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                <title>वादे वही, नेता बदलते रहे...अंतिम पांच वार्डों की पड़ताल में भी समस्याओं का अंबार</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कहीं जर्जर सड़कें तो कहीं गंदे नाले, सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय का भी अभाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/same-old-promises--changing-leaders----a-mountain-of-problems-found-during-the-inspection-of-the-final-five-wards/article-164572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए सौ वार्डों की पड़ताल के अंतिम चरण में दैनिक नवज्योति की टीम मंगलवार को शेष पांच वार्डों में पहुंची और वहां की व्यवस्थाओं का जमीनी जायजा लिया। क्षेत्रवासियों से बातचीत में एक बार फिर मूलभूत सुविधाओं की कमी और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी सामने आई। लोगों का कहना था कि चुनाव आते हैं तो विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। क्षेत्रवासियों ने तंज कसते हुए कहा, “नेता जी बदलते रहेंगे, लेकिन वादे वही रहेंगे।”</p>
<p>दैनिक नवज्योति की टीम ने सौ वार्डों में विकास और समस्याओं की पड़ताल के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों की तस्वीर सामने लाई है। अंतिम पांच वार्डों में पहुंचने पर भी हालात बहुत अलग नजर नहीं आए। कहीं जर्जर सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं तो कहीं नालों की सफाई नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में सामुदायिक भवन और सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से उन्हें उम्मीद रहती है कि वे क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान करवाएंगे। हालांकि कई इलाकों में वर्षों से चली आ रही समस्याएं आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>वार्ड 99 में सुविधाओं का अभाव</strong><br />क्षेत्रवासियों ने बताया कि इलाके में आज भी सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लोगों को सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से भी क्षेत्रवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में कई स्थानों पर नालियां भी नहीं बनी हुई हैं। इसके चलते घरों से निकलने वाले पानी की उचित निकासी नहीं हो पाती और लोगों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि लंबे समय से इन सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>बालाकुंड में विकास की रफ्तार बेहद धीमी</strong><br />वार्ड नंबर 96 के अंतर्गत आने वाले बालाकुंड क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इलाके में विकास कार्य न के बराबर हुए हैं। नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण कई स्थानों पर गंदगी पसरी रहती है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र की कई सड़कों की हालत खराब है और आवश्यक स्थानों पर सीसी रोड का निर्माण भी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़कों से प्रतिदिन आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्षों से घरों के सामने कचरा संग्रहण पॉइंट बने हुए हैं, लेकिन इनका स्थायी और उचित समाधान अब तक नहीं किया गया।</p>
<p><strong>वार्ड 97 में जर्जर सड़कों से परेशान लोग</strong><br />वार्ड नंबर 97 के अंतर्गत आने वाले जवाहर नगर क्षेत्र में भी जर्जर सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। टूटी सड़कों और गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>गंदे नाले और दुर्गंध ने बढ़ाई मुश्किलें</strong><br />वार्ड 97 में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की शिकायत भी सामने आई। लोगों के अनुसार नालों में कचरा जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित होती है और आसपास दुर्गंध फैलती रहती है। बारिश के दौरान कई बार नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुदर्शन गौतम</strong><br />कार्यकाल से पहले क्षेत्र में नालों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में भर जाता था। क्षेत्रवासियों को राहत दिलाई गई। करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से क्षेत्र में सीसी सड़कों का निर्माण कराया गया। वर्तमान में भी विकास कार्य जारी हैं और पार्कों का निर्माण व विकास कराया जा रहा है। वार्ड में सामुदायिक भवन का निर्माण भी करवाया गया।</p>
<p><strong>पूर्व वार्ड पार्षद नवीन यादव</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या वर्षों से लंबित पट्टों की थी। लोगों को लंबे समय से पट्टे नहीं मिले थे, जिसके लिए प्रयास कर अनेक लोगों को पट्टे दिलवाए गए। वार्ड की गलियों में सीसी रोड और नालियों का निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों के राशन कार्ड भी बनवाए गए। हालांकि वार्ड में आज भी पार्क, सामुदायिक भवन और डिस्पेंसरी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कुलदीप प्रजापति</strong><br />कार्यकाल से पहले वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी, जिसमें सुधार के लिए विशेष प्रयास किए गए। क्षेत्र में सीवेज कार्य करवाने के साथ पार्कों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। जहां आवश्यकता और संभावना थी, वहां रोड लाइटें लगवाई गईं। उन्होंने बताया कि वार्ड में सामुदायिक भवन और सुलभ कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाओं का अभी भी अभाव है।</p>
<p><strong>वार्डवासी करतार सिंह</strong><br />सड़कें क्षतिग्रस्त होकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है और जगह-जगह बने कचरा पॉइंट क्षेत्र की सुंदरता को बिगाड़ने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित सफाई और सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग को गंभीरता से कार्य करना चाहिए, ताकि क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी संतोष कुमार</strong><br />क्षेत्र में कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, लेकिन उनकी समय पर मरम्मत नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वार्ड के नालों की नियमित और समयबद्ध सफाई भी नहीं होती। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है तथा गंदा पानी जमा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्डवार नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 96 में संपूर्ण बालाकुंड एवं अग्रसेन नगर का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 97 में दानबाड़ी, संपूर्ण जवाहर नगर, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, तलवंडी सेक्टर-सी एवं तलवंडी एसएफएस कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 98 में गणेश तालाब, बसंत विहार सेक्टर-2 एवं 3 का संपूर्ण क्षेत्र तथा बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 99 में महावीर नगर विस्तार योजना-6 एवं सेक्टर-5 का संपूर्ण क्षेत्र, अग्रसेन नगर, गुर्जर बस्ती एवं गणेश तालाब सेक्टर-1 सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 100 में तीन बत्ती चौराहा मुख्य मार्ग, बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र, केशवपुरा मूर्तिधाम सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
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                <title>समस्याओं के बीच गुजर रही जिंदगी, चुनावी वादों पर फिर सवाल, वार्डवासी बोले- जब नेताओं ने नहीं सुनी तो किससे कहें अपनी बात</title>
