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                <title>लहसुन के गिरते दामों ने तोड़ी किसानों की कमर  : लागत भी नहीं निकल पा रही, दीपावली से पहले गहराया संकट </title>
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                        <![CDATA[ पिछले वर्ष लहसुन के भाव 30 से 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल थे, इस बार 4 से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/farmers-moralfalling-garlic-prices-have-demoralized-farmers--making-it-difficult-to-recover-costse-broken-due-to-falling-garlic-price-difficult-to/article-129536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1).png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर में दीपावली पर जरूरत के चलते किसानों ने घरों और खलिहानों में रखी लहसुन की उपज अब मंडियों में बेचना शुरू कर दिया है, लेकिन भाव में गिरावट से किसानों को यही भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि लहसुन हमेशा संकट के समय सहारा बनती रही, मगर इस बार फसल घाटे का कारण बन गई है।  पिछले वर्ष जहाँ लहसुन 30 से 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिकी थी, वहीं इस बार दाम घटकर केवल 4 से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। मार्च माह में ही मंडियों में आवक शुरू हो गई थी, पर अधिकांश किसानों ने पिछले साल की तरह भाव बढ़ने की उम्मीद में उपज रोक ली। </p>
<p>जून में समय से पहले बारिश आने से लहसुन घरों में ही पड़ी रह गई। बाद में धूप निकलने पर सफाई और पैकिंग में देरी हुई, जिससे माल देर से मंडी पहुंचा। किसानों ने बताया कि अच्छे दाम की आस में लहसुन को भंडारित किया, लेकिन भाव बढ़ने के बजाय लगातार घटते चले गए, ऊपर से सूखने के कारण अब पैसों की जरूरत के चलते किसानों को मजबूरन कम दामों पर ही उपज बेचनी पड़ रही है। किसानों का कहना उम्मीद थी कि इस बार भी लहसून का भाव बढ़ेगा, लेकिन जो मिल रहे हैं उनसे तो लागत भी नहीं निकल पा उतना भी वापस नहीं आया।</p>
<p>लहसुन की आवक कम होती है तो भाव अच्छा मिल जाता है और यदि एक साथ बहुत सारी गाड़ियों की आवक होती है तो लहसुन का भाव थोड़ा कम मिलता है इस कारण केंद्र से ही परेशानी आती है।<br />- बालचंद नागर लहसुन व्यापार संघ अध्यक्ष (कृषि उपज मंडी खानपुर)</p>
<p>किसान की जब फसल प्राकृतिक आपदा के चलते खराब हो जाती है तो किसानों को सही समय पर फसल का मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन फसल मुआवजा के लिए भी किसानों को चक्कर काटने पड़ते है, फिलहाल फसल का कम दाम मिलने से किसानों में निराशा है। <br /><strong>- केशव लक्षकार समाजसेवी </strong></p>
<p>लागत के मुकाबले भाव बहुत कम है। मेहनत बेकार चली गई। इस बार तो लहसुन ने नुकसान ही दिया।<br /><strong>- टोनी मीणा, किसान </strong></p>
<p>इस बार किसानों की हालत बेहद खराब है, न तो लहसुन का उचित दाम मिला, न पैदावार ठीक रही। जितना खर्च किया  उतना भी नहीं मिल पाया। <br /><strong>- नरेंद्र मालव,  किसान </strong></p>
<p>खानपुर उपज मंडी में लहसुन का उचित भाव नहीं मिलने पर वे अपनी उपज वापस घर ले आए। लेकिन भाव बहुत कम होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। <br /><strong>- बजरंग लाल मालव किसान </strong></p>
<p>कम दामों में लहसुन बिक रहा है, जिससे उसकी आम आमदनी भी वापस नहीं आ रही हैं।  <br /><strong>- उग्रसेन नागर किसान</strong></p>
<p>हमारा पूरा घर का खर्चा ही कृषि से चलता है और कृषि में हमने जो लहसुन उगाया था तो इस भाव कम होने की वजह से हर किसान परेशान है। लहसुन के दाम कम होने से सारा ही मामला चौपट हो गया।<br /><strong>- अभिषेक वर्मा, किसान  </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:17:05 +0530</pubDate>
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                <title>अतिवृष्टि के साए में करवा चौथ : फसल नुकसान से सुस्त बाजार, सुल्तानपुर में केवल डेढ़ करोड़ का हुआ कारोबार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[फसलें चौपट होने का असर व्यापार पर नजर आया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shopping-was-affected-by-heavy-rains--with-only-1-5-crore-rupees-worth-of-business-on-karva-chauth/article-129373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news38.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। करवा चौथ पर्व पर शुक्रवार को वैसे तो नगर के बाजारों में जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिली। महिलाओं की भीड़ से बाजार गुलजार रहे। पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़ी बाजार की रौनक लौट आई। बर्तन, सोने-चांदी, कपड़ों और परचूनी की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। लेकिन इस बार पर्व पर अतिवृष्टि का भी साया रहा। जिससे क्षेत्र में मात्र डेढ़ करोड़ का ही कारोबार हो सका। जानकारी के अनुसार दीपावली सहित अन्य त्योहार नजदीक आने से बाजारों में विभिन्न वस्तुओं की नई वैरायटी और डिजाइन भी देखने को मिली। हालांकि अतिवृष्टि के कारण सोयाबीन की फसल चौपट होने और किसानों को हुए नुकसान का असर व्यापार पर भी दिखाई दिया। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करवा चौथ पर खरीदारी में कमी देखी गई। व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, करवा चौथ पर्व पर नगर में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का कुल कारोबार हुआ। इसमें टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों की बिक्री से लगभग 85 लाख रुपए का व्यापार हुआ।  टू-व्हीलर विक्रेता अक्षयनामा ने बताया कि नवरात्रों के बाद से ही वाहनों की बुकिंग चल रही थी और करवा चौथ के दिन करीब 70 टू-व्हीलर की बिक्री हुई। जिससे लगभग 50 लाख रुपए का कारोबार हुआ। फोर-व्हीलर सेल्स एक्जीक्यूटिव श्याम दाधिच के अनुसार, करवा चौथ पर लगभग 35 लाख रुपए के चारपहिया वाहन बिके।</p>
<p><strong>महिलाओं ने खरीदीलाल साड़ी व चुनरी</strong><br />कपड़ा व्यापारियों को भी अच्छा कारोबार मिला। महिलाओं द्वारा लाल साड़ियों और चुनरियों की खरीदारी अधिक की गई। जिससे कपड़ा बाजार में करीब 20 लाख रुपए का व्यापार हुआ। कपड़ा व्यापारी सुरेश खंडेलवाल, अजहरुद्दीन खान और रामस्वरूप नाम ने बताया कि लाल रंग की साड़ियां सुहाग का प्रतीक होने के कारण सबसे अधिक बिकती हैं।</p>
<p><strong>सोने व चांदी की नहीं हुई अपेक्षानुरूप बिक्री</strong><br />सोने-चांदी के व्यापारियों को इस बार उम्मीद के अनुरूप बिक्री नहीं मिली। फसल खराब होने और सोने-चांदी के दामों में बढ़ोतरी के चलते खरीदार कम नजर आए। व्यापारी दिनेश अग्रवाल, विकास खंडेलवाल, पवन अग्रवाल और जाकिर सुनार ने बताया कि महिलाओं की रुचि गहनों की खरीद में तो रही, परंतु ऊंचे दामों के कारण बिक्री कमजोर रही।</p>
<p><strong>रेडीमेड व बर्तन की बिक्री ने संभाला बाजार</strong><br />रेडीमेड वस्त्र, जूते-चप्पल और बर्तन व्यापारियों ने भी करवा चौथ पर करीब 15 लाख रुपए का व्यापार कया, जबकि किराना व्यापारियों का कारोबार 25 से 30 लाख रुपए के बीच रहा। कुल मिलाकर अतिवृष्टि के कारण फसल नुकसान से बाजार की रफ्तार भले धीमी रही हो, लेकिन करवा चौथ पर्व ने नगर में एक बार फिर से रौनक लौटा दी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 15:44:21 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती बने सोया हब तो किसानों की बदले तकदीर, सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट व मार्केट की दरकार </title>
