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                <title>conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है ईरानर: ट्रंप ने युद्ध 'जल्द' खत्म होने ​का किया दावा, बोले-ईरान समझौता अस्वीकार करता है तो  फिर शुरू होगी बमबारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम हेतु 14 बिंदुओं वाले समझौते पर चर्चा तेज हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, जबकि ईरान पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। इसमें परमाणु सुविधाओं को बंद करने और ईंधन आपूर्ति जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। वैश्विक शांति के लिए यह वार्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-is-reviewing-the-american-proposal-trump-claimed-that-the/article-153039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि युद्ध समाप्त करने संबंधी अमेरिकी प्रस्ताव अभी "समीक्षाधीन" है और ईरान अपने रुख को अंतिम रूप देने के बाद पाकिस्तानी मध्यस्थों को जवाब देगा। ईरान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जल्द समाप्त होने की संभावना जताई है। ट्रंप ने जॉर्जिया में रिपब्लिकन समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "पिछले 24 घंटों में ईरान के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई है और समझौते की संभावना है। मुझे लगता है कि हम जीत गये।" उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के उनके प्रयासों के कारण यदि अमेरिकियों को ईंधन कीमतों जैसी अल्पकालिक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो वह अस्थायी होगा।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस ईरान के साथ 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन के करीब पहुंच सकता है, जो आगे परमाणु वार्ता के लिए रूपरेखा का काम करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे युद्धविराम लागू हो सके और 30 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दे, ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता जैसे विवादित मुद्दों पर समाधान निकाला जा सके।</p>
<p>ट्रंप ने पीबीएस न्यूज से कहा कि किसी भी समझौते के तहत ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका भेजना होगा और भूमिगत परमाणु सुविधाएं बंद करनी होंगी। दूसरी ओर, ईरान में इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। ईरानी संसद के एक वरिष्ठ सदस्य ने प्रस्ताव को "अमेरिका की इच्छाओं की सूची" बताया, जबकि एक अन्य अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका आवश्यक रियायतें नहीं देता है तो ईरान "कठोर जवाब" देगा जिससे अमेरिका को पछतावा होगा।</p>
<p>ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने कहा, "अमेरिका युद्ध में वह हासिल नहीं कर पाएगा जो वह प्रत्यक्ष वार्ता में नहीं पा सका।" उन्होंने कहा कि ईरान "पूरी तरह तैयार" है। दूसरी ओर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौता अस्वीकार करता है तो "बमबारी फिर शुरू होगी और पहले से कहीं अधिक तीव्र होगी।" इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के साथ वार्ता कर बातचीत की प्रगति की जानकारी ली।</p>
<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते के संकेतों का स्वागत करता है, लेकिन मध्यस्थ होने के नाते वह बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं करेगा। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने के प्रयास कर रहा है और यदि अगले दौर की वार्ता इस्लामाबाद में होती है तो यह उसके लिए "सम्मान की बात" होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के बाद तनाव बढ़ा: नए हमलों के बीच ईरान-अमेरिका वार्ता खतरे में, ट्रंप ने दी चेतावनी </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने की कगार पर है। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' और ईरानी ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी जहाजों पर हमला होने पर ईरान को मिटा दिया जाएगा। इस तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक नौवहन और शांति के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-after-project-freedom-in-hormuz-iran-us-talks-in/article-152825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज करने और होर्मुज से जहाजों के पारगमन में मदद के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू करने के बाद तनाव चरम पर है। यूएई के फुजैरा पेट्रोलियम उद्योग क्षेत्र पर ईरान के ड्रोन हमले के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। इस घटना ने उस शांति को खत्म कर दिया है जो अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद से बनी हुई थी। </p>
