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                <title>allocation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की बड़ी अपील, 5 साल तक के हर बच्चे को जरूर पिलाएं पोलियो की दो बूंद</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने नागौर के खींवसर से पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया। नागौर जिले में 2,38,941 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य है। जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने ताऊसर में शुरुआत की। बूथ दिवस के बाद छूटे बच्चों के लिए घर-घर दवा पिलाई जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-minister-gajendra-singh-khinvsars-big-appeal-give-two-drops/article-158304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(5).png" alt=""></a><br /><p>नागौर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि "पोलियो मुक्त भारत हमारी बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। खींवसर रविवार को अभियान की शुरुआत नागौर जिले के खींवसर के पुराना पंचायत भवन से बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाकर की। इस अवसर पर विधायक रेवंत राम डांगा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।</p>
<p>खींवसर ने अभिभावकों से पांच वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद अवश्य पिलाने की अपील करते हुए कहा कि जनसहयोग से ही अभियान शत-प्रतिशत सफल होगा। वहीं इस अभियान का जिला स्तरीय शुभारंभ राजकीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर, ताऊसर में जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाकर किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की दवा पहुंचाना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा अभिभावक अपने बच्चों को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाकर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें।</p>
<p>डॉ. सैनी ने बताया कि जिले में पांच वर्ष आयु वर्ग के 2 लाख 38 हजार 941 बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले में 1,629 पोलियो बूथ, 69 ट्रांजिट टीम, 158 मोबाइल टीम, 7,883 टीकाकर्मी तथा 256 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेश वर्मा ने बताया कि अभियान के लिए करीब 3.50 लाख वैक्सीन डोज, 17,500 वायल एवं 111 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। बूथ दिवस के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलायेगी ताकि जिले का कोई भी बच्चा इस जीवनरक्षक खुराक से वंचित न रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>20 साल पुराने यूरोपीय प्रोजेक्ट पर 2023 से खर्च शून्य: जल सुधार की रिपोर्ट गौण ; 450 करोड़ का यूरोपीय संघ जल सुधार कार्यक्रम, कितनी बदली राजस्थान की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल प्रबंधन के लिए शुरू हुई 450 करोड़ की यूरोपीय संघ परियोजना सवालों के घेरे में है। 415.66 करोड़ रुपये खर्च होने और जल नीति-2010 जैसी उपलब्धियों के बावजूद, पिछले तीन वर्षों (2023-26) से व्यय शून्य बना हुआ है। विशेषज्ञ जमीनी स्तर पर इसके वास्तविक प्रभाव और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/zero-expenditure-on-20-year-old-european-project-from-2023/article-157627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। राजस्थान में जल प्रबंधन सुधार और भूजल संरक्षण के लिए वर्ष 2006 में शुरू किया गया यूरोपीय संघ (यूरोपियन यूनियन) समर्थित स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी)द्ध एक बार फिर चर्चा में है। करीब 450 करोड़ की परियोजना को जल क्षेत्र में सुधार की बड़ी पहल बताया गया, लेकिन उपलब्ध आंकड़े से भारी निवेश के बावजूद इसके वास्तविक प्रभाव और वर्तमान स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यूरोपीय संघ ने इस परियोजना के लिए 80 मिलियन यूरो (करीब 450 करोड़ रुपए) का अनुदान स्वीकृत किया था। अब तक 61.675 मिलियन यूरो 418.83 करोड़ रुपए) जारी किए जा चुके हैं, जबकि 31 मई 2026 तक कुल खर्च 415.66 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>11 जिलों की 3,182 ग्राम पंचायतें शामिल</strong></div>
<div> </div>
<div>परियोजना का उद्देश्य राज्य में जल क्षेत्र सुधार, भूजल संरक्षण, सुरक्षित पेयजल उपलब्धता और पंचायतों की भागीदारी को मजबूत करना था। इसके तहत 11 जिलों की 82 पंचायत समितियों और 3182 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि परियोजना पर 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। वित्तीय प्रगति रिपोर्ट में लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य दर्शाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना के तहत तैयार किए गए जल प्रबंधन मॉडल इतने सफल रहे, तो फिर उनके विस्तार और रखरखाव पर खर्च क्यों नहीं हुआ? वहीं सरकारी दस्तावेज परियोजना की उपलब्धियों में जल नीति-2010, एक्विफर मैपिंग, जल जागरूकता अभियान, नदी बेसिन प्राधिकरण गठन और 14 अंतर.बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी को प्रमुख उपलब्धि बताते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>उठते सवाल...</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>450 करोड़ की परियोजना के बावजूद जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थिति कितनी बदली, इसका स्पष्ट मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं।</li>
<li>2023-24 से लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य रहना परियोजना की सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।</li>