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                        <![CDATA[सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-hadoti-becomes-a-soy-hub--the-fortunes-of-farmers-could-change--soybean-processing-units-and-markets-are-needed/article-127688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/111-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र सोयाबीन उत्पादन के लिए पूरे देश में पहचान बना चुका है। हर साल यहां लाखों टन सोयाबीन का उत्पादन होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इस बार भी बंपर उत्पादन के बावजूद किसान औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों का मानना है कि किसानों को इस स्थिति से उबारने के लिए अब हाड़ौती में सोयाबीन आधारित इंडस्ट्री स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर मजबूत मार्केटिंग की व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है। यदि सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है। अब हाड़ौती को सोया हब बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>खेती से सीधे जुड़ेगा आय का साधन:</strong> कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सोया प्रसंस्करण को खेती के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। किसान स्वयं या सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे स्तर पर सोया दूध, टोफू और अन्य उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इससे उन्हें कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा, जिससे लाभ कई गुना बढ़ सकता है। हाड़ौती में सोया आधारित लघु उद्योगों की स्थापना से न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार, एक मध्यम आकार की टोफू यूनिट प्रतिदिन 500 लीटर सोया दूध प्रोसेस कर सकती है, जिससे 50-60 किलो टोफू तैयार होता है। बाजार में इसकी कीमत 200-300 रुपए प्रति किलो तक होती है।</p>
<p><strong>बाजार और ब्रांडिंग की जरूरत</strong><br />प्रगतिशील किसान लक्ष्मीचंद नागर व प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र कुमार का कहना है कि सोया उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय और आॅनलाइन बाजार की व्यवस्था आवश्यक है। किसान उत्पादक कंपनियां और सहकारी समितियां मिलकर ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर सकती हैं। इससे उत्पादों को बेहतर पहचान मिलेगी और उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंच बन सकेगी। हाड़ौती में सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट्स की अपार संभावना है। छोटी यूनिट्स 2-5 करोड़ रुपए की लागत से लग सकती हैं। इसके लिए सरकार को निवेशकों को रियायती जमीन, सस्ती बिजली और बैंक लोन की सुविधा देनी होगी। उन्होंने कहा कि यूनिट्स लगाने से मंडियों पर दबाव कम होगा और किसानों को सीधे फैक्ट्री रेट मिलेगा।</p>
<p><strong>बम्पर उत्पादन फिर भी किसानों को घाटा</strong><br />हाड़ौती में सोयाबीन का उत्पादन हर साल रिकॉर्ड स्तर पर होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का लाभ नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों, व्यापारियों और किसानों की राय एक ही दिशा में इशारा कर रही है कि यदि स्थानीय स्तर पर इंडस्ट्री और मार्केट उपलब्ध कराए जाएं तो हाड़ौती देश का सबसे बड़ा सोयाबीन प्रोसेसिंग हब बन सकता है और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। यहां हर साल यहां लाखों हैक्टेयर में सोयाबीन बोई जाती है और उत्पादन भी लाखों टन तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता। इस बार भी समर्थन मूल्य करीब 4,600 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में सोयाबीन 3,800 से 4,000 रुपए में बिक रही है। किसानों का कहना है कि बंपर उत्पादन के बावजूद कम दाम से उनकी आर्थिक हालत बिगड़ रही है।</p>
<p><strong>सोयाबीन से बनने वाले उत्पाद</strong><br />- सोयाबीन तेल: खाद्य उपयोग का सबसे बड़ा बाजार।<br />- सोया नगेट्स (चंक्स) : शाकाहारी प्रोटीन का सस्ता और लोकप्रिय स्रोत।<br />- सोया दूध व टोफू : स्वास्थ्य व डायट फूड इंडस्ट्री में बढ़ती मांग।<br />- सोया आटा व बेकरी उत्पाद : बिस्किट, ब्रेड व स्नैक्स इंडस्ट्री।<br />- पशु आहार (डी-आॅयल्ड केक) : पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए अहम।<br />- न्यूट्रास्यूटिकल्स व प्रोटीन पाउडर : जिम, फिटनेस व फार्मा बाजार में उपयोगी</p>
<p>सोयाबीन उगाने में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मंडियों में दाम लागत से भी कम मिलते हैं। हमें मजबूरी में फसल बेचनी पड़ती है। अगर हाड़ौती  में सोयाबीन की इंडस्ट्री लगेगी तो हमें सीधे खरीदार मिलेंगे और फायदा होगा।<br /><strong>-रामलाल मीणा, किसान</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन से बने उत्पाद जैसे तेल, सोया चंक्स, पशु आहार और प्रोटीन पाउडर के उत्पादन की बड़ी संभावना है। अगर यहां प्रोसेसिंग यूनिट्स लग जाएं तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।<br /><strong>- डॉ. ए.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ </strong></p>
<p> अभी सोयाबीन को बाहर की फैक्ट्रियों में भेजना पड़ता है। यहां स्थानीय प्रोसेसिंग नहीं होने से किसानों को सही दाम नहीं मिल पाते है। यदि इंडस्ट्री हाड़ौती में ही लग जाए तो परिवहन खर्च बचेगा और किसानों को लाभ मिलेगा<br /><strong>- दिनेश अग्रवाल, मंडी व्यापारी  </strong></p>
<p>सरकार यदि इंडस्ट्री पॉलिसी के तहत टैक्स में छूट और सब्सिडी दे तो यहां सोया आधारित बड़ी-बड़ी यूनिट्स खड़ी हो सकती हैं। इससे कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां सभी जिलों को फायदा होगा। <br /><strong>- पंकज गुप्ता, उद्यमी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 16:43:15 +0530</pubDate>
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                <title>गणेश चतुर्थी पर कोटा जिले में 250 करोड़ का कारोबार!</title>
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                        <![CDATA[ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वैलरी में बंपर खरीदारी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/250-crore-business-in-kota-district-on-ganesh-chaturthi/article-125041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne14ws-(630-x-400-px)-(3).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गणेश चतुर्थी ने इस बार कोटा के बाजारों में सुबह से लेकर देर रात रौनक तक ग्राहकों में उत्साह देखा गया। कई वर्षों बाद बुधवार को आई गणेश चतुर्थी ने कारोबार के नए रिकॉर्ड बनाए। पूरे दिन भर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सोने-चांदी के आभूषणों की ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की।जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा उछाल ऑटोमोबाइल सेक्टर में देखने को मिला, जहां डीलरों ने आकर्षक स्कीम्स और ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को लुभाया। गणेश चतुर्थी के दिन इस बार कारोबार में करीब 250 करोड़ से भी अधिक का कारोबार हुआ है। इस विशेष दिन पर ऑटोमोबाइल बाजार में जबरदस्त बूम देखने को मिला। डीलरों ने ग्राहकों के लिए स्कीम देकर भी आकर्षित किया है। गणेश चतुर्थी के दिन सभी वाहन खरीददरों को गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करवाई। इस बार ग्राहकों को सीएनजी तथा ईवी की गाड़ियों में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। चाहे वो कार हो या बाइक... सभी ने इन गाड़ियों को लेकर काफी आकर्षित हुए।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी परमार्केट अच्छा रहा</strong><br />गणेश चतुर्थी को लेकर इस बार बाजारों में जबरदस्त ग्राहकी देखी गई। इस दौरान ग्राहकों के लिए लुभावने अवसर व स्कीम के तहत छूट भी दी गई। वहीं गणेश चतुर्थी इस बार बुधवार के दिन आने के कारण लोगों मों काफी उत्साह रहा। शोरूम के नितेश जांगिड़, सीएस जाड़ावत व पुष्पेन्द्र मीणा ने अच्छी कारोबार होने की उम्मीद जताई है।</p>
