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                <title>allocation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गाज़ा शांति रोडमैप योजना : हमास ने फ़िलिस्तीनी गुटों का जवाब संयुक्त राष्ट्र को सौंपा, ट्रंप योजना पर दिया सकारात्मक जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों ने गाजा शांति रोडमैप पर अपनी संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र को सौंप दी है। काहिरा बैठक के बाद तैयार इस रुख में मानवीय सहायता, सैन्य कार्रवाई रोकने, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा पुनर्निर्माण को पहले चरण में पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उसने गाजा शांति रोडमैप योजना पर फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव को सौंप दी है। हमास ने यमन की मीडिया को जारी बयान में कहा कि पिछले सप्ताह काहिरा में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों की मौजूदगी में विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद एक साझा राष्ट्रीय रुख तैयार किया गया, जिसे एक दिन पहले औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया।</p>
<p>हमास ने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों ने इस रोडमैप को "जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच" के साथ देखा है। संगठन के अनुसार सभी गुटों ने इस बात पर जोर दिया कि योजना के पहले चरण को पूरी तरह लागू किया जाए, खासकर मानवीय सहायता व्यवस्था और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को लागू करने संबंधी रोडमैप पर गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया। उन्होंने पहले चरण के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से मानवीय सहायता और गाजा में सभी तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को समाप्त करने के मुद्दे पर।"</p>
<p>हमास ने कहा कि गुटों ने रोडमैप में शामिल अन्य बिंदुओं पर भी अमल की मांग की है। इनमें प्रशासनिक समिति की तैनाती, गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया शामिल है। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोडमैप में उल्लिखित प्रशासनिक समिति के प्रवेश, गाजा पट्टी से पूर्ण इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि फिलिस्तीनी जनता अपने राज्य की स्थापना और आत्मनिर्णय के अधिकार के लक्ष्य को हासिल कर सके।"</p>
<p>हमास ने बताया कि उसका प्रतिनिधिमंडल काहिरा में मध्यस्थों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ आगे भी बैठकें जारी रखेगा, ताकि सहमति वाले बिंदुओं को लागू करने की दिशा में प्रगति हो सके। उल्लेखनीय है कि निकोलाय म्लादेनोव ने मई में "राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक गाजा शांति योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए रोडमैप" सार्वजनिक किया था। 15 बिंदुओं वाली इस योजना में सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती, इजरायली सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम समझौते के तहत शुरुआती चरण में कैदियों की अदला-बदली, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति और कुछ इलाकों से इजरायली सैनिकों की आंशिक वापसी शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी पहल: 'जन कल्याण शिविर' की शुरूआत, इन योजनाओं का मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने 'जन कल्याण शिविर' कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित इन विशेष शिविरों में आयुष्मान भारत, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, भूमि सुधार और किसान निधि जैसी कई केंद्रीय व राज्य कल्याणकारी योजनाओं के आवेदन एक ही छत के नीचे सीधे स्वीकार किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-initiative-of-west-bengal-government-launch-of-jan-kalyan/article-157011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/suvendu-adhikari.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान और सुलभ बनाने के उद्देश्य से सोमवार से राज्यव्यापी 'जन कल्याण शिविर' कार्यक्रम शुरू कर रही है। यह पहल पिछली सरकार के 'द्वारे सरकार' जनसंपर्क कार्यक्रम से मिलती-जुलती है। इसका उद्देश्य कई कल्याणकारी योजनाओं, जागरूकता अभियानों और आवेदन की सुविधाओं को एक ही छत के नीचे लाना है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, आज से बुधवार तक राज्य भर में जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर उन लोगों को सीधे आवेदन करने की सुविधा देंगे, जो अब तक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाए हैं। आवेदन जमा करने और शुरुआती जांच को आसान बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, ताकि काम में देरी न हो और लोग जानकारी के अभाव के कारण सरकारी लाभों से वंचित न रहें।</p>
<p>शिविरों में कई केंद्रीय और राज्य योजनाओं के आवेदन स्वीकार किये जायंगे। इनमें आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, पहचान पत्र (आधार) नामांकन व लिंक करना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत आवेदन शामिल हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़ी सेवाएं जैसे दाखिल-खारिज, भूमि रिकॉर्ड में छोटे-मोटे सुधार और पट्टा के आवेदन भी उपलब्ध होंगे। इन शिविरों में ई-श्रम, पीएम श्रम योगी मानधन, मुफ्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना के आवेदनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। लाभार्थी अन्नपूर्णा योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, सुकन्या समृद्धि योजना, कन्याश्री और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>किसानों के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि अवसंरचना कोष के आवेदन लिए जाएंगे। पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, जिनमें प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, शिक्षाश्री, मेधाश्री और तपशिल बंधु शामिल हैं, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय समावेशन योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना भी उपलब्ध होंगी।</p>