                                    <description><![CDATA[घंटाघर-मकबरा जैसे कंजेस्टेड इलाकों में सफाई, टूटी सड़क और नालियों की परेशानी बनी रोजमर्रा की चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-amidst-persistent-problems--questions-raised-again-regarding-election-promises--residents-ask%E2%80%94%22when-leaders-don-t-listen--to-whom-can-we-voice-our-grievances-%22/article-164122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy114.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आगामी पार्षद चुनावों की तैयारियों के बीच जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड नंबर 44 से 49 तक की ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई। रिपोर्टिंग के दौरान सामने आया कि कई वार्ड क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहीं सफाई व्यवस्था बदहाल है तो कहीं क्षतिग्रस्त सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। टूटी नालियां, फैली गंदगी और अतिक्रमण की समस्या ने कई क्षेत्रों की तस्वीर बिगाड़ रखी है। लोगों का कहना है कि हर चुनाव में विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद कई वादे कागजों और भाषणों तक ही सीमित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>कंजेस्टेड इलाकों में रोज की जद्दोजहद</strong><br />ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान घंटाघर, मकबरा और टिपटा जैसे अत्यधिक कंजेस्टेड क्षेत्रों की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आई। यहां संकरी गलियों, बढ़ते यातायात और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण आमजन को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, नालियां टूटी हुई हैं और सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गंदगी के ढेर और नालियों से उठती बदबू लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंजेस्टेड इलाकों में सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जाम और अतिक्रमण की समस्या के कारण पैदल निकलना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। दुकानों के बाहर फैलता सामान और बढ़ते अतिक्रमण से रास्ते संकरे होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर व्यापारियों के साथ-साथ राहगीरों और क्षेत्रवासियों पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>‘नेता जी के घर के बाहर की समस्या, फिर भी नहीं हुआ समाधान’</strong><br />चश्मे की बावड़ी क्षेत्र में वर्षों पुरानी नाले की समस्या आज भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। वार्डवासियों का कहना है कि नाले की समस्या का स्थायी समाधान लंबे समय से नहीं हो पाया है। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समस्या ऐसे स्थान पर है, जहां से जनप्रतिनिधि भी परिचित और उनका घर भी नाले पर बना हुआ हैं। एक वार्डवासी ने दो टूक कहा, “नाले की समस्या तो नेता जी के घर के बाहर की है। जब नेता जी ने ही ध्यान नहीं दिया तो हम आखिर किसके पास जाकर अपनी बात कहें।”</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जमुना बाई</strong><br />वर्षों से बंद पड़ी टिपटा चौकी को शुरू करवाने के साथ ही पाटनपोल क्षेत्र में स्कूल भवन का निर्माण कराया गया। मंदिरों का जीर्णोद्धार भी करवाया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड में साफ-सफाई की समस्या बनी रहती है, जिसके समाधान के लिए प्रशासन के साथ आमजन को भी जागरूक होकर जिम्मेदारी निभानी होगी।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद नसरीन मिर्ज़ा</strong><br />वार्ड की संकरी गलियों में कचरा संग्रहण एक बड़ी चुनौती था। इस समस्या के समाधान के लिए कई कचरा पॉइंट हटवाए गए और घर-घर से कचरा एकत्रित करने के लिए हाथगाड़ियों की व्यवस्था करवाई गई।इस व्यवस्था से गलियों में फैली गंदगी को कम करने में मदद मिली। नियमित सफाई और बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सोनू कुरेशी</strong><br />कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त सुलभ कॉम्प्लेक्स और सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया, वहीं कब्रिस्तान का भी विकास करवाया गया। वार्डवासियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए घर-घर तक पानी की पाइपलाइन डलवाई गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य किए गए।</p>
<p><strong>वार्डवासी अब्दुल रहीस</strong><br />क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वार्ड में जगह-जगह गंदगी फैली रहती है और सड़कें व नालियां टूटी पड़ी हैं। कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग इन समस्याओं से परेशान हैं और समाधान नहीं होने के कारण वार्डवासियों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>वार्डवासी हसीना</strong><br />क्षेत्र में नाले की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। नाले का गंदा पानी कई बार घरों तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड में गंदगी भी आम समस्या बनी हुई है। उन्होंने जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नेताओं के घरों के आसपास की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो आम लोग आखिर अपनी शिकायत लेकर किसके पास जाएं।</p>
<p><strong>वार्डवार क्षेत्र का व्यवस्थित विवरण</strong><br />वार्ड नंबर 44: संपूर्ण थर्मल कॉलोनी, कुन्हाडी थाना, संत तुकाराम सामुदायिक भवन, अंबेडकर कॉलोनी, हनुमान गढ़ी, सरकारी स्कूल, धुआंखाल, देवनारायण सामुदायिक भवन, हटाई का चौक, काली टेक हनुमानजी का मंदिर, सुलभ शौचालय, मस्जिद गली, नागर फ्लोर मिल नारायण भवन, इम्मानुएल स्कूल तथा जैन मंदिर का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 45: इमली चौक, शूजाउद्दीन चौक, भिस्तियों की मस्जिद, पुरानी हरिजन बस्ती, कुरेशियों की मस्जिद, गुले-गुलजार, उमर कॉलोनी, मकबरा थाना, एहले हदीस मस्जिद, डॉक्टर जाकिर हुसैन सामुदायिक भवन, भाण्डों की मस्जिद, राज हवेली, मामा करीम चौक, जेदी स्टूडियो, रेमण्ड शोरूम, शनि मंदिर, हम्मलों का चौक, चश्मे की बावड़ी, कुरैशी जमातखाना, देवनारायण मंदिर, हुसैन चौक, बजाजखाना, बंबोला मंदिर, तेलियों की चौकड़ी, मोमिनों की बड़ी मस्जिद, जाकिर नई तथा रघु पान की गली आदि क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 46: आईसीआईसीआई बैंक, मेन रोड पाटनपोल, मथुराधीश जी का मंदिर, भट्जी महाराज का चौक, छोटे मथुराधीश जी, राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय टिपटा, काजीपाड़ा, भूरिया गणेशजी मंदिर, सराय का स्थान, मथुरेश भवन, लालबुर्ज, काली कंकाली मंदिर, नारायण बाल निकेतन, गंधीजी का पुल, लक्ष्मी होटल, चित्तौड़ा स्कूल का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 47: गढ़ पैलेस, पादमनाभ मंदिर, नीलकंठ मंदिर, अफीम गोदाम, पट्टा बुर्ज अखाड़ा, रेतवाली, कैथूनीपोल थाना तथा सत्यनारायण मंदिर का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 48: वफ्फ नगर, गोदावरी धाम, अधरशिला कच्ची बस्ती, अधरशिला कब्रिस्तान, चंबल गार्डन, गांधी उद्यान, नगर निगम गैराज, चंबल रेस्ट हाउस, बजरंग बस्ती, गोविंद धाम तथा किशोरपुरा के आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 49: भीतरीय कुंड एवं शिवपुरा का संपूर्ण क्षेत्र शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:04:49 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का: चम्बल पुलिया समेत शहर के सभी मुख्य मार्गों पर शुरू हुआ सड़कों का पेचवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार सुबह से रात तक शहर के मुख्य मार्गों पर गड्ढे भरने और डामर पैचवर्क का काम हुआ शुरु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--road-patchwork-initiated-on-all-major-city-routes--including-the-chambal-bridge/article-163974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल की बड़ी पुलिया हो या एरोड्राम चौराहा जैसे हाइवे। या फिर,  थर्मल चौराहा समेत शहर के अन्य मुख्य मार्ग। अब बरसात के समय में इन सड़कों पर वाहन चालकों को न तो हिचकोले खाने पड़ेंगे और हादसों से भी राहत मिलेगी। यह संभव हुआ है इन सभी जगहों की सड़कों के पेचवर्क का काम शुरू होने से। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नयापुरा स्थित चम्बल की बड़ी पुलिया पर डामर उखडऩे से हुए बड़े-बड़े गड्ढ़ों को सही करने का काम शुरू कर दिया है। गड्ढ़ों वाली जगह पर उखड़े डामर को हटाकर उसके स्थान पर नया मलबा डाला जा रहा है। साथ ही उन गड्ढ़ों को भरकर पेचवर्क किया जा रहा है। दिन में इस पुलिया पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां रात के समय काम किया गया। जिससे न तो काम करने वालों को परेशानी हो और न ही वहां से निकलने वाले ट्रैफिक में व्यवधान हो।</p>
