<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/craze/tag-8157" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>craze - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/8157/rss</link>
                <description>craze RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रील के लिए मगरमच्छ से बैर ले रहे युवा, सोशल मीडिया पर वायरल होने की सनक में वन्यजीव संरक्षण कानून का कर रहे खुला उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong> केस-1 : पैरों से मुंह दबाकर मगरमच्छ को दबोचा</strong><br />नया नोहरा इलाके में दीपावली से एक दिन पहले रविवार को सड़क पर 4 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया था। लोगों को देख वह भागने लगा तो लोग भी उसके पीछे दौड़ने लगे। इस बीच एक युवक ने मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर रेस्क्यू किया। जिसे बाद में नहर में छोड़ा गया।  </p>
<p><strong>केस-2 : 80 किलो के मगर को कंधों पर उठाया</strong><br />इटावा के बंजारी गांव में एक घर में 8 फीट लंबा मगरमच्छ घुस गया था। जिसे रेस्क्यू करने पहुंचे हयात खान ने उसे पकड़ा और 80 किलो वजनी मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर ले गया। जिसे बाद में चंबल नदी में छोड़ा गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। </p>
<p><strong>केस-3 : गोदी में मगर को उठाकर फोटोशूट करवाया</strong><br />देवली अरब क्षेत्र में शुक्रवार देर रात कुछ युवक मगरमच्छ  गोद में लेकर हंसी ठिठोली कर खेलते नजर आए। इसी तरह कोटड़ी क्षेत्र में आए मगरमच्छ को लोगों ने पकड़कर कंधों पर उठा लिया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। लोग वन विभाग की टीम को सूचना देने के बजाए रील्स बनाने के लिए खुद ही रेस्क्यू कर रहे हैं।</p>
<p>शेड्यूल वन के वन्यजीवों के साथ रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज युवाओं और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स  बटोरने की होड़ में युवा, न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कानून को ठेंगा दिखा रहे बल्कि अपनी जान भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे। रील्स, मीम और लाइक-कमेंट की सनक में वन्यजीवों को उकसाते और उनके प्राकृतिक आवास में घुसपैठ करते हैं, जिससे इंसान व जानवरों के बीच संघर्ष के गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। कोटा जिले में इन दिनों युवाओं का मगरमच्छ के साथ रील बनाने का खतरनाक शौक बन गया है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कोई गोदी में लेकर मगरमच्छ के साथ खेल रहा तो कोई भारी-भरकम मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर वाहवाही लूट रहा। वहीं, सड़कों पर मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर काबू करने का साहस दिखा रहे। इन हरकतों से युवा खुद के साथ न केवल वन्यजीव की जान खतरे में डाल रहे बल्कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम  का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं। </p>
<p><strong>3 से 7 साल की सजा का प्रावधान</strong><br />मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इनको गोदी व कंधों पर उठाकर रील्स बनाना, इनके साथ मारपीट व हंसी ठिठोली करना अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 का खुला उल्लंघन है। जिसमें 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, 10 हजार से 1 लाख तक का जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। </p>
<p><strong>अपने साथ मगर की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे</strong><br />सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियों में युवा, मगरमच्छ को पकड़ते, मुंह पर टेप लगाते व दौड़ाकर रेस्क्यू करने का नाटक करते नजर आए हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देने के बजाय खुद हीरो  बनने की चाहत में न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं बल्कि मगरमच्छों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन रहे हैं।</p>
