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                <title>संस्कृत व इंग्लिश में एक भी एडमिशन नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-a-single-admission-in-sanskrit-and-english/article-124287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/7852014.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में छात्राओं के लिए खोले गए राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में छात्राओं का एडमिशन लेने में रुझान नहीं दिखा। कैथून व सुकेत में बीए प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने संस्कृत विषय नहीं लिया है। जबकि, सुकेत महाविद्यालय में तो इंग्लिश लिक्टेचर में भी शुन्य नामांकन है।  वहीं, बूंदी जिले के डाबी में 5 छात्राओं  ने जी संस्कृत विषय लिया है। लेकिन, आयुक्तालय के नियमानुसार  प्रत्येक विषय में 10 छात्राओं का नामांकन होने पर ही उसकी कक्षाएं संचालित की जा सकती है। ऐसे में इन छात्राओं में संस्कृत की कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है।  स्थानीय छात्राओं व अभिभावकों का तर्क है कि आयुक्तालय ने नए कॉलेजों को विषय आवंटन में क्षेत्र की मांग को नजरअंदाज किया है।  जबकि, यहां उर्दू व होम साइंस की डिमांड थी।  दरअसल, वर्ष 2025 में सरकार ने कोटा-बंूदी व झालावाड़ में कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन चार राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले थे। जिसमें झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।</p>
<p><strong>संस्कृत व अंग्रेजी साहित्यके प्रति बेरुखी </strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय कैथून में एक भी छात्रा  ने संस्कृत विषय नहीं लिया। हालांकि, नोडल जेडीबी आर्ट्स महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्राओं द्वारा सब्जेक्ट चेंज करने की एप्लीकेशन दी जा रही है। वहीं, सुकेत महाविद्यालय में तो संस्कृत के साथ अंग्रेजी साहित्य में भी एक भी बालिका ने दाखिला नहीं लिया। ऐसे में यहां इन दोनों विषयों की कक्षाएं संचालित नहीं हो सकेगी। </p>
<p><strong>डाबी कॉलेज : छात्राओं में असमंजस</strong><br />आयुक्तालय के नियमानुसार, किसी भी विषय की कक्षा के संचालन के लिए 10 विद्यार्थियों का होना आवश्यक है। ऐसे में यहां संस्कृत व अंगे्रजी साहित्य में बालिकाओं की संख्या दस से कम है। ऐसे में जिन्होंने इन विषयों में दाखिला लिया है, उनमें अब कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है। इधर, कॉलेज प्रशासन का कहना है, नए महाविद्यालय होने के नाते 5 स्टूडेंट पर भी आयुक्तालय द्वारा कक्षा संचालन की अनुमति दे सकता है।  </p>
<p><strong>4 बार एडमिशन का मौका फिर भी सीटें खाली</strong><br />कॉलेज आयुक्तालय द्वारा 4 बार आॅनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर छात्राओं को एडमिशन का मौका दिया था। इसके बावजूद बालिकाओं ने नए कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाए पुराने स्थापित महाविद्यालयों में ही रुचि दिखाई। नतीजन, कोटा, बूंदी के तीन राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में 600 में से 400 से ज्यादा सीट्स खाली रह गई। हालांकि, आयुक्तालय द्वारा रिक्त सीटों को भरने के लिए आॅफलाइन आवेदन भी लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन तीनों महाविद्यालय में सीटें खाली रहेंगी। </p>
<p><strong>नामांकन घटने का कारण </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर ने बताया कि नवीन गर्ल्स कॉलेजों में घटते नामांकन के पीछे कई कारण हैं, जो इस प्रकार है। <br />- आवश्यकता से अधिक गर्ल्स कॉलेज खोलना।<br />- नए कॉलेजों के पास न खुद का भवन व न ही स्थाई फैकल्टी।<br />- दो-दो कमरों में कॉलेज संचालित करना। भौतिक संसाधनों की कमी। <br />- क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत सब्जेक्ट आवंटित करना। <br />- नए कॉलेजों का प्रचार-प्रसार का अभाव।<br />- नए महाविद्यालयों में सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर आशंकाएं। </p>
