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                <title>universities - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दुनिया में धीरे-धीरे बढ़ रहा है हिजाब पर प्रतिबंध का दायरा, यूरोप सहित कई देशों में सार्वजनिक स्थानों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक में रोक</title>
                                    <description><![CDATA[डेनमार्क सरकार ने बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध को स्कूलों व विश्वविद्यालयों तक बढ़ाने का ऐलान किया है। आप्रवासन मंत्री रासमस स्टॉकलंड के अनुसार, चेहरा ढकने वाले परिधान शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं हैं। प्रस्ताव फरवरी 2026 में संसद में आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-scope-of-ban-on-hijab-is-gradually-increasing-in/article-136465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hijab.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डेनमार्क सरकार ने ऐलान किया है कि वह बुर्का और निकाब (पूरे चेहरे को छुपाने वाले इस्लामी आवरण) पर पहले से लागू प्रतिबंध को अब स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक भी बढ़ाना चाहती है। इस बात की घोषणा डेनमार्क के आप्रवासन और समावेशन मंत्री रासमस स्टॉकलंड ने की, जिन्होंने कहा, बुर्का, निकाब या अन्य किसी ऐसे परिधान का शैक्षणिक वातावरण में कोई स्थान नहीं होना चाहिए जो लोगों के चेहरे को छुपाता हो। यह प्रस्ताव संसद में फरवरी 2026में पेश किया जाएगा। डेनमार्क में पहले से ही 1 अगस्त 2018 से सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लागू है, जिसके तहत उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कानून व्यापक रूप से लागू नहीं होता क्योंकि बुर्का/निकाब पहनने वाली महिलाओं की संख्या कम है। </p>
<p><strong>अब तक कितने देशों में बुर्का/चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध</strong></p>
<p>पूरे दुनिया भर में कई देश ऐसे हैं जिन्होंने बुर्का, निकाब या चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा रखा है। इनमें से अधिकतर यूरोपीय देश हैं, जबकि कुछ अन्य देशों में भी ऐसे नियम हैं। </p>
<p><strong>प्रमुख देश जहां प्रतिबंध लागू है</strong></p>
<p>    फ्रांस :  2011 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाया गया था। <br />    बेल्जियम : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/निकाब बैन। <br />    बुल्गारिया : पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधान पर प्रतिबंध। <br />    डेनमार्क :  2018 से सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध, अब स्कूल/विश्वविद्यालय भी शामिल। <br />    ऑस्ट्रिया : कुछ जगहों पर हेडस्कार्फ और बालों ढकने पर प्रतिबंध के साथ नया कानून। <br />    नीदरलैंड : सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में प्रतिबंध। <br />    स्विट्जरलैंड : 1 जनवरी 2025 से बैन लागू। <br />    जर्मनी :  कुछ राज्यों में प्रतिबंध। <br />    इटली :  कुछ स्थानीय अधिकार क्षेत्र में प्रतिबंध। <br />    स्पेन (कैटलोनिया) : कुछ क्षेत्रों में बैन। <br />    लक्समबर्ग : पूर्णतया बैन। <br />    नॉर्वे : नर्सरी, स्कूल और यूनिवर्सिटी में प्रतिबंध। <br />    कोसोवो : सार्वजनिक स्कूलों में बैन। <br />    बोस्निया और हजेर्गोविना : न्यायिक संस्थानों में प्रतिबंध। </p>
<p><strong>यूरोप के बाहर कहां-कहां बुर्का/नकाब पर प्रतिबंध</strong></p>
<p><strong>यूरोप (ईयू से बाहर)</strong><br />   </p>
<p>    ब्रिटेन  : राष्ट्रीय बैन नहीं, लेकिन स्कूलों, अदालतों व कार्यस्थलों में स्थानीय नियम<br />    रूस :  राष्ट्रीय स्तर पर बैन नहीं, कुछ क्षेत्रों/स्कूलों में प्रतिबंध</p>
<p><strong>एशिया</strong></p>
<p>    चीन (शिनजियांग) : बुर्का, निकाब और धार्मिक प्रतीकों पर सख्त प्रतिबंध<br />    श्रीलंका :  2019 आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से चेहरा ढकने पर रोक<br />    ताजिकिस्तान : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/विदेशी परिधान बैन<br />    उज्बेकिस्तान : आंशिक प्रतिबंध, सार्वजनिक स्थलों पर नियंत्रण</p>
<p><strong>अफ्रीका</strong></p>
<p>    चाड : आतंकी घटनाओं के बाद बुर्का पर प्रतिबंध<br />    कांगो : सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर रोक<br />    गैबॉन : सुरक्षा कारणों से बुर्का/निकाब बैन</p>
<p><strong>मध्य-पूर्व  </strong></p>
<p>    तुर्की : पहले सरकारी संस्थानों में बैन था, अब अधिकांश प्रतिबंध हटाए गए।</p>
