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                <title>hungry - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भूखे भेडिये की तरह झपट रहे हैं श्वान,आमजन परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के हर गली मौहल्ले व एरिया में आए दिन इस तरह के मामले हो रहे हैं। वहीं केवल कोटा शहर में ही नहीं अन्य शहरों में भी श्वानों के हमले हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dogs-are-attacking-like-hungry-wolves--common-people-are-troubled/article-118592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/9632.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में इन दिनों श्वान काफी खूंखार हो रहे हैं।  गली मौहल्ले ही नहीं मुख्य मार्गों तक  पर आवारा श्वानों के झुंड राह चलते लोगों पर हमले कर रहे हैं। जिससे आमजन इतना अधिक परेशान हो चुके हैं कि अब तो श्वानों के झुंड देखते ही उनमें दहशत होने लगी है। हालत यह है कि शहर में रोजाना आधा दर्जन से अधिक मामले अस्पतालों में श्वानों के काटने के पहुंच रहे हैं। स्वामी विवेकानंद नगर में एक दिन पहले श्वानों के झुंड ने डेढ़ साल के मासूम बालक को घेरकर उस पर हमला कर दिया था। श्वानों ने उस बच्चे के शरीर पर न केवल काटा वरन् उसे काफी दूर तक घसीटकर भी ले गए। जिससे बच्चे की हालत खराब हो गई। वह चीखने चिल्लाने लगा तो लोगों ने श्वानों को भगाकर बालक को बचाया। ऐसा केवल इस बालक के साथ ही नहीं हुआ है। शहर के हर गली मौहल्ले व एरिया में आए दिन इस तरह के मामले हो रहे हैं। वहीं केवल कोटा शहर में ही नहीं अन्य शहरों में भी श्वानों के हमले हो रहे हैं। बुधवार को भी राज्य में कई जगह पर श्वानों के हमले के वीडियो वायरल हुए जिनमें श्वान लोगों पर झपटकर उन्हें काटते हुए दिख रहे हैं। घर से बाहर निकलते ही चाहे महिलाएं हो या बुजुर्ग या फिर छोटे बच्चे श्वान उन्हें देखते ही उन पर भूखे भेडिये की तरह झपट रहे हैं और उन्हें शिकार बना रहे हैं। श्वानों के हमले व काटने के कई मामले तो उजागर हो रहे हैं लेकिन ऐसे भी कई मामले हैं जिनकी तो जानकारी तक नहीं मिल पाती। अस्पतालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में सरकारी व निजी अस्पतालों में रोजाना 6 से 7 मामले श्वानों के काटने के आ रहे हैं। </p>
<p><strong>श्वानशाला बनाई, कारगर नहीं हो पाई:</strong> शहर में श्वानों के बढ़ते आतंक व हमलों को देखते हुए नगर निगम की ओर से श्वानशाला तो बना दी गई। नगर निगम के वर्तमान बोर्ड का गठन होने के बाद वर्ष 2021 में पहले कोटा दक्षिण निगम  में और फिर कोटा उत्तर निगम में श्वानशाला का निर्माण किया गया। यहां श्वानों को लाकर रखा जाता है। उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जाता है। उसके बाद निर्धारित अवधि दो से तीन दिन में उन श्वानों को फिर से उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से उन्हें पकड़कर लाया जाता है। ऐसे में न तो शहर में श्वानों की संख्या कम हो रही है और न ही निगम की कार्रवाई का असर नजर आ रहा है। श्वान शाला निर्माण और श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण पर हर साल लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद यह उतनी कारगर नहीं हो पाई जितनी होनी चाहिए थी।  वरन् हालत यह है कि बधियाकरण व टीकाकरण के बाद श्वान अधिक खूंखार हो रहे हैं। </p>
<p><strong>महापौर पुत्र व महिला पार्षद को बना चुके शिकार</strong><br />श्वानों द्वारा राह चलते लोगों पर हमले किए जा रहे हैं फिर चाहे वह कोई भी हो। नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल के पुत्र पर साइकिल से जाते समय ही साबरमती कॉलोनी में श्वान हमला कर चुके हैं। जिससे उनके पैर में काट लिया था। इतना ही नहीं स्कूटी पर घर जाते समय नगर निगम कोटा दक्षिण की भाजपा पार्षद रीता सलूजा तक को श्वान शिकार बना चुके हैं। उनके भी पैर में श्वानों ने काट लिया था। बजरंग नगर, केसर बाग और बोरखेड़ा समेत कई क्षेत्रों  में भी पूर्व में कई लोगों को श्वानों द्वारा काटने के मामले होे चुके हैं। </p>
