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                <title>असर खबर का : नगर परिषद बैठक में  डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण समय-सारणी बदली, घर-घर जाकर दी जा रही जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ करने के लिए सख्ती बढाई, वार्डों एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में समय निर्धारित किया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-impact-of-the-news--door-to-door-waste-collection-schedule-revised-during-municipal-council-meeting/article-151447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)34.png" alt=""></a><br /><p>बूंदी। शहर के विभिन्न वार्डों में बदहाल सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण की अनियमितता को लेकर प्रकाशित समाचारों के बाद नगर परिषद प्रशासन सक्रिय हो गया है। जनहित में उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लेते हुए परिषद ने स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विशेष बैठक आयोजित कर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की समय-सारणी में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।</p>
<p>नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) टीम को मैदान में उतारा गया है। आईईसी एक्सपर्ट कपिल गुप्ता के निर्देशन में टीम सदस्य अमन और विष्णु वार्डों में घर-घर जाकर नागरिकों को नई समय-सारणी की जानकारी दे रहे हैं। पंपलेट वितरित कर लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की जा रही है। परिषद ने शहर को विभिन्न समूहों में बांटकर कचरा संग्रहण का समय निर्धारित किया है। समूह-1 के वार्डों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक, समूह-2 के वार्डों में सुबह 7 बजे से 11 बजे तक तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक कचरा संग्रहण किया जाएगा। नगर परिषद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कचरा संग्रहण वाहन आने पर ही कचरा दिया जाए तथा गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डिब्बों में रखना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। जो नागरिक निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं रह पाते, वे कचरे को बंद डिब्बे में सुरक्षित बाहर रख सकते हैं।सफाई व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए परिषद ने हेल्पलाइन नंबर 9251654739 जारी किया है, जिस पर नागरिक संपर्क कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:59:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> मुफ्त सुविधा को शिक्षा की अनिवार्यता से जोड़ना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सभी को शिक्षा प्राप्त करना अनिवार्य किया जाए तो देश एक पूर्ण विकसित देश होगा । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-is-necessary-to-link-free-facilities-with-the-necessity-of-education/article-74919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किसी भी सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जनता होती है। लोकतंत्र में जनता ही सरकार को चुनती है। किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है वह जनता की सेवा करें, उनके हित में कल्याणकारी योजनाएं लाएं। देश में गरीबी बहुत बड़ी समस्या है। जो परिवार अपना गुजर बसर करने में सक्षम नहीं होते उन्हें सरकारी मदद की जरूरत होती हैं। ऐसे में सरकार गरीबों को मुफ्त में या सस्ते में चीजें बांटती है। जिससे आवश्यक वस्तुओं के लिए उनकी जद्दोजहद कम हो सके। यह सही भी हैं। यदि इसके साथ ही शिक्षा पर भी फोकस किया जाए कि ऐसे परिवारों के बच्चों को शिक्षित होना अनिवार्य कर दिया जाए तो  इसका फायदा देश हित में होगा। देश की उत्पादकता बढ़ेगी। गरीबों को नि:शुल्क शिक्षा तो दी जाती है,  किंतु अनिवार्य नहीं होने से बहुत सारी आबादी शिक्षित नहीं हो पाती । कोई भी सरकार यदि उस आधार पर फ्री की वस्तुएं उपलब्ध कराए कि उन परिवारों के बच्चे शिक्षित हो रहे हैं  तो इससे देश व उन परिवारों को बहुत फायदा होगा। गरीबी और बेरोजगारी की समस्या में भी बहुत सुधार हो सकेगा। फ्री की वस्तुएं ऐसे परिवारों को ही मिले जिनके बच्चे अनिवार्य रूप से पढ़ रहे हैं तो उनका फोकस बच्चों को पढ़ाने पर भी रहेगा। उन्हें रोजगार मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेगी। साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार भी हो सकेगा।</p>
