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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
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                        <![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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                <title>स्टेट हाइवे की मिसिंग लिंक सड़क गड्ढों में तब्दील, वाहन चालकों के लिए  खतरा</title>
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                        <![CDATA[ग्रामीणों ने मांग मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण हो ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/state-highway-s-missing-link-road-turns-into-a-pothole-ridden-mess--posing-a-danger-to-motorists/article-137424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र में मध्यप्रदेश सहित कोटा और बारां जिलों को एक्सप्रेस वे व दौसा मेगा हाइवे से जोड़ने वाली स्टेट हाइवे एस-1 की मिसिंग लिंक सड़क बदहाली का शिकार हो गई है। माखिदा से होकर चंबल पुलिया तक करीब एक किलोमीटर का हिस्सा जगह-जगह डामर उखड़ने से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ फैलने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>समाजसेवी रामहेत मीणा गुहाटा, पूर्व सरपंच पवन मीणा और युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष हेमंत पालीवाल ने बताया कि लबान स्टेशन से माखिदा तक सीसी सड़क का निर्माण हो चुका है, लेकिन बजट के अभाव में चंबल पुलिया से करीब एक किलोमीटर पहले सड़क अधूरी छोड़ दी गई। यही हिस्सा आबादी क्षेत्र और माखिदा बस स्टैंड से होकर गुजरता है, जिससे ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ रहा है।गड्ढों में फिसलकर बाइक सवार आए दिन घायल हो रहे हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। भारी गड्ढों के कारण कई बार चौपहिया वाहन भी फंस जाते हैं। लबान इंटरचेंज से एक्सप्रेस वे की ओर जाने वाले भारी लोडिंग वाहन फंसने पर आसपास की आबादी को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p>ग्रामीणों ने मांग की है कि मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और आवागमन सुरक्षित हो सके।</p>
<p>सड़क के निर्माण के समय बजट खत्म हो जाने से यह टुकड़ा रह गया था अब विभाग द्वारा करीब 2 करोड़ रुपये  राशि स्वीकृत हो चुकी है टेंडर हो गए है ठेकेदार ने सड़क को समतल कर दिया है जल्द ही सड़क का कार्य शुरू हो जाएगा।<br /><strong>- हिमांशु दाधीच सहायक  अभियंता पीडबल्यूडी लाखेरी।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 15:30:11 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : आंगनबाड़ी पाठशाला पर मंडराता खतरा</title>
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                        <![CDATA[आंगनबाड़ी का भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। छत के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है। और किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--danger-looms-over-the-anganwadi-school/article-136635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/3694.png" alt=""></a><br /><p>सूमर। ग्राम पंचायत सूमर के चीकली गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के पास संचालित आंगनबाड़ी पाठशाला की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। आंगनबाड़ी का भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। छत के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनसे बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता रहता है। ऐसे हालात में यहां अध्ययनरत 18 नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी खतरनाक भवन में बैठकर पढ़ने और खेलने को मजबूर हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। </p>
<p>पिपलोदी में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद चीकली गांव की आंगनबाड़ी आज भी उसी खतरे की जद में बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में टपकती छत बच्चों के सिर पर लटकती तलवार बन चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति के चलते बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति मासूम बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकारी योजनाएं कागजों में मजबूत नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। रामबिलास बैरवा, महेश मीणा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि छत में बने गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने किसी बड़े हादसे से पहले तत्काल मरम्मत अथवा नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग की है।</p>
<p> पिपलोदी हादसे के बाद भी प्रशासन बेखबर है। यहां केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा, बल्कि नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण जरूरी है।<br /><strong>- बलराम गुर्जर, वार्ड पंच </strong></p>
<p> इस समस्या को लेकर पहले भी प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। ये 18 बच्चे गांव का भविष्य हैं, जिन्हें खतरे में नहीं डाला जा सकता।<br /><strong>- महेंद्र गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p> महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।<br /><strong>- शालू शर्मा, ग्रामीण</strong></p>
