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                <title>admission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - अब शपथ पत्र के साथ आवेदन कर सकेंगे ओवरऐज स्टूडेंट्स </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय विधि महाविद्यालय में एफिडेविट के साथ आवेदन किए जा रहे स्वीकार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---now-overage-students-will-be-able-to-apply-with-affidavit/article-126202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(12)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय विधि महाविद्यालयों में अब ओवरऐज अभ्यर्थी भी एलएलबी प्रथम वर्ष में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, आवेदन के साथ उन्हें  नोटरी मय शपथ पत्र भी साथ देना होगा। जिसमें बीसीआई द्वारा निर्धारित ऐज क्राइट एरिया पर सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन स्टे का उल्लेख है। यदि, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ओवरऐज के विपरीत रहता है तो उनका दाखिला स्वत: निरस्त मान लिया जाए, इसकी सहमति लेकर अधिक उम्र के अभ्यर्थियों का आवेदन स्वीकार किया जा रहा है। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने 31 अगस्त को कानूनी शिक्षा पर अब उम्र का बंधन... शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने बीसीआई के दिशा निर्देशों के अनुसरण में एफिडेविट के साथ आवेदन का मौका प्रदान किया। </p>
<p><strong>120 सीटों पर 140 से ज्यादा आ चुके आवेदन </strong><br />राजकीय विधि महाविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार,   एलएलबी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए 1 सितम्बर से प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई थी। अब तक 120 सीटों पर 140 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। हालांकि, इर दरमियान साप्ताहिक व सरकारी अवकाश होने से अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाए। ऐसे में सोमवार को आवेदन की संख्या में इजाफा होने की संभावना है। </p>
<p><strong>बीच सत्र में पढ़ाई छोड़ जाते हैं ओवरऐज अभ्यर्थी</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर लॉ कॉलेज के शिक्षकों ने बताया कि हर साल अधिक उम्र के कई विद्यार्थी एलएलबी प्रथम वर्ष में एडमिशन लेते हैं, जो पहले से ही किसी जॉब में होते हैं तो कोई रिटायरमेंट के करीब होता है। ट्रांसफर होना, नौकरी व पढ़ाई के बीच संतुलन डगमगाने या पारिवारिक कारणों से पढ़ाई बीच में ही छोड़ जाते हैं। प्रतिवर्ष  ऐसे 20 मामले आते हैं, जिसकी वजह से सीटें खाली रह जाती है। इनकी वजह से अंडर ऐज के कई अभ्यर्थी कानूनी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। जबकि, उन्हें इसी क्षेत्र में कॅरियर बनाना होता है।  </p>
<p><strong>आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग</strong><br />एलएलबी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए अभ्यर्थियों के पास सोमवार आखिरी दिन है। ऐसे में वरिष्ठ छात्र व छात्रनेताओं ने अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष बुद्धराज मेरोठा ने कहा, एक सितम्बर से आवेदन शुरू हुए थे, जिसकी अंतिम तिथि 8 सितम्बर है। इस बीच में करीब तीन से चार दिन सरकारी व साप्ताहिक अवकाश आ गए। ऐसे में कई विद्यार्थी आवेदन नहीं कर पाए। विद्यार्थियों के हित में कॉलेज प्रशासन को अंतिम तिथि बढ़ाई जानी चाहिए ताकि, विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए एप्लाई करने का मौका मिल सके। </p>
<p><strong>सात ओवरऐज अभ्यर्थियों ने जमा करवाए फॉर्म </strong><br />राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा में अब तक अधिक उम्र के 7 अभ्यर्थी शपथ पत्र के साथ आवेदन कर चुके हैं। इन अभ्यर्थियों लॉ में कॅरियर बनाने से ज्यादा कानून की बारीकियां समझना और जानकारी हासिल करने में अधिक दिलचस्पी  है।  ओवरऐज अभ्यर्थियों का कहना था कि शिक्षा पर उम्र का बंधन नहीं होना चाहिए। कानूनी शिक्षा सभी को होनी चाहिए, तभी वह अपने हितों की रक्षा कर पाने में सक्षम होंगे। हालांकि, सीमित सीटों के चलते ओवरऐज अभ्यर्थियों के आवेदन से अंडर ऐज के अभ्यर्थियों सीट न मिल पाने की बात स्वीकाते हुए सरकार से सीटें बढ़ाने की मांग की है।</p>
<p>मैंने बीए-बीएड किया है। पहले सरकारी जॉब की तैयारी कर रही थी लेकिन कम्पीटिशन फाइट नहीं हुआ। ऐसे में अब एलएलबी में फॉर्म डाला है। कानूनी क्षेत्र में कॅरियर बनाना है। मेरा उद्देश्य वकील बन महिला सशक्तिकरण के लिए काम करना है। इससे पहले वर्ष 2018 में भी एलएलबी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए आवेदन किया था। उस वक्त ऐज क्राइट एरिया प्रभावी होने के कारण एडमिशन नहीं हुआ। अब शपथ पत्र के साथ आवेदन करने का मौका मिला है तो एप्लाई कर दिया। <br /><strong>- क्रांति ठाकुर, अभ्यर्थी केशवपुरा</strong></p>
<p><strong>पैसा नहीं ज्ञान कमाना उद्देश्य</strong><br />एलएलबी प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए आवेदन किया है। वर्तमान में मेरी उम्र 57 वर्ष है, डिग्री पूरे होते होते 65 हो जाएगी।  पहले कोचिंग संस्थान में फैकल्टी था। बच्चों को आईआईटी की तैयारी कराता था।  अब एस्ट्रोलॉजी पढ़ाता हूं। एलएलबी कर पैसा कमाना उद्देश्य नहीं है बल्कि कानूनी ज्ञान अर्जित करना प्राथमिकता है। वैसे मैं लीगल एडवाइजर बनना चाहता हूं। ज्ञान कहीं न कहीं काम आता ही है। वकील बनकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करुंगा। मेरे पिता ने भी 55 वर्ष की उम्र में एलएलबी की थी। शिक्षा पर उम्र का बंधन नहीं होना चाहिए, सरकार को सीटें बढ़ानी चाहिए।      <br /><strong>- प्रदीप सक्सेना, अभ्यर्थी, विवेकानंद नगर कोटा</strong></p>
<p>मैं वर्तमान में वीएमओयू में कम्प्यूटर गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत हूं। वर्ष 2021 में एलएलबी में एडमिशन लिया था लेकिन पारिवारिक कारणों के चलते प्रथम वर्ष कर एलएलबी छोड़नी पड़ी थी। अब परिस्थितियां अनुकूल हुई तो फिर से  आवेदन किया है। मेरा उद्देश्य में लॉ में कॅरियर बनाना नहीं बल्कि कानूून को समझना है, ताकि लोगों की मदद कर सकें। शिक्षा पर उम्र का बंधन नहीं लगाना चाहिए। कानून को जानने और समझने का सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। <br /><strong>- देवेंद्र कुमार मालव, अभ्यर्थी तलवंडी </strong></p>
<p>बीसीआई की गाइड लाइन के अनुसार हम कार्य कर रहे हैं। ऐज क्राइट एरिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश है, उसके अनुसार शपथ पत्र लेकर कुछ शर्तों पर ओवरऐज अभ्यर्थियों का आवेदन पत्र स्वीकार कर रहे हैं। <br /><strong>- प्रो. आरके उपाध्याय, प्राचार्य राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 16:59:55 +0530</pubDate>
