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                <title>विवेकानंद सर्किल पर साफ-सफाई व सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ लाखों रुपए की लागत से लगाई लाइटें  अभी तक नहीं हुई रोशन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-cleanliness-and-security-at-vivekananda-circle/article-142477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)25.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। हाल ही में बपावरकलां ग्राम पंचायत द्वारा लगभग 25 लाख रुपए की लागत से निर्मित विवेकानंद सर्किल की देखरेख को लेकर लापरवाही सामने आ रही है। सर्किल पर स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के आसपास न तो नियमित साफ-सफाई की जा रही है और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि 25 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित की गई और 26 जनवरी को ग्राम पंचायत द्वारा माल्यार्पण कर कार्यक्रम की औपचारिकता पूरी कर ली गई। लेकिन इसके बाद सर्किल की ओर ध्यान नहीं दिया गया। प्रतिमा को अभी तक स्थायी रूप से सीमेंट से भी सुरक्षित नहीं किया गया है। विवेकानंद सर्किल पर आए दिन बंदरों का उत्पात बना रहता है। जिससे किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही सर्किल परिसर में गंदगी फैली रहने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सर्किल पर लाखों रुपये की लागत से लगाई गई लाइटें अभी तक चालू नहीं की गई हैं, जिससे रात के समय अंधेरा रहता है और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विवेकानंद सर्किल पर शीघ्र साफ-सफाई, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ताकि सार्वजनिक धन से बने इस सर्किल का उद्देश्य सार्थक हो सके।</p>
<p>निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और ठेकेदार द्वारा कार्य का समर्पण ग्राम पंचायत को नहीं किया गया है। कार्य पूर्ण होने के बाद आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी।<br /><strong>-मुरलीधर वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:39:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विद्युत विभाग की अनदेखी से खतरे की स्थिति, भण्डेड़ा फीडर की 11 केवी लाइन पर नहीं हुआ रखरखाव </title>
                                    <description><![CDATA[बांसी-भण्डेड़ा-सादेड़ा मार्ग पर लगे पोल छोटे होने से तार नीचे झूल रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/negligence-by-the-electricity-department-creates-a-dangerous-situation--the-11-kv-line-of-the-bhandera-feeder-has-not-been-maintained/article-131485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। बांसी जीएसएस से जुड़ी भण्डेड़ा फीडर की मुख्य 11 केवी विद्युत लाइन लंबे समय से खतरे का कारण बनी हुई है। सड़क किनारे लगी छोटी साइज के पोलों और बढ़े हुए पेड़-पौधों के कारण लाइन बार-बार टूटकर गिर जाती है। मंगलवार शाम को भी तार टूटने से बिजली सप्लाई बाधित रही। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन विभाग की लापरवाही कभी भी बड़ा हादसा कर सकती है। किसानों का कहना है कि खेतों में बिजली सप्लाई के समय लाइन टूटने से फसलों में आग लग चुकी है। बार-बार फॉल्ट आने से सिंचाई कार्य बाधित हो रहे हैं।</p>
<p>पलेवा और फसल सिंचाई के दौरान बिजली गुल हो जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। विभाग द्वारा समय रहते लाइन की मरम्मत और पोल बदलने का कार्य नहीं किया जा रहा है।बांसी-भण्डेड़ा-सादेड़ा मार्ग पर लगे पोल छोटे होने से तार नीचे झूल रहे हैं, जिन पर पक्षियों के बैठने से अक्सर शॉर्ट सर्किट होता है। कई बार खेतों और सड़कों के किनारे आग लग चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के मौसम में तेज हवाओं के कारण आग गांव तक पहुंचने लगी थी, जिससे बड़ी मुश्किल से नियंत्रण पाया गया। किसानों ने मांग की है कि विभाग शीघ्र ही क्षतिग्रस्त पांच पोलों और मुख्य लाइन को बदलकर नियमित रखरखाव करे, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong><br />मैं नया आया हूँ। इस समस्या के समाधान के लिए लाइन को दिखवाया जाएगा। अगर समस्या अधिक होगी तो जल्दी समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- सौरभ गौत्तम, जेईएन, जयपुर विद्युत वितरण निगम ग्रामीण, देई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 15:49:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ढाई सौ साल पुराने दाऊ मंदिर को मरम्मत की दरकार, दाऊ जयंती का बजट अलग से मिले तो हो भव्य आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के सूरजपोल स्थित दाऊ महाराज का मंदिर को मरम्मत की दरकार है। मंदिर का रख रखाव नहीं होने से मंदिर जीण शीर्ण अवस्था में हो रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-250-year-old-dau-temple-needs-repairs/article-118983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer153.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सूरजपोल स्थित दाऊ महाराज का मंदिर को मरम्मत की दरकार है। मंदिर का रख रखाव नहीं होने से मंदिर जीण शीर्ण अवस्था में हो रहा है। यह मंदिर वल्लभ कुल के पुष्टिमर्गीय संप्रदाय में आता है। मंदिर के पुजारी चेतन शर्मा ने बताया कि करीब मंदिर ढाई सौ साल पुराना है और आजादी के समय से ही देवस्थान विभाग के अधीन है। दाऊ महाराज को धाकड़ समाज का आराध्य देव माना है साथ ही इनको बलराम, हलधर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के  दाऊ महाराज जो भी भोग लगाया जाता है वो सब मंदिर में ही बनाया जाता है बाहर से कोई प्रसाद नहीं मंगवाया जाता है।  साथ ही मंदिर में चार बार सुबह आरती व शाम को तीन बार आरती होती है। साथ ही मंदिर में प्रतिदिन सुबह बालभोग,  दस बजे करीब राजभोग, चार बजे करीब संध्या भोग, करीब छह शयन भोग लगाया जाता है। मंदिर मरम्मत और सफाई हो जाए तो श्रद्धालुओं परेशानी नहीं होगी। </p>
<p><strong>बरामदा हो रहा जर्जर</strong><br />मंदिर का बरामदा जीर्ण - शीर्ण अवस्था में होने से बारिश में परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही मंदिर की छत पर झाड़िया उग जाने के कारण  बारिश का पानी निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>मंदिर में सफाई कर्मचारी व गार्ड की की जरूरत</strong><br />मंदिर के पुजारी ने बताया कि देवस्थान विभाग को कई बार अवगत कराया कि मंदिर में सुबह व शाम को सफाई कर्मचारी व रात के समय मंदिर की सुरक्षा के लिए एक गार्ड आवश्यकता है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>चहुंओर उग रही झाडियां</strong><br />मंदिर का बरामद जीर्ण शीर्ण अवस्था में साथ ही बरामदे के चहुंओर घास फूस उग गई  जिसे छत से पानी निकलने में समस्या आ रही है साथ ही बरामदे में बारिश की वजह से  सीलन हो रही है और बारिश के समय बरामदे में से पानी टपकता है जिसे दर्शन करने व आरती के समय श्रद्वालुओं को दिक्कत होती है।मंदिर में लाइट जाने के बाद रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं है जिसे कई बार आरती के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही श्रद्वालुओं को दिक्कत होती है।</p>
