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                <title>damaged - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : बारिश से बिगड़ी सड़कों की केडीए ने ली सुध, गड्ढे भरने और पेचवर्क का काम तेज</title>
                                    <description><![CDATA[एरोड्रम से सीएडी और महाराणा प्रताप सर्किल रोड पर गिट्टी फैलने से हो रहे थे हादसे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--kda-takes-note-of-roads-damaged-by-rain--work-on-filling-potholes-and-patch-repairs-accelerates/article-163725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)87.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों की सड़कों पर पेचवर्क कर उन्हें सही करने का काम किया जा रहा है।शहर में इस बार अभी तक लगातार मूसलाधार बारिश तो नहीं हुई है। लेकिन गत दिनों जितनी सी भी हल्की बारिश हुई थी। उसी में शहर के अधिकतर क्षेत्रों में गली मौहल्लों की ही नहीं मुख्य मार्गों तक की सड़कें बदहाल हो गई थी। कई जगह तो बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए थे और कई जगह पर डामर उखडऩे से सड़कों पर गिट्टी फेल गई थी। जिससे आए दिन वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसे हो रहे थे।एरोड्राम चौराहे से सीएडी रोड हो या नदी पार क्षेत्र में महाराणा प्रताप सर्किल की रोड। कई जगह पर तो दो पहिया वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो रहा था। गत दिनों तो स्कूटी सवार एक महिला की गिट्टी पर वाहन का संतुलन बिगडऩे से गिरने पर उनकी मौत तक हो गई थी। इसे देखते हुए केडीए ने सड़कों के गड्ढ़ों को सही करने का काम शुरु कर दिया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि शहर के मुख्य मार्गों पर हो रहे गड्ढ़ों का मामला दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 12 अगस्त को पेज दो पर' ऐ भाई...जरा देखकर चलों शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर की अधिकतर बदहाल सड़कों की हालत को बयां किया था। साथ ही सीएडी रोड पर गिट्टी फेलने समेत कई जगह का मामला उठाया था।<br />समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारी हरकत में आए। </p>
<p>गत दिनों केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों के गड्ढ़ों को तुरंत सही किया जाए। जिससे आमजन को परेशानी नहीं हो और हादसे भी नहीं हो सके। इसके बाद केडीए अधिकारियों ने सड़कों के गड्ढ़े भरने व पेचवर्क का काम शुरु किया है। </p>
<p>केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि शहर में कई जगह पर मेन रोड पर बड़े गड्ढ़े हो गए थे। फिलहाल उन्हें स्मूथ करने का काम किया जा रहा है। जहां सीसी हो सकता है वहां सीसी किया जा रहा है और जहां डामर का पेचवर्क हो सकता है वहां उसे किया जा रहा है। अभी काम चल रहा है। कई जगह पर काम हो गया है और कई जगह पर चल रहा है। जहां अधिक समस्या है वहां जल्दी ही सड़कों को सही करवा दिया जाएगा। जिससे वाहनों का संतुलन नहीं बिगड़े और हादसे नहीं हों। जबकि बड़े स्तर पर सड़कों को सही करने का काम बरसात का सीजन समाप्त होने के बाद 15 सितम्बर से किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:17:01 +0530</pubDate>
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                <title>वार्डों का नक्शा नया, समस्याएं पुरानी</title>
                                    <description><![CDATA[नए नक्शे में शामिल हुए कई इलाके, अब हर बस्ती तक सुविधाएं पहुंचाना निगम के लिए चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-ward-map--old-problems/article-162846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सरकार का नक्शा बदल गया है। डेढ़ सौ वार्डों से अब कोटा शहर 100 वार्डों में सिमट गया है। कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण की अलग-अलग व्यवस्था खत्म होने के बाद वार्डों की सीमाएं भी बदल गई हैं। कई वार्डों का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में एक ही वार्ड में पुरानी कॉलोनियों से लेकर नई बस्तियां, गांव, संस्थान और विकसित हो रहे क्षेत्र तक शामिल हो गए हैं। नवज्योति ने नए वार्डों की जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड 16 से 20 तक का जायजा लिया तो तस्वीर सामने आई कि वार्ड बदले हैं, सीमाएं बदली हैं, लेकिन नागरिकों की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-1 : वार्ड 16... कॉलोनियों और पुराने मोहल्लों का मेल</strong><br />यहां सड़क, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित व्यवस्था सबसे अहम है। बढ़े हुए क्षेत्र के चलते निगम के सामने हर इलाके तक समान रूप से सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती रहेगी। वार्ड 16 में सुभाष कॉलोनी, नंदा जी की बाड़ी, तेल वाली गली, सरस्वती कॉलोनी, बालाजी टाउन, विधाता कॉलोनी, श्मशान, घूम चक्कर, गणेश चौक, कुम्हारों का मोहल्ला और सरकारी स्कूल क्षेत्र शामिल हैं। वार्ड में पुराने मोहल्लों के साथ नई कॉलोनियां भी हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-2 : वार्ड 17... आवारा कुत्ते और सफाई बनी परेशानी</strong><br />स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों और साफ-सफाई को लेकर परेशानी बताई। कई जगह नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी नजर आई। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से खासकर बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। वहीं सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। वार्ड 17 में मोहन निवास, खंड गावड़ी, पारिवारिक न्यायालय, सिविल लाइन, सुखधाम, दोस्तपुरा और ऑफिसर क्लब क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-3 : वार्ड 18... टूटी सड़कें और खाली प्लॉटों में पानी</strong><br />इलाके में लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में क्षतिग्रस्त सड़कें, खाली प्लॉटों में भरा पानी और पेयजल की समस्या शामिल है। खाली प्लॉटों में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर और गंदगी की समस्या पैदा होने की बात भी सामने आई। वहीं कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कें आवाजाही में परेशानी बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि निगम केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों पर भी ध्यान दे। वार्ड 18 में आदर्श नगर, सुमन विहार, बालाजी टाउन प्रथम व द्वितीय, कैलाशपुरी, पार्श्वनाथ एनक्लेव, गिरधर एंक्लेव, पार्वतीपुरम, एग्जॉटिका मैरिज गार्डन, महावीर मिशन हॉस्पिटल, मारडिया बस्ती, रामचंद्रपुर, बालिका ग्राम और स्वीट होम कॉलोनी सहित कई क्षेत्र आते हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-4 : वार्ड 19... खाली प्लॉटों का पानी और टूटे रास्ते</strong><br />यहां भी खाली प्लॉटों में पानी भरने, क्षतिग्रस्त सड़कों और विद्युत पोल की समस्या सामने आई। बारिश के बाद खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर सड़कें खराब हैं तो विद्युत पोल से जुड़ी समस्याएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। बढ़े हुए वार्ड में इन समस्याओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना निगम के लिए चुनौती होगी।<br />वार्ड 19 में मित्तल मैरिज गार्डन, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, पेट्रोल पंप, राधा-कृष्ण मंदिर, लॉरियट पब्लिक स्कूल, रिद्धि-सिद्धि नगर, चंचल विहार, लक्ष्मण विहार, विकास नगर, रिद्धि-सिद्धि प्रथम, कमला उद्यान, एसजीएन मैरिज गार्डन और लैंडमार्क सिटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-5 : वार्ड 20... सबसे बड़ा दायरा, समस्याओं की भी लंबी फेहरिस्त</strong><br />इतने बड़े क्षेत्र में समस्याओं का स्वरूप भी अलग-अलग है। यहां क्षतिग्रस्त सड़कें, गंदगी, टे्चिंग ग्राउंड की समस्या और जगह-जगह बस्तियों में जलभराव प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आ रही हैं। कई बस्तियों में बारिश का पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं सड़कें क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही प्रभावित होती है।वार्ड 20 का दायरा इन पांच वार्डों में सबसे विस्तृत नजर आता है। यहां मेनाल रेजिडेंसी, गणेश पाल, नांता, वीर दुर्गादास स्टेडियम, भैरूजी मंदिर, तेजाजी मंदिर, नांता गढ़, जेटियों का मोहल्ला, नांता रोड, पार्श्वनार्थ मल्टी स्टोरी, ईदगाह, कोली मोहल्ला, नारी निकेतन, क्रेशर बस्ती, मेंढकी पाल धाम, कालबेलिया बस्ती, गुरुद्वारा, पत्थर मंडी, अभेड़ा महल, करणी माता मंदिर, बायोलॉजिकल पार्क, करणी नगर, बड़गांव, देव नगर, सिलिकॉन सिटी, गोकुलधाम सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>पहले वार्ड छोटे होते थे, इसलिए क्षेत्र सीमित होने के कारण सफाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर भी तुरंत ध्यान दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दी। इसके साथ ही वार्ड में जरूरत के अनुसार कई विकास कार्य भी करवाए गए। उनका कहना है कि छोटे वार्ड होने से पार्षद और जनता के बीच सीधा संपर्क बना रहता था और समस्याओं की जानकारी भी समय पर मिल जाती थी।<br /><strong>-हरिओम सुमन, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में करीब 150 वार्ड थे, जबकि अब वार्डों की संख्या 100 हो गई है। उनका मानना है कि इससे कामकाज पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने वार्ड की समस्याओं पर लगातार ध्यान दिया और किसी तरह की बड़ी परेशानी सामने नहीं आई। पार्षद की जिम्मेदारी होती है कि वह उपलब्ध संसाधनों के साथ हर व्यवस्था को बेहतर तरीके से मैनेज करे। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से वार्ड की समस्याओं का समाधान संभव है।<br /><strong>- उषा ठाकुर, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 100 करना व्यवस्था की दृष्टि से एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार भी जरूरी है। अब एक नगर निगम होगा और जवाबदेही तय हो सकेगी। पहले वार्ड सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। विकास के कामों को लेकर हम सतर्क हैं।<br /><strong>-लव शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>आगामी चुनाव में ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव होना चाहिए, जो केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे कार्यकाल वार्डवासियों के बीच मौजूद रहे। प्रतिनिधि ऐसा हो, जो वार्ड को अपना घर और यहां रहने वाले लोगों को अपने परिवार की तरह समझे। वार्ड की छोटी-बड़ी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करे। जनता को ऐसे ही सक्रिय और संवेदनशील प्रतिनिधि की जरूरत है।<br /><strong>-शुभम मेहरा, वार्डवासी</strong></p>
<p>परिसीमन के बाद इस बार वार्ड का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया है। क्षेत्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि नया वार्ड किस तरह व्यवस्थित होता है और जनप्रतिनिधि हर इलाके की समस्या तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं। अब देखना होगा कि यह नया परिसीमन वार्डवासियों की उम्मीदों और उनकी जरूरतों पर कितना खरा उतरता है।<br /><strong>-देवेंद्र सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:20:53 +0530</pubDate>
