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                <title>revenue - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ईस्ट कोस्ट रेलवे ने रिकॉर्ड समय में दो हजार करोड़ का राजस्व किया अर्जित, एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की हासिल </title>
                                    <description><![CDATA[ईस्ट कोस्ट रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में मात्र 299 दिनों में 2 हजार करोड़ से अधिक का यात्री राजस्व अर्जित कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/east-coast-railway-achieved-an-important-milestone-by-earning-revenue/article-141271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/train_03.jpg" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ईस्ट कोस्ट रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में मात्र 299 दिनों में 2 हजार करोड़ से अधिक का यात्री राजस्व अर्जित कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि यात्री यातायात में निरंतर वृद्धि और रेलवे जोन में बेहतर रेल सेवाओं को दर्शाती है। यह सफलता वर्ष-दर-वर्ष निरंतर सुधार को भी रेखांकित करती है। वर्ष 2024-25 में 308 दिनों में 2023-24 में 331 दिनों में और 2022-23 में 365 दिनों में 2 हजार करोड़ का आंकड़ा पार किया था। यह यात्रियों के बढ़ते विश्वास तथा सुरक्षाएं समय पालन और यात्री सुविधाओं में रेलवे के सतत प्रयासों का प्रमाण है।</p>
<p>यात्री राजस्व में यह वृद्धि कई यात्री केंद्रित पहलों का परिणाम है। डिजिटल टिकटिंग प्लेटफॉर्म के विस्तार, स्टेशनों पर बेहतर पहुंच तथा यात्री सुविधाओं और यात्रा अनुभव के निरंतर उन्नयन से रेल यात्रा अधिक सुविधाजनक और समावेशी बनी है।</p>
<p>त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए 1523 विशेष ट्रेनें चलाई गई। इसके अतिरिक्त 200 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में 4050 अतिरिक्त कोच जोड़े गए तथा स्थायी सेवा सुधार के लिए 19 कोच स्थायी रूप से बढ़ाए गए। यात्रा सुरक्षा और आराम को और बेहतर बनाने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में एलएचबी रेक वाली दो नई ट्रेनें शुरू की गई। नेटवर्क विस्तार और कनेक्टिविटी में सुधार के तहत तीन नई एक्सप्रेस सेवाएं शुरू की गई।</p>
<p> इसके अलावा 21 ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव, तीन ट्रेन जोड़ों का विस्तार तथा एक ट्रेन जोड़ी की आवृत्ति में वृद्धि की गई, जिससे यात्रियों की सुविधा और पहुंच में और सुधार हुआ।</p>
<p>मजबूत यात्री प्रदर्शन के साथ-साथ ईस्ट कोस्ट रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष में माल परिवहन और कुल आय के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। रेलवे जोन ने 209.97 मिलियन टन का रिकॉर्ड माल लदान किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। ईस्ट कोस्ट रेलवे ने अब तक की सबसे तेज 23 हजार करोड़ की मूल माल आय भी अर्जित की। कुल मूल आय 21 हजार 543 करोड़ से बढ़कर 23 हजार 595 करोड़ हो गई, जो 11.21 प्रतिशत की समग्र वृद्धि को दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:57:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>16000 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में, आखिर क्यों अमेजन ने लिया इतनी बड़ी छंटनी का फैसला? जानें भारत पर क्या होगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेजन 16,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगा; सीईओ एंडी जेसी ने मैनेजमेंट लेयर्स घटाने, स्टार्टअप फुर्ती लौटाने और निवेश को Generative AI व डेटा सेंटर्स पर केंद्रित करने का कारण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/jobs-of-16000-employees-are-in-danger-why-did-amazon/article-140592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। टेक दिग्गज अमेजन ने एक बार फिर से पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है और इसका कारण है उसका एक बड़ा फैसला जिसके तहत कंपनी करीब 16000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने वाली है। बता दें कि इसमें से कंपनी करीब 14000 कर्मचारियों को पिछले साल अक्टूबर में ही हटा चुकी है और बचे हुए 2000 लोगों पर अब किसी भी वक्त गाज गिर सकती है।</p>
<p>कंपनी के सीईओ एंडी जेसी इतने बड़े फैसले के पीछे दो बड़े कारण बताते हुए कहा है कि अमेजन में जरूरत से ज्यादा मैनेजमेंट लेयर्स बन गई हैं, जिसके कारण काम की रफ्तार काफी धीमी हो गई है और उसका सीधा असर कपंनी के रेवन्यू पर पड़ रहा है और अब कंपनी अपनी ‘स्टार्टअप वाली फुर्ती’ वापस चाहती है, जिसके लिए ऐसा कदम उठाना बहुत ही जरूरी है।</p>
