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                            <item>
                <title>“मंगलम मेगा इंडस्ट्रियल पार्क” में विकास कार्यों ने पकड़ी रफ्तार, उद्योगों की शुरुआत भी हुई </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सीकर रोड (चोमू) में मंगलम मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण तेजी से जारी है। VKIA से मात्र 35 मिनट की दूरी पर स्थित इस पार्क में प्रशासनिक कार्यालय, मुख्य द्वार और 5-6 औद्योगिक इकाइयों का काम शुरू हो चुका है। यहाँ RIPS छूट, 33 KV GSS और 80 फीट चौड़ी सड़कें जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/development-works-gained-momentum-in-%E2%80%9Cmangalam-mega-industrial-park%E2%80%9D-industries/article-156016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/manglam.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। MIC और MIC-2 की शानदार सफलता के बाद मंगलम बिल्डर्स का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “मंगलम मेगा इंडस्ट्रियल पार्क” तेजी से आकार ले रहा है। इटावा, सीकर रोड, चोमू (जयपुर) में विकसित हो रहा यह आधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क उद्योगों के लिए एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। VKIA से मात्र 35 मिनट की दूरी पर स्थित होने के कारण इसकी कनेक्टिविटी भी निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित कर रही है। प्रोजेक्ट के डीजीएम विजय सिंह ने बताया कि पार्क में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रोजेक्ट का प्रशासनिक कार्यालय एवं मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 5 से 6 औद्योगिक इकाइयों का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पार्क में 33 केवी के समर्पित GSS का कार्य प्रगति पर है तथा ओवरहेड टैंक के माध्यम से जल आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके अलावा 80 फीट चौड़ी डामर सड़कें, पूर्ण औद्योगिक स्वीकृति, RIPS के तहत स्टांप ड्यूटी में छूट, लोन एवं सब्सिडी सुविधाएं, गेटेड एंट्री के साथ 24×7 सुरक्षा, EV चार्जिंग स्टेशन, ट्रक पार्किंग, हरित पार्क, स्ट्रीट लाइट्स और भव्य प्रवेश द्वार जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंगलम समूह के अनुसार, यह प्रोजेक्ट उद्योगों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:54:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>औद्योगिक कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती: रीको और पीडब्ल्यूडी मिलकर करेंगे सड़कों का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में औद्योगिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रीको और PWD मिलकर 50-50% वित्तीय साझेदारी से 38 एप्रोच सड़कों का विकास करेंगे। PWD ने ₹290.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है, जिससे 16 जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों की लगभग 205 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/industrial-connectivity-will-be-strengthened-rico-and-pwd-will-jointly/article-155896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ricco.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रीको द्वारा राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी एवं आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य के कई रीको औद्योगिक क्षेत्र राज्य राजमार्गों से जुड़े हुए हैं, जहां उद्योगों के कच्चे माल और तैयार उत्पादों के सुगम परिवहन हेतु सड़कों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रीको एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा 38 सड़कों का विकास कोस्ट शेयरिंग मॉडल पर किया जायेगा। इसके अंतर्गत कुल व्यय का 50 प्रतिशत भाग रीको द्वारा वहन किया जायेगा। रीको के 38 औद्योगिक क्षेत्रों की एप्रोच सड़कों की पहचान की गई है, जो सार्वजनिक निर्माण विभाग से संबंधित हैं।</p>
<p>इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 205 किलोमीटर है, जिनके सुदृढ़ीकरण एवं चौड़ीकरण पर लगभग 290 करोड़ रुपये का व्यय होगा। ये सड़कें आबूरोड, अजमेर, बालोतरा, बांसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, चुरू, दौसा, जयपुर, जालौर, झालावाड़, कोटा, नीमराना, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर और उदयपुर के औद्योगिक क्षेत्रों को लाभान्वित करेंगी। इन सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान सरकार के माध्यम से किया जायेगा, जिसमें रीको और पीडब्ल्यूडी की 50-50 प्रतिशत वित्तीय साझेदारी होगी। सार्वजानिक निर्माण विभाग (PWD) ने 205 किमी लंबी 38 सड़को के निर्माण के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति राशि रुपये 290.82 करोड़ दिनांक 06.05.2026 को जारी कर दी गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना पर जयराम रमेश का पत्र: कांग्रेस ने जताई पर्यावरण पर चिंता, केंद्र से की समीक्षा की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर्याप्त पर्यावरण प्रभाव आकलन के कारण द्वीप की अनूठी जैव विविधता, समुद्री पारिस्थितिकी और आदिवासी समुदायों पर गंभीर और विनाशकारी संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-wrote-a-letter-to-bhupendra-yadav-appealing-for/article-155817"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/great-nicobar-project-ngt-clearance-malacca-trade-hub-2026.webp" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने और पर्यावरणीय पहलुओं का समुचित आकलन कराने की अपील की है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को बुधवार को पत्र लिखकर कहा कि परियोजना को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी अपर्याप्त पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययनों पर आधारित है। उनका दावा है कि इससे द्वीप की जैव विविधता, समुद्री पारिस्थितिकी तथा स्वदेशी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर पत्र साझा करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से इस विषय पर उनका और मंत्री के बीच पत्राचार जारी है। परियोजना से संभावित पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा संबंधित रिपोर्टों को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए तैयार पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट पर्याप्त प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित नहीं है तथा इसमें द्वीप की संवेदनशील पारिस्थितिकी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई है।</p>
<p>रमेश ने गलाथिया खाड़ी क्षेत्र में तटीय कटाव संबंधी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना के दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र और व्यापक अध्ययन कराया जाना चाहिए। उन्होंने परियोजना से संबंधित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों की चिंताओं को प्राथमिकता देने की मांग भी की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:06:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दानिश इकबाल का बड़ा बयान, कहा- कागज पर चल रहे मदरसों की सहायता राशि होनी चाहिए बंद, सरकारी धन के दुरूपयोग का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कागजों पर चल रहे फर्जी मदरसों और संस्थाओं की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के चल रहे संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता अविलंब बंद होनी चाहिए और उस राशि का उपयोग सही स्कूलों के विकास में किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/danish-iqbals-big-statement-said-assistance-amount-to-madrassas/article-155736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/madarse.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर सिर्फ कागज पर चल रहे मदरसों की जांच कर उनकी सहायता अविलंब बंद कर देनी चाहिए। इकबाल ने बयान जारी कर कहा कि सरकार यदि इस तरह के कागजी मदरसों की जांच करवाती है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में बिना बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बहुत से मदरसे चलाये जा रहे हैं और इस क्रम में सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कागजी संस्थान फर्जीवाड़े की श्रेणी में आते हैं और उनका खुलासा करते हुए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि उनका वक्तव्य केवल मदरसों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी बहुत सी संस्थाएं चलाई जा रही हैं, जो सरकारी पैसे के दुरुपयोग के लिए कागजों पर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी सभी संस्थाओं की जांच करनी चाहिए और उनकी सहायता बंद कर सुरक्षित की गई राशि का उपयोग सही ढंग से संचालित स्कूलों में बच्चों के भविष्य निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों में करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली रूट पर निजी बस परमिट की तैयारी : रोडवेज प्रशासन ने जताया विरोध, कहा- नए निजी परमिट से रोडवेज को होगा आर्थिक नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली रूट पर निजी बसों को उपनगरीय परमिट देने के फैसले के खिलाफ राजस्थान रोडवेज ने परिवहन विभाग में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। रोडवेज ने तर्क दिया कि हाईवे पर पहले से ही 232 सरकारी बसें चल रही हैं। नए परमिट देने से रोडवेज को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roadways-administration-expressed-opposition-to-the-preparation-of-private-bus/article-155639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bus.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली रूट पर निजी बसों को उपनगरीय परमिट देने की तैयारी के बीच राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विरोध दर्ज कराया है। रोडवेज ने परिवहन विभाग को भेजी आपत्ति में कहा है कि कोटपूतली-शाहपुरा हाईवे और दिल्ली मार्ग पर पहले से ही पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध है, ऐसे में नए निजी परमिट जारी किए जाने से रोडवेज को आर्थिक नुकसान होगा और भविष्य की परिवहन योजनाएं प्रभावित होंगी। रोडवेज प्रशासन के अनुसार दिल्ली रूट पर राजस्थान रोडवेज की 168 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि अन्य राज्यों के परिवहन निगमों की 64 बसें भी इस मार्ग पर चल रही हैं। इस प्रकार कुल 232 बसें एकतरफा रूप से इस रूट पर सेवा दे रही हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अवैध वाहन भी दिल्ली मार्ग पर संचालित हो रहे हैं, जिनके विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई नहीं होने से स्थिति और जटिल बनी हुई है।</p>