<p>आज जब दुनिया के देशों की साक्षरता दर को देखते है तो भारत उसमें काफी पीछे है। दुनिया के एक तिहाई निरक्षर भारत में हैं। कई छोटे-छोटे देशों की साक्षरता दर 99 या 100 प्रतिशत है। जबकि भारत की साक्षरता दर करीब 74 प्रतिशत है। एंडोरा जो यूरोप का छोटा-सा देश है वहां की साक्षरता दर 100 प्रतिशत है। यानि वहां की आबादी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच है। फिनलैंड, लक्समबर्ग, नॉर्वे ऐसे ही राष्ट्र हैं जिनकी साक्षरता दर 100 प्रतिशत है। क्यूबा, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, पोलैंड, यूक्रेन आदि छोटे देशों की साक्षरता दर 99 प्रतिशत है। वहीं भारत का स्थान 128 वां है। किसी भी विकसित देश की पहली प्राथामिकता होती हैं कि वहां के सभी नागरिक शिक्षित हों। शिक्षित होने की पहली पहचान साक्षरता हैं। ऐसे देशों की साक्षरता दर 99 या 100 प्रतिशत होगी । वहीं जिस देश में निरक्षरता होगी वहां गरीबी होगी। जहां गरीबी ज्यादा होगी वह देश विकसित राष्ट्र  नहीं बन पाएगा। यदि भारत की भी साक्षरता दर 100 प्रतिशत हो जाए सभी नागरिक शिक्षित हो जाएं तो पूरे देश को जबरदस्त फायदा होगा तभी पूर्ण विकसित देश कहलाएंगे। आजादी भी शिक्षा की वजह से मिली । पढ़कर लोग समझदार हुए तो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुए। अगर साक्षरता दर में वृद्धि होती है और सभी को शिक्षा प्राप्त करना अनिवार्य किया जाए तो देश एक पूर्ण विकसित देश होगा इससे  सही दिशा मिलेगी और समृद्धि आएगी। क्योंकि शिक्षा व्यक्तिगत स्तर पर बेहतरी के साथ-साथ पूरे समाज में बदलाव ला सकती है। इससे देश की बहुत सारी चुनौतियों और समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। जब तक देश की अशिक्षित आबादी शिक्षित नहीं हो जाती तब तक देश पूर्ण विकसित राष्ट्र नहीं कहलाएगा। </p>
<p><strong>गरीब और जरूरतमंद परिवारों को फ्री की वस्तुएं बांटी जाती है। फ्री की चीजें उन्हीं परिवारों को दी जाए जिनके बच्चे शिक्षित हंै इसके लिए उन परिवारों के बच्चों का शिक्षित होना अनिवार्य किया जाए इस बारे में शहर के नागरिकों की राय को जाना।</strong></p>
<p>ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य करनी चाहिए। शिक्षा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। शिक्षा से बच्चा स्वयं के दिमाग को काम में लेना सीखता है। शैशव काल से ही बच्चे को अच्छे संस्कार मिले तो बहुत कुछ बदलाव आ सकता है। निश्चित रूप से शिक्षा जरूरी है। उन्हें कोई चीज पानी है तो इसी बहाने से वह अपने बच्चों को पढ़ाएंगें स्कूल भेजेंगें।<br /><strong>ईश्वर लाल सैनी, समाज सेवी एवं चेयरमैन सुमंगलम ग्रुप</strong></p>
<p>आज के समय में शिक्षित होना अनिवार्य है। अन्यथा वह सर्वाइव नहीं कर पाएंगें। कहीं भी नौकरी करेगें यदि उनका कमीशन कटता हैं या ठेकेदार के जरिए कहीं भी नौकरी पर भी लगते हैं तो हिसाब-किताब में भी कमजोर रह जाएंगे। उन्हें यह मालूम ही नहीं होगा कि मुझे तनख्वाह पूरी मिली भी है या नहीं । वह बिना शिक्षा के आगे बिल्कुल बढ़ ही नहीं पाएंगें। इसलिए पढ़ा लिखा होना जरूरी है और शिक्षा  अनिवार्य होनी भी चाहिए।<br /><strong>मंजू बंसल, प्रेसीडेंट, इनरव्हील क्लब आॅफ कोटा</strong></p>
<p>शिक्षित होना सभी का अधिकार है। जितने शिक्षित होगें गरीबी का स्तर भी कम होेगा। उनकी सोच भी विकसित होगी। आगे चलकर लीडर भी चुन पाएंगें। यह एक अच्छा इनीशिएटिव है। शिक्षा अनिवार्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>डॉ. योगेश मालव, डायरेक्टर, श्रीनाथजी आई हॉस्पिटल</strong></p>
<p> शिक्षा अनिवार्य की कंडीशन लगानी चाहिए। इससे अगली पीढ़ी को काम करने की इच्छा बनी रहे, नहीं तो काम करना ही छोड़ देगें। छोटो बच्चे समझते नहीं है। शिक्षित होना जरूरी है।<br /><strong>एस.के विजय, सीए</strong></p>
<p>मिनिमय शिक्षा अनिवार्य कर देना चाहिए। जब अनिवार्य  शिक्षा की बात करते है तो वह अनिवार्य ही होनी चाहिए। कम से कम आठवीं या दसवीं कक्षा तक इनको पढ़ाओं और उसके बाद स्किल बेस्ड कोई भी काम सिखा सकते है। जब सुविधाएं कम हो जाएगी तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजेगें। इसका कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिसमें इनको सरकारी सुविधाएं मिल रही है तो एक शर्त लगा दी जाए कि कम से कम इतनी शिक्षा तो देनी पड़ेगी। सरकारी स्कूलों में इनके लिए नि:शुल्क शिक्षा है किन्तु वह अनिवार्य होनी चाहिए। इससे बच्चे स्कूल जाएंगें तो बहुत सारे क्राइम भी रुकेगें। नई चीजें सीखेगें। स्कूल जाने से उनके अंदर नैतिक मूल्य विकसित होंगे।<br /><strong>डॉ. सीमा चौहान, प्रिंसिपल, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा (जेडीबी आर्ट्स)</strong></p>