<p><strong>विवाद और बहस</strong></p>
<p>बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध का मुद्दा गहन विवाद में रहा है। समर्थक इसका तर्क देते हैं कि यह समाजिक एकीकरण और पहचान की स्पष्टता के लिए जरूरी है, जबकि आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। मानवाधिकार समूहों का मानना है कि यह कानून धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। डेनमार्क सरकार भी यह साफ कर चुकी है कि यह कानून धर्म की आजादी को खत्म नहीं करता, बल्कि उसका मकसद लोकतंत्र और समाज में खुलापन बनाए रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 11:47:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूनिवर्सिटीज और विभागों को पांच दिन में भेजने होंगे जवाब, हरीभाऊ बागडे ने निर्देशों और पत्राचार का जवाब नहीं देने पर जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के राज्यपाल हरीभाऊ बागडे ने राजस्थान की यूनिवर्सिटीज और विभिन्न विभागों के समय पर राजभवन को दिए गए निर्देशों और पत्राचार का जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/universities-and-departments-will-have-to-be-sent-in-five/article-109863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/haribhau.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरीभाऊ बागडे ने राजस्थान की यूनिवर्सिटीज और विभिन्न विभागों के समय पर राजभवन को दिए गए निर्देशों और पत्राचार का जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई है। ऐसे में अब राज भवन सचिवालय ने सभी यूनिवर्सिटीज और विभागों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि राज भवन से जारी होने वाले निर्देशों और पत्रों का जवाब सभी यूनिवर्सिटीज और विभागों को 5 दिन के अंदर देना होगा और जिन पत्रों और निर्देशों में समय अवधि तय की गई है, उसे समय अवधि में भेजना होगा।</p>
<p>राज भवन के सचिव डॉ पृथ्वी ने इसके आदेश जारी कर सभी विभागों को भेज दिए हैं। दरअसल पिछले दिनों राज भवन के द्वारा जारी निर्देशों और पत्रों का विश्वविद्यालय ने जवाब नहीं दिया था, नाराज होकर राज्यपाल के निर्देश पर राज भवन सचिवालय ने आरयूएचएस यूनिवर्सिटी के कुलपति को नोटिस भी जारी किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Apr 2025 16:34:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश-प्रदेश में ऐसे खेल विश्वविद्यालय स्थापित हों, जिनका दृष्टिकोण स्पोर्ट्स फर्स्ट रहे, केवल डिग्रियां नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ओलंपिक और दीगर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की पदक तालिका में भारत को शीर्ष देशों की श्रेणी में पहुंचने के लिए अपनी शिक्षा नीति में बदलाव की दरकार है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/such-sports-universities-should-be-established-in-the-country-and/article-96444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ओलंपिक और दीगर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की पदक तालिका में भारत को शीर्ष देशों की श्रेणी में पहुंचने के लिए अपनी शिक्षा नीति में बदलाव की दरकार है। प्रदेश में ऐसे खेल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं जो पूरी तरह स्पोर्ट्स एजुकेशन और ट्रेनिंग आधारित हों। जो पारंपरिक विश्वविद्यालयों से इतर स्पोर्ट्स फर्स्ट के दृष्टिकोण पर काम करें। जहां खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए अत्याधुनिक उपकरण और उच्चगुणवत्ता की कोचिंग हो। भारत और चीन समेत अन्य एशियाई देशों के ओलंपिक इतिहास के अध्ययन के बाद गुरु स्पोर्ट्स स्किल प्रमोशन फाउण्डेशन जयपुर के युवा मानस गर्ग ने ये रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय खेल मंत्रालय को भी भेजी है।</p>
<p><strong>खेलों में अव्वल बनना हो विजन</strong></p>
<p>मानस ने पदक तालिका में ऊपर आने के लिए शिक्षा में स्पोर्ट्स फर्स्ट, एजुकेशन आॅलवेज का नया कंसेप्ट दिया है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में ऐसे खेल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं, जिनका विजन देश को खेलों में दुनिया में अव्वल बनना हो। सिर्फ डिग्री बांटने की जगह पदक विजेता खिलाड़ी तैयार करना उद्देश्य हो। </p>
<p><strong>सवा सौ साल में सिर्फ 41 पदक</strong></p>
<p>भारत ने 1900 में पहले एशियाई देश के रूप में ओलंपिक में कदम रखा लेकिन अपनी सवा सौ साल की यात्रा में अब तक 10 स्वर्ण समेत कुल 41 पदक जीते हैं। वहीं चीन पहली बार 1952 के मेलबोर्न ओलंपिक में आया लेकिन पूरी तरह उसके ओलंपिक सफर की शुरूआत 1980 के मास्को ओलंपिक से ही मानी जाती है। चीन ने भारत की तुलना में अपने 44 साल के छोटे से सफर में ही 727 पदक जीत अपनी गिनती ओलंपिक के शीर्ष देशों में कर ली। जापान, कोरिया और इंडोनेशिया जैसे अन्य एशियाई देश भी भारत से कहीं आगे निकल गए हैं।</p>