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                <title>संस्कृत व इंग्लिश में एक भी एडमिशन नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-a-single-admission-in-sanskrit-and-english/article-124287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/7852014.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में छात्राओं के लिए खोले गए राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में छात्राओं का एडमिशन लेने में रुझान नहीं दिखा। कैथून व सुकेत में बीए प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने संस्कृत विषय नहीं लिया है। जबकि, सुकेत महाविद्यालय में तो इंग्लिश लिक्टेचर में भी शुन्य नामांकन है।  वहीं, बूंदी जिले के डाबी में 5 छात्राओं  ने जी संस्कृत विषय लिया है। लेकिन, आयुक्तालय के नियमानुसार  प्रत्येक विषय में 10 छात्राओं का नामांकन होने पर ही उसकी कक्षाएं संचालित की जा सकती है। ऐसे में इन छात्राओं में संस्कृत की कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है।  स्थानीय छात्राओं व अभिभावकों का तर्क है कि आयुक्तालय ने नए कॉलेजों को विषय आवंटन में क्षेत्र की मांग को नजरअंदाज किया है।  जबकि, यहां उर्दू व होम साइंस की डिमांड थी।  दरअसल, वर्ष 2025 में सरकार ने कोटा-बंूदी व झालावाड़ में कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन चार राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले थे। जिसमें झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।</p>
<p><strong>संस्कृत व अंग्रेजी साहित्यके प्रति बेरुखी </strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय कैथून में एक भी छात्रा  ने संस्कृत विषय नहीं लिया। हालांकि, नोडल जेडीबी आर्ट्स महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्राओं द्वारा सब्जेक्ट चेंज करने की एप्लीकेशन दी जा रही है। वहीं, सुकेत महाविद्यालय में तो संस्कृत के साथ अंग्रेजी साहित्य में भी एक भी बालिका ने दाखिला नहीं लिया। ऐसे में यहां इन दोनों विषयों की कक्षाएं संचालित नहीं हो सकेगी। </p>
<p><strong>डाबी कॉलेज : छात्राओं में असमंजस</strong><br />आयुक्तालय के नियमानुसार, किसी भी विषय की कक्षा के संचालन के लिए 10 विद्यार्थियों का होना आवश्यक है। ऐसे में यहां संस्कृत व अंगे्रजी साहित्य में बालिकाओं की संख्या दस से कम है। ऐसे में जिन्होंने इन विषयों में दाखिला लिया है, उनमें अब कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है। इधर, कॉलेज प्रशासन का कहना है, नए महाविद्यालय होने के नाते 5 स्टूडेंट पर भी आयुक्तालय द्वारा कक्षा संचालन की अनुमति दे सकता है।  </p>
<p><strong>4 बार एडमिशन का मौका फिर भी सीटें खाली</strong><br />कॉलेज आयुक्तालय द्वारा 4 बार आॅनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर छात्राओं को एडमिशन का मौका दिया था। इसके बावजूद बालिकाओं ने नए कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाए पुराने स्थापित महाविद्यालयों में ही रुचि दिखाई। नतीजन, कोटा, बूंदी के तीन राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में 600 में से 400 से ज्यादा सीट्स खाली रह गई। हालांकि, आयुक्तालय द्वारा रिक्त सीटों को भरने के लिए आॅफलाइन आवेदन भी लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन तीनों महाविद्यालय में सीटें खाली रहेंगी। </p>
<p><strong>नामांकन घटने का कारण </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर ने बताया कि नवीन गर्ल्स कॉलेजों में घटते नामांकन के पीछे कई कारण हैं, जो इस प्रकार है। <br />- आवश्यकता से अधिक गर्ल्स कॉलेज खोलना।<br />- नए कॉलेजों के पास न खुद का भवन व न ही स्थाई फैकल्टी।<br />- दो-दो कमरों में कॉलेज संचालित करना। भौतिक संसाधनों की कमी। <br />- क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत सब्जेक्ट आवंटित करना। <br />- नए कॉलेजों का प्रचार-प्रसार का अभाव।<br />- नए महाविद्यालयों में सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर आशंकाएं। </p>
<p><strong>कब-कब बड़ी आवेदन की अंतिम तिथि </strong><br />- राजकीय महाविद्यालयों में गत 4 जून से ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी। <br />- दूसरी बार अंतिम तिथि 16 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई। <br />- तीसरी बार में 5 दिन और बढ़ाकर अंतिम तिथि 25 जून कर दी गई। <br />- सीटों के मुकाबले आवेदन नहीं आने पर फिर से लास्ट डेट बढ़ाकर 3 जुलाई कर दी गई। <br />- 7 जुलाई को प्रथम वरियता सूची जारी की गई। <br />- 16 जुलाई को विभिन्न श्रेणियों में रिक्त रही सीटों पर फिर से आवेदन मांगे गए। <br />- अब गत 18 अगस्त से 23 अगस्त तक खाली रह गई सीटों पर आॅफलाइन एडमिशन देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं व अभिभावक</strong><br />सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए लेकिन बिल्डिंग व फैकल्टी भी स्थाई नहीं है। गत वर्ष भी राजसेस महाविद्यालयों में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने के एक से डेढ़ माह पहले ही शिक्षकों को हटा दिया था। इस बार भी ऐसी  स्थिति रहने की आशंका के चलते बूंदी गर्ल्स कॉलेज में दाखिला लेना ज्यादा मुनासिब लगा। <br /><strong>-अहिल्या कंवर, छात्रा डाबी</strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला तो खुशी थी लेकिन ऐसे विषय अलॉट कर दिए, जो छात्राओं के लिए रुचिकर नहीं है। यहां होम साइंस व उर्दू विषय दिया जाना चाहिए था। इसलिए सुकेत कॉलेज में दाखिला लेने की बजाए रामगंजमंडी महाविद्यालय की ओर रुख करना ज्यादा सही लगा। <br /><strong>-पार्वती कुमारी,  रेहाना, (परिवर्तित नाम) सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे का कॉलेज राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल के तीन कमरोें में चल रहा है।  क्षेत्र की आवश्यकतानुसार सब्जेक्ट नहीं होना नामांकन में कटौती का मुख्य कारण है। यहां उर्दू, जीपीएम व होम साइंस विषय नहीं खोला गया। बीए में तीन आॅफनल सब्जेक्ट लेने होते हैं। ऐसे में छात्राओं ने कस्बे से बाहर शहर के कॉलेजों में दाखिला लिया है।  <br /><strong>- मोहम्मद अख्तर, बंशीलाल, अभिभावक कैथून </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी यह कॉलेज नए हैं। सुविधाएं विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा। यदि, छात्राओं की ओर से विषयों को लेकर कोई कम्पलेन आती है तो उसे आयुक्तालय भिजवाकर समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्ताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 15:00:14 +0530</pubDate>
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                <title>गवर्नमेंट गर्ल्स आर्ट्स कॉलेजों में खाली रह गई 434 सीटें</title>
                                    <description><![CDATA[छात्राओं ने नए की जगह पुराने कॉलेजों में दाखिले में दिखाई रुचि।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/434-seats-remained-vacant-in-government-girls-arts-colleges/article-123464"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में छात्राओं के लिए खोले गए राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में छात्राओं ने एडमिशन लेने में रुचि नहीं दिखाई। जबकि, आयुक्तालय द्वारा 4 बार ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर छात्राओं को एडमिशन का मौका दिया था। इसके बावजूद बालिकाओं ने नए कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाए पुराने स्थापित महाविद्यालयों में ही रुचि दिखाई। नतीजन, नतीजन, कोटा, बूंदी के तीन राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में 600 में से कुल 434 सीट्स खाली रह गई। दरअसल, वर्ष 2025 में सरकार ने कोटा-बूंदी व झालावाड़ में कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन चार राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले थे। जिसमें झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में सीटें खाली रह गई। </p>