<p>देश में शिक्षा का स्तर बढ़ना चाहिए। फ्री वस्तुएं बांटने से उनकी मेहनत करने की इच्छाशक्ति कम होती जा रही है। उन्हें लगता हैं कम मेहनत में हमें ज्यादा मेहनताना मिल जाए। पहले ही लोग काम कम करना चाहते हैं ऊपर से फ्री की चीजें मिल जाने से उनकी इच्छाशक्ति कम हो जाती है। उसके साथ ही वह अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते हैं। पहले से  हर इंसान ज्यादा आलसी होता जा रहा हैं और ये सब फ्री की चीजे उसे बढ़ावा देती है। हर इंसान को चाहे गरीब हो या अमीर सरकार को मेहनतकश बनाने के प्रति अग्रसर करवाना चाहिए । सरकार ने फ्री शिक्षा की है लेकिन शिक्षा को अनिवार्य करना जरूरी है। चाहे लेबर भी काम कर रही है तो वह शिक्षित लेबर होगी तो ज्यादा अच्छे से काम कर पाएंगी ज्यादा अच्छे से डील कर पाएंगी। ऐसा नहीं है कि पढ़ लिख कर सिर्फ आॅफीसर ग्रेड का ही काम करना हैं लेबर क्लास काम करने के लिए भी पढ़ाई लिखाई उतनी ही जरूरी है । इससे हर चीज के लिए समझ बढ़ेगी। शिक्षा से बहुत सारे बदलाव आते है। गरीबों का जीवन स्तर बढ़ेगा। पढ़ाई सर्वोत्तम अनिवार्यता है।<br /><strong>डॉ. रानू अग्रवाल, डायरेक्टर एवं प्रिसिंपल, पेरेंटिंग एली प्री-स्कूल,श्रीनाथपुरम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2024 11:54:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>देशभर की पंचायतों में 15 अगस्त से यूपीआई लेनदेन होगा अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्रालय ने देशभर की ग्राम पंचायतों के लिए यूपीआई लेनदेन के लिए 15 अगस्त अनिवार्य की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/upi-transactions-will-be-mandatory-in-panchayats-across-the-country/article-50469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/upi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्रालय ने देशभर की ग्राम पंचायतों के लिए यूपीआई लेनदेन के लिए 15 अगस्त अनिवार्य की है। अब पंचायत के सभी लेनदेन यूपीआई माध्यम से ही होंगे। चेक और नकद भुगतान नहीं किए जायेंगे। पंचायतीराज मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में पत्र लिखे है। </p>
<p>देशभर की सभी पंचायतों में 15 अगस्त के बाद सभी विकास कार्यों और राजस्व संग्रह के लिए डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार ने बताया कि करीब 98 फीसदी पंचायतें पहले ही यूपीआई-आधारित भुगतान का इस्तेमाल शुरू कर चुकी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/upi-transactions-will-be-mandatory-in-panchayats-across-the-country/article-50469</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 15:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यहां वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[अगर आप आने वाले दिनों में अपने निजी वाहन से अमरनाथ यात्रा करने का विचार बना रहे हैं तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके वाहन में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगी हुई हो। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड राजभवन श्रीनगर की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि  15 जून 2022 के बाद केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के बगैर किसी भी वाहन को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं होगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/high-security-registration-plate-mandatory-in-vehicles-here/article-13585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/yaha-vaahano-mei-high-securities-registration-plate-aniwary.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अगर आप आने वाले दिनों में अपने निजी वाहन से अमरनाथ यात्रा करने का विचार बना रहे हैं तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके वाहन में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगी हुई हो। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड राजभवन श्रीनगर की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि  15 जून 2022 के बाद केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के बगैर किसी भी वाहन को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं होगी। इसी आदेश के तहत राजस्थान सरकार के परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के समस्त जिला परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने श्रेत्राधिकार से श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले निजी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट  (एचएसआरपी) होना अनिवार्य करवाएंगे। जिससे अमरनाथ यात्रा के तहत जम्मू कश्मीर पहुंचने पर यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। <br /><br /><strong>यह है एचएसआरपी नंबर प्लेट</strong><br />हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट भारत में लाइसेंस प्लेट्स का स्टैंडर्ड रूप है। इसकी खासियत यह है कि इसमें वाहन मालिक की और उनके वाहन से जुड़ी सारी जानकारी निहित होती है। यह उनकी सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। यह नंबर प्रेशर मशीन से लिखा जाता है।  