<p><strong>ये हैं पिछड़ने के कारण</strong></p>
<ul>
<li>    ओलंपिक में एथलीटों की औसत आयु अन्य देशों से ज्यादा</li>
<li>    अन्य देशों में छोटी उम्र से शुरू होती है खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, भारत में देरी से<br />    ज्यादातर खेलों में भारत की हिस्सेदारी ही नहीं रहती</li>
<li>  एथलेटिक्स, स्वीमिंग, साइक्लिंग, जिम्नास्टिक में रहते हैं सबसे ज्यादा पदक</li>
<li>    भारत में कभी खेलों को प्राथमिकता में नहीं लिया</li>
<li>    मानसिकता खेलों की जगह पढ़ाई को तरजीह देने की रही</li>
<li>    खेलों के प्रति अवेयरनेस नहीं</li>
</ul>
<p>                                                      ओलंपिक में शीर्ष एशियाई देश</p>
<table style="border-collapse:collapse;width:94.6051%;height:392.667px;" border="1"><colgroup><col style="width:14.3028%;" /><col style="width:15.0091%;" /><col style="width:17.8343%;" /><col style="width:18.0109%;" /><col style="width:17.6578%;" /><col style="width:17.3046%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr style="height:45.6667px;">
<td style="height:45.6667px;">देश     </td>
<td style="height:45.6667px;"> ओलंपिक  </td>
<td style="height:45.6667px;"> गोल्ड    </td>
<td style="height:45.6667px;">सिल्वर </td>
<td style="height:45.6667px;">   ब्राँज   </td>
<td style="height:45.6667px;"> कुल</td>
</tr>
<tr style="height:66.6667px;">
<td style="height:66.6667px;"> चीन   </td>
<td style="height:66.6667px;">12             </td>
<td style="height:66.6667px;">303      </td>
<td style="height:66.6667px;">226       </td>
<td style="height:66.6667px;">198    </td>
<td style="height:66.6667px;">727</td>
</tr>
<tr style="height:66.6667px;">
<td style="height:66.6667px;">जापान  </td>
<td style="height:66.6667px;">24</td>
<td style="height:66.6667px;"> 189</td>
<td style="height:66.6667px;">   162 </td>
<td style="height:66.6667px;">191  </td>
<td style="height:66.6667px;">542</td>
</tr>
<tr style="height:62.6667px;">
<td style="height:62.6667px;">
<p>द.कोरिया </p>
</td>
<td style="height:62.6667px;">19     </td>
<td style="height:62.6667px;">109     </td>
<td style="height:62.6667px;">100     </td>
<td style="height:62.6667px;">111    </td>
<td style="height:62.6667px;">320</td>
</tr>
<tr style="height:59.6667px;">
<td style="height:59.6667px;">ईरान </td>
<td style="height:59.6667px;">18 </td>
<td style="height:59.6667px;"> 27 </td>
<td style="height:59.6667px;">29 </td>
<td style="height:59.6667px;">32 </td>
<td style="height:59.6667px;">80</td>
</tr>
<tr style="height:45.6667px;">
<td style="height:45.6667px;">इंडोनेशिया</td>
<td style="height:45.6667px;">17   </td>
<td style="height:45.6667px;"> 10 </td>
<td style="height:45.6667px;">14</td>
<td style="height:45.6667px;">      16 </td>
<td style="height:45.6667px;">40</td>
</tr>
<tr style="height:45.6667px;">
<td style="height:45.6667px;">इंडिया</td>
<td style="height:45.6667px;">26 </td>
<td style="height:45.6667px;"> 10 </td>
<td style="height:45.6667px;">10</td>
<td style="height:45.6667px;">21</td>
<td style="height:45.6667px;">41</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>टोक्यो में पदक विजेताओं की औसत उम्र</strong></p>
<p>खेल                                     स्वर्ण    रजत    कांस्य<br />आर्चरी                                    20.0    30.0    29.5<br />आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक           21.0    24.4    23.4<br />लयबद्ध जिम्नास्टिक                 22.0    22.0    18.0<br />साइक्लिंग रेसिंग                      22.5    25.0    24.0<br />साइक्लिंग एमबी                      24.0    27.5    29.5<br />स्वीमिंग                                  22.4    22.9    23.3<br />डाइविंग                                  22.8    22.2    26.8<br />ताइक्वांडो                                22.2    21.0    22.5<br />जूडो                                        25.5    26.1    26.4<br />फेंसिंग                                    25.5    30.8    30.3<br />वेटलिफ्टिंग                             25.8    24.6    24.9<br />एथलेटिक्स                             26.3    26.4    26.3</p>
