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                <title>dollar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर, अमेरिकी टैरिफ और विदेशी निवेश की निकासी से बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/the-pressure-increased-due-to-the-withdrawal-of-us-tariffs/article-128197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(9)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहा है। वर्तमान स्थिति में एक डॉलर की कीमत लगभग 88.65 रुपए है, जो पिछले कुछ महीनों में रुपए की गिरावट को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार बंद होने के समय (27 सितंबर को बंद होने पर) डॉलर का भाव 88.63 रुपए था, जो सप्ताहांत से पहले की अंतिम दर थी।</p>
<p><strong>गिरावट की मुख्य वजह :</strong></p>
<p>इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए बढ़ते टैरिफ, एच.1बी वीजा शुल्क में भारी वृद्धि और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी बताई जा रही है।</p>
<p><strong>निर्यातकों के लिए फायदेमंद :</strong></p>
<p>रुपए की इस कमजोरी का सीधा असर भारत के आयात-निर्यात पर पड़ रहा है। कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते हो जाते हैं, जिससे निर्यात में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।</p>
<p><strong>ट्रम्प टैरिफ से जोखिम बढ़ा :</strong></p>
<p>उदाहरण के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और हीरे जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, हालांकि अमेरिकी टैरिफ  इन सेक्टरों पर जोखिम बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>मुद्रास्फीति बढ़ेगी, आयात बिल बढ़ेगा :</strong></p>
<p>वहीं, आयात महंगे होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, खासकर कच्चे तेल जैसे आवश्यक वस्तुओं का, जो भारत की 80-85% जरूरतों को पूरा करता है। इससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और चालू खाता घाटा (सीएडी) पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर निर्यात में संभावित उछाल अर्थव्यवस्था को संतुलित करने में मदद कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 11:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर, सात पैसे टूटकर 86.16 रुपए प्रति डॉलर पर</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के कारण रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-lost-seven-paise-to-rs-8616-per-dollar-for/article-120987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer45.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के कारण रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर के टूटने से भारतीय मुद्रा में सुबह के कारोबार में तेजी रही। रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 85.99 रुपए प्रति डॉलर पर खुला और 85.9750 रुपए प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ। घरेलू स्तर पर हालांकि शेयर बाजार में जारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से यह कमजोर हुआ। बीच कारोबार में 86.23 रुपए प्रति डॉलर के दिन के निचले स्तर को छूने के बाद यह 7.50 पैसे नीचे 86.1650 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।  </p>
<p><strong>दाम बढ़ने से रुपए पर दबाव :</strong></p>
<p>एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष अनुसंधान विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने बताया कि हाल के दिनों में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रुपए पर दबाव है। साथ ही, पूंजी बाजार में कमजोर निवेश धारणा का असर भी देखा जा रहा है। डॉलर  सूचकांक में हालांकि नरमी से रुपये की गिरावट सीमित रही है। उनका मानना है कि फिलहाल रुपए का दायरा बदलकार 85.80 से 86.45 रुपए प्रति डॉलर हो गया है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल में बड़ी तेजी :</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में बड़ी तेजी रही। लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा 1.51 प्रतिशत