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                <title>phones - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कमिश्नरेट के 29 थानों के फोन बंद पड़े फोन, पीड़ितों को होती है खासी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ कमिश्नरेट के करीब 29 थानों से आप सम्पर्क नहीं कर सकते। इन सभी के लैंडलाइन नम्बर खराब हैं। ऐसे में पीड़ितों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/phones-of-the-police-stations-are-closed/article-96720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आप जिस नम्बर से सम्पर्क करना चाह रहे हैं वह अस्तित्व में नहीं है। यह नम्बर आउट ऑफ ऑर्डर है।यह नम्बर गलत है और डायल किया गया नम्बर रजिस्टर्ड नहीं है। यह किसी व्यक्ति के नहीं, बल्कि जयपुर कमिश्नरेट पुलिस के थानों के लैंड लाइन नम्बरों के हालात है। हाईटैक होते समय में भी लैण्डलाइन फोन के हालात बदतर हो चले हैं। जब भी कोई पीड़ित या अन्य कोई व्यक्ति जयपुर कमिश्नरेट के थानों पर सम्पर्क करता है, तो यह लाइनें सुनाई देती हैं। जयपुर कमिश्नरेट के करीब 29 थानों से आप सम्पर्क नहीं कर सकते। इन सभी के लैंडलाइन नम्बर खराब हैं। ऐसे में पीड़ितों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जयपुर कमिश्नरेट के जिला पूर्व के 12, पश्चिम के चार, उत्तर के आठ और दक्षिण के पांच थानों के लैंड लाइन नम्बर खराब हैं। </p>
<p><strong>होती है मुश्किल</strong><br />शहर में किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना, दुर्घटना के दौरान थानों में सम्पर्क करना मुश्किल ही हो जाता है। कई थानों के फोन की यह समस्या काफी समय से है। इनके बारे में जब जानकारी मिली, तो स्थिति को खंगाला गया, तो इन फोन के खराब होने का सच सामने आया। </p>
<p><strong>वाईफाई को अपडेट की जरूरत</strong><br />कई लैंडलाइन वाईफाई से कनेक्टेड है। कई बार नेटवर्क इश्यू भी हो जाता है, बिजली चले जाने पर काम नहीं करता वाईफाई और कनेक्ट नहीं हो पाता। कई जगह सड़कों के कार्य के कारण लाईन कटने का कारण भी सामने आया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 10:30:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:  सरकारी कर्मचारियों को कार्यालय समय के दौरान निजी इस्तेमाल के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने इस मामले को लेकर याचिका दायर की थी। इस अधिकारी के खिलाफ ऑफिस में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर निलंबन का आदेश जारी किया गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/high-court-s-big-decision--government-employees-are-not-allowed-to-use-mobile-phones-for-personal-use-during-office-hours/article-6199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/justice_mobile.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। सरकारी कर्मचारियों के कार्यालय समय के दौरान निजी इस्तेमाल के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला दिया है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को कार्यालय समय के दौरान निजी इस्तेमाल के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि ऑफिस में मोबाइल इस्तेमाल करना अच्छी बात नहीं है।  मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने तमिलनाडु सरकार को इस संबंध में नियम बनाने को कहा है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा है कि वह राज्य में सभी सरकारी कर्मचारियों को कार्यालय समय के दौरान निजी इस्तेमाल के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करने की इजाजत ना दें, और इसको लेकर एक नया नियम बनाकर आदेश पारित करें।<br /><br />उल्लेखनिय है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने इस मामले को लेकर याचिका दायर की थी। इस अधिकारी के खिलाफ ऑफिस में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर निलंबन का आदेश जारी किया गया था। अधिकारी ने याचिका में इस आदेश को रद्द किए जाने की गुहार लगाई थी। जिस पर हाईकोर्ट बेंच ने मामले में सुनवाई की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 17:48:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई उप्र सरकार को फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88/article-2189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कहा कि वह उसकी अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है तथा आरोप पत्र दाखिल होने तक उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायधीश की देखरेख में जांच करवाना चाहता है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार की एसआईटी जांच को 'ढीला ढाला बताते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि मुख्य को अभियुक्त बचाने की कोशिश की जा रही है।<br /> <br /> शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कई सवाल खड़े किए और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की जांच अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इस मामले में मामले सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई प्रगति स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज करने की जानकारी के अलावा कुछ भी नया नहीं है। खंडपीठ ने पूछा कि मुख्य अभियुक्त आशीष के अलावा अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन क्यों जब्त नहीं किए गए। उन्होंने अन्य अभियुक्तों के मोबाइल फोन जब्त नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई।<br /> <br /> उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को बताया कि इस मामले सबूतों से संबंधित लैब की रिपोर्ट 15 नवंबर तक आएगी। इस पर अदालत ने कहा कि 10 दिन का समय दिया गया था। इस दौरान कुछ नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि लैब के कामकाज पर उसका नियंत्रण नहीं है। सरकार के जांच से असंतुष्ट खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले की जांच पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजीत ङ्क्षसह से कराना चाहती है। इस पर श्री साल्वे ने कहा कि वह इस बारे में शुक्रवार को अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष रखेंगे।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को किसानों के प्रदर्शन के दौरान तीन आंदोलनकारियों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी चार किसानों को कार से कुचलकर मारने के आरोप हैं यह आरोप केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा समेत अन्य लोगों पर है। आशीष को मुख्य आरोपी बताया गया है<br /> <br /> गत 26 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इस दौरान पीठ ने मामले की जांच में ढीले रवैया पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ  सरकार को फटकार लगाई थी। न्यायालय ने गवाहों की सुरक्षा का आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने में तेजी लाने का आदेश दिया था।पीठ ने सुनवाई के दौरान इस घटना को 'जघन्य हत्या' करार दिया था तथा सरकार को गंभीरता से मामले की जांच के आदेश दिये थे।<br /> <br /> पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने पीठ को बताया कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा रही है। सरकार की ओर से कहा गया था कि 68 गवाहों में 30 के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज की जा चुकी है।  शीर्ष न्यायालय ने गवाहों की कम संख्या कम बताते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं और कहा था कि सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई घटना में सिर्फ 68 गवाह हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था, जिसे दो वकीलों के पत्रों के आधार पर जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया था। वकीलों की ओर से इस मामले की न्यायिक जांच और सीबीआई जांच की मांग की गई है।<br /> <br /> गौरतलब है कि कई किसान संगठन केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। करीब 40 से अधिक किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले राजधानी दिल्ली की सीमाओं के अलावा देश के अन्य हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।<br /> <br /> किसान संगठनए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार (वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण) कानून-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून-2020 का विरोध कर रहे हैं। किसानों के विरोध के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने जनवरी में इन कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 16:23:37 +0530</pubDate>
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