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                <title>सफाई नहीं होने से सड़क पर फैला कीचड़</title>
                                    <description><![CDATA[दीगोद क्षेत्र के फतेहपुर गांव में नालियों की सफाई नहीं होने के कारण मुख्य रोड पर कई दिनों से कीचड़ फैला हुआ है। जिससे आम जनता व राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-the-lack-of-cleanliness--the-mud-spread-on-the-road/article-15169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/safai-nahi-hone-se-sadak-par-kechad.jpg" alt=""></a><br /><p>दीगोद। आजादी के सत्तर साल बाद भी कई गांवों में अभी तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आजादी के इस अमृतकाल में ग्रामीण आबादी तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। इसका जीता जागता सबूत दीगोद क्षेत्र के फतेहपुर गांव में देखने को मिलता है जहां नालियों की सफाई नहीं होने के कारण मुख्य रोड पर कई दिनों से कीचड़ फैला हुआ है। जिससे आम जनता व राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><br />जानकारी के अनुसार पूरे रोड पर कीचड़ फैला होने के कारण आवागमन के समय ग्रामीणों के कपड़े खराब हो जाते हैं। कई बार कीचड़ के कारण फिसल कर गिरने से चोटिल होते रहते हैं। इसी प्रकार कीचड़ में बाइक सवार असंतुलित होकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। जिम्मेदारों का इस पर कोई ध्यान नहीं है। लोगों को बीमारियां फैलने का भय सता रहा है। सबसे बड़ी परेशानी तो स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों को हो रही है। स्कूल से आते-जाते बच्चे रोज कीचड़ में लथपथ हो जाते हैं। खेतों में जाते समय भी ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत को अवगत करा दिया गया है। फिर भी अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। जल्द से जल्द वहां सफाई नहीं की गई तो आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि नालियां टूटी फूटी होने व काफी समय से उनकी सफाई नहीं होने के कारण आम रास्तों व सड़कों पर कीचड़ फैला हुआ है। बारिश के कारण लोगों को और अधिक मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के साथ कई बार हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत प्रशासन इस मामले को जल्द से जल्द संज्ञान में लेकर उचित कार्रवाई कर ग्रामीणों की समस्या का हल करे। ंग्रामवासी सोनू शर्मा ने कहा कि यह समस्या ग्रामीणों के लिए बहुत बड़ी समस्या है। इस पर ग्राम पंचायत को विचार करना चाहिए। वरना समस्त ग्रामवासी इस समस्या को लेकर आंदोलन करेंगे।<br /><br />यह समस्या कई दिनों से बनी हुई है। फिर भी पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं है। यह बहुत शर्म की बात है। <br /><strong>-बाबूलाल मीणा, ग्रामवासी</strong><br /><br />इस रास्ते से ग्रामीणों का रोजाना का आना-जाना है। कीचड़ होने के कारण उन्हें हादसों का काफी खतरा है। इस मांग पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो। <strong>-वहीद पठान, समाजसेवी </strong> <br /><br />ग्राम पंचायत में विकास कार्य का बजट पास नहीं होने के कारण कार्य प्रगति पर नहीं है। जल्द से जल्द समस्या को दूर करने का प्रयास करेंगे। <br /><strong>-मुरली बाई मेघवाल, सरपंच </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 17:48:30 +0530</pubDate>
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                <title>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क : बब्बर शेर, टाइगर जैसे बड़े वन्यजीव नहीं होने से पर्यटकों का मोह हुआ भंग</title>
                                    <description><![CDATA[ देश-विदेश के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क अपनी चमक खोता जा रहा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला राजस्थान का सबसे बड़ा पार्क अब वीरान सा नजर आने लगा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-biological-park--tourists-disillusioned-due-to-lack-of-big-wildlife-like-babbar-lion--tiger/article-12697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kota-3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  देश-विदेश के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क अपनी चमक खोता जा रहा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला राजस्थान का सबसे बड़ा पार्क अब वीरान सा नजर आने लगा है। जहां कद्रदानों की महफिलें सजा करती थी वहां आज सन्नाटा