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                <title>भवन बना नहीं,करोड़ों की जमीन पर खड़े हो रहे संवेदक के वाहन </title>
                                    <description><![CDATA[भवन तो बना नहीं अब उस जमीन पर संवेदक के सफाई वाहन जिनमें टिपर से लेकर बिन लिफ्टर व अन्य सफाई वाहन खड़े हो रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-building-was-not-constructed--the-vehicles-of-the-contractor-are-parked-on-land-worth-crores/article-93638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के बीचो बीच पुरानी सब्जीमंडी में अतिक्रमण से मुक्त करवाई गई करोड़ों की बेशकीमती जमीन इन दिनों नगर निगम के संवेदक के सफाई वाहन खड़े करने के काम आ रही है। जबकि इस जमीन पर नगर निगम कोटा उत्तर का भवन बनना प्रस्तावित था। भवन के लिए बजट नहीं मिलने से अब वह तो निरस्त हो चुका है।  ज्वाला तोप के पास पुरानी सब्जीमंडी में  नगर निगम की जमीन पर पूर्व में अतिक्रमण हो रहा था। जिसे पिछली कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन नगर विकास न्यास के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने अतिक्रमण से मुक्त कराया था।  उस समय तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने इस जमीन पर नगर निगम कोटा उत्तर का नया भवन बनाना प्रस्तावित किया था। लेकिन वह भवन तो बना नहीं अब उस जमीन पर संवेदक के सफाई वाहन जिनमें टिपर से लेकर बिन लिफ्टर व अन्य सफाई वाहन खड़े हो रहे है। </p>
<p><strong>निगम ने बनाई चार दीवारी, डीपीआर निरस्त</strong><br />अतिक्रमण से मुक्त हुई करीब 9 हजार वर्ग मीटर जमीन पर नगर निगम की ओर से चार दीवारी बनाई गई है। जबकि निगम की ओर से पूर्व में यहां नया भवन बनाने की डीपीआर का टेंडर जारी कर दिया था। डीपीआर बनकर तैयार भी हो गई थी। लेकिन सरकार बदलने के बाद वह डीपीआर भी निरस्त कर दी गई। साथ ही सरकार ने नया भवन बनाने के लिए बजट भीनहीं दिया। ऐसे में  अब नया भवन बनना भी लगभग निरस्त हो गया है। </p>
<p><strong>50 करोड़ से बनना था नया भवन</strong><br />पूर्व कांग्रेस सरकार में कोटा उत्तर निगम का बहुमंजिला  भवन बनाया जाना था। जिस पर अनुमानित करीब 50 करोड़ रुपए खर्च होने थे। उस समय विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले इस भवन का शिलान्यास तो कर दिया गया था। लेकिन भवन निर्माण का बजट कहां से आएगा यह तय नहीं हो सका था। राज्य में सरकार बदलने के बाद फिर से एक नगर निगम बनाने की संभावना को देखते हुए कोटा उत्तर भवन के लिए  बजट नहीं मिलने से अब भवन नहीं बनेगा। </p>
<p><strong>जमीन पर संवेदक का कब्जा</strong><br />नगर निगम की इस जमीन पर वर्तमान में संवेदक का कब्जा है। यहां निगम द्वारा संवेदक को दिए सफाई वाहन खड़े हो रहे है। उन वाहनों की रखवाली के लिए यहां चौकीदार की टापरी बनी हुई है। जिससे वहां उनके कर्मचारी रह रहे है।  नगर निगम  कोटा उत्तर के गैराज प्रभारी व सहायक  अभियंता अजय बब्बर ने बताया कि कोटाउत्तर में घर-घर कचरा संग्रहण का काम निजी फर्म को दिया गया है। जिसके तहत अभी तक 70 वार्डों व 7 सेक्टरों में से 6 सेक्टरों में सर्वे पूरा होने पर उनका काम संवेदक को दिया जा चुका है। सिर्फ पटरी पार रेलवे कॉलोनी क्षेत्र का सेक्टर एक बाकी है। ऐसे  में उन सभी 6 सेक्टरों में काम आने वाले टिपर व वाहन संवेदक को दिए गए है। संवेदक को वाहन खड़े करने केलिए जगह निगम को देनी है। ऐसे में संवेदक द्वारा अपने वाहन निगम की जमीन पर खड़े किए हुए है। उन्होंने बताया कि आधुनिक ट्रांसफर स्टेशन तैयार होने पर ये वाहन वहां खड़े किए जा सकेंगे। लेकिन अभी खेड़ली फाटक व उम्मेदगंज के  ट्रांसफर स्टेशनों के चालू नहीं होने से संवेदक के वाहनों को खड़ा करने के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में ज्वाला तोप के पास की निगम की जमीन को दिया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 16:28:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खरीदते