<p><strong>निगम कार्यालय तक में श्वानों का जमघट</strong><br />शहर के मुख्य मार्ग और गलियों में ही नहीं, श्वानों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाले नगर निगम कार्यालय तक में श्वानों का जमघट लगा हुआ है। यहां करीब 3 से 4 श्वान ऐसे हैं जो पूरे कार्यालय में ऊपर से नीचे तक घूमते रहते हैं। सबसे अधिक श्वान तो कार्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में घूमते रहते हैं। जहां आमजन की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों के लिए भी ये श्वान खतरा बने हुए हैं। </p>
<p><strong>तीन साल में 24 हजार से अधिक का बधियाकरण </strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्वानशाला बनने के बाद से नगर निगम तीन साल में 24 हजार से अधिक श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करवा चुका है। उसके बाद भी अभी तक बड़ी संख्या में ऐसे श्वान हैं जिनका बधियाकरण नहीं हुआ है।  नगर निगम की ओर से श्वानशाला का निर्माण तो वर्ष 2021 में करवा दिया था। लेकिन बधियाकरण का काम एनिवल सोसायटी के माध्यम से अप्रैल 2022 को शुरु किया था। अप्रैल 2022 सेमार्च 2024 तक 15 हजार से अधिक, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 8700 और अप्रैल 25 से अभी तक जून में 550 श्वान यानि करीब 24 हजार 300 से अधिक श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है। </p>
<p><strong>कोर्ट का आदेश हो तो बाड़े में रखने को तैयार निगम</strong><br />शहर में श्वानों की समस्या काफी गम्भीर है। उसे देखते हुए ही बोर्ड बनने के बाद श्वानशाला बनवाई गई। जहां सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन  की पालना करते हुए शवानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। कोर्ट का आदेश श्वानों को पकड़ने में आड़े आ रहा है। यदि कोर्ट निगम को आदेश दे या पूर्व के आदेश में संशोधन होता है तो नगर निगम आवारा श्वानों को शहर से दूर अलग बाड़े में रखने को तैयार है। श्वानों के खाने व उनकी देखभाल की जिम्मेदारी व व्यवस्था भी निगम के स्तर पर करने को तैयार है। जिससे श्वानों को भी कोई नुकसान नहीं होगा और लोगों को भी राहत मिलेगी। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:02:55 +0530</pubDate>
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                <title>वो बेजुबान किससे कहें कि हमें भी भूख लगती है</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में निगम की गौशाला में न तो भूसा है और न ही हरा चारा। ऐसे में पशुओं को सिर्फ मक्का की कुट्टी खाकर ही काम चलाना पड़ रहा है। इसका कारण निगम अधिकािरयों द्वारा समय पर भूसे व चारे का टेंडर नहीं करना है। वर्तमान में भी भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए और निगम अधिकारियों ने भूसे के टेंडर को सोमवार को फाइनल किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/to-whom-should-the-voiceless-say-that-we-too-feel-hungry/article-28958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/wo-bezubaan-kis-se-kahe-ki-hamei-bhi-bhookha-lagti-hai.....kota-news...8.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की गौशाला में सैकड़ों की संख्या में गाय व अन्य पशु हैं लेकिन उनके लिए गौशाला में भूसा तक नहीं है। जिससे उन्हें भूखे रहना पड़ रहा है। इसका कारण हर बार भूसे के टेंडर में देरी होना है। साथ ही टेंडर शर्त की पालना नहीं करने पर संवेदक के खिलाफ भी नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।  