<p>ट्रम्प की चेतावनी : हमारे जहाजों पर हमला किया तो मिटा देंगे : उधर, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सेना ने होर्मुज या फारस की खाड़ी में कहीं भी अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने का दुस्साहस किया, तो उन्हें धरती से मिटा दिया जाएगा। ईरान की प्रतिक्रिया भी उतनी ही आक्रामक रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर युद्धविराम के उल्लंघन और नाकाबंदी कर सुरक्षित नौवहन को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति को सहन करना असंभव होगा और चेतावनी दी कि ईरान के पास अभी भी कई बड़े विकल्प मौजूद हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 11:04:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पंजाब सीएम मान का भाजपा पर हमला: गैर-संवैधानिक तरीकों से पार्टियों को तोड़ने का आरोप, बोले-पंजाब में 'ऑपरेशन लोटस' की घटिया चालें कभी कामयाब नहीं होंगी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर 'लोकतंत्र की हत्या' और ऑपरेशन लोटस के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, भाजपा में शामिल हुए राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाकर पलटवार किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/punjab-cm-manns-attack-on-bjp-accusing-it-of-breaking/article-152752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी के सांसदों के केंद्र सरकार में शामिल होने पर कहा है कि गैर-संवैधानिक तरीकों से पार्टियों को तोड़ना लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है। सीएम मान ने मंगलवार को इस मामले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष उठाने के बाद यहां पत्रकारों से कहा, "आज दिल्ली में हमने राष्ट्रपति के समक्ष देश में हो रही 'लोकतंत्र की हत्या' के खिलाफ अपनी आवाज़ ज़ोरदार तरीके से उठाई है। गैर-संवैधानिक तरीकों से पार्टियों को तोड़ना और ईडी-सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके केंद्र की 'वॉशिंग मशीन' में दागी नेताओं को पाक-साफ करना, हमारे लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है।"</p>
<p>उन्होंने कहा , " पंजाब में 'ऑपरेशन लोटस' की घटिया चालें कभी कामयाब नहीं होंगी। हमारे विधायक लाखों पंजाबियों की आवाज़ हैं और पंजाबी कभी भी विश्वासघात बर्दाश्त नहीं करते। आपके 'जनसेवक' के तौर पर, मैं हर पंजाबी को भरोसा दिलाता हूँ कि हम जनता के जनादेश और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ेंगे।" इससे पहले आप से भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात की। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने के बाद पंजाब की सरकार मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।</p>
<p>राघव चड्ढा ने कहा , "हमने राष्ट्रपति से बताया कि कैसे आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब सरकार राज्य तंत्र का दुरुपयोग कर हमें निशाना बना रही है, जबकि दो-तिहाई सांसदों ने भाजपा में विलय का विकल्प चुना है। जो पार्टी कभी प्रतिशोध का ढोंग करती थी, वह अब अपना सबसे घिनौना रूप दिखा रही है। राष्ट्रपति ने हमें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया है।" उन्होंने चेतावनी भी दी कि आप ख़तरनाक खेल खेल रही, इसका अंत खतरनाक होगा। आप के पास एक राज्य की पुलिस है लेकिन भाजपा के पास 21 राज्यों की पुलिस है। उन्होंने कहा कि पंजाब के अधिकारियों को इस खतरनाक खेल का हिस्सा नहीं बनना चाहिए क्योंकि पंजाब की सरकार थोड़े दिनों की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:14:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने फिर किया सीज़फायर का उल्लंघन: ईरानी नौकाओं पर ड्रोन हमला, फुजैराह तेल बंदरगाह पर लगी भीषण आग </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया है। यूएई के तेल बंदरगाह पर हमलों के बाद तनाव चरम पर है। जहां अमेरिका फंसे हुए 2,000 जहाजों को निकालने का प्रयास कर रहा है, वहीं ईरान ने इसे 'सैन्य विफलता' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-again-violates-ceasefire-drone-attack-on-iranian-boats-massive/article-152697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं पर हमला किया है, क्योंकि वाशिंगटन लगभग बंद जलमार्ग के माध्यम से खाड़ी में फंसे जहाजों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया दोनों ने सोमवार को महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों पर हमले की सूचना दी। संयुक्त अरब अमीरात ने यह भी कहा कि ईरानी हमले के बाद फुजैराह के तेल बंदरगाह पर आग लग गई।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "प्रोजेक्ट फ्रीडम प्रोजेक्ट डेडलॉक है।" फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत हद तक अवरुद्ध रहा है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल एवं द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है।</p>