<p><strong>कानून की अनदेखी और विभाग की चुप्पी</strong><br />वन विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में न तो जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सजा और जुर्माने की कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा देती हैं और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती हैं।</p>
<p><strong>फॉलोअर्स की होड़ में उड़ाई जा रही कानून की धज्जियां</strong><br />युवाओं में सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने और वायरल  होने की सनक इतनी हावी है कि वे वन्यजीवों के प्रति करुणा और कानून दोनों भूल बैठे हैं। फॉरेस्ट अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वन्यजीवों को खतरा</strong><br /><strong>व्यवहार में बदलाव: </strong>रील्स के लिए वन्यजीवों को परेशान करने से उनका प्राकृतिक व्यवहार बदल सकता है। बार-बार होने वाली घुसपैठ से वे तनाव में आ सकते हैं, जिससे उनके खाने, शिकार करने और प्रजनन के तरीकों पर असर पड़ सकता है।<br /><strong>तनाव और चोट: </strong>वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में परेशान करने से उनमें तनाव पैदा होता है, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं या घायल हो सकते हैं।<br /><strong>हैबीटाट लॉस:</strong> इंसानों की मौजूदगी और रील्स की शूटिंग के दौरान होने वाली गतिविधियों से जानवरों के आवास को नुकसान पहुंचता है, जिससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है।<br /><strong>मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि: </strong>जब जानवर इंसानों के साथ संघर्ष करते हैं, तो अक्सर इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है। ऐसी घटनाएं वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ाती हैं। </p>
<p><strong>यह हो सकते हैं समाधान</strong><br /><strong>जन जागरूकता अभियान:</strong> सोशल मीडिया के जरिए वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए। <br /><strong>सख्ती से लागू हो कानून:</strong> सरकार को वन्यजीवों को परेशान करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए।<br /><strong>शिक्षण और जागरूकता:</strong> स्कूलों और कॉलेजों में वन्यजीव संरक्षण की शिक्षा देना चाहिए ताकि युवा इसके प्रति जागरूक हो सकें। </p>
<p><strong>वन्य जीव प्रेमी बोले</strong><br />वन्यजीव को छेड़ना, पकड़ना, हंसी ठिठोली करना या वाइल्ड एनीमल्स के साथ रील बनाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी है। जागरूकता की कमी और सोशल मीडिया की लालसा मिलकर एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है। युवाओं को इससे बचना चाहिए। वन विभाग को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p>रील की कुछ सेकंड की लोकप्रियता पाने के लिए युवाओं की यह नादानी उन्हें कानूनी सजा, शारीरिक चोट या मौत के खतरे तक पहुंचा सकती है। वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं कि वन्यजीव खिलौना नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इसके साथ छेड़छाड़ करना वन्यजीव अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन है। वन विभाग को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, विभाग कार्रवाई नहीं करता क्योंकि यह लोग विभाग का काम कर देते हैं। कार्रवाई होगी तो रेस्क्यू के लिए वन विभाग को काम करना पड़ेगा, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए एक्शन नहीं करते। नतीजन, ऐसे मामलों की पुनरावृति बढ़ती है।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>वाइल्ड लाइफ के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। अवेयरनेस बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में वाइल्ड लाइफ सप्ताह में भी स्कूल व कॉलेज में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया है।  वहीं, इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p>वन्यजीवों के साथ रील्स बनाना, सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो अपलोड करना गैर कानूनी है। इसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि, आबादी क्षेत्र में वन्यजीव नजर आए तो वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए, हमारी टीम तुरंत रेस्क्यू करने पहुंचेगी। <br /><strong>- सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525</guid>