<p><strong>रोड बना जब निगम ने नालिया बंद कर दी</strong><br />निगम ने जब रोड बनाया जब नालिया नीचे रह गई व रोड ऊपर ऊपर निकाला गया जिसे मंदिर का पानी निकलने में परेशान का सामना करना पड़ता है बारिश के समय में पानी मंदिर में भरा रहता है। जिसे मंदिर के सामने कीचड़ हो जाता है और साथ ही प्रतिदिन मंदिर के सामने की सफाई भी नहीं होती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />देवस्थान विभाग के जो मंदिर माताजी के है उनको नवरात्र उत्सव का अलग से बजट मिलता है, राममंदिरों में रामनवमी उत्सव व गणेश चतुर्थी पर अलग से बजट मिलता है पर दाऊ जयंती का अलग से बजट नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- चेतना शर्मा, पुजारी </strong></p>
<p>मंदिर के सामने सफाई नहीं होने के कारण गंदगी पड़ी रहती है जिसे हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- कौशल्या, श्रद्वालु </strong></p>
<p>मंदिर में लाइट के लिए इनवर्टर व पीने के पानी की व्यवस्था देवस्थान विभाग को करनी  चाहिए जिसे श्रद्वालु ओ पानी के लिए इधर उधर नहीं जाना पड़े।<br /><strong>- प्रशांत कुमार, श्रद्वालु </strong></p>
<p>दाऊ जयंती के बजट की डिमांड भेजवा देंगे। और मंदिर का बरामद यदि जीर्ण - शीर्ण है तो उसको भी ठीक करा देंगे। <br /><strong>- कृष्णा कुमार खडेÞलवाल असिस्टेड  कमिश्नर देवस्थान विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 16:20:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिना कंट्रोल चल रही लिफ्ट, आए दिन हो रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[बहुमंजिला इमारतों में बिल्डर व सोसायटी संचालक वसूल रहे शुल्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lifts-are-running-without-control--accidents-are-happening-every-day/article-110186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही यहां बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ सी आ गई है। इन आवासीय व व्यवसायिक इमारतों में आवागमन  की सुविधा के लिए लिफ्ट तो लगाई जा रही है लेकिन उनमें किसी भी प्रावधान का उपयोग नहीं किया जा रहा। यहां तक कि आमजन से जुड़े सरकारी विभागों तक में आए दिन लिफ्ट बंद व खराब होने की समस्या बनी हुई है। साथ ही कई बार हादसे भी हो चुके है। बहुमंजिला इमारत चाहे आवासीय सोसायटी हो या होटल, हॉस्टल हो या मॉल। यहां तक कि बड़े शिक्षण संस्थानों तक में सीढ़ियों के साथ लिफ्ट लगने लगी है। हर बिल्डर व सोसायटी के अलावा संबंधित व्यवसायिक इमारतों में मालिकों द्वारा ही अपने स्तर पर लिफ्ट लगवाई जा रही है। जिनकी न तो समय पर मेंटेनेंस हो रही है और न ही उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। जिससे आए दिन उन लिफ्ट के कभी खराब होने तो कभी लोगों के उनमें फंसने के मामले सामने आ रहे है। इतना ही नहीं सोसायटी में रहने वाले फ्लैट मालिकों से बिल्डर व सोसायटी संचालक मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने हजारों रुपए शुल्क भी वसूल रहे है। लेकिन लिफ्ट की मेंटेनेंस नियमित नहीं हो रही है। शहर में 10 से 18 मंजिला तक की इमारतें हैं जिनमें बिना लिफ्ट के ऊपरी मंजिल तक पहुंचना भी मुुश्किल है। </p>
<p><strong>निगम की दोनों लिफ्ट बंद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की दोनों लिफ्ट पिछले कई दिन से बंद है। जिनकी सप्लाई ही बंद की हुई है। उत्तर की लिफ्ट मेंटेनेंस के लिए तो दक्षिण की बदहाल होने से बंद की हुई है। जिससे तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लोगों को सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ रहा है।  निगम कार्यालय में लिफ्ट प्रशासनिक भवन के साथ ही वर्ष 2012 में लगी थी। कोटा विकास प्राधिकरण में नव विस्तारित भवन में लिफ्ट लगी हुई है। इसे लगे हुए अभी 4 साल ही हुए हैं। जुलाई 2021 में इस भवन का उद्घाटन हुआ था। उसी समय यहां लिफ्ट लगाई गई थी। जिससे वह सही हालत में है। </p>
<p><strong>पहले हो चुके कई हादसे</strong><br />गत वर्ष जुलाई में आर.के. पुरम् क्षेत्र स्थित बहुमंजिला इमारत में लिफ्ट के अचानक बंद होने से एक महिला फंस गई थी। जिसे निकालने के दौरान वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई थी। जिससे ुसकी मौत हो गई थी। उसी तरह से शहर में कई अन्य घटनाएं हो चुकी है। एक -दो जगह तो ल्फिट खराब होने से लोगों के फंसने तक के मामले हो चुके है।  हालांकि पूर्व में हो चुके हादसों को देखते हुए अब अधिकतर जगह पर पारदर्शी लिफ्ट लगने लगी है। जिससे उसके बंद या खराब होने पर बाहर से ही लोगों के उसमें फ़ंसे होने का पता चल सके। जानकारों के अनुसार सरकारी विभागों में लिफ्ट खराब होने का प्रमुख कारण वहां गार्ड नहीं होना है। जिससे दिनभर लोग अपनी मर्जी से बटन  दबाकर उसका उपयोग करते है। साथ ही पब्लिक लिफ्ट का भी सर्विस लिफ्ट की तरह भारी सामान ले जाने में करते हैं। </p>
<p><strong>प्रावधान व मेंटेनेंस जरूरी</strong><br />शॉपिंग सेंटर निवासी रोहित सिंह राजावत ने बताया कि जिस तरह से मल्टी स्टोरी में फायर सिस्टम का प्रावधान किया हुआ है। उसी तरह से लिफ्ट लगाने के लिए भी नियम व प्रावधान होने चाहिए।  जिससे  वहां जिम्मेदारी तय हो सके और उस मल्टी में रहने वालों के जीवन से खिलवाड़ नहीं हो सके। झालावाड़ रोड स्थित एक मल्टी स्टोरी में रहने वाले अशोक नुवाल का कहना है कि मल्टी में जिस कम्पनी की लिफ्ट है उसी कम्पनी को इसके मेंटेनेंस का ठेका दिया हुआ है। कम्पनी द्वारा समय-समय पर इसकी मेंटेनेंस की जा रही है। जिससे यह पिछले कई सालों से सही काम कर रही है। </p>
<p><strong>सरकारी एजेंसी की नहीं मॉनिटरिंग</strong><br />केडीए के वुरष्ठ नगर नियोजक का कहना हैकि मल्टी स्टोरी में लिफ्ट लगाने के संबंध में नेशनल बिल्डिंग कोड(एनबीसी) में प्रावधान किया हुआ है। उसमें उसकी गुणवत्ता का भी उल्लेख है। लेकिन बिल्डिंग में लिफ्ट लगने के बाद सरकारी एजेनसी द्वारा उसकी मॉनिटरिंग का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित सोसायटी व बिल्डर और सरकारी कार्यालयों में संबंधित विभागों की ही जिम्मेदारी है। कि वह समय-समय पर उसकी मेंटेनेंस करवाएं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की लिफ्ट को मेंटेनेंस के लिए बंद किया हुआ है। निगम की लिफ्ट की शुरुआत में तो कम्पनी द्वारा ही मेंटेनेंस की जाती थी। बाद में उसका पैनल चैंज कर अब निजी कम्पनी व संवेदक को उसका ठेका दिया  हुआ है। कम्पनी इंजीनियर व निगम इंजीनियर हर सप्ताह उसकी जांच करते है। लिफ्ट पुरानी होने से उसकी मेंटेनेंस के लिए सप्लाई बंद की हुई है। उत्तर की लिफ्ट तो जल्दी ठीक हो जाएगी। जबकि दक्षिण निगम में नई व आधुनिक तकनीक वाली लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। <br /><strong>- सचिन यादव, अधिशाषी अभियंता(विद्युत) नगर निगम कोटा उत्तर/दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 14:40:51 +0530</pubDate>