<p>भवन की हालत खराब होने के कारण बच्चों को बाहर बैठाना पड़ रहा है।<br /><strong>- द्रोपदी बाई, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता</strong></p>
<p> सूचना विभाग के संज्ञान में है। भवन का स्वयं सर्वे कराया गया है और पीडब्ल्यूडी से भी सर्वे करवाया गया है। सर्वे रिपोर्ट व सूची उच्च स्तर पर भेज दी गई है, आगे की कार्रवाई प्रक्रिया में है।<br /><strong>- सत्येंद्र सिंह चौहान, विभागीय महिला एवं बाल विकास अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 16:53:02 +0530</pubDate>
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                <title>इनसाइड स्टोरी : पूरी रात रेलवे ट्रैक के पास पर बैठी रही बाघिन  कनकटी, टला ब्रोकन टेल जैसा हादसा</title>
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                        <![CDATA[हाइवे एनएच-52  व रेलवे  ट्रैक पास होने से टाइग्रेस की जान को था खतरा। 
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/inside-story--tigress-kanakati-sat-near-the-railway-track-all-night--averting-a-broken-tail-like-accident/article-135729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से बाहर निकली बाघिन एमटी-8 बुधवार को पूरी रात नेशनल हाइवे और रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में बैठी रही। ऐसे में दोनों तरफ से उसकी जान जोखिम में थी। लेकिन, कनकटी की सुरक्षा में लगे एक दर्जन वनकर्मियों की सतर्कता से संभावित खतरा टल गया। जबकि, एनएच-52 से झालावाड़ की ओर से बड़े वाहन स्पीड से गुजरते हैं। वहीं, रेलवे ट्रैक पर लंबी दूरी की ट्रेनों का लगातार आवागमन रहता है। ऐसे में ब्रोकन टेल जैसा हादसे की आशंका बनी हुई थी। इस पर मुकुंदरा प्रशासन व वनकर्मियों ने वाहनों की गति पर नियंत्रण रखा और रेलवे प्रशासन को मामले से अवगत कराकर ट्रेन की रफ्तार घटाई। जिससे संभावित खतरे को टाला जा सका।</p>
<p><strong>ग्रामीण बोले-तीन दिन खेत तक नहीं देखे</strong><br />बटवाड़ा व दरा गांव के प्रहलाद, सुरेंद्र, महेंद्र कुमार का कहना था कि गांव और जंगल के बीच सिर्फ एक रोड का फासला है। जब बाघिन एनक्लोजर से बाहर निकली तो वनकर्मियों ने उन्हें रात और दिन में अकेले घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी। ऐसे में स्थिति कशमशभरी थी। एक ओर बाघिन के हमले का खतरा तो दूसरी ओर खेतों में फसलों को वन्यजीवों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने का डर सता रहा था। हालात यह है कि तीन दिन खेतों तक नहीं जा पाए।</p>
<p><strong>बाघिन और इंसान दोनों की जान को था खतरा</strong><br />बाघिन को जहां रेलेव ट्रेक व वाहनों से खतरा था, वहीं पास ही के दरा गांव के लोगों को बाघिन के हमले का डर सता रहा था। क्योंकि, दरा गांव में करीब एक दर्जन घर है। ऐसे में बाघिन का गांव की ओर मूवमेंट की आशंका से लोग भयभीत थे। वहीं, ट्रैकमेन व होम गार्ड की जान को भी खतरा था। क्योंकि, वाहनों व ट्रेन के शोर से बाघिन स्ट्रेस में थी। इधर,बटवाड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को बाघिन की दहाड़ सुनाई देने से गांव में हड़कम्प मच गया था। लोग डरे हुए थे। वनकर्मियों की टीमें लोगों को सतर्क रहने को कह रहे थे। यह बाघिन रणथम्भौर में एक बच्चे सहित दो जनों को मार चुकी है। ऐसे में उसके हमले का डर सता रहा था। इधर, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघिन रेलवे व हाइवे से सटे नाले के पास झाड़ियों में बैठी थी। यदि, वह सड़क या ट्रेक पर आ जाती तो बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता।</p>
<p><strong>अप-डाउन रेलवे लाइन पर आई नजर आई थी कनकटी</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात कोटा-रामगंजमंडी रेल खंड स्थित दरा घाटी में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर दो ट्रैकमैनों और साथ रहे होमगार्ड को कनकटी बाघिन दिखाई दी। गश्त कर रहे ट्रैकमैन बलजीत सिंह और हेमंत नागर, होमगार्ड को यह बाघिन रात करीब 12:40 बजे अबली मीणी महल के पास अप और डाउन लाइन पर मूवमेंट करती दिखाई दी थी। करीब 2 मिनट तक यह नजारा देखने के बाद ट्रैकमेन बलजीत और हेमंत ने मामले की सूचना तुरंत दरा स्टेशन सुपरवाइजर और कोटा कंट्रोल रूम को दी। सूचना पर बाघिन की तलाश कर रही वन विभाग की टीमें कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गई थी। लेकिन तब तक बाघिन गायब हो चुकी थी।</p>
<p><strong>ट्रेन की टक्कर से ब्रोकन टेल की हो चुकी मौत</strong><br />दरा घाटी से गुजर रही रेलवे लाइन पर वर्ष 2003 में रणथम्भौर से आए बाघ ब्रोकन टेल की तेज रफ्तार ट्रेन की टक्कर से मौत हो चुकी है। इसकी पूंछ कटी हुई थी। इसलिए इसे ब्रोकन टेल नाम दिया गया था। यह बाघ रणथंभौर टाइगर रिजर्व से निकलकर लगभग 160 किलोमीटर की यात्रा कर मुकुंदरा दरा के जंगलों में पहुंचा था। बाघ के अलावा भालू, लैपर्ड सहित कई वन्यजीव ट्रेन की चपेट में आने से अकाल मौत के शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा रेलवे लाइन व हाइवे पर वन्यजीवों को आने से रोकने व उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं कर सका।</p>
<p>बाघिन का मूवमेंट कई बार रेलवे लाइन तथा कोटा-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-52 ) के नजदीक रहा, जो बाघिन और आमजन दोनों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता था। हालांकि, फील्ड टीमें 24 घंटे अलर्ट पर रहीं जो बाघिन के मूवमेंट की निगरानी रेडियो टेलीमेट्री से निरंतर कर रहे थे।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 16:51:24 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 5 - मोहन टॉकीज रोड पर खतरा बने खुले चैंबर, ऊंचे स्पीड ब्रेकर से बढ़ा वाहन चालकों का संकट</title>
