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                <title>शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलें : पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से की मुलाकात, किसी भी धड़े को स्वतंत्र दर्जा या विशेषाधिकार न देने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सांसद अरविंद सावंत ने मांग की कि किसी भी संभावित अलग गुट को स्वतंत्र मान्यता या विशेषाधिकार न दिए जाएं। छह सांसदों के अलग संसदीय समूह बनाने की अटकलों के बीच पार्टी ने सभी सांसदों को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। कथित **‘ऑपरेशन टाइगर’** से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speculations-of-shiv-sena-breaking-in-ubt-party-leaders-meet/article-157268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)35.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली/मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ बैठक करके उनसे आग्रह किया कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी धड़े को कोई स्वतंत्र दर्जा, विशेष सुविधाएं या विशेषाधिकार न दिए जाएं। उन्होंने दोहराया कि संसद में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे ही एकमात्र वैध इकाई है। यह बैठक शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के एक अलग संसदीय गुट बनाने की संभावना तलाशने से जुड़ी राजनीतिक अटकलों की पृष्ठभूमि में हुई है। हालांकि, पार्टी ने किसी भी औपचारिक विभाजन से कड़ा इनकार किया है। बैठक के बाद सावंत ने संवाददाताओं से कहा, कानून के तहत किसी विभाजित समूह को मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है। कानून केवल एक राजनीतिक दल का दूसरे राजनीतिक दल में विलय करने की अनुमति देता है। किसी समूह को स्वतंत्र रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सावंत के साथ मौजूद राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा, अध्यक्ष एक अत्यंत सम्मानित प्राधिकारी हैं। हमने उनसे अनुरोध किया है कि वे पूरी तरह से नियम पुस्तिका का पालन करें। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह संवैधानिक प्रावधानों और संसदीय नियमों की गहन जांच पर आधारित होगा। शिवसेना (यूबीटी) ने इससे पहले लोकसभा सचिवालय को लिखित प्रतिवेदन सौंपकर मांग की थी कि पार्टी की आधिकारिक स्थिति को बरकरार रखा जाए और<span>  </span>पार्टी के स्थापित ढांचे के खिलाफ कोई दंडात्मक या विभाजनकारी कार्रवाई न की जाए। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सावंत ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी की स्थिति के संबंध में कोई भी निर्णय पूरी तरह से संविधान और दलबदल विरोधी कानून के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि किसी भी सदस्य ने आधिकारिक तौर पर पार्टी छोडऩे की मंशा घोषित नहीं की है, और इसलिए, एक अलग समूह के लिए मान्यता मांगने के किसी भी प्रयास का कोई कानूनी आधार नहीं है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) एक और राजनीतिक संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। उसके नौ लोकसभा सांसदों में से छह के एक अलग संसदीय समूह बनाने की मांग करने की अटकलें तेज हो गयी हैं। इससे वर्ष 2022 में हुए विभाजन के बाद पार्टी के भीतर एक और संभावित टूट की आशंकाएं बढ़ गयी हैं। राजनीतिक हलकों में ऑपरेशन टाइगर कहे जा रहे इस घटनाक्रम से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच, शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने एक औपचारिक सचेतक जारी करके अपने सभी सांसदों को गुरुवार सुबह दिल्ली में होने वाली संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया दिया। पार्टी ने आगाह किया है कि निर्देश का पालन न करने पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऐसी रिपोर्टें है कि कथित ऑपरेशन टाइगर 19 जून को पार्टी के स्थापना दिवस के आसपास अपने अंतिम रूप में आ सकता है, राजनीतिक विश्लेषक अब किसी भी प्रक्रियात्मक घटनाक्रम के लिए अध्यक्ष कार्यालय पर नजरें गड़ाए हुए हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) खेमा आंतरिक एकजुटता बनाए रखने के लिए अपने प्रयास तेज कर रहा है। यह कथित विद्रोह,अगर धरातल पर उतरता है, तो शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका होगा, जिनकी पार्टी को वर्ष 2022 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विभाजन के बाद से पहले ही बड़े दलबदल का सामना करना पड़ा था। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:34:33 +0530</pubDate>
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