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                <title>किसी वाहन की कमानी टूट रही, तो किसी का बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में तब्दील हुई टिपटा की सड़क, हर कदम पर खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-suffering-broken-suspension-springs-and-loss-of-balance/article-162536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अभी तो ठीक से बरसात शुरु भी नहीं हुई है। उससे पहले ही सड़कों की हालत खराब होने लगी है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे ही खतरे से सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।यह मामला वैसे तो एक जगह का है लेकिन इसी तरह की स्थिति शहर में कई जगह पर देखी जा सकती है। टिपटा में गढ़ पैलेस के पास सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे उस सड़क से रोजाना गुजर रहे सैकड़ों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>हालत यह है कि एक तो यहां का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही 24 घंटे बनी हुई है। दिन के समय तो इस सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां कई बार जाम के हालात बने रहते हैं। जिससे वाहनों को रैंग-रैंग कर निकलना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क पर लम्बे समय से बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। ऐसे में किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुलिया से साई बाबा मंदिर की तरफ जाते समय गड्ढ़ों में वाहनों को दचके लग रहे हैं। साथ ही कई वाहनों को रोजाना नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि आए दिन ई रिक् शा हो या ऑटो किसी ने किसी वाहन की या तो कमानी टूट रही है या फिर वाहन का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। दिन में रोजाना कई बार इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।इतना ही नहीं इसके आगे बैराज के समानांतर पुल पर भी दोनों तरफ काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>तीन तरफ से आ रहे वाहन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के सामने से दशहरा मैदान की तरफ जाने का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां तीन तरफ से वाहन निकल रहे हैं। एक सकतपुरा व पाटनपोल की तरफ से दशहरा मैदान की तरफ जाने वाले वाहन, दूसरे दशहरा मैदान व एलिवेटेड पुलिया से आने वाले वाहन उस संकरे रास्ते से निकल रहे हैं। दिन के समय तो यहां से कचरे के डम्पर और स्कूली बच्चों के वाहन ऑटो व वैन तक निकलते हैं। जिससे वहां जाम के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>काम जरा सा, हादसों का इंतजार</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क का जरा सा हिस्सा खराब हो रहा है। लेकिन गड्ढ़े अधिक गहरे व बड़े हैं। जिससे अचानक आने वाले वाहन झटके से उन गड्ढ़ों में उछल रहे हैं। जिससे वाहनों को नुकसान व हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तो बड़ा हादसा होने के बाद ही चेेतता रहा है। जबकि छोटा सा काम बहुत कम समय में हो सकता है उसे नहीं कर रहे।</p>
<p>यह तो एक जगह का मामला है। इसी तरह से शहर में अधिकतर सड़कों की भी यही स्थिति है। जिनमें विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय के सामने की सड़क हो या मस्जिद रोड,नयापुरा की अंदरूनी सड़कें हो या छावनी की। सभी जगह सड़कों पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात आने पर ये गड्ढ़े और बड़े हो जाएंगे।</p>
<p><strong>24 घंटे ट्रैफिक से परेशानी</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है। दिन ही नहीं रात में भी डम्पर निकलते रहते हैं। जिससे इस सड़क को नुकसान होता है। पूर्व में कई बार इसे सुधारा भी जा चुका है। लेकिन वाहनों के दबाव के कारण यहां फिर से गड्ढ़े हो जाते हैं। लेकिन इन गड्ढ़ों को जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:08:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का...मिट्टी और कार्य प्रगति का हटाया बोर्ड, दूर हुई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी के ढेर से निकलते समय वाहनों का संतुलन बिगड़ने से हादसे का खतरा बना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----soil-pile-and--work-in-progress--board-removed--obstruction-cleared/article-162533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित तालाब के किनारे सड़क बनने के बाद लगे मिट्टी के ढेर व कार्य प्रगति के लगे बोर्ड को शनिवार को हटा दिया गया। जिससे बाधा दूर होने के साथ ही रास्ता क्लीयर हो गया। वहीं इस मार्ग से दिनभर वाहन आसानी से निकलते रहे। तालाब किनारे मंदिर के पीछे की तरफ सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा था। जिसे कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा मरम्मत कर सही करवाया गया है। लेकिन सड़क मरम्मत के लिए बंद किया गया रास्ता काफी समय तक बंद रहा। जिससे वन वे ट्रैफिक चलने से जाम की स्थिति बन रही थी। वहीं सड़क तैयार होने के बाद सड़क से वाहनों का आवागमन तो शुरू हो गया था लेकिन संवेदक द्वारा एक तरफ से मिट्टी का ढेर और दूसरी तरफ कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाया था। जिससे वाहन चालकों को उस मिट्टी के ढेर से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा था। ऐसे में कई वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ था तो कई चार पहिया वाहनों के बोनट मिट्टी के ढेर से अडऩे के कारण खराब हो रहे थे।</p>
<p>इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। केडीए अधिकारी हरकत में आए और संवेदक को पाबंद कर मिट्टी के ढेर को हटवाया गया। मिट्टी के ढेर व बोर्ड को फिलहाल तालाब किनारे की तरफ साइड में किया गया है। केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के माध्यम से संवेदक को आदेश दिया गया कि वह मिट्टी के ढेर व बोर्ड को तुरंत हटाए। जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। शनिवार को सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को हटा दिया गया। जिससे वाहन दिनभर सुगमता से निकलते रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि सड़क बनने के बाद भी संवेदक द्वारा मौके से मिट्टी और कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 अगस्त को पेज 11 पर' तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ, नहीं हटी