<p>इसके आगे एंडी जेसी ने बताया कि कंपनी अब अपना ध्यान और पैसा पारंपरिक कॉर्पोरेट भूमिकाओं से हटाकर Generative AI और डेटा सेंटर्स में लगाना चाहती है। अब जबकि पूरी दुनिया एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रही है तो ऐसे में कोडिंग, डेटा एंट्री और एचआर जैसे कई काम अब कम लोगों की मदद से तेजी से हो रहे हैं, जिससे पुराने पदों की जरूरत नहीं है। बता दें कि अमेजन के भारत में लगभग 35000 कॉर्पोरेट कर्मचारी हैं और इतनी बड़ी छटनी का असर भारत पर जरूर दिखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 13:08:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पर्यटकों का बायोलॉजिकल पार्क के प्रति घटता रुझान : बड़े वन्यजीवों की कमी और टूटते झूलों से मोह हुआ भंग, न टाइगर न लॉयन, पर्यटक और राजस्व में भारी गिरावट </title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों से हुआ खुलासा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists--interest-in-the-biological-park-is-declining--the-lack-of-large-wildlife-and-broken-swings-have-dissipated-their-attraction--neither-tigers-nor-lions-have-been-seen--resulting-in-a-sharp-decline-in-tourist-arrivals-and-revenue/article-132707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश-विदेश के पयर्टकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क अपनी चमक खोता जा रहा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला राजस्थान का सबसे बड़ा पार्क अब वीरान सा नजर आने लगा है। जहां कद्रदानों की महफिलें सजा करती थी वहां आज पर्यटकों की बेरुखी देखने को मिल रही है। जिसका असर, राजस्व में भारी गिरावट के रूप देखने को मिला। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 31 अक्टूबर तक करीब तीन हजार से ज्यादा पर्यटकों की संख्या घटी है। वहीं, एक लाख रुपए राजस्व का घाटा हुआ है। यह खुलासा वर्ष 2024 व 2025 के 10 माह के आंकड़ों से हुआ है। </p>
<p><strong>3 हजार पर्यटक व 1 लाख से ज्यादा राजस्व घटा</strong><br />वर्ष 2024 व 2025 के जनवरी से अक्टूबर तक के तुल्नात्मक आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में पर्यटकों की संख्या में करीब 3 हजार तथा  1  लाख से ज्यादा के राजस्व में गिरावट दर्ज हुई है।  वन्यजीव विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक करीब 66 हजार 886 पर्यटक बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों के दीदार को पहुंचे थे। जबकि, वर्ष 2025 में 31 अक्टूबर तक यह संख्या घटकर 63 हजार 225 ही रह गई। वहीं, पर्यटकों से होने वाली आय की बात करें तो गत वर्ष अक्टूबर तक करीब 25 लाख 33 हजार से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, अक्टूबर 2025 तक 24 लाख 28 हजार 220 ही हुआ है। </p>
<p><strong>जनवरी के बाद अर्श से फर्श पर पहुंची कमाई </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के लिए जनवरी माह ही कमाई का होता है। पूरे साल में इसी माह में सबसे ज्यादा पर्यटक घूमने आते हैं। वर्ष 2024 की जनवरी में 13 हजार 356 पर्यटक वन्यजीवों की दुनिया निहारने पहुंचे थे। उनसे पार्क को 4 लाख 96 हजार 740 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं, वर्ष 2025 में पर्यटकों में 2764 की बढ़ोतरी हुई। साथ ही 1 लाख 7 हजार 730 रुपए का राजस्व ज्यादा प्राप्त हुआ। इस तरह इस वर्ष की जनवरी में कुल 6,04470 रुपए की आय हुई। लेकिन इसके बाद के महीनों में पर्यटकों व राजस्व के आंकड़े अर्श से फर्श पर पहुंच गए।  अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष 2024 में मार्च में कुल 7,796 पर्यटक पार्क की सैर पर आए थे। जबकि, वर्ष 2025 के मार्च में घटकर पर्यटकों की संख्या मात्र 4, 628 ही रह गई। यानी गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 3,168 पर्यटक घट गए। </p>
<p>वनकर्मियों का कहना है कि गर्मी के कारण पर्यटक दिन में नहीं आते। लेकिन, शाम को आते हैं। वर्ष 2024 के मार्च माह में पर्यटकों से बायोलॉजिकल पार्क को 2 लाख 67 हजार 580 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जिसके मुकाबले इस वर्ष के मार्च में 1 लाख 62 हजार 770 रुपए ही राजस्व एकत्रित हुआ। यानी, गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष के मार्च में 1 लाख 4 हजार 810 रुपए राजस्व का नुकसान हुआ है। जानकारों का मानना है कि पर्यटक व राजस्व में गिरावट का कारण गर्मी से ज्यादा बड़े एनिमल की कमी है। यहां टाइगर-लॉयन, मगरमच्छ, घड़ियाल जैसे बड़े एनिमल की कमी है। जिसकी वजह से पर्यटकों का रुझान घटा है। </p>
<p><strong>अप्रेल : 1540 पर्यटक घटे व 65 हजार का नुकसान</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2024 के अप्रेल माह में भीषण गर्मी के बावजूद 3 हजार 484 पर्यटक घूमने आए थे। जबकि, इस वर्ष के अप्रेल में पर्यटकों की संख्या तेजी से घटती हुई 1944 ही रह गई। जबकि, अभी पिछले साल के मुकाबले गर्मी का पारा भी कम रहा। गत वर्ष अप्रेल माह के मुकाबले इस वर्ष 1944 पर्यटकों की संख्या दर्ज की गई। वहीं, राजस्व की बात करें तो 80240 रुपए की आय हुई। यानी, गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 64370 राजस्व का नुकसान हुआ। </p>