<p><strong>खूब बिकी बजाज की गाड़ियां</strong><br />शोरूम के संचालक विक्रमसिंह राजावत ने बताया कि इस बार बाजार में जबरदस्त बूम है। सुबह से लेकर शाम तक शोरूम में ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ रही। गणेश चतुर्थी के विशेष दिन पर 35 गाड़ी पेट्रोल व 11 ईवी गाड़ियों की बिक्री हुई है। इस दिन करीब 50 लाख से भी अधिक का कारोबार हुआ। यह सीजन ऑटोमोबाइल क्षेत्र के काफी अच्छा है। आगे दशहरा-दीपावली पर ग्राहकी बढ़ने के आसार है।</p>
<p><strong>चतुर्थी पर बाइक लेना शुभ</strong><br /> शोरूम पर बाइक लेने आए महेश कुमार ने बताया कि बहुत सालों बाद गणेश चतुर्थी बुधवार के दिन आई है। इस कारण मैंने गाड़ी इस विशेष दिन पर ही लेना उचित समझा। यहां पर स्कीम में भी अच्छी मिल रही है। मेरा परिवार इस दिन वाहन खरीदने पर बहुत खुश है।</p>
<p><strong>सीएनजी व ईवी वाहनों पर ग्राहकों का रहा रूझान</strong><br />पेट्रोल-डीजल की कीमत में भारी वृद्धि के बाद अब ग्राहकों का सीएनजी व ईवी मॉडल की गाड़ियों की तरफ रुझान बढ़ा हैं। सीएनएजी व ईवी वाहनों पर एडवांस बुकिंग चल रही है। शोरूम मैनेजर विक्रमसिंह राजावत ने कहा कि अभी ईवी व सीएनजी का कारोबार में काफी वृद्धि हुई है। इस कारण लोगों में रूझान बढ़ा है। आगे से गाड़ियों की शॉर्टेज के चलते एडवांस बुकिंग चल रही है। ईवी व सीएनजी की गाड़ी आते ही तुरंत बिक जाती है।</p>
<p><strong>ऑटोमोबाइल में बूम: एक नजर</strong><br />-1000 वाहनों से भी अधिक की ब्रिकी<br />-200 से ज्यादा कारें व 300 बाइक की बिक्री हुई।<br />-80 करोड़ का कारोबार स्वर्ण व चांदी क्षेत्र में हुआ <br />-500 से ज्यादा लोगों को बुकिंग के बावजूद वाहनों की डिलीवरी नहीं मिल पाई।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी पर हुआ 4 करोड़ का कारोबार </strong><br />इस विशेष दिन पर चालीस गाड़ियों की डिलीवरी हुई। लोगों ने इसके लिए 15 दिन पहले से ही बुकिंग करवा रखी है। देर रात तक ग्राहक हमारे पास आते रहे। इस बार बाजार काफी अच्छा है। दशहर-दीपावली को भी काफी बूम आने का आसार है।<br /><strong>- लोकेश जांगीड़, मैनेजर,  टाटा शोरूम</strong></p>
<p>गणेश चतुर्थी को लेकर कारोबार में काफी तेजी आई है। इस बार कई सालों बाद गणेश चतुर्थी बुधवार के दिन आई है। इसको लेकर व्यापारियों में भी उत्साह का माहोल है। सर्राफा बाजार, इेलेक्ट्रोनिक्स बाजार तथा आॅटोमोबाइल क्षेत्र में जबरदस्त कारोबार हुआ है। बाजारों में ग्राहकों के जबरदस्त उत्साह को देखकर आगामी त्योहारों पर भी बूम आने की उम्मीद है।<br /><strong>- अशोक माहेश्वरी,महासचिव, व्यापार संघ</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Aug 2025 15:02:21 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने लगाई रोक, अनाज मंडियों में अब नहीं बिकेगा जहर</title>
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                        <![CDATA[कृषि उपज मंडियों में अब कीटनाशक और पेस्टीसाइड का कारोबार नहीं हो सकेगा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-imposed-ban--poison-will-no-longer-be-sold-in-grain-markets/article-114641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)58.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि उपज मंडियों में अब कीटनाशक और पेस्टीसाइड का कारोबार नहीं हो सकेगा। कृषि विपणन निदेशालय ने कृषि जिंसों के बीच कीटनाशक और पेस्टीसाइड की बिक्री पर रोक लगा दी है। कृषि उपज मंडियों में आने वाले अनाज, दलहन और तिलहन से करोड़ों लोग पेट भरते हैं। इन खाद्य कृषि जिंसों के बीच जहर का भंडारण और बिक्री जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में कृषि विपणन निदेशालय ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए अनाज मंडियों में कीटनाशक और पेस्टीसाइड का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही इस कारोबार के लिए लाइसेंस जारी करने वाले कृषि विभाग को भी पत्र भेजकर लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>मंडियों में सालभर होती है जिंसों की आवक</strong><br />हाड़ौती में भामाशाहमंडी सहित अन्य अनाज मंडियों में साल भर कृषि आवक होती है। सीजन के दौरान तो मंडियों में विभिन्न कृषि जिंसों की बम्पर आवक होती है। इस दौरान खरीदे गए माल को व्यापारियों द्वारा अपने दुकानों में रखा जाता है। मंडियों में कुछ व्यापारियों ने कीटनाशक और पेस्टीसाइड का लाइसेंस  भी ले रखा था। ऐसे में इन दुकानों पर कई बार अनाज के साथ ही कीटनाशक भी रख दिया जाता है। जिससे अनाज के प्रदूषित होने का खतरा हो सकता है। इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद अब निदेशालय ने मंडियों में कीटनाशकों के कारोबार पर रोक लगा दी है।</p>
<p><strong>इसलिए उठाया कदम</strong><br />असल में पिछले कुछ सालों में कृषि विभाग और कृषि उपज मंडी समिति में रहे अधिकारियों से मिलीभगत कर कृषि जिंसों के व्यापार के लिए आवंटित दुकानों में कीटनाशक और पेस्टीसाइड बेचने की दुकानें खोल दी गई। अनाज मंडियों में कृषि जिंसों के भंडारण के लिए बने गोदामों में पेस्टीसाइड व कीटनाशक रखना शुरू कर दिया। कुछ जगह तो एक ही जगह पर कृषि जिंस और पेस्टीसाइड रखे जाने लगे। यह मामला जब कृषि विपणन निदेशालय तक पहुंचा तो अधिकारी हैरान रह गए। निदेशालय ने कृषि जिंसों के बीच इन पदार्थो का कारोबार होने को गम्भीर माना और खाद्य कृषि जिंसों के बीच जहर के कारोबार पर रोक लगाने के लिए मंडी सचिवों को निर्देश जारी किए।</p>
<p><strong>सर्वे कर सूची कृषि विभाग को भेजी</strong><br />कृषि निदेशालय का निर्देश मिलने के बाद कृषि उपज मंडी समिति के सचिवों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अनाज मंडी में अनुमत कृषि जिंसों के अलावा अन्य कोई सामान या पेस्टीसाइड आदि बेचने या दुकानें संचालित करने वालों का सर्वे किया। इस सर्वे की सूची मंडी समिति की ओर से कृषि विभाग को भेजी गई थी। इसके बाद कृषि विभाग की ओर से अनाज मंडियों में नियम विरुद्ध जारी पेस्टीसाइड बेचने के लाइसेंस रद्द करने के लिए सम्बंधित व्यापारियों को पत्र भेजा गया, जिसमें आगामी कुछ दिनों में अनाज मंडी से पेस्टीसाइड, कीटनाशक, खाद-बीज की दुकानों को हटाने के लिए संबंधित दुकानदारों को निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अनाज मंडियों में पेस्टीसाइड व कीटनाशक के भंडारण और कारोबार से  किसानों और आमजन का जीवन का खतरे में आ सकता है। इस सम्बंध में गत दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर रोक लगाने की मांग की गई थी।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>पहले जारी गैर कृषि जिंसों खाद, बीज, पेस्टीसाइड के व्यवसाय की अनुमतियों को रद्द कर दिया है। इनकी सूची कृषि विभाग को भेज कर अवगत करवा दिया है। अब चूंकि मंडी परिसर में अनुमति नहीं है, ऐसे में इनके लाइसेंस रद्द करने होंगे।<br /><strong>- शशिशेखर शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विपणन विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:17:52 +0530</pubDate>
