह मिशन न केवल भारत की लॉन्चिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा, बल्कि वैश्विक सैटेलाइट बाजार में इसरो की पकड़ को भी और सशक्त करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 16:25:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/sri-harikota.png"                         length="678531"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेना के लिए इसरो की तैयारी : अनुपयोगी सैटेलाइट्स को नष्ट करने की तैयारी में जुटा इसरो और जापान, 26 हजार करोड़ की लागत से बन रहा स्पेस बेस्ड सर्विलांस-3 सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले एक सैटेलाइट बनाने में तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक साल में नौ सैटेलाइट तैयार हो रहे हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/isro-preparations-for-the-army-isro-and-japan-who-are/article-128676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इसरो ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्पेस बेस्ड सर्विलांस 3 (एसबीएस 3) पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत निजी कंपनियों के सहयोग से 31 सर्विलांस सिस्टम बनाए जाएंगे। अहमदाबाद स्थित इसरो के वैज्ञानिकों का का कहना है कि इन पर करीब 26000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। करीब 20 सैटेलाइट इसरो बनाएगा। इसमें करीब 3 से 4 साल का समय लग सकता है। इसके प्रोजेक्ट के लिए देशभर की 300 से अधिक कंपनियां और स्टार्टअप्स अब स्पेस सेक्टर में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। केन्द्र सरकार भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लेकर आई है। इसके बाद निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले एक सैटेलाइट बनाने में तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक साल में नौ सैटेलाइट तैयार हो रहे हैं।  </p>
<p>अंतरिक्ष में दशकों से घूम रहे पुराने और अनुपयोगी सैटेलाइट्स नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। क्योंकि जब भी कोई नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाता है तो इन सैटेलाइट्स से टकराव की आशंका बनी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए ऑपरेशन बर्न आउट की शुरूआत की जा रही है। जापान इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुपयोगी सैटेलाइट अंतरिक्ष में 100 से 500 सालों तक घूमते रहते हैं। जिससे नए सैटेलाइट से पहुंचने पर हादसे की संभावना बनी रहती है। </p>
<p><strong>भूकंप और भूस्खनलन की मिलेगी सटीक जानकारी </strong><br />बारिश की सटीक जानकारी मिल रही है। उसी तरह अब जल्द ही आने वाले समय में भूकंप और भूस्खलन की जानकारी समय से पहले ही मिल सकेगी। इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के संयुक्त मिशन निसार से ये संभव हो सकेगा। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 750 किमी की यात्रा पूरी करने के बाद यह उपग्रह अपनी कक्षा में स्थापित हो चुका है और जल्द की काम शुरू करेगा। दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक भूकंप, भूस्खलन और ज्वालामुखी विस्फोट की जानकारी लोगों को दो घंटे से 24 घंटे पहले तक दे सकेगी।  </p>
<p><strong>एग्जीबिशन की स्थापना </strong><br />विज्ञान के प्रति बच्चों में रूचि जगाने के लिए अहमदाबाद में विक्रम साराभाई स्पेस एग्जीबिशन सेंटर की स्थापना की गई है। यहां सैटेलाइट्स, लॉन्च व्हीकल्स और थ्रीडी शो प्रदर्शित किए जाते हैं। उनके लिए प्रवेश निशुल्क है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/isro-preparations-for-the-army-isro-and-japan-who-are/article-128676</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/isro-preparations-for-the-army-isro-and-japan-who-are/article-128676</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 11:00:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/6622-copy7.jpg"                         length="104857"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ने विकसित की सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत  की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि :  नारायणन </title>
                                    <description><![CDATA[क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित सी-32 चरण मानव सहित अंतरिक्ष अभियान और अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-developed-c-32-cryogenic-propulsion-system-important-achievement-in-indias/article-107541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/isro-narayanan.jpg" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुमरम। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली को सफलतापूर्वक विकसित किया है, जिससे उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत  की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हुई है, जबकि इसरो ने स्पेसएक्स के साथ अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोडऩे और अलग करने की प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन करते हुए अमेरिका, रूस और चीन की श्रेणी में अपना स्थान बना लिया है। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने शनिवार को क्रायोजोनिक प्रौद्योगिकी सी-32 के विकास में सफलता की घोषणा करते हुए बताया कि 20 टन के बल वाले क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित सी-32 चरण मानव सहित अंतरिक्ष अभियान और अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। </p>