<li>कई उपलब्धियां अध्ययन, कार्यशाला और योजनाओं तक सीमित दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी प्रभाव के आंकड़े सीमित हैं।</li>
<li>14 जलांतरण योजनाएं बनीं, लेकिन कितनी लागू हुईं, इसका उल्लेख नहीं है।</li>
<li>परियोजना समाप्ति के बाद बनाए गए ढांचे और संस्थाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।</li>
</ul>
</div>
<div><strong>परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>राज्य जल नीति-2010 लागू</li>
<li>3182 ग्राम पंचायतों में जल प्रबंधन योजनाएं तैयार</li>
<li>79,550 लोगों को प्रशिक्षण</li>
<li>भूजल एक्विफर मैपिंग और गुगल आधारित डेटा तैयार</li>
<li>जल चेतना यात्रा, जल मेला और जनजागरूकता अभियान</li>
<li>14 अंतर-बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी</li>
<li>जल कानूनों के सामंजस्य की पहल</li>
</ul>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:36:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम सतीशन ने पेश किया संशोधित बजट, 'मिशन समुद्र' और वित्तीय सुदृढ़ीकरण से बनेगा 'नया केरल'</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने केरल का संशोधित बजट पेश किया। इसमें ₹400 करोड़ की 'मिशन समुद्र' योजना मुख्य आकर्षण है, जो तटीय विकास और विझिनजम में जहाज निर्माण को बढ़ावा देगी। आर्थिक चुनौतियों के बीच बजट में 'इंदिरा गारंटी' वादों को पूरा करने और वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-satheesan-presented-the-revised-budget-announced-mission-samudra-put/article-157425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/vd-satishanan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने शुक्रवार को विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित बजट पेश किया। इसमें संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने अवसरंचना के विकास, वित्तीय सुदृढ़ीकरण और जन-कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के जरिए एक 'नये केरल' के निर्माण की रूपरेखा सामने रखी है। वित्त मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे सतीशन द्वारा पेश इस बजट की मुख्य विशेषता 'मिशन समुद्र' की घोषणा रही। यह एक महत्वाकांक्षी समुद्री विकास कार्यक्रम है, जिसके लिए 400 करोड़ रुपये की राशि तय की गयी है। इस योजना का उद्देश्य केरल के समुद्र तट, बंदरगाहों और आंतरिक जलमार्गों को आपस में जोड़ना है, ताकि सड़क, समुद्र और जल परिवहन का एक सुगम और एकीकृत तंत्र बनाया जा सके।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का लक्ष्य केरल को एक बड़ा समुद्री केंद्र बनाना है। इसके तहत विझिनजम में जहाज निर्माण की सुविधा भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका बेहतर होगी। इस समुद्री कार्ययोजना के तहत सरकार कोल्लम, बेपोर और अझिक्कल बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करेगी, एक व्यापक समुद्री नीति तैयार करेगी और एक समुद्री संग्रहालय स्थापित करेगी, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गये हैं।</p>
<p>संशोधित बजट पेश करते हुए सतीशन ने कहा कि सरकार सुशासन और संवेदनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित 'नये केरल' के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण के काम साथ-साथ आगे बढ़ सकें। चूंकि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्ण बजट पहले ही पारित कर चुकी थी, इसलिए नयी चुनी गयी सरकार ने अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाते हुए यह संशोधित बजट पेश किया है।</p>
<p>इस बजट को पेश करने के साथ ही सीएम सतीशन, आर. शंकर और ओमान चांडी के बाद राज्य का बजट खुद पेश करने वाले केरल के तीसरे मुख्यमंत्री बन गये हैं। यह बजट सरकार द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करने के ठीक दो सप्ताह बाद आया है। केरल की वित्तीय स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राशि में 20,500 करोड़ रुपये की कमी आयी है, जबकि आगामी वेतन संशोधन से कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा।</p>
<p>सीएम सतीशन ने कहा कि इन आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने 'इंदिरा गारंटी' के कई वादों को पूरा कर दिया है, जिसमें राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि शामिल है। बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए केरल अवसंरचना निवेश कोष बोर्ड (किफबी) के पुनर्गठन, अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने, कर चोरी रोकने, बकाया राशि वसूलने और खर्चों को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दी गयी है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरकार केरल के भीतर ही उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए व्यापक कार्यक्रम शुरू करेगी, ताकि उन कुशल युवाओं को राज्य में ही रोका जा सके जो नौकरियों के लिए विदेशों की ओर रुख करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;पीएम‑किसान&quot; के तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में पहुंचेंगे लगभग 18,880 करोड़ : शिवराज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल से पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत 9.44 करोड़ किसानों के खातों में राशि भेजी जाएगी। साथ ही, वे डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ग्रामीण सड़कों और मत्स्य बंदरगाह सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/under-pm-kisan-approximately-rs-18880-crore-will-reach-the-accounts/article-157383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/shivraj-singh-chouhan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले से कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, राष्ट्र को समर्पण एवं शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम‑किसान) की 23वीं किस्त जारी करने के साथ‑साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन तथा प्रधानमंत्री धन‑धान्य कृषि योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य आतिथ्य में पश्चिम बंगाल में होने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण समुदाय और युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार का संकल्प है कि पूर्वी भारत को कृषि, बुनियादी संरचना और औद्योगिक विकास का मजबूत केंद्र बनाया जाए और 20 जून का कार्यक्रम इसी विज़न को ज़मीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है।</p>