<p>अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके तहत ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बंद कर दिए, लेकिन तब से कुछ ही जहाज जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी भी लगा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, "हमने सात छोटी नौकाओं को मार गिराया है या जैसा कि वे उन्हें 'तेज़' नौकाएं कहते हैं। अब उनके पास बस यही बची हैं।" अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने नौकाओं पर हमला करने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p>बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इस दावे का खंडन किया कि अमेरिका ने तेज नौकाओं पर हमला किया। सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए, तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि इसके बजाय दो छोटे मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया जिनमें पांच नागरिकों की मौत हो गई। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि नौसेना के विध्वंसक पोत और अमेरिकी ध्वज वाले व्यापारिक जहाज सोमवार को जलडमरूमध्य से गुजरे थे। ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा करार दिया और कहा कि उसकी सेना ने एक अमेरिकी युद्धपोत पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। अमेरिकी सेना ने इस बात से इनकार किया।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने यूएई अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने कहा कि ये हमले अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन खाड़ी में अपने साझेदारों की रक्षा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।पड़ोसी देश कतर ने टैंकर पर हुए हमले की निंदा करते हुए जलडमरूमध्य को बिना शर्त फिर से खोलने की मांग की। रविवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका "प्रोजेक्ट फ्रीडम" के तहत फंसे हुए जहाजों को समुद्री मार्ग से बाहर निकालने में मदद करना शुरू करेगा। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अनुमानित 20,000 नाविक 2,000 जहाजों पर फंसे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 11:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी सेना की ट्रंप को चेतावनी: अमेरिकी सेना ने होर्मुज में किया प्रवेश तो होगी कड़ी कार्रवाई ; जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है, पूरी ताकत से की जाएगी इसकी सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी सेना के प्रवेश का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फंसे जहाजों को निकालने के लिए 15,000 सैनिकों का मिशन शुरू कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र उसके पूर्ण नियंत्रण में है और बिना अनुमति प्रवेश पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-armys-warning-to-trump-if-us-army-enters-hormuz/article-152635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सेना ने अमेरिकी को चेतावनी दी है कि उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होने की कोशिश न करे। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान के बाद आई है जिसमें उन्होंने जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान शुरू करने की बात कही है। अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि यह कोई औपचारिक 'एस्कॉर्ट मिशन' नहीं है। इस 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को सफल बनाने के लिए गाइडेड मिसाइल, 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और 15,000 सैनिकों की मदद ली जाएगी।</p>
<p>जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान इस इलाके में आने वाली 'किसी भी विदेशी सेना' और खास तौर पर 'आक्रामक अमेरिकी सेना' को निशाना बनाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है और इसकी सुरक्षा पूरी ताकत से की जाएगी। अब्दुल्लाही ने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का प्रबंधन मजबूती से कर रहे हैं। हम सभी व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सलाह देते हैं कि वे यहाँ तैनात हमारी सेना के साथ तालमेल बिठाए बिना यहाँ से न गुजरें, अन्यथा उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>मेजर जनरल ने कहा कि यह पूरा समुद्री रास्ता ईरानी सेना के दायरे में आता है। अमेरिका की कोई भी 'आक्रामक हरकत' यहाँ के हालात को और खराब करेगी और जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सुरक्षित आवाजाही के लिए 'हर हाल में' ईरानी सेना से संपर्क करना जरूरी है। दूसरी ओर, ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत सोमवार से फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को बाहर निकालने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि कई देशों ने अपने जहाजों को मुक्त कराने के लिए अमेरिका से मदद मांगी है, जो इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। उन्होंने इन जहाजों को निर्दोष और इस विवाद से पूरी तरह अलग बताया है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इन तटस्थ देशों के जहाजों को प्रतिबंधित जलमार्ग से सुरक्षित बाहर लाएगी, ताकि वे अपना व्यापारिक कामकाज फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने दावा किया कि इस पहल से अमेरिका के साथ-साथ ईरान और पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। घोषणा के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित देशों को सूचित कर दें कि