<p>हालांकि यहां सड़क अधिक खराब होने से उसे सही करने में समय लग सकता है। लेकिन एक बार काम शुरू हो गया तो जल्दी ही पूरी सड़क सही हो जाएगी। इसी तरह से शहर के बीचों बीच स्थित झालावाड़ रोड हाइवे एरोड्राम चौराहे पर टावर ऑफ लिबर्टी के पास सी सड़कों को भी दिन के समय सही किया जा रहा था। यहां भी दिन के समय भारी ट्रैफिक का दबाव रहता है। उसके बाद भी यहां सड़क के उखड़े डामर को हटाकर नया मलबा डालकर गड्ढ़ों को भरने व पेचवर्क करने का काम किया गया।</p>
<p><strong>यहां भी सुधारी सड़कें</strong><br />केवल इन दो जगहों पर ही नहीं। शहर में सकतपुरा स्थित थर्मल चौराहे पर भी सुबह से देर शाम तक गड्ढ़ों को सही करने का काम किया गया। यहां भी कई दिन से गड्ढ़े होने पर उनमें बरसाती पानी भर रहा था। महाराणा प्रताप सर्किल कुन्हाड़ी हो या बारां रोड। शहर के अन्य सभी जगहों पर एक साथ ही काम शुरू किया गया है। जिससे आगामी दिनों में बरसात के समय ये गड्ढ़े वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण नहीं बन सके।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि एक ही बरसात में शहर की सड़कों की हालत खराब होने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में बुधवार के अंक में पेज तीन पर' गड्ढ़े लगा सकते हैं जिंदी पर ब्रेक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें चम्बल की बड़ी पुलिया, एरोड्राम चौराहा, थर्मल चौराहा, महाराणा प्रताप सर्किल समेत कई अन्य जगहों की सड़कों के गड्ढ़ों से आमजन व वाहन चालकों को हो रही परेशानी व हादसों की संभावना जताई थी। समाचार प्रकाशित होते ही केडीए अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने तुरंत अभियंताओं व संवेदकों को सड़कों के गड्ढ़े सही करने के लिए पाबंद किया। हालत यह है कि बुधवार को सुबह से रात तक सभी मुख्य मार्गो पर सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया ।</p>
<p><strong>काम शुरू किया है, जल्दी सही कर देंगे</strong><br /> शहर में चम्बल पुलिया व एरोड्राम चौराहा समेत सभी मुख्य मार्गों के गड्ढ़ों को सही करने का काम शुरू कर दिया है। एक साथ सभी जगह पर काम करवाए जा रहे हैं। जहां काम कम है वहां उन्हें जल्दी सही कर दिया जाएगा। जहां अधिक समस्या है वहां समय लग सकता है लेकिन सभी गड्ढ़ों को जल्दी सही कर दिया जाएगा। इस संबंध में संबंधित अभियंताओं व संवेदकों को पाबंद किया गया है।<br /><strong>-मुकेश कुमार चौधरी ,सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--road-patchwork-initiated-on-all-major-city-routes--including-the-chambal-bridge/article-163974</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:05:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विकास के दावों की हकीकत : शहर के बीच बसे गांव जैसे हालात, मूलभूत सुविधाओं को तरसे वार्डवासी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने पूछा—मूलभूत सुविधाएं नहीं तो वोट का क्या मतलब?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-reality-behind-development-claims--village-like-conditions-in-the-heart-of-the-city--residents-deprived-of-basic-amenities/article-163826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच रविवार को छह वार्डों के किए गए ग्राउंड ऑडिट में कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। शहर का हिस्सा होने के बावजूद कुछ इलाके ऐसे नजर आए, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। कहीं टूटी सड़कें हैं तो कहीं बदहाल नालियां, कहीं टूटे स्पीड ब्रेकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों के खेलने के लिए पार्क तक उपलब्ध नहीं हैं। कई इलाकों में सामुदायिक भवन जैसी सुविधा भी नहीं है, जहां स्थानीय लोग छोटे-मोटे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन कर सकें। छह वार्डों के इस ऑडिट में सामने आया कि विकास की रफ्तार हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाई है। उद्योग नगर, डीसीएम और हनुमत खेड़ाख, रायपुरा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों की मांग एक ही है—सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं हर वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में रहते हुए भी ग्रामीण जैसी सुविधाओं का अभाव</strong><br />वार्डवासियों का कहना है कि शहर के बीच रहने के बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो एक विकसित वार्ड की पहचान मानी जाती हैं। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हैं और लंबे समय से मरम्मत की मांग की जा रही है। बरसात और समय के साथ सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। रायपुरा के लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>ग्राउंड ऑडिट के दौरान कुछ क्षेत्रों में ऐसा माहौल दिखाई दिया, जहां विकास की रफ्तार बेहद धीमी नजर आई। वार्डवासियों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायतें करने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कई क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>उद्योग नगर की सड़कें बनीं परेशानी, टूटे ब्रेकर बढ़ा रहे खतरा</strong><br />उद्योग नगर क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों को लेकर सामने आई। सड़कों की बदहाली लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि सड़क और ब्रेकरों की समय पर मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। उद्योग नगर और डीसीएम क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां समय-समय पर परेशानी का कारण बनती हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वार्डवासियों का कहना है कि सुरक्षित वातावरण भी किसी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सड़क और भवन निर्माण से ही आदर्श वार्ड नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>हनुमत खेड़ा में सुविधाओं की कमी से मायूसी</strong><br />हनुमत खेड़ा क्षेत्र की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नजर नहीं आई। यहां कई लोगों ने स्थानीय सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त पार्क की सुविधा नहीं होना लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा।</p>