<p>चौहान ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी हुगली ज़िले के तारकेश्वर से "पीएम‑किसान" की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके अंतर्गत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों की आय सुरक्षा और मज़बूत होगी। उन्होंने बताया कि केवल पश्चिम बंगाल में ही 45.35 लाख से अधिक लाभार्थी किसानों को लगभग 907 करोड़ रु. की किश्त प्राप्त होगी। इसके साथ ही राज्य में पीएम‑किसान योजना के अंतर्गत अब तक वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रु. से अधिक हो जाएगी, जबकि 2019 में योजना की शुरुआत से लेकर पूरे देश में कुल वितरण 4.46 लाख करोड़ रु. से ऊपर पहुंच जाएगा।</p>
<p>कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का भी शुभारंभ करेंगे, जिनकी संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रु. है। वित्त वर्ष 2026‑27 के दौरान इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत लगभग 28,140 करोड़ रु. मूल्य की फसलें बीमा संरक्षण के दायरे में आएंगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री मोदी एग्रीटेक प्लेटफॉर्म की शुरुआत करेंगे, जो उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित सरकारी खरीद जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराएगा। इससे किसानों को समय पर सूचनाएं, पारदर्शी सेवाएं और बेहतर बाज़ार अवसर मिलेंगे। चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का भी शुभारंभ करेंगे, जिसके तहत अनुमोदित कार्ययोजना के अनुसार वित्त वर्ष 2026‑27 में राज्य के 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। इन क्लस्टरों से 43,250 किसानों को जैव‑आधारित इनपुट, प्रशिक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच का लाभ मिलेगा, साथ ही जैव‑आधारित संसाधन केंद्रों और कृषि सखियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती की दिशा में बड़े पैमाने पर परिवर्तन को प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p>इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी धन‑धान्य कृषि योजना की भी शुरुआत करेंगे, जो पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झारग्राम ज़िलों में लागू होगी। इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, भंडारण एवं प्रसंस्करण जैसी फसलोत्तर अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर पैदा होंगे।</p>
<p>ग्रामीण विकास से संबंधित पहलों की जानकारी देते हुए चौहान ने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (तीन) के अंतर्गत 213 करोड़ रु. से अधिक लागत वाली 49 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। 315 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाली ये सड़कें राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों को कस्बों और शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिससे किसानों के कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक पहुंच सकेंगे और ग्रामीण छात्रों तथा मरीजों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच भी आसान होगी।</p>
<p>मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास को पर उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री दक्षिण 24 परगना ज़िले के फ्रेजरगंज में आधुनिकीकरण एवं विस्तार के बाद तैयार मत्स्य बंदरगाह और बीरभूम ज़िले में निर्मित आधुनिक मत्स्य बाज़ार का उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं से मत्स्य अवसंरचना मजबूत होगी, मछुआरों को बेहतर भंडारण एवं विपणन सुविधाएं मिलेंगी और निर्यात क्षमता में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर तैयार होंगे।</p>
<p>पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रधानमंत्री नादिया ज़िले के हरिणघाटा में 6 करोड़ रु. से अधिक लागत से स्थापित रीजनल सीमन प्रोडक्शन लैबोरेटरी एवं बकरी सीमन बैंक का उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत स्थापित यह पूर्वी भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा है, जो वैज्ञानिक पशु प्रजनन, आनुवंशिक सुधार और पशुधन उत्पादकता वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाएगी तथा बकरी पालन से जुड़े किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।</p>