<p><strong>ओलंपिक में भारतीय एथलीटों की औसत उम्र</strong></p>
<p>खेल                         उम्र<br />तीरन्दाजी                28.5<br />जिम्नास्टिक            25.5<br />स्वीमिंग                  22.0<br />जूडो                       25.0<br />फेंसिंग                   27.0<br />वेटलिफ्टिंग            26.0<br />एथलेटिक्स            26.0</p>
<p><strong>ओलंपिक में सबसे ज्यादा मेडल वाले इवेंट</strong></p>
<p>एथलेटिक्स            45+<br />स्वीमिंग               35+<br />साइक्लिंग             22+<br />जिम्नास्टिक         18+<br />रेस्लिंग                18+<br />केनोइंग               16+<br />शूटिंग                 15+<br />वेटलिफ्टिंग         14+<br />जूडो                   14+<br />बॉक्सिंग              13<br />फेंसिंग                12+<br />सेलिंग                10+<br />ताइक्वांडो            8+<br />डाइविंग              8+<br />रोइंग                  8+</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 12:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों और पेंशनधारकों ऑनलाइन होगा वेतन का भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य के विभिन्न स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों, आदि के कर्मचारियों और पेंशनधारकों का वेतन, पेंशन, और अन्य वित्तीय लाभ पे-मैनेजर से ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राज्य के विभिन्न स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों, आदि के कर्मचारियों और पेंशनधारकों का वेतन, पेंशन, और अन्य वित्तीय लाभ पे-मैनेजर से ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित संस्थाएं अब तक मैन्युअल तरीके से भुगतान कर रही थीं, जिससे देरी और त्रुटियों की संभावना थी।</p>
<p>वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी वेतन और पेंशन भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को या उससे पहले किए जाएंगे। सभी भुगतान सीधे पे मैनेजर के माध्यम से पी.डी. खाते में जमा होंगे, जिससे सीधे बैंक खाते में स्थानांतरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह कदम राज्य सरकार के डिजिटल और पारदर्शी वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त रुड़सीको और अन्य वित्तीय संस्थाओं के तहत कार्यरत कर्मचारी और पेंशनधारक भी इस ऑनलाइन भुगतान प्रणाली का हिस्सा होंगे। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी तकनीकी समस्या के समाधान के लिए पे मैनेजर हेल्प डेस्क से संपर्क किया जा सकता है। विभागीय सचिवों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस नई प्रणाली का पालन सुनिश्चित करें और इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाएं। नई प्रणाली के तहत, वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे राज्य के वित्तीय प्रबंधन में सुधार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/salaries-of-employees-and-pensioners-of-autonomous-bodies-corporations-boards/article-84805</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 20:14:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश सरकार अब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर कसेगी नकेल</title>
                                    <description><![CDATA[डिस्टेंस एजुकेशन के लिए भी यूनिवर्सिटी को डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से अनुमति लेना जरूरी होगा। इनकी पालना नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-govt-will-now-action-its-grip-on-private-universities/article-80980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/collage-university.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उच्च शिक्षा विभाग प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर नकेल कसेगी। इसके लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जिसके आधार पर अब प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को भी छात्रों को मेरिट के आधार पर ही एडमिशन देने होंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने यूजीसी नॉर्म्स का हवाला देते हुए निर्देश दिए हैं कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी कैंपस से बाहर अपनी ब्रांच स्थापित नहीं कर सकेगी और न ही किसी को संबद्धता जारी कर सकेगी। नए सत्र 2024-25 किसी भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए आसान नहीं रहने वाला है।</p>