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                        <![CDATA[दुकानों के बाहर खड़े वाहन और संकरी गलियां जाम की बड़ी वजह हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-5---open-manholes-on-mohan-talkies-road-pose-a-danger--and-high-speed-breakers-increase-the-difficulties-for-drivers/article-131656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड नंबर 5 की स्थिति आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुकी है। यह वार्ड शहर के प्रमुख बाजारी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में शामिल है। यहां हर रोज जाम, गंदगी और अव्यवस्था के हालात बने रहते हैं। लोगों की शिकायत है कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कई बार नगर निगम में शिकायत की गई, लेकिन अब तक किसी तरह का ठोस समाधान नहीं निकला है।</p>
<p><strong>सुलभ कॉम्प्लैक्स में नहीं लाइट-पानी की व्यवस्था</strong><br />बाढ़ क्षेत्र में बने सुलभ कॉम्प्लेक्स की स्थिति भी बेहद दयनीय है। यहां लाइट और पानी की व्यवस्था न होने से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय अंधेरा और बदबू के कारण लोग इस कॉम्प्लेक्स का उपयोग करने से भी कतराते हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम ने निर्माण तो करवा दिया, लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली।</p>
<p><strong>हरदम जाम की स्थिति</strong><br />वार्ड का अधिकांश भाग व्यावसायिक होने से यहां सुबह से देर शाम तक वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। दुकानों के बाहर खड़े वाहन और संकरी गलियां जाम की बड़ी वजह हैं। राहगीरों और स्थानीय लोगों को हर दिन घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ता है। बाजारी क्षेत्र की गलियों में वाहनों की लंबी कतारें आम दृश्य बन गई हैं।</p>
<p><strong>गलियों में फैली गंदगी</strong><br />वार्ड क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर नजर आती है। कई इलाकों में कचरे के ढेर लगे रहते हैं, नालियां जाम हैं और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि सफाई कर्मी नियमित रूप से नहीं आते, जिससे वार्ड के कई हिस्सों में गंदगी फैली रहती है। मानसून के बाद हालात और बिगड़ गए हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />पुरानी सब्जी मण्डी, हरिजन बस्ती, हजीरा कब्रिस्तान, बजरंग लाल सर्राफ, जैन पुष्प, बजरगं सिंह सिंदेल, सिंधी धर्मशाला, मछली मार्केट, गीता भवन, न्यू क्लॉथ मार्केट, फायर आॅफिस, मोहन टाकिज रोड, इंस्पेक्टरी स्कूल, बागर हाउस, कोली पाडा, पायगा स्कूल, बांस बल्ली मार्केट का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>ऊंचे स्पीड ब्रेकर  परेशान</strong><br />वार्ड की गलियों में बने ऊंचे स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। कई जगहों पर बिना किसी मानक के स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं, जिनसे वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p><strong> खुले चैंबर</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, जो इस वार्ड का मुख्य मार्ग है, वहां जगह-जगह खुले पड़े चैंबर गंभीर हादसों का कारण बन सकते हैं। कई बार स्थानीय नागरिकों और बच्चों के गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग ने कई बार निरीक्षण तो किया, लेकिन अब तक किसी ने मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया। खुले चैंबर न सिर्फ दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं, बल्कि बरसात में इनसे बदबू और गंदगी फैलने का भी खतरा रहता है। <br /><strong> -अब्दुल मनान</strong></p>
<p><strong>जल्द हो स्थायी समाधान</strong><br />स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि वार्ड की समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाए। खुले चैंबरों की मरम्मत, नियमित सफाई व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वार्ड नंबर 5 की समस्याएं लंबे समय से अनदेखी का शिकार हैं, और अब समय आ गया है कि नगर निगम इन पर गंभीरता से कार्रवाई करे। <br /><strong>-मंगला देवी, पुष्पा, कुसुम</strong></p>
<p>वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए अनेक बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। पार्किंग स्थल के अभाव में आए दिन जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सफाई व्यवस्था के तहत वार्ड में प्रतिदिन सफाई की जाती है, फिर भी लोगों की लापरवाही से गंदगी फैल जाती है। कई बार निवेदन किया गया कि कचरा निर्धारित गाड़ी में ही डालें, पर वार्डवासी बात नहीं मानते — अब ऐसे में हम क्या कर सकते हैं।<br /><strong>- रफीक अहमद, पार्षद</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 14:33:23 +0530</pubDate>
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                <title>झूलते बिजली तार बने हादसे का खतरा, ग्रामीणोंं की मांग जल्द हो समस्या का समाधान </title>