नगर निगम द्वारा बंधा धर्मपुरा में गौशाल और किशोरपुरा में कायन हाउस का संचालन किया जा रहा है। गौशाला में करीब 2 हजार से अधिक गौवंश है। जिनमें गाय से लेकर बैल तक शामिल हैं। हालांकि अधिकतर पशु बिना दूध देने वाले और बीमार हालत में आने वाले है। ऐसे में गौशाला में आने वाले पशुओं का पेट भरने की जिम्मेदारी भी नगर निगम की है। इसके लिए नगर निगम द्वारा गौशाला में भूसा, हरा चारा, चापड़ और गुड़ व खल समेत अन्य पशु आहार क्रय किया जाता है। जिस पर हर साल लाखों रुपए खर्च करने का बजट भी है। लेकिन हालत यह है कि निगम अधिकारी समय पर भूसे व चारे का टेंडर तक नहीं कर पा रहे हैं। जिससे नया टेंडर होने से पहले ही भूसा व चारा खत्म हो रहा है। जब तक नया टेंडर अस्तित्व में आता है और भूसा व चारा गौशाला में सप्लाई होता है तब तक इसके अभाव में गौवंश को भखा रहने या कम भूसा खाने और इसके विकल्प से ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसा निगम की गौशाला में पिछले  कई दिन से हो भी रहा है। वर्तमान में निगम की गौशाला में न तो भूसा है और न ही हरा चारा। ऐसे में पशुओं को सिर्फ मक्का की कुट्टी खाकर ही काम चलाना पड़ रहा है। इसका कारण निगम अधिकािरयों द्वारा समय पर भूसे व चारे का टेंडर नहीं करना है। वर्तमान में भी भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए और निगम अधिकारियों ने भूसे के टेंडर को सोमवार को फाइनल किया है। </p>
<p><strong>कई बार आ चुकी समस्या</strong><br />निगम की गौशाला में गौवंश के लिए चारे व भूसे की समस्या आए दिन की बात हो गई है। यहां कभी भूसा नहीं रहता है तो कभी हरा चारा। भूसा व चारा सप्लाई होता भी है तो उसकी मात्रा इतनी कम रहती है कि वह पशुओं को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। जिससे उन्हें अधूरे पेट ही रहना पड़ रहा है।  हालत यह है कि वैसे तो टेंडर एक साल का होता है लेकिन कई बार शॉर्ट टर्म के लिए भी टेंडर जारी किए जाते हैं। संवेदक भी कम दर पर टेंडर तो ले लेते हैं लेकिन बाद में भूसे की कीमत बढ़ने  पर या तो कम मात्रा में सप्ताई करने लगते हैं। ऐसा भी नहीं होने पर भूसे की क्वा लिटी खराब कर दी जाती है। </p>
<p><strong>पहले भी पकड़ी जा चुकी भूसा सप्लाई में गड़बड़ी</strong><br />नगर निगम का नया बोर्ड बनने के बाद कोखा दक्षिण के आयुक्त व महापौर ने वहां की व्यवस्थाएं सुधारने के काफी प्रयास किए। पहले संवेदक द्वारा न तो पर्याप्त मात्रा में भूसा सप्लाई किया जा रहा था और न ही उसकी क्वालिटी सही थी। जिसे महापौर राजीव अग्रवाल ने कुछ समय पहले पकड़ा था। उसके बाद कुछ दिन स्थिति में सुधार हुआ। लेकिन वापस वही स्थिति हो गई। </p>
<p><strong>मक्का की कुट्टी से चला रहे काम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के भाजपा पार्षद सुरेन्द्र राठौर का आरोप है कि गौशाला में भूसा खत्म हुए कई दिन हो गए। गायों को सिर्फ मक्का की कुट्टी खिलाई जा रही है। उसकी मात्रा में बहुत कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम अधिकारी समय पर भूसे के टेंडर नहीं करते जिससे हर बार इस तरह की समस्या हो रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> गौशाला में हरा चारा तो काफी समय से नहीं आ रहा है। भूसे का टेंडर अधिकािरयों ने कर दिया है लेकिन वह देरी से किया है। जिससे भूसा समय पर सप्लाई नहीं हो पाया। हालाकि गौशाला में गायों को भूखा नहीं रखा गया। उन्हें मक्का की कुट्टी खिलाफ गई। अधिकारियों को समय पर टेंडर करने के लिए कई बार कहा जा चुका है। लेकिन सुनवाई ही नहीं करते। <br /><strong>-जितेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, गौशाला व्यवस्था समिति</strong></p>
<p>भूसे का टेंडर तो काफी समय पहले ही कर दिया  था। लेकिन दीपावली अवकाश समेत छुट्टियां अधिक होने से उसे फाइनल नहीं किया जा सका था। सोमवार को नेगोसिएशन कर टेंडर को फाइनल कर दिया है। मंगलवार से गौशाला में भूसा सप्लाई होना शुरू हो जाएगा। साथ ही संवेदक द्वारा गौशाला के गोदाम में निर्धारित मात्रा में भूसे का स्टॉक नहीं रखने पर उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 16:21:47 +0530</pubDate>