प्लेट पर एक तरह का पिन होता है जो आपके वाहन से जुड़ा रहता है। यह पिन एक बार आपके वाहन से प्लेट को पकड़ लेगा तो यह दोनों ही तरफ से लॉक होगा और इसे खोला जाना आसान नहीं होता है। <br /><br /><strong>हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं अमरनाथ यात्रा</strong><br />हर साल लाखों लोग अमरनाथ यात्रा करते हैं। इस यात्रा के लिए देश विदेश से लाखों यात्री जम्मू कश्मीर पहुंचते हैं। बीते दो सालों से कोरोना के कारण अमरनाथ यात्रा का आयोजन नहीं किया गया था। इस बार कोरोना का कहर नहीं होने के कारण अमरनाथ यात्रा का आयोजन फिर से शुरू किया गया है। अब लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे।<br /><br />अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले निजी वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाना अनिवार्य किया गया है। इस सम्बंध में शहर के वाहन मालिकों व चालकों को जानकारी दी जा रही है। <strong>-रजनीश विद्यार्थी, परिवहन निरीक्षक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 16:15:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब आसानी से नहीं मिलेगी सरकारी मदद</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ अब किसानों को आसानी से नहीं मिलेगा। किसानों को अब योजना के तहत दो हजार रुपए की 11वीं किस्त का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी करवानी पड़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-government-help-will-not-be-available-easily/article-9749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/farmers-e-kyc.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। किसानों की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ अब किसानों को आसानी से नहीं मिलेगा। किसानों को अब योजना के तहत दो हजार रुपए की 11वीं किस्त का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी करवानी पड़ेगी। इसके बाद ही किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इस कारण अभी तक इस किस्त की राशि किसानों के खाते में नहीं पहुंची है। किसानों को आर्थिक सम्बल प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत किसानों को हर साल छह हजार रुपए की मदद दी जाती है। इन छह हजार रुपयों को सालाना तीन किस्तों में किसानों के खातों में स्थानांतरित किया जाता है। अब तक इस योजना के तहत 10वीं किस्त किसानों के खाते में आ चुकी है। इस साल जनवरी माह में इस योजना की 10वीं किस्त जारी की गई थी। अप्रेल माह में योजना की 11वीं किस्त किसानों के खाते में आनी थी, लेकिन अभी तक किसानों को यह राशि नहीं मिली है। <br /><br /><strong>नियम बदला तो अटकी राशि</strong><br />योजना जारी होने के बाद अब तक देश के करोड़ों किसानों को इसका लाभ मिल चुका है, लेकिन अब सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत योजना का लाभ उठाने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सरकार ने 31 मई तक का समय दिया है। पहले केवाईसी कराने की अन्तिम समय सीमा मार्च माह थी। जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मई कर दिया गया है। केवाईसी के बिना किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। <br /><br /><strong>अपात्रों की भी हो गई मौज</strong> <br />जानकारी के अनुसार सम्मान निधि में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर सरकार ने जांच की तो सामने आया कि अपात्र लोगों ने भी इसका लाभ उठा लिया है। पात्र नहीं होने के बावजूद कई लोगों ने फर्जी कागजातों के माध्यम से योजना में रजिस्ट्रेशन करवा लिया और योजना का लाभ लेने लगे। जांच में यह तथ्य आने के बाद अब सरकार इनसे लाभ की राशि वसूलने में जुट गई है। यह धांधली सामने आने के बाद केन्द्र सरकार ने अब ई-केवाईसी को अनिवार्य किया है।   <br /><br /><strong>रजिस्ट्रेशन हो गया फिर भी दिक्कत</strong><br />किसानों का कहना है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए ईमित्र से रजिस्ट्रेशन करवा दिया है। अब ई-केवाईसी करवाने में परेशानी आ रही है। केवाईसी के अभाव में उनकों योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इस सम्बंध में रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। <br /><br />रोजाना काफी संख्या में किसान योजना के तहत रजिस्ट्रेशन व ई-केवाईसी करवाने के लिए आ रहे हैं। रजिस्ट्रेशन तो आसानी से जाता है। बाद में ई-केवाईसी के दौरान योजना के पोर्टल पर कोई भी डाटा अपडेट नजर नहीं आ रहा है। इस कारण ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है। इस सम्बंध