<p><strong>कब-कब बड़ी आवेदन की अंतिम तिथि </strong><br />- राजकीय महाविद्यालयों में गत 4 जून से ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी। <br />- दूसरी बार अंतिम तिथि 16 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई। <br />- तीसरी बार में 5 दिन और बढ़ाकर अंतिम तिथि 25 जून कर दी गई। <br />- सीटों के मुकाबले आवेदन नहीं आने पर फिर से लास्ट डेट बढ़ाकर 3 जुलाई कर दी गई। <br />- 7 जुलाई को प्रथम वरियता सूची जारी की गई। <br />- 16 जुलाई को विभिन्न श्रेणियों में रिक्त रही सीटों पर फिर से आवेदन मांगे गए। <br />- अब गत 18 अगस्त से 23 अगस्त तक खाली रह गई सीटों पर आॅफलाइन एडमिशन देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं व अभिभावक</strong><br />सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए लेकिन बिल्डिंग व फैकल्टी भी स्थाई नहीं है। गत वर्ष भी राजसेस महाविद्यालयों में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने के एक से डेढ़ माह पहले ही शिक्षकों को हटा दिया था। इस बार भी ऐसी  स्थिति रहने की आशंका के चलते बूंदी गर्ल्स कॉलेज में दाखिला लेना ज्यादा मुनासिब लगा। <br /><strong>-अहिल्या कंवर, छात्रा डाबी</strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला तो खुशी थी लेकिन ऐसे विषय अलॉट कर दिए, जो छात्राओं के लिए रुचिकर नहीं है। यहां होम साइंस व उर्दू विषय दिया जाना चाहिए था। इसलिए सुकेत कॉलेज में दाखिला लेने की बजाए रामगंजमंडी महाविद्यालय की ओर रुख करना ज्यादा सही लगा। <br /><strong>-पार्वती कुमारी,  रेहाना, (परिवर्तित नाम) सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे का कॉलेज राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल के तीन कमरोें में चल रहा है।  क्षेत्र की आवश्यकतानुसार सब्जेक्ट नहीं होना नामांकन में कटौती का मुख्य कारण है। यहां उर्दू, जीपीएम व होम साइंस विषय नहीं खोला गया। बीए में तीन आॅफनल सब्जेक्ट लेने होते हैं। ऐसे में छात्राओं ने कस्बे से बाहर शहर के कॉलेजों में दाखिला लिया है।  <br /><strong>- मोहम्मद अख्तर, बंशीलाल, अभिभावक कैथून </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी यह कॉलेज नए हैं। सुविधाएं विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा। यदि, छात्राओं की ओर से विषयों को लेकर कोई कम्पलेन आती है तो उसे आयुक्तालय भिजवाकर समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्ताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 15:00:14 +0530</pubDate>
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                <title>हाडौती के सरकारी कॉलेजों से अंग्रेजी की बत्तीगुल</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के 12 राजकीय कॉलेजों में नहीं विषयवार शिक्षक। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/english-language-from-government-colleges-of-hadauti/article-78205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/hadoti-k-sarkari-college-s-angrezi-ki-battigul...kota-news-16-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षा से गुणवत्ता दूर होती जा रही है। वर्षों से महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं ही नहीं लग रही। जबकि, इन दिनों समर विकेशन चल रहा है और प्रथम वर्ष की सैकंड सेमेस्टर की क्लासे लगाई जा रही हैं। लेकिन, पढ़ाने वाले ही नहीं होने से कक्षाएं सुनी पड़ी हैं। हालात यह हैं, कोटा संभाग के 12 राजकीय महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां अंगे्रजी से लेकर होम साइंस तक की कक्षाएं ही नहीं लगती। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य भगवान भरोसे है।  दरअसल, संभाग के चारों जिलों में करीब 44 सरकारी महाविद्यालय हैं। जिनमें से 12 ऐसे हैं जहां एक दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं है। मजबूरन, विद्यार्थियों को अंग्रेजी और होम साइंस पढ़ने के लिए महंगे दामों पर टयूशन का सहारा लेना पड़ता है। सरकार की अनदेखी का खामियाजा हर साल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>5 कॉलेजों में नहीं लगती अंग्रेजी की कक्षा</strong><br />हाड़ौती के 5 राजकीय महाविद्यालयों में कई सालों से अंगे्रजी की कक्षाएं  ही नहीं लगती। जबकि, एडमिशन व एग्जाम फीस पूरी वसूली जाती है।  हालात यह हैं, राजकीय महाविद्यालय इटावा, हिंडौली, मांगरोल, अटरू बयॉज, अटरू गर्ल्स में पिछले कई वर्षों से अंग्रेजी की नियमित कक्षाएं नहीं लगी। हिंडौली में तो करीब तीन साल से अंग्रेजी की कक्षाएं लगी ही नहीं। इटावा कॉलेज कॉलेज में वर्ष 2021 के बाद से इंग्लिश पढ़ाने वाला नहीं है। इसी तरह मांगरोल में 2022 के बाद इस विषय का कोई शिक्षक ही नहीं आया। ऐसे में परीक्षा तक स्टूडेंट्स तनाव में रहते हैं। </p>
<p><strong>यहां नहीं चलती होम साइंस</strong><br />बारां जिले के चार राजकीय महाविद्यालयों में होम साइंस की कक्षाएं नहीं लगती। इनमें गवर्नमेंट कॉलेज बारां, शाहबाद कन्या,केलवाड़ा कन्या, अटरू कॉलेज शामिल हैं। यहां छात्राओं को पढ़ाने व समझाने वाले ही नहीं मिलते। हालांकि, बारां गर्ल्स कॉलेज में एक शिक्षक है। ऐसे में बेटियों को भटकना पड़ता है। प्रैक्टिल सब्जेक्ट होने के बावजूद परीक्षा में सबसे कम नम्बर इन्हीं में मिलते हैं। यहां न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल पर मिलते हैं। छात्राएं सब्जेक्ट बदलने को मजबूर होती हैं।</p>