<p>मछुआरों के लिए पीएम मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना-प्रथम, पीएम उज्ज्वला योजना, एकीकृत बागवानी विकास मिशन और पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग औपचारिक रूप देने की योजना के लिए भी आवेदन जमा किए जा सकते हैं। इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें बुनियादी ढांचे, जागरूकता अभियानों, आवेदन प्रणाली और अंतर-विभागीय समन्वय सहित सभी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए रविवार को ही अपने-अपने जिलों में पहुंचने के निर्देश दिए गए थे।</p>
<p>प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के तहत, अधिकारियों को आज और कल (मंगलवार) को अधिक से अधिक शिविरों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर बुधवार को भी निरीक्षण जारी रहेगा। वे शिविरों में आने वाले नागरिकों के अनुभव, आवेदन प्रसंस्करण की गति और दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करेंगे। राज्य सरकार को उम्मीद है कि जन कल्याण शिविर कार्यक्रम न केवल सरकारी सेवाओं को जनता के करीब लाएगा, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच के जुड़ाव को भी मजबूत करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>माइंडमाइन सम्मेलन 2026 : सीतारमण ने कहा- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग से मिल रहा अर्थव्यवस्था को समर्थन, वित्त मंत्री ने जताई स्थिरता की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'माइंडमाइन सम्मेलन 2026' में कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। मानसून और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है तथा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए आरबीआई के साथ रणनीतिक उपाय किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/mindmine-conference-2026-sitharaman-said-domestic-demand-is-supporting-the/article-156999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nirmala-sitharaman.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि इस समय वैश्विक स्तर पर व्यापार और आपूर्ति को लेकर कई प्रकार की अनिश्चतताएं भारतीय अर्थव्यस्था के लिए चुनौती पेश कर रही हैं, हालांकि घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है। सीतारमण ने यहां "माइंडमाइन सम्मेलन 2026" के एक संवाद सत्र के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यापार में काफी अनिश्चितताएं हैं। हमारा निर्यात मजबूत है लेकिन अचानक आयात शुल्क बढ़ा दिया जाता है। हम जिन तीन वस्तुओं का सबसे अधिक आयात करते हैं उनकी कीमत और आपूर्ति दोनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके लिए विदेशी मुद्रा का भंडार मजबूत होना चाहिये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन सबके बीच भारत के लिए राहत की बात हमारा घरेलू बाजार है, जो काफी बड़ा है। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि विनिर्माताओं के समक्ष आयातित कच्चे माल की ऊंची कीमत की चुनौती भी है। घरेलू स्तर पर मानसून की चुनौती को लेकर उन्होंने कहा कि इस बार अल-नीनो प्रभाव के कारण कम बारिश होने का अनुमान है। देश के पास अनाज का काफी बफर भंडार है, इसलिए खाद्यान्न की कमी जैसी स्थिति तो नहीं होगी, लेकिन किसानों की आमदनी पर कम मानसून का असर जरूर होगा। उर्वरकों की कमी के बारे में उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी सत्र को लेकर चिंता थी लेकिन अब चीन से उर्वरक आने से वह चिंता भी दूर हो गयी है।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और उससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर विदेशी मुद्रा जुटाने के उपाय किये हैं। बॉन्ड बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। साथ ही बैंकों और सार्वजनिक कंपनियों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति दी गयी है और इसके लिए जोखिम को कम करने की रणनीति की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक उठायेगा। इससे बैंक विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:16:16 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 18 आईएएस अधिकारियों के तबादले</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 18 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। खाद्य, परिवहन, खेल और महिला विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नए सचिव नियुक्त हुए हैं। अधिसूचना के अनुसार, रवि इंदर सिंह को परिवहन और जगदीश प्रसाद मीना को खाद्य विभाग की कमान सौंपी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/major-administrative-reshuffle-in-west-bengal-18-ias-officers-transferred/article-156568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ias-transfer.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने 18 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नये प्रभार सौंपे हैं। यह फेरबदल खाद्य एवं आपूर्ति, परिवहन, भूमि एवं भूमि सुधार, महिला एवं बाल विकास, सिंचाई, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई) सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में किया गया है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू कर दिये गये हैं।</p>