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                <title>निगम की दोनों लिफ्ट बंद, तीसरी मंजिल तक सीढ़ियों का सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[लिफ्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं अब तो ए ब्लॉक में लगी लिफ्ट को भी बंद कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/both-lifts-of-the-corporation-are-shut-down--have-to-use-stairs-to-reach-the-third-floor/article-109780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम के राजीव गांधी प्रशासनिक भवन की दोनों लिफ्ट बंद हो गई है। जिससे अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही निगम आने वाले लोगों को भी तीसरी मंजिल तक सीढ़ियों से ही जाना पड़ रहा है। निगम कार्यालय के बी व सी ब्लॉक में कोटा उत्तर निगम की और ए ब्लॉक में कोटा दक्षिण निगम की लिफ्ट लगी हुई है। बी ब्लॉक की लिफ्ट का एक हिस्सा पिछले कई दिन से बंद  था। लिफ्ट की बांयी तरफ का एक हिस्सा कई दिन से बंद व खराब पड़ा हुआ है। जिससे एक तरफ के हिस्से से ही लोगों को आना-जाना पड़ रहा था। लेकिन अब इस लिफ्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं अब तो ए ब्लॉक में लगी लिफ्ट को भी बंद कर दिया है। </p>
<p><strong>लिफ्ट अंडर मेंटेनेंस</strong><br />नगर निगम अधिकारियों की ओर से लिफ्ट को बंद करने के बाद उस पर पर्ची चस्पा कर दी है। जिस पर लिखा है लिफ्ट अंडर मेंटेनेंस। साथ ही उनका कनेक्शन ही बंद कर दिया है। जिससे किसी तरह का कोई हादसा न हो। हालांकि कोटा उत्तर निगम की लिफ्ट पूर्व में भी मेंटेनेंस के लिए कई दिन तक बंद रही थी। </p>
<p><strong>तीसरी मंजिल तक सीढ़ियां ही सहारा</strong><br />नगर निगम कार्यालय तीन मंजिला है। तीसरी मंजिल पर भी दोनों निगमों के कई कार्यालय है। जिससे यहां आने वाले लोगों को वहां दिन में कई बार आना-जाना पड़ता है। साथ ही अधिकारी व कर्मचारियों को भी बार-बार आने-जाने के लिए अब सीढ़ियों का ही उपयोग करना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या महिलाओं, बुजुर्ग व दिव्यांगजनों को आ रही है।<br /> <br /><strong>पानी के कैम्पर व भारी सामान भी लिफ्ट से</strong><br />नगर निगम सूत्रों के अनुसार लिफ्ट लोगों के आने-जाने के लिए है। लेकिन हालत यह है कि यहां आने वाले पानी के कैम्पर से लेकर निर्माण कार्य के दौरान निर्माण सामग्री व सीमेंट के कट्टे तक लिफ्ट से लेकर जाए जाते है। जिससे लिफ्ट बार-बार खराब हो रही है।  </p>
<p><strong>मेंटेनेंस के लिए की बंद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर दक्षिण के अधिशाषी अभियंता विद्युत सचिन यादव ने बताया कि कोटा उत्तर की लिफ्ट को मेंटेनेंस के लिए बंद किया है। जिसे दो से तीन दिन में चालू कर दिया जाएगा। जबकि कोटा दक्षिण की लिफ्ट का पेंदा काफी खराब हो चुका है। जिससे उसे भी फिलहाल तो मेंटेनेंस के लिए बंद किया है। लेकिन इस जगह पर नई लिफ्ट लगाने की योजना है। लेकिन जब तक नई लिफ्ट नहीं लगेगी तब तक उसे मेंटेनेंस के बाद चालू कर दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Apr 2025 17:15:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रैफिक गार्डन का स्टीयरिंग फैल, टूट फूट का जाम</title>
                                    <description><![CDATA[गार्डन में आने पर जो स्थिति दिखती है उससे लोग निराश होकर ही लौट रहे है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-steering-of-the-traffic-garden-is-broken--there-is-a-jam-of-breakage/article-109426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सभी प्रमुख क्षेत्रों में छोटे-छोटे पार्कों के साथ ही तीन बड़े उद्यान भी है। जिनमें लोग घूमने व बच्चों को झूले झुलाने के लिए ले जाते है। लेकिन उन पार्कों व उद्यानों की हालत इतनी बदतर हो रही है कि लोगों को वहां जाकर निराश होना पड़ रहा है। ऐसी ही हालत है एक प्रमुख  ट्रैफिक गार्डन की। शहर के तीन बड़े प्रमुख उद्यानों में से एक है ट्रैफिक गार्डन। नए कोटा क्षेत्र में चम्बल गार्डन के पास होने से यहां सामान्य दिनों में ही आस-पास के अलावा दूरदराज से लोग घूमने के लिए आते हैं। जबकि अवकाश के दिन और गर्मी की छुट्टियों में तो गार्डन में काफी भीड़भाड़ रहती है। लोग परिवार समेत यहां घूमने आते है। लेकिन हालत यह हैै कि गार्डन में आने पर जो स्थिति दिखती है उससे लोग निराश होकर ही लौट रहे है।</p>
<p><strong>यह है गार्डन की विशेषता</strong><br />इस गार्डन की विशेषता है कि यहां ट्रैफिक नियम बताने के लिए संकेतक तो लगे हुए ही है। साथ ही पूरी ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में समझाया गया है। साथ ही यहां बच्चों के लिए झूले लगे हुए है। शहर के प्रमुख  भवनों व इमारतों को मॉडल रूप में बताया गया है। जिससे यहां आने वाले लोग उन्हें देख सके। विशालकाय जानवरों को मॉडल रूप में बताया गया है। लेकिन चाहे हवाई अड्डे का मॉडल हो या अस्पताल का। डाकघर का मॉडल हो या स्कूल का। सभी की हालत बदरंग होने से बेहाल हो रही है। बरसों से इन पर न तो रंग रोगन किया गया है और न ही इनकी सार संभाल हुई है। इसी तरह से लोगों ने ही जानवरों के मॉडल को भी बदरंग किया हुआ है। जबकि इनकी सुरक्षा के लिए तो जालियां लगाई हुई है।</p>
<p><strong>अधिकतर झूले टूटे हुए</strong><br />ट्रैफिक गार्डन में परिवार समेत घूमने आने वालों में बच्चों के लिए सबसे अधिक आकर्षण रहते हैं झूले। लेकिन इस गार्डन के अधिकतर झूले ही टूटे हुए हैं। फिर चाहे फिसल पट्टी हो या घूमचक्कर वाला झूला। दोनों तरफ वजन वाला झूला हो या अन्य झूले सभी टूटे हुए हैं। जिससे बच्चों के उन पर झूलने में चोट लगने का खतरा बना हुआ है। जिससे लोग उन झृूलों का उपयोग तक नहीं कर पा रहे है। इसी तरह से गार्डन में मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही सबसे पहले ट्रैफिक नितम बताने वाले संतेतक बोर्ड लगे हुए हैं। वे बोर्ड भी बदरंग हो रहे हैं। जिससे उन पर लिखे नियम तक सही ढंग से स्पष्ट नजर नहीं आ रहे है।</p>