समय बताई पार्किग की जगह, पंजीकरण के बाद सड़क पर वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का तो सामना करना पड़ता ही है साथ ही सड़कों की चौड़ाई भी कम हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parking-place-mentioned-at-the-time-of-purchase--vehicle-on-the-road-after-registration/article-69330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(5)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। किसी व्यक्ति को वाहन खरीदने के बाद उसका पंजीकरण कराते समय वाहन को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है। जिसकी जानकारी वाहन मालिक पंजीकरण के समय हलफनामे के रुप में परिवहन विभाग को देता है। लेकिन कोटा में इसे लेकर बहुत बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। जहां परिवहन विभाग वाहन मालिक द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि किए बिना ही पंजीकरण संख्या जारी कर रहा है। हालात यह हैं कि शहर में इस तरह से पंजीकरण जारी होने के कारण हर गली मौहल्लें में वाहन सड़क पर ही खड़े मिलते हैं। जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का तो सामना करना पड़ता ही है साथ ही सड़कों की चौड़ाई भी कम हो रही है।</p>
<p><strong>70 फीसदी वाहनों के हलफनामे में गलत जानकारी</strong><br />पड़ताल में सामने आया कि कोटा आरटीओ के पास पंजीकृत कुल वाहनों में से 70 फीसदी वाहनों के मालिकों द्वारा पार्किंग के लिए दिए एफिडेविट फर्जी हैं। क्योंकि वाहन मालिक भी खानापूर्ति पूरी करने के लिए एफीडेविट दे रहे हैं जिसका ना विभाग कोई क्रोस चैक कर रहा है। ना ट्रैफिक पुलिस कोई कारवाई जबकी गलियों में सड़कों पर खड़े वाहन किसी को भी नजर आ सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं नियम</strong><br />शहरों में बढ़ती बेतहाशा अवैध पार्किंग के लिए साल 2012 में राजस्थान हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर आदेश देते हुए कहा था की सभी परिवहन विभाग वाहन का पंजीकरण उसके लिए पर्याप्त पार्किंग स्थल होने पर ही जारी करेगा। अगर किसी व्यक्ति के पास अपने वाहन को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है तो विभाग पंजीकरण जारी नहीं करेगा। जिसके लिए वाहन मालिक द्वारा हलफनामा जारी करके विभाग को सूचना देनी होगी की उसके पास वाहन खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह है। लेकिन वाहन मालिक द्वारा दी गई सूचना को बिना क्रोस चेक किए विभाग पंजीकरण जारी कर रहा है।</p>
<p><strong>गलत हलफनामे पर सजा का प्रावधान </strong><br />वाहन को अवैध रुप से खड़ा करने पर 5 सौ से 1 हजार रुपए तक का जुर्माना लग सकता है या बार बार नियमों की अवहेलना करने पर वाहन जब्त किया जा सकता है। वहीं हलफनामे में गलत जानकारी देने पर वाहन मालिक के खिलाफ दंडात्मक कारवाई संभव है। क्योंकि हलफनाम के रुप में गलत जानकारी पेश करना कानूनन अपराध है। जिसमें जुर्माने से लेकर सजा तक का प्रावधान है।</p>
<p><strong>शहर के हर इलाके में अवैध पार्किंग</strong><br />शहर में हर इलाके में गली मौहल्लों में सड़कों पर वाहन खड़े मिल जाएंगे। वाहन मालिक और परिवहन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। क्योंकि विभाग पुष्टि के नाम पर फोरी कारवाई करके पंजीकरण जारी का देता है। लेकिन उससे होने वाली परेशानियों को नजरंदाज कर देता है। वहीं शहर में पोश कॉलोनियों से लेकर कच्ची बस्तियों तक हालात समान है। जिसे जहां जगह मिलती है वो वहीं वाहन खड़ा कर देता है जो आमजन के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />कई लोग अपने वाहनों को गली में सड़कों पर ही खड़ा कर देते हैं। जिससे सड़क की चौड़ाई भी कम होती है और दूसरे वाहन को निकालने में भी परेशानी होती है। विभाग की लापरवही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।<br /><strong>-अक्षय पारेता, डीसीएम</strong></p>