                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:56:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/y-of-news-%282%2914.png"                         length="300152"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्टेटस सिंबल बने चांदी के मोबाइल कवर, युवा वर्ग में बढ़ने लगी डिमांड </title>
                                    <description><![CDATA[युवाओं के बीच बढ़ते क्रेज को देखते हुए अब सर्राफा कारोबारी आकर्षक डिजाइन वाले चांदी के मोबाइल कवर बनवा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/silver-mobile-covers-have-become-a-status-symbol/article-101544"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्टेटस सिंबल दिखाने के लिए आजकल महंगा मोबाइल खरीदने का चलन बढ़ने लगा है। अधिक दाम वाला मोबाइल स्टेटस सिंबल का प्रतीक माना जाने लगा है। इसी को देखते हुए अब सर्राफा बाजार में चांदी के मोबाइल कवर की डिमांड बढ़ने लगी है। भले ही चांदी की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद युवा वर्ग चांदी से बने मोबाइल कवर को खरीदारी कर रहे हैं। युवाओं के बीच बढ़ते क्रेज को देखते हुए अब सर्राफा कारोबारी आकर्षक डिजाइन वाले चांदी के मोबाइल कवर बनवा रहे हैं। युवाओं को भी स्टाइलिश लुक कवर पसंद आते हैं। </p>
<p><strong>चांदी शुभ इसलिए बढ़ी खरीदारी</strong><br />सर्राफा कारोबारी प्रमोद कुमार ने बताया कि महानगरों की तर्ज पर अब युवा चांदी के मोबाइल कवर लेना पसंद कर रहे हैं। चांदी के मोबाइल कवर पर वर्क किया गया है। चांदी के मोबाइल कवर लेने की खास वजह यह है कि चांदी पहनना शुभ माना जाता है। जिस तरह से चांदी का छल्ला, चांदी का कड़ा, चांदी की चैन पहनते हैं, जो शरीर से जुड़ी रहती है, उसी तरह से अब मोबाइल कवर ले रहे हैं जो हर समय हाथ में रहता है। युवा वर्ग की बढ़ती मांग को देखते हुए विभिन्न तरह के डिजाइनदार मोबाइल कवर तैयार करवाए जाते हैं। अधिकांश युवा महंगे मोबाइल में इसका उपयोग करते हैं।</p>
<p><strong>बंगाली कारीगर करते हैं तैयार</strong><br />सर्राफा कारोबारियों के अनुसार चांदी पर बारीक नक्काशी  बंगाली कारीगरों द्वारा की जाती है। बंगाली कारीगरों को नक्काशी करने में महारत हासिल होती है। ऐसे में अधिकांश कारोबारी इन्ही से डिजाइनदार कवर तैयार करवाते हैं। इन मोबाइव कवर के दाम अलग-अलग होते हैं। कवर में जितनी चांदी के वर्क का इस्तेमाल किया जाता है। उस हिसाब से दाम तय किया जाते हैं। कवर पर बारीक नक्काशी को बनाने में काफी समय लगता है। चांदी के बर्तन और गिफ्ट तो पहले से बिकते आ रहे हैं। अब यहां के कारीगरों द्वारा चांदी के मोबाइल कवर, चांदी के पेन और मोर पंख भी तैयार किए जा रहे  हैं।</p>
<p><strong>क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र</strong><br />ज्योतिष शास्त्री तपेश कुमार के अनुसार चांदी चंद्रमा मन का कारक है और भाग्य का देवता है। शुक्र सुख का कारक है। जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर है, उनको चांदी धारण करनी चाहिए। शुक्र ग्रह को प्रभावशाली बनाने के लिए भी चांदी पहनी जाती है। चांदी हाथ में होना शुभ होता है। इसलिए यदि मोबाइल के लिए चांदी का कवर ले रहे हैं तो असका असर जीवन पर पड़ता है। अधिकतर लोग यह मानते हैं कि ग्रहों की शांति के लिए हर मनुष्य को चांदी ग्रहण करनी चाहिए। इस सोच के चलते लोग चांदी के मोबाइल कवर भी खरीद रहे हैं। </p>
<p>ज्योतिष ने चांदी की वस्तु खरीदारी की सलाह दी थी। उसे सर्राफा बाजार में चांदी के मोबाइल कवर बिकने की जानकारी मिली थी। इस कारण उसने अपने कुछ दोस्तों के साथ जाकर यह कवर खरीदा है।<br /><strong>- शुभम सिंह, युवा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/silver-mobile-covers-have-become-a-status-symbol/article-101544</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/silver-mobile-covers-have-become-a-status-symbol/article-101544</guid>