अमेरिका उनके जहाजों और चालक दल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि सोमवार सुबह से शुरू होने वाली 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' प्रक्रिया के लिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे एक मानवीय मिशन बताते हुए कहा कि कई जहाजों पर भोजन और जरूरी सामान खत्म हो रहा है, जिससे वहाँ के कर्मियों की हालत चिंताजनक है। हालाँकि, ट्रंप ने सख्त चेतावनी भी दी कि इस मानवीय काम में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में किसी ने दखल दिया, तो उससे पूरी ताकत के साथ निपटा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 14:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी नाकाबंदी के चलते ईरान तेल उत्पादन में कर सकता है कटौती, अमेरिकी सेना ने की ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के दबाव में ईरान ने अपने तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियरों ने कुओं को बंद करना शुरू किया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने शत्रुता समाप्ति की घोषणा की है, लेकिन क्षेत्र में तनाव और अमेरिकी सेना की मौजूदगी बरकरार है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-may-cut-oil-production-due-to-us-blockade-us/article-152526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/iran.png" alt=""></a><br /><p>माॅस्को। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह दावा किया है। एजेंसी ने कहा कि ईरान तेल उत्पादन में कटौती कर रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियर कुओं को बंद करने और गंभीर नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन को तुरंत फिर से शुरू करने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि 28 फरवरी को, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। </p>
<p>अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बाद में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। दाेनों देशों के बीच फिलहाल किसी तरह की गोलीबारी की कोई खबर नहीं है, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ईरानी इंजीनियर कुओं को बंद करने और गंभीर नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन फिर से शुरू करने में सक्षम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कांग्रेस को पत्र भेजकर ईरान के खिलाफ शत्रुता समाप्त करने की घोषणा की और स्पष्ट किया कि ईरान से संभावित खतरों को रोकने के लिए अमेरिकी सेना क्षेत्र में बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:29:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला : 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान, सीजफायर जारी रखने के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ दो महीने से जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने की घोषणा की है। यह निर्णय वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले लिया गया। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में हमले की स्थिति में रक्षात्मक कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित है, जबकि इजरायल को सैन्य सहायता जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-trump-government-declaration-of-end-of-war/article-152348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बीते दो महीनों से जारी सैन्य तनाव पर अब विराम लगने की खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब समाप्त माना जाएगा। यह टकराव उस समय शुरू हुआ था जब क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई थीं। इसके बाद हालात धीरे-धीरे युद्ध जैसी स्थिति में बदल गए, जिसमें समुद्री और सामरिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ीं।</p>
<p>अब अमेरिकी प्रशासन ने वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन के तहत 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से ठीक पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान किया है। हालांकि इस निर्णय में नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ईरान की ओर से किसी अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला होता है, तो राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की पूर्व अनुमति के रक्षात्मक कार्रवाई करने का अधिकार होगा।</p>
