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                <title>Debarment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>फर्जी छात्रवृत्ति घोटाले में गिरी गाज, 46 शिक्षण संस्थान डिबार कर ब्लैकलिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने करोड़ों की फर्जी छात्रवृत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 46 शिक्षण संस्थानों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ई-मित्र संचालक विजय कुमार से जुड़ी जांच में कूटरचित दस्तावेजों और एसओपी (SOP) के उल्लंघन का खुलासा हुआ है। विभाग ने इन संस्थानों को 3 से 5 साल के लिए पोर्टल से डिबार कर लंबित आवेदन निरस्त कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/46-educational-institutions-caught-in-fake-scholarship-scam-were-removed/article-158296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की छात्रवृत्ति प्राप्त करने के मामले में 46 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति पोर्टल से डिबार (प्रतिबंधित) कर ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विभागीय जांच में सामने आया कि इन संस्थानों ने छात्रवृत्ति आवेदनों का समुचित सत्यापन किए बिना कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आवेदन अग्रेषित किए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ। विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों के लंबित छात्रवृत्ति आवेदन भी निरस्त कर दिए हैं।</p>
<p>योजना का नहीं ले सकेंगे लाभ: जांच समितियों, जिला अधिकारियों की रिपोर्ट तथा उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद विभाग ने संबंधित संस्थानों को आदेश जारी होने की तिथि से तीन वर्ष अथवा होल्ड किए जाने की तिथि से पांच वर्ष (जो भी बाद में हो) तक छात्रवृत्ति पोर्टल से डिबार करने का निर्णय लिया है। इस अवधि में ये संस्थान छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।</p>
<p>ई-मित्र संचालक की जांच में खुला मामला: निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार के आदेशानुसार यह कार्रवाई फर्जी छात्रवृत्ति प्रकरण के मुख्य आरोपी ई-मित्र संचालक विजय कुमार बोचल्या से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। जांच में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्रवृत्ति आवेदन पत्रों की रैंडम जांच में कई गड़बड़ी सामने आईं। संस्थानों ने 2015 के दिशा-निर्देश 2023 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तथा 2024 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपात्रों के आवेदनों को सत्यापित कर जिला अधिकारियों को भेजा।</p>
<p>आवेदन में मिथ्या घोषणा, फर्जी दस्तावेज:  विभाग ने कहा कि फर्जी आवेदन भेजना नियमों का उल्लंघन माना गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी आवेदन में मिथ्या घोषणा, फर्जी दस्तावेज मिलते हैं तो संबंधित संस्था के विरुद्ध  कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:33:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मेक-इन-इंडिया उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता, वित्त विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 के तहत 'मेक-इन-इंडिया' उत्पादों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। नई नीति में राज्य की सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (MSE) को निविदा में विशेष लाभ मिलेगा। 10 करोड़ से अधिक की खरीद में 50% स्थानीय सामग्री का सत्यापन अनिवार्य होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/finance-department-issued-new-guidelines-to-give-priority-to-make-in-india/article-157176"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/secratrait.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी खरीद में देश में निर्मित उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वित्त (वित्तीय नियम) विभाग के परिपत्र के अनुसार बजट वर्ष 2026-27 की घोषणा के तहत सार्वजनिक खरीद में ‘मेक-इन-इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान की सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (एमएसई) को खरीद प्रक्रिया में विशेष लाभ मिलेगा। यदि किसी निविदा में राज्य की एमएसई इकाई सबसे कम दर (एल-1) पर होती है तो उसे पूरी मात्रा का कार्यादेश दिया जाएगा।</p>
<p>वहीं, अन्य मामलों में भी स्थानीय एमएसई इकाइयों को निर्धारित प्रावधानों के तहत प्राथमिकता मिलेगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्वामित्व वाली इकाइयों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। परिपत्र के अनुसार स्थानीय आपूर्तिकर्ता माने जाने के लिए उत्पाद में कम से कम 50 प्रतिशत स्थानीय सामग्री होना अनिवार्य होगा। 10 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद में स्थानीय सामग्री का प्रमाण चार्टर्ड अकाउंटेंट या वैधानिक लेखा परीक्षक से सत्यापित कराना होगा। गलत जानकारी देने वाली फर्मों पर दो वर्ष तक डिबार करने की कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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