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                <title>नहाय खाय के साथ शुरू हुआ छठ महापर्व</title>
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                        <![CDATA[अब राजस्थान का पर्व बना बिहार का लोक पर्व डाला छठ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%9B%E0%A4%A0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5/article-2175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dala_chhath_-chat_pooja.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। उत्तर भारत विशेषकर बिहार का प्रमुख लोक पर्व डाला छठ अब राजस्थान का भी पर्व बन गया है। इसे राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में रहने वाले बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। नहाय खाय के साथ शुरू होने वाला यह चार दिवसीय पर्व सूर्योपासना का पर्व है। इसमें डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत की पूर्णाहूति की जाती है। डाला छठ सोमवार से शुरू हो गया है, जो 11 नवम्बर तक  चलेगा। यह बहुत ही कठिन साधना के साथ किया जाता है। इस व्रत की तैयारी भाई दूज की पूजा के बाद शुरू होती है। भाई दूज के दिन मिट्टी के चूल्हे बनाए जाते हैं। उसी दिन गेहूं भी धोए जाते हैं। पवित्रता इतनी रखनी पड़ती है, जो किसी बच्चे का हाथ नहीं लगे या कोई जानवर नहीं आ जाए या खा नहीं जाए। <br /> <br /> <strong>अमीरी-गरीबी के भेदभाव को भुलाने वाला त्योहार</strong><br /> बिहार समाज संगठन के महासचिव सुरेश पंडित ने बताया कि यह व्रत एक ऐसा व्रत है, जिसमें अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं होता है। किसी को कोई बड़ी परेशानी होती है तो यह कहते हैं कि परेशानी खत्म हो जाएगी। तब हम पांच साल तक भीख मांग कर यह व्रत करेंगे। आस्था इतनी होती है कि जैसे ही मनोकामना पूरी हुई वैसे ही नहाए-खाए के दिन सुबह पांच घरों में जाकर छठ माता के लिए मांग कर लाते हैं। देने वाले भी बिना कुछ पूछे वस्तुएं दे देते हैं। यह आपसी प्रेम को भी दर्शाता हुआ बहुत बड़ा व्रत है। गांव में व्रत में उपयोग आने वाला जो भी समान किसी एक के पास है, वह अपने आसपास के लोगों को भी दे देते हैं। यदि किसी कारणवश भूल गए तो वह खुद मांग कर ले जाते हैं। अब समय ने बहुत कुछ बदल दिया है। पहले गरीबों को नई साड़ी और धोती व्रती को दुकान वाले भी देते थे, लेकिन अब समय के अनुसार यह सब बदल गया है। अब कुछ लोग कहते हैं सेवा करने वाले को इस व्रत का फ ल मिलेगा। इसलिए पैसे से सामान लेने चाहिए। तब देने वाले अच्छे हैं तो इसकी कीमत ना के बराबर कर देते हैं।<br /> <br /> <strong>जयपुर में रहती है धूम</strong><br /> समाज के वरिष्ठ सदस्य रोशन झा का कहना है कि नहाय-खाय के दिन लौकी की सब्जी व अरहर की दाल में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। बिहार समाज संगठन व मैथिली भोजपुरी छठ पूजा एकता समिति के तत्वावधान में डाला छठ पूजा महापर्व का आयोजन जयपुर के विभिन्न क्षेत्रो में किया जा रहा है। शहर के विभिन्न कॉलोनियों में रह रहे बिहार समाज के लोगों ने एनबीसी क्वार्टर के पीछे दुर्गा विस्तार कॉलोनी, हसनपुरा, खातीपुरा रोड पर मुख्य कार्यक्रम होंगे। इसके साथ ही किशन बाग, शास्त्री नगर, कानोता बांध, आमेर मावठा, मुरलीपुरा, विश्वकर्मा प्रताप नगर, करतारपुरा, रॉयल सिटी माचवा, बाइस गोदाम, गुर्जर की थड़ी, रामनगर, बड़ोदिया बस्ती, सैन कालोनी बनीपार्क, सूत मिल कॉलोनी, संजय कॉलोनी, पानी पेच, विद्याधर नगर, हीरापुरा, गिरधारीपुरा 200 फीट बाइपास, गोपालपुरा, सांगानेर, हरी नगर सोडाला, बिहारी कालोनी, जमुना नगर विस्तार, पंचवटी कालोनी, आदर्श नगर, बीस दुकान, तिलक नगर, जवाहर नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और जैतपुर आदि जगह पर यह पर्व मनाया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 11:50:31 +0530</pubDate>
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