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                <title>शादियों के सीजन में बाजारों में बरसेगा धन</title>
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                        <![CDATA[अप्रैल माह में बंपर शादियां होने से बाजारों में एक माह के बाद फिर से रौनक लौटने लगी है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/money-will-rain-in-the-markets-during-the-wedding-season/article-110860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(4)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर सहित जिले में खरमास के चलते पिछले एक माह से  शादी विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए ब्रेक लगा हुआ था। अब सोमवार से एक बार फिर शादियों की धूम शुरू हो गई।  इस बार बंपर शादियां होने से व्यापारी 300 करोड के कारोबार की आस लगा रहे है। व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि इस बार अप्रैल व मई में सावों के कई मुहूर्त होने से इस बार वेडिंग बाजार में 300 करोड़ के कारोबार  अनुमान लगाया जा रहा है। इस बार जिंसों की उपज भी अच्छी रही है। ऐसे में किसान बाजार में खरीदारी के लिए आ रहे है।  ज्योतिषाचार्य  पं. अरुण श्रृंगी ने बताया कि सनातन धर्म में खरमास का विशेष महत्व होता है। इस दौरान सभी तरह के शुभ कार्यों पर रोक रहती है। 14 मार्च से  खरमास की शुरुआत  हुई थी उसका समापन 14 अप्रैल को हो गया है। अप्रैल माह में बंपर शादियां होने से बाजारों में एक बाह के बाद फिर से रौनक लौटने लगी है। लोगों ने शादी ब्याह के लिए जेवरात बनाना फिर शुरू कर दिया है। वहीं कपड़ा, फर्नीचर, बर्तन बाजार में खासी रौनक है। हालांकि गर्मी के चलते खरीदारी सुबह व शाम को ज्यादा हो रही है। दोपहर में बाजार खाली रहते है। </p>
<p><strong>वेडिंग बाजार में ग्राहकी हुई तेज </strong><br />शहर के वेडिंग बाजार में इन दिनों खासी रौनक नजर आ रही है। शादियों के लिए लोग जमककर खरीदारी कर रहे है। शहर के फर्निचर बाजार, कपड़ा बाजार, सर्राफा बाजार में खरीदारों की खासी भीड़ नजर आ रही है। शहर के इलेक्ट्रानिक बाजार में लोग शादी में देने के लिए टीवी, फ्रीज, कूलर, पंखे और बेड की खरीदारी कर रहे है। शहर के रामपुरा, गुमानपुरा, सर्राफा बाजार, क्लॉथ मार्केट में इन दिनों खासी भीड़ नजर आ रही है। </p>
<p><strong>कपड़ा बाजार में फिर लौटी रौनक</strong><br />कपड़ा व्यापारी शिव कुमार जैन ने बताया कि खरमास के बाद अब कपड़ा बाजार में खासी रौनक है। अप्रैल, मई में बंपर शादियां होने से इन दिनों कपड़ा बाजार में खासी पूछ परख है।  इन दिनों क्लॉथ मार्केट शादी ब्याह की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण शहरवासी आ रहे है। वहीं दुल्हन अपने शादी का बेस पसंद करने के लिए अपने परिवार के साथ शॉपिग कर रही है।  </p>
<p><strong>बारात के लिए बसों की एडंवास बुकिंग: </strong>ट्रावेल्स आॅपरेटर रवि सिंह ने बताया कि इस बार शहर में अप्रैल माह में बंपर शादियां होने से बारात के लिए बसों की खासी डिमांड चल रही है। इस माह शादियों के काफी मुहूर्त होने से एडंवास बुकिंग चल रही है।  </p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बुकिंग चालू:</strong> व्यापारी प्रकाश जैन ने बताया कि इस बार बंपर शादियों के मुहूर्त होने से बाजारो में रौैनक है। लोग शादी ब्याह के लिए जमकर खरीदारी कर रहे है। अप्रैल व मई तक अच्छे व्यापार की आस है। वेडिंग बाजार में  करीब 200 करोड़ के ज्यादा के व्यापार की आस है।  फर्नीचर व्यापारी इल्सास भाई ने बताया कि फर्नीचर बाजार में ग्राहकी अच्छी चल रही है। शादियों में देने के लिए सोफा, डाइनिंग, ड्रेसिंग टेबल की व डबल बेड की अच्छी मांग चल रही है। </p>
<p><strong> लाइट वेट ज्वैलरी की डिमांड बढ़ी: </strong>सर्राफा व्यापारी भगवान दास ने बताया कि सोना चांदी के भाव तेजी के कारण इस बार लोग लाइट वेट के आभूषण ज्यादा पसंद कर रहे है। डायमंड ज्वैलरी ज्यादा पसंद की जा रही है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 15:14:35 +0530</pubDate>
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                <title>संकरे मार्केट और तंग गलियों में कैसे बुझेगी आग, नहीं मिली फायर बाइक</title>
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                        <![CDATA[शहर के फायर अनुभाग में करोड़ों रुपए की बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। वहां पिछले दो साल से फायर बाइक(बाइक दमकल) की आवश्यकता महसूस होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली है। कता महसूस होगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-will-fire-be-extinguished-in-narrow-markets-and-narrow-streets/article-106864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि, जहां काम आवे सुई, कहां करे तरवारि, अर्थात रहिम दास कहते हैं कि हर चीज का अपना महत्व होता है। जहां पर सुई काम करती है वहां पर तलवार काम नहीं कर सकती। ऐसा ही हाल कोटा नगर निगम में हो रहा है। कोटा शहर के फायर अनुभाग में करोड़ों रुपए की बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। वहां पिछले दो साल से फायर बाइक(बाइक दमकल) की आवश्यकता महसूस होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली है। जबकि एक बार फिर गर्मी का सीजन शुरु हो चुका है। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही यहां बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। नए कोटा शहर में हो रहे विकास व वहां लगने वाली आग की संभावनाओं को देखते हुए उस पर काबू पाने के लिए तो नगर निगम के फायर अनुभाग के पास करोड़ों रुपए के संसाधन व बड़ी-बड़ी दमकलें हैं। बहुमंजिला इमारतों व हॉस्टल में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए 45 से 60 मीटर ऊंचाई तक की बड़ी दो हाइड्रोलिक लेडर दमकलें तक है। लेकिन मात्र लाखों की कीमत वाली फायर बाइक मिलने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है।  अभी मार्च में ही जिस तरह से गर्मी अपने तेवर दिखाने लगी है। उसे देखते हुए आने वाले अप्रैल, मई और जून के तीन महीनों में अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। जिसमें आग लगने की घटनाएं भी हो सकती है। ऐसे में छोटी जगहों पर आग बुझाने के लिए फायर बाइक की आवश्यकता महसूस होगी। </p>
<p><strong>दोनों निगम क्षेत्रों के लिए 10 फायर बाइक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि शहर के पुराने इलाके व मार्केट संकरे है। गर्मी के सीजन में अधिकतर घरों व दुकानों और शोरूम व मार्केट में एसी चलते है। ऐसे में कभी भी शॉर्ट सर्किट या गर्मी अधिक होने पर ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटनाएं हो सकती है। ऐसे में बड़ी दमकलों के वहां जाने और आग बुझाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यास ने बताया कि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में 5-5 फायर बाइक की आवश्यकता है। इसकी डिमांड दो साल पहले स्वायत्त शासन विभाग व राज्य सरकार को भेजी गई थी। लेकिन पहले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता में और फिर सरकार बदलने के कारण यह मामला अटका हुआ है। अभी विधानसभा चल रही है। इसके बाद ही इस संबंध में डीएलबी में बात कर जानकारी ली जाएगी। </p>