<p>चौहान ने कहा कि मत्स्य, पशुपालन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी ये सभी योजनाएं मिलकर पश्चिम बंगाल में समावेशी और टिकाऊ ग्रामीण विकास का मज़बूत आधार तैयार करेंगी। इनके माध्यम से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बेहतर आजीविका अवसर और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को ठोस बल मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में लगभग 591 करोड़ रु. की लागत वाली महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे। ये परियोजनाएं रेल ढांचा को सुदृढ़ करने, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, सुरक्षा बढ़ाने और राज्य व पूर्वी भारत के संपर्क को और मज़बूत बनाने की दिशा में अहम योगदान देंगी। प्रधानमंत्री हावड़ा में 99 करोड़ रु. की लागत से बनने वाले 300 बिस्तरों वाले नए मंडलीय रेलवे अस्पताल का शिलान्यास करेंगे, जो आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना, उन्नत जांच सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन उपचार से सुसज्जित होगा। यह अस्पताल न केवल रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों, बल्कि आसपास के नागरिकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>इसी तरह, पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में हाउर और राधामोहनपुर के बीच 71 करोड़ रु. की लागत से बनने वाले रोड ओवर ब्रिज का शिलान्यास किया जाएगा, जो रेल और सड़क दोनों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने के साथ‑साथ निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, हावड़ा ज़िले में 421 करोड़ रु. की लागत से विकसित सांकराइल‑सांतरागाछी थर्ड लाइन प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा, जिससे देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में से एक पर रैकिंग में कमी, परिचालन क्षमता में वृद्धि और यात्री तथा मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी। ये सभी रेल परियोजनाएं माल एवं यात्री परिवहन को तेज और सुरक्षित बनाने के साथ‑साथ औद्योगिक निवेश, पर्यटन और लॉजिस्टिक क्षेत्र के विकास को नयी गति देंगी। इससे पूर्वी भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल के लिए 'गति‑शक्ति' की भावना और मज़बूत होगी तथा रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसरों में वृद्धि होगी।त्र</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:10:40 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली : LG ने दी पुनर्वास नीति-2026 को मंजूरी, हजारों परिवारों को मिलेगा स्थायी आशियाना</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के उपराज्यपाल ने 'झुग्गी पुनर्वास नीति-2026' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत डीडीए (DDA) और डूसिब (DUSIB) अगले 45 दिनों में पांच जेजे क्लस्टरों के लिए टेंडर जारी करेंगे। योजना के तहत झुग्गीवासियों को आधुनिक आवास के साथ स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/good-news-for-slum-dwellers-in-delhi-lg-approves-rehabilitation/article-157261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/d-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को कहा कि दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 'दिल्ली स्लम एवं जेजे क्लस्टर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2026' को मंजूरी दी गयी है। संधू ने एक्स पर आज इसकी जानकारी देते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पहल को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) अगले 45 दिनों के भीतर पांच जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास के लिए टेंडर जारी करेंगे। यह योजना के पहले चरण का हिस्सा होगा और इसके जरिए झुग्गीवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। उपराज्यपाल ने कहा कि पहले चरण के बाद हर महीने कम से कम पांच नए टेंडर जारी किए जायेंगे, ताकि पुनर्वास कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सके। इससे राजधानी की विभिन्न झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। </p>
<p>इन पुनर्वास परियोजनाओं में आधुनिक आवासों के साथ स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और अन्य आवश्यक सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी। यह नीति न केवल वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करेगी, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और नियोजित शहरी विकास को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ 'विकसित दिल्ली' के लक्ष्य , को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राजधानी के भविष्य-केंद्रित शहरी विकास को नयी दिशा देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:27:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>गाज़ा शांति रोडमैप योजना : हमास ने फ़िलिस्तीनी गुटों का जवाब संयुक्त राष्ट्र को सौंपा, ट्रंप योजना पर दिया सकारात्मक जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों ने गाजा शांति रोडमैप पर अपनी संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र को सौंप दी है। काहिरा बैठक के बाद तैयार इस रुख में मानवीय सहायता, सैन्य कार्रवाई रोकने, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा पुनर्निर्माण को पहले चरण में पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उसने गाजा शांति रोडमैप योजना पर फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव को सौंप दी है। हमास ने यमन की मीडिया को जारी बयान में कहा कि पिछले सप्ताह काहिरा में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों की मौजूदगी में विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद एक साझा राष्ट्रीय रुख तैयार किया गया, जिसे एक दिन पहले औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया।</p>