<p><strong>सब्जेक्ट ही बदल रहे विद्यार्थी</strong><br />हिंडौली महाविद्यालय के प्राचार्य रमेशचंद मीणा ने बताया कि अंग्रेजी के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों ने सब्जेक्ट ही बदल लिया। सत्र 2023-24 में दाखिले के दौरान छात्रों ने अंगे्रजी विषय लिया लेकिन शिक्षक नहीं होने से एग्जाम फॉर्म भरने के दौरान अंग्रेजी छोड़ दूसरा विषय ले लिया। इसी तरह सत्र 2022-23 के प्रथम वर्ष के छात्रों ने द्वितीय वर्ष में आकर अंगे्रजी विषय बदल दिया। विषय विशेषज्ञ नहीं होने से पढ़ाई तो प्रभावित होती है। </p>
<p><strong>मांगरोल में 10 में से 7 पद खाली</strong><br />राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार बताते हैं, यहां 10 पद स्वीकृत है। जिसमें से 7 विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें अंगे्रजी , इतिहास, राजनेतिक विज्ञान, ऊर्दू, ज्योग्राफी शामिल हैं। पिछले दो साल से अंग्रेजी का कोई शिक्षक नहीं है। इस संबंध में आयुक्तालय को पत्र भी लिखे हैं। अभी प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी हैं, ज्योग्राफी के लिए दूसरी जगह से शिक्षक बुलाने पड़ेंगे। </p>
<p><strong>बारां में 59 में 9 ही शिक्षक </strong><br />राजकीय बारां कॉलेज के प्रिसिंपल केएम मीणा ने बताया कि यहां शिक्षकों के59 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 9 ही कार्यरत हैं। हालांकि, पहले 16 थे, लेकिन इसमें से 3 प्रतिनियुक्ति पर बाहर हैं और 4 शिक्षकों को राजकीय महाविद्यालय शाहबाद गर्ल्स, छबड़ा कन्या, नाहरगढ़ व सीसवाली में लगे हैं। ऐसे में कॉमर्स संकाय में अकाउंट्स, बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन, आर्ट्स में इतिहास, ज्योग्राफी, ऊर्दू, विज्ञान वर्ग में गणित के शिक्षक नहीं है। ऐसे में इनकी कक्षाएं संचालित करने में काफी परेशानी होती है। </p>
<p><strong>स्कॉलरशिप से लेकर एडमिशन तक सब पेंडिंग</strong><br />इटावा कॉलेज के प्राचार्य रामदेव मीणा ने बताया कि कॉलेज में उनके अलावा कोई शिक्षक नहीं है। हालांकि, संविदा पर समाजशास्त्र की शिक्षिका लगी हैं। इनके अलावा 5 विषयों के पद रिक्त हैं। एक साल से यही हालात है। बच्चों को पढ़ाने के अलावा स्कॉलरशिप, आॅनलाइन पोर्टल, एग्जाम और एडमिशन से लेकर कई तरह के कार्य भी करने होते हैं।  रे-सेंटर को पत्र लिख पांच विषयों के शिक्षक मांग रहे हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में पिछले तीन साल से अंगे्रजी की पढ़ाई नहीं हो रही। सेमेस्टर प्रणाली के तहत दो साल एग्जाम हो रहे हैं। प्रथम सेमेस्टर में ही पेपर सिर से ऊपर निकल गया। न तो परीक्षा की तैयारी होती है और न ही सिलेबस समझाया जाता है। मजबूरन, ट्यूशन व वन वीक सीरीज का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>- केवश दत्त, छात्र, इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>एडमिशन व एग्जाम फीस देने के बाद भी अंगे्रजी, इतिहास व लोक प्रशासन जैसे मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। परीक्षा में नम्बर कम आते हैं। शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा प्रथम सेमेस्टर में भुगतना पड़ा है। यहां एडमिशन लेना ही गलत हो गया। <br /><strong>- शंभू, तपेश, कैलाश, छात्र, मांगरोल कॉलेज</strong> </p>
<p>व्शिक्षकों की कमी तो है, लेकिन रे-सेंटर की मदद से व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आरपीएससी के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा चल रही है, कुछ पेपर हो चुके हैं तो कुछ बाकी है। जैसी ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, सरकार के माध्यम से कॉलेजों को नए शिक्षक मिल जाएंगे। वहीं, राजसेस कॉलेजों में विद्या संबल पर शिक्षक लगाकर  सुचारू रूप से पढ़ाई करवाई जा रही हैं। कॉलेज प्राचार्य आवश्यकतानुसार रे-सेंटर को पत्र  लिख शिक्षक की मांग करें, वहां से शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।<br /><strong>- गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:33:20 +0530</pubDate>