<p><strong>घटते नामांकन का कारण </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर ने बताया कि नवीन गर्ल्स कॉलेजों में घटते नामांकन के पीछे कई कारण हैं, जो इस प्रकार है। <br />- आवश्यकता से अधिक गर्ल्स कॉलेज खोलना।<br />- नए कॉलेजों के पास न खुद का भवन व न ही स्थाई फैकल्टी<br />- दो-दो कमरों में कॉलेज संचालित करना। भौतिक संसाधनों की कमी। <br />- क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत सब्जेक्ट आवंटित करना। <br />- नए कॉलेजों का प्रचार-प्रसार का अभाव।</p>
<p><strong>कब-कब बड़ी आवेदन की अंतिम तिथि </strong><br />- राजकीय महाविद्यालयों में गत 4 जून से ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी। <br />- अंतिम तिथि 16 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई। <br />- तीसरी बार 5 दिन और बढ़ाकर अंतिम तिथि 25 जून कर दी गई। <br />- सीटों के मुकाबले आवेदन नहीं आने पर फिर से लास्ट डेट बढ़ाकर 3 जुलाई कर दी गई। <br />- 7 जुलाई को प्रथम वरियता सूची जारी की गई। <br />- 16 जुलाई को विभिन्न श्रेणियों में रिक्त रही सीटों पर फिर से आवेदन मांगे गए। <br />- अब 18 अगस्त से 23 अगस्त तक खाली रह गई सीटों पर ऑफलाइन एडमिशन देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने की तिथि निर्धारित कर दी गई। </p>
<p>प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से खत्म होने तक डॉबी कॉलेज कहां किस बिल्डिंग में चलेगा, इसका किसी को भी पता नहीं था। क्योंकि, कॉलेज संचालन के लिए अस्थाई भवन ही नहीं मिला था। ऐसे में नए कॉलेज में फैकल्टी व शैक्षणिक साधन-संसाधनों को लेकर आशंका रहने लगी। इसलिए पहले से ही स्थापित कॉलेजों में ही दाखिला लेना सही लगा। <br /><strong>- कौशल्या देवी, छात्रा डाबी</strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला तो खुशी थी लेकिन ऐसे विषय अलॉट कर दिए, जो छात्राओं के लिए रुचिकर नहीं है। यहां होम साइंस विषय दिया जाना चाहिए था। इसलिए सुकेत कॉलेज में दाखिला लेने की बजाए रामगंजमंडी महाविद्यालय की ओर रुख करना ज्यादा सही लगा। <br /><strong>- आशा जांगिड़, सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे का कॉलेज स्कूल के तीन कमरोें में चल रहा है।  क्षेत्र की डिमांड के अनुसार सब्जेक्ट नहीं होना भी नामांकन में कटौती का मुख्य कारण है। यहां उर्दू विषय नहीं खोला गया। जबकि, बीए में तीन ऑफनल सब्जेक्ट लेने होते हैं। सरकार को जेडीबी आर्ट्स की तरह होम साइंस व जीपीएम जैसे विषय भी खोलने चाहिए। <br /><strong>- मोहम्मद हुजैफ, कैथून </strong></p>
<p><strong>18 अगस्त से शुरू होंगे ऑफलाइन आवेदन</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कैथून में बीए प्रथम सेमेस्टर में रिक्त सिटों पर 18 अगस्त से ऑफलाइन आवेदन शुरू होंगे, जो 23 अगस्त तक जारी रहेंगे। निर्धारित अवधि तक प्रवेश से वंचित छात्रा एडमिशन से संबंधित दस्तावेज कॉलेज में जमा करवाकर एडमिशन ले सकतीं हैं। अभी तक 88 छात्राओं की वरीयता सूची जारी की जा चुकी है। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य कैथून कन्या महाविद्यालय</strong></p>
<p>बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दूर-दराज के क्षेत्रों में कॉलेज खोले हैं। नए होने के कारण क्षेत्रवासियों तक पहुंच नहीं बन पाई। हालांकि, रिक्त सिटों पर आॅफलाइन आवेदन लेकर वंचित छात्राओं को फिर से मौका दिया जा रहा है, जिससे काफी हद तक सीटें भरेंगी। सरकार सभी नए महाविद्यालयों में सुविधाएं उपलब्ध करवाने का लगातार प्रयास कर रही है। <br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 15:43:11 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा विभाग की लापरवाही, सपने चकनाचूर</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की इस लापरवाही से हजारों अभिभावकों का बच्चों के एडमिशन के सपने पर पानी फिर गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department-s-negligence--dreams-shattered/article-118593"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/74582.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों अभिभावकों का सपना चकनाचूर हो रहा है। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन के लिए विभाग का शाला दर्पण पोर्टल कक्षावार रिक्त सीटों की संख्या वास्तविक सीटों से तीन गुना अधिक बता रहा है। जिससे अभिभावक भ्रमित हो रहे हैं और पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्त सीटों के आधार पर संबंधित स्कूलों में दाखिले के लिए रिपोर्टिंग कर रहे हैं। क्योंकि, पोर्टल पर प्रदर्शित सीटों की संख्या के अनुसार लॉटरी में चयनित बच्चों का नंबर आसानी से आ रहा होता है। जब अभिभावक स्कूलों में दस्तावेज जमा करवाने पहुंचते हैं, तब उन्हें वास्तिविक सीटों का पता लगता है, जो नाममात्र की होती है। विभाग की इस लापरवाही से हजारों अभिभावकों का बच्चों के एडमिशन के सपने पर पानी फिर गया। </p>
<p><strong>पोर्टल पर 25 रिक्त सीटें, वास्तविक सात ही</strong><br />महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। गत 17 जून को लॉटरी निकलने के बाद से अभिभावक वरियता क्रम के अनुसार पांच स्कूलों का चयन कर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। लेकिन, शाला दर्पण पर प्रदर्शित हो रही रिक्त सीटों की संख्या  वास्तविक संख्या से 3 गुना अधिक है। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरएसी कॉलोनी में पोर्टल पर कक्षा-6 के लिए 25 सीटें रिक्त दिखा रहा है। जबकि, वास्तिविक में यहां मात्र 7 ही सीटें हैं। इसी तरह श्रीनाथपुरम स्कूल की सीटें-27 दिख रही है, लेकिन यहां 9 ही सीट रिक्त है।  वहीं, कक्षा-1 में 24 सीटें नजर आ रही लेकिन हकीकत में 9 ही रिक्त हैं। यह स्थिति जिले के अधिकांश स्कूलों में बनी हुई है।</p>
<p><strong>गलती विभाग की, खामियाजा भुगत रहे अभिभावक</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि शाला दर्पण पोर्टल पर  प्रदर्शित हो रही कक्षावार रिक्त सीटों की संख्या के आधार पर ही तो हम संबंधित स्कूलों का चयन करेंगे। लेकिन पोर्टल तो वास्तविक सीटों से तीन गुना ज्यादा सीटें रिक्त दिखा रहा है। ऐसे में जिन बच्चों का लॉटरी में 20 नंबर है, उनके अभिभावक पोर्टल के आधार पर एडमिशन को लेकर आश्वस्त होकर रिपोर्टिंग कर दी। लेकिन, दस्तावेज जमा करवाने स्कूल जाते हैं तो पता लगता है कि वहां तो 9 ही सीटें रिक्त थी। लेकिन, तब तक अभिभावक आवेदन लॉक करवा चुका होता है। ऐसी स्थिति में वह दूसरे स्कूल में भी रिपोर्टिंग से वंचित हो जाता है। शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों विद्यार्थी एडमिशन से वंचित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे परिजन</strong><br />शिक्षा विभाग की गलती का खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। गुमानपुरा निवासी सत्येंद्र पारीक ने बताया कि  मामले को लेकर तीन दिन से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां न तो अधिकारी मिल रहे और न ही कोई समाधान बता रहा। छावनी के पुष्पेंद्र नायक का कहना है कि पिछले दिनों से डीओ सैकंडरी व एलीमेंट्री के चक्कर लगा रहा हूं। वहां मौजूद कर्मचारी बीकानेर मुख्यालय का हवाला देकर पल्ला झाड़ बैरंग लौटा रहे हैं। कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही। </p>