पसरा है। जिम्मेदारों की अनदेखी, सैलानियों की बेरुखी बन गई। जिसका असर, राजस्व में भारी गिरावट के रूप देखने को मिला। नतीजन, पांच महीने में ही कमाई के सारे रिकॉर्ड अर्श से फर्श पर पहुंच गए। दरअसल, 143 हैक्टेयर में फैला कोटा बायोलॉजिकल पार्क 1 जनवरी 2022 से शहरवासियों के लिए खोला गया था। पहले ही दिन हजारों पयर्टक पार्क का दीदार करने पहुंचे थे। जिनसे लाखों का राजस्व प्राप्त हुआ। कमाई का यह सिलसिला पूरे माह बदस्तूर जारी रहा। जनवरी माह में बायोलॉजिकल पार्क देखने के लिए 20 हजार 682 दर्शक पहुंचे थे, जिनसे 10 लाख रुपए की कमाई हुई थी। बजट के अभाव में यहां र्प्याप्त सुविधाएं नहीं होने से सैलानियों का रूझान महीने दर महीने कम होता गया, जिससे बायोलॉजिकल पार्क को होने वाली आय में भारी गिरावट दर्ज होती गई। हालात यह हो गए, मई में 1801 पयर्टक ही यहां घूमने आए जिनसे 81 हजार 980 राजस्व ही प्राप्त हो सका। पांच महीने में ही राजस्व लाखों से हजारों पर पहुंच गया। <br /><br /><strong>मौसम सुहावना तो पांच हजार का हुआ इजाफा</strong> <br />बायोलॉजिकल पार्क के लिए मई का महीना थोड़ा राहतभरा रहा। अप्रेल के मुकाबले इस माह में 78 पर्यटक ज्यादा आए। वहीं, कमाई के आंकड़े में भी 5 हजार 320 रुपए की बढ़ोतरी हुई। दरअसल, इस माह के कुछ दिनों तक मौसम सुहावना बना रहा। जिससे पर्यटकों के कदम बायोलॉजिकल पार्क की ओर बढ़े। लोग परिवार के संग यहां घूमने आए। मई माह में 81 हजार 980 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। <br /><br /><strong>अप्रैल में निचले पायदान पर पहुंचा कमाई का आंकड़ा</strong><br />143 हैक्टेयर में फैला प्रदेश का सबसे बड़े अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में कैफेटेरिया, वन्यजीवों की कमी सहित अन्य सुविधाओं के अभाव से पर्यटकों का रूझान कम होता गया। नतीजन, पांच माह के सफर में बायोलॉजिकल पार्क को अप्रेल में सबसे कम राजस्व मिला। इन 30 दिनों में यहां कुल 1 हजार 723 पर्यटक ही पहुंचे, जिनसे 76 हजार 660 रुपए की ही कमाई हो सकी। यह अब तक का सबसे कम राजस्व है।<br /><br /><strong>31 दिन में हुई थी 10 लाख की कमाई</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी माह में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त हुआ हुआ था। पार्क ने 31 दिनों में ही 10 लाख की कमाई की थी। इस माह कुल 20 हजार 682 पर्यटक घूमने आए थे। <br />शनिवार-रविवार छुटटी के दिन सैलानियों की जबरदस्त भीड़ रही। ऐसे में शाम 4 बजे तक पार्क में प्रवेश दिया गया। माह के अंत तक बायोलॉजिकल पार्क कुल 9 लाख 99 हजार 880 रूपए की कमाई कर चुका था। लेकिन, कमाई का यह आंकड़ा फरवरी से मई तक लगातार गिरता गया। <br /><br /><strong>यूं घटता गया राजस्व</strong><br />माह     पर्यटक    राजस्व<br />जनवरी    20682    9,99,880<br />फरवरी    9839    4,68,260<br />मार्च    4730    2,22,380<br />अप्रेल    1723    76,660<br />मई    1801    81,980<br /><br /><strong>पर्यटकों को अखर रहा टिकट का पैसा</strong> <br />वर्तमान में बायोलॉजिकल पार्क में कुल 64 वन्यजीव हैं, जिनमें 10 मांसाहारी और 54 शाकाहारी हैं। यहां आने वाले पर्यटक 50 रुपए खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बडेÞ वन्यजीवों का दीदार नहीं कर पाने से निराश होकर लौट रहे हैं। वहीं, इलेक्ट्रिकल व्हीकल नहीं होने से लंबे ट्रैक पर पैदल घूमना पर्यटकों के लिए मुश्किल हो रहा है। कैफेटेरिया नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी पर्याप्त नहीं है। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है।  <br /><br /><strong>वन्यजीवों व बजट की कमी बनी वजह</strong> <br />बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटकों से होने वाली आय में गिरावट का मुख्य कारण बड़े वन्यजीवों की कमी है। इसके अलावा 25 करोड़ का बजट नहीं मिलना भी एक वजह है। बजट के अभाव में 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य अटके पड़े हैं। पर्याप्त एनक्लोजर नहीं होने से चिड़ियाघर से वन्यजीवों को बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं कर पा रहे। हालांकि, राजस्व के उतार-चढ़ाव में मौसम का भी दखल होता है। गर्मी में पर्यटकों की संख्या कम ही रहती है लेकिन मौसम सुहावना होता है तो यह संख्या बढ़ जाती है। <br /><strong>- डॉ. आलोक गुप्ता, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 14:47:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>वर्ल्ड हेल्थ डे पर विशेष: संसाधनों की कमी के साथ युवा डॉक्टर कर रहे हैं अपनी पारी की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[रिटायरमेंट के नजदीक पहुंचे डॉक्टर कर रहे अगली पारी की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--health--news--special-on-world-health-day--young-doctors-are-starting-their-innings-with-lack-of-resources-doctors-approaching-retirement-are-preparing-for-the-next-shift/article-7546"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/young-doctors.