<p>रोडवेज ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत 1500 नई बसें शामिल की जानी हैं तथा जल्द ही 300 इलेक्ट्रिक बसें भी बेड़े में जुड़ेंगी। इनमें से बड़ी संख्या में बसों का संचालन शाहपुरा, कोटपूतली और दिल्ली रूट पर प्रस्तावित है। वर्तमान में हीरापुरा-खाटूश्यामजी और हीरापुरा-शाहपुरा मार्ग की रोडवेज बसें भी हाईवे से होकर संचालित हो रही हैं। रोडवेज प्रशासन ने मांग की है कि निजी बसों को परमिट जारी करने से पहले उसका पक्ष सुना जाए, ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 19:00:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अजेय कुमार की मदन राठौड़ और राधा मोहन से मुलाकात: दिल्ली में हुई राजस्थान के नए संगठन महामंत्री की अहम बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान भाजपा के नए संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल से मुलाकात की। बैठक में आगामी निकाय-पंचायत चुनाव और सरकार के कामकाज पर प्रारंभिक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी आज उनकी मुलाकात संभावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ajay-kumars-activism-increased-after-meeting-top-leaders-in-delhi/article-155637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ajay-kumra.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के नए संगठन महामंत्री अजय कुमार नियुक्ति के साथ ही दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और संगठन प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल से मिले हैं। जानकारी के अनुसार अजेय कुमार ने दोनों से मुलाकात में राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, सरकार के कामकाज और आगामी पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर प्रारंभिक चर्चा की बताएं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दिल्ली दौरे पर हैं। ऐसे में उनकी आज भाजपा प्रदेश मुख्यालय में अजेय कुमार से मुलाकात भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:02:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- जनता पर डबल मार कर रही डबल इंजन सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परियोजनाओं में देरी को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन राज में देश के 1981 और राजस्थान के 53 प्रोजेक्ट्स लेट चल रहे हैं। बाड़मेर रिफाइनरी की लागत 84% बढ़कर 79,459 करोड़ पहुंच चुकी है, जिससे जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ashok-gehlots-attack-on-bjp-government-said-double-engine/article-155609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ashok-ggehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: कई प्रोजेक्ट्स में देरी से लागत बढ़ने से आर्थिक भार पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकारों पर हमला बोला है। गहलोत ने कहा है कि डबल इंजन के राज में डबल इंतज़ारशास्त्र  चल रहा है। इंतज़ारशास्त्र के माध्यम से हमने राज्य सरकार को जगाने का प्रयास किया कि किस प्रकार योजनाओं और प्रोजेक्ट्स में देरी न सिर्फ सरकार बल्कि आमजन की जेब और उसको मिलने वाले लाभ पर भारी पड़ता है। मीडिया में आई  खबर दिखाती है कि इंतज़ारशास्त्र सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि पूरे देश में चल रहा है। </p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे 1981 प्रोजेक्ट्स में से अधिकतर इंतज़ारशास्त्र का शिकार हैं जिसके कारण उनकी लागत 5.65 लाख करोड़ रुपए बढ़ चुकी है। प्रदेश में 81 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें से 53 प्रोजेक्ट्स लेट हैं और 10 का बजट बढ़ चुका है। राजस्थान रिफाइनरी जो 2022 में पूरी होनी थी, वह अब 2026 तक खींच दी गई है और उसकी लागत 84.23 प्रतिशत बढ़कर 79,459 करोड़ रुपए पहुंच चुकी है। यदि ये प्रोजेक्ट्स समय पर प्रारम्भ किए जाते या समय पर पूर्ण किए जाते तो 5.65 लाख करोड़ रुपए देश और प्रदेश की जनता की भलाई के काम आते। पीएम जिस डबल इंजन की बात करते हैं वो डबल इंजन जनता पर डबल मार लाता है महंगाई की, डबल भ्रष्टाचार और विकास कार्यों के डबल इंजतार की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:10:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का वज्र प्रहार: एक आरएएस सहित 20 की गई नौकरी ; 332 निलंबित 17 की पेंशन बंद, भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही के खिलाफ  मिशन जीरो टोलरेंस</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक आरएएस सहित 20 भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने 332 कार्मिकों को निलंबित किया और 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन रोकी है। कुल 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति देकर 577 मामलों की जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajan-lal-sharmas-thunderbolt-20-jobs-including-one/article-155573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक एक आरएएस अधिकारी सहित 20 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है जबकि 332 अधिकारियों और कार्मिकों को निलंबित किया गया है। 17 कार्मिकों की पेंशन बंद की गई है तथा 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी कर भ्रष्टाचार के आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा अनुशासनहीनता एवं लापरवाही के 577 मामलों की जांच जारी है। </p>