चढ़कर 70.57 डॉलर प्रति बैरल पर था। तेल आयातकों की ओर से डॉलर की मांग निकलने से रुपए पर दबाव बढ़ गया है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 12:15:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प के व्यापार शुल्क संबंधी फैसलों से रुपया, अन्य मुद्राएं दबाव में, प्रभावित हो सकते हैं बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक बाजार की अनिश्चिताओं के बीच बीते समाप्त अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले रुपए पर लगातार दबाव बना रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-other-currencies-may-be-affected-by-the-business-of/article-120397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer-(12).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश के वृहद आर्थिक संकेतों की मजबूती और मुद्रास्फीति में नरमी के बावजूद वैश्विक बाजार की अनिश्चिताओं के बीच बीते समाप्त अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले रुपए पर लगातार दबाव बना रहा और यह आलोच्य सप्ताह के दौरान कुल मिला कर 46.30 रुपए कमजोर रहा। बाजार में इस समय अमेरिका में आयात शुल्क के निर्णयों से अनिश्चिता बढ़ गई है और कारोबारियों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर घोषणा की प्रतीक्षा है। जुलाई में स्थानीय शेयर बाजारों की कुल मिला कर बिकवाली बने रहने का भी रुपए पर असर पड़ा है। अमेरिका में आयात शुल्क दरों पर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सप्ताह के दौरान की गयी घोषणाओं से बाजार सहमे हुए हैं। इस बीच विश्व की प्रमुख मुद्राओं के समक्ष डालर की मजबूती से भी रुपए पर दबाव बढ़ा है। सप्ताह के दौरान जापानी येन, कनाडायी डालर और यूरो अमेरिकी डॉलर के समक्ष नीचे आ गए थे। ब्रिटेन का पौंड वहां की अर्थव्यवस्था में मई में संकुचन की रिपोर्ट के बाद दो सप्ताह के अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था।</p>
<p><strong>डिजिटल मुद्राओं का बाजार है गर्म : </strong>ट्रम्प सरकार की नीतियों से बिटकायन जैसी डिजिटल मुद्राओं का बाजार गर्म है। बाजार को लगता है कि ऐसी मुद्राओं के कारोबार को आने वाले समय में मजबूत वैधानिक मान्यता मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप सरकार के निकट के लोगों की एक कंपनी ने हाल में पाकिस्तान में डिजिटल करेंसी और ब्लाक चेन प्रौद्योगिकी का करार किया है।  अमेरिका का व्यापार घाटा कम करने तथा घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के अपनी लक्ष्यों के तहत  ट्रम्प ने बांग्लादेश, म्यांमार, जापान, इंडोनेशिया, सिंगापुर समेत करीब 15 देशों पर ऊंची दर से प्रशुल्कों की घोषणा की जो पहली अगस्त से लागू किए जाएंगे। उन्होंने कनाडा के खिलाफ 35 प्रतिशत और ब्राजील के खिलाफ राजनीतिक कारणों से 50 प्रतिशत का शुल्क घोषित कर दिया है।</p>
<p><strong>आठ पैसे की गिरावट की गई थी दर्ज :</strong></p>
<p>अमेरिका में तांबे और औषधियों पर आयात शुल्क बढ़ाने के बारे में राष्ट्रपति ट्रम्प की घोषणाओं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितताओं और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में सुधार के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में बुधवार को करीब आठ पैसे की गिरावट दर्ज की गई थी। जबकि मंगलवार को 10 पैसे की मजबूती दर्ज की गई।   राष्ट्रपति  ट्रम्प ने अप्रैल में विभिन्न देशों पर 10 प्रतिशत के मूल शुल्क के ऊपर ऊंची दर से जवाबी शुल्क लगाने की घोषणाएं की थी। भारत पर 26% शुल्क लगाने की घोषणा की गई थी। ट्रम्प ने इनका कार्यान्वयन 90 दिन के लिए स्थगित कर दिया था और यह समय सीमा नौ जुलाई को समाप्त हो रही है।</p>
<p><strong>प्रभावित हो सकते हैं बाजार :</strong></p>