<p><strong>पर्यटकों को अखर रहा टिकट का पैसा </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में शाकाहारी व मांसाहारी मिलाकर कुल 70 से ज्यादा वन्यजीव हैं। यहां आने वाले पर्यटक 55 रुपए खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बडेÞ वन्यजीवों का दीदार नहीं कर पाने से निराश होकर लौट रहे हैं। हालांकि, यहां उम्र दराज बाघिन   महक व लॉयनेस सुहासिनी ही दिखाई देती है। लेकिन, भेडिए, पैंथर, जरख एनक्लोजर में उगी झाड़ियों में छिपे रहने से दिखाई नहीं देते। वहीं, कैफेटेरिया नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी पर्याप्त नहीं है। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है। </p>
<p><strong>गर्मी से ज्यादा बड़े एनीमल की कमी बड़ा कारण</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कोटा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क है। इसके बावजूद यह सुविधाओं व बजट की कमी से जूझ रहा है। यहां पर्यटकों व राजस्व में गिरावट का मुख्य कारण गर्मी से ज्यादा बड़े एनिमल की कमी है।  बजट नहीं होने के कारण बायोलॉजिकल पार्क में पिंजरे यानी एनक्लोजर नहीं बन पा रहे। वहीं, टाइगर-लॉयन जैसे बड़े एनिमल्स की कमी है। जबकि, चिड़ियाघर में  मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित दो दर्जन से अधिक  पक्षी है। यदि, एनक्लोजर बने तो इनकी शिफ्टिंग से पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा। जिसका असर राजस्व की बढ़ोतरी के रूप में नजर आएगा।</p>
<p><strong>चिड़ियाघर से वन्यजीवों की नहीं हो पा रही शिफ्टिंग  </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बंदर व कछुए सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।</p>
<p><strong>द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य </strong><br />पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से करीब 17 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-न कैफेटेरिया न लॉयन टाइगर, क्या देंखे</strong><br />परिवार के साथ पार्क घूमने आए बोरखेड़ा निवासी अजय कुश्वाह, राहुल प्रजापति व उस्मान अली ने बताया कि यहां बड़े एनिमल नहीं है, जो है वो भी झाड़ियों में छिपे रहते हैं। साइटिंग नहीं होने से बच्चे भी मायूस हो जाते हैं। टिकट का पैसा अखर रहा है। </p>
<p><strong>झूले टूटे, बच्चे होते मायूस</strong><br />बजरंग नगर निवासी अखिलेश शर्मा व खेड़ली फाटक के सूर्य प्रकाश मेहरा का कहना था कि यहां कुछ झूले लगे हुए हैं, जो भी टूट चुके हैं। कुछ तो टेडे हो गए। जिनमें बच्चों के गिरने का खतरा रहता है। वहीं, वाटरकूलर भी कम ही जगहों पर लगे हैं। शाकाहारी जानवरों के पिंजरों की तरफ कम है। पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। </p>
<p>टाइगर-लॉयन लाने के प्रयास लगातार जारी है। हमने यहां प्राकृतिक जंगल, जैव विविधता विकसित की है। पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 15:55:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>43 करोड़ तो वसूल नहीं कर पाए अब 33 करोड़ का और दे दिया टारगेट, सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए बकाया, कैसे होगा टारगेट पूरा ?</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार जलदाय विभाग को मिला 78.11 करोड़ का टारगेट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-couldn-t-recover-43-crores--now-they-ve-given-another-target-of-33-crores--government-departments-owe-crores-of-rupees--how-will-the-target-be-met/article-127978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)15.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। जलदाय विभाग को इस बार राजस्व वसूली के लिए 78.11 करोड़ रुपए का टारगेट मिला है, जिसे पूरा करना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गई। गत वर्ष भी 43 करोड़ रुपए की वसूली बकाया रह गई थी। ऐसे में नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के टारगेट में 33.11 करोड़ रुपए और जोड़ दिए गए। अब पुराने और नए बकाया बिलों की राशि को मिलाकर कुल 78 करोड़ 11 लाख रुपए का राजस्व विभाग को वसूलना है, जो अधिकारियों के लिए गले की फांस बना हुआ है। क्योंकि,  एक तरफ विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ सरकारी विभाग ही वसूली की राह में रोड़ा बने हुए हैं। वर्तमान में सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए की राशि बकाया चल रही है। जिसकी वजह से हर साल जलदाय विभाग का अधूरा रह जाता है। </p>
<p><strong>वसूली के दौरान मिलती है धमकियां</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर एईएन ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों में बकाया वसूली कर रहे हैं। हर दो माह में घरों पर पानी के बिल भेजे जाते हैं लेकिन लोग महीनों तक जमा नहीं करवाते। जब बकाया बिल वसूलने के लिए कर्मचारी घरों पर जाते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती है। अपशब्द कहकर अपमानित किया जाता है। गत वर्ष भी इस तरह की घटना हो चुकी है।  </p>