                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 16:27:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/257rtrer-%284%2916.png"                         length="528054"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतंग बाजार सजा, पुष्पा-2 की थीम का आसमान में दिखेगा क्रेज</title>
                                    <description><![CDATA[रंग बिरगी झालर, स्पाइडरमैन व कार्टून वाली पतंगों की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kite-market-decorated--craze-for-pushpa-2-theme-will-be-seen-in-the-sky/article-97604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिसंबर का प्रथम पखवाड़ा शुरू होते ही शहर में मकर संक्रांति पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन दिनों बाजार में रंग बिरंगी पतंगों का बाजार सजने लगा है। इस बार पुष्पा -2 झुकेगा नहीं वाली पतंगे बाजार में डिमांड में है। इसके अलावा छोटा भीम, मोटू पतलू और डोरेमोन पतंगे बच्चों को लुभाने आ गई है। इस बार डोरेमोन व छोटा भीम पुष्पा -2 से मुकाबला करेंगी। इसके अलावा इस बार रंग बिरगी झालर वाली पतंगों के साथ कई नए कार्टून कैरेक्टर और नववर्ष 2025 के स्वागत की पतंगें बाजार में आई है। शहर के गुमानपुरा, रामपुरा, चौथमाता बाजार में पतंग बाजार सजने लगे हैं। आसमान में शाम के समय अब पतंगे दिखाई देनी शुरू हो गई हैं।  </p>
<p><strong>5 रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पतंगें उपलब्ध</strong><br /> इस बार बाजार में कई तरह की नई पतंगे आई है। पतंग विक्रेता मनीष जैन ने बताया कि  दो फीट की पतंग 50 रुपए में बिक रही है। इसके अलावा कार्टून केरेक्टर छोटा भीम, स्पाइडरमैन, बाहुबली, डोरेमोन, जादू वाली पतंगे बाजार में मौजूद है। बाजार में मांझा 10 रुपए से लेकर 500 रुपए तक मौजूद है। इस बार पतंगों में मुख्य आकर्षण राम मंदिर, छोटू पतलू, एग्री बर्ड, तिरंगा, घर तिरंगा पतंग भी आई हुए है। तीन रुपए से लेकर 50 रुपए तक पतंगे बाजार में उपलब्ध है। पतंगबाजी सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे तक नहीं उड़ाएं। इन दोनों समय में पक्षियों का आसमान में विचरण समय होता है। </p>
<p><strong>प्रिंटेड पतंगों का भी क्रेज</strong><br />बच्चों में कार्टून किरदार वाले पतंगों की खूब मांग है। पतंगों पर बेन टेन, बार्बी, छोटा भीम, स्पाइडर मैन, शिवा, कृष्णा कार्टून के चित्र बने हुए हैं। बाजार में  जयपुर, रामपुर की प्रिंटेड पतंगों का क्रेज सबसे अधिक है। पिछली बार के मुकाबले दाम में बहुत अंतर नहीं है। पांच रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पतंगे बाजार में हैं।  </p>
<p><strong>बरेली का मांझा की  डिमांड ज्यादा</strong><br />पंतग विक्रेता मनीष जैन ने बताया कि इस बार बाजार में बरेली का मांझा ज्यादा बिक रहा है।  बरेली का मांझा 250 रुपए से लेकर 500 रुपए तक बिक रहा है। वहीं इस बार कई फैन्सी चरखी आई है। इसके साथ  तिरंगा यात्रा वाली पतंग, स्वच्छता के संदेश वाली पतंगे ज्यादा आई है। </p>
<p><strong>नायलोन और चाइनीज मांझा रोज चार से पांच पक्षियों को कर रहा घायल</strong><br />इस बार बाजार में चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है।  जिसके कारण रोज चार से पक्षी घायल हो रहे है। दुकानदारों के पास स्पेशल मांग पर ये नायलोन व चाइनीज माझा उपलब्ध  रहा है। लेकिन इस बार दुकानदार धातु निर्मित मांझे की बिक्री लेकर सावचेत नजर आ रहे हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं ने लोगों से अपील की है कि पतंगबाजी सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे तक नहीं उड़ाएं। इन दोनों समय में पक्षियों का आसमान में विचरण समय होता है। </p>