<p>इन प्रमुख बदलावों में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य-सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे जगदीश प्रसाद मीना (पश्चिम बंगाल कैडर 2004) को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार विभाग के प्रधान सचिव तथा उपभोक्ता मामलों का प्रभार संभाल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रवि इंदर सिंह (पश्चिम बंगाल कैडर 1994) को सुरेंद्र गुप्ता के स्थान पर परिवहन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है।</p>
<p>वर्तमान में प्रेसीडेंसी डिवीजन के संभागीय आयुक्त तथा परिवहन विभाग का प्रभार संभाल रहे सुरेंद्र गुप्ता (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को भूमि एवं भूमि सुधार और शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। सौमित्र मोहन (पश्चिम बंगाल कैडर 2002) पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सचिव पद पर बने रहेंगे और उन्हें अतिरिक्त रूप से सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव का प्रभार सौंपा गया है।</p>
<p>इसी तरह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव रहे परवेज़ अहमद सिद्दीकी (पश्चिम बंगाल कैडर 1999) को राज्य गजेटियर का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। जलपाईगुड़ी डिवीजन के संभागीय आयुक्त अनूप कुमार अग्रवाल (पश्चिम बंगाल कैडर 1993) को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और वस्त्र विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।<br />पश्चिम बंगाल नेताजी सुभाष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एनएसएटीआई) के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत रहीं मौमिता गोदारा बसु (पश्चिम बंगाल कैडर 2007) को महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।</p>
<p>वर्तमान में भूमि रिकॉर्ड और सर्वेक्षण के निदेशक रणधीर कुमार (पश्चिम बंगाल कैडर 2006) उनकी जगह लेंगे और उनके पास वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और वस्त्र विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार का प्रभार संभाल रहे राजेश पांडेय (पश्चिम बंगाल कैडर 1995) को युवा सेवा एवं खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर स्थानांतरित किया गया है।</p>
<p>अन्य तबादलों में पश्चिम बंगाल लघु उद्योग विकास निगम (डब्ल्यूबीएसआईडीसी) की प्रबंध निदेशक आर विमला (पश्चिम बंगाल कैडर 2010) को उत्तर बंगाल विकास विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) की निदेशक रचना भगत (पश्चिम बंगाल कैडर 2009) को श्रम विभाग का सचिव बनाया गया है और उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग में सचिव रहीं मुक्ता आर्य (पश्चिम बंगाल कैडर 2008) को सुंदरवन मामलों के विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है।</p>
<p>नयी दिल्ली में प्रधान स्थानीय आयुक्त दुष्यंत नारियाला (पश्चिम बंगाल कैडर : 1993) राष्ट्रीय राजधानी में ही बने रहेंगे और उन्हें एनएसएटीआई के महानिदेशक तथा एसएनटीसीएसएससी के अध्यक्ष की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक नंदिनी चक्रवर्ती (पश्चिम बंगाल कैडर 1994) को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, साथ ही उनके पास आवास विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। परिवहन विभाग में विशेष सचिव राजू मिश्रा (पश्चिम बंगाल कैडर 2015) को आबकारी आयुक्त नियुक्त किया गया है। आवास, युवा सेवा एवं खेल, आपदा प्रबंधन और पशु संसाधन विकास सहित कई विभागों का कार्यभार संभाल रहे राजेश कुमार सिन्हा (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को सिंचाई और जलमार्ग विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। नीलम मीना (पश्चिम बंगाल कैडर 1998) पश्चिम बंगाल की मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के पद पर बनी रहेंगी और उन्हें पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/major-administrative-reshuffle-in-west-bengal-18-ias-officers-transferred/article-156568</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:54:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों का बड़ा फैसला : चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी, 5 जुलाई को होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूएई के बाहर होने के बावजूद ओपेक के 7 प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सदस्य देश जुलाई 2026 से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएंगे। बाजार स्थिरता के लिए दिसंबर 2026 तक का नया शेड्यूल तय किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-opec-countries-amid-hormuz-crisis-approval-to/article-156308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/opecc.