<p><strong>दो सरकारी विभागों पर तीन साल से 11 करोड़ बकाया</strong><br />सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा बकाया नगर निगम कोटा दक्षिण और केडीए पर है। मात्र इन दो विभाग पर ही 11 करोड़ रुपए से ज्यादा पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे पिछले 3 सालों से जमा नहीं करवाया गया। हालांकि, जल अफसरों द्वारा नोटिस, रिमाइंडर भी दे चुके हैं, इसके बावजूद बिल जमा नहीं करवाया। इस तरह अन्य सरकारी विभागों पर भी करोड़ों पर रुपए बकाया चल रहा है। ऐसे में सरकारी विभाग अपना बकाया बिल राशि जमा करवा दे तो जलदाय विभाग का 90% से ज्यादा टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>नगर निगम दक्षिण पर 7.60 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम कोटा दक्षिण पर 7 करोड़ 60 लाख रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। यह राशि पिछले तीन सालों से बकाया है। गत वर्ष 19 नवम्बर को निगम आयुक्त को नोटिस दिया था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजे गए। लेकिन, निगम द्वारा जल राजस्व जमा नहीं करवाया। जिससे सरकार द्वारा जलदाय विभाग को दिए गए राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम ने अपने कार्यक्षेत्र अधीन विभिन्न स्थानों पर कनेक्शन ले रखे हैं, जहां उपभोग हुए पानी का बिल लंबे समय से बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>केडीए ने नहीं भरा 3.50 करोड़ का बिल </strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) पर 3 करोड़ 50 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जिसे जमा करवाने के लिए जल अधिकारियों ने गत वर्ष तत्कालीन केडीए सचिव को बकाया राशि जमा करवाने के नोटिस दिए थे। इसके बावजूद विभाग द्वारा अब तक  जल शुल्क जमा नहीं करवाया गया।  जबकि, केडीए के अधीन श्रीनाथपुरम स्टेडियम पर 5.79 लाख, यूआईटी कॉलोनी प्रताप नगर का 9.41 लाख तथा सीएडी रोड स्थित फ्वारा सर्किल का 5.92 लाख रुपए सहित अन्य केडीए अधीन कार्यक्षेत्रों पर लाखों रुपयों का बिल बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>इन विभागोें पर भी लाखों का बिल बकाया </strong><br />सरकारी विभागों पर लाखों-करोड़ों रुपए जल शुल्क राशि बकाया चल रही है। विभाग द्वारा बकाया जमा नहीं करवाने से जल विभाग हर साल अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाता। सरकारी विभागों में बीएसएनएल, पोस्ट आॅफिस, कृषि विभाग, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाने सहित कई विभागों पर लाखों का बिल बकाया है। </p>
<p><strong>वसूली लक्ष्य पूरा करने के कर रहे प्रयास</strong><br />सरकार से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जो राजस्व वसूली लक्ष्य मिला है, उसे शत-प्रतिशत पूरा करने के प्रयास कर रहे हैं।  कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान में जो साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, उनका पूरा उपयोग कर राजस्व वसूली की जा रही है। वहीं, जिन सरकारी विभागों पर बकाया चल रहा है, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। साथ ही आपसी समन्वय व वार्तालाप के माध्यम से भी बकाया जमा करवाने की कोशिश की जा रही है। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>28 फीसदी आवासीय व 36 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने जमा कराया यूडी टैक्स, फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/28--residential-and-36--commercial-establishments-deposited-ud-tax/article-110423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा करवाने में पहले जहां बहुत कम लोग रूचि लेते थे। वहीं अब इसमें पहले की तुलना में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन अभी भी टैक्स जमा करवाने वालों की संख्या एक चौथाई से तीन चौथाई ही है। नगर निगम कोटा द्वारा आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से वर्ष 2007 में नगरीय विकास कर वसूल करना शुरु किया था। पहले यह काम नगर निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से किया जा रहा था। लेकिन विभाग द्वारा लक्ष्य से काफी कम टैक्स जमा किया जा रहा था। उसे देखते हुए नगर निगम अधिकारियों द्वारा टैक्स वसूली का काम निजी फर्म को दे दिया गया। पहले कोटा दक्षिण ने और उसके बाद कोटा उत्तर में निजी फर्म ने यह काम शुरु किया। हालांकि नगर निगम की बोर्ड बैठकों में निजी फर्म से यूडी टैक्स वसूल करने का विरोध भी जताया गया। लेकिन उसके बाद भी सरकार ने बोर्ड के निर्णय को न मानते हुए निजी फर्म से ही टैक्स वसूल करने का आदेश जारी किया था। पिछले काफी से यूडी टैक्स निजी फर्म द्वारा ही वसूल किया जा रहा है। हालांकि आवासीय व व्यवसायिक दोनों श्रेणियों में टैक्स का दायरा अलग -अलग है। जो सम्पतियां इस दायरे में आ रही है। उनसे ही यह टैक्स वसूल किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कुल सर्वे में से 38 फीसदी सम्पति आवासीय और 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां टैक्स के दायरे में आई है। उनमें से आवासीय में 28 फीसदी व व्यवसायिक में 36 फीसदी ने टैक्स जमा कराया है। </p>