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                        <![CDATA[बहुत से तारों पर कट लगा हुआ है जिनके ऊपर कोई कवरिंग नहीं हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dangling-electric-wires-pose-a-risk-of-accidents--villagers-demand-a-quick-solution-to-the-problem/article-131169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/y-of-news-(3).png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर स्टेट बैंक की गली जो की एक निजी विद्यालय की तरफ जाती है, गली के बीच में रोड पर लाइट के तारों का जंजाल बना हुआ है। यह तार इतने नीचे झूल रहे हैं कि कभी भी किसी की जान ले सकते हैं। इन तारों में बहुत से तारों पर तो कट लगा हुआ है जिनके ऊपर कोई कवरिंग नहीं है कभी भी खतरे का सामना हो सकता है। निजी विद्यालय से आने वाले छात्र व छात्राओं के लिए भी यह एक मार्ग है, इस मार्ग से उनका आना-जाना लगा रहता है और स्टेट बैंक से इस गली में आने वालों को भी कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन जानवर तो इससे चिपक जाते हैं इन तारों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है । ग्रामीणोंं ने मांग की है कि जल्द से जल्द झूलते बिजली के तारों की समस्या का समाधान किया जाए । </p>
<p>हमारे मोहल्ले वासियों के लिए यह एक मुख्य मार्ग माना जाता है इस मार्ग से ही हमारा बाजार आना वह जाना लगा रहता है तथा इस मार्ग से ही पूरे मोहल्ले वासियों का आवागमन होता है इन तारों पर ध्यान दिया जाए। <br /><strong>- उदय लाल मालव, ग्रामीण </strong></p>
<p>हमने विद्युत विभाग को कई बार अवगत भी कर दिया है लेकिन इसका कोई समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- राजा राम मेघवाल, कस्बेवासी</strong></p>
<p>खानपुर के स्टेट बैंक की गली वह एक निजी स्कूलों की गली दोनों का मुख्य मार्ग है यह रोड जिस पर तार झूल हुए हैं, यह झूले हुए विद्युत के तारों से कभी भी हादसा हो सकता है। <br /><strong>-सोहन मेघवाल, कस्बेवासी </strong></p>
<p>इन लाइट के तारों से कस्बेवासी परेशान है। विद्युत विभाग को भी अवगत करा दिया गया है, लेकिन विद्युत पोल लगाने में परेशानी आ रही है। <br /><strong>-सत्तू मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पहले भी विद्युत विभाग द्वारा नया विद्युत पोल लगाने गए थे लेकिन मोहल्ले में कुछ व्यक्ति को पोल लगाने से आपत्ति है, यदि मोहल्ले में किसी को आपत्ति नहीं रहती है तो नया विद्युत पोल लगा दिया जाएगा। <br /><strong>-महेश कुमार नागर, कनिष्क अभियंता विद्युत विभाग खानपुर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 16:21:29 +0530</pubDate>
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                <title>नयापुरा स्थित सीवी गार्डन का मामला : कीड़े कांटों का डर, किड्स जोन बना बच्चों के लिए खतरा, झूलों के आस-पास उगी है बड़ी-बड़ी घास</title>
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                        <![CDATA[बड़ी-बड़ी घास झूलों के आस-पास ही नहीं वहां चलने वाली टॉय ट्रेन की पटरियों पर भी है।
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-case-of-cv-garden-in-nayapura--fear-of-insects-and-thorns--the-kids--zone-has-become-a-danger-for-children--and-tall-grass-has-grown-around-the-swings/article-130437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाग-बगीचों में बच्चे ताजी हवा के साथ ही झूला झूलने व खेलने-कूदने का आनंद लेने जाते हैं। लेकिन सीबी गार्डन का किड्स जोन इन दिनों बच्चों के मनोरंजन से अधिक खतरा बना हुआ है। गार्डन में लगे झृूलों के आस-पास बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। जिससे वहां आने वाले बच्चों को कीड़े -कांटों के काटने का खतरा बना हुआ है।  सीबी गार्डन में गोपाल निवास बाग की तरफ किड्स जोन बना हुआ है। जहां छोटे-बड़े कई तरह के झूले लगे हुए हैं। उन झूलों में बच्चे यहां सुबह-शाम झूला झृलने आ रहे है। लेकिन हालत यह है कि इन दिनों उन झृूलों के आस-पास इतनी अधिक  व बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है कि कई बच्चों से तो बड़ी घास होने से वे नजर ही नहीं आते। कई जगह पर इतनी अधिक घनी घास है कि वहां कोई कीडा-कांटा छिपकर बैठा हो तो उसका पता ही नहीं चल रहा। हालत यह है कि अभी दीपावली अवकाश होने से कई बच्चे सुबह की तुलना में शाम के समय गार्डन में घूमने व झृला झृलने आ रहे हैं। घास अधिक व बड़ी होने के बाद भी मजबूरन उन्हें उसी के बीच झूले झूलने पड़ रहे है। जिससे उन्हें कीड़े-कांटों के काटने का डर बना हुआ है। </p>
<p><strong>टूटे झूले व बिजली के खुले पोल भी खतरा</strong><br />बड़ी-बड़ी घास केवल झूलों के आस-पास ही नहीं वहां चलने वाली टॉय ट्रेन की पटरियों पर भी है। साथ ही जिस जगह यार्ड में ट्रेन रात के समय खड़ी होती है उसके प्रवेश द्वार तक पर बड़ी घास उगी हुई है। गार्डन आने वाले लोगों का कहना है कि बरसात के समय में गार्डन में घास बड़ी हो गई है तो उसे कटवाने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग की है। नयापुरा निवासी मयंक सैनी का कहना है कि वह अपने दोस्तों के साथ शाम के समय यहां घूमने व झूला झृलने आता है लेकिन यहां घास बड़ी होने व कई झूले टूटे होने के साथ ही बिजली के खुले खम्बे खतरा बने हुए हैं।  </p>
<p><strong>अभी बरसात रूकी है, अब कटवाएंगे घास</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि बरसात के समय में गार्डन में घास बड़ी हो जाती है। बरसात का दौर अब थमा है। ऐसे में संवेदक के माध्यम से अब घास को कटवाया जाएगा। यह काम जल्दी ही करवा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जिस तरह की बड़ी घास यहां है उससे तो  यहां दिन के समय ही जानवरों व कीड़ों के होने का खतरा बना हुआ है। दोस्तों के साथ यहां आने पर बड़ी-बड़ी घास देखकर झूला झूलने की हिम्मत ही नहीं हो रही है। <br /><strong>- राहुल कुमावत, खाई रोड </strong></p>