<p><strong>एक साल में 1200 से ज्यादा पक्षी हो चुके घायल</strong><br />मनोज आदिनाथ ने बताया कि रोज तीन चार पक्षी रोज घायल होकर आ रहे है। पूरे साल घायल पक्षी आ रहे है। पिछले साल मकर संक्राति के दौरान 170 पक्षी घायल हुए थे। पूरे साल भर में 1200 से अधिक पक्षी घायल हो चुके है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मकर संक्रांति पर पर्व पक्षी घायल होकर ज्यादा आते है। वैसे तो पूरे साल ही रोज तीन चार पक्षी घायल होकर आ  रहे है। पतंगबाजी के दौरान पक्षी ज्यादा घायल होते है। उनके विचरण के समय ध्यान रखा जाए तो इनको घायल होने से बचाया जा सकता है।<br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडेय, उपनिदेशक पशु चिकित्सालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kite-market-decorated--craze-for-pushpa-2-theme-will-be-seen-in-the-sky/article-97604</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kite-market-decorated--craze-for-pushpa-2-theme-will-be-seen-in-the-sky/article-97604</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 17:28:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/257rtrer30.png"                         length="546881"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में धोनी का क्रेज, चेन्नई मैच अभी से हाउसफुल</title>
                                    <description><![CDATA[आईपीएल मैचों की स्टेडियम में काउंटर सेल की खबरों के बाद बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी रविवार को स्टेडियम पहुंच गए। स्टेडियम में अमर जवान ज्योति और नॉर्थ गेट पर टिकट चाहने वालों की भीड़ लग गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/dhonis-craze-in-jaipur-chennai-match-is-already-houseful/article-42281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-132.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तीन साल बाद जयपुर में हो रहे आईपीएल मैचों के प्रति गुलाबी नगर के क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है। सबसे ज्यादा क्रेज है पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स का। राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर सिंग्स के मध्य 27 अप्रैल को सवाई मानसिंह स्टेडियम में होने वाला मुकाबला अभी से हाउस फुल हो गया है। जयपुर मैचों की आन लाइन बुकिंग कर रही वेबसाइट पर अभी से इस मैच के टिकट सोल्ड आउट बताए जा रहे हैं। क्रिकेट प्रेमियों को अन्य मैचों के टिकट भी आनलाइन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।</p>
<p><strong>धोनी के दीवाने हैं गुलाबी नगर के क्रिकेट प्रेमी</strong><br />जयपुर के क्रिकेट प्रेमी धोनी के दीवाने रहे हैं। जयपुर में 2005 में श्रीलंका के खिलाफ एकदिनी मैच में धोनी की 183 रनों की धुआधार पारी जयपुर के क्रिकेट प्रेमियों को आज भी याद है। इस शानदार पारी के जरिये धोनी ने भारत को जीत दिलाई और खुद स्टार बन गए। इस मैच में श्रीलंका ने 4 विकेट पर 298 रनों का मजबूत स्कोर बनाया लेकिन धोनी की आतिशी पारी के समक्ष यह स्कोर बोना बन गया। धोनी ने 145 गेंदों पर 15 चौके और 10 छक्के लगा नाबाद 183 रनों की रिकॉर्ड पारी खेल भारत को छह विकेट से जीत दिलाई। </p>
<p><strong>टिकट की चाहत में स्टेडियम पहुंचे क्रिकेट प्रेमी</strong><br />आईपीएल मैचों की स्टेडियम में काउंटर सेल की खबरों के बाद बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी रविवार को स्टेडियम पहुंच गए। स्टेडियम में अमर जवान ज्योति और नॉर्थ गेट पर टिकट चाहने वालों की भीड़ लग गई। लोग आरसीए के दफ्तर भी पहुंच गए। सुरक्षा के लिए पुलिस भी बुलानी पड़ी और लोगों को समझाकर वापस भेजा गया।</p>
<p><strong>आज से शुरू हो सकती है काउंटर सेल</strong><br />राजस्थान रॉयल्स के लोगों ने बताया कि टिकटों की काउंटर सेल संभवत: सोमवार से शुरू की जाएगी। हम सोमवार सुबह 11 बजे से स्टेडियम के अमर जवान ज्योति वाले गेट और नॉर्थ गेट पर दो काउंटर लगाने पर विचार कर रहे हैं। इन काउंटर्स से लोग मैचों के उपलब्ध टिकट हासिल कर सकते हैं। </p>