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव और कई सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद ओपेक के सात प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक समूह के अनुसार सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की तथा उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि अप्रैल 2023 में घोषित अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के तहत 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि जुलाई 2026 से लागू की जाएगी। समूह ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इन स्वैच्छिक कटौतियों को आंशिक या पूर्ण रूप से वापस लिया जा सकता है। सदस्य देश वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार उत्पादन बढ़ाने, रोकने या वापस घटाने का निर्णय ले सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया कि नवंबर 2023 में लागू उत्पादन समायोजन सहित सभी व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। सदस्य देशों ने कहा कि यह कदम उन देशों को भी मदद करेगा जिन्होंने पहले निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन किया था और अब उसकी भरपाई करनी है। समूह ने 'डिक्लेरेशन ऑफ कोऑपरेशन' (सहयोग घोषणा) के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उत्पादन अनुपालन की निगरानी संयुक्त मंत्रिस्तरीय निगरानी समिति (जेएमएमसी) द्वारा जारी रहेगी।</p>
<p>सदस्य देशों ने यह भी पुष्टि की कि जनवरी 2024 से हुई अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई पूरी तरह की जाएगी और इसके लिए निर्धारित अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। ओपेक समूह ने बाजार की स्थिति, उत्पादन अनुपालन और भरपाई व्यवस्था की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। अगली बैठक 5 जुलाई 2026 को होगी। इस बीच, लगभग छह दशक तक सदस्य रहने के बाद संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने संगठन के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:04:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा, लेकिन दाल-तेल और सब्जियों की महंगाई से परिवारों का रसोई-बजट अब भी संकट में</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राजस्थान में 28.14 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं। प्राथमिकता परिवारों को 5 किलो और अंत्योदय को 35 किलो गेहूं मिल रहा है। हालांकि, अनिवार्य ई-केवाईसी और तकनीकी खामियों के कारण राशन रुकने का संकट है, जिसे सुधारने और गेहूं के साथ दाल-तेल देने की मांग उठ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-food-security-day-scope-of-food-security/article-156236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/food.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। इस हिसाब से पांच सदस्यों के परिवार को 25 किलोग्राम गेहूं उपलब्ध होता है। अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न का अधिकार है। यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गेहूं को संपूर्ण खाद्य सुरक्षा नहीं माना जा सकता। दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान, घरेलू कामगार, विधवा, वृद्ध, दिव्यांग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक की आय अनिश्चित है, जबकि भोजन से जुड़े बाकी खर्च लगातार उसकी जेब पर दबाव डालते हैं।</p>
<p><strong>नाम जुड़ना राहत, कटना पूरे परिवार का संकट</strong></p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार, 26 जनवरी 2025 से एनएफएसए पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28 लाख से अधिक नए नाम योजना में जोड़े गए। यह बड़ी राहत है, लेकिन अब ई-केवाईसी अनिवार्य होने से बुजुर्गों, मजदूरी के लिए बाहर गए प्रवासियों, आदिवासी परिवारों और खराब इंटरनेट वाले ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</p>
<p><strong>तकनीकी खामी अपात्रता का प्रमाण नहीं</strong></p>
<p>अंगुलियों के निशान नहीं मिलने, आधार और जनाधार में नाम अलग होने, मोबाइल नंबर बंद होने या सर्वर खराब होने जैसी तकनीकी समस्याओं को अपात्रता का प्रमाण नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी परिवार का राशन रोकने या नाम हटाने से पहले भौतिक सत्यापन, लिखित सूचना और अपील का पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।</p>
<p>खाद्य विभाग को प्रत्येक उचित मूल्य दुकान का मासिक स्टॉक, वितरण और शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। घटतौली, दुकान बंद मिलने या राशन से वंचित होने की शिकायत का निस्तारण अधिकतम 72 घंटे में हो। वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए घर तक राशन पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ गोदाम से अनाज निकालना नहीं, बल्कि नागरिक की थाली में सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना है। सरकार को गेहूं के साथ दाल, खाद्य तेल और नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की सहायता पर भी विचार करना चाहिए। व्यवस्था की सफलता लाभार्थियों की संख्या से नहीं, इस तथ्य से मापी जाएगी कि राजस्थान में कोई परिवार भूखा सोने को मजबूर न हो।</p>
