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                <title>Middle East Geopolitics 2026 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Middle East Geopolitics 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इज़रायल के पूर्व PM का बड़ा हमला, बोले- ईरान नहीं, कतर है सबसे खतरनाक दुश्मन, देश को अंदर से कर रहा कमजोर</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेट ने कतर को देश के अस्तित्व के लिए ईरान से भी बड़ा खतरा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कतर आतंकवाद और प्रभाव की राजनीति के जरिए इजरायल को अंदर से कमजोर कर रहा है। बेनेट ने आगामी चुनाव जीतने पर कतर को आधिकारिक रूप से 'दुश्मन देश' घोषित करने का संकल्प जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israels-former-pms-big-attack-qatar-is-not-iran-the/article-161733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/pm.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलम। इज़रायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेट ने कतर को ईरान से भी "ज़्यादा खतरनाक" बताते हुए उसे यहूदी देश के अस्तित्व के लिए एक और संभावित खतरा करार दिया है। 'बेयाहाद' पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बेनेट ने चैनल 12 को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "ईरान के मामले में तो हर कोई जानता है कि वह कहता है, 'हम इज़रायल को बर्बाद कर देंगे।'" उन्होंने कहा कि कतर हालांकि, "कहीं ज़्यादा खतरनाक देश" है। उन्होंने बताया कि दोहा ने "सात अक्टूबर के नुखबा आतंकवादियों को फंड दिया... कतर अल-जज़ीरा चलाता है, जो हमें नुकसान पहुँचाने वाला सबसे ज़हरीला कैंसर है... कतर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रभावशाली जगहों तक पहुँच रखता है और सबसे अहम बात इज़रायल की सुरक्षा के लिए सबसे पवित्र जगह यानी इज़रायल के प्रधानमंत्री के कार्यालय तक उसकी पहुँच है।"</p>
<p>यह बात प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व और मौजूदा सहयोगियों (जिनमें वरिष्ठ सहयोगी जोनाथन उरिच भी शामिल हैं) की ओर इशारा करती है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सात अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी हमले के एक साल बाद खाड़ी देश की सकारात्मक छवि बनाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाने के बदले पैसे लिए थे। बेनेट ने कहा कि कतर इज़रायल के खिलाफ़ सक्रिय रूप से काम कर रहा है और "हमें अंदर से ज़हर दे रहा है।" उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यरूशलम कतर को राष्ट्रीय दुश्मन नहीं मानता, जबकि वह देश को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाले गुटों का लगातार समर्थन करता रहा है।</p>
<p>उन्होंने समाचार एजेंसी से कहा, "आज के कानून के मुताबिक, कोई भी कतर के लिए काम कर सकता है। आप कतर के एजेंट हो सकते हैं।" "इज़रायल के सबसे खतरनाक दुश्मन को 'दुश्मन (देश)' के तौर पर परिभाषित नहीं किया गया है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कई इज़रायली कतर से पैसे ले रहे हैं और कतर के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अंदरूनी तौर पर काम कर रहे हैं। "इज़रायल में ऐसे रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं, इन्फ्लुएंसर हैं और शायद अधिकारी भी हैं जो कतर से पैसे ले रहे हैं।" उन्होंने वादा किया कि अगर वे 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो वे कतर को औपचारिक रूप से "दुश्मन" घोषित करेंगे। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि ऐसा अभी तक न होना "माफ़ न करने लायक" बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 12:17:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव, गाजा युद्ध के बाद नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनता की अग्निपरीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल की संसद ने आगामी आम चुनाव 27 अक्टूबर को कराने की आधिकारिक घोषणा की है। गाजा युद्ध के बाद इसे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत-संग्रह माना जा रहा है। गठबंधन सरकार दशकों में पहली बार अपना चार साल का पूर्ण कार्यकाल समाप्त कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/general-elections-in-israel-on-october-27-publics-litmus-test/article-159681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/benjamin-scaled.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलम। इजरायल में आम चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे। देश की संसद ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि कानून के तहत निर्धारित अंतिम तिथि पर चुनाव कराये जाएंगे। इन चुनावों को वर्ष 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत-संग्रह के रूप में देखा जा रहा है। इज़राइल की संसद का वर्तमान कार्यकाल 17 जुलाई को समाप्त होने वाला है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को कई दशकों में पहली बार अपना पूर्ण चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>संसद ने कहा, वर्तमान कनेसेट अपना पूरा कार्यकाल पूरा कर रही है और अगला आम चुनाव कानून के अनुसार 27 अक्टूबर को पहले से निर्धारित है। चूंकि संसद का कार्यकाल समय से पहले समाप्त करने का कोई इरादा नहीं है, इसलिए कनेसेट भंग करने के लिए अलग कानून लाने की आवश्यकता नहीं है। इज़रायल के 76 वर्षीय प्रधानमंत्री नेतन्याहू सबसे लंबे समय तक इस पद पर बने रहने वाले नेता हैं। उन्होंने एक बार फिर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। देश के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकारों में शामिल नेतन्याहू सरकार चुनाव से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से कई विधेयकों को पारित कराने में जुटी हुई है। </p>
<p>पिछले महीने नेतन्याहू ने कहा था कि उनका लक्ष्य ऐसी व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाना है, जो न तो दक्षिणपंथी हो और न वामपंथी तथा जिसे अरब दलों के समर्थन पर निर्भर न रहना पड़े। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू वैचारिक राजनीति से हटकर राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर चुनावी अभियान केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि हालिया जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश इजरायली नागरिक उनको सत्ता से हटाने के पक्ष में दिखाई दिये हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रहे हैं। </p>
<p>इजरायल में फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष विराम को लेकर भी सरकार की आलोचना हुई थी। कई लोगों का मानना था कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुआ समझौता इजरायल के हित में नहीं था। इसके अलावा सात अक्टूबर 2023 को हमास के दक्षिणी इजरायल पर हमलों से पहले सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर भी नेतन्याहू सरकार के खिलाफ असंतोष अब भी बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 13:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा टकराव: ट्रंप ने खत्म किया ईरान के साथ युद्धविराम, मध्य-पूर्व में बढ़ी जंग की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तीन हफ्ते पुराने युद्धविराम समझौते को पूरी तरह समाप्त घोषित कर दिया है। दोनों देशों के बीच जारी ताजा सैन्य संघर्षों और जवाबी हमलों के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-iran-conflict-escalates-again-trump-ends-ceasefire-with-iran-fear/article-159222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump1.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तीन सप्ताह पहले हुए युद्धविराम समझौते को "समाप्त" घोषित करते हुए कहा है कि यह समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। इसके व्यावहारिक परिणामों को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ट्रंप ने अंकारा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि युद्धविराम समझौता अब खत्म हो चुका है। पिछले महीने उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि संघर्ष जारी रहा तो दोनों पक्षों को "आर्थिक तबाही" का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>युद्धविराम के बावजूद हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों को 'आदेशों को अनसुना' करने के लिए निशाना बनाया, जबकि अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किये। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गयी।</p>
<p>इन हमलों के बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ट्रंप इससे पहले समझौते के उस महत्वपूर्ण प्रावधान को भी वापस ले चुके हैं, जिसके तहत ईरान को वैश्विक बाजार में अपना तेल बेचने की अनुमति दी गयी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अपने वार्ताकारों को ईरान के साथ व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखने की अनुमति देंगे, लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया को "समय की बर्बादी" करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:21:32 +0530</pubDate>
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