<p>इसी बीच, अमेरिका की ओर से इजरायल को सैन्य सहायता जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में करीब 6,500 टन हथियार और सैन्य सामग्री भेजी गई है, जबकि पूरे 60 दिनों में यह आंकड़ा 1.15 लाख टन से अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध समाप्ति की घोषणा हो गई हो, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:58:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Ukraine Drone Attack: यूक्रेनी ड्रोन हमले से तुआपसे के समुद्री टर्मिनल पर लगी आग, बड़ा हादसा टला, कोई हताहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के तुआपसे में यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद एक समुद्री टर्मिनल में भीषण आग लग गई। क्रास्नोडार प्रशासन के अनुसार, इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। आपातकालीन सेवाएं मौके पर आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं। यह घटना क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ukraine-drone-attack-ukrainian-drone-attack-causes-fire-at-tuapse/article-152282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के तुआपसे में एक समुद्री टर्मिनल पर यूक्रेनी ड्रोन के हमले के कारण आग लग गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। यह जानकारी क्रास्नोडार क्षेत्र के प्रतिक्रिया केंद्र ने शुक्रवार को दी। प्रतिक्रिया केंद्र ने कहा, "तुआपसे में युक्रनी ड्रोन हमले के परिणामस्वरूप एक समुद्री टर्मिनल में आग लग गई।</p>
<p>कोई हताहत नहीं हुआ है और आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर काम कर रही हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:13:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट : डोनाल्ड ट्रंप ने की फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना, होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना करते हुए ईरान पर उनके रुख को खतरनाक बताया है। ट्रंप का दावा है कि परमाणु संपन्न ईरान दुनिया को बंधक बना लेगा। वहीं, जर्मनी ने अमेरिका की युद्ध नीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-donald-trump-sharply-criticized-friedrich-merz-also/article-152097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहराते मतभेद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मर्ज़ को लगता है कि ईरान का परमाणु हथियार संपन्न होना ठीक है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जर्मनी आर्थिक और अन्य मोर्चों पर इतना खराब प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर को नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो पूरी दुनिया को बंधक बना लिया जाता। उन्होंने कहा कि वह अभी ईरान के संबंध में वह कदम उठा रहे हैं, जो अन्य देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर लेने चाहिए थे। यह तीखी प्रतिक्रिया मर्ज़ द्वारा ईरान मुद्दे पर अमेरिकी दृष्टिकोण की आलोचना के बाद आई है। जर्मन चांसलर ने कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना है। मर्ज़ ने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वहां होने वाले व्यवधान के ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान पर मंड़राया एक और बड़ा खतरा : युद्ध के बाद से दवाओं की भारी किल्लत, अब तक 25 फार्मास्युटिकल सुविधा केंद्र नेस्तनाबूद</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में अमेरिका-इजरायल हमलों ने फार्मास्युटिकल केंद्रों को निशाना बनाया है, जिससे जीवनरक्षक दवाओं का अकाल पड़ गया है। कैंसर और मधुमेह की दवाएं बाजार से गायब हैं और कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों को 'युद्ध अपराध' करार दिया है, जबकि नागरिक हेल्पलाइन और स्थानीय नेटवर्क के सहारे संघर्ष कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/another-big-threat-looming-over-iran-huge-shortage-of-medicines/article-151913"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान पर अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमलों के बाद से ईरानी दवाखानों में दवाओं की भारी कमी हो गई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक अमेरिका-इजरायल ने देश के विभिन्न प्रांतों में लगभग 25 फार्मास्युटिकल सुविधा केंद्रों पर हमले किए हैं। लक्ष्यों की सूची में बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थान शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग, एनेस्थीसिया और मल्टीपल स्केलेरोसिस की दवाएं बनाने वाले फार्मास्युटिकल केन्द्र के साथ-साथ तेहरान में पाश्चर संस्थान (टीका निर्माता) भी शामिल है।</p>
<p>तेहरान के वलीअसर स्क्वायर के पास एक फार्मेसी में कार्यरत डॉ. पेजमान नईम ने स्पुतनिक को बताया, "मधुमेह और हृदय रोगों जैसी कुछ दवाएं बाजार में अत्यंत दुर्लभ हो गई हैं। युद्ध के दौरान भी इनकी आपूर्ति बहुत कम थी और नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है।" डॉ. नईम ने उल्लेख किया कि चुनौतियों के बावजूद स्थिति नियंत्रण में है। ईरानी अधिकारियों ने एक हेल्पलाइन स्थापित की है जिसके माध्यम से नागरिक यह जान सकते हैं कि कौन सी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं और वे किन फार्मेसियों में उपलब्ध हैं। फार्मासिस्टों ने मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वयं एक नेटवर्क तैयार किया है। ईरानी सरकार दवा क्षेत्र को सहायता प्रदान कर रही है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण कुछ विशेष विदेशी दवाएं बाजार में बहुत कम मिलती हैं।</p>