<p>सड़कों पर खड़े होने वाले इन वाहनों से बहुत परेशानी होती है। अगर किसी गली में एक साथ दो वाहन चले जाएं तो निकलना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को इनके खिलाफ कारवाई करनी चाहिए।<br /><strong>-कविश जैन, कंसुआ</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वाहन मालिकों से पंजीकरण की प्रक्रिया के समय पार्किंग के लिए स्थान की उपलब्धता को लेकर हलफनामा लिया जाता है। कोई अगर गलत जानकारी देता है तो गलत है। स्टॉफ की कमी होने से क्रॉस चैक नहीं कर पाते, शिकायत आने पर कारवाई की जाती है। <br /><strong>-अर्जुन सिंह राठौर, क्षेत्रिय परिवहन अधिकारी, कोटा</strong></p>
<p>अवैध से रुप से खड़े होने वाले वाहनों पर निरंतर कारवाई की जा रही है। आवासीय ईलाकों में शिकायत आने पर कारवाई करते हैं। पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान की पुष्टि करना परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।<br /><strong>-पूरण सिंह मीणा, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 18:42:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निजी बसें सड़कों पर खड़ी, बसने से पहले उजड़ा नया ठिकाना  </title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों की लागत से बना ये स्टैंड यूं ही खाली पड़ा हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/private-buses-parked-on-the-roads--new-place-destroyed-before-settling-in/article-68971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(10).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अव्यवस्थित तरीके से खड़ी होने वाली निजी बसों के लिए यूआईटी द्वारा अनंतपुरा के नजदीक महाराव भीम सिंह मार्ग पर करीब 250 बसों के लिए बस स्टैंड बनाया गया था जो बस मालिकों और यूआईटी के बीच चल रहे विवाद के कारण खाली पड़ा हुआ है। करोड़ों रुपए खर्च कर विकसित की गई ये जमीन बसों के खड़े करने की जगह पर आसपास रहने वाले लोगों के काम आ रही है। वहीं इसके चलते शहर में निजी बसों की पार्किंग के लिए अलग से स्थान होने के बावजूद अव्यवस्थित रूप से कहीं भी खड़ी हो रही हैं। जो आने जाने वाले राहगीरों के लिए परेशानी खड़ी कर रही दूसरी ओर जाम का भी कारण बन रही हैं। वहीं बसों को खड़ी नहीं करने पर बस मालिकों का कहना है कि यूआईटी द्वारा स्टैंड का किराया निर्धारित करते समय हमसे चर्चा तक नहीं की और मनमाने तरीके से किराया निश्चित कर दिया जो बहुत ज्यादा है। </p>
<p><strong>2007 में हुई थी जमीन आवंटित </strong><br />शहर के अंदर खड़ी होने वाली निजी बसों के लिए स्थाई रूप से स्टैण्ड बनाने के लिए यूआईटी ने साल 2007 में ट्रांसपोर्ट नगर के पास करीब 22800 वर्ग मीटर की 250 बसों की क्षमता वाली जमीन आंवटित की थी। उसके बाद साल 2022 में इस जमीन को यूआईटी द्वारा ही करोड़ों रूपयों की लागत से विकसित किया गया था। वहीं इस पर बस मालिक अशोक चांदना ने बताया कि उस समय आंवटित जमीन पर पत्थर की खान मौजूद थी जिसे कोटा स्टोन फैक्ट्रियों से निकली स्लरी से भरकर स्टैंड विकसित किया था। लेकिन स्टैंड विकसित करने के बाद यूआईटी ने स्वयं के स्तर पर ही बिना बस मालिकों से चर्चा किए स्टैंड के संचालन का ठेका और किराए की दरें निर्धारित कर दी।</p>
<p><strong>किराया ज्यादा और दूरी पर स्थित</strong><br />स्टैंड पर बसें खड़ी नहीं करने पर समस्या को लेकर बस मालिकों से बात की तो उन्होंने बताया कि स्टैंड पर बसें खड़ी तो कर दें लेकिन स्टैंड का किराया बहुत ज्यादा है एक बस को 24 घंटे खड़ी करने के लिए 1500 रुपए किराया देना पड़ता है। जबकी शहर के अंदर बस को आॅपरेट करने का टैक्स ही मात्र 1 हजार रुपए है। बस मालिकों ने कहा कि महाराव भीम सिंह मार्ग पर स्थित ये स्टैंड बसों के प्रस्थान से बहुत दूर है। किसी भी बस को खड़ी होने के लिए पहले 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और वापस आना पड़ता है जिससे बस अतिरिक्त चलती है और डीजल भी ज्यादा खर्च होता है।</p>