बाधा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें मिट्टी व बोर्ड नहीं हटने से रास्ता चालू होने के बावजूद वाहन चालकों को हो रही परेशानी व हादसों के खतरे के बारे में बताया था। साथ ही बरसात के समय अधिक दुर्घटना होने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकािरयों ने संवेदक को मिट्टी हटाने के लिए आदेश देते हुए पाबंद किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बन्धया बालाजी क्षेत्र में नाली जाम : सड़क क्षतिग्रस्त, आवागमन हो रहा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल योजना के लिए खोदी गई गौरव पथ सीसी सड़क खराब मरम्मत के कारण फिर उखड़ गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drainage-clogged-and-road-damaged-in-the-bandhya-balaji-area--traffic-movement-affected/article-157576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे के बंधया बालाजी मंदिर के पास नाली जाम होने और पुराना बाजार मार्ग पर गौरव पथ सीसी सड़क की खराब हालत को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के समीप नाली में कचरा और गंदगी जमा होने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका बनी हुई है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>इसी प्रकार पुराना बाजार मार्ग पर पेयजल योजना के तहत खोदी गई गौरव पथ सीसी सड़क की मरम्मत ठीक से नहीं होने से सड़क फिर से उखड़ गई है। जगह-जगह गड्ढे और उबड़-खाबड़ स्थिति के कारण राहगीरों व वाहन चालकों को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान दुर्घटना की संभावना भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन से मांग की है कि बंधया बालाजी क्षेत्र में नाली की तत्काल सफाई करवाई जाए तथा पुराना बाजार मार्ग की क्षतिग्रस्त सड़क का मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और आवागमन सुचारू हो सके।</p>
<p><strong>प्रशासक की जुबानी</strong><br /> मामला मेरी जानकारी में आ कार्य करवा दिया जाएगा। गया हैं। अगले दो दिन के अंदर सफाई<br /><strong>- बजरंग लाल मेघवाल, प्रशासक, अरनेठा </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br /> मैं पुराने बाजार गौरव पथ का निरीक्षण कर लेती हूं। धरातल की स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा।<br /><strong>- खुशबू मीणा, जेईएन केशोराय पाटन</strong></p>
<p> पुराने बाजार सीसी सड़क की जानकारी मंगवा लेते हैं। उसके बाद जो भी आवश्यक होगा उचित प्रयास किया जाएगा। आमजन एवं राहगीरों की किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने देंगे।<br /><strong>- अजय गहलोत, एईएन, पीएचडी विभाग, केशोराय पाटन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:03:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बरसात से पहले ही सड़कों का हुआ बुरा हाल, पानी भरने पर रहेगा हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं गड्ढे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, वहीं सीवरेज कार्य के बाद कई सड़कों की मरम्मत भी अधूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-in-poor-condition-even-before-the-monsoon/article-157558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक:</strong> जयपुर गोल्डन से ज्वाला तोप की तरफ जाने वाले रास्ते पर सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे तालाब के सहारे की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हो रहे हैं कि वहां से निकलने वाले वाहन हिचकोले खा रहे हैं। विशेष रूप से दो पहिया वाहनों का यहां संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे रोजाना कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>दृश्य दो:</strong> एरोड्राम सर्किल पर अंरडपास के ऊपर की सड़क जो झालावाड़ हाइवे रोड है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में और तेजी से वाहन निकल रहे हैं। वह सड़क बीच से बदहाल हो रही है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों के गड्ढ़ों से बचकर निकलने के कारण कई बार वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन:</strong> डीसीएम रोड स्थित इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एक सड़क का बीच से काफी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसे में वहां से दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों तक को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को इन गड्ढ़ों से बचकर निकलना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के बदहाली को बताने के लिए। ऐसी कई अन्य सड़कें व मुख्य मार्ग हैं जहां बरसात से पहले ही सड़कों की हालत खराब हो रही है। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी है। कहीं सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों को सही ढंग से नहीं भरा गया। जिससे सड़कें बीच से धंस गई है। ऐसे में अभी ही उनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरु होने वाली है। ऐसे में इन गड्ढों व टूटी सड़कों पर पानी भरने से उनका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं होने पर इनसे गुजरने वाले वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर हादसों का खतरा अधिक होने की संभावना है।</p>