<p>हमास ने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों ने इस रोडमैप को "जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच" के साथ देखा है। संगठन के अनुसार सभी गुटों ने इस बात पर जोर दिया कि योजना के पहले चरण को पूरी तरह लागू किया जाए, खासकर मानवीय सहायता व्यवस्था और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को लागू करने संबंधी रोडमैप पर गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया। उन्होंने पहले चरण के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से मानवीय सहायता और गाजा में सभी तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को समाप्त करने के मुद्दे पर।"</p>
<p>हमास ने कहा कि गुटों ने रोडमैप में शामिल अन्य बिंदुओं पर भी अमल की मांग की है। इनमें प्रशासनिक समिति की तैनाती, गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया शामिल है। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोडमैप में उल्लिखित प्रशासनिक समिति के प्रवेश, गाजा पट्टी से पूर्ण इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि फिलिस्तीनी जनता अपने राज्य की स्थापना और आत्मनिर्णय के अधिकार के लक्ष्य को हासिल कर सके।"</p>
<p>हमास ने बताया कि उसका प्रतिनिधिमंडल काहिरा में मध्यस्थों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ आगे भी बैठकें जारी रखेगा, ताकि सहमति वाले बिंदुओं को लागू करने की दिशा में प्रगति हो सके। उल्लेखनीय है कि निकोलाय म्लादेनोव ने मई में "राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक गाजा शांति योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए रोडमैप" सार्वजनिक किया था। 15 बिंदुओं वाली इस योजना में सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती, इजरायली सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम समझौते के तहत शुरुआती चरण में कैदियों की अदला-बदली, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति और कुछ इलाकों से इजरायली सैनिकों की आंशिक वापसी शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:39 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी पहल: 'जन कल्याण शिविर' की शुरूआत, इन योजनाओं का मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने 'जन कल्याण शिविर' कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित इन विशेष शिविरों में आयुष्मान भारत, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, भूमि सुधार और किसान निधि जैसी कई केंद्रीय व राज्य कल्याणकारी योजनाओं के आवेदन एक ही छत के नीचे सीधे स्वीकार किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-initiative-of-west-bengal-government-launch-of-jan-kalyan/article-157011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/suvendu-adhikari.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान और सुलभ बनाने के उद्देश्य से सोमवार से राज्यव्यापी 'जन कल्याण शिविर' कार्यक्रम शुरू कर रही है। यह पहल पिछली सरकार के 'द्वारे सरकार' जनसंपर्क कार्यक्रम से मिलती-जुलती है। इसका उद्देश्य कई कल्याणकारी योजनाओं, जागरूकता अभियानों और आवेदन की सुविधाओं को एक ही छत के नीचे लाना है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, आज से बुधवार तक राज्य भर में जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर उन लोगों को सीधे आवेदन करने की सुविधा देंगे, जो अब तक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाए हैं। आवेदन जमा करने और शुरुआती जांच को आसान बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, ताकि काम में देरी न हो और लोग जानकारी के अभाव के कारण सरकारी लाभों से वंचित न रहें।</p>
<p>शिविरों में कई केंद्रीय और राज्य योजनाओं के आवेदन स्वीकार किये जायंगे। इनमें आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, पहचान पत्र (आधार) नामांकन व लिंक करना और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत आवेदन शामिल हैं। इसके अलावा जमीन से जुड़ी सेवाएं जैसे दाखिल-खारिज, भूमि रिकॉर्ड में छोटे-मोटे सुधार और पट्टा के आवेदन भी उपलब्ध होंगे। इन शिविरों में ई-श्रम, पीएम श्रम योगी मानधन, मुफ्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना के आवेदनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। लाभार्थी अन्नपूर्णा योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, सुकन्या समृद्धि योजना, कन्याश्री और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>किसानों के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि अवसंरचना कोष के आवेदन लिए जाएंगे। पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, जिनमें प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, शिक्षाश्री, मेधाश्री और तपशिल बंधु शामिल हैं, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय समावेशन योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री जन धन योजना, पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना भी उपलब्ध होंगी।</p>
<p>मछुआरों के लिए पीएम मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना-प्रथम, पीएम उज्ज्वला योजना, एकीकृत बागवानी विकास मिशन और पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग औपचारिक रूप देने की योजना के लिए भी आवेदन जमा किए जा सकते हैं। इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें बुनियादी ढांचे, जागरूकता अभियानों, आवेदन प्रणाली और अंतर-विभागीय समन्वय सहित सभी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए रविवार को ही अपने-अपने जिलों में पहुंचने के निर्देश दिए गए थे।</p>