<p><strong>घास बढ़ी हुई, देखभाल तक नहीं हो रही</strong><br />गार्डन में घूमने आने वाले  बुजुर्ग राम बिरला का कहना है कि वे रोजाना यहां आते है। लेकिन गार्डन में घस बढ़ी हुई है। यहां सफाई व गार्डन के लिए लेबर तो लगना बताते हैं लेकिन काम नजर नहीं आता। लेबर की देखभाल व गार्डन की सार संभाल तक नहीं हो रही है। जिससे यह गार्डन सुंदर होने के बाद भी बदहाली का शिकार हो रहा है। दादाबाड़ी निवासी महेश नागर का कहना है कि गार्डन में पहले हर साल पुष्प प्रदर्शनी लगती थी। उस समय यहां की कम से कम साल में एक बार तो सही ढंग से सार संभाल हो जाती थी। इमारतों के मॉडल की रंगाई पुताई व घास की कटाई भी हो जाती थी। लेकिन अब काफी समय से ऐसा नहीं हुआ है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>300 करोड़ से सुधरेगी गार्डनों की दशा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के एक्सईएन ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि गार्डन की घास कटाई के लिए तो लेबर लगी हुई है। वहीं जहां तक झूले टूटे होने व मॉडल के बदरंग होने का सवाल है। इसे सही करवाने की कवायद चल रही है। ट्रैफिक गार्डन के साथ ही चम्बल गार्डन व एक अन्य गार्डन की 300 करोड़ से दशा सुधारी जाएगी। इसका विस्तृत प्लान बनाकर काम किया जा रहा है। यह काम शीघ्र ही शुरु हो जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 16:48:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर की बूढ़ी सड़कें दे रही जख्म, गड्ढ़ों से गुजरने पर वाहनों के मेंटिनेंस के साथ बढ़ रहा हड्डियों में दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[शहरवासियों की शिकायत पर दैनिक नवज्योति ने गुरुवार को शहर की प्रमुख सड़कों का अवलोकन किया तो हालत बद से बदतर मिले। पेश है रिपोर्ट के प्रमुख अंश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-old-roads-of-the-city-are-causing-injuries/article-104271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की प्रमुख सड़कें उधड़ी पड़ी है, जो न केवल दुर्घटना का खतरा बन रही बल्कि वाहन चालकों को गहरे जख्म भी दे रहे। छावनी फ्लाईओवर हो या शहर की अंदरुनी सड़कें, सभी छलनी हो रही है। जबकि, इन क्षतिग्रस्त सड़कों से प्रतिदिन लाखों शहरवासियों का आवागमन रहता है। गड्ढ़ों से गुजरने के दौरान वाहनों का मेंटिनेंस तो बढ़ ही रहा है, साथ ही गड्ढ़ों से लगने वाले झटकों से चालकों की हड्डियों में दर्द बढ़ा रहा है। इसके बावजूद नगर विकास प्राधिकरण व नगर निगम के अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। जबकि, जिम्मेदार अधिकारियों का भी इन्हीं मार्गों से गुजरना होता है। लेकिन, फर्क इतना है कि यह कार से चलते हैं, जिससे इन्हें न तो गड्ढ़े दिखाई देते और न ही जनता की तकलीफों का अहसास होता। शहर के प्रबुद्धजनों का तर्क है, यदि, शासन-प्रशासन  के अधिकारी दोपहिया वाहनों से शहर की सड़कों से गुजरे तो उन्हें लोगों का दर्द महसूस होगा। हालात यह है कि जब कोई वीआईपी मूवमेंट होता है तो पूरा प्रशासन सड़कों के गड्ढ़े ढूंढ़-ढूंढ़कर भरने में जुट जाता हैं और जब आमजन समस्या बताते हैं तो उसे अनसुना कर दिया जाता है। शहरवासियों की शिकायत पर दैनिक नवज्योति ने गुरुवार को शहर की प्रमुख सड़कों का अवलोकन किया तो हालत बद से बदतर मिले। पेश है रिपोर्ट के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>छावनी फ्लाईओवर - दोपहर 1.57 बजे</strong><br /><strong>जानलेवा गड्ढ़े, गिरे तो जान बचना मुश्किल</strong><br />नवज्योति दोपहर 1.57 मिनट पर छावनी फ्लाईओवर पर पहुंची तो एलआईसी बिल्डिंग के सामने ओवर ब्रिज पर कई जगह गहरे जानलेवा गड्ढ़े हो रहे हैं।  जिस पर से गुजरने के दौरान किसी दुपहिया वाहन चालक अनबैलेंस होकर गिर गया तो उसकी जान बचना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि, यहां से बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन स्पीड से गुजरते हैं। केडीए अधिकारियों की घोर लापरवाही से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>जीएमए प्लाजा से सब्जीमंडी रोड - दोपहर 2.59 बजे  </strong><br />जीएम प्लाजा से सब्जीमंडी जाने वाला रोड पर करीब 8 से 10 फीट लंबा और 6 फीट चौड़ा गड्ढ़ा हो रहा है। जिसकी वजह से ट्रैफिक जाम रहता है। वहीं, गड्ढ़ों के कारण झटके लगने से हड्डियों में  दर्द बढ़ रहा है। इलेक्ट्रोनिक व्यापारी श्याम बिहारी, रघुवीर सिंह का कहना था कि यह इलाका कोटा उत्तर नगर निगम में आता है। पार्षद से लेकर निगम अधिकारियों तक से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करवाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। आए दिन दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के  दिनों में रहती है। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>नयापुरा चौराहा दोपहर - 2.33 बजे</strong><br /><strong>4 दिन बाद ही फिर उधड़ा पेचवर्क</strong><br />नयापुरा चौराहे पर करीब सात से आठ फीट चौड़ा गड्ढ़ा हो रहा है। जिसकी मरम्मत केडीए ने हाल ही 9 फरवरी को करवाई थी। लेकिन, यह पेचवर्क मात्र 4 दिन ही टिक सका। सड़क फिर से जख्मी हो गई। जबकि, चंद दिन पहले शहर में वीआईपी मूवमेंट होने पर नगर विकास प्राधिकरण ने सड़कों के गड्ढ़े भरवाए थे। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहनों का गुजरना होता है। सड़क पर बिखरी गिट्टियां दुर्घटना का कारण बन रही है। व्यापारियों का कहना था, गड्ढ़े व गिट्टियों के कारण आए दिन दुपहिया वाहन चालक फिसकर चोटिल होते हैं। कुछ दिन पहले ही स्कूटर सवार गिरकर चोटिल हो गया था। </p>
<p><strong>मोहन टाकिज रोड दोपहर - 3.16 मिनट </strong><br /><strong>उबड़-खाबड़ रास्ते हड्डियों का बढ़ा रही दर्द</strong><br />सब्जीमंडी स्थित मोहन टाकिज रोड पर कपड़ा व्यापारी केशव दत्ता, राकेश कुमार, जावेद भाई व सलीम अंसारी ने बताया कि इस क्षेत्र में कपड़ा, इलेक्ट्रोनिक व सब्जीमंडी होने की वजह से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन रहता है। इसके बावजूद क्षेत्र की सड़कें बद से बदतर है।  रोड पूरी तरह से उधड़ा हुआ है, उबड़-खाबड़  सड़क से दुपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। इलाके की सड़कें बरसों से क्षतिग्रस्त है। वार्ड पार्षद से सड़क मरम्मत करवाने को कई बार कह चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। निगम में भी लिखित शिकायत कर चुके हैं, फिर भी सड़कें दुरुस्त नहीं करवाई जा रही। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नयापुरा चौराहे पर हो रहे गड्ढ़े को पेचवर्क कर भरा गया था। लेकिन, निजी बिजली कम्पनी द्वारा विद्युत फॉल्ट ठीक करने को लेकर सड़क खोदी गई है, जो दो-तीन दिनों में फिर से मरम्मत करवा दी जाएगी। <br /><strong>- रविंद्र माथुर, निदेशक अभियांत्रिकी केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2025 15:00:28 +0530</pubDate>