<p>सप्ताह मैक्सिको और यूरोपीय संघ पर 30 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाने के ट्रम्प के ताजा फैसले से इस सप्ताह भी फारेक्स बाजार प्रभावित हो सकते हैं। यूरोपीय संघ और मैक्सिको ने अमेरिका के फैसले को अनुचित बताया है और इस पर बातचीत करने की अपनी मंशा दोहराते हुए जवाबी कार्रवाई का भी संकेत दिया है। ऐसा होता है तो विश्व व्यापार प्रभावित होगा तथा मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा। सप्ताह के दौरान रुपया सोमवार को 42.50 पैसे तेज गिरावट से  85.8150 पर बंद हुआ। उससे पिछले सप्ताह शुक्रवार को रुपया मजबूत हो कर 85.39 पर बंद हुआ था। इस सप्ताह शुक्रवार को रुपया  वैश्विक व्यापार परिदृश्य को लेकर व्याप्त अनिश्चितताओं और स्थानीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट के बीच करीब 27 पैसे की तेज गिरावट के साथ  85.8536  प्रति डॉलर के स्तर कमजोर हो गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Jul 2025 11:00:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशी मुद्रा भंडार 7.54 अरब घटकर 572.7 अरब डॉलर पर</title>
                                    <description><![CDATA[ इसी तरह इस अवधि में स्वर्ण भंडार 83 करोड़ डॉलर की गिरावट लेकर 38.4 अरब डॉलर पर रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/forex-reserves-down-754-billion-to-5727-billion/article-15979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/74.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, स्वर्ण भंडार और विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में कमी आने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 15 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 7.54 अरब डॉलर कम होकर 872.7 अरब डॉलर पर आ गया जबकि इसके पिछले सप्ताह यह 8.06 अरब डॉलर घटकर 580.3 अरब डॉलर रहा था।<br /><br />रिजर्व बैंक की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़े के अनुसार, 15 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 6.53 अरब डॉलर कम होकर 511.6 अरब डॉलर पर आ गया। इसी तरह इस अवधि में स्वर्ण भंडार 83 करोड़ डॉलर की गिरावट लेकर 38.4 अरब डॉलर पर रहा। आलोच्य सप्ताह विशेष आहरण अधिकार 15.5 करोड़ डॉलर गिरकर 17.9 अरब डॉलर पर रहा। इसी तरह इस अवधि में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि में बढ़ोतरी हुई है और यह 2.9 करोड़ डॉलर घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Jul 2022 15:20:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>80 पार गया रुपया, फिर हुआ थोड़ा मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[अंत में पिछले सत्र के 79.98 रुपए प्रति डॉलर की तुलना में 6 पैसे की बढ़त लेकर 79.92 रुपए प्रति डॉलर हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rupee-crossed-80-then-became-a-little-stronger/article-15326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/65465465.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। शुरुआती कारोबार में रुपया दो पैसे गिरकर 80.00 रुपए प्रति डॉलर पर खुला और लिवाली के दबाव में अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर 80.05 रुपए प्रति डॉलर तक गिर गया। हालांकि लिवाली के बल पर यह 79.87 रुपए प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर भी पहुंचा। अंत में पिछले सत्र के 79.98 रुपए प्रति डॉलर की तुलना में 6 पैसे की बढ़त लेकर 79.92 रुपए प्रति डॉलर हो गया। पिछले कारोबारी दिवस रुपया 16 पैसे गिरकर 79.98 रुपए प्रति डॉलर पर रहा था।</p>
<p><strong>रुपए में गिरावट बाहरी कारणों से : सरकार</strong> <br />भारतीय मुद्रा की विनिमय दर डॉलर के मुकाबले 80 रुपए से नीचे जाने पर हो रही आलोचनाओं के बीच सरकार ने कहा कि रुपए की नरमी इस समय मुख्य रूप से यूक्रेन-रूस लड़ाई, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक वित्तीय हालात के कारण है।</p>
<p><strong>पाउंड, येन और यूरो ज्यादा कमजोर हुए</strong><br />वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि वर्ष 2022 में ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड, जापान का येन और यूरोप की साझा मुद्रा यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा की तुलना में कहीं अधिक कमजोर पड़ी हैं और इसकी वजह से इन मुद्राओं के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है।</p>