<p><strong>चार फायर स्टेशन, 34 दमकलें</strong><br />कोटा के दोनों निगम क्षेत्रों में छोटी-बड़ी करीब 34 दमकलें हैं। जिनका व्यवस्था की दुष्टि से समान रूप से बंटावारा किया हुआ है। सब्जीमंडी, श्रीनाथपुरम्, भामाशाह मंडी व रानपुर समेत चार फायर स्टेशन है। पर्याप्त संख्या में फायर मेन व चालक भी है। कोटा दक्षिण में सिविल डिफेंस के स्वयं सेवकों को भी लगाया हुआ है।</p>
<p><strong>20 लीटर की टंकी, 10 लाख कीमत</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि फायर बाइक छोटी होने से संकरी जगहों पर आग बुझाने में काफी कारगर है। उस पर लगी पानी की टंकी 20 लीटर की रहती है। लेकिन उसमें फॉम व अन्य आग बुझाने के संसाधनों से लैस रहती है। साथ ही पानी की अधिक आवश्यकता होने पर नल से इसके पाइप को जोड़ने पर पानी उसी प्रेशर से फेकती है।  व्यास ने बताया कि इसकी उपयोगिता होने से इसकी कीमत करीब 10 से 12 लाख होगी। लेकिन ये फायर बाइक डीएलबी के स्तर पर ही क्रय कर कोटा भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि जयपुर व उदयपुर समेत कई शहरों में इस तरह की फायर बाइक फायर अनुभाग में हैं। </p>
<p><strong>इन इलाकों में पड़ती है जरूरत</strong><br />नए कोटा के साथ ही पुराना कोटा शहर भी है। पुराने शहर में बहुत सारे मार्केट व इलाके ऐसे हैं जो संकरे हैं और तंग गलियों से होकर गुजरते है। इनमें चाहे इंदिरा मार्केट हो या शास्त्री मार्केट। बजाज खाना हो या पाटनपोल । घंटाघर, चंद्रघटा, हिरण बाजार, श्रीपुरा, लाड़पुरा, करबला , मकबरा , चश्मे की बावड़ी समेत कई ऐसे इलाके हैं जहां जाने के रास्ते काफी संकरे हैं। अधिकतर क्षेत्रों में तो सिर्फ दो पहिया वाहन ही निकल पाते है। ऐसे में वहां आग लगने की घटनाएं होने पर  बड़ी दमकलें नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में दमकलों को दूर खड़ा कर लम्बे पाइप से आग बुझाना पड़ता है। पूर्व में ऐसे कई मामले हो चुके है। संकरे मार्केट और तंग इलाकों में आग लगने की घटनाओं पर उन पर काबू पाने के लिए छोटी और फायर बाइक की आवश्यकता है। इसके लिए दो साल पहले कांग्रेस सरकार के समय से मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक भी नहीं मिली है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:18:10 +0530</pubDate>
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                <title>आज से दस दिन तक रोज बरसेगा बाजार में धन</title>
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                        <![CDATA[नवरात्रा की शुरुआत के साथ ही बाजारों में रौनक आएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/money-will-rain-in-the-market-every-day-for-ten-days-from-today/article-92206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर माता रानी के आवगन के लिए तैयार हो गया है। बाजारों में सजावट हो गई है। गुरुवार से शुरू हो रही नवरात्रा में इस बार अच्छे कारोबार की आस लगाई जा रही है। नवरात्रा की शुरुआत से लेकर विजयादशमी तक बाजारों में खरीदारी की धूम रहेगी। इस बार बाजार में व्यापारियों का अनुमान है कि दस दिन में 500 करोड़ के आसपास कारोबार होने की उम्मीद लगाई जा रही है। मानसून की विदाई लगभग हो चुकी है। ऐसे में नवरात्रा से बाजार में नई फसलों की आवक शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसानों के पास रुपए आने के साथ बाजार में खरीदारी बढ़ेगी। नवरात्रा के शुभ मुर्हूत के लिए लोगों ने एडवांस बुकिंग करा रखी उनकी गुरुवार को डिलेवरी ली जाएगी।  नवरात्रा की शुरुआत के साथ ही बाजारों में रौनक आएगी।  इस बार नवरात्रा से लेकर विजयादशमी पांच सौ करोड़ रुपए के कारोबार की आशा लगाई जा रही है। बाजार में खरीदारों आना शुरू हो गया है। जिससे व्यापारियों में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है साथ इस बार व्यापारी खासे उत्साहित नजर आ रहे है। इस बार व्यापारियों का कहना है कि खरीफ की फसले अच्छी होने से इस बार बाजार में जमकर धन बरसेगा। व्यापार महासंघ महा सचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि नवरात्रा की शुरुआत के साथ ही व्यापार गति पकड़ेगा इस बार दशहरा मेले से भी अच्छे व्यापार की आस है। नवरात्रा से लेकर दशहरा तक पांच सौ करोड़ रुपए के कारोबार की आस है।   विजयादशमी के अबूझ मुहूर्त पर ढाई  सौ करोड़ का कारोबार होने की संभावना इसकी  एड़वास बुकिंग शुरू हो गई है।  दशहरा के अबुझ मुहूर्त को लेकर इन दिनों शोरूम पर लोग गाड़ियों की बुकिंग करा रहे है। दुपहिया, चौपहिया वाहन, फर्र्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक आइटमों की अबझू मुहूर्त के लिए बुकिंग करा रहे । शहर में नवरात्रा स्थापना के बाद से ही बाजारों में खासी चहल पहल नजर आ रही है। इस बार दीपावली तक अच्छे व्यापार की आस लगाई जा रही है। </p>
<p><strong>सर्राफा बाजार में आज से लौटेगी रौनक </strong><br /> सर्राफा व्यवसायी भगवानदास ने बताया कि विजयादशमी के अबूझ मुहूर्त पर लोगों ने शादी ब्याह के लिए गहनों के आॅडर देना शुरू करते है। नवरात्रा स्थापना से ही लोग पूछ परख करना शुरू कर देते है।इस बार सोना चांदी के भाव महंगे होने से लोगों ने एक ग्राम से लेकर 10 ग्राम तक के सोने के आभूषणों की पूछ परख कर रहे है। ज्वैलर्स की ओर से नवरात्रा व दशहरा उत्सव के तहत आभूषणों आॅफर शुरू की है। । इन दिनों बाजार में गोल्ड के अलावा, आर्टिफिशियल ज्वैलरी की खासी मांग देखी गई है। 75 से 80 करोड के कारोबार की आस है। </p>
<p><strong>शादी के लिए फर्नीचर की हो रही बुकिंग</strong><br />फर्नीचर मार्केट के अध्यक्ष इल्यास भाई ने बताया कि नवरात्रा शुरू होने के साथ ही बाजार में  तेजी आने की उम्मीद है त्यौहारी सीजन में अच्छा व्यापार होने की उम्मीद है। नया माल मंगाने के लिए आर्डर देना भी शुरू कर दिया है, ग्राहकों की ओर से भी सकारात्मकता देखी जा रही है। लोग दीपावली व शादी ब्याह के लिए फर्निचर की बुकिंग करा रहे है।  25 से 30 करोड़ के कारोबार की आस है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक बाजार में दिखने लगी भीड़</strong><br />व्यवसायी सत्यनारायण गुप्ता ने बताया कि शहर के इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में लोगों ने टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, एसी की खरीदारी के लिए आना शुरू हो गए है। इसके अलावा दीपावली के लिए घरों को सजाने के लिए झूमर, विद्युत लाइट की दुकानों पर अब भीड़ नजर आने लगी। इलेक्ट्रॉनिक मार्केट की सभी दुकानों पर ग्राहकों की  खासी भीड़ नजर आ रही है। इस बार नवरात्रा से दशहरा तक करीब 70 से 80 करोड़ के आसपास के कारोबार की आस है। </p>
<p><strong>कपड़ा बाजार में रही रौनक</strong><br />कपड़ा व्यवसायी संदीप गर्ग ने बताया कि रामपुरा साड़ी बाजार, ब्लॉथ मार्केट में लोग नवरात्रा की खरीदारी के लिए आना शुरू हो गया है। वहीं शहर के इंद्रा बाजार में लोगों श्रृंगार प्रसाधन, कपड़े, फैंसी आइटम, पर्स, जूते,चप्पल की खरीदारी करते नजर आ रहे है। वहीं अबूझ मुहूर्त होने से कई नई दुकानों के मुहूर्त की तैयारियां चल रही है।  लोग बच्चों के लिए खिलौने, साइकिल, टेडीबियर की खरीदते दिखे। नवरात्र, दशहरा दीपावली उत्सव को लेकर कंपनियों की ओर से दी जा रही विभिन्न आॅफर का लोग जमकर लाभ लेने के लिए पूछपरख कर रहे है। त्यौहारी सीजन में कपड़ों, ज्वैलरी, इलेक्ट्रौनिक आइटम, वाहनों पर अच्छी आॅफर ग्राहकों को लुभा रहे हैं। इस बार कपड़ा बाजार में 70 करोड़ के आसपास का कारोबार होने की आस है। </p>