<p><strong>मुख्यमंत्री के प्रहार से इन अधिकारियों की गई नौकरी</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री के प्रहार के बाद सेवा से हटाए गए अधिकारियों में आरएएस नरसिंह, उपनिदेशक डॉ. पीआर खींची, सहायक आचार्य डॉ, सुनील व्यास, तकनीकी शिक्षा की प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर और कृषि अधिकारी शीना लुकोश शामिल हैं। वहीं व्याख्याता अमृत लाल मीणा, सहायक आचार्य वैजयंती मीणा, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा और लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर को सेवा से बर्खास्त किया गया है। इसी प्रकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह एवं पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजय पांडे को सेवा से हटाया गया है। वहीं, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी सुवाणा भीलवाड़ा भरत प्रकाश मेघवाल, तत्कालीन कृषि उप निदेशक झुंझुनूं राजेश कुमार नैनावत, तत्कालीन सहायक आयुक्त भरतपुर वित्त कर महावीर सिंह आसीवाल, तीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम मोहन सिंह चौहान सीएचसी बिछीवाड़ा डूंगरपुर, डॉ. मुरलीधर शर्मा सीएचसी रामगढ़ पचवारा दौसा और डॉ. मनोहर लाल सीएचसी रामगढ़ अलवर को सेवा से बर्खास्त किया गया है। पीएचईडी की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती और हरिसिंह मीना तत्कालीन एपीपीए एसीजेएम-4 कोटा को एसीबी कोर्ट द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद नौकरी से हटाया गया है।</p>
<p><strong>सेवानिवृत्ति के बाद भी कार्रवाई </strong></p>
<p>सरकार ने 17 अधिकारियों को भ्रष्टाचार सहित विभिन्न मामलों में आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोक कर दण्डित किया है। उन्होंने आरएएस फतेह राय सोनी, पीटीआई फूलाराम फगेड़िया, अतिरिक्त निदेशक खान राकेश हीरात और आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया की आजीवन पूरी पेंशन एवं चिकित्सा अधिकारी डा. निधि मेहरोत्रा की पूर्ण पेंशन एवं ग्रेच्युटी आजीवन रोककर दंडित किया है। आजीवन पेंशन रोकने वाले अधिकारियों में बनवारी लाल मीणा, आरएएसए उप सचिव नगर विकास न्यास अलवर, चिकित्सा विभाग के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. त्रिलोक चंद गगरानी, डॉ. शिवनारायण यादव, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी सीएचसी नीमराणा अलवर देवेन्द्र सिंह ढिल्लो, आरएएसए उप सचिव यूआईटी अलवर मनोहर लाल सिसोदिया, बीडीओ कपासन तत्कालीन कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कोठारी सीएचसी मांडलगढ भीलवाड़ा, डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, चिकित्साधिकारी गंगरार-चित्तौडगढ़, नृसिंह रेबारी, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रतापगढ़, सुरेश माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी जैसलमेर, महेन्द्र सिंह आरपीएस वृत्ताधिकारी सवाई माधोपुर, डॉ. लक्ष्मण दत्त शर्मा चिकित्साधिकारी निवाई टोंक, डॉ. अविनाश कुमार शर्मा सहायक निदेशक पशुधन विकास बांसवाड़ा, देशराज नूनिया, अधिशासी अभियंता आईजीएनपी मोहनगढ़ जैसलमेर शामिल हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अशोक कुमार शर्मा की 3 वार्षिक वेतन वृद्धियां वापस ली गई हैं। </p>
<p><strong>अभियोजन के बाद गिरी गाज </strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा 577 प्रकरणों में जांच कर जिम्मेदारी तय की जा रही है। इसी प्रकार अखिल भारतीय सेवा के 9 प्रकरणों की जांच जारी है। उन्होंने रिश्वत, ट्रैप, पद का दुरूपयोग, आय से अधिक संपत्ति प्रकरणों के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:10:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सीयूईटी-यूजी 2026 में तकनीकी गड़बड़ी पर 'आप' हमलावर, सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने उठाए परीक्षा सुरक्षा पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने CUET-UG 2026 परीक्षा में हुई तकनीकी दिक्कतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने दिल्ली, वाराणसी समेत कई शहरों में सर्वर डाउन होने और प्रश्नपत्र देरी से मिलने को सुरक्षा में बड़ी चूक बताया। हालांकि, एनटीए ने छात्रों को पूरा समय देने का आश्वासन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/saurabh-bhardwaj-raised-questions-on-the-central-government-on-the/article-155482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sourabh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को सीयूईटी(यूजी) 2026 परीक्षा के दौरान विभिन्न केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी की खबरों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी करते हुए परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली, नोएडा, अंबाला, वाराणसी, बेंगलुरु, कानपुर समेत कई शहरों के परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा शुरू होने में देरी की खबरें सामने आई हैं।