<p><strong>छोटे आयोजनों के लिए भी नहीं मिलती जगह</strong><br />ऑडिट में एक बड़ी समस्या सामुदायिक भवन के अभाव की भी सामने आई। कई वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में ऐसा कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है, जहां लोग छोटे सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक आयोजन करवा सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी बोले—पहले मूलभूत सुविधाएं तो मिलें</strong><br />हम शहर में रहते हैं, लेकिन कई बार सुविधाओं की स्थिति देखकर लगता है जैसे गांव के पिछड़े इलाके में रह रहे हों। सड़कें ठीक नहीं हैं, बच्चों के लिए पार्क नहीं है और कई जगह सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं मिलता। हमारी मांग कोई बड़ी नहीं है, सिर्फ इतनी है कि हर वार्ड में सड़क, बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों।<br /><strong>- जितेन्द्र चौधरी, वार्डवासी</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लोगों को उम्मीद होती है कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करेंगे। उद्योग नगर और डीसीएम जैसे क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता है। यदि आम आदमी को रोजाना टूटी सड़क, खराब सुविधाओं और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़े तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।<br /><strong>- दिपू सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p>कार्यकाल में वार्डवासियों की हर समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर कराने का प्रयास किया गया। वार्ड में पार्क जैसी सुविधाओं का अभाव जरूर है, लेकिन जब भी कोई वार्डवासी अपनी समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान कराना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। जनसमस्याओं के समाधान के लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हू।<br /><strong>- दीपक कुमार, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड के कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाती है, लेकिन कई बार लोग स्वयं कचरा फैला देते हैं। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नालियों के ड्रेनेज व्यवस्था की है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।<br /><strong>-सुशील त्रिपाठी, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 29 में वैष्णो कॉलोनी, डालाबाई माताजी , प्रेम नगर द्वितीय आंशिक, मदरसा, सरकारी स्कूल क्षेत्र, राजेंद्र कुशवाहा जागा बस्ती, अफॉर्डेबल आवास योजना के ए, बी, सी, डी और ई, प्रेम नगर तृतीय का आंशिक क्षेत्र तथा गोविंद नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 30 : इंदिरा गांधी नगर का आंशिक क्षेत्र, पावर हाउस क्षेत्र, रामदेव मंदिर तथा प्रेम नगर तृतीय क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 31 : जलेबी चौक, झिरी के हनुमान जी, विजयलक्ष्मी स्कूल क्षेत्र, तिलक स्कूल, फकीरों का मोहल्ला, भेरूजी का चबूतरा, मस्जिद क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, गुर्जरों का मोहल्ला, नाईस स्कूल के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के पीछे का क्षेत्र, पुलिस चौकी के सामने का क्षेत्र, जागा मोहल्ला और सुभाष स्कूल के पीछे का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 32 : बापू कॉलोनी, कर बाजार, डीसीएम श्मशान, इंदिरा गांधी नगर, तारवाड़ा, पावर हाउस और डीसीएम सेक्टर कार्यालय सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 33 : जय श्री विहार, रायपुर नाका, गुलाबबाड़ी, मालीपुरा, लक्ष्मी आवास, थेकड़ा, मॉडल टाउन, रॉयल सनसिटी, कैरियर पॉइंट टाउनशिप, शिवधाम कॉलोनी, कबीरधाम और शिवसागर का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 34 : देवली अरब ग्राम, नया नोहर, राजनगर का आंशिक भाग, महालक्ष्मीपुरम, बक्शी स्कूल, अरिहंत विद्यालय, मित्तल इंटरनेशनल स्कूल, श्याम नगर, हाथीखेड़ा ग्राम, हनुमतखेड़ा ग्राम, श्रीराम कॉलोनी, जगन विहार, गुरु नानक विहार, अरावली विहार, टैगोर नगर, होली फैमिली क्षेत्र, कृष्णा नगर, मोती नगर, गणेश नगर, बृज विहार, देवली अरब रोड, कौटिल्य नगर और प्रताप नगर द्वितीय सहित कई शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:48:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : बारिश से बिगड़ी सड़कों की केडीए ने ली सुध, गड्ढे भरने और पेचवर्क का काम तेज</title>
                                    <description><![CDATA[एरोड्रम से सीएडी और महाराणा प्रताप सर्किल रोड पर गिट्टी फैलने से हो रहे थे हादसे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--kda-takes-note-of-roads-damaged-by-rain--work-on-filling-potholes-and-patch-repairs-accelerates/article-163725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)87.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में मुख्य मार्गों की सड़कों पर पेचवर्क कर उन्हें सही करने का काम किया जा रहा है।शहर में इस बार अभी तक लगातार मूसलाधार बारिश तो नहीं हुई है। लेकिन गत दिनों जितनी सी भी हल्की बारिश हुई थी। उसी में शहर के अधिकतर क्षेत्रों में गली मौहल्लों की ही नहीं मुख्य मार्गों तक की सड़कें बदहाल हो गई थी। कई जगह तो बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए थे और कई जगह पर डामर उखडऩे से सड़कों पर गिट्टी फेल गई थी। जिससे आए दिन वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसे हो रहे थे।एरोड्राम चौराहे से सीएडी रोड हो या नदी पार क्षेत्र में महाराणा प्रताप सर्किल की रोड। कई जगह पर तो दो पहिया वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो रहा था। गत दिनों तो स्कूटी सवार एक महिला की गिट्टी पर वाहन का संतुलन बिगडऩे से गिरने पर उनकी मौत तक हो गई थी। इसे देखते हुए केडीए ने सड़कों के गड्ढ़ों को सही करने का काम शुरु कर दिया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि शहर के मुख्य मार्गों पर हो रहे गड्ढ़ों का मामला दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 12 अगस्त को पेज दो पर' ऐ भाई...जरा देखकर चलों शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर की अधिकतर बदहाल सड़कों की हालत को बयां किया था। साथ ही सीएडी रोड पर गिट्टी फेलने समेत कई जगह का मामला उठाया था।<br />समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारी हरकत में आए। </p>
<p>गत दिनों केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों के गड्ढ़ों को तुरंत सही किया जाए। जिससे आमजन को परेशानी नहीं हो और हादसे भी नहीं हो सके। इसके बाद केडीए अधिकारियों ने सड़कों के गड्ढ़े भरने व पेचवर्क का काम शुरु किया है। </p>
<p>केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि शहर में कई जगह पर मेन रोड पर बड़े गड्ढ़े हो गए थे। फिलहाल उन्हें स्मूथ करने का काम किया जा रहा है। जहां सीसी हो सकता है वहां सीसी किया जा रहा है और जहां डामर का पेचवर्क हो सकता है वहां उसे किया जा रहा है। अभी काम चल रहा है। कई जगह पर काम हो गया है और कई जगह पर चल रहा है। जहां अधिक समस्या है वहां जल्दी ही सड़कों को सही करवा दिया जाएगा। जिससे वाहनों का संतुलन नहीं बिगड़े और हादसे नहीं हों। जबकि बड़े स्तर पर सड़कों को सही करने का काम बरसात का सीजन समाप्त होने के बाद 15 सितम्बर से किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:17:01 +0530</pubDate>
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                <title>वार्डों का नक्शा नया, समस्याएं पुरानी</title>