<p><strong>फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे</strong><br />नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। लेकिन निजी फर्म को यह काम मिलने के बाद फर्म ने नए सिरे से सभी सम्पतियों का सर्वे किया। आवासीय व व्यवसायिक समेत अन्य श्रेणियों में आने वाले सम्पतियों में यदि निर्माण होने से बहलाव हुआ है तो उसका टैक्स बढ़ाया गया है। यदि पूर्व में गलत टैक्स लिया जा रहा था तो उसे सही भी किया गया है। </p>
<p><strong>शहर में 4062 सम्पतियों का सर्वे</strong><br />निजी फर्म द्वारा शहर में किए गए नए सिरे से सर्वे में कुल 4062 सम्पतियों का सर्वे किया गया है। फर्म के प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में 1635 और कोटा दक्षिण निगम में 2427 यानि कुल 4062 सम्पतियों का अभी तक सर्वे किया जा चुका है। </p>
<p><strong>38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में किए गए सर्वे में से करीब 38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आए हैं। शहर में हुए कुल 4062 सर्वे में दोनों निगम क्षेत्र में कुल 1554 आवासीय जिनमें 517 कोटा उत्तर में और 1037 कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में है। इसी तरह से कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में 441 और कोटा दक्षिण क्षेत्र में 506 व्यवसायिक प्रतिष्ठान टैक्स के दायरे में  आए हैं। </p>
<p><strong>यह है आवासीय व व्यवसायिक टैक्स की स्थिति</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों निगम क्षेत्रों में आवासीय प्रतिष्ठानों से कुल 4 करोड़ 31 लाख 71 हजार 951 रुपए और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से 5 करोड़ 59 लाख 30 हजार 705 रुपए टैक्स जमा किया गया।  कुल जमा टैक्स में से आवासीय भवनों से जहां 28 फीसदी टैक्स वसूल किया गया वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का प्रतिशत 36 रहा। </p>
<p><strong>15.60 करोड़ से अधिक जमा हुआ टैक्स</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बोर्ड की बजट बैठकों में वित्त वर्ष का यूडी टैक्स वसूली का लक्ष्य 10-10 करोड़ यानि कुल 20 करोड़ रखा गया था। जिसमें से निजी फर्म द्वारा कुल 15 करोड़ 60 लाख 58 हजार 973 रुपए टैक्स वसूल किया गया। जिसमें से कोटा उत्तर में 5 करोड़ 79 लाख 14 हजार 694 रुपए है। वहीं कोटा दक्षिण में 9 करोड़ 81 लाख 44 हजार 279 रुपए है। </p>
<p><strong>ये सम्पतियां भी हैं टैक्स के दायरे मे</strong><br />आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा शहर में कई ऐसी सम्पतियां भी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती है। जिनमें इंस्टीट्यूशनल, इंडस्ट्रीयल व अन्य सम्पतियां भी है।  कोटा उत्तर में 232 व दक्षिण में 192 इंस्टीट्यूशनल, कोटा उत्तर में 32 व दक्षिण में 29 इंडस्ट्रीयल  और कोटा उत्तर में 411 व दक्षिण में 663 अन्य सम्पतियां हैं जो टैक्स के दारे में आती है। उनसे भी करोड़ों रुपए टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p><strong>पहले से काफी सुधार हुआ है</strong><br />इधर निजी फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि यूडी टैक्स की वसूली में पहले से काफी सुधार हुआ है। पहले टैक्स का लक्ष्य कम था वह भी वसूल नहीं हो पा रहा था या बहुत कम लोग जमा करवाते थे। जिसके लिए निगम को सख्ती करनी पड़ती थी। सीजिंग तक की कार्रवाई करने पर टैक्स बहुत कम जमा होता था। जबकि इस बार बिना सख्ती किए ही अच्छा टैक्स जमा हुआ है।  हालांकि कुल सम्पतियों के सर्वे में आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या टैक्स के दायरे में आने वालों की कम है। उनमें से भी अधिकतर लोगों से टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p>                             <strong>     नगर निगम उत्तर         नगर निगम  दक्षिण</strong><br />कुल सम्पति                           1635                        2428<br />आवासीय सम्पति                     517                        1037<br />संस्थानिक सम्पति                   232                          192<br />औद्योगिक सम्पति                     32                             29<br />अन्य सम्पति                          411                           663<br />व्यवसायिक सम्पति                 443                           506 <br />कुल जमा टैक्स              57914694                  98144279<br />आवासीय टैक्स              16766224                   26405721<br />व्यवसायिक टैक्स           19037725                   36892980 </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 15:32:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खान विभाग ने 23.35 फीसदी विकास दर के साथ 9202.50 करोड़ का किया राजस्व संग्रहण </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के खान विभाग ने वर्ष 2024-25 में 9202 करोड़ 50 लाख रु. का राजस्व अर्जित कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mines-department-collected-revenue-of-920250-crore-with-2335-percent/article-109350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के खान विभाग ने वर्ष 2024-25 में 9202 करोड़ 50 लाख रु. का राजस्व अर्जित कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रमुख शासन सचिव खान एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आरंभिक आंकड़ों के अनुसार खान विभाग ने 23.35 फीसदी की विकास दर के साथ गत वित्तीय वर्ष से 1742 करोड़ 02 लाख रुपए अधिक राजस्व संग्रहित किया है। उन्होंने बताया कि यह खान विभाग के इतिहास में किसी एक वित्तीय वर्ष का अब तक का सर्वाधिक राजस्व संग्रहण है।</p>