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                <title>महात्मा गांधी स्कूलों में खिलेंगी अब बाल वाटिकाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी बच्चे नर्सरी से यूकेजी तक पढ़ाई करेंगे। बाल वाटिका में हर वो सुविधाएं उपलब्ध होगी जो कॉन्वेंट स्कूलों में मिलती है। सरकार के इस प्रयास से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को संबल मिलेगा। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bal-vatikas-will-now-bloom-in-mahatma-gandhi-schools/article-31308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/mahatma-gandhi-schools-mei-khilegi-ab-bal-vatikaye...kota-news.2.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। बुनियादी शिक्षा से ही नींव मजबूत करने में जुटी है। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को विकसित करने के लिए नए-नए नवाचार किए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों का सवार्गीण विकास के लिए प्रदेशभर में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले गए। इसी दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए सरकार ने अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर दी है। प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी बच्चे नर्सरी से यूकेजी तक पढ़ाई करेंगे। दरअसल, सरकार ने छोटे बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा से जोड़ने और उनकी मानसिक तथा बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए प्रदेश के 925 माहात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की है। सरकार ने इन्हें बाल वाटिका नाम दिया है। कोटा जिले में कुल 27 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं, जिनमें से 19 में बाल वाटिका शुरू की गई है। इसमें 3 या इससे अधिक उम्र के बच्चों को एडमिशन दिया जाएगा। यहां बच्चे प्राइवेट स्कूल की तरह नर्सरी से यूकेजी तक फिर कक्षा 1 से 12वीं तक की मुफ्त में पढ़ाई करेंगे। बाल वाटिका में हर वो सुविधाएं उपलब्ध होगी जो कॉन्वेंट स्कूलों में मिलती है। सरकार के इस प्रयास से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को संबल मिलेगा। </p>
<p><strong>6 जनवरी से शुरू होंगी क्लासें</strong><br />बाल वाटिका में एडमिशन के लिए शेड्यूल जारी करने के साथ ही 6 जनवरी 2023 से क्लासेज शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि शिक्षा सत्र का अधिकांश हिस्सा बीत चुका है और स्कूल्स में फिलहाल एडमिशन का समय नहीं है। विभागीय अधिकारियों की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि बीच सत्र में भी बड़ी संख्या में सरकारी महात्मा गांधी स्कूल में प्री-प्राइमरी के एडमिशन होंगे। एडमिशन फॉर्म संबंधित स्कूलों से प्राप्त कर सकते हैं। </p>
<p><strong>आज से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया </strong><br />महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल मल्टीपरपज के प्रिंसिपल राहुल शर्मा ने बताया कि कोटा शहर के 19 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में बाल वाटिकाएं शुरू होंगी। विभाग की ओर से जारी शिड्यूल के अनुसार गुरूवार से एडमिशन के लिए विज्ञप्ति जारी की गई है।  इसके साथ ही 2 दिसंबर से 15 दिसंबर तक आवेदन लिए जाएंगे। प्रवेश के लिए मिले आवेदनों की लिस्ट 16 दिसंबर को स्कूल में नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक क्लास में 25 स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाएगा। इससे अधिक आवेदन होने पर 21 दिसंबर को लॉटरी निकाली जाएगी। 22 दिसंबर को लॉटरी से चयनित स्टूडेंट्स की लिस्ट नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित होगी। इसके साथ ही एडमिशन की कागजी कार्रवाई 23 दिसंबर से शुरू हो जाएगी। क्लासेज 6 जनवरी से शुरू होगी।  </p>
<p><strong>सीसीई पैटर्न पर होगा मूल्यांकन</strong><br />पूर्व प्राथमिक बाल वाटिका कक्षाओं के लिए पाठ्यचर्या व पाठ्यपुस्तकें राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उदयपुर द्वारा तैयार की गई है। यह किताबें राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल जयपुर द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी। आकलन सतत और व्यापक मूल्यांकन (सीसीई ) पद्धति के अनुसार किया जाएगा। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, दिन-प्रतिदिन के अनुभव, कला कार्य, भागीदारी एवं व्यवहार को शामिल किया जाएगा। </p>
<p><strong>क्या है बाल वाटिका </strong><br />बाल वाटिका योजना के तहत प्राइमरी क्लास से पहले बाल विकास के लिए नींव मजबूत करने का कार्य किया जाता है। जिसमें तरह तरह के खेलों के माध्यम से बच्चों को पढ़ने, लिखने तथा संख्याओं को समझने की शिक्षा दी जाती है। साथ ही उनके दिमाग की उत्तेजना को भी विकसित किया जाता है, जिससे बच्चों में और भी क्रिएटिविटी आए और शिक्षा ग्रहण करने के लिए अच्छे से तैयार हो सके। यानी, नींव मजबूत करना ही बाल वाटिका का उददेशय है। </p>
<p><strong>सप्ताह में 5 दिन लगेगी स्कूल</strong><br />बाल वाटिका प्री प्राइमरी क्लासेज सिर्फ चार घंटे संचालित होंगी। इसके लिए सर्दी में 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह 10 बजे से 2 बजे तक स्कूल का संचालन होगा। वहीं, 1 अप्रेल से 30 सितंबर तक सुबह 8 बजे से 12 बजे तक स्कूल चलेंगे। सप्ताह में पांच दिन क्लासेज चलेंगी और शनिवार व रविवार अवकाश रहेगा।</p>