<p><strong>तैयारी में जुटा आरसीए</strong><br />इस बीच एसएमएस स्टेडियम में मैच की तैयारियों जोरशोर से चल रही हैं। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत तीन साल बाद जयपुर में हो रहे आईपीएल मैचों के आयोजन में कोई कमी नहीं रखना चाहते। आरसीए चाहता है कि मैचों के दौरान दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और वे ज्यादा से ज्यादा मैचों का आनन्द ले सकें। आरसीए ने नवम्बर 2021 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 मुकाबले की शानदार मेजबानी की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/dhonis-craze-in-jaipur-chennai-match-is-already-houseful/article-42281</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/khel/dhonis-craze-in-jaipur-chennai-match-is-already-houseful/article-42281</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 10:38:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-04/a-132.png"                         length="170178"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बॉक्सिंग में दिखाई ताकत, नाम किया रोशन</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के कई युवा खिलाड़ी बॉक्सिंग के दम पर अपनी पहचान बना चुके हैं। कोटा में बॉक्सिंग के पर्याप्त सुविधाओं का अभाव होने से खिलाड़ियों को परेशानी होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shown-strength-in-boxing--kota-s-name-was-illuminated/article-23104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/boxing-mai-dikha-i-takat-kota-ka-nama-kiya-roshan-,-kota-news-17-09-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बॉक्सिंग, खेलों का लंबे समय से हिस्सा रहा है, इसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक माना गया है। दुनिया भर में इस खेल का तेजी से विकास हुआ। बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह थे, जिन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों के मिडिलवेट (75 किग्रा) वर्ग में कांस्य पदक जीता था। नेशनल स्तर पर भारत की धाक कायम होने के बाद राजस्थान सहित कोटा में बॉक्ंिसग का क्रेज बढ़ता चला गया। कोटा के कई युवा खिलाड़ी बॉक्सिंग के दम पर अपनी पहचान बना चुके हैं।</p>
<p><strong>पर्याप्त सुविधाओं की दरकार</strong><br />कोटा में बॉक्सिंग के पर्याप्त सुविधाओं का अभाव होने से खिलाड़ियों को परेशानी होती है। यहां पर नयापुरा स्टेडियम और रेलवे स्टेडियम में बॉक्ंिसग ेका अभ्यास करवाया जाता है। दोनों स्टेडियम में रोजाना 12 से 35 साल के करीब 50 खिलाड़ी अलग-अलग वर्गो में बॉक्ंिसग का नियमित अभ्यास कर रहे हैं। यहां पर मेट की सुविधा तो है, लेकिन वह स्टेट व नेशनल स्तर प्रतियोगिताओं के अनुरूप नहीं है। बॉक्सिंग रिंग की कोटा में कमी है। इस कारण खिलाड़ी पूरी तरह से अभ्यास नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इस खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रोत्साहन की दरकार है। यदि बेहतर रिंग बॉक्स की व्यवस्था हो जाए तो कोटा नेशनल व स्टेट लेवल पर अपनी सफलता का परचम लहरा सकते हैं।</p>
<p><strong>मेहनत के बल पर पाया मुकाम</strong><br />पिछले कुछ सालों में वैसे तो कई खिलाड़ियों में अपनी मेहनत के बल पर बॉक्सिंग में ऊंचा मुकाम हासिल किया है और स्टेट लेवल पर कई पदक भी कोटा की झोली में डाले हैं। कोटा के खिलाड़ी सौरभ गुर्जर, पुष्पेन्द्र सिंह, अनिल कुमार, हेमंत गुर्जर, देवेन्द्र, शिवम सिंह, अभिषेक चौबदार व प्रीतम सिंह सहित कई खिलाड़ी नेशनल लेवल पर जूनियर वर्ग में अपनी बॉक्सिंग का जलवा दिखा चुके हैं। वहीं गांधी नगर गुजरात में 3 से 12 अक्टूबर के बीच होने वाले नेशनल गेम में कोटा के खिलाड़ी वीरेन्द्र ठाकुर, अशोक पवार, जीएस राजू, देवी सिंह व राजीव कुमार सिंह का चयन किया गया है।</p>
<p>बॉक्सिंग में कोटा के खिलाड़ियों ने अपने बेहतरीन खेल से अच्छा मुकाम हासिल कर रखा है। अब तक कई खिलाड़ी अलग-अलग भार वर्गों में कोटा को पदक दिला चुके हैं। अब तो स्कूली स्तर पर भी खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। यदि भामाशाह और सरकार की ओर से पर्याप्त सुविधाएं मिल जाए तो कोटा बॉक्सिंग में सफलता का झंडा लहरा सकता है।<br /><strong>- देवी सिंह, सचिव जिला बॉक्सिंग संघ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shown-strength-in-boxing--kota-s-name-was-illuminated/article-23104</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shown-strength-in-boxing--kota-s-name-was-illuminated/article-23104</guid>