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                <title>ये डिवाइडर सड़क है या पार्किंग स्थल?</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ो की राशि खर्च होने के बाद भी लोग फोरलेन युक्त डिवाइडर सड़क से वंचित रहेगें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/is-this-a-divider-road-or-a-parking-space/article-103492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer27.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी में इन दिनों रामगंजमंडी से कुदायला पारसा माताजी चौराहे तक डिवाडर युक्त सड़क बनाई जा रही है,किन्तु सड़क का निर्माण ही इस तरह से किया है कि पूरी तरह से पार्किंग स्थल बनी हुई है। अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की निष्क्रियता से ऐसा हो रहा है। इसकी बानगी हाल ही में नारायण टॉकीज चौराहे पर डिवाइडर सड़क की बनाई गई ,एक साइड सड़क पर देखने को मिली। जहां सड़क के बीच मे ही पेयजल योजना के नल कनेक्शन छोड़ने के लिए वाल्व लगे है इन्हें सड़क से दूर नहीं किया, सड़क के बीच में ही ले लिया है। एक निजी मोबाइल कम्पनी की लाइन से कनेक्टेड गड्डा है जो कनेक्शन की देखरेख के लिए छोड़ दिया गया है। सड़क के समीप ही दुकाने बनी हुई है जिनके होर्डिंग व ग्राहकों के वाहन भी इसी रोड़ पर ही  खड़े होंगे। क्योकि वाहन खड़े करने की  जगह नही है, अतिक्रमण नही हटाये गए है। कुल मिलाकर करोड़ो की राशि खर्च होने के बाद भी लोग फोरलेन युक्त डिवाइडर सड़क से वंचित रहेगें।</p>
<p><strong>सड़क पर खड़े है वाहन</strong><br />डिवाइडर फॉर लेन सड़क में जाली होना व साइड रोड होना चाहिए,जिससे छोटे वाहन व बाइक सवार पैदल चल  सके। हाल ही बनाई गई डिवाइडर सड़क में सुकेत रोड़ पर बिल्कुल दुकानों के पास से रोड़ बना दिया गया है,अब यही दुकानदार जिनमे मिस्त्री की दुकानें है वह रोड़ पर ही काम कर रहे है। कुछ दुकानदारों ने सामान रख दिए, कुछ दुकानदारों के सामने ग्राहकों की फोरव्हीलर हमेशा खड़ी रहती है।कुल मिलाकर दोनों ओर 10-10 फिट तो दूकानदारो ने घेर ली। अब शेष सड़क बची है टू लेन सड़क है।आम राहगीरों ने बताया कि इस डिवाइडर सड़क बनने का कोई ओचित्य नही है,रोड तो चौड़े हुए है लेकिन रोड के  पास साइड सड़क व पार्किंग  न बनने से फॉर लेन सड़क वाहनों की पार्किंग नजर आ रही है। डिवाइडर सड़क पर विद्युत पोल सड़क पर आने के मामले में विभाग के सहायक अभियंता कहते है कि पोल हटा दिया जाएगा, जबकि 1 साल से कुदायला से सुकेत तक बने रोड के मामले में भी यही कहा था कि पोल हटा देंगे, विभाग को लिख दिया है जबकि आज भी वहां पोल खड़े है।विभाग सड़क बनाने से पूर्व विद्युत पोल व अन्य व्यवधान आखिर हटाता क्यो नहीं है? ये विद्युत पोल व अन्य कोई सड़क यातायात में बाधक बने सरकारी उपक्रमों को हटने के बाद ही रोड बनाया जाना चाहिए। सड़क बनने के बाद फिर कोई विद्युत पोल व अन्य कोई अवरोधक हटते नही है, जबकि नवनिर्मित सड़क पर विद्युत्त्त पोल व जलदाय विभाग के वाल्व कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते है। क्योकि पानी छोड़ते समय कोई भी वाहन आ सकता है, पानी छोड़ने वाले कर्मचारी दुर्घटना की चपेट में आ सकता है। ऐसे वाल्व बीच सड़क में न रहकर अन्य जगह शिप्ट होना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />हॉल ही में रामगंजमंडी सुकेत सड़क पर बनाए डिवाइडर सड़क का कोई औचित्य नहीं है,आसपास के अतिक्रमण न हटने से दुकानों के सामने रोड बना देने से सभी लोग वाहन खड़ा करेंगे, और पेयजल योजना के वाल्व व मोबाइल कम्पनी की लाइनों को डिवाइडर सड़क पर रखने से आवागमन में बाधा होगी,अतिक्रमण हटाकर साइड सड़क बने तब डिवाइडर सड़क का महत्व है। सरकार के करोड़ो रुपए यूं ही समाप्त हो गए,प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- कमल पारेता संरक्षक लोकल ट्रक यूनियन रामगंजमंडी </strong></p>
<p>यह रोड व्यस्त रोड है और यहाँडिवाइडर सड़क बनाई गई है, किन्तु अतिक्रमण नहीं हटे है, जबकि सड़क से सेंटर से छोड़कर दोनों ओर 50 फिट के अंतराल में नगरपालिका ने पट्टे दिए है, तो सुकेत रोड पर 50 फिट छोड़कर अतिक्रमण हटे तो डिवाइडर सड़क का सार्थकता है।<br /><strong>- श्याम आचार्य ब्लॉक इंटक अध्यक्ष  मजदूर नेता रामगंज मंडी </strong></p>
<p>पानी सप्लाई के ये जो दो बड़े गड्ढे है , वह बन्द हो जाएंगे, और उनमे होल करके वाल्व जारी रहेगा। मोबाइल कम्पनी का जो पोल सड़क पर खड़ा है हटा दिया जाएगा।<br /><strong>- अशोक महावर सहायक अभियंता रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 16:44:27 +0530</pubDate>
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                <title>खबर छपी तो अधिकारियों ने भ्रष्टाचार छिपाने को लगा दिए 2500 नए पौधे </title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2022 से 31 जुलाई 2024 तक कागजों में 8-8 हजार पौधों को पिलाया जा रहा था पानी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/when-the-news-was-published--the-officials-planted-2500-new-plants-to-hide-the-corruption/article-98437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वनमंडल के लखावा प्लांटेशन-8 में पौधों के संधारण के नाम पर हुए भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दैनिक नवज्योति में खबर छपने के बाद वन अधिकारियों की पोल खुली तो उन्होंने अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए गत जुलाई के प्रथम सप्ताह में 2500 नए पौधे लगा दिए। जबकि, अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक केसी मीना के गत 27 मई को हुए निरीक्षण में यहां 150 पौधे भी नहीं मिले थे। ऐसे में उनकी रिपोर्ट पर सितम्बर माह में पी एंड एम गणना दल ने जांच की तो पूरे प्लांटेशन में 2300 पौधे ही मिले। जबकि, इससे पहले तक वन अधिकारी कागजों में 8-8 हजार पौधे बताकर पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई व चौकीदारी के नाम पर लाखों के फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाते रहे। </p>
<p><strong>पौधे लगाए, रिकॉर्ड में नहीं किया चार्ज</strong><br />लखावा प्लांटेशन वर्ष 2021 का है। जिसका प्रथम वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, तब यहां 8000 पौधे लगाए जाने थे। लेकिन, इतने पौधे कभी लगाए ही नहीं गए। लेकिन, वन अधिकारियों ने लाडपुरा रेंजरों से मिलीभगत कर साल-दर-साल 8-8 हजार पौधे कागजों में जीवित बताकर बिल उठाते रहे। गत 24 मई को नवज्योति ने खबर छाप भ्रष्टाचार उजागर किया तो 27 मई को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीणा जयपुर से कोटा पहुंच कर लखावा प्लांटेशन-8 का निरीक्षण किया। इस दौरान मौके पर 150 पौधे भी नहीं मिले। जब मामले की जांच खुली तो कोटा वनमंडल के अधिकारियों ने अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए जुलाई के प्रथम सप्ताह में 2500 पौधे नए सिरे से लगवाकर बीजारोपण करवाया। जिसे रिकॉर्ड में चार्ज नहीं किया गया। </p>