<p><strong>आरबीआई की नजर</strong><br />चौधरी ने कहा कि आरबीआई विदेशी विनिमय बाजार पर बराबर निगाह रखता है और बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर हस्तक्षेप करता है। चौधरी ने अपने जवाब में रुपए की गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी, जिनमें बॉन्ड में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को बढ़ाने के लिए नियमों में संशोधन और स्वचलित मार्ग से विदेशी वाणिज्यिक ऋण जुटाने की सीमा को बढ़ाकर 1.5 अरब डॉलर करने जैसे निर्णय शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Jul 2022 09:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया में अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर गिरावट,  डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74, रुपया 80 का आकंड़ा छूने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। लगातार रुपये में गिरावट देखी जा रही है और एक बार फिर रुपये अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक की तमाम कोशिश के बावजूद भी लगातार रुपये में होने वाली गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरूवार को फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74 रुपये तक चला गया जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rupee-declines-to-the-lowest-level-ever-against-dollar--rupee-79--74-against-dollar--rupee-is-expected-to-touch-80/article-14663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/rupee.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लगातार रुपये में गिरावट देखी जा रही है और एक बार फिर रुपये अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक की तमाम कोशिश के बावजूद भी लगातार रुपये में होने वाली गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरूवार को फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74 रुपये तक चला गया जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले ही यह 79.66 के निचले स्तर पर था लेकिन अब लग रहा है कि जल्द ही यह 80 के निचले आंकड़े को भी छू सकता है।<br /><br /><strong>रूपये के गिरने की वजह यह रही</strong><br />आज के ट्रेड के दौरान रुपया सुबह 79. 92 रुपये पर खुला था। लेकिन अगर पूरे दिन के ट्रेड की बात करें तो एक समय ऐसा भी आया की यह 79.92 के स्तर तक भी पहुंच गया था। करेंसी बाजार के बंद होते होते यह 79. 88 के पायदान पर पहुंचकर बंद हुआ। देखा जा रहा है कि इस हफ्ते भारतीय बाजार में विदेशी निवेशको की मुनाफावसूली करने के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी गयी है। हम कह सकते हैं कि विदेशी बाजार में अस्थिरता के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। आपको बतादें 23 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के युद्ध से पहले रुपया, डॉलर के मुकाबले 74.62 रुपये पर था।<br /><br /><strong>महंगे डॉलर से यह होगी परेशानियां</strong><br />महंगे डॉलर से भारत को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सरकार विदेश से तेल खरीदती है जिसका भुगतान डॉलर में किया जाता है और अगर रुपया के मुकाबले डॉलर की कीमत ज्यादा होगी तो भारत को डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपये भुगतान करने पड़ेंगे। जिसके कारण आयात भी महंगा होगा और लोगों को पेट्रोल डीजल पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। सरकारी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल के दाम में उछाल के बावजूद 6 अप्रैल के बाद से पेट्रोल – डीजल के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं किया है, जिसके चलते भारत सरकार को पहले से ही नुक्सान झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा डॉलर की बढ़ोत्तरी से विदेश में पढाई भी और अधिक महंगी हो जाएगी। इसके अलावा खाने का तेल पहले से ही महंगा है पर अगर रुपये की ये हालत रही तो खाने का तेल भी महंगा हो जायेगा। इसके अलावा जो भी वस्तुएं भारत सरकार विदेश से खरीदती है उन सब में भी उछाल देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 13:33:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय रुपया लुढ़का, डॉलर चमका</title>
