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                <title>federalism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-attacked-the-center-over-delimitation-raised-questions-on-the/article-150483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairam-ramesh-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”</p>
<p>कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:07 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, लोगों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प, बोली-हमारी लड़ाई जारी रहेगी, आपके अधिकार किसी भी हाल में छीनने नहीं दूंगी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में ईद सभा के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को साजिश करार देते हुए "भाजपा हटाओ, देश बचाओ" का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों और सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-mamata-banerjee-said-it-was-an/article-147331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को ईद के मौके पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया और केंद्र की भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। वार्षिक ईद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल के लोगों के अधिकार किसी भी हाल में छीने नहीं जाने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से कई नाम हटाए गए हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की गरिमा सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम बंगाल के हर व्यक्ति के साथ हैं और उनके अधिकारों को छीने नहीं जाने देंगे।" मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जो बंगाल को निशाना बनाएंगे, उनका अंजाम अच्छा नहीं होगा।" साथ ही उन्होंने "बीजेपी हटाओ, देश बचाओ" का नारा भी दोहराया।</p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अंतिम एसआईआर सूची को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों के जांच के दायरे में होने की खबरें हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।</p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली जाकर आयोग के सामने अपनी बात रख चुकी हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।<br />कार्यक्रम के दौरान बारिश को उन्होंने "ईश्वरीय आशीर्वाद" बताया और कहा कि यह उनके संघर्ष के समर्थन का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के बीच एकता और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। इस मौके पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल की सांप्रदायिक एकता कायम रहेगी। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने शहर की एक मस्जिद में जाकर ईद की नमाज से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा शासन में देश का संघवाद खतरे में है, एमके स्टालिन ने दी गंभीर खतरे की चेतावनी </title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र में भाजपा नीत सरकार के तहत भारत के संघवाद पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mk-stalin-warns-of-serious-danger-in-the-countrys-federalism/article-104249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(5)14.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र में भाजपा नीत सरकार के तहत भारत के संघवाद पर गंभीर खतरे की चेतावनी दी। स्टालिन ने राज्यपाल आर एन रवि के खिलाफ हमला और तेज करते हुए कहा कि राज्यपाल के पास अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। स्टालिन ने एक अखबार के संपादकीय का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल की असंवैधानिक अत्याचार और  केंद्र सरकार की ओर से उनके घृणित समर्थन को आज सही ढंग से उजागर किया गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह कड़ा संपादकीय राज्यपाल के विधानसभा को मनमाने तरीके से कमजोर करने को संक्षेपित करता है और यह दोहराता है कि उन्हें पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। स्टालिन ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि न तो राज्यपाल, जो राज्य के प्रमुख हैं, ने भारत भर के प्रमुख समाचार पत्रों और संवैधानिक विशेषज्ञों द्वारा की गई बार-बार की आलोचना से कुछ सीखा है, और न ही उनके दिल्ली स्थित भाजपा नेता, जो उनकी कार्रवाइयों का समर्थन और संरक्षण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपालों की अमानवीय और असंवैधानिक कार्रवाइयों को दंडित करने के बजाय, ऐसे अत्याचारों को पुरस्कृत करती है ताकि राजनीतिक रंजिशें सुलझाई जा सकें। गौरतलब है कि राजभवन और सत्तारूढ़ द्रमुक के बीच कई मुद्दों पर संघर्ष चल रहा है, जिसमें राज्यपाल ने पिछले महीने राष्ट्रीय गीत का पा न होने का कारण बताते हुए विधानसभा में उपस्थित होने के बावजूद पारंपरिक नववर्ष संबोधन देने से इनकार कर दिया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2025 12:06:49 +0530</pubDate>