<p>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्राथमिकता परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम और अंत्योदय परिवारों के लिए प्रति परिवार 35 किलोग्राम मासिक खाद्यान्न का प्रावधान है। राजस्थान सरकार के अनुसार, पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28,14,942 नए नाम जोड़े गए और नए लाभार्थियों के लिए तीन महीने में ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया। फरवरी 2026 में ई-केवाईसी और सूची से नाम हटने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैलजा का केंद्र पर बड़ा हमला: जीडीपी के 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर पहुंची सरकार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र पर जीडीपी से तेज कर्ज बढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 2026 तक देश का कर्ज $214$ लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है, जिससे कर्ज-जीडीपी अनुपात 60% हो गया है। उन्होंने प्रचार के बजाय रोजगार और ग्रामीण विकास पर ध्यान देने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/seljas-big-attack-on-the-center-the-government-reached-debt/article-156101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/selja11.webp" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश को विकास के नाम पर कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, जबकि सरकारी कर्ज उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2008 में भारत की जीडीपी लगभग एक लाख 20 हजार करोड़ डॉलर थी, जो 2026 तक बढ़कर चार लाख 10 हजार करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। केंद्र सरकार का कर्ज 27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 214 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उनके अनुसार, 2014 में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 45 प्रतिशत था, जो अब लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भारी कर्ज लेकर विकास का भ्रम पैदा कर रही है तथा विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और दिखावटी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा रही है जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। लाखों सरकारी पद खाली हैं, नये रोजगार के अवसर सीमित हैं और छोटे-मध्यम उद्योग आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्ज के विरोध में नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग रोजगार सृजन, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाये। उन्होंने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने तथा रोजगार एवं उत्पादन आधारित आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:52:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजमेर रेल मंडल में पर्यावरण दिवस: डीआरएम राजू भूतड़ा ने किया पौधारोपण, बांटे जूट के बैग</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर रेल मंडल में विश्व पर्यावरण दिवस पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। डीआरएम राजू भूतड़ा और रिंकल भूतड़ा ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर अधिकारियों ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया, विशेष सेल्फी पॉइंट बनाए गए और सिंगल-यूज प्लास्टिक को कम करने के लिए जूट बैग बांटे गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/environment-day-in-ajmer-railway-division-drm-raju-bhootada-planted/article-156131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ajmer.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अजमेर रेल मंडल पर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान रेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। मंडल रेल प्रबंधक राजू भूतड़ा एवं महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा रिंकल भूतड़ा ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक विकास बूरा, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजिनियर मनोज मीणा सहित मंडल के अन्य वरिष्ठ रेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सामूहिक रूप से पौधे लगाए।</p>
<p>पर्यावरण संरक्षण थीम पर आधारित विशेष सेल्फी पॉइंट पर फोटो क्लिक कर पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया गया। प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए राजू भूतड़ा और रिंकल भूतड़ा ने रेल अधिकारियों व कर्मचारियों को जूट के बैग वितरित किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:32:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत में अड़चन: ईरान ने की जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग, हिचकिचा रहा ट्रंप प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में जब्त फंड की तत्काल रिहाई सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। ईरान $12 अरब की नकद राशि तुरंत जारी करने पर अड़ा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ठोस कदम उठाए बिना कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdle-in-us-iran-talks-iran-demands-immediate-release-of-seized/article-155993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी संभावित समझौते के तहत कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले उसकी अरबों डॉलर की जब्त की गई धनराशि को तुरंत जारी किया जाए। इस मांग को मानने में ट्रंप प्रशासन हिचकिचा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन ईरान को कोई बड़ी रियायत दिए बिना बड़े पैमाने पर धन जारी करने को मंज़ूरी देने में आनाकानी कर रहा है। खासकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार, परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर वह कड़ा रूख अपना रहा है।</p>
<p>जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी वार्ताकार चाहते हैं कि जैसे ही दोनों पक्ष शुरुआती सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करें, उन्हें जब्त हुए धन से "नकद धनराशि" तुरंत मिल जाए और इसमें किसी तरह की कोई देरी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों का रुख साफ है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस आश्वासन देगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चिंता सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है। अगर धनराशि को जल्दी जारी कर दिया गया, तो इससे ईरान को एक आर्थिक सहारा मिल जाएगा, जबकि अमेरिका के हाथ से उसका सबसे ताकतवर मोलभाव का हथियार,आर्थिक दबाव, जिसे बनाने में उसने कई वर्ष लगाए हैं, वह उसके हाथ से निकल जाएगा।</p>