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                <title>कंगना ने गांधीजी को बताया सत्ता का भूखा,  लिखा: वह चाहते थे भगत सिंह को फांसी हो</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेत्री के फिर बिगड़े बोल : इंस्टाग्राम पर किए मैसेज पोस्ट, राष्ट्रपिता पर साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A4%BE---%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE--%E0%A4%B5%E0%A4%B9-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%A5%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B/article-2458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/kangana_ranaut_ians_41.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई</strong>। कंगना रनौत ने एक बार फिर से महात्मा गांधी के खिलाफ विवादित बयान दिया है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लंबे मैसेज पोस्ट किए हैं। पोस्ट में महात्मा गांधी पर निशाना साधा है। पहले मैसेज में कंगना ने उन्हें सत्ता का भूखा और चालाक बताया है वहीं दूसरे पोस्ट में लिखा है कि गांधी जी चाहते थे कि भगत सिंह को फांसी हो जाए। कंगना ने लोगों को सलाह दी है कि वह अपने हीरो समझदारी से चुनें। उन्होंने यह भी लिखा है कि झापड़ मारने वाले के सामने दूसरा गाल आगे करने से आजादी नहीं मिलती<strong>।<br /> <br /> जो लोग स्वतंत्रता के लिए लड़े उन्हें उन लोगों ने अपने मालिकों को सौंप दिया</strong><br /> कंगना रनौत के पिछले बयान पर बवाल अभी थमा नहीं इस बीच उन्होंने कुछ और आपत्तिजनक पोस्ट कर दिए हैं। कंगना ने लिखा है, जो लोग स्वतंत्रता के लिए लड़े उन्हें उन लोगों ने अपने मालिकों को सौंप दिया जिनमें हिम्मत नहीं थी, न ही खून में उबाल। वे सत्ता के भूखे और चालाक थे..., ये वही थे जिन्होंने हमें सिखाया अगर कोई तुम्हें थप्पड़ मारे तो उसके आगे एक और झापड़ के लिए दूसरा गाल कर दो और इस तरह तुमको आजादी मिल जाएगी..., ऐसे किसी को आजादी नहीं मिलती सिर्फ भीख मिलती है। अपने हीरो समझदारी से चुनें। <br /> <br /> <strong>लोगों को पता होना चाहिए इतिहास</strong><br /> कंगना ने दूसरे पोस्ट में लिखा है, गांधी ने कभी भगत सिंह और नेताजी को सपोर्ट नहीं किया। कई सबूत हैं जो इशारा करते हैं कि गांधीजी चाहते थे कि भगत सिंह को फांसी हो जाए। इसलिए आपको चुनना है कि आप किसे सपोर्ट करते हैं। क्योंकि उन सबको अपनी याद के एक ही बॉक्स में रख लेना और उनकी जयंती पर याद कर लेना काफी नहीं सच कहें तो मूर्खता नहीं बल्कि गैरजिम्मेदाराना और सतही है। लोगों को अपना इतिहास और अपने हीरो पता होने चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 17 Nov 2021 12:09:37 +0530</pubDate>
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                <title>विशेष शिक्षक सिर पर काली पट्टी बांधकर आज और कल भूखे पेट रहकर मनाएंगे काली दिवाली</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80/article-2104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। विशेष शिक्षक भर्ती को लेकर शहीद स्मारक पर धरना 21वे दिन भी जारी। रीट भर्ती 2021 में विशेष शिक्षको के 5000 पदों की है माँग। जिससे दिव्यांगों को शिक्षा का अधिकार मिल सके और समाज की मुख्य धारा से जुड़ सके। राजस्थान में विशेष शिक्षकों की भारी कमी रीट में विशेष शिक्षकों के पद शामिल करने को लेकर शहीद स्मारक जयपुर में विशेष शिक्षकों का इसलिए किस दिनों से धरना चल रहा है विशेष शिक्षकों की कमी से दिव्यांग शिक्षा से दूर हो रहे हैं जिससे वे समाज की मुख्यधारा नहीं जुड़ पा रहे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया कि प्रत्येक स्कूल में एक विशेष शिक्षक नियुक्त होना चाहिए राजस्थान में केवल 1326 विशेष शिक्षक है यहां तक राजस्थान में कुछ विशेष स्कूलों में भी सामान्य अध्यापक कार्यरत है जिसके दिव्यांगों की शिक्षा बाधित हो रही है इनकी प्रमुख मांग रीट के द्वारा 5000 विशेष शिक्षकों की भर्ती हो जिससे इस कमी से कुछ राहत मिले|</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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