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                <title>CM गहलोत ने PM मोदी को लिखा पत्र... जाने वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में लगातार की जा रही कमी वित्तीय संघवाद की भावना के विपरीत - मुख्यमंत्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0----%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%B9/article-2198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/gehlot-modi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है आमजन को पूर्ण राहत देने के लिए कि केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल एवं डीजल पर केन्द्रीय पूल की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी एवं विशेष एक्साइज ड्यूटी को और कम किया जाए, ताकि आमजन को एक्साइज ड्यूटी एवं वैट में कमी का लाभ एक साथ मिल सके। साथ ही, उन्होंने तेल कम्पनियों को पेट्रोल-डीजल के मूल्य में निरन्तर वृद्धि पर रोक लगाने के लिए पाबंद करने का भी आग्रह करते हुए कहा कि तेल कम्पनियों द्वारा रोज-रोज की जा रही बढ़ोतरी से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा आमजन को दी गई राहत का लाभ शून्य हो जाएगा।<br /> <br />  गहलोत ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की बकाया जीएसटी पुनर्भरण राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए एवं जीएसटी पुनर्भरण की अवधि वर्ष 2027 तक बढ़ाई जाए। पत्र में उन्होंने लिखा कि हमारी अपेक्षा है कि केन्द्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में पेट्रोल पर अतिरिक्त 10 रूपये प्रति लीटर व डीजल पर अतिरिक्त 15 रूपये प्रति लीटर की कमी करे। केन्द्र द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम करने पर प्रदेश के वैट में भी 3.4 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल पर तथा 3.9 रूपये प्रति लीटर डीजल पर आनुपातिक रूप से स्वतः ही कम हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप राज्य के राजस्व में 3500 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की अतिरिक्त हानि होगी जिसे जनहित में राज्य सरकार वहन करने के लिये तैयार है।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 से लगातार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली बेसिक एक्साइज ड्यूटी को कम कर राज्यों के साथ साझा किये जाने वाले हिस्से को घटा दिया गया तथा विशेष एवं अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी जिसका कोई हिस्सा राज्यों को नहीं मिलता, उसे लगातार बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि एवं एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट सेस का लाभ केवल केन्द्रीय राजस्व को मिल रहा है, जबकि डिविजीबल पूल में आने वाली बेसिक एक्साइज ड्यूटी में उत्तरोत्तर कमी की गई है, इससे राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में कमी आई है। उन्होंने कहा कि राज्यों के हिस्से में लगातार की जा रही कमी वित्तीय संघवाद (फिस्कल फेडरेलिज्म) के सिद्धांतों के विपरीत है।</p>
<p><br /> मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित सरकारों को प्रदेश के विकास एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने होते हैं। आमजन तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने में राज्यों की भौगोलिक स्थिति, आर्थिक परिदृश्य एवं स्थानीय परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। इन परिस्थितियों में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवश्यक राजस्व संग्रहण के लिए करारोपण करना राज्यों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी एवं विशेष एक्साइज ड्यूटी को पहले अत्यधिक बढ़ाना एवं बाद में कम कर राज्यों से वैट कम कराने के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाना भी सहकारी संघवाद (कॉपरेटिव फेडरेलिज्म) की भावना के विपरीत है।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि कोविड संक्रमण में लॉकडाउन के दौरान 6 मई, 2020 को केन्द्र सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये एवं डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। 4 नवम्बर, 2021 से पेट्रोल पर 5 रुपये एवं डीजल पर 10 रुपये कम कर जनता को राहत देने की बात की जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि वर्ष 2021 में ही पेट्रोल की कीमत करीब 27 रुपये एवं डीजल की कीमत करीब 25 रुपये बढ़ी। अत्यधिक बढ़ाई गई अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी में से केवल कुछ छूट दी गई। ऐसे में, केन्द्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती अपर्याप्त प्रतीत होती है।</p>
<p><br /> मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान राज्य के कुल राजस्व का 22 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल-डीजल के वैट से आता है। वैट में कमी के रूप में राजस्थान सरकार 29 जनवरी, 2021 से अब तक लगभग 3 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल पर तथा 3.8 रूपये प्रति लीटर डीजल पर कम कर चुकी है। इससे राज्य के राजस्व में 2800 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की हानि हो रही है। कोविड-19 की परिस्थितियों के कारण इस वित्तीय वर्ष में राज्य के राजस्व में माह अक्टूबर तक 20 हज़ार करोड़ रूपये की कमी आई है। केन्द्र द्वारा राज्य को 5963 करोड़ रूपये का जीएसटी पुनर्भरण उपलब्ध नहीं कराना भी इसका एक बड़ा कारण है। ऐसी स्थिति में  भी हमारी सरकार ने कुशल वित्तीय प्रबन्धन से प्रदेश में विकास की गति को कम नहीं होने दिया। राज्य सरकार जन घोषणा तथा बजट में किये वादों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिये तत्पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 11:08:39 +0530</pubDate>
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