<p>इसरो ने लम्बी उडान के लिए डिजाइन की गई इस प्रणाली का एक स्वदेशी नोजल सुरक्षा तंत्र का उपयोग कर इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया है और इससे लम्बी अवधि तक परीक्षण करना संभव हुआ। यह प्रणाली भविष्य में भारी-भरकम उपग्रहों को अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी यात्रा में महत्वपूर्ण है। एक समय भारत को क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी देने से इंकार कर दिया था, लेकिन आज हमने सी-32 सहित क्रायोजेनिक रॉकेट के तीन चरणों का सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण कर यह साबित कर दिया है और यह अंतरिक्ष अन्वेषण की सीमाओं को नयी ऊंचाई तक ले जाने की हमारी क्षमता को दर्शाता है।</p>
<p>इससे पहले भारत ने इसी साल अंतरिक्ष में दो उपग्रहों प्रक्षेपित कर  उन्हें अंतरिक्ष में परस्पर जोडऩे (डॉङ्क्षकग) और अलग करने (अनडॉकिंग) की जटिल प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन कर दुनिया के विरले देशा में अपना स्थान बनाया है। यह प्रौद्योगिकी भी मानव सहित अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। नारायणन ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जिसमें प्रस्तावित गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम भी शामिल है तथा यह अंतरिक्ष यात्रा करने वाले राष्ट्र के रूप में हमारी स्थिति को और भी मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों, औद्योगिक साझेदारों और शैक्षणिक सहयोगियों के समर्पित प्रयासों से भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व करने की दिशा में अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के ²ष्टिकोण के अनुरूप है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-developed-c-32-cryogenic-propulsion-system-important-achievement-in-indias/article-107541</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-developed-c-32-cryogenic-propulsion-system-important-achievement-in-indias/article-107541</guid>
                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 14:29:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/isro-narayanan.jpg"                         length="272258"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ने सफलतापूर्वक पूरा किया अपना पहला स्पैडेक्स मिशन, इस तकनीक को हासिल करने वाला चौथा देश बना भारत </title>
                                    <description><![CDATA[इसरो के अधिकारियों ने टीम को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-successfully-completes-its-first-spadex-mission-india-becomes-the/article-100963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy72.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैडेक्स) के तहत अपना पहला अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारत इस ऐतिहासिक सफलता से अमेरिका, रूस और चीन के बाद इस तकनीकी को हासिल करने वाला विश्व स्तर पर चौथा देश बन गया है। इस डॉकिंग प्रक्रिया में अंतरिक्ष यान को 15-मीटर होल्ड पॉइंट से 3-मीटर होल्ड पॉइंट तक सही तरीके से संचालित करना शामिल था। डॉकिंग प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक क्रियान्वित किया गया, जिससे अंतरिक्ष यान का सफल मिशन सुनिश्चित हुआ। इसरो ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अंतरिक्ष यान डॉकिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई, एक ऐतिहासिक क्षण। अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इतिहास रचने वाली इसरो की टीम को बधाई दी है। यह अभूतपूर्व सफलता अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में इसरो की विशेषज्ञता को रेखांकित करती है।</p>
<p>इसरो के अधिकारियों ने टीम को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इसरो ने कहा कि पूरी टीम को बधाई। भारत को बधाई। स्पैडेक्स के साथ भारत ने अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में एक नया अध्याय खोला है, जिससे भविष्य के अंतरग्रहीय मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन सहयोग का मार्ग प्रशस्त हुआ है</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-successfully-completes-its-first-spadex-mission-india-becomes-the/article-100963</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/isro-successfully-completes-its-first-spadex-mission-india-becomes-the/article-100963</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 15:05:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/6622-copy72.jpg"                         length="24460"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        