<p><strong>दुपहिया व चौपहिया वाहनों की हुई बुकिंग</strong><br />शहर के विभिन्न दुपहिया, चौपहिया शो रूम पर बुधवार को नवरात्रा के मुहूर्त  लिए कई वाहनों की बुकिंग हुई । दुपहिया वाहन शो रूम के मैनेजर एस के जागिड़ ने बताया कि  करीब 300 से अधिक दुपहिया वाहन 50 से अधिक चौपहिया वाहन, आॅटो रिक्शा, टैÑक्टर, ई रिक्शा, बाइक की डिलीवरी दी गई। विजयादशमी के अबूझ मुहूर्त के लिए एड़वास बुकिंग हुई। इसबार दशहरा तक 150 करोड के कारोबार की आस है। </p>
<p><strong>बर्तन बाजार में लौटी रौनक</strong><br />नवरात्रा को लेकर शहर के बाजारों में रौनक लौटने लगी है। शहर के बर्तन बाजार में अब लोग देव उठनी एकादशी की शादियों के लिए बर्तन गिफ्ट आइटम की बुकिंग कराना शुरू कर दिया है। बर्तन व्यापार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेश कुमार गोयल ने बताया कि नवरात्र स्थापना के बाद से ही बाजार में ग्राहकों की चहल -पहल बढेगी। अब त्यौहारी सीजन शुरू हुआ है । शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शादी ब्याह के लिए बर्तनों की बुकिंग कराने के लिए आने लगे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 15:05:56 +0530</pubDate>
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                <title>शहर के संकरे बाजारों में वाहनों का प्रवेश बन रहा झगड़े का कारण</title>
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                        <![CDATA[शहर व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी ग्राहको होती है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/entry-of-vehicles-in-the-narrow-markets-of-the-city-is-becoming-the-reason-for-quarrels/article-84769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/73.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में पार्किंग की समस्या आम है।  सरकारी दफ्तर हो या निजी आॅफिस या फिर बाजार।  हर व्यक्ति के सामने पार्किंग की समस्या है। कोटा में लगातार वाहन भी बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के चलते बाजारों में ही वाहनों का रेला सड़कों पर नजर आता है।  इसके चलते अक्सर ट्रैफिक जाम होता है। शहर के भीतरी बाजारों की स्थिति ऐसी है कि एक बार आप वाहन लेकर चले गए तो आधे घंटे के पहले 1 किलोमीटर सड़क भी नहीं क्रॉस कर सकते है।  शहर के तंग बाजारों में वाहनों का प्रवेश ग्राहकों की परेशानी का सबब बन रहा है। शहर के इन्द्रा मार्केट, सब्जी मंडी, अग्रसेन बाजार, बर्तन बाजार पहले ही संकरे उस पर वाहनों के प्रवेश की वजह से  ओर संकरे हो गए है। बाजार में पार्किंग की सुविधा नहीं होने से दुकानदार अपने वाहनों को अपनी दुकान के सामने ही खड़ा कर देते है। जिससे बाजार मे आने वाले ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ती है। बाजारों की छोटी छोटी गलियों में भी लोग दोपहिया वाहन लेकर खरीदारी करने आते है। पार्किंग जगह नहीं होने से वाहन रोड पर ही खड़े कर देते जिससे रास्ता जाम हो जाता है। लोगों का कहना है कि बाजार में वन वे ट्राफिक व्यवस्था साथ ही संकरे बाजारों में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगे तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है। </p>
<p><strong>कोटा में पार्किंग की समस्या से रोज जूझते हंै व्यापारी</strong><br />शहर व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी ग्राहको होती है। शहर के कोटड़ी रोड, गुमानपुरा मेन रोड, छावनी बाजार, रामपुरा से लगते रामपुरा, लाडपुरा व अग्रसेन बाजार में जाम लगने की परेशानी आम है। पार्किंग नहीं होने से लोगों भारी परेशानी होती है।  यहां तक कि अब तो समस्या शहर के नए इलाके तलवंडी, जवाहर नगर, केशवपुरा, रंगबाड़ी मेन रोड पर भी आने लगी है।  जबकि यहां पर पहले से ही सड़कें काफी चौड़ी है, लेकिन रोड साइड वाहन खड़े हो जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह जगह भी पूरी भर जाने के बाद वाहन खड़ा करने की जगह नहीं मिलती है।  सड़के संकरी नजर आने लगी है। </p>
<p><strong>वाहन पार्किंग की हो सुविधा</strong><br />बाजारों में वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं होने से ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दुकानदार अपने वाहनों को अपनी दुकान के आगे खड़ा कर लेते है। और बाजारों मे आने वाले वाहनधारी अपने वाहनों को कहीं भी खड़ा करके खरीदारी करने चले जाते है। जिससे बाजारों मे घंटो तक जाम कि स्थिति बनी रहती है। बाजार में वन वे ट्राफिक व्यवस्था हो साथ ही संकरे बाजारों में नो व्हीकल जोन बने । <br /><strong>- रोहित सिंह, निवासी कोटा</strong></p>
<p><strong>बाजार में नजर नहीं आती वाहन खड़ा करने की जगह</strong><br />दुकानदार अपने वाहन दुकान के समाने खड़े रखते जिससे ग्राहक को बाजार में वाहन खड़ा करने की जगह नहीं मिलती वो रोड पर ही वाहन खड़ा कर देता जिससे रोड जाम हो जाता है। दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण करने से  इसका खामियाजा ग्राहकों को उठाना पड़ता है और दिनभर बाजार में वाहनों की रेलमपेल रहती है। साथ ही ट्रैफिक जाम की स्थिति हो जाती है।  कई बार तो माल लोडिंग अनलोडिंग के लिए आने वाले वाहनों को भी जगह नहीं मिलती है।  शहर की दुकानों का अतिक्रमण भी ट्रैफिक जाम और पार्किंग असुविधा के लिए जिम्मेदार है। <br /><strong>- हेप्पी त्यौहारिया, निवासी कोटा </strong></p>
<p><strong>संकरे बाजारों में वाहन प्रवेश पर लगे प्रतिबंध</strong><br />संकरे बाजार में वाहनों के आने जाने पर रोक लगनी चाहिए। बाजारो की तंग गलियो में भी लोग वाहन लेकर घुस जाते है। जिसके कारण जन हानि का खतरा बना रहता है। वाहनों के कारण कई बार तो बाजार की छोटी गलियो से निकलने में घंटों लग जाते है।  पुलिस प्रशासन को भी अपने जवान लगाकर सड़क पर कोई भी गलत गाड़ी खड़ी नहीं हो, यह देखना होगा।  सभी बाजारों में ग्राहक 30 से 40 मिनट के लिए बाजार में आता है, उसको पूरी जगह मिलनी चाहिए। अतिक्रमण पर पूरी तरह से पाबंदी होनी चाहिए।  कोई भी व्यापारी अतिक्रमण करता है, तो उस पर सख्ती और जुर्माना लगाया जाना चाहिए।  शहर के व्यस्ततम मार्केट में जाने वाले लोग अपने वाहनों को आसपास की गलियों में पार्क कर देते हैं। यहां रहने वाले रहवासी भी इससे काफी परेशान है। क्योंकि लोग या तो उनके घरों के बाहर गाड़ी खड़ी कर जाते हैं जिससे उनके वाहनों को भी खड़ा करने की समस्या उन्हें हो जाती है। <br /><strong>- अंजली मीणा, निवासी कोटा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में यातायात सुगम बने ऐसा हमारा हमेंशा प्रयास रहता है। कोटा में कई संकरे बाजार है यहां पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से लोग वाहन दुकानों के सामने और रोड पर खड़े कर देते है। बजार में हर पांइट पर हमारे जवान तैनात है जो यातायात को सुगम बनाने में जुटे रहते है। सबसे बड़ी समस्या पार्किंग है। यह ठीक होगी तब  ही जाम से निजात मिलेगी। गुमानपुरा में पार्किंग होने के बावजूद लोग वाहनों को रोड पर खड़ा करते है। लोगों को भी जागरूक होना होगा। <br /><strong>- पूरण सिंह, यातायात निरीक्षक, कोटा </strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 16:51:10 +0530</pubDate>
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                <title>अनाज मंडियों में किसानों की जगह अफसर राज</title>