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया कि यदि कुछ छात्रों को सुबह 9:30 बजे प्रश्नपत्र उपलब्ध हो गया और अन्य छात्रों को वही प्रश्नपत्र 11:30 बजे मिला, तो क्या इसे परीक्षा सुरक्षा में बड़ी चूक नहीं माना जाएगा? आप नेता और दिल्ली विधान सभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने एक वीडिया साझा करते हुए एक्स पर कहा "वाराणसी से सीयूईटी परीक्षा केंद्र के दृश्य। छात्रों को बताया जा रहा है कि सर्वर काम नहीं कर रहा है।" गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने स्वीकार किया था कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीसीएस (टीसीएस) के स्तर पर आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ केंद्रों पर सीयूईटी(यूजी) 2026 परीक्षा शुरू होने में देरी हुई। हालांकि एजेंसी ने कहा है कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और प्रभावित अभ्यर्थियों को पूरा परीक्षा समय दिया जा रहा है ताकि किसी को नुकसान न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/saurabh-bhardwaj-raised-questions-on-the-central-government-on-the/article-155482</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:09:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्दारमैया ने जाते-जाते शिवकुमार, राहुल के लिए खड़ी की मुश्किलें, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूरी देकर कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी उलझन में डाल दिया है। इस फैसले से राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार असहज स्थिति में हैं, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी और नया आरक्षण समीकरण पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-created-problems-for-shivkumar-rahul-while-leaving-read-what/article-155452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dkk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जाते-जाते राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की तैयार की गयी 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूर कर कांग्रेस नेतृत्व को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सियासत में कभी-कभी ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई सरकारी फाइल सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसका अपना एक अलग वजूद बन जाता है। कर्नाटक की जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट भी एक ऐसा ही मोहरा है। जहां निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस अफसरशाही इत्मीनान और राजनीतिक अंतिम रूप के साथ इसे मंजूर किया है, उसने खामोशी से वही काम करना शुरू कर दिया है, जो आंकड़े अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं- </p>
<p><strong>ताकतवरों की नींद उड़ाना।</strong></p>
<p>रिपोर्ट की मंजूरी देने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके भीतर ज्यादा दिलचस्प हलचल छिपी हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अब खुद को ऐसी असहज स्थिति में पा रहे हैं, जहां उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। वे उसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के सियासी मिजाज के मंझे खिलाड़ी सिद्दारमैया ने शायद वही किया है, जो तजुर्बेकार सियासतदान अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं एक ऐसा माहौल छोड़ जाना, जो कानूनी तौर पर तो बिल्कुल साफ-सुथरा हो लेकिन राजनीतिक रूप से काफी उलझा हुआ हो। यह रिपोर्ट एक बार मंजूर होने के बाद अब सिर्फ कोई सुझाव नहीं रह गयी है। यह एक ऐसा सवाल बन चुकी है, जो जवाब के इंतजार में है।</p>
<p>शिवकुमार के लिए यह मुद्दा फिलहाल सबसे अहम है और सीधे उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राज्य का जातीय समीकरण कभी भी हवा-हवाई नहीं होता। यह उन समुदायों के रूप में सामने आता है, जो पुरानी बातें याद रखते हैं, ऐतराज जताते हैं और एकजुट होते हैं। वोक्कालिगा समुदाय का एक वर्ग, जो पहले भी जातीय सर्वेक्षण को लेकर हुए विवादों को लेकर संवेदनशील रहा है, इसके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर कड़ी और सतर्क निगाह रख सकता है। पद्धति और आंकड़ों पर बहस भले ही दफ्तरों में हो, लेकिन पहचान और प्रतिनिधित्व का सवाल सड़कों पर तय होता है।</p>
<p>राहुल गांधी की परेशानी का स्तर थोड़ा अलग है। जातिगत जनगणना के हक में उनका लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक रुख अब इसे अमली जामा पहनाने में टेडी खीर नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी आदत के मुताबिक, इस सूरत-ए-हाल को नीति के विकास के रूप में नहीं, बल्कि एक सियासी विरोधाभास के तौर पर देखना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा बोलती है और राज्यों में दूसरी। कांग्रेस जैसा लाजिमी है, इस बात से सरासर इनकार करती है।</p>