<p>प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के तहत, अधिकारियों को आज और कल (मंगलवार) को अधिक से अधिक शिविरों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर बुधवार को भी निरीक्षण जारी रहेगा। वे शिविरों में आने वाले नागरिकों के अनुभव, आवेदन प्रसंस्करण की गति और दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करेंगे। राज्य सरकार को उम्मीद है कि जन कल्याण शिविर कार्यक्रम न केवल सरकारी सेवाओं को जनता के करीब लाएगा, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच के जुड़ाव को भी मजबूत करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>माइंडमाइन सम्मेलन 2026 : सीतारमण ने कहा- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग से मिल रहा अर्थव्यवस्था को समर्थन, वित्त मंत्री ने जताई स्थिरता की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'माइंडमाइन सम्मेलन 2026' में कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। मानसून और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है तथा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए आरबीआई के साथ रणनीतिक उपाय किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/mindmine-conference-2026-sitharaman-said-domestic-demand-is-supporting-the/article-156999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nirmala-sitharaman.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि इस समय वैश्विक स्तर पर व्यापार और आपूर्ति को लेकर कई प्रकार की अनिश्चतताएं भारतीय अर्थव्यस्था के लिए चुनौती पेश कर रही हैं, हालांकि घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है। सीतारमण ने यहां "माइंडमाइन सम्मेलन 2026" के एक संवाद सत्र के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यापार में काफी अनिश्चितताएं हैं। हमारा निर्यात मजबूत है लेकिन अचानक आयात शुल्क बढ़ा दिया जाता है। हम जिन तीन वस्तुओं का सबसे अधिक आयात करते हैं उनकी कीमत और आपूर्ति दोनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके लिए विदेशी मुद्रा का भंडार मजबूत होना चाहिये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन सबके बीच भारत के लिए राहत की बात हमारा घरेलू बाजार है, जो काफी बड़ा है। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि विनिर्माताओं के समक्ष आयातित कच्चे माल की ऊंची कीमत की चुनौती भी है। घरेलू स्तर पर मानसून की चुनौती को लेकर उन्होंने कहा कि इस बार अल-नीनो प्रभाव के कारण कम बारिश होने का अनुमान है। देश के पास अनाज का काफी बफर भंडार है, इसलिए खाद्यान्न की कमी जैसी स्थिति तो नहीं होगी, लेकिन किसानों की आमदनी पर कम मानसून का असर जरूर होगा। उर्वरकों की कमी के बारे में उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी सत्र को लेकर चिंता थी लेकिन अब चीन से उर्वरक आने से वह चिंता भी दूर हो गयी है।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और उससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर विदेशी मुद्रा जुटाने के उपाय किये हैं। बॉन्ड बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। साथ ही बैंकों और सार्वजनिक कंपनियों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति दी गयी है और इसके लिए जोखिम को कम करने की रणनीति की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक उठायेगा। इससे बैंक विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:16:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 18 आईएएस अधिकारियों के तबादले</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 18 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। खाद्य, परिवहन, खेल और महिला विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नए सचिव नियुक्त हुए हैं। अधिसूचना के अनुसार, रवि इंदर सिंह को परिवहन और जगदीश प्रसाद मीना को खाद्य विभाग की कमान सौंपी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/major-administrative-reshuffle-in-west-bengal-18-ias-officers-transferred/article-156568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ias-transfer.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने 18 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नये प्रभार सौंपे हैं। यह फेरबदल खाद्य एवं आपूर्ति, परिवहन, भूमि एवं भूमि सुधार, महिला एवं बाल विकास, सिंचाई, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई) सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में किया गया है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू कर दिये गये हैं।</p>
<p>इन प्रमुख बदलावों में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य-सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे जगदीश प्रसाद मीना (पश्चिम बंगाल कैडर 2004) को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार विभाग के प्रधान सचिव तथा उपभोक्ता मामलों का प्रभार संभाल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रवि इंदर सिंह (पश्चिम बंगाल कैडर 1994) को सुरेंद्र गुप्ता के स्थान पर परिवहन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है।</p>
<p>वर्तमान में प्रेसीडेंसी डिवीजन के संभागीय आयुक्त तथा परिवहन विभाग का प्रभार संभाल रहे सुरेंद्र गुप्ता (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को भूमि एवं भूमि सुधार और शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। सौमित्र मोहन (पश्चिम बंगाल कैडर 2002) पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के सचिव पद पर बने रहेंगे और उन्हें अतिरिक्त रूप से सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव का प्रभार सौंपा गया है।</p>