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                        <![CDATA[बोर्ड नहीं होने से सबसे ज्यादा खामियाजा लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/officers-rule-instead-of-farmers-in-grain-markets/article-71274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(4)15.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश की कृषि उपज मण्डियों में संचालन मण्डल के सदस्यों एवं अध्यक्षों की कुर्सियां पिछले आठ साल से खाली पड़ी हैं। इनमें कोटा की भामाशाहमंडी भी शामिल है। इस अवधि में ना तो भाजपा सरकार मंडी संचालन मण्डल के चुनाव करा पाई और ना ही कांग्रेस सरकार ने ध्यान दिया। वर्तमान में भामाशाहमंडी सहित प्रदेश में 173 कृषि उपज मंडियों में प्रशासकों का ही राज चल रहा है। मंडियों में जो संचालक मण्डल चुना जाता है, वह मंडी समिति में होने वाले वार्षिक बजट का ब्यौरा देखता है। इसमें से मंडी इलाके में योजनाओं पर कितना बजट पारित करना है व कितना खर्च करना है, यह भी तय करता है। प्रदेश में कृषि उपज मण्डियों में 2011 में संचालन मण्डल के चुनाव हुए थे, जिनका कार्यकाल 2016 में ही पूरा हो गया। उसके बाद संचालन मंडल के चुनाव नहीं हुए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- 2011 में हुए थे कृषि उपज मण्डियों में संचालन मण्डल चुनाव<br />- 2016 में पूरा हो गया था संचालन मण्डल का कार्यकाल<br />- 173 कृषि उपज मण्डियों में प्रशासकों का राज<br />- 8 वर्ष से संचालन मण्डल सदस्यों व अध्यक्षों की कुर्सियां खाली</p>
<p><strong>किसानों को भुगतना पड़ रहा नुकसान</strong><br />किसान नेता दशरथ कुमार ने बताया कि अनाज मंडियों में लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुने किसान, मजदूर, व्यापारी प्रतिनिधियों के बोर्ड के हाथ में व्यवस्था होती है। बोर्ड नहीं होने से सबसे ज्यादा खामियाजा लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। निर्वाचित किसान प्रतिनिधि (बोर्ड सदस्य) नहीं होने से उनकी आवाज कोई नहीं उठाता। इस व्यवस्था से व्यापारियों और मंडी श्रमिकों के अधिकारों पर भी कुठाराघात हो रहा है। इनके प्रतिनिधि भी बोर्ड में शामिल होते हैं।</p>
<p><strong>विकास कार्य भी होतेहैं प्रभावित</strong><br />कृषि उपज मण्डियों में सात वर्ष से चुनाव नहीं होने के कारण इनके संचालन मण्डल का चुनाव नहीं हो पाया है। इससे मण्डियों में विकास नहीं हो पाया है और किसानों को भी लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। मण्डियों के संचालन का काम प्रशासकों के हाथों में है। अधिकांश कृषि उपज मण्डियों में प्रशासक ही नियुक्त हैं। मण्डी समिति बोर्ड का गठन कृषक, व्यापारी, सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य व स्थानीय विधायक मिलकर करते हैं। </p>
<p><strong>प्रकिया शुरू हुई, लेकिन चुनाव ने अटकाई</strong><br />मण्डी संचालन मण्डल के चुनाव के लिए वर्ष 2016 में कार्यकाल खत्म होने के बाद वर्ष 2017 में चुनाव प्रक्रिया के लिए अध्यक्ष पदों पर लॉटरी भी निकाली गई थी। वार्डों का गठन भी हो गया था, लेकिन 2018 विधानसभा चुनावी वर्ष होने के कारण मण्डी चुनाव खटाई में पड़ गए, जिस पर अभी तक अमल नहीं हो सका।</p>
<p><strong>सभी वर्ग की होती है भागीदारी</strong><br />संचालन मंडल में सभी वर्ग की भागीदारी होती है। यह मंडल ही मंडी प्रशासन के साथ मिलकर अनाज मंडी के विकास, वित्तीय और अन्य निर्णय करता है। मंडल में किसानों के आठ निर्वाचित सदस्य होते हैं। साथ ही स्थानीय विधायक, व्यापारियों के दो सदस्य, तुलाईदार या मंडी श्रमिकों का एक सदस्य, सहकारी विपणन सोसायटी का एक सदस्य होता है। राज्य सरकार दो सदस्यों को मनोनीत करती है। संबंधित स्थानीय निकाय का एक सदस्य भी बोर्ड में शामिल रहता है। अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।</p>
<p>मण्डियों में संचालक मण्डल के चुनाव 2011 में हुए थे, जिनका कार्यकाल वर्ष 2016 में ही खत्म हो गया था। इसके बाद सरकार ने चुनाव नहीं कराए। चुनाव का निर्णय सरकार करती है। मण्डियों में इस समय संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर रखा है।<br /><strong>-जवाहरलाल नागर, सचिव, भामाशाह कृषि उपजमंडी </strong></p>
<p>निर्वाचित बोर्ड होगा तो किसानों के प्रतिनिधि होंगे। वह किसान की बात रखेगा। ठीक से प्रावधानों को लागू करवा पाएंगे। अभी प्रशासक का झुकाव व्यापारी की तरफ ज्यादा रहता है। व्यापारी हित में किसान का अहित हो जाता है। इसमें संतुलन के लिए निर्वाचित बोर्ड और अध्यक्ष होने जरूरी हैं।<br /><strong>-लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 15:53:16 +0530</pubDate>
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                <title>ए भाई जरा देख के चलो, आगे ही नहीं पीछे भी</title>
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                        <![CDATA[अवैध पार्किंग इतनी है कि वाहनों से ही डिवाइडर बनाकर उसे ही स्थाई पार्किंग का रूप दे दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hey-brother--just-watch-and-walk--not-only-forward-but-also-backward/article-59859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/ae-bhai-zara-dekh-k-chlo,-age-hi-nhi-piche-bhi...kota-news-18-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। ए भाई जरा देख के चलो, आगे ही नहीं पीछे भी,ऊपर ही नहीं नीचे भी, फिल्म मेरा नाम जोकर में कवि नीरज का लिखा यह गीत कोटा शहर के वॉल सिटी ट्रॉफिक की स्थिति को बयान करता है। सिटी के अंदरुनी इलाके में जब बाजार खुले हों तो ऐसी ही स्थिति होती है। आप चल रहे हैं तो कोई भी पीछे से टक्कर मार सकता है। आगे से भी भिड़ सकता है। कोई भपर गिर सकता है। बाजार में इतनी खराब स्थिति का एक मात्र कारण है पार्किंग की अव्यवस्था।  पुराने कोटा के इंदिरा गांधी मार्केट, श्रीपुरा बाजार, सुभाष चौक बाजार, सब्जी मंडी मार्केट और चौथ माता स्वर्ण रजत मार्केट में पार्किंग को लेकर समस्या  बनी हुुई है। इन गा्ड़यों के कहीं भी खड़ी होने से यहां दिन भर जाम का आलम रहता है जिससे समय व र्इंधन दोनों का नुकसान होता है। इन बाजारों कि गलियां पहले ही तंग हैं और अवैध पार्किंग इन गलियों और रास्तों की हालत और बदतर कर रही है। इन बाजारों में जिसे जहां जगह मिल जाती है वो वहीं अपने वाहन को खड़ा करके चलते बनता है। अवैध पार्किंग इतनी है कि वाहनों से ही डिवाइडर बनाकर उसे ही स्थाई पार्किंग का रूप दे दिया है। इन वाहनों में ज्यादातर वाहन यहां रहने वालों और दुकानदारों के ही हैं, जो अपने घरों और दुकानों के सामने ही वाहनों को खड़ा करते हैं।</p>
<p><strong>पुरानी है पार्किंग की समस्या</strong><br />इस इलाके में पार्किंग कि समस्या काफी पुरानी है जिसका समय समय पर निदान करने कि कोशिश की गई पर नतीजा आज भी वही है यहां रहने वाले लोग, दुकानदार और राहगीर सभी इन्हीं मार्गों पर ही अपने वाहन खड़े करते हैं। बाजारों के बाहर ही यूआईटी द्वारा नई पार्किंग बनाई गई है पर वहां भी गिने चुने लोग ही वाहन को खड़ा करते हैं।</p>
<p><strong>दिन भर में आते हैं सैंकड़ों वाहन</strong><br />शहर के सबसे बड़े व व्यस्त बाजार होने के कारण इन बाजारों में रोजाना हजारों लोग खरीदारी करने आते हैं जो अपने वाहनों को साथ लाते हैं लेकिन ये वाहन पार्किंग में खड़े न होकर बाजार के ही प्रमुख मार्गों पर खड़े किए जा रहे हैं जिस कारण इन मार्गों कि चौड़ाई आधी से भी कम रह जाती है, जिस कारण हर समय जाम का आलम रहता है। बाजारों मे कहीं कहीं तो एक बाइक के निकलने कि भी जगह नहीं बचती है। इन समस्या के कारण किसी भी कार्य को करने में दोगुना समय लग जाता है। </p>