<p>स्कूलों की छुट्टी होने से बच्चों को सीबी गार्डन घुमाने लाया था। बच्चे झूला झूलने की जिद करने लगे तो उन्हें यहां लेकर आया। यहां देखा तो काफी झाड़ झंकार हो रहे हैं। छोटे बच्चे से तो बड़ी  व घनी घास उगी हुई है। जिससे यह बच्चों के  लिए खतरा बना हुआ है। नगर  निगम या केडीए जो भी गार्डन की देखभाल करता है उन्हें चाहिए कि वह इस घास को कटवाकर बच्चों के खेलने की जगह को सही करवाएं और टूटे झूले व खुले बिजली के खम्बों को भी सही करवाएं। <br /><strong>- महेश शर्मा सिविल लाइंस </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Oct 2025 16:30:57 +0530</pubDate>
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                <title>ग्लेशियर झीलों का विस्तार तबाही का संकेत </title>
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                        <![CDATA[जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियरों के पिघलने की गति जिस तेजी से बढ़ रही है, उसी गति से ग्लेशियर झीलों की तादाद भी बढ़ रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/extension-of-glacier-lakes-signal/article-128719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(11).png" alt=""></a><br /><p>जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियरों के पिघलने की गति जिस तेजी से बढ़ रही है, उसी गति से ग्लेशियर झीलों की तादाद भी बढ़ रही है। इस हिमालयी इलाके में ग्लेशियर झीलों की बेतहाशा बढ़ती तादाद निचले इलाकों में रहने वालों के लिए भीषण खतरा बन गई है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झीलों के आकार में तेजी से हो रही बढ़ोतरी ने वैज्ञानिकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अध्ययन इस बात के जीते-जागते सबूत हैं कि ग्लेशियर झीलों के विस्तार भविष्य में 2013 की केदारनाथ त्रासदी जैसी भीषण आपदा का सबब बन सकती है। इसलिए इस पर तत्काल अंकुश लगाए जाने की जरूरत है। यदि हिमालयी राज्य उत्तराखंड को लें, तो इसके उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगभग 1266 से भी अधिक ग्लेशियर झीलें हैं। इनमें 13 तो बेहद खतरनाक हैं। इनमें भी पांच उच्च जोखिम वाली क्षेणी में हैं। इनमें बहुतेरी झीलें ऐसी हैं, जो विभिन्न कारणों से बनती-बिगड़ती रहती हैं। इनमें चमोली जिले में वसुधारा और पिथौरागढ जिले में माबान, प्युंगू व दो अनाम झीलें हैं जो कभी भी भीषण आपदा का सबब बन सकती हैं। हाल ही में एक नई आफत दस्तक दे रही है। वह यह है कि पिथौरागढ़ की दारमा घाटी के ऊपर करीब सात सौ मीटर लम्बी और छह सौ मीटर चौड़ी ग्लेशियर झील ने वैज्ञानिकों को अचरज में डाल दिया है।</p>
<p><strong>खतरनाक स्तर पर :</strong></p>
<p>सबसे बड़ी चिंतनीय बात यह है कि इस झील के आकार में बीते दिनों करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले अरुणाचल में 197 से ज्यादा ग्लेशियर झीलें हैं। ये अपना खतरनाक स्तर पर विस्तार कर रही हैं। इनके बाद लद्दाख में 120, जम्मू-कश्मीर में 57, सिक्किम में 47, हिमाचल में 6 और उत्तराखंड में 5 झीलें हैं। कुल मिलाकर 2025 में ही 1,435 ग्लेशियर झीलों का विस्तार हुआ है, जो तबाही का संकेत है। उत्तराखंड की इन खतरनाक 13 झीलों को तीन श्रेणियों में बांटा है। ए श्रेणी में चमोली की वसुधारा, उत्तरकाशी की केदारताल, बागेश्वर की नागकुंड,पिथौरागढ की मबांग, प्यंगरू और टिहरी की मासुरीताल प्रमुख हैं। पिछले दिनों में गंगोत्री की केदारताल और चमोली में वसुतारा झील का काफी विस्तार हुआ है। इन झीलों के गढ़वाल विश्व विद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एम पी एस बिष्ट द्वारा वर्ष 2014 और 2023 के उपग्रह चित्रों के अध्ययन से यह चिंताजनक खुलासा हुआ है। उनके मुताबिक ये झीलें हिमनद के असंगठित मलबे - मोराइन डैम की रुकावट से बनी हैं। इनसे खतरा यह है कि हिमजल में बढ़ोतरी या अतिवृष्टि से पानी बढ़ने पर ये फूटकर बड़े खतरे का सबब बन सकती हैं। उनका मानना है कि इस खतरे को देखते हुए सरकारों और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों को समय रहते इन झीलों का आकलन कर तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>सर्वे के मुताबिक :</strong></p>
<p>असलियत मे उत्तरकाशी की धराली की घटना ने उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों के बढ़ते खतरे को चर्चा में ला दिया है। ग्लेशियर झीलों का मुद्दा 2013 में केदारनाथ आपदा के समय महत्वपूर्ण बन गया, जबकि चौराबाडी ग्लेशियर की झील के फटने से तबाही आई थी। जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के मुताबिक उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में लगभग 968 ग्लेशियर हैं, जिनमें 12000 ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं। देखा गया है कि आये -दिन उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से बनने वाली झीलों में जरूरत से ज्यादा पानी आने के कारण बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। शोध में खुलासा हुआ है कि इन झीलों में पानी बढ़ने से इनका आकार तेजी से विकराल रूप लेता जा रहा है। 2021 में हिमनद का एक हिस्सा टूटने से चमोली में धौलीगंगा नदी में बाढ़ और 2013 में केदारनाथ त्रासदी इसकी जीती-जागती मिसाल है। दरअसल ग्लेशियर के आगे बनने वाली झील को प्रोग्रेसिव लेक कहते हैं। ये झीलें इसलिए अधिक संवेदनशील होती हैं, क्योंकि इनके टूटने का खतरा ज्यादा होता है। इसीलिए इन झीलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। चूंकि हिमालयन क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से काफी संवेदनशील है, इसलिए यह खतरा और बढ़ जाता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक और पर्यावरणविद हिमालयी अंचल में बनी इन झीलों से आने वाले भीषण खतरों के प्रति चिंतित हैं।</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन :</strong></p>