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में मेडिकल के क्षेत्र में जाने के लिए युवाओं में रूचि काफी बढ़ी है। सरकारी सेवा में भी युवा डॉक्टर काफी जोश के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि युवा डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान उन्हें सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी और मरीजों के भार से जूझना पड़ता है, लेकिन इससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है। वहीं रिटायर्ड हो चुके या रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच चुके डॉक्टर इन चुनौतियों को पार कर आज भी पूरी शिद्दत से मरीजों की सेवा में लगे हैं।</p>
<p><br />वर्ल्ड हेल्थ डे के मौके पर ऐसे ही शहर के कुछ युवा और सीनियर डॉक्टर से नवज्योति ने यह जाना कि उनके सामने क्या चुनौतियां पेश आ रही हैं और आगे इन चुनौतियों का कैसे सामना करेंगे। <br /><br />सरकारी हेल्थ सिस्टम ने हमें समाज सेवा करने का सुनहरा मौका दिया है, जहां हम गरीब और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क व अच्छा इलाज दे पाते हैं। साथ ही चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास कायम रखने की हरसंभव कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार अधिक मरीज होने के कारण हमे संसाधनों की कमी का सामना भी करना पड़ता है।<br />-<strong>डॉ. सुचित्रा, गढ़वाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन एसएमएस अस्पताल</strong> <br /><br />मुझे गवर्नमेंट सर्विस ज्वाइन करके अच्छा लग रहा है। सरकारी क्षेत्र में अपने कौशल को दिखाने का पूरा अवसर मिलता है। हां कुछ दिक्कतें जरूर हैं, जिनमें ओपीडी में बहुत व्यस्त होने के कारण कभी-कभी हमें मरीजों की काउंसलिंग के लिए कम समय मिल पाता है।<br />-<strong>डॉ. अंबिका शर्मा, सहायक आचार्य, श्वसन रोग संस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर</strong> <br /><br />आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का अहसास सुखद लगता है। बड़े अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए पेरिफेरल हेल्थ सर्विसेज को और मजबूत करने की जरूरत है। वहीं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करना, मजबूत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी मुख्य पहलू हैं।<br />-<strong>डॉ. योगेश स्वामी, असिस्टेंट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन, एसएमएस अस्पताल</strong> <br /><br />मेरी 40 साल की सर्विस हो चुकी है। इस दौरान मुझे कभी भी सरकारी सेवा से दिक्कतें नहीं हुई। हमेशा मरीजों को भगवान और अस्पताल को मंदिर समझकर सेवा की है। इस पेशे की खासियत है कि सरकारी सेवा से तो हम रिटायर हो जाते हैं, लेकिन मरीजों की सेवा से नहीं होते। मैं अगस्त में रिटायर होने वाला हूं पर आगे भी मरीजों का इलाज इसी तरह करता रहूंगा।<br />-<strong>डॉ. आरके सोलंकी, सीनियर प्रोफेसर एंड यूनिट हैड, मनोचिकित्सा विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज</strong> <br /><br />मैं आज जो कुछ भी हूं वो सब इस सरकारी सेवा और मरीजों के प्यार के कारण ही हूं। मुझे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सभी चुनौतियों को अवसर के तौर पर लिया और आगे बढ़े। वर्तमान समय में मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर रिलेशनशिप जरूरी है। रिटायरमेंट में करीब डेढ़ साल का वक्त है। मेरी कोशिश रहेगी कि इस रिलेशनशिप को कायम रखकर मरीजों की सेवा करूं।<br />-<strong>डॉ. डीएस मीणा, सीनियर प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स, एसएमएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 14:10:28 +0530</pubDate>