<p><strong>शाम होते ही लग जाता है जाम</strong><br />शहर में त्योहारी सीजन के साथ शादियों के लिए खरीददारी का दौर चल रहा है, जिससे हर दिन इन बाजारों में कपड़े, ज्वैलरी, बर्तन और सजावटी सामानों कि खरीदारी कर रहे हैं और इन सब सामानों कि खरीदारी के प्रमुख केन्द्र ये बाजार ही हैं। शाम में ठण्डाई के समय में खरीदारी का दौर जैसे ही शुरू होता है इन बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ती है जो वाहनों का रैला सा ले आती है। इन मार्गों पर पहले से खड़े वाहन रास्ते को तो संकरा करते ही हैं उस पर आगन्तुकों के वाहन इस स्थ्तिि को और गम्भीर बना देते हैं। </p>
<p>इस मार्ग पर हर दिन 400 से 500 वाहन आते हैं जिनमें तीपहीया और दुपहीया ज्यादा है, लोग खरीदारी करने आते है तो यहीं वाहन लगा देते हैं जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। यहां के रहने वाले भी वाहनों को यहीं खड़ा करते हैं क्योंकि पार्किंग में हर दिन का शुल्क देना पड़ता है। <br /><strong>- दीपक खंडेलवाल, रामपुरा</strong></p>
<p>पार्किंग बनी हुई है पर उसमें कुछ खड़े करते हैं कुछ नहीं जो नहीं करते हैं वो इन रास्तों में खड़ी कर देते हैं जिस कारण यहां जाम लगता है, ये गाड़ीयां अधिकतर यहां रहने वालों और दुकानदारों की हैं। <br /><strong>- आलोक सोनी, दुकानदार, रघुनाथ चौक</strong></p>
<p>ये सभी बाजार सुबह 10 से रात 11 बजे तक चलते हैं और यहां हर 10-15 मिनट में जाम लग जाता है। पार्किंग कि समस्या तो काफी समय से है पर जो पार्किंग बनाई है उनमें दुकानदारों और रहने वालों के लिए भी शुल्क है इस कारण कोई वहां वाहन खड़ा नहीं करता है। <br /><strong>- आशिक बक्Þश, दुकानदार, बजाज खाना</strong></p>
<p>इन मार्केटों मे समस्या काफी समय से है पर लोग भी इसे गम्भीरता से नहीं लेते और ना ही यूआईटी द्वारा बनाई गई पार्किंग में अपने वाहन खड़े करते हैं। हर दिन जाम के कारण यहां प्रदुषण भी बढ़ जाता है। और आम लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ता है।<br /><strong>- आकाश गर्ग, नयापुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />शहर में अवैध पार्किंग पर तीन टोंइग वाहन, तीन क्रेन और एक गाड़ी द्वारा लगातार कारवाई की जा रही है, हर दिन 150 से 200 वाहनों के ऊपर कारवाई कर उनके चालान बनाए जा रहे हैं। <br /><strong>- पुरण सिंह, यातायात निरीक्षक</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 16:05:12 +0530</pubDate>
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                <title>नवरात्र से बन रही सवा करोड़ के व्यापार की उम्मीद</title>
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                        <![CDATA[व्यापारियों को उम्मीद है कि अगले तीन महीने व्यापारियों के लिए अहम है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/expectation-of-business-worth-rs--1-25-crore-from-navratri/article-59099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/navratr-s-bn-rhi-sava-crore-k-vyapar-ki-ummid...kota-news-09-10-2032.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्रा में महज आठ दिन बचे है। बाजारों में त्यौहारी सीजन की रौनक शुरू होने लगी है। हालांकि अभी श्राद्ध पक्ष चलने से लोग घट स्थापना व दशहरा के  लिए वाहनों से लेकर इलेक्ट्रानिक आइटम की एडवांस बुकिंग कराना शुरू कर दिया है। नवरात्रा पर सवा सौ करोड़ के कारोबार की व्यापारी आशा लगा रहे है। </p>
<p><strong>गणेशोत्सव से शुरू हो गई बाजारों में रौनक </strong><br />गणेश चतुर्थी से त्यौहारी सीजन की भी शुरुआत हो गई है, जिसके चलते शहर के बाजारों में पिछले कुछ दिनों से खरीदारों की अच्छी भीड़ देखी जा रही है। इंदिरा बाजार, बर्तन बाजार, सर्राफा बाजार, कपड़ा बाजार सहित किराणा की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। हालांकि  ज्यादातर खरीदारी नवरात्रि में होगी, लेकिन आगामी दिनों में त्यौहारी व शादी सीजन एक साथ होने से कपड़ा बाजार में ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है। कपड़ा व्यापारियों ने बताया कि लोग श्राद्ध पक्ष में विवाह आदि के सामान की बुकिंग कराना शुरू कर दिया है। नवंबर दिसंबर होने वाली शादियों के लिए लोग सामान बुकिंग करा रहे है। अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है ऐसे लोग अभी बुकिंग करा रहे हैं। </p>
<p><strong>एडवांस में हो जाती थी गहनों की बुकिंग</strong><br />सर्राफा व्यवसायी भगवानदास लड्डा ने बताया कि सर्राफा बाजार मुख्य रूप से शादियों व त्यौहारी सीजन में ही आबाद होता है, गणेश चतुर्थी के बाद से ज्वेलेरी को लेकर पूछ परख बड़ी है। आगामी सीजन को देखते हुए सर्राफा व्यापारियों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। आम तौर पर नवरात्रों, करवा चौथ, धन तेरस पर भी गहनों की बिक्री होती है, लेकिन अभी सोने के दाम घटने से लोग अब गहनों की एडवांस बुकिंग भी करा रहे हैं। </p>
<p><strong>आगामी सीजन से काफी उम्मीद</strong><br />कपड़ा व्यवसायी संदीप गर्ग ने बताया कि अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। नवरात्रि से शादियों के लिए कपड़ो की खरीद शुरू हो जाएगी। अभी लोग डिजाइन और फेब्रिक देख रहे है। अनंत चतुर्दशी के बाद से ही कपड़ा बाजार में रौनक लौटने लगी है। आगामी त्यौहारी व शादियों के सीजन में वस्त्र व्यापारियों को अच्छी खरीदारी की उम्मीद है। इसको लेकर तैयारी भी शुरू कर दी है</p>
<p><strong>आॅफ सीजन में कंपनियां दे रही बंपर डिस्काउंट </strong><br />इलेक्ट्रानिक व्यापार संघ के अध्यक्ष सत्यनाराण गुप्ता ने बताया कि  नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस, दीपावली, देवउठनी एकादशी तक खरीदारी के महामुहूर्त रहने वाले हैं। ऐसे में व्यापारियों को उम्मीद है कि अगले तीन महीने व्यापारियों के लिए अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए कपड़ा, सर्राफा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आटोमोबाइल समेत सभी सेक्टर के कारोबारियों ने अभी से स्टॉक मंगाना शुरू कर दिया है। जिससे कि उन्हें आगामी महामुहूर्तों के दिनों में ग्राहकी करने में कोई परेशानी न हो। अभी नवरात्रा के लिए फ्रीज, टीवी और घरेलु सामानों की बुकिंग हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक सामानों के व्यवसायी राजीव कुमार ने बताया कि बाजार में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ रही कंपनियां अपने शो रूम खोल रही है। ऐसे में छोटे व्यापारियों के लिए बाजार में धंधा करना अब मुश्किल होता जा रहा है। नवरात्र में अच्छी ग्राहकी हुई है। अब सारी आस धनतेरस और दीपावली से है। ग्राहक आॅनलाइन की रेट में  से स्थानीय बाजार के दाम से तुलना करते हैं तो उन्हें महंगा लगता है और भाव की पूछ परख कर ग्राहक लौट जाता है। अभी आॅफ सीजन में डबल डोर फ्रिज, फुल आॅटोमेटिक वॉशिग मशीन की मांग अधिक है।</p>
<p><strong>ईवी की बुकिंग ज्यादा</strong><br />दोपहिया वाहन विक्रेता आर के जागिंड ने बताया कि इस बार नवरात्रि और दशहरा के शुभ मुहूर्त के लिए लोग ईवी दुपहिया व तीन पहिया वाहनों की अच्छी बुकिंंग करा रहे है। इसके अलावा बाइक और स्कूटी और चौपहिया वाहनों की भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है। दुपहिया वाहन विक्रता संदीप ने बताया कि अभी श्राद्ध पक्ष में लोग दो पहिया वाहनों की बुकिंग करा रहे जो नवरात्रि पर घट स्थापना पर उठाएंगे। अभी तक करीब 50 से अधिक दुपहिया वाहनों व पांच तीन पहिया वाहनों की बुकिंग हो चुकी है। इसके अलावा चौपहिया वाहनों में हर शो रूम पर चार से पांच गाडियों की नवरात्रि व दशहरा के लिए बुकिंग कराई है। </p>]]>
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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 18:42:58 +0530</pubDate>
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