<p><strong>बसों की जगह टपरियां खड़ी हुई</strong><br />महाराव भीम सिंह मार्ग पर मौजूद बस स्टैंड पर करीब 250 बसों के पार्किंग की व्यवस्था है। जो शहर के अंदर सड़कों पर खड़ी होने वाली बसों से निजात दिलाने में कारगर सबित होती, लेकिन बस मालिकों और यूआईटी के बीच चल रहे विवाद के कारण स्टैंड पर बसों की जगह टपरियां खड़ी हो रही हैं। इसके अलावा इस स्टैंड पर आस पास के लोग क्रिकेट खेलने के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं। रात के समय में शराबी दीवार फांदकर इस स्टैंड को शराब पीने का ठीकाना बनाने लगे हैं। करोड़ों की लागत से बना ये स्टैंड यूं ही खाली पड़ा हुआ है।</p>
<p>यूआईटी ने स्टैंड तो विकसित कर दिया लेकिन किराया तय करते समय हमसे कोई रायशुमारी नहीं की गई। किसी भी बस को स्टैंड पर सिर्फ एक दिन के लिए खड़ी करने पर 1500 से 2000 का खर्चा आता है जो की बहुत ज्यादा है यूआईटी किराया कम करे तो बसें खड़ी करने में कोई समस्या नहीं है।<br /><strong>- सत्यनारायण साहू, प्रदेश अध्यक्ष, बस आॅपरेटर एसोसिएशन राजस्थान</strong></p>
<p>कुछ बसें तो स्टैंड पर खड़ी हो रही हैं, कुछ बस मालिक निजी कारणों के चलते बसों को शहर में यहां वहां खड़ी कर रहें हैं जिन्हें स्टैंड पर बसें खड़ी करने के लिए पाबंद करेंगे। <br /><strong>- मान सिंह मीणा, सचिव, यूआईटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Feb 2024 17:14:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूपी के सिद्वार्थनगर मे सड़क हादसा, सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में घुसी बोलेरो, 8 बारातियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुये शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uttapradesh-news--road-accident-in-up-s-siddharthnagar--bolero-rammed-into-a-trailer-parked-on-the-side-of-the-road--8-wedding-processions-died/article-10203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/118.jpg" alt=""></a><br /><p>सिद्वार्थनगर। उत्तर प्रदेश मे सिद्वार्थनगर जिले के जोगिया क्षेत्र मे सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर में भिडऩे से बोलेरो कार में सवार आठ बारातियों की मौत हो गईं जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि जिले के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला गांव सेें बांसी कोतवाली क्षेत्र में शनिवार रात एक बारात गई थी। बारात से बोलेरो गाड़ी मे 11 लोग बैठ कर वापस आ रहे थे कि बांसी-नौगढ़ मार्ग पर कटया गांव के पास सड़क के किनारे खड़े ट्रेलर में बोलेरो घुस गयी।<br />    <br />इस हादसे में सात बरातियों मोनी,रामललित, रवि,शिवसागर,लाला,गोरख प्रसाद तथा पिन्टू निवासी ग्राम महला थाना शोहरतगढ़ की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि एक ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। तीन अन्य घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुईं है।</p>
<p><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुये शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होने  दुर्घटना में घायल हुए लोगों का समुचित उपचार कराए जाने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 May 2022 11:33:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>     सरकारी अस्पतालों में अस्त-व्यस्त खड़े वाहन बन रहे परेशानी </title>