<p>इसी तरह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव रहे परवेज़ अहमद सिद्दीकी (पश्चिम बंगाल कैडर 1999) को राज्य गजेटियर का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। जलपाईगुड़ी डिवीजन के संभागीय आयुक्त अनूप कुमार अग्रवाल (पश्चिम बंगाल कैडर 1993) को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और वस्त्र विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।<br />पश्चिम बंगाल नेताजी सुभाष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एनएसएटीआई) के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत रहीं मौमिता गोदारा बसु (पश्चिम बंगाल कैडर 2007) को महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।</p>
<p>वर्तमान में भूमि रिकॉर्ड और सर्वेक्षण के निदेशक रणधीर कुमार (पश्चिम बंगाल कैडर 2006) उनकी जगह लेंगे और उनके पास वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और वस्त्र विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार का प्रभार संभाल रहे राजेश पांडेय (पश्चिम बंगाल कैडर 1995) को युवा सेवा एवं खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर स्थानांतरित किया गया है।</p>
<p>अन्य तबादलों में पश्चिम बंगाल लघु उद्योग विकास निगम (डब्ल्यूबीएसआईडीसी) की प्रबंध निदेशक आर विमला (पश्चिम बंगाल कैडर 2010) को उत्तर बंगाल विकास विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) की निदेशक रचना भगत (पश्चिम बंगाल कैडर 2009) को श्रम विभाग का सचिव बनाया गया है और उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग में सचिव रहीं मुक्ता आर्य (पश्चिम बंगाल कैडर 2008) को सुंदरवन मामलों के विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है।</p>
<p>नयी दिल्ली में प्रधान स्थानीय आयुक्त दुष्यंत नारियाला (पश्चिम बंगाल कैडर : 1993) राष्ट्रीय राजधानी में ही बने रहेंगे और उन्हें एनएसएटीआई के महानिदेशक तथा एसएनटीसीएसएससी के अध्यक्ष की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में विकास कार्यों की प्रधान समन्वयक नंदिनी चक्रवर्ती (पश्चिम बंगाल कैडर 1994) को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, साथ ही उनके पास आवास विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। परिवहन विभाग में विशेष सचिव राजू मिश्रा (पश्चिम बंगाल कैडर 2015) को आबकारी आयुक्त नियुक्त किया गया है। आवास, युवा सेवा एवं खेल, आपदा प्रबंधन और पशु संसाधन विकास सहित कई विभागों का कार्यभार संभाल रहे राजेश कुमार सिन्हा (पश्चिम बंगाल कैडर 1997) को सिंचाई और जलमार्ग विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। नीलम मीना (पश्चिम बंगाल कैडर 1998) पश्चिम बंगाल की मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के पद पर बनी रहेंगी और उन्हें पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:54:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों का बड़ा फैसला : चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी, 5 जुलाई को होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूएई के बाहर होने के बावजूद ओपेक के 7 प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सदस्य देश जुलाई 2026 से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएंगे। बाजार स्थिरता के लिए दिसंबर 2026 तक का नया शेड्यूल तय किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-opec-countries-amid-hormuz-crisis-approval-to/article-156308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/opecc.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव और कई सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद ओपेक के सात प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक समूह के अनुसार सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की तथा उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि अप्रैल 2023 में घोषित अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के तहत 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि जुलाई 2026 से लागू की जाएगी। समूह ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इन स्वैच्छिक कटौतियों को आंशिक या पूर्ण रूप से वापस लिया जा सकता है। सदस्य देश वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार उत्पादन बढ़ाने, रोकने या वापस घटाने का निर्णय ले सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया कि नवंबर 2023 में लागू उत्पादन समायोजन सहित सभी व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। सदस्य देशों ने कहा कि यह कदम उन देशों को भी मदद करेगा जिन्होंने पहले निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन किया था और अब उसकी भरपाई करनी है। समूह ने 'डिक्लेरेशन ऑफ कोऑपरेशन' (सहयोग घोषणा) के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उत्पादन अनुपालन की निगरानी संयुक्त मंत्रिस्तरीय निगरानी समिति (जेएमएमसी) द्वारा जारी रहेगी।</p>
<p>सदस्य देशों ने यह भी पुष्टि की कि जनवरी 2024 से हुई अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई पूरी तरह की जाएगी और इसके लिए निर्धारित अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। ओपेक समूह ने बाजार की स्थिति, उत्पादन अनुपालन और भरपाई व्यवस्था की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। अगली बैठक 5 जुलाई 2026 को होगी। इस बीच, लगभग छह दशक तक सदस्य रहने के बाद संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने संगठन के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:04:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा, लेकिन दाल-तेल और सब्जियों की महंगाई से परिवारों का रसोई-बजट अब भी संकट में</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राजस्थान में 28.14 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं। प्राथमिकता परिवारों को 5 किलो और अंत्योदय को 35 किलो गेहूं मिल रहा है। हालांकि, अनिवार्य ई-केवाईसी और तकनीकी खामियों के कारण राशन रुकने का संकट है, जिसे सुधारने और गेहूं के साथ दाल-तेल देने की मांग उठ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-food-security-day-scope-of-food-security/article-156236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/food.