                                    <description><![CDATA[नए नक्शे में शामिल हुए कई इलाके, अब हर बस्ती तक सुविधाएं पहुंचाना निगम के लिए चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-ward-map--old-problems/article-162846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सरकार का नक्शा बदल गया है। डेढ़ सौ वार्डों से अब कोटा शहर 100 वार्डों में सिमट गया है। कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण की अलग-अलग व्यवस्था खत्म होने के बाद वार्डों की सीमाएं भी बदल गई हैं। कई वार्डों का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में एक ही वार्ड में पुरानी कॉलोनियों से लेकर नई बस्तियां, गांव, संस्थान और विकसित हो रहे क्षेत्र तक शामिल हो गए हैं। नवज्योति ने नए वार्डों की जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड 16 से 20 तक का जायजा लिया तो तस्वीर सामने आई कि वार्ड बदले हैं, सीमाएं बदली हैं, लेकिन नागरिकों की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-1 : वार्ड 16... कॉलोनियों और पुराने मोहल्लों का मेल</strong><br />यहां सड़क, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित व्यवस्था सबसे अहम है। बढ़े हुए क्षेत्र के चलते निगम के सामने हर इलाके तक समान रूप से सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती रहेगी। वार्ड 16 में सुभाष कॉलोनी, नंदा जी की बाड़ी, तेल वाली गली, सरस्वती कॉलोनी, बालाजी टाउन, विधाता कॉलोनी, श्मशान, घूम चक्कर, गणेश चौक, कुम्हारों का मोहल्ला और सरकारी स्कूल क्षेत्र शामिल हैं। वार्ड में पुराने मोहल्लों के साथ नई कॉलोनियां भी हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-2 : वार्ड 17... आवारा कुत्ते और सफाई बनी परेशानी</strong><br />स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों और साफ-सफाई को लेकर परेशानी बताई। कई जगह नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी नजर आई। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से खासकर बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। वहीं सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। वार्ड 17 में मोहन निवास, खंड गावड़ी, पारिवारिक न्यायालय, सिविल लाइन, सुखधाम, दोस्तपुरा और ऑफिसर क्लब क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-3 : वार्ड 18... टूटी सड़कें और खाली प्लॉटों में पानी</strong><br />इलाके में लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में क्षतिग्रस्त सड़कें, खाली प्लॉटों में भरा पानी और पेयजल की समस्या शामिल है। खाली प्लॉटों में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर और गंदगी की समस्या पैदा होने की बात भी सामने आई। वहीं कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कें आवाजाही में परेशानी बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि निगम केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों पर भी ध्यान दे। वार्ड 18 में आदर्श नगर, सुमन विहार, बालाजी टाउन प्रथम व द्वितीय, कैलाशपुरी, पार्श्वनाथ एनक्लेव, गिरधर एंक्लेव, पार्वतीपुरम, एग्जॉटिका मैरिज गार्डन, महावीर मिशन हॉस्पिटल, मारडिया बस्ती, रामचंद्रपुर, बालिका ग्राम और स्वीट होम कॉलोनी सहित कई क्षेत्र आते हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-4 : वार्ड 19... खाली प्लॉटों का पानी और टूटे रास्ते</strong><br />यहां भी खाली प्लॉटों में पानी भरने, क्षतिग्रस्त सड़कों और विद्युत पोल की समस्या सामने आई। बारिश के बाद खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर सड़कें खराब हैं तो विद्युत पोल से जुड़ी समस्याएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। बढ़े हुए वार्ड में इन समस्याओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना निगम के लिए चुनौती होगी।<br />वार्ड 19 में मित्तल मैरिज गार्डन, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, पेट्रोल पंप, राधा-कृष्ण मंदिर, लॉरियट पब्लिक स्कूल, रिद्धि-सिद्धि नगर, चंचल विहार, लक्ष्मण विहार, विकास नगर, रिद्धि-सिद्धि प्रथम, कमला उद्यान, एसजीएन मैरिज गार्डन और लैंडमार्क सिटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-5 : वार्ड 20... सबसे बड़ा दायरा, समस्याओं की भी लंबी फेहरिस्त</strong><br />इतने बड़े क्षेत्र में समस्याओं का स्वरूप भी अलग-अलग है। यहां क्षतिग्रस्त सड़कें, गंदगी, टे्चिंग ग्राउंड की समस्या और जगह-जगह बस्तियों में जलभराव प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आ रही हैं। कई बस्तियों में बारिश का पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं सड़कें क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही प्रभावित होती है।वार्ड 20 का दायरा इन पांच वार्डों में सबसे विस्तृत नजर आता है। यहां मेनाल रेजिडेंसी, गणेश पाल, नांता, वीर दुर्गादास स्टेडियम, भैरूजी मंदिर, तेजाजी मंदिर, नांता गढ़, जेटियों का मोहल्ला, नांता रोड, पार्श्वनार्थ मल्टी स्टोरी, ईदगाह, कोली मोहल्ला, नारी निकेतन, क्रेशर बस्ती, मेंढकी पाल धाम, कालबेलिया बस्ती, गुरुद्वारा, पत्थर मंडी, अभेड़ा महल, करणी माता मंदिर, बायोलॉजिकल पार्क, करणी नगर, बड़गांव, देव नगर, सिलिकॉन सिटी, गोकुलधाम सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>पहले वार्ड छोटे होते थे, इसलिए क्षेत्र सीमित होने के कारण सफाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर भी तुरंत ध्यान दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दी। इसके साथ ही वार्ड में जरूरत के अनुसार कई विकास कार्य भी करवाए गए। उनका कहना है कि छोटे वार्ड होने से पार्षद और जनता के बीच सीधा संपर्क बना रहता था और समस्याओं की जानकारी भी समय पर मिल जाती थी।<br /><strong>-हरिओम सुमन, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में करीब 150 वार्ड थे, जबकि अब वार्डों की संख्या 100 हो गई है। उनका मानना है कि इससे कामकाज पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने वार्ड की समस्याओं पर लगातार ध्यान दिया और किसी तरह की बड़ी परेशानी सामने नहीं आई। पार्षद की जिम्मेदारी होती है कि वह उपलब्ध संसाधनों के साथ हर व्यवस्था को बेहतर तरीके से मैनेज करे। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से वार्ड की समस्याओं का समाधान संभव है।<br /><strong>- उषा ठाकुर, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 100 करना व्यवस्था की दृष्टि से एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार भी जरूरी है। अब एक नगर निगम होगा और जवाबदेही तय हो सकेगी। पहले वार्ड सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। विकास के कामों को लेकर हम सतर्क हैं।<br /><strong>-लव शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>आगामी चुनाव में ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव होना चाहिए, जो केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे कार्यकाल वार्डवासियों के बीच मौजूद रहे। प्रतिनिधि ऐसा हो, जो वार्ड को अपना घर और यहां रहने वाले लोगों को अपने परिवार की तरह समझे। वार्ड की छोटी-बड़ी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करे। जनता को ऐसे ही सक्रिय और संवेदनशील प्रतिनिधि की जरूरत है।<br /><strong>-शुभम मेहरा, वार्डवासी</strong></p>