<p>सबसे बड़ी बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान काफी बढ़ रहा है और मौसम के पैटर्न में भी बदलाव आ रहा है। वह बात दीगर है कि इस पर बहुत सारे अध्ययन और शोध जारी हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मौसम के इस बदलते पैटर्न के बारे में बहुत कुछ समझना अभी भी बाकी है। इसलिए इस दिशा में पिछले तकरीबन तीस सालों के आंकड़ों का गहनता से आंकलन बेहद जरूरी है। अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि हिमालय में वायु प्रदूषण पर जीवाश्म ईंधन के जलने का ज्यादा असर पड़ रहा है। हिमालय अंचल में गाड़ियों की बेतहाशा कई गुणा बढ़ती तादाद हवा में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी का अहम कारण है। साथ ही हिमालय बस्तियों और शहरों के बढ़ते बोझ से अब हांफने लगा है। वहीं ग्लोबल वार्मिंग के चलते तेजी से ग्लेशियर पिघलकर बनी झीलें जल प्रलय को आमंत्रण दे रही हैं। इस मामले में इसरो की मानें तो हिमालय क्षेत्र की 2432 ग्लेशियर झीलों में से 672 झीलों का तो आकार तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। इनमें से भारत में मौजूद 130 झीलों के टूटने का खतरा हमेशा बना हुआ है, जिससे भारी तबाही की आशंका है। इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। इसमें दो राय नहीं कि दिनोंदिन बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन की आंधी ग्लेशियरों के विनाश का सबब बन रही है।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 13:06:52 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही: गड्ढों से भरी सड़क का सफर खतरनाक, राहगीरों की बढ़ी मुश्किल</title>
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                        <![CDATA[खस्ताहाल सड़क के चलते जाम की स्थिति बन जाती है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--pothole-filled-roads-make-travel-dangerous--increasing-difficulties-for-pedestrians/article-127218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर उपखंड के सारोला ग्राम में खानपुर से अंदर सरोल में जाने वाले मार्ग में सड़क मार्ग पर इतने ऊबड खाबड गड्ढे हो रहे हैं कि राहगीर को परेशानी उठानी पड़ रही है। इन गड्ढों से कई बार वाहन पलटी खा सकते है। वहीं कई बार खस्ताहाल सड़क के चलते जाम की स्थिति बन जाती है। इस सड़क मार्ग से कस्बेवासी, वाहन चालक, स्कूल के विद्यार्थी आदि का प्रतिदिन गुजरना होता है, कई बार जान जोखिम में डालकर खस्ताहाल सड़क से निकलना पड़ता है।  वहीं नजदीक में पुलिस थाना बना हुआ है जिस तक जाने में भी परेशानी होती है। विभाग के अधिकारियों को कई बार खस्ताहल सड़क के बारे में अवगत करवा दिया लेकिन किसी प्रकार का कोई समाधान नहीं हुआ। सड़क पर गड्ढों से हादसे का भय बना रहता है। </p>
<p>इस सड़क मार्ग दुर्दशा को देखकर परेशानी और बढ़ जाती है। चंद मिनटों के सफर में कई घंटे लग जाते है। <br /><strong>-नलिन जैन, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यह सड़क मार्ग कभी भी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है, पहले भी कई बार दुर्घटना घटित हो चुकी है। सड़क मार्ग को जल्द से जल्द दुरूस्त करवाया जाए। <br /><strong>-लालचंद लखारा, कस्बेवासी </strong></p>
<p>उबड खाबड सड़क मार्ग से निकलने में परेशानी होती है , कई बार जाम के हालात बन जाते है। <br /><strong>-पूरी लाल सुमन, कस्बेवासी </strong></p>
<p> यह सारोला का मुख्य मार्ग है इस सड़क मार्ग पर कई बार वाहन चालक गिरकर चोटिल हो गए है। <br /><strong>-महावीर जोशी, कस्बेवासी</strong></p>
<p>इस रोड को बने हुए वर्षों बीत गए लेकिन यह रोड वैसा का वैसा ही है ऊबड खाबड। आम आदमी को बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>-सियाराम नेकाडी, कस्बेवासी </strong></p>
<p>यह खानपुर से सारोला के अंदर आने वाला मुख्य मार्ग है या मुख्य मार्ग की हालत इतनी बिगड़ी हुई है कि कभी भी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। <br /><strong>-प्रमोद सुमन, कस्बेवासी </strong></p>
<p>गौरव पथ बनेगा हमारे यहां से एनआइटी निकल चुकी है और टेंडर भी पास हो चुका है जल्दी ही रोड बन जाएगा।<br /><strong>   -विश्वेंद्र, पीडब्लूडी जेईएन खानपुर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 15:04:25 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलोनियों के बीच खाली प्लॉट बने क्रोकोडाइल प्वाइंट, वर्द्धमान कॉलोनी के प्लॉटों में भरा 4 से 7 फीट पानी </title>