<p><strong>बाल वाटिका के कार्य </strong><br />बाल वाटिका का प्रमुख कार्य बच्चों को प्राइमरी क्लास से पहले उनके प्रारंभिक वर्षों में उचित देखभाल और मस्तिष्क की उत्तेजना बढ़ाने में मदद करना है। जिससे जब बच्चें प्राइमरी क्लास में अपना दाखिला कराए तो उन्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े और वह स्कूलों के वातावरण में अच्छे से अपने आप को ढाल सके। विभिन्न खेलों के माध्यम से बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता है। साथ ही पढ़ने, लिखने तथा संख्याओं की सही समझ के बारे में सिखाया जाता है। हालांकि बच्चे इसको अच्छे से सीखते भी हैं क्योंकि यह सभी एक खेल की तरह आयोजित किया जाता है।</p>
<p><strong>यह होगा लाभ</strong><br />बाल वाटिका से शिक्षा के आधार पर बच्चों को कई फायदे होंगे। यहां दाखिल होने से बच्चों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। जैसे की उन्हें सीधे प्राइमरी क्लास में डालने से उनका जो माइंडसेट है, वो अभी घर में खेलने वाला ही होता है। ऐसे में कुछ बच्चे शुरू के प्राइमरी क्लास के 1-2 साल तो कुछ समझ ही नहीं पाते और समय भी बीत जाता है। ऐसे में इन बच्चो का मस्तिष्क भी सही से विकसित नहीं हो पाता। प्री-प्राइमरी में आने से बच्चे प्राइमरी कक्षाओं में अच्छे से शिक्षा ग्रहण कर पाने के लिए पूरी तरह से तैयार रहेंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री की फ्लेगशिप योजना के तहत महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बाल वाटिकाएं शुरू की गई है। जिले में 27 माहात्मा गांधी स्कूल है, जिनमें से 19 में बाल वाटिका शुरू की गई है। जिसका उद्देश्य प्राइवेट स्कूल की पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के विकल्प के रूप में राजकीय  विद्यालयों में भी अंगे्रजी माध्यम से प्री-प्राथमिक कक्षाएं प्रारंभ की जा रही है। वहीं, वाटिकाओं में शिक्षक भी लगा दिए गए हैं। सरकार के इस प्रयास से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को संबल मिलेगा। <br /><strong>- राजेश मीणा, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2022 14:32:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निजी नहीं, अब महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल बने पहली पसंद, 2019 में प्रदेश में हुई थी शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में 559 अंग्रेजी स्कूल, जयपुर में 34 ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--not-private--now-mahatma-gandhi-english-school-became-the-first-choice--was-started-in-the-state-in-2019-559-english-schools-in-the-state--34-in-jaipur/article-8014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/nid.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में निजी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का रुझान कम हो रहा है। ऐसा इसलिए कि अब पहली पसंद निजी नहीं, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल बन रहे हैं। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 2019 में प्रदेश के 33 जिलों में 33 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू किए थे। तीन साल में इनकी संख्या 559 तक पहुंच गई, इनमें से 34 स्कूल जयपुर में हैं। सरकार ने अगले एक साल में 1200 और नए अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने की घोषणा की है। मानसरोवर स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल की प्रिंसीपल अनू चौधरी और शिक्षिका रुचि सिंह ने कहा कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार ने जो शुरुआत की है, वह सच में इस क्षेत्र में एक नई क्रांति के रूप में सामने आई। आज सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे किसी भी रूप में निजी स्कूलों से कम नहीं हैं।</p>
<p><strong>प्रदेश में 559 अंग्रेजी स्कूल, जयपुर में 34 </strong><br /><strong>20 गुना तक ज्यादा आवेदन</strong><br />शिक्षित अध्यापकों और बेहतर संसाधनों के चलते ये स्कूल लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले सत्र में भी स्कूल में सीटों के मुकाबले 20 गुना तक ज्यादा आवेदन आए थे। जयपुर में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की संख्या 34 है, इसके बावजूद आवेदन के हालात ऐसे ही बने हुए हैं।  <br /><br /><strong>छात्रों का मानना टॉप लेवल के हैं स्कूल</strong> <br />9वीं की छात्रा वर्षा चौधरी, अंशुल और यश्विनी की अंग्रेजी ऐसी है कि मानो प्रदेश के किसी टॉप लेवल की स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं हैं। छात्राओं ने महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बारे में कहा कि पिछले तीन सालों से लगातार अंग्रेजी में ही पढ़ाई और पूरा संवाद हो रहा है। स्कूल में नि:शुल्क शिक्षा, भोजन, अध्यापन सामग्री मिलती है तो वहीं शिक्षक भी वेल क्वालिफाइड होने से कोई समस्या नहीं आती है। पहले कक्षा 1 से 8वीं तक ही अंग्रेजी कक्षाओं की शुरुआत की थी, जो अब 10वीं तक पहुंच गई है। 