<p>डॉक्टर के अनुसार, इन दवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक कुछ कच्चे माल को लेकर भी समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने कहा, "युद्ध का विनाशकारी प्रभाव पड़ा है, जिससे फार्मेसियों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। दवाओं की बिक्री गिर गई है और आसमान छूती कीमतों ने आम नागरिकों के लिए आवश्यक दवाएं खरीदना असंभव बना दिया है।" डॉ. नईम ने आशा व्यक्त की कि युद्धविराम के दौरान या युद्ध के बाद दवाओं की बिक्री में सुधार होगा और वे जनता के लिए अधिक सुलभ होंगी। ईरानी अधिकारियों ने दवा संयंत्रों पर अमेरिकी और इजरायली हमलों को बार-बार 'युद्ध अपराध' करार दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 13:58:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता पर तनाव : ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम रजाई का कड़ा रुख, बोले-मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास नहीं है आवश्यक विश्वसनीयता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि इस्लामाबाद डोनाल्ड ट्रंप के हितों के आगे निष्पक्ष रहने में विफल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा युद्ध के बीच, ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए तटस्थ मध्यस्थ की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-on-iran-america-talks-iranian-spokesperson-takes-a-tough-stance/article-151845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 'मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।' सांसद ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद 'हमेशा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलता। पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए और दोनों पक्षों को असहज सच बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान विफल रहा है।</p>
<p>रजाई के अनुसार, पाकिस्तान यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि अमेरिका ने शुरू में प्रस्ताव स्वीकार किया और फिर उससे पीछे हट गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लेबनान और ईरान की रुकी हुई वित्तीय संपत्तियों के संबंध में अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। सबसे गंभीर आरोप उस 10-सूत्रीय वार्ता ढांचे को लेकर है, जिसे ईरान का दावा है कि तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधे सौंपा गया था। ईरान के अनुसार, जनरल मुनीर को यह प्रस्ताव इस समझ के साथ दिया गया था कि इसे अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया जाएगा, लेकिन ईरान का कहना है कि उसे अब तक कोई प्रतिक्रिया या पावती नहीं मिली है।</p>
<p>यह कूटनीतिक तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो उन्हें बस फोन करना चाहिए, लेकिन अमेरिका अब इस्लामाबाद में वरिष्ठ वार्ताकार नहीं भेजेगा। पाकिस्तान की मुस्लिम जगत के शांति मध्यस्थ बनने की महत्वाकांक्षा को इस कूटनीतिक गतिरोध से बड़ा झटका लगा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है- तटस्थता दिखाई देनी चाहिए, केवल उसका दावा करना पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:53:51 +0530</pubDate>
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                <title>दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी को लेकर 2 परिवारों में हिंसक झड़प : 42 लोगों की मौत, सेना की तैनाती के बाद नियंत्रण में स्थिति </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी के स्रोत पर अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच हुई झड़प ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 42 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति ने स्थिति संभालने के लिए उच्च स्तरीय आयोग भेजा है। शरणार्थियों के दबाव के कारण संसाधनों की कमी इस घातक संघर्ष का मुख्य कारण बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chad-violence-42-people-died-in-water-dispute-violent-clash/article-151816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)1.jpg" alt=""></a><br /><p>न्जामेना। दक्षिण अफ्रीकी देश चाड में पानी के स्रोत पर अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। चाड के उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत के अनुसार, यह हिंसा एक जल स्रोत को लेकर दो परिवारों के बीच शुरू हुए झगड़े का परिणाम थी। यह विवाद बाद में बदले की कार्रवाइयों में बदल गया।</p>
<p>चाड के राष्ट्रपति महामत इदरीस देबी इतनो ने स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर एक आयोग भेजा है, जिसमें उप प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ के प्रमुख शामिल हैं। उप प्रधानमंत्री ने बताया कि सेना की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पड़ोसी सूडान से आने वाले शरणार्थियों के कारण चाड के पूर्वी प्रांतों में संसाधनों की कमी लगातार बढ़ रही है, जिससे इस तरह के संघर्षों की आशंका बनी रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:05:47 +0530</pubDate>
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