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                <title>स्वास्थ्य दिवस पर आइए जानें कैसी है हेल्थ सिस्टम की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी कुल 52 हजार डॉक्टर, सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही सालाना 1.76 करोड़ मरीज ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"> जयपुर। राजस्थान की वर्तमान आबादी तकरीबन 7.25 करोड़ है। इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने का जिम्मा प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 52 हजार डॉक्टरों (राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड) पर है। आदर्श स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभी भी 20 हजार और डॉक्टरों की जरूरत है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि बेहतर हेल्थ मैनजमेंट को प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। राजस्थान में 1538 की आबादी पर एक डॉक्टर है। प्रदेश का बड़ा तबका सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। हालांकि प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा महकमे में तीन हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। यदि पूरे पद भी भर दिए जाएं तब भी बड़ी संख्या में और डॉक्टर चाहिए, क्योंकि सरकार के सात मेडिकल कॉलेज और 2863 अस्पतालों में करीब 16 हजार ही डॉक्टर हैं। इन्होंने बीते साल करीब 9 करोड़ बीमार होकर आने वाले लोगों यानी आबादी से 1.75 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज किया। आंकड़े चिंता में इसलिए डालते हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बने सरकार के सातों मेडिकल कॉलेजों में केवल 3169 ही बड़े डॉक्टर (मेडिकल टीचर्स) हैं। बीते साल इन अस्पतालों में इलाज को 1.76 करोड़ से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें भी सर्जरी के एक्सपर्ट तकरीबन 10 फीसदी ही हैं, जिन्होंने 4.38 लाख ऑपरेशन कर मरीजों को नई जिंदगी दी। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>विश्व स्वास्थ्य दिवस </strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में अभी 1349 मरीजों पर एक डॉक्टर</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>5 साल में WHO के मुताबिक होंगे डॉक्टर</strong></span></p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:773px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>सरकार की मुफ्त इलाज और नीरोगी राजस्थान की मुहिम</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और प्राइवेट अस्पताल की मुफ्त सेवाओं को चिंरजीवी बीमा से 1.33 करोड़ परिवार बीमित हैं। ये 10 लाख तक का इलाज पर 714 करोड़ रुपए बीमा राशि से हुए।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह फ्री कर दिया गया है। अस्पतालों में इस साल 150 से अधिक जांचें हुई, जिनमें 10 हजार तक की मुफ्त जांचें।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> अस्पताल में मौजूदा 969 मुफ्त दवाओं के अतिरिक्त बाहर से महंगी दवा आने का खर्चा भी सरकार उठा रही।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">अब तक 30 जिलों में केन्द्र की मदद से 23 मेडिकल कॉलेज मंजूर।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की जल्द नीति आएगी।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">राइट टू हेल्थ कानून लागू होने जा रहा है।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">कुल बजट का सात फीसदी हेल्थ पर खर्च, एनएचएम के तहत 4358.78 करोड़ रुपए केन्द्र दे रहा।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>बीते साल कितने मरीजों का इलाज हुआ</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41.5px;">
<td style="height:41.5px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41.5px;width:715.3px;"> 1,76,42,822 मरीज ओपीडी में</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">1,31,67,576 मरीज भर्ती हुए</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;"> 4,38,915 ऑपरेशन हुए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>8 राजसैम व सोसायटी मेडिकल कॉलेज में 90 लाख मरीज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#ccffff;color:#993300;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">ओपीडी में 6.45 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">भर्ती हुए 70 लाख</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;">824 डॉक्टरों की जल्द भर्ती कर रहे हैं। जिलों में अस्थायी आधार पर डॉक्टर रखने के आदेश हाल ही में दिए हैं। वहीं एक हजार अधिशेष डॉक्टरों को भी जिन जगह डॉक्टर नहीं है, वहां भेजा जा रहा है।  राजमैस के तहत संचालित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल टीचर्स की अस्थाई भर्ती की रियायत दी है।  