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। इस हिसाब से पांच सदस्यों के परिवार को 25 किलोग्राम गेहूं उपलब्ध होता है। अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न का अधिकार है। यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गेहूं को संपूर्ण खाद्य सुरक्षा नहीं माना जा सकता। दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान, घरेलू कामगार, विधवा, वृद्ध, दिव्यांग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक की आय अनिश्चित है, जबकि भोजन से जुड़े बाकी खर्च लगातार उसकी जेब पर दबाव डालते हैं।</p>
<p><strong>नाम जुड़ना राहत, कटना पूरे परिवार का संकट</strong></p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार, 26 जनवरी 2025 से एनएफएसए पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28 लाख से अधिक नए नाम योजना में जोड़े गए। यह बड़ी राहत है, लेकिन अब ई-केवाईसी अनिवार्य होने से बुजुर्गों, मजदूरी के लिए बाहर गए प्रवासियों, आदिवासी परिवारों और खराब इंटरनेट वाले ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</p>
<p><strong>तकनीकी खामी अपात्रता का प्रमाण नहीं</strong></p>
<p>अंगुलियों के निशान नहीं मिलने, आधार और जनाधार में नाम अलग होने, मोबाइल नंबर बंद होने या सर्वर खराब होने जैसी तकनीकी समस्याओं को अपात्रता का प्रमाण नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी परिवार का राशन रोकने या नाम हटाने से पहले भौतिक सत्यापन, लिखित सूचना और अपील का पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।</p>
<p>खाद्य विभाग को प्रत्येक उचित मूल्य दुकान का मासिक स्टॉक, वितरण और शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। घटतौली, दुकान बंद मिलने या राशन से वंचित होने की शिकायत का निस्तारण अधिकतम 72 घंटे में हो। वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए घर तक राशन पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ गोदाम से अनाज निकालना नहीं, बल्कि नागरिक की थाली में सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना है। सरकार को गेहूं के साथ दाल, खाद्य तेल और नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की सहायता पर भी विचार करना चाहिए। व्यवस्था की सफलता लाभार्थियों की संख्या से नहीं, इस तथ्य से मापी जाएगी कि राजस्थान में कोई परिवार भूखा सोने को मजबूर न हो।</p>
<p>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्राथमिकता परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम और अंत्योदय परिवारों के लिए प्रति परिवार 35 किलोग्राम मासिक खाद्यान्न का प्रावधान है। राजस्थान सरकार के अनुसार, पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28,14,942 नए नाम जोड़े गए और नए लाभार्थियों के लिए तीन महीने में ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया। फरवरी 2026 में ई-केवाईसी और सूची से नाम हटने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैलजा का केंद्र पर बड़ा हमला: जीडीपी के 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर पहुंची सरकार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र पर जीडीपी से तेज कर्ज बढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 2026 तक देश का कर्ज $214$ लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है, जिससे कर्ज-जीडीपी अनुपात 60% हो गया है। उन्होंने प्रचार के बजाय रोजगार और ग्रामीण विकास पर ध्यान देने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/seljas-big-attack-on-the-center-the-government-reached-debt/article-156101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/selja11.webp" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश को विकास के नाम पर कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, जबकि सरकारी कर्ज उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2008 में भारत की जीडीपी लगभग एक लाख 20 हजार करोड़ डॉलर थी, जो 2026 तक बढ़कर चार लाख 10 हजार करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। केंद्र सरकार का कर्ज 27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 214 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उनके अनुसार, 2014 में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 45 प्रतिशत था, जो अब लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भारी कर्ज लेकर विकास का भ्रम पैदा कर रही है तथा विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और दिखावटी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा रही है जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। लाखों सरकारी पद खाली हैं, नये रोजगार के अवसर सीमित हैं और छोटे-मध्यम उद्योग आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्ज के विरोध में नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग रोजगार सृजन, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाये। उन्होंने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने तथा रोजगार एवं उत्पादन आधारित आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:52:39 +0530</pubDate>
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