<p>राज्य में इसी वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक प्रधान व अप्रधान खनिज ब्लॉकों व प्लाटों की नीलामी, नई खनिज नीति, नई एम-सेंड नीति के साथ ही राइजिंग राजस्थान के दौरान खनिज क्षेत्र में निवेश करार हुए हैं। व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ ही सरलीकरण किया गया है। गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में खान विभाग द्वारा 7460 करोड़ 48 लाख रुपए का राजस्व संग्रहित किया गया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 19:02:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजस्थान भू-राजस्व संशोधन बिल प्रवर समिति को भेजा, कांग्रेस ने किया वॉकआउट</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस के वॉकआउट पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों को पता था कि सदन में इमरजेंसी पर चर्चा होने वाली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-sent-a-walkout-to--land-revenue-amendment-bill/article-108218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy164.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन और विधि मान्यकरण) विधेयक  बहस के बाद प्रवर समिति (सलेक्ट कमेटी) को भेज दिया गया। राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने बहस का जवाब देते हुए इसे प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया। इस सरकार का ये दूसरा बिल है, जो प्रवर समिति को भेजा है। सदन ने दो दिन पहले भूजल प्राधिकरण बिल प्रवर समिति को भेजा था। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस विधेयक को प्रवर समिति की बजाय जनमत संग्रह के लिए भेजने की मांग करते हुए डिवीजन की मांग की, जिसे स्पीकर ने खारिज कर दिया। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।</p>
<p>कांग्रेस के वॉकआउट पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों को पता था कि सदन में इमरजेंसी पर चर्चा होने वाली है, इसलिए वे चर्चा से बचने के लिए बाहर चले गए। राजस्व संशोधन विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने से जुड़े इस घटनाक्रम ने सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। वहीं, कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनादर बताया और अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इससे पहले बिल पर सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने बिल का विरोध भी  किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 17:39:26 +0530</pubDate>
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                <title>परिवहन विभाग ने अर्जित किया 4977 करोड़ राजस्व</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व अर्जन में जयपुर आरटीओ द्वितीय ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/transport-department-earned-rs-4977-crore-revenue/article-100154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/transport-departme.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान परिवहन विभाग ने दिसंबर 2024 तक 4977.55 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो 95.34 प्रतिशत वार्षिक लक्ष्य (5220.69 करोड़ रुपये) का है। राजस्व अर्जन में जयपुर आरटीओ द्वितीय ने पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि अजमेर आरटीओ ने 103.78 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। सीकर तीसरे और जयपुर आरटीओ प्रथम चौथे स्थान पर रहा। जयपुर आरटीओ प्रथम का राजस्व अर्जन 96.75 प्रतिशत रहा। वहीं, अलवर आरटीओ 13 रीजन में सबसे पीछे रहा।</p>
<p>विभाग के इस प्रदर्शन से स्पष्ट है कि राज्य के अधिकांश परिवहन कार्यालय लक्ष्य प्राप्ति में सक्रियता दिखा रहे हैं। दिसंबर तक का यह प्रदर्शन विभाग के लिए वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 14:31:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसों पर शिकंजा कसते ही भर गया परिवहन विभाग का खजाना</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की ओर से 22 से 31 मई तक दूसरे राज्यों में पंजीकृत वाहनों व नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इसमें 18 हजार 242 वाहनों पर कार्रवाई की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/as-soon-as-the-screws-were-tightened-on-the-buses/article-81241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/transport-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की ओर से चलाए गए विशेष अभियान में 18 हजार से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की गई। इससे विभाग को 6.91 करोड़ रुपए का राजस्व मिला।</p>