में पोर्टल के टोल फ्री नम्बर पर सम्पर्क किया जाता है तो कोई जवाब नहीं मिल रहा है। <br /><strong>-नितिन कुमार, ईमित्र संचालक</strong><br /><br />सरकार ने किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है। इसके बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा। कई नए नियम लागू होने से किस्त में देरी हो रही है। पोर्टल में दिक्कत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। <br /><strong>-दिवेश कुमार, पटवारी, लाड़पुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 17:57:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र के लिए अनिवार्य होगा जनाधार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म मृत्यु) एवं निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने इस संबंध में आदेश जारी किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--janadhar-will-be-mandatory-for-birth-death-and-marriage-certificates/article-8829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/jan-aadhaar.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं के आमजन को लाभान्वित करने के लिए अब जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीयन के लिए आवेदन के समय जन आधार कार्ड देना अनिवार्य  होगा, जबकि प्रदेश से बाहर के लोगों के लिए जन आधार अनिवार्य नहीं होगा। इसके लिए आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय ने आदेश जारी किए हैं। हालांकि यह आदेश राजस्थान के मूल निवासियों के लिए अनिवार्य है और प्रदेश के बाहर के लोगों के लिए इस आदेश में स्पष्ट नहीं करने से अधिकारी गफलत में है।<br />मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म मृत्यु) एवं निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।</p>
<p> </p>
<p>आदेश के अनुसार अब जन्म प्रमाण बनाने के लिए आवेदक को आवेदन के समय बालक/बालिका के परिवार को जनआधार कार्ड/ जनआधार नामांकन की रसीद देनी होगी। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदक को मृतक के परिजन का जनआधार कार्ड/ जनआधार नामांकन की रसीद के साथ आवेदन करना होगा। इसी प्रकार विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए वर एवं वधु के परिवारों के जनआधार कार्ड/ जनआधार नामांकन रसीद देने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। हालांकि आदेश में जनआधार कार्ड/ जनआधार नामांकन रसीद की अनिवार्यता राजस्थान के मूल निवासियों के लिए है। इस आदेश को लेकर अभी गफलत है कि प्रदेश से बाहर के लोगों को प्रमाण पत्र बनाने में किस प्रकार की छूट प्रदान कर जाएगी। गौरतलब है कि राजस्थान में राज्य सरकार ने जनआधार कार्ड को सरकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य कर दिया है ऐसे में प्रदेश से बाहर के लोगों के जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्रों के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किए गए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 14:36:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक हाईकोर्ट का हिजाब पर बड़ा फैसला, हिजाब विवाद में याचिका खारिज, हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं- HC  </title>
                                    <description><![CDATA[ कर्नाटक हाईकोर्ट में उडुपी की लड़कियों ने याचिका दायर कर स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत की मांग की थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-high-court-s-big-decision-on-hijab--petition-dismissed-in-hijab-controversy--hijab-is-not-a-mandatory-part-of-religion--hc/article-6167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-2.jpg" alt=""></a><br /><p><br />बेंगलुरु। हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट (HC) ने स्कूल कॉलेजों में हिजाब बैन के फैसले को चुनौती देने वालीं याचिकाओं को खारिज किया है। हिजाब विवाद को लेकर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई है। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य प्रथा का हिस्सा नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा है कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य नहीं है।  छात्र स्कूल यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकते है। कोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनने का नियम को वाजिब पाबंदी बताया।  उल्लेखनिय है कि कर्नाटक हाईकोर्ट में उडुपी की लड़कियों ने याचिका दायर कर स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत की मांग की थी। कोर्ट ने छात्राओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि छात्र स्कूल ड्रेस पहनने से इनकार नहीं कर सकते है। </p>