<p><strong>अनलॉक का मिले ऑप्शन, दोबारा निकले लॉटरी</strong><br />शिवपुरा निवासी महेश प्रजापति, दादाबाड़ी के सुरेंद्र गोयल, अखिलेश मेहरा का कहना है कि गलती विभाग की है, उनका पोर्टल गलत आंकड़ा दिखा रहा है। अभिभावक परेशान हो रहे हैं। पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर संबंधित स्कूल में एक बार रिपोर्टिंग किए जाने पर आवेदन लॉक हो जाता है। जिससे दूसरे स्कूल में रिपोर्टिंग का अवसर भी खत्म हो जाता है। ऐसे में शिक्षा विभाग पोर्टल की गलती सुधारें और अनलॉक का ऑप्शन भी देकर अभिभावकोें को दूसरे स्कूलों में रिपोर्टिंग का मौका दिया जाए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />20 जून को हमने महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरएसी कॉलोनी में कक्षा-6 के लिए की थी। यहां शाला दर्पण पोर्टल पर 25 सीटे रिक्त दिखाई दी। जबकि, बेटे का लॉटरी में 27 नंबर था। ऐसे में एडमिशन की उम्मीद थी। रिपोर्टिंग के बाद आवेदन जमा करवाने स्कूल पहुंचे तो वहां बताया कि सीटें तो 7 ही खाली थी, जो भर गई। ऐसे में बच्चे का प्रवेश नहीं हो पाया। शिक्षा विभाग को अपनी गलती सुधार कर दोबारा लॉटरी निकालनी चाहिए।<br /><strong>-वर्षा शर्मा, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>जब हम रिपॉर्टिंग के लिए श्रीनाथपुरम-बी स्कूल गए तो हम आश्वस्त थे कि बच्चे का एडमिशन हो जाएगा। क्योंकि पोर्टल पर कक्षा के लिए 27 सीटें रिक्त थी, जबकि, लॉटरी में बच्चे का नंबर 21 था। लेकिन, स्कूल जाने पर पता चला कि यहां तो 9 ही सीटें खाली हैं। अब हम क्या करें, बच्चे का एडमिशन नहीं हो पा रहा। जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में भी सम्पर्क किया लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। सरकार को हस्तक्षेप कर दोबारा लॉटरी निकालनी चाहिए ताकि, विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रह सके।<br /><strong>-लीला प्रजापति, शिवपुरा</strong></p>
<p>मामला संज्ञान में आया है। शाला दर्पण पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्त पदोें की संख्या में सुधार के लिए संबंधित स्कूल से पत्र मिला है। जिससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा रहे हैं।<br /><strong>-संतराम वर्मा, सहायक निदेशक महात्मा गांधी प्रकोष्ठ</strong></p>
<p>शाला दर्पण पर रिक्त सीटों की संख्या वास्तविक सीटों से अधिक प्रदर्शित हो रही है। इसमें सुधार के लिए हमने जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक को पत्र भेजा है।<br /><strong>- लोकेश जैन, शिक्षक आरएसी कॉलोनी स्कूल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jun 2025 15:03:30 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलेज एडमिशन में लाडलियों को मिला रिजर्वेशन, ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/laadlis-get-reservation-in-college-admission/article-116845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालयों में एडमिशन लेने वाली छात्राओं के लिए खुशखबरी है। कॉलेज आयुक्तालय ने सह शिक्षा (कोएड) गवर्नमेंट कॉलेजों में 30 प्रतिशत सीटें बालिकाओें के लिए आरक्षित की है। ताकि, उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ सके। यह सुविधा बालिकाओं को इसी सत्र से मिलेगी। हालांकि, तीस प्रतिशत सीटें रिर्जव रखी जाने से छात्रों को सीट मिलने के अवसर कम हो जाएंगे। क्योंकि, बालिकाएं एडमिशन के लिए आवेदन राजकीय कन्या महाविद्यालय के साथ कोएड कॉलेजों में भी करती हैं। ऐसे में गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन नहीं होने पर उनका रुख कोएड कॉलेजों में होगा और उनकी परसेंटेज लड़कों के मुकाबले अधिक होती है। ऐसे में नियमित प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या अधिक रह सकती है। </p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</strong><br />हाल ही में जारी हुए 12वीं बोर्ड के परिणाम में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले विद्यार्थियों में लड़कियों की संख्या अधिक है। ऐसे में कॉलेजों में कटऑफ का लेवल हाई रहने से एडमिशन की मारामारी बनी रहेगी। शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं। ऐसे में राजकीय कोएड कॉलेजों में बालिकाओं के लिए सीट मिलने के अवसर बढ़ जाएंगे।</p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ</strong><br />कॉलेज शिक्षकों का कहना है, सह शिक्षा वाले सरकारी कॉलेजों में एडमिशन में बालिकाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें रिजर्व करने से उच्च शिक्षा में उनकी संख्या बढ़ेगी। शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में गर्ल्स कॉलेज नहीं होने से अभिभावक छात्राओं को रेगुलर एडमिशन नहीं दिलाते। जिसकी वजह से वे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में सरकार ने एडमिशन में तीस प्रतिशत सीटें आरक्षित कर देने से अभिभावकों का रुझान बढ़ेगा। बालिकाओं को आसानी से एडमिशन मिलने से उनकी संख्या में इजाफा होने के साथ स्कॉलरशिप सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।  </p>
<p><strong>शहरी कॉलेजों में हाई रहेगा कटऑफ का पारा </strong><br />जिले में राजकीय कन्या महाविद्यालय 6 हैं। इनमें दो इसी वर्ष नए खुले हैं। जिनमें कैथून व सुकेत शामिल हैं। नवीन कन्या महाविद्यालयों में इसी सत्र से एडमिशन दिए जाएंगे। हालांकि, कैथून, सुकेत व रामपुरा कॉलेज के मुकाबले जेडीबी आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स गर्ल्स कॉलेज साधन संसाधनों में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में छात्राओं इन कॉलेजों में एडमिशन लेने में प्राथमिकता रहेगी  लेकिन कटऑफ अधिक होने के कारण छात्राओं का रुख शहर के कोएड कॉलेजों की ओर बढ़ेगा। जिससे कटऑफ का लेवल अधिक  होने से छात्रों के लिए सीटें मिलना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि,गर्ल्स कॉलेज में छात्र आवेदन नहीं कर सकते लेकिन छात्राएं कोएड कॉलेज में एडमिशन के लिए एप्लाई कर सकतीं हैं। ऐसे में छात्राओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने से छात्रों के अवसर कम हो जाएंगे।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br />कॉलेजों में सीटों की संख्या के मुकाबले दोगुने आवेदन आते हैं। परसेंटेज अधिक होने के बावजूद एडमिशन नहीं मिल पाता है। ऐसे में सरकार ने कुल सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित कर देने से एडमिशन की राह आसान कर दी है। <br /><strong>- वैशाली नागर, छात्रा, आकशवाणी </strong></p>
<p>12वीं बोर्ड आर्ट्स में मेरी 85% बनी है। रिजल्ट अच्छा रहने से कटऑफ अधिक रहेगी। ऐसे में हमारे लिए तीस प्रतिशत सीटे आरक्षित रहने से रेगुलर एडमिशन मिलने की संभावना बढ़ गई है। <br /><strong>- प्रियंका गोचर, छात्रा बोरखेड़ा</strong></p>
<p>सरकार ने बालिका शिक्षा बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए राजकीय महाविद्यालयों (कोएड) में छात्राओं को प्रवेश में 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है। इसका फायदा ग्रामीण अंचल के महाविद्यालयों में नजर आएगा। छात्राओं का रेगुलर एडमिशन होगा तो उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्रिंसिपल गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 15:51:09 +0530</pubDate>