<p>इसी गाइडलाइन के तहत कोई भी निजी विश्वविद्यालय कैंपस से बाहर अपनी ब्रांच स्थापित नहीं कर सकेगा। वहीं, यूजीसी प्रावधानों के तहत यूनिवर्सिटी किसी अन्य शहर, दूसरे राज्य और देशों में न तो अपनी ब्रांच शुरू कर सकेगी और न ही किसी को संबद्धता जारी कर सकेगी। इसके अलावा यूनिवर्सिटी राज्य सरकार से अनुमति से ही पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं। वहीं, डिस्टेंस एजुकेशन के लिए भी यूनिवर्सिटी को डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से अनुमति लेना जरूरी होगा। इनकी पालना नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>परीक्षा आयोजित कर दिए जाएंगे प्रवेश</strong><br />ऐसे में इन पाठ्यक्रमों में इन एजेंसियों के माध्यम से ही प्रवेश दिए जाएं, इसके अलावा ऐसे व्यवसायिक और टेक्निकल कोर्स जिनके लिए राज्य और केन्द्र परीक्षा का आयोजन नहीं करती, उनमें प्रवेश समान पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों के संघ की ओर से परीक्षा आयोजित कर दिए जाएंगे। </p>
<p><strong>नहीं करती पालना </strong><br />राज्य में करीब 52 प्राइवेट यूनिवर्सिटी संचालित हैं, लेकिन अधिकतर यूनिवर्सिटी में यूजीसी और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों की पालना नहीं की जा रही है, कई यूनिवर्सिटी में जो कोर्सेस संचालित किए जा रहे हैं, वो उच्च शिक्षा विभाग से स्वीकृत ही नहीं हैं, फिर भी छात्रों को इन कोर्सेस में प्रवेश दिया जाता है, जो सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। </p>
<p><strong>सीटों की अधिकतम संख्या स्वीकृत कराकर ही एडमिशन दिए जा सकते हैं</strong><br />उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार भी रेगुलेटरी बॉडी है। इसीलिए अनुमति लेकर ही सभी कोर्सेज के लिए इंटेक कैपेसिटी यानी सीटों की अधिकतम संख्या स्वीकृत कराकर ही उस सीमा तक एडमिशन दिए जा सकते हैं। जबकि रिसर्च कोर्स में एडमिशन के लिए रिसर्च संबंधी यूजीसी रेगुलेशन 2022 के प्रावधानों की पालना करनी होगी। </p>
<p><strong>मेरिट के आधार पर ही छात्रों को प्रवेश दें</strong><br />इसी को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को लेकर एक गाइडलाइन जारी की है, इस गाइडलाइन में उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी मेरिट के आधार पर ही छात्रों को प्रवेश दें। शिक्षण प्रशिक्षण पाठ्यक्रम बीपीएड, एमपीएड, डीएलएल, कृषि शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और प्रौद्यौगिकी शिक्षा से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्य या केन्द्र की एजेंसियां हर साल प्रवेश परीक्षा का आयोजन करते हुए एडमिशन देती हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 10:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अब यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में होंगे छात्रसंघ चुनाव, अशोक गहलोत ने किया ट्वीट</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है। गहलोत ने ट्वीट में लिखा कि विद्यार्थी ही देश का भविष्य है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-student-union-elections-will-be-held-in-universities-and/article-15783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ashok02-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अब छात्रसंघ चुनाव होंगे। राज्य सरकार ने चुनावों को हरी झंडी प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है। गहलोत ने ट्वीट में लिखा कि विद्यार्थी ही देश का भविष्य है। विद्यार्थी संगठनों की मांग को देखते हुए एवं विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की समझ बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव करवाने के लिए विभाग को निर्देश दिए गए है। सभी विद्यार्थी संगठन संबंधित कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी की गाइडलाइंस की पालना करते हुए उत्साह से चुनावों में भाग लें, मेरी शुभकामनाएं आप सभी के साथ हैं।</p>
<p><strong>दो साल बाद होंगे चुनाव</strong><br />विवि और कॉलेजों में गत दो साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे है। ऐसे में दो साल बाद छात्रसंघ चुनाव होंगे। छात्र संगठनों की ओर से चुनाव कराने की लगातार मांग की जा रही थी।</p>