11वीं में पढ़ने वाली भारती और आरती की अंग्रेजी संवाद तो मानो लोगों का दिल जीत ले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 14:46:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>दो हजार महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय और खुलेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[आवासीय पैरा खेल अकादमी की स्थापना होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/two-thousand-mahatma-gandhi-english-schools-will-open--ten-thousand-english-medium-teachers-will-be-recruited/article-4913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/mahatma-gandhi-vidyalaya.jpg" alt=""></a><br /><p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट2022-23 में शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में एक-एक हजार महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय शुरू करने की घोषणा की हैं। अंग्रेजी में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अंग्रेजी मीडियम शिक्षकों को पृथक से काडर बनाया जाएगा। इन विद्यालयों में प्रथम चरण में लगभग दस हजार अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक भर्ती किए जाएंगे।<br /><br /><strong>शिक्षा एवं खेल 3820 स्कूल सेकंडरी से सीनियर सेकंडरी में क्रमोन्नत होंगे <br />जयपुर में एजुकेशन हब की सौगात<br />जयपुर के जेएलएन मार्ग पर <br />स्थित सभी शैक्षणिक संस्थाओं को समन्वित कर एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। <br />राजा रामदेव पोद्दार रेजिडेंशियल स्कूल ऑफ एक्सीलेंस पर सौ करोड़।<br />महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गर्वनेंस एण्ड सोशल साइंस पर 225 करोड़।<br />राधाकृष्ण लाइब्रेरी एवं कोचिंग सेंटर पर 75 करोड़ रुपए।</strong><br /><br /><br />    3820 सेकंडरी स्कूलों को सीनियर सेकंडरी स्कूलों में क्रमोन्नत किया जाएगा। <br />    सभी ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिक विद्यालय खोले जाएंगे।<br />    रेगिस्तानी जिलों-जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू और जोधपुर में प्रथम चरण में दो सौ प्राथमिक विद्यालय खोलने की घोषणा।<br />    ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर स्थित प्राथमिक विद्यालयों को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सीधे सीनियर सेकण्डरी विद्यालयों में शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार क्रमोन्नत किया जाएगा।<br />    बालिकाओं को घर के समीप शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराने एवं विद्यालयों में ड्राप आउट कम करने के लिए राज्य में संचालित माध्यमिक स्तर के 389 उच्च प्राथमिक स्तर के एक हजार, 846 व प्राथमिक स्तर के 115 बालिका विद्यालयों को वरीयता के क्रम में चरणबद्ध रूप में क्रमोन्नत किया जाएगा। <br /><br /><br /><strong>जयपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना</strong><br />    जोधपुर में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की स्मृति में संचालित विश्वविद्यालय में सेंटर आॅफ एक्सीलेंस एण्ड रिसर्च की स्थापना।<br />    जयपुर में खेतान पॉलिटेक्निक महाविद्यालय परिसर में सौ करोड़ रुपए की लागत से इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना। <br />    मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना में आगामी वर्ष में 15 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />    भरतपुर स्थित श्री हिन्दी साहित्य समिति पुस्तकालय के आधुनिकीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए का अनुदान।<br />    कृषि पशु चिकित्सा, नर्सिंग, मेडिकल और तकनीकी क्षेत्रों में निजी शिक्षण संस्थाओं के प्रार्थना पत्र लम्बित हैं, उनका निस्तारण किया जाएगा।<br /><br /><strong>रीट परीक्षा फिर से जुलाई 2022 में होगी</strong><br />एसओजी में एंटी चिटिंग सेल का होगा गठन<br />एक लाख नौकरियों की घोषणा<br />रीट की परीक्षा जुलाई, 2022 में प्रस्तावित, पुराने अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा, पूर्व में दी गई सभी सुविधाएं दी जाएगी। रीट परीक्षा में 62 हजार पदों की संख्या। रीट के लिए द्विस्तरीय (पात्रता  एवं चयन) नियुक्ति प्रणाली अपनाई जानी प्रस्तावित है। <br /><br />   <strong> भर्ती प्रक्रिया में अनियमिताओं को रोकने के लिए एसओजी में एंटी चिटिंग सेल का गठन होगा। </strong><br />    सवा लाख पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन। पूर्व सरकार ने पांच वर्षों में दो लाख भर्तियां की, जबकि हम इस संख्या तक मात्र तीन वर्ष में ही पहुंच गए हैं। आगामी वर्ष में एक लाख अतिरिक्त पदों पर भर्ती की घोषणा।