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                <title>16 हजार की डिग्री के लिए बालिकाएं चुका रही 50 हजार, रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</title>
                                    <description><![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा लग रही फीस ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 7 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहे हैं। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस परईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए परईयर हो गई।  महंगी फीस के कारण बालिकाओं को बारां-झालावाड़ की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन नहीं ले पा रही। </p>
<p><strong>जीपीईएम :</strong> 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस पर-ईयर 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी। </p>
<p><strong>होम साइंस : 15 हजार की जगह लग रहे 30 हजार</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी मोड पर संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है। </p>
<p><strong>साइड इफेक्ट: हर साल खाली रहती सीटें</strong><br />कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों से भी लड़कियां जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए जीपीईएम में दाखिले के लिए आवेदन करती हैं। इस विषय में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया था। जीपीईएम में गत वर्ष प्रिवियस में 15 तथा फाइनल में 11 सीटें खाली रह गई। होम साइंस की 40 सीटों में से आधी सीटें खाली रही थी।  </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर छात्राएं</strong><br />छात्राओं ने बताया कि हाड़ौती में केवल राजकीय महाविद्यालय बारां व झालावाड़ में ही होम साइंस रेगुलर स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसमें सरकारी फीस होने के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं कोटा से बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर होती है। जबकि, कोटा में इसे सरकारी स्कीम में चलाने के लिए आयुक्तालय से लेकर विधायक मंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>फीस बहुत महंगी, रेगुलर मोड पर चलाए सरकार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगा है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को छात्राओं के हित में इस कोर्स को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए। <br /><strong>-निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>एक साथ 20 हजार रुपए सालाना फीस जमा करवाना लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। क्योंकि, अधिकतर छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आती हैं। जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में चलाने के लिए शिक्षकों व आयुक्तालय से डिमांड की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फॉर्म तो सीटों से दो गुना आते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। कुछ समय पहले छात्राओं  ने होमसाइंस व जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। <br /><strong>-अनुश्री सक्सेना, छात्रा जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्रोफेसर </strong><br /><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर </strong><br />जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। इसमें रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।<br /><strong>-प्रो. बिंदू चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष जीपीईएम, जेडीबी आर्ट्स कॅलेज</strong></p>
<p>कोटा जिले में यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां होम साइंस में एमए कराई जाती है। लेकिन, सेल्फ फाइनेंस स्कीम में होने से फीस महंगी हो गई। जिसकी वजह से छात्राओं को बारां-झालावाड़ जाना पड़ता है। होम साइंस में प्रसार शिक्षा, इंटियर डिजाइनिंग, टेक्सटाइल, फू्रड एंड न्यूट्रीशियन तथा फर्नीचर डिजाइनिंग सीखाई जाती है। इसे रेगुलर मोड पर संचालित करवाने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। आयुक्तालय को भी पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है इस सत्र से हो जाए। <br /><strong>-प्रो. दीपा स्वामी, विभागाध्यक्ष होम साइंस, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p> यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। पिछले 7 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है।  हाल ही में लोकसभा स्पीकर के विशेषाधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। उन्होंने समाधान का भरोसा दिलाया है। अब तक उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायकों को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास जारी है।  <br /><strong> -प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए, पर चलेंगे कहां, पता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[छात्रों में असमंजस, कब और कौनसी बिल्डिंग में शुरू होंगे महाविद्यालय  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-has-opened-new-colleges--but-it-is-not-known-where-they-will-run/article-114647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/sarakar-ne-nae-collage-toh-khol-diya,-par-chalenge-kahan,-pata-nhi...kota-news-19.05.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  सरकार ने कोटा जिले में दो नए राजकीय कला कन्या महाविद्यालय तो खोल दिए, लेकिन इन कॉलेजों को चलाने के लिए अभी तक कोई अस्थाई बिल्डिंग नहीं मिली है। जबकि, जुलाई माह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जानी है। ऐसे में विद्यार्थी व शिक्षाविदें में असमंजस बना हुआ है कि कॉलेज कब और किस भवन में संचालित होगा। हालांकि, आयुक्तालय के अधिकारी व नोडल प्राचार्यों का कहना है कि अस्थाई भवन जल्द ही मिलेगा, इसकी तैयारियां की जा रही है। </p>
<p><strong>दोनों गर्ल्स कॉलेज को नहीं मिले अस्थाई भवन </strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कैथून व सुकेत कॉलेज का संचालन के लिए अभी तक अस्थाई भवन नहीं मिला है। हालांकि, अस्थाई बिल्डिंग में कॉलेज चलाने के लिए  भवन का चयन किया जा रहा है। कैथून कॉलेज जेडीबी आर्ट्स कॉलेज के अधीन संचालित किया जाएगा। नोडल प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान व कॉलेज कमेटी के सदस्यों ने  कैथून में कॉलेज के लिए भवन चिन्हित कर चुके हैं। वहीं, सुकेत कॉलेज रामगंजमंडी राजकीय महाविद्यालय के अधीन संचालित होगा। नोडल प्राचार्य डॉ. संजय गुर्जर का कहना है कि भवन चयनित कर लिया है, जिसके अलॉट करवाने के लिए कलक्टर को पत्र लिख चुके हैं। </p>
<p><strong>महाविद्यालय में 7-7 सब्जेक्ट अलॉट</strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय सुकेत तथा कैथून कॉलेज को आयुक्तालय से 7-7 विषय आवंटित हुए हैं।  दोनों ही महाविद्यालय में हिन्दी-अंगे्रजी साहित्य, ज्योग्राफी, पॉलिटिकल साइंस, संस्कृत तथा हिन्दी-अंगे्रजी अनिवार्य शामिल हैं। इन कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया आॅनलाइन होंगे। </p>