                                    <description><![CDATA[ रुपए की तुलना में डॉलर के मूल्य में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है या दूसरे शब्दों में डॉलर महंगा तथा रूपया सस्ता हो गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/indian-rupee-falls--dollar-shines/article-9928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/note.jpg" alt=""></a><br /><p>यूक्रेन- रूस युद्ध के पश्चात भारतीय रुपया लुढ़का है तथा विश्व में यूएस डॉलर मजबूती को प्राप्त कर रहा है, 12 मई 2021 को  डॉलर का मूल्य 73.43 रुपए था, जो कि 1 वर्ष पश्चात 77.42 रुपये प्रति डॉलर हो गया है। आशय यह है की रुपए की तुलना में डॉलर के मूल्य में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है या दूसरे शब्दों में डॉलर महंगा तथा रूपया सस्ता हो गया है तथा भविष्य में भी डॉलर ओर महंगा होने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है। डॉलर की तुलना में यह स्थिति केवल भारतीय रुपए की ही नहीं है, बल्कि विश्व की अनेक देशों की मुद्रा के संदर्भ में भी यूएस डॉलर मजबूती बनाए हुए हैं। केवल रूस की मुद्रा रूबल के अलावा जबकि 1 वर्ष के अंतराल में 13.2 प्रतिशत बढ़ी है, चीन, दक्षिण कोरिया, यूरो व जापानी येन के मूल्यों में कमी आई है। समूचा विश्व मुद्रास्फीति दौर से गुजर रहा है। अप्रैल माह में अमेरिका में खुदरा मुद्रास्फीति 8.3 प्रतिशत रही है जबकि भारत में भी 7.79 प्रतिशत रही है। मुद्रा प्रसार को रोकने के लिए यूएस फेडरल बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का निर्णय लिया है तथा भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की अधिक संभावनाएं हैं तथा भारत में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो कि ब्याज दरों को बढ़ाएगी तथा आगामी दो माह बाद घोषित होने वाली मौद्रिक एवं ऋण नीति में ब्याज दर ओर बढ़ने की संभावना है ताकि मुद्रा प्रसार की दर को नियंत्रित किया जा सकें तथा अर्थव्यवस्था में व्याप्त अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित किया जा सकें। विदेशी विनिमय दर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से अत्यधिक महत्व होता है। भारत का सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिका से डॉलर के माध्यम से होता है। यदि रुपया सस्ता होता है तथा डॉलर महंगा होता है तो आयात महंगा हो जाएगा, लेकिन निर्यात सस्ता एवं प्रतिस्पर्धात्मक हो जाएगा। कहने का तात्पर्य है कि आयातकों को हानि होगी, लेकिन निर्यातकों को लाभ होगा। रुपया सस्ता होने से आयात के लिए अधिक डॉलर की आवश्यकता होगी, लेकिन इसकी क्षतिपूर्ति अतिरिक्त निर्यात के माध्यम से ही हो सकती है। लेकिन समस्या यह है कि आयात में वृद्धि दर निर्यात की तुलना में अधिक है। विश्व में कच्चे तेल एवं खाद्य व खाद्यान्न वस्तुओं के मूल्य बढ़ रहे हैं तथा आपूर्ति में अत्यधिक बाधाएं आ रही हैं। यातायात, बीमा एवं जोखिम, लॉजिस्टिक लागत बढ़ रही है एवं आपूर्ति में समय अंतराल बढ़ रहा है, जो कि देश में खुदरा मूल्य वृद्धि का एक कारण बन जाता है बेशक निर्यात सस्ता होगा तथा उतने ही निर्यात पर निर्यातकों को अतिरिक्त डॉलर प्राप्त होगा, जो कि निर्यात आए को बढ़ाएगा लेकिन समग्र रूप से वर्ष 2021 में अप्रैल-जनवरी के मध्य भारत के व्यापारिक आयात 495 बिलियन यूएस डॉलर था, जबकि निर्यात लक्ष्य 335 बिलियन डॉलर रहा है। इस प्रकार व्यापारिक घाटा इस अवधि में 0़160 था, जबकि इससे पूर्व वर्ष में यह मात्र 75 बिलियन डॉलर था।</p>
<p><br />अधिक व्यापारिक घाटा विदेशी मुद्रा कोषों पर अत्यधिक दबाव डालता है। भारत में विदेशी मुद्रा कोष ़635 बिलियन से घटकर ़600बिलियन रह गया है। इसका तात्पर्य है कि विदेशी मुद्रा कोष दबाव में है। यह दबाव दो कारणों से बढ़ गया है। एक तो अतिरिक्त आयात से उत्पन्न व्यापारिक घाटे की पूर्ति के लिए अधिक विदेशी मुद्रा डॉलर के रूप में चाहिए। दूसरी तरफ  यूएस फेडरल ब्याज दर में बढ़ोतरी से डालर सूचकांक बढ़ गया है, जो कि गत दो दशकों में सर्वाधिक 104.51 हो गया है। निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से निवेश ले जा रहे हैं। भारतीय अंश बाजार सूचकांक लगातार घट रहा है, जो कि लगभग 53000 के स्तर तक आ गया है तथा आईपीओ निवेश को प्रभावित कर रहा है।</p>