<p><strong>नवज्योति की खबर पर लगी सत्यता की मुहर</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने अपनी जांच रिपोर्ट में दैनिक नवज्योति में गत 24 मई को प्रकाशित न पौधे न चौकीदार, किसकी सुरक्षा में खर्च किए लाखों रूपए...शीर्षक से छपी खबर के हर एक तथ्य को सही बताया। उन्होंने यहां कि जब मौके पर पौधे ही नहीं है तो 2 साल तक किसके संधारण के नाम पर लाखों रूपयों के बिल कैसे बना लिए गए। मीना ने चिंता जताई कि विभाग का इतना बड़ा सिस्टम होने के बाद भी कोई अधिकारी-कर्मचारी कार्य के नाम पर बजट का बेजा इस्तेमाल कैसे कर सकता है। यदि, नवज्योति खबर नहीं छापता तो इतनी बड़ी गड़बड़ी शायद कभी उजागर नहीं होती। </p>
<p><strong>सरकारी धन का जमकर किया दुरुपयोग</strong><br />एपीसीसीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, लखावा प्लांटेशन-8 में वर्ष 2022 से 31 जुलाई 2024 तक कभी 8000, 7200, 6500, 6300 तो कभी 6800 पौधे लगाना, निराई-गुड़ाई, चौकीदारी, 5500 खड्ढ़े खोदना, दीवारों की मरम्मत, 5000 रनिंग मीटर वी-डिच खुदाई सहित अन्य कार्यों के बिल बिना कार्य किए ही उठा लिए। अधिकारियों का प्लांटेशन पर ध्यान देने के बजाए सिर्फ सरकारी धन का दुरूपयोग करने पर ही रहा। नतीजन, 3 साल में 150 पौधे भी पनप नहीं सके। जबकि, मेटिगेटिव मैजर्स में प्लांटेशन का एनएच-76 के सहारे हरितिमा पटटी विकसित करना उद्देश्य था, परन्तु यहां सिर्फ धन का ही दुरूपयोग ही हुआ है।</p>
<p><strong>प्लांटेशन चारों तरफ से खाली, कहां पिलाया 8 हजार पौधों को पानी </strong><br />अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक केसी मीना ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि बिलों में 5500 गड्ढ़े खोदे गए है। जबकि, वर्ष 2022 से ही 8000 पौधें लगाने से लेकर अनेकों बार पानी पिलाना, बार-बार निराई-गुड़ाई, सुरक्षा निगरानी के नाम पर बिल बनाकर भुगतान उठाया गया है। जबकि, निरीक्षण के वक्त पूरा क्षेत्र खाली पाया गया। यदि, 8 हजार पौधे होते तो 3 साल में यहां जंगल विकसित हो चुका होता। लेकिन, प्लांटेशन में चारों तरफ घूमने पर भी पौधे नजर नहीं आए। हालांकि, कुछ जगह मामूली निशान मिले हैं, जिन्हें देख ऐसा नहीं लगा कि यहां कोई गड्ढ़ा खोदकर पौधा लगाकर थांवला बनाया गया हो और उनकी निराई-गुड़ाई की गई हो। अत: प्लांटेशन के नाम पर घोर लापरवाही की गई है। मौके पर कार्य हुआ ही नहीं, मात्र औपचारिकता की गई है। अधिकांश भुगतान बिना कार्यों के ही उठाए गए हैं। </p>
<p><strong>पी एंड एम गणना दल की जांच में यूं खुली भ्रष्टाचार की पोल</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना की रिपोर्ट पर मूल्यांकन एवं प्रबोधन कोटा को प्लांटेशन का सर्वे कर पौधों की जांच सौंपी गई। इस पर पी-एंड-एम की 7 सदसीय टीम ने गत 30 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक प्लांटेशन में पौधों की वास्तविक संख्या की जांच की तो यहां 2300 पौधे मिले। जिनकी ऊंचाई बमुश्किल 8 से 10 इंच थी। पीएंडएम की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि यह प्लांटेशन पूरी तरह से फेल है और पूर्व में जो कार्य जिस मात्रा में करना बताया गया वह मौके पर गणना के समय नहीं पाया गया। यदि, जुलाई 2024 के प्रथम सप्ताह में बारिश के समय 2500 पौधे इस प्लांटेशन में नहीं लगाए जाते तो पीएंडएम गणना दल को मौके पर 2300 पौधें भी नहीं मिलते। इससे स्पष्ट है कि अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना के निरीक्षण तक यहां 150 पौधे भी नहीं थे।    </p>
<p><strong>पर्यावरण प्रेमी बोले- न केवल प्रकृति बल्कि सरकार के साथ भी धोखा</strong><br /><strong>भ्रष्टाचार करने वालों से हो रिकवरी</strong><br />पौधे लगाने के नाम पर जिन वन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्लांटेशन संधारण में अब तक जितनी राशि खर्च हुई है, उनकी रिकवरी इन संबंधित  अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए। वहीं, लखावा प्लांटेशन जैसे प्रदेश के अन्य प्लांटेशनों की जांच हो तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर होगा। <br /><strong>- बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी, पीपुल फॉर एनीमल</strong></p>
<p><strong>एसीबी खुद संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ करें कार्रवाई</strong><br />वन मंडल कोटा में लोकसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार किया जाना नई बात नहीं हैं। यह भ्रष्टाचार छिपाने के उद्देश्य से पारदर्शिता नियमों की पालना नहीं करते। जिम्मेदार लोकसेवकों द्वारा यहां असम्यक लाभ प्राप्त किया गया है। इनका यह कृत्य आपराधिक प्रवृति की श्रेणी में आता है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत परिभाषित है। नियमानुसार यहां वन विभाग की जगह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों को स्वत: ही संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि वन विभाग की जांच पक्षपातपूर्ण होगी।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद् </strong></p>
<p><strong>जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई</strong><br />प्लांटेशन में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों ने न प्रकृति बल्कि सरकार से भी विश्वासघात किया है। राजकोष से लाखों रुपयों का गबन कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। नियमानुसार प्लांटेशन फेल होने पर जिम्मेदार अधिकारियों से रिकवरी किए जाने का प्रावधान है। <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>
<p><strong>रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी</strong><br />उच्चाधिकारियों को मामले की रिपोर्ट भेज दी है। मैं इसमें कमेंट्स नहीं कर सकता।   <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने कोटा डीएफओ को फोन कर पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया गया लेकिन जवाब नहीं मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 17:55:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निगम में कई दिन से बंद है लिफ्ट, ऊपर चढ़ने में लोग हो रहे हैं परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों का आदेश मिलते ही लिफ्ट को फिर से चालू कर दिया जाएगा। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/5-%09the-lift-has-been-closed-in-the-corporation-for-many-days--people-are-facing-trouble-in-climbing-up/article-94832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(1)10.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोटा। आमजन से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विभाग के सरकारी कार्यालय नगर निगम में पिछले कई दिन से एक लिफ्ट बंद पड़ी हुई है। जिससे निगम कार्यालय आने वालों  विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाओं व दिव्यांगों को ऊपरी मंजिल पर काम के लिए जाने पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम के बी व सी ब्लॉक में कोटा उत्तर नगर निगम के कार्यालय संचालित है। निगम कार्यालय तीन मंजिला है। जिससे ऊपर की मंजिल पर बने अनुभागों में जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा लिफ्ट भी लगी हुई है। लेकिन हालत यह है कि यह लिफ्ट पिछले कई दिन से बंद है। लिफ्ट के गेट पर एक नोटिस चस्पा है जिस पर लिखा है लिफ्ट अंडर मेंटेनेंस। ऐसे में नगर निगम की दूसरी  व तीसरी मंजिल पर स्थित डे एनयूएलएम अनुभाग में जाने वाली महिलाओं को सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ रहा है। वहीं तीसरी मंजिल पर स्थित कई  अनुभागों के अलावा जेरोक्स मशीन भी तीसरी मंजिल पर ही लगी हुई है।