                <pubDate>Sat, 17 Sep 2022 14:37:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-09/boxing-mai-dikha-i-takat-kota-ka-nama-kiya-roshan-%2C-kota-news-17-09-2022.jpg"                         length="31009"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इधर क्रिकेट का बढ़ रहा क्रेज, उधर खेलों के साथ हो रहा खेल </title>
                                    <description><![CDATA[गांव-गांव,गली-गली से क्रिकेटरों की पौध को पेड़ बनाने के लिए कोटा का जेके पवेलियन अंतरराष्टÑीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण हुआ है। इस क्रिकेट स्टेडियम से खेलकर सैंकड़ों खिलाड़ियों ने राष्टÑीय, अंतरराष्टÑीय स्तर पर पहचान बनाई है।  वहीं इस खेल मैदान से एक दर्जन से ज्यादा खिलाड़ियों का रणजी में चयन हो चुका है। लेकिन पिछले पांच वर्षों से क्रिकेट के इस खेल के साथ ही खेल खेला जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-increasing-craze-of-cricket-here--the-game-being-played-with-sports/article-14267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/idhar-cricket-ka-badh-raha-craze.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश के लिए क्रिकेट खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है। कुछ का ये सपना पूरा तो कुछ का अधूरा रह जाता है। वजह है सुविधाओं का अभाव और आर्थिक स्थिति के संकट से गुजरना। शायद इसी कमी को पूरा करने और गांव-गांव , गली-गली से क्रिकेटरों की पौध को पेड़ बनाने के लिए कोटा का जेके पवेलियन अंतर्राष्टÑीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण हुआ है। इस क्रिकेट स्टेडियम से खेलकर सैंकड़ों खिलाड़ियों ने राष्टÑीय, अंतर्राष्टÑीय स्तर पर पहचान बनाई है और कोटा का नाम देशभर में रोशन किया है। शाम होते ही इस खेल मैदान में क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों के खिलाड़ी भी खेलते हुए दिखाई देते है। वर्तमान में इस खेल मैदान पर 200 के करीब खिलाड़ी क्रिकेट का अभ्यास करते है। कोटा के लोगों को इस खेल मैदान में रजवाड़ा क्रिकेट लीग, आरसीएल जैसे अनेक क्रिकेट मुकाबलों के चौके-छक्के देखने को मिलते है। वहीं इस खेल मैदान से एक दर्जन से ज्यादा खिलाड़ियों का रणजी में चयन हो चुका है। लेकिन पिछले पांच वर्षों से क्रिकेट के इस खेल के साथ ही खेल खेला जा रहा है। इस मैदान में अब बल्लेबाजों के चौके-छक्के देखने को बहुत कम देखने को मिलते है। इसे क्रिकेट के खिलाड़ियों में निराशा है। <br /><br /><strong>इन खिलाड़ियों ने खेली रणजी</strong><br />कोटा के खिलाड़ी दिव्य प्रताप, नरेश नामा, अमर सिंह नेगी, दलीप चावला,सुभाशुं विजय, संजय भारती, भारत भूषण ने रणजी में खेलकर कोटा का नाम प्रदेश में ही नहीं देश-विदेश में रोशन किया है। इसके साथ ही इस कड़ी में नए खिलाड़ी परिषेक जांगिड़, विनोद, गर्वित भारद्वाज मोंटी सहित अनेक खिलाड़ी राष्टÑीय स्तर पर खेलकर अच्छा प्रदर्शन कर रहे है। <br /><br /><strong>डिसेबल्ड क्रिकेटर का हुआ सपना पुरा</strong><br />कोटा से डिसेबल्ड क्रिकेट खिलाड़ी नरेन्द्र कुमार शर्मा का भी देश की जर्सी पहनकर खेलने का सपना पुरा हुआ है। नरेन्द्र 16 साल की उम्र से सचिन तेंदुलकर , सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ को आदर्श मानकर सामान्य क्रिकेट खेलने लगे। साल 2018 में उन्होंने डिसेबल्ड क्रिकेट खेलना शुरू किया। इसके बाद बतौर कप्तान राजस्थान डिसेबल्ड क्रिकेट टीम में खेले और अब भारतीय क्रिकेट टीम पिछले ही साल चयन हो गया। <br /><br /><strong>शहर में10 से ज्यादा क्रिकेट अकेडमी</strong> <br />रणजी प्लेयर दिव्य प्रताप के अनुसार कोटा में 10 से ज्यादा क्रिकेट अकेडमी है। इन क्रिकेट अकेडमियों में 300 से ज्यादा क्रिकेट के खिलाड़ी है। जो रोजाना अभ्यास करते है। लेकिन खिलाड़ियों को खेलने के लिए कोई प्लेटफार्म नहीं मिल रहा। लम्बे समय से मैदान में कोई भी क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित नहीं करवाई गई। जिसकी वजह से क्रिकेट के खिलाडियों में मायूसी है।