<p><strong>हमेशा होती मरम्मत, फिर भी हालत खराब</strong><br />सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे वाली सड़क का छोटा सा हिस्सा पिछले कई सालों से बार-बार खराब हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इसे हर बार सही भी कराया जाता है। लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाता। कुछ समय बाद फिर से वही पुरानी हालत हो जाती है। गत वर्ष भी बरसात में यहां की सड़क खराब होने से इसमें पानी भरने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा था। लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे सही भी करवा दिया था। लेकिन वर्तमान में फिर वही पुरानी जैसी हालत हो गई है। शुक्रवार को भी इस जगह पर कई वाहनों का संतुलन बिगड़ा। जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों को गति धीमी करनी पड़ी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बरसात में यहां हादसों की संभावना अधिक है।</p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़कों की हालत अधिक खराब</strong><br />शहर में डामर सड़क हो या सीसी अधिकतर की हालत खराब है। लेकिन विशेष रूप से सीवरेज के लिए बीच से खोदी गई सीसी सड़कों की हालत अधिक खराब है। हर सड़क बीच से खुदी हुई है। लाइन डालने के बाद उनकी मरम्मत तो की गई लेकिन सही ढ़ंग से नहीं होने से अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जिससे बरसात में पानी भरने पर वहां गड्ढ़े होने से हादसों का खतरा अधिक है। यह स्थिति किसी एक या दो जगह की नहीं वरन् पूरे शहर की है। फिर चाहे वह छावनी का क्षेत्र हो या धानमंडी का। नयापुरा का क्षेत्र हो या विज्ञान नगर का। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ ऑफिस के सामने से कॉमर्स कॉलेज तक की सड़क और विज्ञान नगर मुख्य मार्ग की सड़क, नयापुरा मुक्तिमार्ग की सड़क सभी जगह पर ऐसी स्थिति है कि दो पहिया वाहनों का चलना दूभर हो रहा है।</p>
<p><strong>नाले को व्यू कटर से ढका, सड़क बदहाल</strong><br />औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंद्रा गांधी नगर में एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में नाले पर पुलिया बनी हुई है। हाल ही में नगर निगम की ओर से उस पुलिया पर दोनों तरफ दीवार खड़ी कर व्यू कटर लगा दिए। जिससे नाले की गंदगी नजर नहीं आए। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया गया। निगम सूत्रों का कहना है कि यह सड़क केडीए के अधीन है। ऐसे में उस सड़क पर इतने अधिक व बड़े-बड़े गड्ढ़ें हैं कि वहां जरा सी बरसात में ही पानी भर गया। जिससे वाहनों व पैदल ही लोगों को निकलने पर संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संबंधित विभाग सुधारे सड़कें</strong><br />छावनी निवासी ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि नगर निगम हो या केडीए। सड़कों को सही करना इनकी जिम्मेदारी है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइनों के कारण खराब हुई है। जिन विभाग के अधीन जो सड़क आती है उसे सही करवानी चाहिए। वरना बरसात में ये सही होंगी नहीं। जिससे लोगों को महीनों तक परेशानी व हादसों का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>प्रेम नगर निवासी मुकेश जोनवाल का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर के इस नाले की पुलिया से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यहां से कई निजी व सरकारी स्कूलों के ऑटो व वैन भीबच्चों को लेकर जाती है। अभी गर्मी की छुट्टी है जिससे बच्चों के वाहन तो नहीं आ-जा रहे। लेकिन स्थानीय लोग तो निकल ही रहे हैं। अभी से यह हालत है तो बरसात में हालत अधिक खराब होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। नगर निगम या केडीए जिस भी विभाग के अधीन सड़क आती है उन्हें बरसात से पहले सही करवाना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करवाई जाती है। सीवरेज लाइन डालने के बाद उस सड़क को सही करने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक फर्म की रहती है। फिर भी यदि कहीं सड़कों पर गड्ढ़े हैं तो उनका पता करवाकर सही करवाया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों का राजस्व फिर भी नहीं मिल रहीं सुविधाएं, बंद विश्राम गृह और खराब सीसीटीवी से किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा, वाटर कूलर बंद, जगह-जगह लग रहे गंदगी के ढेर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-generating-crores-in-revenue--facilities-are-lacking--farmers-distressed-by-a-closed-rest-house-and-non-functional-cctv-cameras/article-157356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। कोटा जिले की ए-ग्रेड कृषि उपज मंडी इटावा हर वर्ष करीब 10 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करती है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के 500 से अधिक गांवों के किसान यहां अपनी उपज बेचने आते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव और अव्यवस्थाओं के चलते किसानों, व्यापारियों और पल्लेदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नालियां कचरे से अंटी पड़ी हैं, जिससे बदबू फैल रही है। कलेवा योजना स्थल के आसपास भी गंदगी के ढेर लगे होने से किसान भोजन करने में असहज महसूस करते हैं। मंडी में लगे अधिकांश सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि उपज चोरी होने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, लेकिन कैमरे बंद होने से चोरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>खुले में नीलामी, बारिश में भीगती है उपज</strong><br />समर्थन मूल्य पर खरीद के कारण नीलामी शेड का उपयोग अन्य कार्यों में होने से किसानों की उपज की नीलामी खुले में करनी पड़ती है। इससे गर्मी और बारिश दोनों मौसम में किसानों और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा बना रहता है। नीलामी क्षेत्र में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। जिससे विशेष रूप से महिला किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>बंद पड़ा किसान विश्राम गृह</strong><br />किसानों के ठहरने के लिए बना विश्राम गृह रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है और उस पर ताला लगा हुआ है। अधिक आवक के दिनों में किसानों को रात खुले में गुजारनी पड़ती है। वहीं मंडी परिसर मैं लगाए गए वाटर कूलर बंद पड़े हैं। ऐसे में किसानों और मजदूरों को सीधेनल का पानी पीना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>अंधेरे में डूबी मंडी, टूटेे बिजली पोल बने खतरा</strong><br />मंडी में कई स्थानों पर रोड लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। बिजली कटौती होने पर जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद समय पर संचालन नहीं होने से व्यापारियों और किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी क्षतिग्रस्त हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>इनका कहना  है</strong><br />जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भीउपलब्ध नहीं हैं। <br /><strong>- चंदालाल मीणा, खेड़ली बेरीसाल निवासी</strong></p>