<p><br /> भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा लाया गया आईपीओ उतना सफल नहीं रहा है जितनी की उम्मीद की जा रही थी। पूंजी निवेश की संवेदनशीलता तथा गतिशीलता बढ़ गई है, जो कि भारत के पूंजी बाजार में विदेशी निवेश को प्रभावित कर रही है। एक तरफ  भारत में विदेशी निवेश पर डॉलर मजबूती का प्रभाव पड़ा है, जो कि विदेशी निवेशकों को खरीदने के स्थान पर बेचने को मजबूर कर रहा है तथा वे अपना निवेश अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित गंतव्य तक ले जा रहे हैं तथा भारतीय रिजर्व बैंक को भी रुपए का मूल्य ओर नहीं गिरे इसके लिए डॉलर की अंतरराष्टÑीय मौद्रिक बाजार से खरीद करनी पढ़ रही है। ऐसे समय में, जबकि विश्व में डॉलर की मांग बढ़ रही है तथा रूस यूक्रेन युद्ध का कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। समूचा यूरोप अस्त-व्यस्त हो रहा है तथा चीन की अर्थव्यवस्था भी मजबूती प्रदान नहीं कर रही है। भारत की विकास दर के अनुमान गड़बड़ा गए हैं। विश्व की अंतरराष्टÑीय वित्तीय एवं मौद्रिक संस्थाओं तथा क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने विकास दर को घटाकर अनुमान लगाया है जो कि कोरोना रिकवरी दर प्रभावित करेगी तथा दूसरी तरफ  भारत में खुदरा मूल्य दर लगातार 4 माह से 6 प्रतिशत से अधिक 7. 5 प्रतिशत तक हो गई है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के मापदण्ड के अनुसार 4 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर सुरक्षित मानी जाती है।       </p>
<p>आज देश को आयात प्रतिस्थापन तथा निर्यात संवर्धन नीति को बढ़ावा देने की आवश्यकता है तथा सरकारी स्तर पर घरेलू निवेश को बढ़ाने की आवश्यकता है। आयात निर्भरता को कम करने के लिए अधिक खाद्यान्न एवं खाद्य तेल उत्पादन तथा ऊर्जा के लिए वैकल्पिक स्रोतों को मजबूती प्रदान करनी होगी।<br /><br />रुपया सस्ता होने से आयात के लिए अधिक डॉलर की आवश्यकता होगी, लेकिन इसकी क्षतिपूर्ति अतिरिक्त निर्यात के माध्यम से ही हो सकती है। लेकिन समस्या यह है कि आयात में वृद्धि दर निर्यात की तुलना में अधिक है। विश्व में कच्चे तेल एवं खाद्य व खाद्यान्न वस्तुओं के मूल्य बढ़ रहे हैं तथा आपूर्ति में अत्यधिक बाधाएं आ रही हैं। यातायात, बीमा एवं जोखिम, लॉजिस्टिक लागत बढ़ रही है एवं आपूर्ति में समय अंतराल बढ़ रहा है, जो कि देश में खुदरा मूल्य वृद्धि का एक कारण बन जाता है बेशक निर्यात सस्ता होगा तथा उतने ही निर्यात पर निर्यातकों को अतिरिक्त डॉलर प्राप्त होगा, जो कि निर्यात आए को बढ़ाएगा लेकिन समग्र रूप से वर्ष 2021 में अप्रैल-जनवरी के मध्य भारत के व्यापारिक आयात 495 बिलियन यूएस डॉलर था, जबकि निर्यात लक्ष्य 335 बिलियन डॉलर रहा है। इस प्रकार व्यापारिक घाटा इस अवधि में 0़160 था, जबकि इससे पूर्व वर्ष में यह मात्र 75 बिलियन डॉलर था।</p>
<p><strong>      -डॉ. सुभाष गंगवाल</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>अर्थजगत</strong><br />विदेशी विनिमय दर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से अत्यधिक महत्व होता है। भारत का सर्वाधिक अंतरराष्टÑीय व्यापार अमेरिका से डॉलर के माध्यम से होता है। यदि रुपया सस्ता होता है तथा डॉलर महंगा होता है तो आयात महंगा हो जाएगा, लेकिन निर्यात सस्ता एवं प्रतिस्पर्धात्मक हो जाएगा। कहने का तात्पर्य है कि आयातकों को हानि होगी, लेकिन निर्यातकों को लाभ होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/indian-rupee-falls--dollar-shines/article-9928</link>