<p><strong>राजसेस के अधीन संचालित होंगे कॉलेज </strong><br />सरकार ने बजट घोषणा में सत्र 2025-26 सत्र के लिए  कोटा जिले में दो राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले हैं। जिनमें कैथून व सुकेत शामिल हैं। इनमें से सुकेत कॉलेज के लिए करीब 12 बीघा जमीन अलॉट हो गई है। लेकिन, कैथून कॉलेज के लिए अभी जमीन अलॉट नहीं हो सकी। इन दोनों महाविद्यालयों का संचालन कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन किया जाएगा। यहां विद्या संबल पर शिक्षक लगाए जाएंगे। </p>
<p><strong>200 छात्राओं को मिलेगा एडमिशन</strong><br />कैथून गर्ल्स कॉलेज की नोडल प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने बताया कि जुलाई से एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार दो सेशन संचालित होंगे और 200 छात्राओं को एडमिशन दिया जाएगा। कस्बे में कॉलेज खुलने से स्थानीय छात्राओं को अब पढ़ने के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। घर के नजदीक स्कूल होने से उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ेगी।</p>
<p>हमने कैथून कॉलेज के लिए अस्थाई भवन लगभग चिन्हित कर लिया है। कॉलेज कमेटी के साथ रविवार को कस्बे में गए थे, जहां अस्थाई भवन को फाइनल करने से संबंधित कार्यवाही की गई। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय कैथून</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज के लिए अभी अस्थाई भवन नहीं मिला है। हालांकि, एक बिल्डिंग देखी है, जहां पहले स्कूल संचालित होता था, जो अब वह अपनी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया है। भवन कॉलेज संचालित करने के लिए सही स्थिति में है। जिसे अलॉट करवाने के लिए जिला कलक्टर को पत्र लिखा है।<br /><strong>- डॉ. संजय गुर्जर, नोडल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय सुकेत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:29:27 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - अब शिक्षक करेंगे हाउस होल्ड सर्वे, बढ़ाएंगे नामांकन</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---now-teachers-will-do-household-survey--will-increase-enrollment/article-111049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए अब शिक्षक हाउस होल्ड सर्वे करेंगे। इसी के साथ प्रवेशोत्सव के प्रथम चरण का आगाज हो गया है। ऐसे में अब शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हालांकि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 जुलाई से होगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने गत 8 अपे्रल को इस बार प्रवेशोत्सव में देरी से सरकारी स्कूलों का घटेगा नामांकन...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राजस्थान सकूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव को लेकर आदेश जारी किए। </p>
<p><strong>प्रवेशोत्सव का पहला चरण 9 मई तक </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सत्र 2025 -26 के लिए प्रवेशोत्सव के पहले चरण का आगाज मंगलवार से हो चुका है, जो 9 मई तक जारी रहेगा। इस दौरान शिक्षक घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे और 3 से 18 वर्ष आयु के सभी बच्चों का चिन्हीकरण कर 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ियों में तथा 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया दिलाएंगे। </p>
<p><strong>अनामांकित व ड्रॉप आउट बच्चों पर रहेगा फोकस </strong><br />शिक्षक नेता मोहर सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान नामांकन वृद्धि, अनामांकित व ड्रॉपआउट बच्चों एवं प्रवासी श्रमिकों के बच्चों एवं बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों तथा गाड़ी लुहार/घुमंतु परिवारों के बच्चों को विद्यालय में नामांकित करने पर विशेष फोकस रहेगा। शिक्षा से वंचित इन चिन्हित बालक-बालिकाओं की प्रविष्टि प्रत्येक शिक्षक द्वारा शाला दर्पण शिक्षक ऐप के माध्यम से की जानी है।</p>
<p><strong>प्रवेश महोत्सव का होगा आयोजन </strong><br />नव प्रवेशित विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन के लिए 8 मई से 10 मई तक विद्यालयों में प्रवेश महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थियों के अभिभावकों को आमंत्रित कर विद्यालय की प्रवेश समिति के साथ परिचित करवा कर प्रवेश ा्रक्रिया को पूर्ण किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो चरणों में होगा डिजिटल प्रवेशोत्सव </strong><br /><strong>प्रथम चरण: </strong><br />- हाउस होल्ड सर्वे (बच्चों का चिन्हीकरण) - 15 अप्रैल से 9 मई तक। <br />- नामांकन अभियान (सीआरसी मॉड्यूल में प्रविष्टि) - 10 से 16 मई तक<br /><strong>द्वितीय चरण: </strong><br />- पुन: हाउस होल्ड सर्वे (शेष रहें बच्चों का चिन्हीकरण) - 1 जुलाई से 24 जुलाई तक। <br />- नामांकन अभियान 25 जुलाई से 18 अगस्त तक रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />15 अप्रैल से प्रवेशोत्सव के आगाज किए जाने का विभाग का निर्णय स्वागत योग्य है। समय पर प्रवेशोत्सव शुरू होने से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने में मदद मिलेगी।  गवर्नमेंट स्कूलों में प्रवेशोत्सव में देरी को लेकर दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर उच्चाधिकारियों को नामांकन में कमी से अवगत कराकर अलख जगाई। जिसका ही नतीजा है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव शुरू किए जाने के आदेश जारी किए। इसके लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:07 +0530</pubDate>
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                <title>शुरू होने से पहले ही एमए एमएससी पर लगा ब्रेक </title>
                                    <description><![CDATA[विद्यार्थियों को अगले सत्र 2025-26 तक करना होगा इंतजार ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ma-msc-brakes-applied-even-before-starting/article-99087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555457.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में नॉन इंजीनियरिंग एमए-एमएससी डिग्री कोर्सेज के शुरू होने से पहले ही ब्रेक लग गए। यह कोर्स अब इस वर्ष से शुरू नहीं हो पाएंगे। आरटीयू प्रशासन 4 महीने बाद भी एडमिशन पॉलिसी नहीं बना सका। जिसकी वजह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। जबकि,  गत सितम्बर माह से ही विद्यार्थी आरटीयू से एमए इंग्लिश व एमएससी कोर्सेज करने की राह ताक रहे थे। लेकिन, अफसरों की लेटलतीफी के कारण एडमिशन गाइड लाइन नहीं बन पाई। आखिरकार, आरटीयू प्रशासन ने सत्र 2024-25 से नॉन इंजीनियरिंग कोर्सेज शुरू करने से हाथ खड़े कर दिए।</p>
<p><strong>एडमिशन पॉलिसी नहीं बना सकी कमेटी</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ने राष्टÑीय शिक्षा नीति 2020 के तहत गत अगस्त माह में ही नॉन इंजीनियरिंग पीजी कोर्स शुरू किए जाने की घोषणा की थी। इसके लिए एडमिशन प्रक्रिया व फीस निर्धारण के लिए कमेटी भी गठित कर दी गई और सितम्बर से कमेटी एडमिशन पॉलिसी बनाने में जुट गई। चूंकि, आरटीयू नॉन इंजीनियरिंग पीजी कोर्सेज पहली बार शुरू कर रही थी, ऐसे में एडमिशन गाइड लाइन बनाना उसके लिए चुनौतिपूर्ण रहा। आरटीयू की एडमिशन कमेटी कभी राजस्थान विश्वविद्यालय तो कभी कोटा विश्वविद्यालय का मॉडल अपनाने को लेकर असमंजस में रही। आखिरकार, दिसम्बर  तक कमेटी एडमिशन प्रक्रिया व कोर्सेज की फीस निर्धारण से संबंधित गाइड लाइन नहीं बना सकी तो इस वर्ष से कोर्स शुरू करवाने से हाथ खड़े कर दिए।</p>
