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                <title> world picnic day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विश्व पिकनिक डे : मोबाइल की स्क्रीन ने निगल ली पिकनिक की खुशियां! परिवार संग बिताए पल बनते जा रहे यादें</title>
                                    <description><![CDATA[कभी छुट्टियों का नाम आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते थे। घर में सुबह से ही तैयारियां शुरू। मां रसोई में पसंदीदा व्यंजन बनाती, बच्चे बैग तैयार करते और पूरा परिवार किसी पार्क, गार्डन, पहाड़ी या ऐतिहासिक स्थल की ओर निकल पड़ता था, लेकिन बदलते दौर में पिकनिक की वही परंपरा अब धीरे-धीरे धुंधली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-picnic-day-the-mobile-screen-has-swallowed-the-happiness/article-157303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कभी छुट्टियों का नाम आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते थे। घर में सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती थीं। मां रसोई में पसंदीदा व्यंजन बनाती, बच्चे बैग तैयार करते और पूरा परिवार किसी पार्क, गार्डन, पहाड़ी या ऐतिहासिक स्थल की ओर निकल पड़ता था, लेकिन बदलते दौर में पिकनिक की वही परंपरा अब धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है। आज स्थिति यह है कि पिकनिक का मतलब पार्कों की हरियाली और खुले आसमान के नीचे बैठकर समय बिताने की बजाय मॉल, मल्टीप्लेक्स और कैफे तक सीमित होकर रह गया है। 18 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय पिकनिक डे के अवसर पर यदि हम अपने आसपास नजर दौड़ाएं तो यह बदलाव साफ  दिखाई देता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, बढ़ती व्यस्तता और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव ने लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। परिवार के साथ बैठकर बातचीत करना और दोस्तों के साथ खुलकर हंसना अब पहले जैसा सहज नहीं रह गया है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय पिकनिक डे माध्यम से नवज्योति यही संदेश देना चाहता है कि व्यस्त जीवन से कुछ पल निकालकर अपनों के साथ समय बिताना जरूरी है। क्योंकि जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें किसी मोबाइल स्क्रीन में नहीं, बल्कि उन पलों में बसती हैं जिन्हें हम अपने प्रियजनों के साथ हंसते-मुस्कुराते हुए जीते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम फिर से पार्कों, बगीचों और प्रकृति की ओर लौटें, ताकि आने वाली पीढि़यां भी असली पिकनिक का आनंद और उसकी मिठास महसूस कर सकें। पूराने लोगों से हुई बातचीत में यही तर्क सामने आया कि तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं लोगों के बीच की दूरी भी बढ़ाई है। </p>
<p><strong>प्रकृति से जुड़ाव हो रहा कम: </strong>पहले बच्चे छुट्टियों में मैदानों, पार्कों और प्राकृतिक स्थानों पर खेलना पसंद करते थे, लेकिन अब उनका अधिकांश समय मोबाइल फोन, वीडियो गेम और सोशल मीडिया पर गुजरता है। यही कारण है कि प्रकृति से जुड़ाव लगातार कम होता जा रहा है। </p>
<p><strong>मॉल, होटल या कैफे में ढूंढ रहे सुकून:</strong> शहर की अधिकतर युवक युवतियों व महिला क्लब्स के सदस्यों का कहना है कि जब भी वे बोर महसूस करती हैं तो परिवार या दोस्तों के साथ मॉल, होटल या किसी कैफे में जाना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि पहले जैसी पिकनिक अब बहुत कम देखने को मिलती है। बड़े-बुजुगार्ें से सुनने को मिलता है कि लोग घर से खाना बनाकर ले जाते थे और पूरा दिन हंसी-मजाक, खेलकूद और बातचीत में बीत जाता था।</p>
<p><strong>पिकनिक का आधुनिक रूप:</strong> पवन ने कहा कि एक-दो महीने में दोस्तों के साथ गेट-टु-गेदर करते हैं। इसमें मूवी व स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया जाता है। यह पारंपरिक पिकनिक नहीं, बल्कि उसका आधुनिक रूप है।</p>
<p><strong>पिकनिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर</strong><br />पिकनिक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत बनाने का अवसर भी है। खुले वातावरण में परिवार और दोस्तों के साथ बिताया गया समय मानसिक तनाव को कम करता है और आपसी संबंधों को मजबूत बनाता है।<br />-मुकेश गुप्ता  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:24:02 +0530</pubDate>
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