<p>नीलामी खुले में होती है, चारों तरफ गंदगी है और किसानों के लिए विश्राम गृह की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।<br /><strong>- बद्रीलाल नागर, रजोपा निवासी</strong></p>
<p> किसानों को पेयजल औरं शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ता है, जबकि यहां राजस्थान और मध्यप्रदेश के सैकड़ों गांवों के किसान आते हैं।<br /><strong> - राकेश बैरवा, रणोदिया निवासी</strong></p>
<p>मंडी में सफाई,पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है तथा शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।<br /><strong>- जोधराज गुर्जर, अध्यक्ष, पल्लेदार एसोसिएशन</strong></p>
<p> सीसीटीवी कैमरे खराब होने से चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। नवीन शेड और अन्य सुविधाओं की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- हरिशंकर मंगल, अध्यक्ष, मंडी व्यापार संघ</strong></p>
<p> करोड़ों रुपए की आय के बावजूद किसानों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। <br /><strong>- उमाशंकर नागर, सह जिला प्रचार प्रमुख, भारतीय किसान संघ</strong></p>
<p> मानसून से पहले नालियों की सफाई करवाई जाएगी। मंडी में सफाई कार्य जारी है। पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और अन्य समस्याओं का निरीक्षण कर उन्हें जल्द ठीक कराने के प्रयास किए जाएंगे। किसान विश्राम गृह की मरम्मत के लिए बजट प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं।<br /><strong>- रवि सिंह पंवार, मंडी सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:19:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का  : पुलिया निर्माण के साथ बायपास बनने से आवागमन हुआ सुगम</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद जागा विभाग, राहगीरों को मिली बड़ी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report---construction-of-culvert-and-bypass-eases-commute/article-151438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)35.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेडा। क्षेत्र के बांसी-देई मार्ग पर बांडी खाली नाले पर क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उच्च पुलिया का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। निर्माण के साथ ही संवेदक द्वारा पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक बायपास मार्ग भी तैयार कर दिया है, जिससे आवागमन सुगम हो गया है।</p>
<p><strong>उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू </strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार गत मानसून सत्र में अतिवृष्टि के कारण दुगारी कनकसागर झील का ओवरफ्लो पानी बांसी तालाब में पहुंचा था। लंबे समय तक तेज बहाव के चलते नाले की छोटी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया था। इस समस्या को देखते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने यहां उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू कराया। प्रारंभ में निर्माण स्थल पर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी। दोपहिया वाहन चालकों को करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया </strong></p>
<p>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया और अब निर्माण स्थल के पास ही बायपास मार्ग तैयार कर दिया गया है। इससे पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है। वर्तमान में पुलिया निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और शीघ्र ही पूर्ण होने की संभावना है। इस मार्ग से सीएचसी, विद्यालयों एवं आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। बायपास बनने से सभी को सुविधा मिली है और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की सराहना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:57:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : बांसी-भण्डेड़ा मार्ग पर क्षतिग्रस्त पुलिया की सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू, पुलिया के पास चार से पांच फीट गहरे गड्ढे</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में  पुलिया के ऊपर से पानी गुजरता रहा जिससे सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report--construction-of-protective-wall-for-damaged-culvert-begins-on-bansi-bhandera-road/article-147586"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)31.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा।  क्षेत्र में बांसी-भण्डेड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित नाले की क्षतिग्रस्त पुलिया की सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से यह दीवार क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा बना हुआ था। जानकारी के अनुसार दुगारी कनकसागर बांध तथा बांसी तालाब के ओवरफ्लो का पानी इसी नाले से होकर निकलता है। पिछले दो वर्षों से बरसात के दौरान लंबे समय तक पानी का तेज बहाव रहने के कारण पुलिया के ऊपर से पानी गुजरता रहा, जिससे सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई। स्थिति यह थी कि पुलिया के पास चार से पांच फीट गहरे गड्ढे बन गए थे, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था। कई बार राहगीर और वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर घायल भी हुए।