<p>परिसीमन के बाद इस बार वार्ड का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया है। क्षेत्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि नया वार्ड किस तरह व्यवस्थित होता है और जनप्रतिनिधि हर इलाके की समस्या तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं। अब देखना होगा कि यह नया परिसीमन वार्डवासियों की उम्मीदों और उनकी जरूरतों पर कितना खरा उतरता है।<br /><strong>-देवेंद्र सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:20:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किसी वाहन की कमानी टूट रही, तो किसी का बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में तब्दील हुई टिपटा की सड़क, हर कदम पर खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-suffering-broken-suspension-springs-and-loss-of-balance/article-162536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अभी तो ठीक से बरसात शुरु भी नहीं हुई है। उससे पहले ही सड़कों की हालत खराब होने लगी है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे ही खतरे से सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।यह मामला वैसे तो एक जगह का है लेकिन इसी तरह की स्थिति शहर में कई जगह पर देखी जा सकती है। टिपटा में गढ़ पैलेस के पास सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे उस सड़क से रोजाना गुजर रहे सैकड़ों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>हालत यह है कि एक तो यहां का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही 24 घंटे बनी हुई है। दिन के समय तो इस सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां कई बार जाम के हालात बने रहते हैं। जिससे वाहनों को रैंग-रैंग कर निकलना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क पर लम्बे समय से बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। ऐसे में किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुलिया से साई बाबा मंदिर की तरफ जाते समय गड्ढ़ों में वाहनों को दचके लग रहे हैं। साथ ही कई वाहनों को रोजाना नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि आए दिन ई रिक् शा हो या ऑटो किसी ने किसी वाहन की या तो कमानी टूट रही है या फिर वाहन का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। दिन में रोजाना कई बार इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।इतना ही नहीं इसके आगे बैराज के समानांतर पुल पर भी दोनों तरफ काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>तीन तरफ से आ रहे वाहन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के सामने से दशहरा मैदान की तरफ जाने का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां तीन तरफ से वाहन निकल रहे हैं। एक सकतपुरा व पाटनपोल की तरफ से दशहरा मैदान की तरफ जाने वाले वाहन, दूसरे दशहरा मैदान व एलिवेटेड पुलिया से आने वाले वाहन उस संकरे रास्ते से निकल रहे हैं। दिन के समय तो यहां से कचरे के डम्पर और स्कूली बच्चों के वाहन ऑटो व वैन तक निकलते हैं। जिससे वहां जाम के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>काम जरा सा, हादसों का इंतजार</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क का जरा सा हिस्सा खराब हो रहा है। लेकिन गड्ढ़े अधिक गहरे व बड़े हैं। जिससे अचानक आने वाले वाहन झटके से उन गड्ढ़ों में उछल रहे हैं। जिससे वाहनों को नुकसान व हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तो बड़ा हादसा होने के बाद ही चेेतता रहा है। जबकि छोटा सा काम बहुत कम समय में हो सकता है उसे नहीं कर रहे।</p>
<p>यह तो एक जगह का मामला है। इसी तरह से शहर में अधिकतर सड़कों की भी यही स्थिति है। जिनमें विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय के सामने की सड़क हो या मस्जिद रोड,नयापुरा की अंदरूनी सड़कें हो या छावनी की। सभी जगह सड़कों पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात आने पर ये गड्ढ़े और बड़े हो जाएंगे।</p>
<p><strong>24 घंटे ट्रैफिक से परेशानी</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है। दिन ही नहीं रात में भी डम्पर निकलते रहते हैं। जिससे इस सड़क को नुकसान होता है। पूर्व में कई बार इसे सुधारा भी जा चुका है। लेकिन वाहनों के दबाव के कारण यहां फिर से गड्ढ़े हो जाते हैं। लेकिन इन गड्ढ़ों को जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:08:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का...मिट्टी और कार्य प्रगति का हटाया बोर्ड, दूर हुई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[मिट्टी के ढेर से निकलते समय वाहनों का संतुलन बिगड़ने से हादसे का खतरा बना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----soil-pile-and--work-in-progress--board-removed--obstruction-cleared/article-162533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित तालाब के किनारे सड़क बनने के बाद लगे मिट्टी के ढेर व कार्य प्रगति के लगे बोर्ड को शनिवार को हटा दिया गया। जिससे बाधा दूर होने के साथ ही रास्ता क्लीयर हो गया। वहीं इस मार्ग से दिनभर वाहन आसानी से निकलते रहे। तालाब किनारे मंदिर के पीछे की तरफ सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा था। जिसे कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा मरम्मत कर सही करवाया गया है। लेकिन सड़क मरम्मत के लिए बंद किया गया रास्ता काफी समय तक बंद रहा। जिससे वन वे ट्रैफिक चलने से जाम की स्थिति बन रही थी। वहीं सड़क तैयार होने के बाद सड़क से वाहनों का आवागमन तो शुरू हो गया था लेकिन संवेदक द्वारा एक तरफ से मिट्टी का ढेर और दूसरी तरफ कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाया था। जिससे वाहन चालकों को उस मिट्टी के ढेर से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा था। ऐसे में कई वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ था तो कई चार पहिया वाहनों के बोनट मिट्टी के ढेर से अडऩे के कारण खराब हो रहे थे।</p>
<p>इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। केडीए अधिकारी हरकत में आए और संवेदक को पाबंद कर मिट्टी के ढेर को हटवाया गया। मिट्टी के ढेर व बोर्ड को फिलहाल तालाब किनारे की तरफ साइड में किया गया है। केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के माध्यम से संवेदक को आदेश दिया गया कि वह मिट्टी के ढेर व बोर्ड को तुरंत हटाए। जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। शनिवार को सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को हटा दिया गया। जिससे वाहन दिनभर सुगमता से निकलते रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि सड़क बनने के बाद भी संवेदक द्वारा मौके से मिट्टी और कार्य प्रगति का बोर्ड नहीं हटाने से वाहन चालकों को होने वाली परेशानी का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 अगस्त को पेज 11 पर' तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ, नहीं हटी बाधा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें मिट्टी व बोर्ड नहीं हटने से रास्ता चालू होने के बावजूद वाहन चालकों को हो रही परेशानी व हादसों के खतरे के बारे में बताया था। साथ ही बरसात के समय अधिक दुर्घटना होने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकािरयों ने संवेदक को मिट्टी हटाने के लिए आदेश देते हुए पाबंद किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बन्धया बालाजी क्षेत्र में नाली जाम : सड़क क्षतिग्रस्त, आवागमन हो रहा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल योजना के लिए खोदी गई गौरव पथ सीसी सड़क खराब मरम्मत के कारण फिर उखड़ गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drainage-clogged-and-road-damaged-in-the-bandhya-balaji-area--traffic-movement-affected/article-157576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे के बंधया बालाजी मंदिर के पास नाली जाम होने और पुराना बाजार मार्ग पर गौरव पथ सीसी सड़क की खराब हालत को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के समीप नाली में कचरा और गंदगी जमा होने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका बनी हुई है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>इसी प्रकार पुराना बाजार मार्ग पर पेयजल योजना के तहत खोदी गई गौरव पथ सीसी सड़क की मरम्मत ठीक से नहीं होने से सड़क फिर से उखड़ गई है। जगह-जगह गड्ढे और उबड़-खाबड़ स्थिति के कारण राहगीरों व वाहन चालकों को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान दुर्घटना की संभावना भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन से मांग की है कि बंधया बालाजी क्षेत्र में नाली की तत्काल सफाई करवाई जाए तथा पुराना बाजार मार्ग की क्षतिग्रस्त सड़क का मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और आवागमन सुचारू हो सके।</p>