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                        <![CDATA[शाम ढलते ही कॉलोनियों में सन्नाटा, दहशत में कट रही  क्षेत्र के बाशिंदों की रात]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों के बाशिंदे इन दिनों मगरमच्छ के आतंक से दहशत में हैं।  इन इलाकों में बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें 4 से 6 फीट तक बरसात का पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं होने से मगरमच्छों का अड्डा बन गए। बीच-बीच में पानी से बाहर निकल धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। रात को शिकार की तलाश में कॉलोनियों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हालात यह हो गए, शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। बच्चों को खेलना व बुजुर्गों का टहलना बंद हो गया।  क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मगरमच्छों का रेस्क्यू करने की गुहार लगाई लेकिन साधन संसाधनों से वंचित वनकर्मियों ने पानी में मगर से बैर लेने में असमर्थता जताई। ऐसे में रहवासी  दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>दहशत में कट रही रात </strong><br />पार्षद बलविंदर सिंह बिल्लू ने बताया कि कुन्हाड़ी क्षेत्र की वर्द्धमान कॉलोनी के आसपास बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं। इनमें 4 से 6 फीट पानी भरा हुआ है, जो मगरमच्छ  छिपे हुए हैं। दोपहर को नजर आते हैं फिर वापस पानी में चले जाते हैं। रात में सड़कों पर दौड़ते हैं। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। रोड लाइटें खराब होने से कॉलोनी में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में मगरमच्छ के घरों में घुसने व राहगीरों पर हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सुबह से रात तक चलाया पम्पसेट, 2 फीट पानी निकाला</strong><br />पार्षद बिल्लू ने बताया कि खाली प्लॉटों में कमर तक पानी भरा हुआ है। जिसे निकालने के लिए एक बड़ा मड पम्प लगाया है।  सुबह 10 से रात 8 बजे तक लगातार चलाकर पानी बाहर निकाला गया। जब तक पूरा पानी नहीं निकलेगा तब तक मगरमच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं होगा। हालांकि, क्षेत्रवासियों की सूचना पर  मंगलवार देर रात फोरेस्ट की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन मगरमच्छ के वापस पानी में चले जाने से रेस्क्यू नहीं हो सका। हालात यह हैं, पिछले 6 दिन से लोग दहशत में हैं। </p>
<p><strong>इधर, डीसीएम क्षेत्र में युवकों ने पकड़ा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />डीसीएम इलाके के सूर्य नगर की सड़क पर 5 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया, जिसे स्थानीय व्यक्तियों ने पकड़कर बोरखण्डी के नाले में छोड़ दिया। घटना तड़के 4 बजे की है। रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति ने मगरमच्छ को कंधे पर उठाकर वीडियो-फोटो खिंचवाया। फिर नाले में रिलीज किया। व्यक्ति का फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मगरमच्छ सड़क पर दौड़ता हुआ कार के टायर के पास चला गया। मौके पर मौजूद व्यक्तियों ने मगरमच्छ की आंख पर बोरी फेंककर उसे काबू किया। लाडपुरा रेंजर इंद्रेश सिंह ने बताया कि टीम ने कैथून इलाके में मगरमच्छ पकड़ा है। सूर्य नगर में मगरमच्छ आने की जानकारी नहीं है। जिस व्यक्ति ने सूर्य नगर में मगरमच्छ पकड़ा उसने विभाग को सूचना नहीं दी। उसके बारे में पता किया जा रहा है।</p>
<p><strong>बोरखेड़ा : पार्वती कॉलोनी में भी दहशत </strong><br />पार्वती कॉलोनी निवासी अरबाज ने बताया कि कॉलोनी में  खाली प्लॉटों में 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। जिनमें मगरमच्छ पनप रहे हैं। रात को घर की छत से टॉर्च लगाकर देखा तो भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से बाहर निकल सड़क पर जाता नजर आया। हाल ही में सड़क पर दौड़ता नजर आया था। इसी तरह देवली अरब, काला तलाब, नम्रता आवास सहित अन्य कॉलोनियों में आए दिन मगरमच्छ आने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>अलग-अलग प्लॉटों में छिपे मगरमच्छ</strong><br />स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, उपेंद्र यादव, सार्थक नागर ने बताया कि वर्द्धमान कॉलोनी में ही सड़क के दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉट पानी से लबालब हैं। यहां तीन से चार मगरमच्छ नजर आए हैं। रोड लाइटें भी खराब है, अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर निकले के दौरान मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। जिसकी वजह से बच्चों का खेलना भी छूट गया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 51 - बारिश में सड़कों के गढ्डे व आवारा कुत्तों से राहवासी परेशान</title>
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                        <![CDATA[कॉलोनी में खुले पड़े ट्रांसफार्मर से हादसे की आशंका]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-51---residents-troubled-by-potholes-and-stray-dogs-in-the-rain/article-126296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम दक्षिण वार्ड 51 में विकास कार्य तो किए गए हैं, लेकिन बारिश के दिनों में सड़क के गड्डे और नालियों पर लगाए गए ढकान वार्डवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। वार्डवासियों का कहना है कि मुख्य सड़कों की सफाई नियमित रूप से होती है और कचरा गाड़ी भी समय पर आती है, लेकिन गली-नुक्कड़ की सफाई न होने से कठिनाई बढ़ जाती है। इसके अलावा, रात्रि के समय आवारा कुत्ते राहगीरों और बाइक सवारों को परेशान कर रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। वार्डवासियों ने नगर निगम से नालियों की देखभाल और गली-सड़कों की सफाई के साथ सुरक्षा उपायों की भी मांग की है। वार्डवासी नितेश कुमार व  दिनेश ने बताया कि वार्ड की मुख्य रोड की सड़क की प्रतिदिन सफाई होती है पर अंदर की गली में सफाई नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>खाली प्लाट बने कचरा पात्र</strong><br />वार्डवासियों ने बताया कि हमारे पास स्थित खाली प्लॉट कचरा प्वाइंट बना हुआ है,  जिससे दिनभर बदबू आती है। वहीं कचरे को मवेशी इधर- उधर फैला देते है जो कि परेशानी का कारण बना हुआ है। </p>