<br /><br /><strong>नए क्लब जुडंÞे तो बने बात</strong> <br /> कोटा में क्रिकेट के पुराने क्लब है, जो निष्क्रिय हो चुके हैं। इन क्लबों के पास अब खेलने के लिए अच्छे खिलाड़ी नहीं है। क्रिकेट में अब नए क्लब जुड़ने चाहिए।  नए क्लबों का अधिक से अधिक जुड़ना जरूरी है। क्रिकेट की और न तो जिला क्रिकेट एसोसिएशन ध्यान देती है और ना ही राजस्थान क्रिकेट अकेडमी।<br /><strong>- दिव्य प्रताप, रणजी प्लेयर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-increasing-craze-of-cricket-here--the-game-being-played-with-sports/article-14267</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-increasing-craze-of-cricket-here--the-game-being-played-with-sports/article-14267</guid>
                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 14:57:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/idhar-cricket-ka-badh-raha-craze.jpg"                         length="49300"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हैवी मेकअप से मोह हो रहा भंग</title>
                                    <description><![CDATA[युवाओं में बढ़ा न्यूड मेकअप का क्रेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%85%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/mekup.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। फेस्टिव सीजन में युवा अपने लुक्स को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। वे अपने लुक्स को सोशल मीडिया पर शेयर भी करते है। इसको ध्यान में रखते हुए मेकअप आर्टिस्ट समय-समय पर नए ट्रेंड लॉन्च करते रहते हैं। कोविड के बाद गर्ल्स में न्यूड मेकअप व ग्लैम लुक का ट्रेंड चढ़ा है। इसमेंमेकअप और बेस को केवल हाइलाइट किया जाता है। न्यूड मेकअप में स्किन के रंग जैसा मेकअप होता है, जिसका पता सामने वाले को भी नहीं चलता है। </p>
<p><strong><br />लंबे समय तक टिकने वाला मेकअप ट्रेंड में</strong>: आजकल के यूथ में लंबे समय तक फेस में टिकने वाला मेकअप ट्रेंड चल रहा है। गर्ल्स की डिमांड रहती है कि वह जो भी मेकअप करवाएं वो लंबे वक्त तक फेस में रहे। पहले जहां भारी मेकअप की डिमांड थी। वहीं मास्क की वजह से भी मेकअप के ट्रेंड में चेंज आया है।</p>
<p><strong><br />इंटरनेशनल मेकअप की डिमांड:</strong> मेकअप ट्रेंड की बात की जाए तो बॉलीवुड में जो ट्रेंड करता है, वही यूथ की पहली पसंद होती है। पिछले एक-दो साल से बॉलीवुड में फैशन के नए ट्रेंड ना के बराबर ही रहे है, जिसके कारण इंटरनेशनल मेकअप का ट्रेंड बढ़ा है। अभी ब्राजीलियन आई मेकअप यूथ को खूब पसंद आ रहा है।<br /><br />आज का युवा वर्ग लुक को लेकर ज्यादा सचेत रहता है। चेहरे की स्किन के अनुसार मेकअप करवा रहे हैं। न्यूड मेकअप को ज्यादा तवज्जो दिया जा रहा है। मास्क की वजह से आई मेकअप का ट्रेंड बढ़ा है। -<strong>दीपाली चुघ, सेलेब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट</strong><br /><br />लेटेस्ट ट्रेंड की बात की जाए तो युवा वर्ग लाइट वेट बेस मेकअप को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही कलरफुल काजल एंड लाइनर भी ट्रेंड में है। आई मेकअप में स्मोकी आई, ब्राजीलियन आई मेकअप भी पहली पसंद है। -<strong>प्रतिभा शर्मा, मेकअप आर्टिस्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%85%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2180</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%85%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%82%E0%A4%97/article-2180</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 13:01:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-11/mekup.jpg"                         length="215661"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        