<p>जानकारी के अनुसार परिवहन आयुक्त डॉ. मनीषा अरोड़ा के निर्देश पर विभाग की ओर से 22 से 31 मई तक दूसरे राज्यों में पंजीकृत वाहनों व नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इसमें 18 हजार 242 वाहनों पर कार्रवाई की गई। इससे विभाग को 6.91 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। </p>
<p><strong>किस के कितने चालान<br /></strong> विभाग की टीम ने बिना नंबर प्लेट के 106, बिना परमिट के 474, मानकों के अनुरूप नंबर प्लेट के 327,  एचएसआरपी लगाए बिना चल 161, वैध प्रोटाटाइप का उल्लंघन करने पर 2317, चेसिस नंबर काटकर डिग्गी बनाने पर 33, निर्धारित सीट से ज्यादा सीट बढ़ाने पर 50, रोडवेज के समान कलर पर 6, बिना वैध स्पीड गर्वनर के 229, रिफ्लेक्टर टेप नही होने पर 1470, क्षमता से अधिक सवारियां बिठाने पर 317, बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के 1048, परमिट की शर्तो का उल्लंघन करने पर 449, बिना समय सारणी के संचालित होने पर 19, अवैध पार्किंग करने पर 55, छतों पर माल ढ़ोने पर 88, नागालैंड में पंजीकृत 75, अरूणाचल में पंजीकृत 179, मध्यप्रदेश में पंजीकृत 94 व अन्य राज्यों में पंजीकृत 169 वाहनों के चालान बनाए गए। वहीं राजस्थान में पंजीकृत बसों में गड़बड़ियों के चलते 257 चालान बनाए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 12:05:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहकारिता में नए जिलों से कामकाज, राजस्व सीमा के अनुसार होगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग स्तरीय, अतिरिक्त रजिस्ट्रार कार्यालयों एवं क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी कार्यालयों की अधिकारिता निर्धारित की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-co-operation-work-will-be-done-from-new-districts-as/article-80541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/sahkar.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्ववर्ती कांगेस सरकार के कार्यकाल में नए जिलों और संभागों का गठन करने के बाद अब सहकारिता विभाग ने कार्य व्यवस्था में बदलाव करते हुए नए जिलों के आधार पर ही कामकाज करने के अधिकारियों को निर्देश दिए है। </p>
<p>अतिरिक्त रजिस्ट्रार (प्रथम) राजीव लोचन की ओर से जारी आदेश के अनुसार राज सहकार एप पर राजस्व सीमाओं के आधार पर संभाग व जिलानुसार पत्रावलियों का संचालन व संधारण किया जाए। संभाग स्तरीय, अतिरिक्त रजिस्ट्रार कार्यालयों एवं क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी कार्यालयों की अधिकारिता निर्धारित की गई है। अलवर और भीलवाडा जिले अपने अपने पूर्व संभागों क्रमशः भरतपुर और अजमेर की अधिकारिता में ही कार्य करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jun 2024 20:05:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनदेखी के चलते लगभग 3 करोड़ के राजस्व की हानि </title>
                                    <description><![CDATA[ चाहे ग्रामीण क्षेत्र के गरीब काश्तकार हों, या शहरी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता, किसी भी व्यक्ति को बिजली विभाग द्वारा राहत नहीं दी जा रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/loss-of-revenue-of-about-rs-3-crore-due-to-negligence/article-73903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/andhekhi-k-chlte-lagbhag-3-crore-k-rjasav-ki-hani...rawatbhata,-kota-news-28-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। उपखंड क्षेत्र में अजमेर विद्युत वितरण निगम और राजस्थान स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की ओर से बकायादारों के बिजली बिलों के भुगतान नहीं होने पर कई जगह उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए। लेकिन सरकारी विभागों पर बकाया बिजली बिलों की तरफ से निगम के आंखें मूंद लेने से सरकार को लगभग तीन करोड़ के राजस्व की हानि होने की संभावना है।  जानकारी के अनुसार मार्च क्लोजिंग को देखते हुए बिजली विभाग द्वारा क्षेत्र में वसूली की प्रक्रिया निरंतर चलाई जा रही है। चाहे ग्रामीण क्षेत्र के गरीब काश्तकार हों, या शहरी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता। किसी भी व्यक्ति को बिजली विभाग द्वारा राहत नहीं दी जा रही। जबकि सरकारी कार्यालयों पर निगम के लगभग 2.63 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं। लेकिन निगम की ओर से जिस प्रकार की सख्ती आम व गरीब उपभोक्ताओं पर दिखाई जा रही है, उतनी ही सरकारी कार्यालयों पर मेहरबानी की जा रही है। आम उपभक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हैं। गरीब किसानों के ट्रांसफॉर्मर उतारे जा रहे हैं। लेकिन सरकारी कार्यालयों की तरफ से लगातार आंखें मूंदी जा रही हैं। सरकारी कार्यालयों को दी जा रही छूट के नतीजे में इन पर निगम का 2.63 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है।</p>