<p>अब कांग्रेस के सामने दो रास्ते खुलते हैं, और दोनों में से कोई भी रास्ता आरामदेह नहीं है। अगर इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता है, तो इसके प्रशासनिक ईमानदारी और फिर उसके बाद आने वाली राजनीतिक हिचकिचाहट का एक और भारतीय उदाहरण बन जाने का खतरा है। इसने पिछड़े समुदायों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों के बीच जो उम्मीदें जगाई हैं, वे इतनी आसानी से खत्म नहीं होंगी। ऐसी सूरत में इस रिपोर्ट को इस बात के लिए कम याद किया जायेगा कि इसमें क्या कहा गया था, बल्कि इस बात के लिए ज्यादा याद किया जायेगा कि इसके साथ क्या नहीं किया गया।</p>
<p>अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसके नतीजे ज्यादा त्वरित और साफ तौर पर दिखाई देने वाले होंगे। आरक्षण का नये सिरे से निर्धारण समुदायों का प्रतिनिधित्व और जनसांख्यिकीय दावे सक्रिय रूप से राजनीति के केंद्र में आ जायेंगे। समर्थन और विरोध दोनों एक साथ खड़े होंगे। कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं। प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं तथा गठबंधन को संभालना और भी मुश्किल हो जायेगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए इसका मतलब पार्टी के अनुशासन और अपने समुदाय की भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी और श्री गांधी के लिए इसका मतलब अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को उसकी तमाम अपरिहार्य उलझनों के साथ प्रशासनिक हकीकत में बदलना होगा। दोनों ही सूरतों में दबाव खत्म नहीं होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सिद्दारमैया के इस रिपोर्ट को मंजूर किये जाने को सिर्फ कागजी या प्रक्रियात्मक कार्रवाई से बढ़कर देखा जा रहा है। इस जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर खामोशी लेकिन मजबूती के साथ दूसरों के कंधों पर डालने के तौर पर देखा जा रहा है- एक तजुर्बेकार सियासतदान का यह तय करने का तरीका कि एक बार जो फैसला ले लिया गया, वह आराम से सिर्फ उनका ही होकर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:09:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>खरीफ सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से लेकर डिजिटल खेती तक बनेगा नया कृषि रोडमैप: शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ अभियान का शुभारंभ करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3,765 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। भारत धान उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर विश्व में शीर्ष पर पहुंच गया है। अब बेहतर योजना के लिए 8 कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर सम्मेलन होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/from-climate-change-to-digital-farming-a-new-agricultural-roadmap/article-155285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भविष्य में कृषि-जलवायु क्षेत्र के आधार पर भी क्षेत्रीय सम्मेलनों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को यहां आयोजित खरीफ सम्मेलन के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश को मोटे तौर पर आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि पांच के बजाय इन आठ क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएं ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और रणनीतियां जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 28 और 29 मई यहां, पूसा परिसर में राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 पर कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया है जिसमें देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। इसमें खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिन तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बुवाई के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता और कृषि मिशनों को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने को लेकर सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जा रही है। सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई जिनमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी आधार पर राज्य अपनी तैयारियों के साथ सम्मेलन में पहुंचे हैं। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।</p>
<p>केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा देश बहुत बड़ा है, इसलिए इस बार केवल राष्ट्रीय सम्मेलन ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय सम्मेलन भी प्रारंभ किए गए हैं। अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे, जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की खेती और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा कि जब छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा होती है तो हर राज्य की समस्याओं और जरूरतों पर विस्तार से बात हो पाती है।