<p><strong>शिक्षण संस्थानों में हिजाब की इजाजत नहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं</strong><br />कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मुस्लिम छात्राओं की ओर से दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें शिक्षण अवधि के दौरान शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग की गई थी।न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना इस्लाम के तहत आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है और विद्यालय के यूनिफॉर्म का निर्धारण केवल एक उचित प्रतिबंध है, जिस पर छात्र-छात्राएं आपत्ति नहीं कर सकते। न्यायालय की पीठ ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास इस संबंध में आदेश जारी करने का अधिकार है।  उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऋतु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जे. एम. काजी की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने इस संबंध में सुनवाई के 11वें दिन 25 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले पीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था,  जिसमें छात्र-छात्राओं को निर्धारित ड्रेस कोड वाले कॉलेजों में कक्षाओं में भाग लेने के दौरान हिजाब, भगवा शॉल या किसी भी धार्मिक झंडे का उपयोग नहीं करने का आदेश दिया गया था।</p>
<p><br /><strong>HC की 3 जजों की बेंच ने सुनाया फैसला</strong><br />छात्राओं ने स्कूल कॉलेजों में हिजाब पहनने पर बैन लगाने के सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद  9  फरवरी को चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच का गठन किया गया था।  छात्राओं ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें क्लास के अंदर भी हिजाब पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनकी आस्था का हिस्सा है। लेकिन हाईकोर्ट के 3 जजों की बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।</p>
<p><strong>धारा 144 लागू</strong> <br />हाईकोर्ट के फैसले से पहले राज्यभर में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। हाईकोर्ट के जज के आवास की भी  सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कर्नाटका के कोप्पल, गडग, कलबुर्गी, दावणगेरे, हासन , शिवामोगा, बेलगांव, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु  और धारवाड़ में धारा 144 लागू कर दी गई थी। शिवामोगा में स्कूल कॉलेज बंद किए गए हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>हिजाब फैसले की मुस्लिम नेताओं ने की निंदा</strong><br />प्रमुख मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले की ङ्क्षनदा की जिसमें हिजाब को इस्लाम का गैर-जरूरी अंग बताते हुए शिक्षण संस्थानों में प्रतिबंधित कर दिया गया।<br /><br />पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''यह फैसला बेहद निराशाजनक है। हम एक तरफ महिलाओं को सशक्त करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम उनसे चुनने का अधिकार छीन रहे हैं। यह सिर्फ धर्म के बारे में नहीं है, बल्कि चुनने की स्वतंत्रता से संबंधित है।''<br /><br />नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्लाह ने कहा, ''फैसले से बहुत निराश हूं। आप हिजाब के बारे में जो भी सोचते हों, बात सिर्फ एक कपड़े की नहीं है, बात एक महिला के यह चुनने के अधिकार की है कि वह क्या पहनना चाहती है। यह उपहासजनक है कि अदालत ने इस मूल अधिकार की रक्षा नहीं की।''<br /><br />मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (मीम) अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उन्हें आशा है कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने फैसले को बदनीयत बताते हुए अपने विचार के पीछे कई कारण गिनाये।उन्होंने कहा कि फैसले ने ''धर्म, संस्कृति और अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकारों को समाप्त कर दिया है।''<br /><br />उन्होंने कहा,''एक धार्मिक मुसलमान के लिए हिजाब एक प्रकार की आराधना है। अनिवार्य धार्मिक व्यवहार परीक्षा को कसौटी पर रखने का समय आ गया है। एक धार्मिक व्यक्ति के लिए सब कुछ अनिवार्य है और नास्तिक के लिए कुछ अनिवार्य नहीं है। एक धार्मिक हिन्दू ब्राह्मण के जनेऊ अनिवार्य है मगर एक गैर-ब्राह्मण के लिए अनिवार्य नहीं है। यह हास्यास्पद है कि न्यायाधीश अनिवार्यता निर्धारित कर सकते हैं।''