<p><strong>अगस्त के आखिरी सप्ताह में होंगे चुनाव</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की घोषणा के बाद उच्च शिक्षा विभाग चुनाव कार्यक्रम जारी कर देगा। चुनाव संभवत: अगस्त के आखिरी सप्ताह में कराए जाएंगे। विश्वविद्यालयों में आखिरी छात्रसंघ चुनाव शैक्षणिक सत्र 2019-20 में हुए थे। उसके बाद कोरोना के चलते चुनाव नहीं हो पाए। अब शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए चुनाव होंगे। कार्यक्रम के तहत 27 सरकारी विवि सहित करीब 76 प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 495 सरकारी कॉलेजों सहित करीब दो हजार प्राइवेट कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव होंगे। प्रदेश में सरकारी और निजी यूनिवर्सिटीज और कॉलेज में करीब 18 लाख विद्यार्थी हैं। इनमें सरकारी विवि और कॉलेज में साढ़े सात लाख और निजी विवि और कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। राजस्थान के सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी राजस्थान विश्वविद्यालय में सबसे ज्यादा 30 हजार स्टूडेंट्स हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jul 2022 10:25:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे होंगे नियम-कायदे, समितियां और शक्तियां,प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में कुलपति उसी फील्ड के एक्सपर्ट होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87--%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-4410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/ru_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे नियम-कायदों से संचालन के लिए कॉमन एक्ट की कवायद को जल्द अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद है। अभी सभी यूनिवर्सिटीज एक्ट में कई अलग-अलग नियम-कायदे हैं।<br />इनमें से ज्यादातर एक्ट राजस्थान यूनिवर्सिटीज के स्थापना के वक्त अंग्रेजी हुक्मरानों के जनवरी 1947 में बनाएं कानून ही शामिल हैं। यूनिवर्सिटीज में चल रहे कानूनों को बदलने की कवायद गहलोत सरकार ने दो साल पहले शुरू की थी। सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसा कानून, शक्तियां, सरकारी हस्तक्षेप इत्यादि स्पष्टत: तय करने के लिए कॉमन एक्ट तैयार करने के लिए जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलपति पीसी त्रिवेद्वी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेठी ने एक साल पहले ही एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। लेकिन इसे कानूनी अमलीजामा पहनाकर बिल का रुप दिया जाना बाकी है। विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अभी बिल में तब्दील नहीं किया है। ऐसे में इस सत्र में इसके आने की गुजाइंश कम ही है। इसे वैधानिक मंजूरी मिले तो सभी यूनिवर्सिटीज के वर्तमान में लागू आदिम कानून विलोपित हो जाएंगे और समान कानून संहिता का तय फाूर्मला लागू हो जाएगा। प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में यूजीसी की गाइडलान के साथ ही उसी फील्ड से जुड़े शिक्षक या व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का बड़ा फैसला भी ड्राफ्ट में शामिल है। ऐसा हुआ तो प्रदेश की मेडिकल, पत्रकारिता, कृषि, विधि इत्यादि विषयों की यूनिवर्सिटीज में उसी फील्ड के एक्सपर्ट ही कुलपति बन सकेंगे। <br /><br /><strong>महाराष्ट्र-केरल में पहले से लागू है कॉमन एक्ट</strong><br />महाराष्ट्र और केरल राज्य में यूनिवर्सिटीज के लिए पहले से कॉमन एक्ट बनाकर लागू कर चुके हैं। इसी की तर्ज पर राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसमें वर्तमान परिदृश्य के मुताबिक यूनिवर्सिटीज के एक्ट में रिफॉर्म करने, उसमें फेरबदल करने, शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रबन्धन ढांचे में बदलाव को फोकस कर तैयार किया गया है। <br /><br />ड्राफ्ट पर अधिकारियों से चर्चा हुई है। जल्द इसे बिल में तब्दील करने के लिए फिर से बैठक करूंगा। प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इस पारित कराके लागू किया जाए। - <strong>राजेन्द्र यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री</strong><br /><br /><strong>ड्राफ्ट में ये सिफारिशें</strong><br /> प्रो वाइस चांसलर का पद सृजित हो, कुलपति की यूजीसी की तय गाइडलाइन के  अनुरूप यूनिवर्सिटी के ही सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति इस पद पर की जाए। <br /> सभी यूनिवर्सिटी में एक जैसी प्रबन्धन बॉडी और उनकी शक्तियां-कार्यप्रणाली हो। अभी यूनिवर्सिटीज में बोर्ड आॅफ मैनजमेंट, सिंडीकेट, सीनेट, एक्ज्यूक्टिव कमेटी, एकडेमिक काउंसिल इत्यादि अपने-अपने एक्ट के मुताबिक है। <br /> यूनिवर्सिटीज में न्यूनतम तय शैक्षणिक विभाग होना अनिवार्य होगा , टीचर्स की संख्या भी तय होगी। <br /> टीचर्स के पद तय करने और भर्ती के लिए सरकार की अनुमति लेने की जरुरत ना पड़े।  <br /> प्रबन्धन बॉडी में सरकारी अफसरों का हस्तक्षेप घटे, कहीं दो तो कहीं पांच सचिव स्तर के अफसर सदस्य। एक ही सचिव को शामिल करने का प्रस्ताव। <br /> हर विभाग में स्थाई फैकल्टी जरुरी होगी। अभी कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे विभाग, जिन्हें खुले दो दशक से ज्यादा लेकिन स्थाई टीचर्स भी नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 17:36:48 +0530</pubDate>