<p><strong>4 माह तक असमंजस में रहे विद्यार्थी</strong><br />एमएससी व एमए में 30-30 सीटों पर एडमिशन दिए जाने थे। आरटीयू द्वारा सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह से प्रवेश प्रक्रिया शुरू किए जाने के दावे किए जा रहे थे। ऐसे में विद्यार्थियों में एमए अंगे्रजी व एमएससी में दाखिला लेने की उत्सुकता बढ़ गई और एडमिशन ओपन होने का इंतजार करने लगे। लेकिन, अक्टूबर, नवम्बर तक भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बन गई। इसी बीच दिसम्बर की शुरूआत में कोटा विवि द्वारा परीक्षा फॉर्म का पोर्टल खोल दिया गया। जब आरटीयू द्वारा साल के आखिरी महीने तक एमए व एमएससी कोर्स शुरू नहीं कर पाई तो छात्रों को मजबूरन स्वयंपाठी के रूप में कोटा विवि के एग्जाम  फॉर्म भरने पड़े। </p>
<p><strong>फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी</strong><br />आरटीयू द्वारा वर्तमान शिक्षा सत्र 2024-25  में  फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी शुरू की जानी थी। इसके लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि, राजकीय महाविद्यालयों में सीटें सीमित होने के कारण रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। लेकिन, आरटीयू प्रशासन की लेटलतीफी के कारण हजारों विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।  </p>
<p><strong>अंगे्रजी, हृयूनिटी में एमए</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में 30-30 सीटों पर अंग्रेजी, ह्यूनिटी में एमए डिग्री कोर्स शुरू होना था। एमए इंग्लिश के प्रति विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया था। क्योंकि, शहर में मात्र गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में ही अंगे्रजी में एमए करवाई जाती है। लेकिन वहां सीटे सीमित होने के कारण छात्र-छात्राओं का रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आरटीयू से उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन कोर्स शुरू नहीं होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थी मायूस हो गए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />जब आरटीयू में इंग्लिश में एमए की जानकारी मिली थी तो हम एडमिशन लेने के लिए उत्साहित थे और बेसब्री से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि कोटा शहर में मात्र राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में ही एमए इंग्लिश करवाई जाती है लेकिन सीटें कम होने से मेरिट हाई जाती है, जिसकी वजह से अधिकतर विद्यार्थियों को रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में आरटीयू  से उम्मीद थी। लेकिन यहां भी अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण कोर्स शुरू नहीं हो पाए। ऐसे में मजबूरी में स्वयंपाठी के रूप में कोटा विवि से एग्जाम फॉर्म भरना पड़ा। यदि, यह फॉर्म नहीं भरते तो आरटीयू के चक्कर में एक साल खराब हो जाता। <br /><strong> - हिमेश कुमावत, याज्ञेंद्र, राकेश नामा, छात्र </strong></p>
<p>टेक्नीकल यूनिवर्सिटी होने के नाते आरटीयू का इंफ्रास्ट्रेक्चर बेहतर है। ऐेसे में यहां से एमएससी करना चाहता था लेकिन दिसम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं होने से मजबूरी में गवर्नमेंट कॉलेज में ही प्राइवेट एडमिशन लेना पड़ा। यदि, नवम्बर तक भी प्रोसेज शुरू हो जाता तो एडमिशन ले सकते थे। आरटीयू प्रशासन की लापरवाही से कई विद्यार्थियों का साल खराब होने की नौबत आ गई।  <br /><strong>- हितेंद्र सिंह, विवेक अग्रवाल, छात्र </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />विभिन्न कारणों से आरटीयू में एमए व एमएससी पीजी कोर्सेज वर्तमान सत्र 2024-25 से शुरू नहीं कर पाए। हालांकि, कोर्स को लेकर नीति निर्धारण हो चुका है। अब आगामी सत्र 2025-24 से यह नॉन इंजीनियरिंग कोर्सेज शुरू किए जाएंगे। <br /><strong>- प्रो. रंजन माहेश्वरी, चीफ प्रोक्टर आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 18:58:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों के लिए अच्छी खबर: राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए अंतिम मौका</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के छात्रों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं को अंतिम मौका दिया गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-for-students-last-chance-for-admission-in-rajasthan/article-96625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/sanskrit-university.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के छात्रों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं को अंतिम मौका दिया गया है। इसमें छात्र शास्त्री-आचार्य के साथ बीए और एमए में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम चरण में आवेदन की तिथि 5 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। इस दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन 100 रुपए विलंब शुल्क के साथ जमा कर सकते हैं। शास्त्री व आचार्य कक्षाओं के लिए वेद एवं पौरोहित्य, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, साहित्य, व्याकरण, दर्शन, जैन दर्शन और विशिष्टाद्वैत वेदांत में आवेदन करने का विकल्प विद्यार्थियों के पास है।</p>
<p>विषय नहीं होने पर भी कर सकते हैं आवेदन  : प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास ने बताया कि योग विज्ञान विषय में बीए व एमए कक्षाओं के अतिरिक्त योग, ज्योतिष एवं कर्मकांड और पीजीडीसीए जैसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम में भी विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय में बीए और एमए पाठ्यक्रम के लिए भी आवेदन चालू हैं। बीए और एमए में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, शिक्षा, दर्शन शास्त्र के अतिरिक्त संगीत और हिंदू अध्ययन विषय में भी आवेदन किए जा सकेंगे। जिन विद्यार्थियों के पास उच्च माध्यमिक स्तर पर संस्कृत विषय नहीं है, वे भी विश्वविद्यालय में शास्त्री और बीए पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Dec 2024 11:25:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश के छात्र बिना संस्कृत के कर सकते हैं शास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[ जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम चरण में आवेदन की तिथि 30 अक्टूबर तक कर सकते है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-students-can-do-shastri-in-university/article-93091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/sanskrit-university.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के छात्रों को संस्कृत के साथ अन्य विषयों की पढ़ाई का अंतिम मौका मिला है। इस दौरान जिन विद्यार्थियों के पास उच्च माध्यमिक स्तर पर संस्कृत विषय नहीं है, वे भी विश्वविद्यालय में शास्त्री और बीए पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम चरण में आवेदन की तिथि 30 अक्टूबर तक कर सकते है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी अब बढ़ी हुई तिथि के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। शास्त्री व आचार्य कक्षाओं के लिए वेद एवं पौरोहित्य, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, साहित्य, व्याकरण, दर्शन, जैन दर्शन और विशिष्टाद्वैत वेदांत में आवेदन करने का विकल्प विद्यार्थियों के पास है। </p>