<p><strong>प्रशासक की जुबानी</strong><br /> मामला मेरी जानकारी में आ कार्य करवा दिया जाएगा। गया हैं। अगले दो दिन के अंदर सफाई<br /><strong>- बजरंग लाल मेघवाल, प्रशासक, अरनेठा </strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br /> मैं पुराने बाजार गौरव पथ का निरीक्षण कर लेती हूं। धरातल की स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा।<br /><strong>- खुशबू मीणा, जेईएन केशोराय पाटन</strong></p>
<p> पुराने बाजार सीसी सड़क की जानकारी मंगवा लेते हैं। उसके बाद जो भी आवश्यक होगा उचित प्रयास किया जाएगा। आमजन एवं राहगीरों की किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने देंगे।<br /><strong>- अजय गहलोत, एईएन, पीएचडी विभाग, केशोराय पाटन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:03:28 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात से पहले ही सड़कों का हुआ बुरा हाल, पानी भरने पर रहेगा हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं गड्ढे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, वहीं सीवरेज कार्य के बाद कई सड़कों की मरम्मत भी अधूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-in-poor-condition-even-before-the-monsoon/article-157558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक:</strong> जयपुर गोल्डन से ज्वाला तोप की तरफ जाने वाले रास्ते पर सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे तालाब के सहारे की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हो रहे हैं कि वहां से निकलने वाले वाहन हिचकोले खा रहे हैं। विशेष रूप से दो पहिया वाहनों का यहां संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे रोजाना कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>दृश्य दो:</strong> एरोड्राम सर्किल पर अंरडपास के ऊपर की सड़क जो झालावाड़ हाइवे रोड है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में और तेजी से वाहन निकल रहे हैं। वह सड़क बीच से बदहाल हो रही है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों के गड्ढ़ों से बचकर निकलने के कारण कई बार वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन:</strong> डीसीएम रोड स्थित इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एक सड़क का बीच से काफी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसे में वहां से दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों तक को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को इन गड्ढ़ों से बचकर निकलना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के बदहाली को बताने के लिए। ऐसी कई अन्य सड़कें व मुख्य मार्ग हैं जहां बरसात से पहले ही सड़कों की हालत खराब हो रही है। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी है। कहीं सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों को सही ढंग से नहीं भरा गया। जिससे सड़कें बीच से धंस गई है। ऐसे में अभी ही उनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरु होने वाली है। ऐसे में इन गड्ढों व टूटी सड़कों पर पानी भरने से उनका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं होने पर इनसे गुजरने वाले वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर हादसों का खतरा अधिक होने की संभावना है।</p>
<p><strong>हमेशा होती मरम्मत, फिर भी हालत खराब</strong><br />सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे वाली सड़क का छोटा सा हिस्सा पिछले कई सालों से बार-बार खराब हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इसे हर बार सही भी कराया जाता है। लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाता। कुछ समय बाद फिर से वही पुरानी हालत हो जाती है। गत वर्ष भी बरसात में यहां की सड़क खराब होने से इसमें पानी भरने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा था। लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे सही भी करवा दिया था। लेकिन वर्तमान में फिर वही पुरानी जैसी हालत हो गई है। शुक्रवार को भी इस जगह पर कई वाहनों का संतुलन बिगड़ा। जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों को गति धीमी करनी पड़ी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बरसात में यहां हादसों की संभावना अधिक है।</p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़कों की हालत अधिक खराब</strong><br />शहर में डामर सड़क हो या सीसी अधिकतर की हालत खराब है। लेकिन विशेष रूप से सीवरेज के लिए बीच से खोदी गई सीसी सड़कों की हालत अधिक खराब है। हर सड़क बीच से खुदी हुई है। लाइन डालने के बाद उनकी मरम्मत तो की गई लेकिन सही ढ़ंग से नहीं होने से अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जिससे बरसात में पानी भरने पर वहां गड्ढ़े होने से हादसों का खतरा अधिक है। यह स्थिति किसी एक या दो जगह की नहीं वरन् पूरे शहर की है। फिर चाहे वह छावनी का क्षेत्र हो या धानमंडी का। नयापुरा का क्षेत्र हो या विज्ञान नगर का। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ ऑफिस के सामने से कॉमर्स कॉलेज तक की सड़क और विज्ञान नगर मुख्य मार्ग की सड़क, नयापुरा मुक्तिमार्ग की सड़क सभी जगह पर ऐसी स्थिति है कि दो पहिया वाहनों का चलना दूभर हो रहा है।</p>
<p><strong>नाले को व्यू कटर से ढका, सड़क बदहाल</strong><br />औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंद्रा गांधी नगर में एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में नाले पर पुलिया बनी हुई है। हाल ही में नगर निगम की ओर से उस पुलिया पर दोनों तरफ दीवार खड़ी कर व्यू कटर लगा दिए। जिससे नाले की गंदगी नजर नहीं आए। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया गया। निगम सूत्रों का कहना है कि यह सड़क केडीए के अधीन है। ऐसे में उस सड़क पर इतने अधिक व बड़े-बड़े गड्ढ़ें हैं कि वहां जरा सी बरसात में ही पानी भर गया। जिससे वाहनों व पैदल ही लोगों को निकलने पर संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संबंधित विभाग सुधारे सड़कें</strong><br />छावनी निवासी ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि नगर निगम हो या केडीए। सड़कों को सही करना इनकी जिम्मेदारी है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइनों के कारण खराब हुई है। जिन विभाग के अधीन जो सड़क आती है उसे सही करवानी चाहिए। वरना बरसात में ये सही होंगी नहीं। जिससे लोगों को महीनों तक परेशानी व हादसों का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>प्रेम नगर निवासी मुकेश जोनवाल का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर के इस नाले की पुलिया से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यहां से कई निजी व सरकारी स्कूलों के ऑटो व वैन भीबच्चों को लेकर जाती है। अभी गर्मी की छुट्टी है जिससे बच्चों के वाहन तो नहीं आ-जा रहे। लेकिन स्थानीय लोग