ऐसे में यदि किसीको जेरोक्स करवाने तीसरी मंजिल पर जाना है तो पहले तो लोग कई बार सोचते हैं कि कैसे जाएं। यदि जाना भीपड़ता है तो उनकीसांसे फूल रही है। वहीं आमजन ही नहीं नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी दिन में कई बार दूसरी व तीसरी मंजिल से ऊपर नीचे आना जना पड़ जाए तो उनकी हालत खराब हो रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पानी के कैम्पर व निर्माण सामग्री भी लिफ्ट से</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम में लिफ्ट लोगों की सुविधा के लिए लगाई गई है। लेकिन हालत यह है कि निगम में पानी के कैम्पर भी लोग लिफ्ट से लेकर ही चढ़ रहे है। इतना ही नहीं वर्तमान में निगम कार्यालय में कई जगह पर निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में निर्माण सामग्री ईंट, बजरी व सीमेंट के कट्टे तक लिफ्ट से ही लेकर जा रहे है। कई बार मजदूर व अन्य लोगों को लिफ्ट चलाना नहीं आने से उनके द्वारा बार-बार बटन दबाने से भी लिफ्ट में गड़बड़ी हो रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लिफ्ट का पैंदा खराब होने से की बंद</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता (विद्युत) सचिन यादव ने बताया कि नगर निगम कार्यालय में दो लिफ्ट लगी हुई है। उनमें से कोटा उत्तर निगम वाली लिफ्ट का पैंदा खराब हो गया था। जिससे उसमें से लोगों के गिरने का खतरा बना हुआ था। जिससे उसे मेंटेनेंस के लिए कुछ दिन पहले बंद किया गया था। हालांकि उसकी मेंटेनेंस करवा दी है। लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे फिलहाल बंद किया हुआ है। यादव ने बताया कि लिफ्ट लोगों के आने-जाने के लिए है। लेकिन उसमें भारी भरकम वजन लेकर जाने से उसके पैंदे में खराबी हो गई थी। अधिकारियों का आदेश मिलते ही लिफ्ट को फिर से चालू कर दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Nov 2024 15:34:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जर्जर व खाली पड़े खण्डहरों से दहशत, जिम्मेदार बेखबर</title>
                                    <description><![CDATA[कई भवन तो ऐसे है जो केवल छोटी मोटी दीवारों पर ही टिके हुए है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/panic-due-to-dilapidated-and-empty-ruins--responsible-people-aware/article-86527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4.png" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। इन्द्रगढ़ शहर में कई मकान खण्डहर अवस्था में है जो तेज हवा व बारिश में कभी भी गिर सकते है। जिससे जान माल का नुकसान भी हो सकता है। इन्द्रगढ़ के वार्ड नं0 7 निवासी शुभम शर्मा ने बताया कि बाईसी पाडा वार्ड नं0 7 में कुछ पुराने खण्डहर है जो बिल्कुल जीर्ण शीर्ण अवस्था मे हो चुके है। जो कभी भी तेज आंधी और बरसात में भरभरा कर गिर सकते है। इन खण्डहरों की वजह से मोहल्ले के लोगो में बारिश के मौसम में भय का माहौल बना हुआ है। अभी कुछ दिन पूर्व ही एक खण्डहर मकान का छज्जा टूट कर गिर गया था। गली में किसी के मौजूद नही होने से जान माल का नुकसान नही हुआ। शर्मा ने बताया कि ये मकान काफी समय से खाली पड़े हुए है तथा अब बिल्कुल खंडहर हो चुके है। यहां तक की कुछ खंडहरों में तो पीपल के बड़े बड़े पेड़ भी उग आए है तेज आंधी में इन पेड़ों के गिरने का भी डर लगा रहता है। जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। सारे मोहल्लेवासी तेज आंधी व बारिश होते ही भयभीत हो जाते है।  शुभम शर्मा ने नगर पालिका अध्यक्ष से इन खण्डहर मालिकों को नोटिस देने की बात कही है। वार्ड नं0 07 के बाशिंदे लगभग 1 वर्ष पूर्व भी नगर पालिका इन्द्रगढ़ को पत्र के माध्यम से उक्त जर्जर भवन के बारे में अवगत करवा चुके है परंतु पालिका प्रशासन द्वारा एक वर्ष बाद भी उक्त मामले में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही की गई है। गौरतलब है कि वार्ड नं0 7 ही नही बल्कि इन्द्रगढ़ शहर में इस तरह के कई खण्डहर है जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है तथा तेज बारिश व आंधी के चलते कभी भी ढह सकते है तथा उनके ढह जाने से कभी भी कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है व जान माल का नुकसान भी हो सकता है। पालिका प्रशासन को इन जर्जर भवनों के मालिकों को जल्द से जल्द नोटिस देकर इनका निस्तारण करवाया जाना चाहिए। इन्द्रगढ़ में बहुत सारे है जर्जर भवन - इन्द्रगढ़ के वार्ड नं0 07 में ही नही पुराने शहर के हर गली मोहल्ले में कई जर्जर इमारतें है जो निरंतर हादसों को न्योता दे रही है। मुख्य बाजार में चन्द्र बिहारी जी के मंदिर के सामने ही एक जर्जर भवन है जो वर्षों से खाली पड़ा है तथा जो पुरी तरह से खंडहर हो चुका है तथा बारिश व तेज आंधी में कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। इसके साथ ही कई पुरानी दुकाने जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है इनके भी गिरने का खतरा बना रहता है। कई भवन तो ऐसे है जो केवल छोटी मोटी दीवारों पर ही टिके हुए है। </p>
<p><strong>सक्षम भवन मालिकों को दिया जाना चाहिए मरम्मत का आदेश </strong><br />शहर में कई ऐसे जर्जर भवन भी है जिनके मालिक यहां किसी अन्य मकान में रह रहे है और पुराना भवन जर्जर हो चुका है तो पालिका प्रशासन को ऐसे सक्षम मकान मालिकों को अपने पुराने जर्जर भवन की मरम्मत करवाने के लिए पाबंद किया जाना चाहिए जिससे समय रहते बडे हादसे को टाला जा सके। सभी भवनों को ढहाना न तो नगर पालिका के लिए संभव है और ना ही भवन मालिकों के लिए। इसलिए जो भवन कुछ मरम्मत से ठीक हो सकते है उनकी मरम्मत करवाई जानी चाहिए।कई सरकारी इमारते भी हो चुकी है खण्डहर - पुराने शहर में कई सरकारी इमारते भी खंडहर व जर्जर हो चुकी है। जिसमें मुख्य बाजार में स्थित बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन व छोटी सब्जी मंडी में स्थित पुराना धर्मशाला स्कूल। ये ऐसी इमारते है जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है और इनकी देखभाल भी नही हो पाती है। तीन मंजिला बालिका स्कुल का भवन तो इन्ही सुरक्षा कारणो से खाली करवा कर नए भवन में शिफ्ट किया गया था। अब ये इमारते खाली पडी है व शहर के मुख्य बाजार में स्थित होने से बडे हादसे का भय है।</p>