<p><strong>योग के साथ अन्य कोर्स कर सकते हैं</strong><br />योग विज्ञान विषय में बीए व एमए कक्षाओं के अतिरिक्त योग, ज्योतिष एवं कर्मकांड और पीजीडीसीए जैसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम में भी विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास ने बताया कि विश्वविद्यालय में बीए और एमए पाठ्यक्रम के लिए भी आवेदन चालू हैं। बीए और एमए में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, शिक्षा, दर्शन शास्त्र के अतिरिक्त संगीत और हिंदू अध्ययन विषय में भी आवेदन किए जा सकेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 13:51:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज का टूटा दम</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/professional-courses-in-government-colleges-of-the-city-are-in-shambles/article-92574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज दम तोड़ रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किए बीबीए, एमबीए कोर्स व कम्प्यूटर साइंस सब्जेक्ट सरकारी मशीनरी की उपेक्षा की भेंट चढ़ गए। वहीं, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, अब तक एमएससी व एमए कोर्स में एडमिशन प्रोसेज भी शुरू नहीं कर सका। इनमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति गवर्नमेंट कॉमर्स की है। यहां बीबीए में 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। ऐसे में इस वर्ष बीबीए कोर्स शुरू होना मुश्किल है। वहीं, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में मात्र 16 विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय लिया है। जबकि, सीट 80 है। ऐसे में स्टूडेंट्स व शिक्षक असमंजस के दोहरे भंवर में फंस गए। जिन पाठ््यक्रमों में विद्यार्थियों ने एडमिशन ले लिया वहां, कक्षाएं सस्पेंड होने का खतरा हो गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन के लिए निर्धारित एडमिटेड स्टूडेंट्स संख्या के अभाव में कोर्सेज चलाना व दिसम्बर से पहले सेमेस्टर एग्जाम की तैयारी करवाना समझ से परे है। </p>
<p><strong>इस साल बीबीए कोर्स चलना मुश्किल</strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बीबीए कोर्स का इस वर्ष संचालित होना मुश्किल लग रहा है। यहां 60 सीटों पर मात्र 3 ही एडमिशन हुए हैं। जबकि, आवेदन 16 विद्यार्थियों ने किया था। लेकिन, फीस मात्र तीन ही स्टूडेंट्स ही जमा करवा सके। इधर, कॉलेज प्रशासन फीस जमा करवाने के लिए छात्रों से सम्पर्क कर रहा फिर भी छात्र रुचि नहीं दिखा रहे। कक्षाएं शुरू करने के लिए 10 छात्रों का एडमिशन लेना आवश्यक है। </p>
<p><strong>एमबीए व एमसीए का अता-पता नहीं</strong><br />शहर के दो बड़े कॉलेजों को एमबीए व एमसीए कोर्स शुरू करने की सरकार से वित्तिय व प्रशानिक स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन कॉमर्स कॉलेज को एमबीए एडमिशन पॉलीसी को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं मिली। वहीं, एआईसीटी द्वारा पोर्टल नहीं खोले जाने से गवर्नमेंट साइंस कॉलेज एमसीए में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका। शिक्षाविदें का तर्क है, सत्र 2024-25 में यह कोर्स शुरू नहीं हो सकते। विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए अब अगले वर्ष का इंतजार करना होगा। </p>
<p><strong>आरटीयू शुरू नहीं कर सका एमएससी व एमए </strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अपने कोटा कैम्पस में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम अब तक शुरू नहीं कर सका। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर माह में ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एडमिशन कोर्डिनेशन कमेटी का समय पर गठित न होना, सिलेबस पूरी तरह से तैयार न होना, बोर्ड आॅफ स्टडीज की दूसरी बैठक अब तक न होना सहित कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>कम्प्यूटर साइंस : 80 सीटों पर 16 विद्यार्थी</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय में विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार ने इसी सत्र से कम्प्यूटर विषय खोला है। प्रचार-प्रसार के बावजूद विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय चुनने में रुचि नहीं दिखाई। एक सेशन में 80 सीटें हैं और 16 विद्यार्थियों ने ही कम्प्यूटर सब्जेक्ट लिया है। जबकि, यह ऐच्छिक विषय है फिर भी छात्रों ने रुझान नहीं दिखाया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />बीबीए में एडमिशन तब शुरू हुए जब बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ऐसे में हम बीकॉम छोड़ बीबीए में कैसे दाखिला  लेते। प्रोफेशनल कोर्स के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार सरकार की लेटलतीफी है। <br /><strong>-योगेंद्र चंद, ज्ञानदेव कुमार, आशिष शृंगी, छात्र कॉमर्स</strong></p>
<p>आरटीयू से इंग्लिश में एमए करना चाहता हूं। लेकिन, अब तक एडमिशन प्रोसेज ही शुरू नहीं किया। जबकि, पूर्व में सितम्बर से किए जाने की बात कही गई थी। गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंग्रेजी में पीजी होती है, जहां सीटे लिमिटेड होने के कारण एडमिशन नहीं मिल पाया।<br /><strong>-सुरेश कहार, हर्षित मेहता, छात्र </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />बीबीए में 16 स्टूडेंट्स ने आवेदन किए थे लेकिन 3 ने ही फीस जमा करवाई है। एडमिशन प्रोसेज में देरी बड़ा कारण रही है। जबकि, कोर्स का व्यापक प्रचार-प्रयास भी किया है। लेकिन, अधिकतर विद्यार्थी बीकॉम व अन्य कोर्सेज में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में रुझान कम दिखा। हालांकि, अगले सत्र में अच्छा रेस्पोंस देखने को मिलेगा।<br /><strong>-हितेंद्र कुमार, प्राचार्य गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने कम्प्यूटर साइंस विषय खोला है। जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया। सब्जेक्ट चुनाव के लिए आयुक्तालय द्वारा दो बार अंतिम तिथि बढ़ाकर मौका भी दिया। इसके बावजूद अब तक 16 ही विद्यार्थियों ने कम्प्यूटर विषय का चयन किया है। रुझान कम होने के कई कारण हो सकते हैं।<br /><strong>-प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हमारी बेहतर व्यवस्थाएं, प्रचार प्रसार, दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम है, जो बीसीए कोर्स में दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने जबरदस्त रुझान दिखाया। यहां 40 सीटों पर 21 स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया है। जिनकी कक्षाएं भी शुरू करवा दी गई हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए विद्या संबल पर वैल क्वालिफाइड तीन शिक्षक नियुक्त किए हैं। <br /><strong>-प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p><strong>आरटीयू ने नहीं दिया जवाब</strong><br />खबर के संबंध में नवज्योति ने आरटीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रंजन माहेश्वरी से सम्पर्क करने के लिए फोन किए, मैसेज किए लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 16:46:09 +0530</pubDate>
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