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने जताया दैनिक नवज्योति का आभार</strong><br />इस समस्या को दैनिक नवज्योति द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। 10 फरवरी और 7 मार्च को प्रकाशित खबरों के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य शुरू करवाया। अब पुलिया की सुरक्षा दीवारों के पुनर्निर्माण और गड्ढों की मरम्मत से क्षेत्रवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने इस पहल के लिए दैनिक नवज्योति का आभार जताया है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:23:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त, पानी से होकर गुजरने पर मजबूर ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[सादेड़ा-विषधारी मार्ग अवरुद्ध ,  मेज नदी को पार करना बना जोखिम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/mej-river-culvert-damaged-for-six-months--villagers-forced-to-wade-through-water/article-146812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के सादेड़ा से विषधारी मार्ग पर मेज नदी की पुलिया पिछले लगभग छह महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिससे इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पुलिया टूटने के कारण राहगीरों और श्रद्धालुओं को तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके संबंधित विभाग अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।जानकारी के अनुसार सादेड़ा से संगमेश्वर (समेला) महादेव होते हुए विषधारी जाने वाले मुख्य ग्रेवल मार्ग पर मेज नदी में एक छोटी पुलिया बनी हुई थी। इसी पुलिया के माध्यम से दोनों ओर से आने-जाने वाले ग्रामीण और वाहन चालक आवागमन करते थे। मेज नदी और बेजाण नदी में कम पानी का बहाव होने पर भी इसी पुलिया से पानी निकल जाता था और लोगों को आवागमन में सुविधा रहती थी। गत वर्ष लंबे समय तक हुई बारिश के कारण यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से पर गहराई बढ़ जाने से यहां से वाहन निकलना असंभव हो गया है। इसके बाद से ही यह मार्ग अवरुद्ध पड़ा है। अब लोगों को विषधारी पहुंचने के लिए कल्याणपुरा और कालानला होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। पैदल राहगीर जब इस स्थान से गुजरते हैं तो उन्हें तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कपड़े भी भीग जाते हैं और जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि पास ही स्थित धार्मिक स्थल संगमेश्वर (समेला) महादेव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि मेज और बेजाण नदी के ऊपरी क्षेत्रों में बड़े बांध बने हुए हैं, जिनसे नहरों में पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>अस्थायी रास्ता बारिश की भेंट चढा</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष मिनी डैम निर्माण कार्य के दौरान पुलिया के क्षतिग्रस्त स्थान पर मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया था, लेकिन बारिश में वह भी बह गया। तब से यह मार्ग बंद पड़ा है, जिससे क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुलिया का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>इन गांवों से पहुंचते श्रद्धालु</strong><br />नैनवां सहित हिण्डोली दोनों उपखंडों की ग्राम पंचायतों के निकट यह मंदिर है। यहां विषधारी, डाबेटा, दरा का नयागांव, भण्डेड़ा, सादेड़ा, बांसी, रामगंज, कल्याणपुरा, गुजरियाखेड़ा, दुगारी, उरांसी, मानपुरा, डोड़ी, सांवतगढ़, निमोद, भजनेरी, मरां, मुण्डली, कालानला सहित अन्य गांवों के श्रद्धालु भगवान के दर्शनार्थ पहुंचते है। भण्डेड़ा क्षेत्र से इस रुट द्वारा आवाजाही करने पर जिला मुख्यालय की दूरी कम हो जाती है। अभी भी सैकड़ों राहगीर शॉर्टकट की वजह से रोजमर्रा ही जानजोखिम में डालकर इस रुट पर अपना सफर तय करते है पर संगमेश्वर की पुलिया व रास्ते की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>पुलिया व रास्ते की वजह से श्रद्धालुओं की राह में बाधाएँ</strong><br />श्रद्धालुओं ने बताया कि बारह गांव की मुख्य आस्था का केन्द्र संगमेश्वर (समेला) महादेव है। यहां पर बारिश के समय की खुबसूरती आनेवाले को आकर्षित करती है। यहाँ की हरियाली चतुदर्शी व अमावस्या पर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। मगर इसके रास्ते पर संगमेश्वर की टूटी पुलिया एवं अभी तक किसी ने डामरीकृत सड़क नही बनवा पाए है। जो श्रद्धालुओं के लिए बारिश के समय एक चुनौती से कम नही है। बूंदी के लिए आवाजाही हेतु शॉर्टकट रास्ता भी है। पर संगमेश्वर पुलिया की वजह से परेशानी होती है। क्षेत्रीय लोगों को अन्य रुट से जाने पर 10 किमी का अतिरिक्त फेरा लगता है।  <br /><strong>-छोटूलाल जोशी, श्रद्धालु भण्डेडा, निवासी</strong></p>
<p>हमारे क्षेत्र की मुख्य आस्था का धार्मिकस्थल है। यहां पर बारिश के समय कच्ची पुलिया व जगह-जगह पर नाले पड़ते है। फिर भी श्रद्धालु इस समस्या का सामना करते हुए भी आते जाते है। जो काफी खतरे भरी राह से गुजरना होता है।  आवाजाही को लेकर डामरीकृत व सीसी सड़क बनाने को लेकर लंबे समय से मांग उठा रहे है। ग्रेवल रास्ते के बावजूद भी हरवर्ष दिनोंदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है।<br /><strong>-निखिल शर्मा, रामगंज निवासी</strong></p>
<p>मेज नदी की संगमेश्वर पुलिया की वजह से क्षेत्रवासियों को परेशान झेलनी पड़ती है। बारिश के समय दोनों नदियों में पानी की लहरों का नजारा व हरियाली के कारण हर किसी को आकर्षित करती है।   लड्डू-बाटी चूरमा की गोट का नजारा आम होता है लेकिन बारिश के समय श्रद्धालुओं को नदी के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।  समेला महादेव पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता परेशानी का सबब बना हुआ है। <br /><strong>- नारायण सिंह हाड़ा, श्रद्धालु</strong></p>