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                <title>कुलपतियों के सलेक्शन में पॉलिटिकल कनेक्शन : चयन के लिए प्रदेश में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में अलग-अलग एक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में कुलपति तय करने के लिए सर्च कमेटी और चयन प्रक्रिया में पॉलिटिकल खामियों के चलते योग्यता के पैमाने चरमरा गए हैं। चयन में राजनीतिक पक्ष ज्यादा मजबूत होने से कई बार गलत चयन विश्वविद्यालय के तीन अकादमिक साल को दांव पर लगा देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8---%E0%A4%9A%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%97-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%97-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F/article-4114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/whatsapp-image-2022-01-22-at-16.08.07.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कुलपति चयन के लिए मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में जहां समान एक्ट हैं, वहीं राजस्थान में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में अलग-अलग। कई राज्यों में गवर्नर तो कई में मुख्यमंत्री कुलपति के नाम को मंजूरी देते हैं।  राजस्थान में राज्यपाल और मुख्यमंत्री कुलपति तय करते हैं। राजस्थान में कुलपति सर्च कमेटी में चार सदस्य होते हैं। इसमें विवि सिंडीकेट कमेटी, राज्य सरकार, राज्यपाल और यूजीसी के मेम्बर होते हैं। कमेटी में अप्रत्यक्ष रूप से दो राज्य और दो केन्द्र के प्रतिनिधि होते हैं। कमेटी पांच नाम राज्यपाल के पास भेजती है, जो मुख्यमंत्री से चर्चा कर एक को फाइनल करते हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>गलत चयन से ये नुकसान</strong></span></span><br /> राजनीतिक दखल के चलते योग्यता और मापदंडों को दरकिनार कर कई बार बिना विषय विशेषज्ञ को कुलपति बना दिया जाता है, जिससे विवि का अकादमिक स्तर गिरता है। राज्यपालों के भी अपने गृह राज्यों से लोगों को तवज्जो देने के मामले सामने आते रहे हैं। सर्च कमेटी में शामिल लोग आवेदक के दस साल के प्रोफेसर या अनुभव और आपराधिक मामले न होने के एफिडेविड आदि पर चयन करते हैं, लेकिन राजनीतिक दखल से फाइनल होने वाले नामों के बाद सर्च कमेटी के चार लोगों की काबिलियत पर भी सवाल उठते हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>प्रोसेस सही पालना ठीक नहीं</strong></span></span><br /> विशेषज्ञों की मानें तो अधिकांश एक्ट में यूजीसी के हिसाब से चयन प्रक्रिया तय है। विज्ञापन के बाद प्रक्रिया तो सही चलती है, लेकिन पालना में कई बार बेईमानी होती है। कई विवि के विज्ञापनों में योग्यता के प्रोफेसर या अनुभव को स्पष्ट नहीं किया जाता। टेक्नीकल, मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि सेक्टर में विषय विशेषज्ञ का कई बार ध्यान नहीं रखा जाता। सही चयन करने के लिए सर्च कमेटी के कई मापदण्डों में समय रहते बदलाव भी हों। कमेटी सदस्यों की काबिलियत की भी जांच हो, ताकि अन्य राज्यों के लोग प्रदेश के काबिल लोगों का हक न छीनें। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>योग्यता के पैमाने चरमराए<br /> ऐसे-ऐसे भी बने कुलपति</strong></span></span><br /> <br /> <strong>केस 01 : </strong>एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर के तत्कालीन कुलपति आरपी सिंह निजी कॉलेज के एफिलेशन के लिए एनओसी के बदले रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर सात सितम्बर, 2020 में जेल गए।<br /> <br /> <strong>केस 02 : </strong>अनुभव योग्यता पर कोर्ट में केस के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति जेपी सिंघल को 2016 में कोर्ट आदेशों से हटाया गया था।<br /> <br /> <strong>केस 03 : </strong>कहते हैं, एक बार सुखाड़िया विवि उदयपुर में तत्कालीन कुलपति का चयन लगभग हो चुका था। अचानक एक नाम भेजा गया जिसे निरस्त कर दिया गया। आला स्तर पर नाराजगी हुई और नाम निरस्त करने वाली सर्च कमेटी ही निरस्त कर दी गई। आखिरी क्षणों में जो नाम छूटा था, उसका ही चयन हुआ। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> विवि की स्थिति</strong></span></span><br /> सरकारी विवि    23<br /> प्राइवेट विवि    52<br /> डीम्ड विवि    8<br /> सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी    01<br /> देशभर में सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी    54<br /> स्टेट यूनिवर्सिटी    442<br /> डीम्ड यूनिवर्सिटी    126<br /> प्राइवेट यूनिवर्सिटी    397<br /> <strong>यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार</strong><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> सर्च कमेटी बन गई है सलेक्शन कमेटी</strong></span></span><br /> कुलपति चयन के लिए जब सर्च कमेटी का प्रावधान बना तो कमेटी को यूनिवर्सिटी की गरिमा के हिसाब से देशभर से व्यक्ति तलाशने का जिम्मा था, लेकिन धीरे-धीरे यह कमेटी सलेक्शन कमेटी बन गई। काम था योग्य की तलाश का, सिमट गया विज्ञापन से आवेदन लेकर एक को चुन लेने तक।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>राजनीतिक दखल से कमेटी बन गई कठपुतली</strong></span></span><br /> सूत्रों की मानें तो पात्र लोगों की तलाश की ये कमेटियां केवल कठपुतली बनकर रह गईं। राजनीतिक रसूख के चलते योग्यताओं का दमन करने से भी नहीं चूका जाता। प्रदेश की एक बहुचर्चित यूनिवर्सिटी में जब सर्च कमेटी के पास एक आवेदन कुलपति बनने के लिए पहुंचा तो कमेटी ने आवेदन को ही खारिज कर दिया। राजनीतिक दबाव इस कदर हावी था कि सर्च कमेटी को ही भंग कर दिया गया। दूसरी कमेटी बनाकर सिफारिशी को कुलपति बना दिया गया। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>इनका कहना है...</strong></span></span><br /> टेक्नीकल, मेडिकल,इंजीनियरिंग और अन्य विषयों के  विवि में कुलपति चयन के लिए बदले हुए नियम लागू होने चाहिए। चयन में अनुभव के विवाद से विवि में अध्ययनरत छात्र और स्टाफ प्रभावित होते हैं।-प्रो. नरेश दाधीच, पूर्व कुलपति, कोटा विवि <br /> <br /> करीब 14 कुलपति यूपी और उत्तराखंड जैसे राज्यों से बने हैं। यहां भी एक्ट अलग-अलग नहीं, कॉमन हों। -प्<strong>रो. अरुण चतुर्वेदी, उदयपुर</strong><br /> <br /> कुलपति चयन के लिए योग्यता और मापदंड की प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए। कमेटी में शामिल लोगों के अलावा राज्यपाल और मुख्यमंत्री स्तर पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। विज्ञापन में स्पष्ट हो कि वह उसी फील्ड का व्यक्ति हो। -प्रो.संजय लोढ़ा, अजमेर <br /> <br /> प  श्चिम बंगाल में सीएम ने कुलपति चयन में राज्यपाल की भूमिका समाप्त कर दी तो यूपी में सीएम का हस्तक्षेप नहीं है। तमिलनाडु में कोशिश है कि सीएम ही कुलाधिपति हो।-<strong>प्रो.बीएम शर्मा, जयपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 16:21:50 +0530</pubDate>
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                <title>बम विस्फोट की धमकी के बाद अमेरिकी विश्वविद्यालयों को खाली करने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयार्क पुलिस मामले की जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%AC%E0%A4%AE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-2190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/amerika.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन।  अमेरिका में न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय समेत देश के कई विश्वविद्यालयों को बम विस्फोट की धमकी मिलने के बाद खाली करने के आदेश दिये गये हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने वटर पर कहा कि रविवार 07 नवंबर को दोपहर करीब 14.30 बजे विश्वविद्यालय भवनों पर बम विस्फोट की धमकी मिलने के बाद आपातकालीन अलर्ट जारी किया। न्यूयार्क पुलिस मामले की जांच कर रही है।<br /> <br /> न्यूयार्क पुलिस ने हालांकि इन धमकियों को विश्वसनीय नहीं माना है , लेकिन आवश्यक जांच पड़ताल कर रही है। इस बीच न्यूयॉर्क स्थित कॉर्नेल विश्वविद्यालय ने भी ऐसी ही धमकी की सूचना दी है। विश्वविद्यालय ने ट्वीट किया , '' बम की धमकी की पुलिस जांच जारी है। इमारत में तलाशी का काम चल रहा है। कृपया अभी केंद्रीय परिसर में आने से बचें।<br /> <br /> दूसरी तरफ रोड आइलैंड के प्रोविडेंस स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी ने कहा कि बम की धमकी के बाद रविवार को परिसर की कई इमारतों को खाली करा लिया गया , हालांकि बाद में यहां फिर से प्रवेश के लिए मंजूरी दे दी गयी। इससे पहले कनेक्टिकट प्रांत में येल विश्वविद्यालय में शुक्रवार को बम विस्फोट की धमकी मिलने के बाद कई इमारतों को खाली करा लिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 16:34:14 +0530</pubDate>
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