                                    <description><![CDATA[शहर में वाहनों की संख्या अधिक होने और पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग पहले ही समस्या बनी हुई है वहीं अब सरकारी अस्पतालों में भी पार्किंग समस्या बनने लगी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-parked-randomly-in-government-hospitals-are-becoming-trouble/article-6950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/chikitsalaya.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में वाहनों की संख्या अधिक होने और पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग पहले ही समस्या बनी हुई है वहीं अब सरकारी अस्पतालों में भी पार्किंग समस्या बनने लगी है। नए कोटा क्षेत्र के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लेकर पुराने शहर के एमबीएस अस्पताल , जेके लोन अस्पताल परिसर तक धार्मिक स्थल बने हुए हैं।  मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रवेश द्वार से लेकर गेट नंबर 4 तक जगह जगह सड़क किनारे अस्त-व्यस्त वाहन खड़े हुए हैं।  दो पहिया वाहन से लेकर चार पहिया वाहनों तक की यही स्थिति है जिससे अस्पताल में आने वाली एंबुलेंस व मरीजों को लेकर आने वाले वाहनों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । इसी तरह एमबीएस अस्पताल में भी मुख्य द्वार से लेकर आउटडोर के गेट तक और दवा काउंटर से लेकर उपभोक्ता भंडार तक, सेंटर लैब से लेकर ब्लड बैंक तक यही स्थिति है।  वहां भी सड़क पर वाहनों की पार्किंग अस्त व्यस्त होने से एंबुलेंस और मरीजों के वाहनों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  लेकिन अस्पताल प्रशासन और पार्किंग ठेकेदारों द्वारा ध्यान नहीं देने से यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 17:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>मेंटीनेंस के अभाव में खड़ी रोडवेज की 391 बसें</title>
                                    <description><![CDATA[रोडवेज और जेसीटीएसएल को हो रहा राजस्व का नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-391-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82/article-2177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/roadways.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राजस्थान रोडवेज प्रशासन की अनदेखी के चलते करीब 391 बसें और जेसीटीएसएल की 26 बसें मेंटीनेंस के अभाव में डिपो व सेंट्रल वर्कशॉप में खड़ी हंै। इससे यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पा रही, वहीं रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।  रोडवेज के पास कुल 2844 बसें हैं, इनमें से 2356 ही संचालित हो रही हैं। 320 बसें प्रदेश के डिपो में और 71 बसें सेंट्रल वर्कशॉप में मेंटीनेंस के अभाव में खड़ी हैं। वहीं करीब 758 अनुबंधित बसों में से केवल 745 ही संचालित हो रही हैं। इन बसों का मेंटीनेंस नहीं होने के चलते 3623 शेड्यूल में से केवल 2983 ही संचालित हो रही है। वहीं जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड प्रशासन की अनदेखी के चलते भी 26 बसे मेंटीनेंस और तीन बसें परिचालक की कमी के अभाव में टोडी, विद्याधर नगर और बगराना डिपो में खड़ी हैं। वहीं करीब 25-30 बसें प्रतिदिन रास्ते में ब्रेकडाउन होती है। <br /> <strong><br /> राजस्थान रोडवेज</strong><br /> प्रदेश में डिपो    52 <br /> प्रतिदिन यात्री    6.50 लाख<br /> प्रतिदिन राजस्व     करीब 4.50 करोड़ रुपए<br /> प्रतिदिन किलोमीटर    11.50 लाख<br /> प्रतिदिन शेड्यूल    2983 (संचालित)</p>
<p><br /> <strong>जेसीटीएसएल</strong><br /> डिपो    शेड्यूल    बसें संचालित    डिपो में खड़ी<br /> विद्याधरनगर    104    92    12<br /> बगराना    50    47    3<br /> टोडी    101    87    11    (3 परिचालक की कमी से)<br /> <br /> <strong>आमजन को नहीं मिल रही सुविधा</strong><br /> रोडवेज प्रशासन की अनदेखी के चलते आमजन को सरकारी परिवहन की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। जबकि सरकार आमजन के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। रोडवेज प्रशासन इन बसों का मेंटीनेंस कर सड़क पर चलाए तो आमजन को राहत मिले और रोडवेज को राजस्व। जेसीटीएसएल की बसों में प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं, इनसे 21 लाख की आय होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 12:25:01 +0530</pubDate>
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