<br /><br /> ओवैसी ने कहा,''एक ही धर्म के दूसरे लोगों को अनिवार्यता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। यह एक व्यक्ति और ईश्वर के बीच का मामला है। राज्य को इन धार्मिक अधिकारों में दखल देने की अनुमति सिर्फ तब होनी चाहिए जब यह किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाते हों। हिजाब किसी को हानि नहीं पहुंचाता।'' ओवैसी ने कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाना मुस्लिम महिलाओं और उनके परिवारों के लिये हानिकारक है क्योंकि यह उन्हें शिक्षा हासिल करने से रोकता है।<br /><br />उन्होंने कहा, ''दलील दी जा रही है कि वर्दी से एकरूपता सुनिश्चित होगी। कैसे? क्या बच्चों को यह पता नहीं चलेगा कि कौन अमीर परिवार से है और कौन गरीब परिवार से? क्या जातिगत नाम बच्चों के वर्ग की तरफ इशारा नहीं करेंगे? जब आयरलैंड में हिजाब और सिख पगड़ी को अनुमति देने के लिए पुलिस की वर्दी में बदलाव किये गए थे तो मोदी सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया था। देश और विदेश के लिए दोहरे मानदंड क्यों? स्कूल की वर्दी के रंग के हिजाब और पगड़ी को पहनने की अनुमति दी जा सकती है।''<br /><br /> ओवैसी ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि यह फैसला हिजाबी महिलाओं के उत्पीडऩ को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक व्यक्ति उम्मीद कर ही सकता है। बैंकों, अस्पतालों व बस-मेट्रो में इस तरह की घटनाओं के शुरू होने पर निराश होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।''</p>
<p>उल्लेखनीय है कि गत जनवरी में कर्नाटक  में उडुपी स्थित एक सरकारी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंची थी, लेकिन उन्हें कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इस दौरान मुस्लिम लड़कियों ने तर्क दिया कि हिजाब उनके धर्म और सांस्कृतिक अभ्यास का हिस्सा है। इस मामले को सुनवाई के लिए पहले न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था और उन्होंने यह कहते हुए इस मामलों के वृहत पीठ के पास भेज दिया था कि इसमें मौलिक महत्व के प्रश्न शामिल हैं।<br />इस मामले में प्रतिवादी यानी राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के अंतर्गत नहीं आता है और हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत मिली अभिव्यक्ति की आजादी के तहत नहीं रखा जा सकता है।<br /><br />न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि उसका पांच फरवरी का आदेश शिक्षा अधिनियम के अनुरूप है और हिजाब पहनना सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक नैतिकता और व्यक्तिगत गरिमा की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।<br />वहीं कॉलेज और शिक्षकों ने तर्क दिया कि छात्रों को अनुशासन एवं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म धारण करने के नियम का पालन करना चाहिए।<br /><br />उधर, याचिकाकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका के संवैधानिक न्यायालय के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें न्यायालय ने दक्षिण भारत की एक हिंदू लड़की के स्कूल में नथ पहनने के अधिकार को बरकरार रखा था। उन्होंने पांच फरवरी के सरकारी आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय को लक्षित किया गया था। इस बीच हिजाब विवाद पर न्यायालय के फैसले के मद्देनजर पुलिस ने मंगलवार से 21 मार्च तक बेंगलुरु शहर और कर्नाटक के कई हिस्सों में धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 11:10:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेन में सड़कों पर मास्क पहनना फिर होगा अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेन में एक दिन में कोरोना के 27,000 से अधिक नए मामले दर्ज किये गये हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/61c426dd89738/article-3470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mask.jpg" alt=""></a><br /><p>मैड्रिड। स्पेन में कोविड-19 के मामले फिर बढऩे के कारण सड़कों पर मास्क पहनना फिर से अनिवार्य हो जाएगा। सरकार ने यह जानकारी दी है। कैबिनेट ने कहा कि इस संबंध में संबंधित दस्तावेज गुरुवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में अपनाया जाएगा।</p>
<p><br /> प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने स्वायत्त समुदायों के प्रमुखों की बैठक में कैबिनेट की इस योजना की घोषणा की। स्पेन में इस वर्ष जून में सड़कों पर अनिवार्य रूप से मास्क पहनना समाप्त कर दिया गया था, लेकिन बंद सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिर्वाय बना रहा। स्पेन कोविड-19 की छठी लहर का अनुभव कर रहा है। लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या के टीकाकरण के बावजूद संक्रमण में वृद्धि जारी है। पिछले एक दिन में कोरोना के 27,000 से अधिक नए मामले दर्ज किये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/61c426dd89738/article-3470</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Dec 2021 15:05:14 +0530</pubDate>