तो निकल ही रहे हैं। अभी से यह हालत है तो बरसात में हालत अधिक खराब होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। नगर निगम या केडीए जिस भी विभाग के अधीन सड़क आती है उन्हें बरसात से पहले सही करवाना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करवाई जाती है। सीवरेज लाइन डालने के बाद उस सड़क को सही करने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक फर्म की रहती है। फिर भी यदि कहीं सड़कों पर गड्ढ़े हैं तो उनका पता करवाकर सही करवाया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों का राजस्व फिर भी नहीं मिल रहीं सुविधाएं, बंद विश्राम गृह और खराब सीसीटीवी से किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा, वाटर कूलर बंद, जगह-जगह लग रहे गंदगी के ढेर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-generating-crores-in-revenue--facilities-are-lacking--farmers-distressed-by-a-closed-rest-house-and-non-functional-cctv-cameras/article-157356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। कोटा जिले की ए-ग्रेड कृषि उपज मंडी इटावा हर वर्ष करीब 10 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करती है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के 500 से अधिक गांवों के किसान यहां अपनी उपज बेचने आते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव और अव्यवस्थाओं के चलते किसानों, व्यापारियों और पल्लेदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नालियां कचरे से अंटी पड़ी हैं, जिससे बदबू फैल रही है। कलेवा योजना स्थल के आसपास भी गंदगी के ढेर लगे होने से किसान भोजन करने में असहज महसूस करते हैं। मंडी में लगे अधिकांश सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि उपज चोरी होने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, लेकिन कैमरे बंद होने से चोरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>खुले में नीलामी, बारिश में भीगती है उपज</strong><br />समर्थन मूल्य पर खरीद के कारण नीलामी शेड का उपयोग अन्य कार्यों में होने से किसानों की उपज की नीलामी खुले में करनी पड़ती है। इससे गर्मी और बारिश दोनों मौसम में किसानों और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा बना रहता है। नीलामी क्षेत्र में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। जिससे विशेष रूप से महिला किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>बंद पड़ा किसान विश्राम गृह</strong><br />किसानों के ठहरने के लिए बना विश्राम गृह रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है और उस पर ताला लगा हुआ है। अधिक आवक के दिनों में किसानों को रात खुले में गुजारनी पड़ती है। वहीं मंडी परिसर मैं लगाए गए वाटर कूलर बंद पड़े हैं। ऐसे में किसानों और मजदूरों को सीधेनल का पानी पीना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>अंधेरे में डूबी मंडी, टूटेे बिजली पोल बने खतरा</strong><br />मंडी में कई स्थानों पर रोड लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। बिजली कटौती होने पर जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद समय पर संचालन नहीं होने से व्यापारियों और किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी क्षतिग्रस्त हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>इनका कहना  है</strong><br />जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भीउपलब्ध नहीं हैं। <br /><strong>- चंदालाल मीणा, खेड़ली बेरीसाल निवासी</strong></p>
<p>नीलामी खुले में होती है, चारों तरफ गंदगी है और किसानों के लिए विश्राम गृह की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।<br /><strong>- बद्रीलाल नागर, रजोपा निवासी</strong></p>
<p> किसानों को पेयजल औरं शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ता है, जबकि यहां राजस्थान और मध्यप्रदेश के सैकड़ों गांवों के किसान आते हैं।<br /><strong> - राकेश बैरवा, रणोदिया निवासी</strong></p>
<p>मंडी में सफाई,पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है तथा शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।<br /><strong>- जोधराज गुर्जर, अध्यक्ष, पल्लेदार एसोसिएशन</strong></p>
<p> सीसीटीवी कैमरे खराब होने से चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। नवीन शेड और अन्य सुविधाओं की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- हरिशंकर मंगल, अध्यक्ष, मंडी व्यापार संघ</strong></p>
<p> करोड़ों रुपए की आय के बावजूद किसानों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। <br /><strong>- उमाशंकर नागर, सह जिला प्रचार प्रमुख, भारतीय किसान संघ</strong></p>
<p> मानसून से पहले नालियों की सफाई करवाई जाएगी। मंडी में सफाई कार्य जारी है। पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और अन्य समस्याओं का निरीक्षण कर उन्हें जल्द ठीक कराने के प्रयास किए जाएंगे। किसान विश्राम गृह की मरम्मत के लिए बजट प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं।<br /><strong>- रवि सिंह पंवार, मंडी सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:19:11 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का  : पुलिया निर्माण के साथ बायपास बनने से आवागमन हुआ सुगम</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद जागा विभाग, राहगीरों को मिली बड़ी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report---construction-of-culvert-and-bypass-eases-commute/article-151438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)35.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेडा। क्षेत्र के बांसी-देई मार्ग पर बांडी खाली नाले पर क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा उच्च पुलिया का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। निर्माण के साथ ही संवेदक द्वारा पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक बायपास मार्ग भी तैयार कर दिया है, जिससे आवागमन सुगम हो गया है।</p>
<p><strong>उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू </strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार गत मानसून सत्र में अतिवृष्टि के कारण दुगारी कनकसागर झील का ओवरफ्लो पानी बांसी तालाब में पहुंचा था। लंबे समय तक तेज बहाव के चलते नाले की छोटी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे मार्ग अवरुद्ध हो गया था। इस समस्या को देखते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने यहां उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू कराया। प्रारंभ में निर्माण स्थल पर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी। दोपहिया वाहन चालकों को करीब दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया </strong></p>
<p>दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया और अब निर्माण स्थल के पास ही बायपास मार्ग तैयार कर दिया गया है। इससे पैदल एवं दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है। वर्तमान में पुलिया निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और शीघ्र ही पूर्ण होने की संभावना है। इस मार्ग से सीएचसी, विद्यालयों एवं आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। बायपास बनने से सभी को सुविधा मिली है और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की सराहना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:57:29 +0530</pubDate>
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