<p>क्षेत्र में बारह गांवों की मुख्य आस्था का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। संगमेश्वर महादेव का स्थान पर यहा पर तीन ग्राम पंचायतों की सीमा जुड़ा है। बारिश के समय दोनों नदियों की तरफ से आनेवाले रास्ते कच्चे है, बारिश के समय गहरे गड्ढे व कीचड़ हो जाता है।  इस राह को पार कर भगवान शिव तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पुलिया व कच्चे रास्ते की वजह से राहगीरों सहित श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ता है।  <br /><strong>- पदम कुमार जैन, बांसी निवासी</strong></p>
<p>यह पुलिया लंबे समय से टूटी होने से क्षेत्रीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। समेला महादेव मंदिर के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व संबंधित विभाग इस आधुनिक युग में भी डामरीकरण सड़क को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि  बरसाती दिनों में यहां का मनमोहक नजारा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है।<br /><strong>-रोहित कुमार शर्मा, भण्डेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहा है </strong><br />यह पुलिया डामरीकृत सड़क नहीं है। मेज नदी की पुलिया का कार्य हमारे अधीन में नहीं है। हमारे अधीन में होती तो दुरूस्त करवाया जाता हो सकता है ग्राम पंचायत द्वारा किसी मद से पुलिया का निर्माण करवाया गया होगा। <br /><strong>- रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग देई-नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:03:10 +0530</pubDate>
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                <title>खेडा बस्ती को जोड़ने वाली पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त, जानें पूरा मामला  </title>
                                    <description><![CDATA[बरसात से पहले ही पुलिया की दीवार क्षतिग्रस्त होने के बाद अब तक मरम्मत  नहीं हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/culvert-connecting-kheda-settlement-damaged-for-six-months/article-140228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)5.png" alt=""></a><br /><p>अरण्डखेडा। अरण्डखेडा ग्राम पंचायत क्षेत्र में खेडा बस्ती को जोड़ने वाली पुलिया पिछले छह माह से क्षतिग्रस्त पड़ी है। मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्राम पंचायत मुख्यालय गांव से जुड़ी खेडा बस्ती गांव की पुलिया पिछले करीब छह माह से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। इस कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय निवासी नंद किशोर प्रजापति ने बताया कि बरसात से पहले ही पुलिया की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा पंचायत प्रशासन और ग्राम विकास अधिकारी को भी अवगत कराया गया, इसके बावजूद अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुलिया से दुपहिया और पैदल राहगीरों को खासा जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पुलिया की मरम्मत कराकर आवागमन को सुरक्षित बनाया जाए। </p>
<p>खेड़ा बस्ती में क्षतिग्रस्त पुलिया की स्वीकृति निकाल दी गई है। साथ ही ठेकेदार को भी कह दिया है। गुरुवार से कार्य शुरू हो जाएगा। <br /><strong>- महावीर जैन, ग्राम विकास अधिकारी, बनियानी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 16:41:18 +0530</pubDate>
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                <title>बांसी-देई मार्ग पर सड़कें बदहाल, राहगीरों में चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[डामरीकृत सड़क के कई हिस्सों पर मिट्टी बह जाने से गहरे गड्ढे बन गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-roads-in-dilapidated-condition-on-the-bansi-dei-route--causing-concern-among-commuters/article-137744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी से देई मुख्य मार्ग की सड़कें बारिश के बाद गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं, जिससे वाहन चालक और पैदल राहगीर दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। भैरव बाबा के पास नाले की दीवार सहित मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुकी है और डामरीकृत सड़क के कई हिस्सों पर मिट्टी बह जाने से गहरे गड्ढे बन गए हैं।</p>
<p>स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मार्ग से चौपहिया वाहन गुजरते समय सामने से आने वाले वाहनों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती। रात्रि में अनजान राहगीर इन गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं। जोगी कॉलोनी से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बांसी तक भी यह मार्ग खतरे भरा है। स्थानीय नागरिक सत्यनारायण, सोजीलाल सैनी, हरपाल माली आदि ने कहा कि विभाग बड़ा हादसा होने तक इंतजार कर रहा है। बरसात के बाद लगभग दो माह बीत गए हैं, लेकिन संबंधित विभाग ने अभी तक सड़क की सुध नहीं ली है। इससे क्षेत्रीय लोगों में विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है और आमजन इस लापरवाही का प्रत्यक्ष रूप से सामना कर रहे हैं।राहगीरों का कहना है कि समय रहते उचित मरम्मत न होने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है और विभाग को तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।</p>
<p>इधर विभागीय अधिकारी का कहना है कि जलदाय विभाग द्वारा पाइपलाइन निकल जाए, जल्द ही नाले की पुलिया का निमार्ण कार्य शुरू करेगें। रही बात देई मार्ग पर सड़क की, तो जहाँ-जहाँ पर डामर के पास मिट्टी के गड्ढे अधिक है। पुलिया का कार्य शुरू होते ही उन्हें भी भरवाया जाएगा।<br /><strong>-रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, देई-नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:45:30 +0530</pubDate>
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