<br /><br /><strong>36 नए महिला महाविद्यालय खुलेंगे</strong><br />बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए 19 जिलों अजमेर के ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, अलवर के बड़ौद, किशनगढ़बास, राजगढ़, बांसवाड़ा के कुशलगढ़, बारां के अटरू, बाड़मेर के बायतू, बीकानेर के कोलायत, भीलवाड़ा के गुलाबपुरा, दौसा के मंडावरी, सैंथल, लवाण, महवा, भरतपुर के पीपला, उच्चैन, चूरू के सांडवा, जयपुर के चाकसू गोविन्दगढ़, बांसखोह, सांगानेर, विद्याधरनगर, झुंझुनूं के खेतड़ी, गुढ़ा, मुकुन्दगढ़, जोधपुर के सेखाला,भोपालगढ़, कोटा  के रामपुरा, नागौर के कुचामनसिटी, पाली के जोजावर, राजसमंद के भीम, सवाईमाधोपुर के वजीरपुर, गंगापुरसिटी और टोंक दत्तवास और अलीगढ़ में में 36 महिला महाविद्यालय खोले जाएंगे।<br /><br /><strong>स्टेट स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट की स्थापना होगी</strong><br /> खेल विभाग के तहत राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट की स्थापना होगी।<br /> जोधपुर में दस करोड़ की लागत से ‘राजस्थान हाई परफोर्मेंस स्पोर्ट्स टर्निंग एण्ड रिहेबिलेशन सेंटर’ बनाया जाएगा। <br /> जयपुर के एसएमएस स्टेडियम और उदयपुर खेलगांव में सिन्थेटिक ट्रेक का निर्माण करवाया जाएगा,जिस पर 15 करोड़ रुपए खर्च होंगे।<br /> चूरू के राजगढ़ में कबड्डी अकादमी और श्रीगंगानगर में एथलेटिक्स अकादमी के भवन का निर्माण।</p>
<p><strong>आवासीय पैरा खेल अकादमी की स्थापना होगी</strong><br />    जोधपुर में बनेगा राजस्थान हाई परफोर्मेंस स्पोर्ट्स टर्निंग एण्ड रिहेबिलेशन सेंटर <br />    पैरा खिलाड़ियों को उच्च तकनीकी प्रशिक्षण के लए जयपुर और जोधपुर में बीस-बीस करोड़ रुपए की आवासीय पैरा खेल अकादमी की स्थापना की जाएगी।<br />    ओलम्पिक पदक विजेताओं की तर्ज पर पैरालम्पिक खेलों के पदक विजेताओं को भी 25 बीघा कृषि भूमि आवंटित की जाएगी।  <br />    भरतपुर में कुश्ती/ कबड्डी जैसे पारम्परिक खेलों को  प्रोत्साहन देने के लिए स्टेडियम का विकास किया जाएगा। नागौर के नावां और रावतभाटा-चित्तौड़गढ़ स्टेडियम के विकास कार्य करवाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 24 Feb 2022 13:18:15 +0530</pubDate>
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                <title>अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे होंगे नियम-कायदे, समितियां और शक्तियां,प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में कुलपति उसी फील्ड के एक्सपर्ट होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87--%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-4410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/ru_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे नियम-कायदों से संचालन के लिए कॉमन एक्ट की कवायद को जल्द अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद है। अभी सभी यूनिवर्सिटीज एक्ट में कई अलग-अलग नियम-कायदे हैं।<br />इनमें से ज्यादातर एक्ट राजस्थान यूनिवर्सिटीज के स्थापना के वक्त अंग्रेजी हुक्मरानों के जनवरी 1947 में बनाएं कानून ही शामिल हैं। यूनिवर्सिटीज में चल रहे कानूनों को बदलने की कवायद गहलोत सरकार ने दो साल पहले शुरू की थी। सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसा कानून, शक्तियां, सरकारी हस्तक्षेप इत्यादि स्पष्टत: तय करने के लिए कॉमन एक्ट तैयार करने के लिए जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलपति पीसी त्रिवेद्वी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेठी ने एक साल पहले ही एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। लेकिन इसे कानूनी अमलीजामा पहनाकर बिल का रुप दिया जाना बाकी है। विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अभी बिल में तब्दील नहीं किया है। ऐसे में इस सत्र में इसके आने की गुजाइंश कम ही है। इसे वैधानिक मंजूरी मिले तो सभी यूनिवर्सिटीज के वर्तमान में लागू आदिम कानून विलोपित हो जाएंगे और समान कानून संहिता का तय फाूर्मला लागू हो जाएगा। प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में यूजीसी की गाइडलान के साथ ही उसी फील्ड से जुड़े शिक्षक या व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का बड़ा फैसला भी ड्राफ्ट में शामिल है। ऐसा हुआ तो प्रदेश की मेडिकल, पत्रकारिता, कृषि, विधि इत्यादि विषयों की यूनिवर्सिटीज में उसी