<p>वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि जब तक ईरान पहले कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाता है खासकर अपनी परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर,तब तक कोई बड़ी रकम जारी नहीं की जाएगी। श्री ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ-साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेंगे जो ओबामा के 2015 के समझौते जैसा हो, जिसके तहत ईरान के लिए 1.7 अरब डॉलर का फंड जारी किया गया था।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब करीब 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, और ट्रंप की ऐसी कोई मंशा नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों ने ऐसे इंतज़ामों पर विचार किया है, जिनके तहत कोई तीसरा देश जैसे कि कतर ईरान को फंड जारी करेगा, ताकि अमेरिका किसी भी सीधे भुगतान से दूर रहे। मध्यस्थों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें कई अरब डॉलर का एक "मानवीय फंड" बनाना भी शामिल है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ भोजन, दवा और कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। लेकिन अब तक, दोनों में से कोई भी पक्ष इतना झुकने को तैयार नहीं हुआ है कि यह गतिरोध टूट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>औद्योगिक कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती: रीको और पीडब्ल्यूडी मिलकर करेंगे सड़कों का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में औद्योगिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रीको और PWD मिलकर 50-50% वित्तीय साझेदारी से 38 एप्रोच सड़कों का विकास करेंगे। PWD ने ₹290.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है, जिससे 16 जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों की लगभग 205 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/industrial-connectivity-will-be-strengthened-rico-and-pwd-will-jointly/article-155896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ricco.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रीको द्वारा राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी एवं आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य के कई रीको औद्योगिक क्षेत्र राज्य राजमार्गों से जुड़े हुए हैं, जहां उद्योगों के कच्चे माल और तैयार उत्पादों के सुगम परिवहन हेतु सड़कों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रीको एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा 38 सड़कों का विकास कोस्ट शेयरिंग मॉडल पर किया जायेगा। इसके अंतर्गत कुल व्यय का 50 प्रतिशत भाग रीको द्वारा वहन किया जायेगा। रीको के 38 औद्योगिक क्षेत्रों की एप्रोच सड़कों की पहचान की गई है, जो सार्वजनिक निर्माण विभाग से संबंधित हैं।</p>
<p>इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 205 किलोमीटर है, जिनके सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण पर लगभग 290 करोड़ रुपये का व्यय होगा। ये सड़कें आबूरोड, अजमेर, बालोतरा, बांसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, चुरू, दौसा, जयपुर, जालौर, झालावाड़, कोटा, नीमराना, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर और उदयपुर के औद्योगिक क्षेत्रों को लाभान्वित करेंगी। इन सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान सरकार के माध्यम से किया जायेगा, जिसमें रीको और पीडब्ल्यूडी की 50-50 प्रतिशत वित्तीय साझेदारी होगी। सार्वजानिक निर्माण विभाग (PWD) ने 205 किमी लंबी 38 सड़को के निर्माण के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति राशि रुपये 290.82 करोड़ दिनांक 06.05.2026 को जारी कर दी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रदूषण पर सरकार का बड़ा प्रहार: दिल्ली-एनसीआर में पुराने कमर्शियल वाहनों को बदलने के लिए 9,585 करोड़ की योजना मंजूर, टैक्स में भारी छूट</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने के लिए ₹9,585 करोड़ की ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पुराने बीएस-4 या उससे पहले के ट्रकों और बसों को इलेक्ट्रिक या बीएस-6 वाहनों से बदला जाएगा। वाहन मालिकों को 5% ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर और टैक्स में भारी छूट मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-rekha-gupta-approves-plan-to-replace-old-trucks-and/article-155890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guprta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए पुराने बीएस-4 या उससे पुराने ट्रकों और बसों को बदलने हेतु 9,585 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। यह योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) द्वारा लागू की जाएगी। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुध्जवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का वित्तपोषण आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) करेगी तथा इसका कार्यान्वयन सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्रालय और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। यह योजना दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से कार्यान्वित की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 5,041 करोड़ रुपये और भागीदार राज्यों द्वारा कर छूट के रूप में अनुमानित 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पंजीकृत उन ट्रकों और बसों के मालिकों को प्रोत्साहित करना है जो बीएस-4 या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं, ताकि वे उन्हें बीएस-6 या उससे भी सख्त उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाले वाहनों या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदल सकें। स्वच्छ परिवहन प्रौद्योगिकियों की ओर बदलाव को गति देकर इस योजना से वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण सर्दियों के मौसम में एक गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) द्वारा अगस्त 2018 में प्रकाशित "एनसीआर में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) के स्रोत निर्धारण" नामक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 का 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड का 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड का 63 प्रतिशत उत्सर्जन परिवहन क्षेत्र से होता है। परिवहन क्षेत्र में कुल वाहनों की संख्या का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद ट्रक और बसें पीएम 2.5 उत्सर्जन का 36 प्रतिशत हिस्सा है। बीएस-III या उससे पुराने वाहनों के लिए पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं पर स्क्रैप कराना अनिवार्य है, जबकि बीएस-4 वाहनों को एनसीआर के बाहर गैर-एनसीएपीशहरों/कस्बों में स्क्रैप या बेचा जा सकता है। इसके बाद मालिकों को एनसीआर के भीतर बीएस-6 या उससे भी सख्त मानकों के अनुरूप या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना और पंजीकृत कराना होगा। दिल्ली में हालांकि इस योजना के तहत खरीदे गए हल्के मालवाहक वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जबकि बसें केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक होनी चाहिए। सरकारी वाहन इस योजना से बाहर हैं।</p>
<p>इस योजना में सरकार पांच साल के लिए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, वाहन की श्रेणी के आधार पर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या जमा प्रमाणपत्र के व्यापार के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी। राज्य सरकारें पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी और नए वाहनों पर शत-प्रतिशत तक तथा पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत तक मोटर वाहन कर में छूट प्रदान करेंगी। यह छूट 10 वर्षों के लिए लागू होगी। राज्य सरकार योजना में शामिल पुराने वाहनों पर लंबित देनदारियों को भी माफ कर देगी। ऑटो निर्माता एक्स-शोरूम कीमतों पर 8 प्रतिशत की छूट प्रदान करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसका कार्यान्वयन पूरी तरह से डिजिटल होगा और इसके लिए एक एकीकृत पोर्टल बनाया जाएगा, जो वास्तविक समय में पात्रता की जांच, स्वचालित ब्याज सब्सिडी दावों, मासिक ईंधन वाउचर क्रेडिट और प्रदूषण में कमी के परिणामों की निगरानी को सक्षम करेगा। केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख से 5 वर्षों तक जारी रहेंगे, जिससे दो साल की नामांकन अवधि के बाद भी इसका निरंतर प्रभाव सुनिश्चित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:37:28 +0530</pubDate>
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                <title>दानिश इकबाल का बड़ा बयान, कहा- कागज पर चल रहे मदरसों की सहायता राशि होनी चाहिए बंद, सरकारी धन के दुरूपयोग का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कागजों पर चल रहे फर्जी मदरसों और संस्थाओं की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के चल रहे संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता अविलंब बंद होनी चाहिए और उस राशि का उपयोग सही स्कूलों के विकास में किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/danish-iqbals-big-statement-said-assistance-amount-to-madrassas/article-155736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/madarse.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर सिर्फ कागज पर चल रहे मदरसों की जांच कर उनकी सहायता अविलंब बंद कर देनी चाहिए। इकबाल ने बयान जारी कर कहा कि सरकार यदि इस तरह के कागजी मदरसों की जांच करवाती है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में बिना बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बहुत से मदरसे चलाये जा रहे हैं और इस क्रम में सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कागजी संस्थान फर्जीवाड़े की श्रेणी में आते हैं और उनका खुलासा करते हुए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि उनका वक्तव्य केवल मदरसों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी बहुत सी संस्थाएं चलाई जा रही हैं, जो सरकारी पैसे के दुरुपयोग के लिए कागजों पर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी सभी संस्थाओं की जांच करनी चाहिए और उनकी सहायता बंद कर सुरक्षित की गई राशि का उपयोग सही ढंग से संचालित स्कूलों में बच्चों के भविष्य निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों में करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:36:24 +0530</pubDate>
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