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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 13:25:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस ने गूगल पर फिर लगाया 144,000 डॉलर का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को की एक अदालत ने अवैध सामग्री को हटाने में बार विफल रहने पर दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल पर 144,000 डॉलर का जुर्माना लगाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russia-fined-at-google-of-144-000-dollar/article-7981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/russia-flag-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। मॉस्को की एक अदालत ने अवैध सामग्री को हटाने में बार विफल रहने पर दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल पर 144,000 डॉलर का जुर्माना लगाया है। अदालत के एक सूत्र ने बताया कि अदालत को रूसी प्रशासनिक अपराध संहिता के अनुच्छेद 13.41 के भाग 2 के तहत गूगल के खिलाफ दो प्रशासनिक प्रोटोकॉल प्राप्त हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक रूसी कानून के तहत नए उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि 12 मिलियन रूबल (144,000 डॉलर) तक होगी। रूसी अधिकारियों ने इस विदेशी तकनीकी दिग्गज पर अपने प्लेटफॉर्म से अवैध सामग्रियों को हटाने का दबाव डाला था, लेकिन उसका पालन नहीं होने पर अदालत ने जुर्माना लगाया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 11:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन को दी 3 करोड़ डॉलर की सहायता</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग ने फोन पर अपने यूक्रेनी समकक्ष दिमित्रो कुलेबा से बातचीत की और उन्हें तीन करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता प्रदान किए जाने की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/korea-give-3-carore-dollar-aid-of-ukraine/article-7978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4654654654.jpg" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग ने फोन पर अपने यूक्रेनी समकक्ष दिमित्रो कुलेबा से बातचीत की और उन्हें तीन करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता प्रदान किए जाने की घोषणा की। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। इससे पहले सोल ने कीव को एक करोड़ डॉलर की सहायता प्रदान की थी।</p>
<p>मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि विदेश मंत्री चुंग ने बताया कि कोरियाई सरकार ने मार्च में दिए गए एक करोड़ डॉलर के अलावा तीन करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही यूक्रेन की मदद के लिए लगातार नए तरीके तलाश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/korea-give-3-carore-dollar-aid-of-ukraine/article-7978</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 10:20:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया छलांग : रुपये में 22 पैसे की तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[22 पैसे की लंबी छलांग लगाकर 74.46 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया रुपया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9B%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97---%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-22-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80/article-2112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/rupya_chalang.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में टिकाव के बीच आयातकों एवं बैंकरों की बिकवाली से अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया बुधवार को लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ और 22 पैसे की लंबी छलांग लगाकर 74.46 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसके पिछले दिवस रुपया 19 पैसे की उछाल लेकर 74.68 रुपये प्रति डॉलर रहा था। पिछले तीन दिन में डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे मजबूत हुआ है। शुरुआती कारोबार में रुपया चार पैसे की बढ़त लेकर 74.64 रुपये प्रति डॉलर पर खुला लेकिन लिवाली के दबाव में 74.64 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक फिसल गया। हालांकि बिकवाली के बल पर यह 74.46 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा और इसी स्तर पर बंद भी हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Nov 2021 17:58:30 +0530</pubDate>
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