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन के लिए अलग-अलग मिशन बनाए गए हैं। राज्यों के साथ मिलकर बेहतर बीज, सीड रिप्लेसमेंट रेट बढ़ाने, डेमोंस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बागवानी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और कॉटन मिशन पर भी चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि कई किसान जानकारी के अभाव में जरूरत से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं, इसलिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी। हमारे देश में खेतों का आकार छोटा है। ऐसे में किसान कम जमीन में ज्यादा लाभ कैसे कमा सके, इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए पर्याप्त वित्त पोषण भी जरूरी है। किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जोखिम से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। कृषि ऋण वितरण में अभी भी राज्यों के बीच असमानता है। कुछ राज्यों में कृषि ऋण बहुत कम है और कुछ में ज्यादा। यदि किसानों के पास केसीसी और निवेश के लिए पूंजी होगी तो वे बेहतर खेती कर पाएंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सम्मेलन में एग्री इंफ्रा फंड, पीएम-आशा योजना, डिजिटल कृषि, फार्मर आईडी और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके लिए राज्यों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, जहां दिनभर विभिन्न मुद्दों पर मंथन होगा। अगले दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों की मौजूदगी में विभिन्न विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और खरीफ फसल के लिए देश और राज्यों का संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में "खेत बचाओ अभियान" पर भी व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के परिश्रम, भारत सरकार की योजनाओं व विकसित नई बीज किस्मों के कारण इस बार देश ने रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। </p>
<p>वर्ष 2025-26 में देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 188 लाख टन अधिक है। वहीं, धान उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। धान का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और अब दुनिया में भारत नंबर-1 बन गया है। हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि गेहूं का उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है। उन्होंने कहा कि केवल खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि तिलहन उत्पादन में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष तिलहन का संभावित उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों का उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंच गया है जो रिकॉर्ड स्तर है। दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में उत्पादन में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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                <title>Jodhpur Solar Society की नई कार्यकारिणी का गठन, प्रीतेश माथुर बने अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर में पीएम सूर्य घर योजना और आसान सब्सिडी से सोलर ऊर्जा का बड़ा विस्तार हुआ है। इस अभियान को गति देने के लिए 'जोधपुर सोलर सोसायटी' की नई कार्यकारिणी का गठन कर प्रीतेश माथुर को अध्यक्ष चुना गया है। संस्था 100 से अधिक सदस्यों के साथ सौर ऊर्जा जागरूकता बढ़ा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/formation-of-new-executive-of-jodhpur-solar-society-pritesh-mathur/article-154858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/solar.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। जोधपुर में पिछले कुछ वर्षों में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2020 से पहले शहर में सोलर प्लांट अधिकतर इंडस्ट्रियल एरिया तक ही सीमित थे, क्योंकि उस समय सरकारी सब्सिडी और लोन लेना आसान नहीं था। आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना काफी मुश्किल माना जाता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं, आसान सब्सिडी प्रक्रिया और पीएम सूर्य घर योजना के कारण आज जोधपुर में हर दूसरे घर की छत पर सोलर प्लेट नजर आने लगी है। इसी बढ़ते सोलर अभियान को और मजबूत बनाने के लिए Jodhpur Solar Society की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। </p>
<p>सर्वसम्मति से प्रीतेश माथुर को संस्था का अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही जय वर्मा एवं विपुल बाफना को उपाध्यक्ष, मुकेश जांगिड़ को सचिव, चिमन सोनी को सह सचिव, जितेंद्र सर्राफ को कोषाध्यक्ष, नवीन चितारा को मीडिया प्रभारी और भैराराम चौधरी को संगठन मंत्री बनाया गया है। वर्ष 2021 में स्थापित हुई जोधपुर सोलर सोसायटी आज सोलर सेक्टर में एक मजबूत पहचान बन चुकी है। संस्था से 100 से ज्यादा सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं, जो लगातार लोगों को सोलर ऊर्जा के फायदे समझाने और सही जानकारी देने का काम कर रहे हैं। संस्था का उद्देश्य सिर्फ सोलर सिस्टम लगवाना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित व भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना भी है। अध्यक्ष प्रीतेश माथुर ने बताया कि आज जोधपुर में सोलर ऊर्जा को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है। पहले लोग सोलर सिस्टम को महंगा और कठिन प्रक्रिया मानते थे, लेकिन अब सरकार से आसानी से सब्सिडी मिल रही है। पीएम सूर्य घर पोर्टल आने के बाद आम व्यक्ति भी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:58:34 +0530</pubDate>
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