<p><strong>ये विभाग हैं मुख्य बकायादार </strong><br />सभी सरकारी कार्यालयों पर बिजली विभाग की लाखों की राशि बकाया है। जिनमें मुख्य रूप से बाडोलिया पंचायत पर 10 लाख रुपए, झालर बावड़ी पंचायत पर 14.78 लाख रुपए, नगर पालिका रावतभाटा पर 17 लाख रुपए, नगर पालिका आॅफिस, ट्यूबवेल और रोड लाइट के 60 लाख, जल संसाधन विभाग पर लगभग 5 लाख, पुलिस विभाग पर 5 लाख रुपए और अन्य कई कार्यालयों पर कुल 2.63 करोड रुपए बकाया हैं। लेकिन अभी तक वसूली नहीं हो पाई।</p>
<p>जिस मकान में मैं किराएदार के रूप में रहता हूं, उस मकान की बकाया राशि का बिल 2 दिन पूर्व ही आया था। तारीख निकल जाने के तुरंत बाद ही बिजली कनेक्शन काट दिया गया।<br /><strong>- अब्दुल, किराएदार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />मेरे पड़ोसी अजय कुमार व महेंद्र कुमार का बिल बकाया होने के कररण बिजली विभाग ने तुरंत कनेक्शन काट दिया। जबकि सरकारी विभागों के बकाया राशि होने पर  ऐसी कार्रवाई नहीं की जाती। <br /><strong>- पवन श्रीवास्तव, रावतभाटा निवासी</strong></p>
<p>लक्ष्य के मुताबिक वसूली अभियान जारी है। लेकिन सरकारी विभागों पर निरंतर बकाया चल रहा है। विभाग की ओर से इन्हें निर्देशित कर बकाया राशि वसूल की जाएगी।<br /><strong>- महावीर बंैसला, कनिष्ठअभियंता, बिजली विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Mar 2024 17:08:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुरक्षा के नाम चालान से कमाए 51 लाख रुपए, हालात में सुधार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क पर फिर से नियमों की अनदेखी शुरु हो चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/--earned-rs-51-lakh-from-challan-in-the-name-of-security--situation-is-not-improving/article-71627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/suraksha-k-naam-chalan-s-kmaye-51-lakh-rupaye,-halat-me-sudhar-nhi...kota-news-02-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा समेत राज्य के सभी जिलो में गत माह राजस्थान पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा सड़क सुरक्षा माह अभियान चलाया गया था। जिसमें संयुक्त रुप से कारवाई करते हुए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान बनाए। साथ ही लगातार एक महीने तक चली कारवाई में परिवहन विभाग द्वारा विभिन्न मामलों में करीब 1 हजार 94 चालान बनाए गए। जिसके साथ ही कोटा परिवहन विभाग ने लाखों रुपए का राजस्व भी इकठ्ठा किया। लेकिन परिवहन विभाग की कार्रवाई और समझाइश का कोई असर नजर नहीं आ रहा। लोग अभी भी नियमों की अवहेलना करते दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा बिना हेलमेट ओवर सीटिंग के चालान</strong><br />पविहन विभाग द्वारा की गई कारवाई के अनुसार शहर में सबसे ज्यादा चालान बिना हेलमेट और आॅवर सिटिंग के बनाए गए। वहीं कुछ वाहनों के एक से अधिक उल्लघंनों के भी चालान बनाए गए। जिसमें गति सीमा से अधिक पर वाहन चलाने सीट बेल्ट ना बांधने बिना लाइसेंस के वाहन चलाने समेत कई तरह के चालान बनाए गए। विभाग द्वारा बनाए चालानों में से करीब 250 चालान बिना हेलमेट व आॅवर सीटिंग के रहे। करीब इतने ही चालान गति सीमा व और सीट बेल्ट के उल्लघंन के चालान रहे। जिससे विभाग को करीब 51 लाख 36 हजार रुपए का राजस्व विभाग द्वारा इकठ्ठा किया गया।</p>
<p><strong>फूल देकर की थी समझाइश</strong><br />राजस्थान परिवहन विभाग द्वारा इस बार कारवाई व अभियान के दिन बढ़ाने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा सप्ताह की सड़क सुरक्षा माह मनाया गया। जिसमें विभाग ने लोगों की अलग अलग माध्यमों और तरीकों जैसे फूल देना, नुक्कड़ नाटक, सभा व रैली से समझाइश की। </p>
<p><strong>अभियान का असर खत्म</strong><br />विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा माह के तहत करीब एक माह तक तो यातायात नियमों का उल्लघंन करने वालों पर कारवाई व समझाइश की लेकिन अभियान के खत्म होने के मात्र 5 दिन बाद ही शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की जमकर अवहेलना हो रही है। सड़क पर फिर से नियमों की अनदेखी शुरु हो चुकी है। कारवाई सिर्फ अपने राजस्व के टारगेट को पूरा करने और अभियान तक ही सीमित है, क्योंकि बिना अभियान के शहर की सड़कों पर नियमों की अवहेलना करने वालों पर कारवाई करने वाला कोई नजर नहीं आता।</p>
<p>सड़क सुरक्षा माह के दौरान विभाग द्वारा लोगों को समझाइश के साथ उचित कारवाई की गई है, वहीं विभाग द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निरंतर कारवाई की जा रही है जो आगे भी जारी रहेगी। <br /><strong>- दिनेश सिंह सागर, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 19:45:34 +0530</pubDate>
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