अस्पतालों में पूरी तरह से इलाज फ्री कर दिया गया है। चिरंजीवी से प्राइवेट की भी सेवाएं 1.33 करोड़ परिवार ले सकते हैं। ऐसी योजनाएं लाएं है कि हेल्थ पर जनता की जेब अब ढीली नहीं होगी। - <strong>परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान    </strong></p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:703px;" colspan="3"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong>हमारा हेल्थ सिस्टम</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:112.1px;" rowspan="4">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;"><strong>इलाज की क्षमता</strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>मेडिकल कॉलेज में भर्ती की क्षमता 24,517, अन्य सरकारी अस्पतालों में 60 हजार</strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>16 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में</strong></span></p>
<p><strong>01. सात सरकारी मेडिकल कॉलेज , झालावाड़ में सोसायटी द्वारा संचालित,  7 राजसैम से जिलों में संचालित, 1 अलवर में ईएसआई संचालित</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41.5667px;">
<td style="height:41.5667px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></p>
<p><strong>02. 29 जिला,32 सब डिविजनल, 649सीएचसी, 2153 पीएचसी, (13779 सब सेंटर अलग)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>डॉक्टर</strong></span></p>
<p><strong>03. 12500 चिकित्सा विभाग,  3169 मेडिकल कॉलेज टीचर्स,  805 सीनियर रेजीडेंट्स डॉक्टर <br /></strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>रिक्त पद </strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>04. 633 मेडिकल टीचर्स, 2500 डॉक्टर,  30हजार पैरामेडिकल स्टाफ, 66 हजार नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ, 52 हजार आशा सहयोगिनियां</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:left;width:600px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong> नि: शुल्क दवा और जांच</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">4 हजार निशुल्क दवा वितरण केंद्र: 8.58 करोड़ मरीजों को दी मुफ्त दवा, 760 करोड़ रुपए खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 हजार से ज्यादा अस्पताल: 4.4 करोड़ जांचे हुई, 100 से ज्यादा मुफ्त जांच,  150.34 करोड़ खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब मंहगी एमआरआई, सीटी स्कैन,  डायलिसिस सहित सभी फ्री होंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">डॉक्टर की जरूरत जल्द पूरी होने की आस, अभी 4200 डॉक्टर बन रहे है, जल्द 7000 तक मिलने लगेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 साल पहले 8 मेडिकल कॉलेज:  जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, झालावाड़ और जयपुर में आरयूएचएस थे, कुल सीटें 1900।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब नए 7 नए मेडिकल कॉलेज और शुरू: भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, सीकर कुल सीटें 980।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">
<p style="text-align:left;">नए प्रस्तावित कॉलेज: 15 को मंजूरी, 2023 तक शुरू होंगे।</p>
<p style="text-align:left;">तीन जिलों में जंहा और कॉलेज की कवायद: राजसमंद, जालौर, प्रतापगढ़।</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong>     <br />    <br />   <br />    <br />   <br />    <br />    <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 10:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>ऑडियो-गाइड शुरू नहीं करने पर फर्म को किया ब्लैकलिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों के अवलोकनार्थ इन्हें पुन: खोलने के बाद ऑडियो गाइड की सुविधा शुरू नहीं की गई थी। करीब डेढ़ साल से ये सुविधा बंद थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/firm-blacklisted-for-not-starting-audio-guide--on-october-16--2021--dainik-navjyoti-had-published-a-news-titled-audio-guide-closed-in-all-the-forts-and-palaces-of-the-city-for-one-and-a-half-years-due-to-the-lack-of-audio-guide-facility-for-tourists/article-4613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/71.