फील्ड के एक्सपर्ट ही कुलपति बन सकेंगे। <br /><br /><strong>महाराष्ट्र-केरल में पहले से लागू है कॉमन एक्ट</strong><br />महाराष्ट्र और केरल राज्य में यूनिवर्सिटीज के लिए पहले से कॉमन एक्ट बनाकर लागू कर चुके हैं। इसी की तर्ज पर राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसमें वर्तमान परिदृश्य के मुताबिक यूनिवर्सिटीज के एक्ट में रिफॉर्म करने, उसमें फेरबदल करने, शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रबन्धन ढांचे में बदलाव को फोकस कर तैयार किया गया है। <br /><br />ड्राफ्ट पर अधिकारियों से चर्चा हुई है। जल्द इसे बिल में तब्दील करने के लिए फिर से बैठक करूंगा। प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इस पारित कराके लागू किया जाए। - <strong>राजेन्द्र यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री</strong><br /><br /><strong>ड्राफ्ट में ये सिफारिशें</strong><br /> प्रो वाइस चांसलर का पद सृजित हो, कुलपति की यूजीसी की तय गाइडलाइन के  अनुरूप यूनिवर्सिटी के ही सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति इस पद पर की जाए। <br /> सभी यूनिवर्सिटी में एक जैसी प्रबन्धन बॉडी और उनकी शक्तियां-कार्यप्रणाली हो। अभी यूनिवर्सिटीज में बोर्ड आॅफ मैनजमेंट, सिंडीकेट, सीनेट, एक्ज्यूक्टिव कमेटी, एकडेमिक काउंसिल इत्यादि अपने-अपने एक्ट के मुताबिक है। <br /> यूनिवर्सिटीज में न्यूनतम तय शैक्षणिक विभाग होना अनिवार्य होगा , टीचर्स की संख्या भी तय होगी। <br /> टीचर्स के पद तय करने और भर्ती के लिए सरकार की अनुमति लेने की जरुरत ना पड़े।  <br /> प्रबन्धन बॉडी में सरकारी अफसरों का हस्तक्षेप घटे, कहीं दो तो कहीं पांच सचिव स्तर के अफसर सदस्य। एक ही सचिव को शामिल करने का प्रस्ताव। <br /> हर विभाग में स्थाई फैकल्टी जरुरी होगी। अभी कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे विभाग, जिन्हें खुले दो दशक से ज्यादा लेकिन स्थाई टीचर्स भी नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 17:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तरी फ्रांस के कैलिस तट पर इंग्लिश चैनल में डूबी नाव, 27 प्रवासियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मृतकों में पांच महिलाएं और एक लड़की शामिल है और सिर्फ दो लोगों को बचाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%A4%E0%A4%9F-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%9A%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A1%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5--27-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4/article-2718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/nav-dubne-se-maut.jpg" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के गृहमंत्री गेराल्ड डार्मिनिन ने कहा कि उत्तरी फ्रांस के कैलिस तट पर इंग्लिश चैनल में  नाव डूबने से कम से कम 27 प्रवासियों की मौत हो गई। डार्मिनिन के हवाले से बताया जा रहा है कि मृतकों में पांच महिलाएं और एक लड़की शामिल है और सिर्फ दो लोगों को बचाया गया है। एक व्यक्ति लापता है। कुछ सप्ताह पहले फ्रांस ने देश के उत्तरी तट पर बने प्रवासियों के शिविरों को हटा दिया था। इस घटना के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रवासियों द्वारा खतरनाक इंग्लिश चैनल को पार करने प्रयासों को रोकने की घोषणा की है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Nov 2021 13:21:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अब प्री-प्राइमरी कक्षाओं में 8 से 15 नवंबर तक एडमिशन प्रक्रिया होगी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ऑफलाइन के साथ ही आवेदक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61861e4b1157e/article-2145"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/shiksha-sankul.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अब प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। इनमें 8 से 15 नवंबर तक एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी। जिसमें ऑफलाइन के साथ ही आवेदक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। प्री प्राइमरी क्लासेज में एडमिशन के आवेदन के बाद लॉटरी से छात्रों की सूची तैयार की जाएगी। जिसमें स्कूल के नजदीक और आस-पड़ोस में रहने वाले छात्रों को एडमिशन में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद 17 नवंबर को लॉटरी निकाली जाएगी। जबकि 18 नवंबर को चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी होगी।ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Nov 2021 16:20:28 +0530</pubDate>
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