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                <title>समुद्री ताकत में इजाफा : नौसेना के बेड़े में शामिल INS दूनागिरी; संशोधक और अग्रय, मोदी बोले - अब आयातक नहीं, निर्माता है भारत</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी ने कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित तीन जहाज —INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय—राष्ट्र को समर्पित किए। पीएम ने भारत के 'ब्लू इकॉनॉमी' विजन और ₹1.8 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन स्तर को छूने की आत्मनिर्भरता की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-increase-in-indias-maritime-power-ins-dunagiri-modifier-and/article-157654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/image-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के लिए तीन स्वदेश निर्मित युद्धक जहाजों को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने यहां के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के लिए स्वदेश निर्मित तीन युद्ध जहाज को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत की समुद्री और रक्षा निर्माण महत्वाकांक्षाओं के एक प्रमुख चालक के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि यह राज्य भारत के पुनरुत्थान में सबसे आगे रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने हुगली नदी का संदर्भ देते हुए कहा कि इस नदी ने इतिहास को बनते देखा है। उद्योग, प्रतिभा और शिल्प कौशल के क्षेत्र में राज्य की ताकत समुद्री आर्थिक विकास के एक नये चरण को गति दे सकती है। उन्होंने कहा, “ बंदरगाहों, उद्योग और समुद्री ढांचे के मामले में राज्य की ताकत ने इसे भारत की तटीय और 'ब्लू इकॉनॉमी' (समुद्री अर्थव्यवस्था) की महत्वाकांक्षाओं में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया है। यह समुद्री निर्माण, रसद और तटीय विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने खुद को दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक से बदलकर अब उन्नत हथियार प्रणालियों के डिजाइन और निर्माण में सक्षम देश के रूप में स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा, “ पहले भारत रक्षा आयात पर बहुत अधिक निर्भर था और इस निर्भरता के कारण हमें रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। सत्ता में आने के बाद, हमने रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुधार शुरू किये। आज भारत आधुनिक हथियार प्रणालियों का डिजाइन और निर्माण कर सकता है।”</p>
<p>पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन, जो 2014 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जो पहले लगभग 700 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है, जिसके तहत भारत 80 से अधिक देशों को हथियार और रक्षा उपकरण आपूर्ति कर रहा है।</p>
<p>एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया कि इन तीन नौसैनिक जहाजों, आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय का निर्माण ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ (जीआरएसई) द्वारा 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्रियों के साथ किया गया है। मोदी के नेतृत्व में आयोजित एक औपचारिक समारोह में इन जहाजों को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्यपाल आर.एन. रवि और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी उपस्थित थे। ये तीनों जहाज अलग-अलग समुद्री भूमिकाएं निभाते हैं। आईएनएस दूनागिरी पांचवां ‘प्रोजेक्ट 17ए’ स्टील्थ फ्रिगेट है और यह सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल तथा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली सहित उन्नत हथियारों से लैस है।</p>
<p>आईएनएस संशोधक चौथा बड़ा सर्वेक्षण जहाज है। इसे तटीय और गहरे पानी के सर्वेक्षणों के लिए तथा रक्षा और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्र विज्ञान और भू-भौतिकीय डेटा एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। तीसरा जहाज, आईएनएस अग्रय, एक पनडुब्बी शिकारी है। यह अर्नाला-श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी युद्धक जहाज है, जो उथले पानी में दुश्मनों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार प्रणालियों से लैस है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि इन तीन जहाजों का नौसेना में शामिल होना भारत के निर्माण कार्यक्रम में नयी गति को दर्शाता है और स्वदेशी जहाज निर्माण में बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा, “ आज इस ऐतिहासिक अवसर पर, मैं जीआरएसई की समर्पित टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं अपने उद्योग भागीदारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके सहयोग ने इस सफलता को संभव बनाया है।” नौसेना प्रमुख ने कहा, “ पिछले वर्ष मुंबई में प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्र भारत के पहले तीन जहाजों के समर्पण के ठीक 17 महीने बाद कोलकाता में आयोजित यह दूसरा समारोह, भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं में आधुनिकता, आत्मनिर्भरता और बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।” एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि इन परियोजनाओं ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन पहलों में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल रहे, जिससे बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 16:53:53 +0530</pubDate>
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