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के हवामहल स्मारक, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में पर्यटकों को ऑडियो गाइड की सुविधा देने वाली फर्म को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इससे पहले विभाग ने इस सुविधा को शुरू करने के लिए संबंधित फर्म को कई बार पत्र लिखे, लेकिन इसके बावजूद ये व्यवस्था शुरू नहीं होने पर इसका टेंडर खत्म कर दिया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब ये निजी फर्म तीन साल तक विभाग की किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेगी। पर्यटकों को ऑडियो गाइड की सुविधा नहीं मिलने पर दैनिक नवज्योति ने 16 अक्टूबर, 2021 को ‘शहर के सभी किले-महलों में डेढ़ साल से बंद ऑडियो-गाइड’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अब विभाग ने संबंधित प्राइवेट फर्म को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है।  गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण मार्च, 2019 में लॉकडाउन के चलते स्मारकों को ऐहतियातन बंद कर दिया गया था। लेकिन इस बाद पर्यटकों के अवलोकनार्थ इन्हें पुन: खोलने के बाद ऑडियो गाइड की सुविधा शुरू नहीं की गई थी। करीब डेढ़ साल से ये सुविधा बंद थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/firm-blacklisted-for-not-starting-audio-guide--on-october-16--2021--dainik-navjyoti-had-published-a-news-titled-audio-guide-closed-in-all-the-forts-and-palaces-of-the-city-for-one-and-a-half-years-due-to-the-lack-of-audio-guide-facility-for-tourists/article-4613</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/firm-blacklisted-for-not-starting-audio-guide--on-october-16--2021--dainik-navjyoti-had-published-a-news-titled-audio-guide-closed-in-all-the-forts-and-palaces-of-the-city-for-one-and-a-half-years-due-to-the-lack-of-audio-guide-facility-for-tourists/article-4613</guid>
                <pubDate>Fri, 18 Feb 2022 16:26:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मेंटीनेंस के अभाव में खड़ी रोडवेज की 391 बसें</title>
                                    <description><![CDATA[रोडवेज और जेसीटीएसएल को हो रहा राजस्व का नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-391-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82/article-2177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/roadways.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राजस्थान रोडवेज प्रशासन की अनदेखी के चलते करीब 391 बसें और जेसीटीएसएल की 26 बसें मेंटीनेंस के अभाव में डिपो व सेंट्रल वर्कशॉप में खड़ी हंै। इससे यात्रियों को सुविधा नहीं मिल पा रही, वहीं रोडवेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।  रोडवेज के पास कुल 2844 बसें हैं, इनमें से 2356 ही संचालित हो रही हैं। 320 बसें प्रदेश के डिपो में और 71 बसें सेंट्रल वर्कशॉप में मेंटीनेंस के अभाव में खड़ी हैं। वहीं करीब 758 अनुबंधित बसों में से केवल 745 ही संचालित हो रही हैं। इन बसों का मेंटीनेंस नहीं होने के चलते 3623 शेड्यूल में से केवल 2983 ही संचालित हो रही है। वहीं जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड प्रशासन की अनदेखी के चलते भी 26 बसे मेंटीनेंस और तीन बसें परिचालक की कमी के अभाव में टोडी, विद्याधर नगर और बगराना डिपो में खड़ी हैं। वहीं करीब 25-30 बसें प्रतिदिन रास्ते में ब्रेकडाउन होती है। <br /> <strong><br /> राजस्थान रोडवेज</strong><br /> प्रदेश में डिपो    52 <br /> प्रतिदिन यात्री    6.50 लाख<br /> प्रतिदिन राजस्व     करीब 4.50 करोड़ रुपए<br /> प्रतिदिन किलोमीटर    11.50 लाख<br /> प्रतिदिन शेड्यूल    2983 (संचालित)</p>
<p><br /> <strong>जेसीटीएसएल</strong><br /> डिपो    शेड्यूल    बसें संचालित    डिपो में खड़ी<br /> विद्याधरनगर    104    92    12<br /> बगराना    50    47    3<br /> टोडी    101    87    11    (3 परिचालक की कमी से)<br /> <br /> <strong>आमजन को नहीं मिल रही सुविधा</strong><br /> रोडवेज प्रशासन की अनदेखी के चलते आमजन को सरकारी परिवहन की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। जबकि सरकार आमजन के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। रोडवेज प्रशासन इन बसों का मेंटीनेंस कर सड़क पर चलाए तो आमजन को राहत मिले और रोडवेज को राजस्व। जेसीटीएसएल की बसों में प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं, इनसे 21 लाख की आय होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 12:25:01 +0530</pubDate>
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