<p>हमारे मोहल्ले में एक दो मकान बिल्कुल खण्डहर हो चुके है तथा इन खण्डहरों की वजह से मोहल्लेवासी दहशत में है। पालिका प्रशासन को इन खण्डहरों के मालिकों को नोटिस देकर इनकी साफ सफाई करवाना चाहिए अन्यथा बारिश में गिरने के कगार वाली दीवारों को सुरक्षा के मध्येनजर पहले ही ढहा देना चाहिए।  <br /><strong>- शुभम शर्मा निवासी वार्ड नं0 7 इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>नगर पालिका द्वारा समय रहते जर्जर भवन मालिकों को नोटिस देकर उचित कार्यवाही अमल मे लानी चाहिए साथ ही सक्षम भवन मालिकों द्वारा खण्डहर भवनों की मरम्मत करवाने के लिए भी पाबंद किया जाना चाहिए। इन्द्रगढ शहर में ऐसे कई खण्डहर है जो कभी भी धराशाही हो सकते है।  <br /><strong>- पंकज वैष्णव शहरवासी इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>पुराने शहर में ऐसे भवनों की संख्या बहुत सारी है तथा इनमें से कई तो इतने जीर्ण शीर्ण हो चुके है कि चार वर्ष पूर्व जैसी खतरनाक बारिश आ जाए तो गिर भी सकते है। भविष्य में होने वाली दुर्घटना से बचने के लिए जल्द कार्यवाही की जानी आवश्यक है। <br /><strong>- गणेश गौत्तम, शहरवासी इन्द्रगढ़।  </strong></p>
<p>इन्द्रगढ़ शहर में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त मकानों को चिह्नित किया जाकर बहुत जल्द इनके मालिकों को नोटिस भेजने की कार्यवाही प्रारंभ की जावेगी। <br /><strong>- गजेन्द्र मीना, सहायक अभियंता नगर पालिका इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>एक वर्ष पूर्व दिए गए प्रार्थना पत्र की तो मुझे जानकारी नही है। परंतु अब ये मामला मेरे संज्ञान में आया है तो इन जर्जर भवनों को चिन्हित करने की कार्यवाही जल्द ही प्रारंभ करवा कर नोटिस जारी किए जाएगें।     <br /><strong> - मनोज मालव, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका इन्द्रगढ़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 01 Aug 2024 17:33:40 +0530</pubDate>
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                <title>बांधों को रखरखाव की दरकार, कंपनियां खींच रही हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[विभागीय अधिकारी अब बड़ी कंपनियों से कर रहे सम्पर्क। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dams-need-maintenance--companies-are-pulling-back/article-85206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/bandho-ko-rkhrkhav-ki-darkarar,-companiya-khich-rhi-hath...kota-news-19-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून का दौर चल रहा है, लेकिन चंबल नदी पर बने तीनों बांधों के रखरखाव का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। एक साल से निविदा की तैयारी चल रही है। अभी तक निविदा नहीं हो पाई है। संसद में तीन साल पहले बांध सुरक्षा कानून पारित हो चुका है, जिसमें बांध की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके बावजूद बांधों के रखरखाव का कार्य नहीं हो पा रहा है। चंबल के तीनों बांधों के रखरखाव के लिए विश्व बैंक ने 183 करोड़ का बजट मंजूर कर रखा है। बजट उपलब्ध होने के बावजूद अभी तक किसी भी कम्पनी ने इस कार्य कोे करने में रुचि नहीं दिखाई है। अब जल संसाधन विभाग के अधिकारी राजस्थान से बाहर की कंपनियों से सम्पर्क कर रहे हैं। तीन बार निविदा निकाली, फिर भी हाथ खाली: जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार चंबल के तीनों बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध के लिए जीर्णोद्धार के लिए 183 करोड़ का प्रोजेक्ट विश्व बैंक से मंजूर हो चुका है। इसके बाद जीर्णोद्धार कार्य के लिए पिछले साल निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। 12 सितम्बर 2023 को तकनीकी स्वीकृति जारी कर तीनों बांधों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी, लेकिन किसी भी कंपनी और ठेकेदार ने निविदा नहीं भरी। दूसरी बार 10 अक्टूबर 2023 और तीसरी बार 20 जनवरी 2024 को निविदा आमंत्रित की गई। इस बार भी विभाग को निराशा हाथ लगी। इस कार्य को करने से कंपनियों ने अपने हाथ खींच रखे हैं। </p>
<p><strong>तीनों बांधों के लिए इतना बजट स्वीकृत</strong><br />डैम रिहेबिलिटेशन इक्वमेंट प्रोजेक्ट (डीआरआईपी) के तहत चम्बल के तीनों बांधों का जीर्णोद्धार कार्य होना था। राज्य सरकार ने साल 2020-21 में अपने बजट में जीर्णोद्धार की घोषणा की थी। वर्ल्ड बैंक से राशि जारी होने के बाद राज्य सरकार ने 22 जून को राणाप्रताप सागर, जवाहर सागर व कोटा बैराज के जीर्णोद्धार के लिए 183करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की थी। इससे हाइड्रो मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिफिकेशन के कार्य होने थे। विश्व बैंक ने कोटा बैराज के लिए 45.86 करोड़, जवाहर सागर के लिए 72.02 करोड़ और राणाप्रताप सागर बांध के लिए 65.72 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।</p>
<p>चंबल के बांधों रखरखाव के लिए तीन बार निविदा आमंत्रित की जा चुकी है। अब इस सम्बंध में विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। वहीं साउथ के कंपनी और ठेकेदारों से बातचीत की जा रही है। तीनों बांधों का काम एक ही कंपनी को देने का प्रयास किया जा रहा है।<br /><strong>- भारतरत्न गौड़, अधिशासी अभियंता, चम्बल परियोजना खण्ड कोटा</strong></p>
<p><strong>अब विशेषज्ञों से जानेंगे कि कैसे बदलेंगे गेट</strong><br />जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों के गेट पानी के अन्दर ही बदले जाएंगे। इस कारण कंपनियां जीर्णोद्धार को लेकर रुचि नहीं ले रही है। पानी के अन्दर गेट बदलने का काम मुश्किल भरा है। जीर्णोद्धार के साथ ही कंपनी को इस कार्य को करना होगा। अन्य काम अलग-अलग नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए अब इस सम्बंध में विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। वहीं अब साउथ के कंपनी और ठेकेदारों से बातचीत की जा रही है। अब कोशिश यह की जा रही है कि तीनों बांधों का काम एक ही कंपनी को दे दिया जाए। इसके लिए अब निविदा में बदलावा करने पर विचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ऐसे तो कम हो जाएगी बांधों की लाइफ</strong><br />चम्बल नदी पर तीनों ही बांध 1960 के दशक बने हुए हैं। बांध की मशीनों और हाइड्रों उपकरणों की उम्र 40 साल होती है। जबकि बांध के सिविल वर्क की उम्र 100 साल मानाी जाती है। अब लगभग 65 वर्ष गुजरने वाले हैं। ऐसे में यदि इनका समय पर जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो बांध की लाइफ और कम हो जाएगी। स्थिति यह है कि राणाप्रताप सागर बांध के स्लूज गेट 37 सालों से नहीं खुले हैं। गेटों से रिसाव हो रहा है। जवाहर सागर बांध का एक गेट अटका हुआ है। कोटा बैराज के गेटों की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके बाद जीर्णोद्धार का कार्य बार-बार टल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 17:21:51 +0530</pubDate>
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