<p><strong>सड़कों के गड्डे दे रहे दर्द </strong><br />वार्ड के मुख्य रोड की सड़कों के गड्डे बारिश की वजह से राहगीरों के परेशानी का कारण बने हुए। बाइक  सवार रहीम व दिनेश ने बताया कि हमारे वार्ड की मुख्य सड़क पर गड्डे होने से वजह से जब बारिश से इन गड्डों में पानी भर जाता है जब सही से गड्डे नहीं दिखाई देने के कारण राहगीर हादसे का शिकार हो जाते है। </p>
<p><strong>खुले बिजली ट्रांसफार्मर दे रहे हादसे को न्यौता</strong><br />वार्ड के श्रीनाथपुरम ए सेक्टर में स्थित बिजली के खुले ट्रांसफार्मर के पैनल खुले हुए है जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता हैं। साथ ही इसी के पास टॉयलेट भी स्थित जो कि बदहाल स्थिति में व इसमें सुविधा विकसित नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया </strong><br />श्रीनाथपुरम बी आधा,श्रीनाथपुरम ए आधा <br />(शिवलुक स्कूल के पीछे वाला भाग)</p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />वार्ड में कचरा गाड़ी आती है पर कोई समय निश्चित नहीं होने से  दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कचरा इधर उधर डालना पड़ता है। <br /><strong>-अभिषेक कुमार</strong></p>
<p>वार्ड के मुख्य रोड की सफाई तो होती है पर वार्ड के अंदर की रोड की सफाई नहीं होती है। <br /><strong>-कृष्णकांत</strong></p>
<p>वार्ड के रोड़ की मरम्मत व सीसी रोड बनवाने के लिए लिखित में अधिकारियों को देख रखा है। खाली प्लॉट के मालिकोें को नोटिस देकर अवगत कर रखा है साथ ही इनमें जला हुआ आॅयल भी घास-फूस में डाला गया है। <br /><strong>- बालचंद शर्मा, पार्षद 51 बीजेपी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 14:40:46 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 8- सालभर से टूटी सड़कें बनी मुसीबत</title>
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                        <![CDATA[जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कें लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-8--broken-roads-have-become-a-problem-for-a-year/article-125779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 8 में मूलभूत सुविधाओं के अभाव की वजह से स्थानीय रहवासी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। वार्ड क्षेत्र में बच्चों के खेलने से लेकर सफाई, सुरक्षा और सड़कों की स्थिति तक हर जगह अव्यवस्था का माहौल है। गुलाब बाग में सालभर पहले सीवरेज के दौरान खोदी गई सड़के उसी हालात में छोड़ दी जिससे लोग परेशान है। वार्डवासियों का कहना है कि समस्यों के बारे में किसको बताए।  चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।</p>
<p><strong>आवारा कुत्तों से दहशत</strong><br />रहवासीयों ने बताया कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान ही नहीं हो रहा हैं। कुत्तों के झुंड आए दिन लोगों का पीछा करते हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को काटने की घटनाएं भी हो चुकी हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />जेडीबी कॉलेज, सरस्वती कॉलोनी, अमृत कलश, राजेन्द्र विहार, गुलाब बाग, आकाशवाणी कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>बच्चों के लिए नहीं मैदान</strong><br />वार्ड में बच्चों के खेलने के लिए न तो कोई पार्क है और न ही खेल का मैदान। संकरी गलियों में बच्चे खेलने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जन प्रतिनिधियों ने कई बार वादा किया लेकिन आज तक बच्चों के लिए खेलने की सुरक्षित जगह नहीं बनाई गई।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>सीवरेज के कार्य के बाद जर्जर हुई सड़कें</strong><br /> गुलाब बाग क्षेत्र में सीवरेज लाइन डालने के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं। काम पूरा होने के बाद उन्हें दुरुस्त किए बिना ही छोड़ दिया गया। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कें लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। <br /><strong>- संतोष राठौर, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>सफाई व सुरक्षा की कमी</strong><br />आकाशवाणी क्षेत्र सहित वार्ड के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। नालियां चोक रहती हैं। बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था का भी अभाव है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से चोरियां और असामाजिक तत्वों का खतरा बना रहता है।<br />- शर्मीला सोनी, वार्डवासी</p>
<p><strong>मच्छरों का प्रकोप</strong><br />खाली पड़े प्लॉटों में बारिश का पानी भरने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। निगम द्वारा न तो समय पर फॉगिंग की जाती है और न ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव। डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।<br /><strong>- धर्मपाल अरोड़ा, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में विकास कार्यों की कोई कमी नहीं गई। यदि किसी भी वार्डवासी को समस्या होती है तो उसका समय पर समाधान करवाना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। मैं रोजाना वार्ड का राउंड लगाकर जनता से जुड़ने का प्रयास करता हूं।<br /><strong>- राजेन्द्र सुवालका, पार्षद</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 14:41:29 +0530</pubDate>
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