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                <title>आगजनी की दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम, एनओसी की प्रक्रिया होगी सरल, होगा सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[सभी प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य :  जन जागरूकता के लिए नगर निगम ग्रेटर चलाएगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/619765c500da4/article-2545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/jaipur-nagar-nigam1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। शहर में आगजनी की दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नियमों में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य किया जाएगा। इसके लिए बिना फायर एनओसी के चलने वाले प्रतिष्ठानों का नगर निगम जयपुर ग्रेटर प्रशासन सर्वे कराया जाएगा। आयुक्त यज्ञ मित्र सिंहदेव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फायर एनओसी की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, जिससे आवेदकों को आवेदन करने में आसानी हो और अधिक से अधिक लोग एनओसी के लिए आवेदन कर सकें। इसके साथ ही आयुक्त ने अग्निशामक शाखा के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक उपकरणों तथा वाहनों की तत्काल खरीद किए जाने के साथ फायरमैनों के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने के अधिकारियों को निर्देश दिए। फायर शाखा को मजबूत करने के लिए शाखा में कार्यरत कार्मिकों के नियमित प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। बैठक में उन्होंने समय समय पर मॉकड्रिल कर कार्मिकों को हर विकट परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार रखने के अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /> <br /> <strong>इन प्रतिष्ठानों को लेना अनिवार्य</strong><br /> निगम क्षेत्र में संचालित विद्यालय, होटल, औद्यौगिक इकाइयां, वेयर  हाउस, कोचिंग, हॉस्पिटल, नो मीटर से अधिक के आवासीय संस्थान तथा अन्य व्यवसायिक संस्थान जो फायर एनओसी के दायरे में आते है उनका सर्वे किया जाएगा। सर्वे के दौरान बिना फायर एनओसी के संचालित प्रतिष्ठानों के संचालकों को नोटिस देकर एनओसी लेने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद भी ऐसे प्रतिष्ठान जिनके पास फायर एनओसी नही  होगी उन्हें सीज करने की निगम ग्रेटर प्रशासन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 14:37:12 +0530</pubDate>
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                <title>आज से सौ फीसदी उपस्थिति के साथ खुलें स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[स्टाफ  को वैक्सीन लगवाना भी अनिवार्य]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8C-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%82%E0%A4%B2/article-2380"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/quality-school-education.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। प्रदेश के सभी सरकारी-निजी स्कूल और निजी शैक्षणिक संस्थाएं सोमवार से सौ फीसदी उपस्थिति के साथ खुली। हालांकि स्कूलों में विद्यार्थियों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल की पालना करनी होगी। स्कूल परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क सेनेटाइजर की पालना कराना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। स्कूल स्टाफ  को वैक्सीन की डोज लगवाना भी अनिवार्य होगा। विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचने से पहले स्कूल प्रबंधन को संबंधित अभिभावकों की सहमति लेना भी अनिवार्य है। किसी विद्यार्थी या स्कूल स्टाफ  के यदि कोरोना के लक्षण नजर आए तो मेडिकल विभाग के अधिकारियों को सूचना देनी होगी ताकि लक्षणों की जांच करा कर रिपोर्ट हासिल करनी होगी।<br /> <br /> <strong>ऑनलाइन कक्षाएं बंद</strong><br /> राज्य सरकार ने सौ प्रतिशत उपस्थिति के लिए छूट दे दी है, इसलिए अधिकांश निजी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं संचालन करना बंद कर दिया है। अधिकांश स्कूलों में सोमवार से ऑफलाइन कक्षाएं ही होंगी। सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों ने ऑफलाइन कक्षाओं के लिए अधिक तैयारी की है।<br /> <br /> <strong>कुछ अभिभावक अब भी ऑनलाइन क्लासेज के पक्ष में </strong><br /> कई जगह अब भी अभिभावक ऑनलाइन क्लासेज के पक्ष में नजर आ रहे हैं। निजी स्कूलों ने अभिभावकों से जब आॅफलाइन क्लासों के लिए सहमति मांगी तो कई अभिभावकों ने अपना पक्ष ऑनलाइन क्लास के लिए रखा। इन अभिभावकों का तर्क था कि जब तक बच्चों को वैक्सीन नहीं लग जाती तब तक ऑनलाइन क्लासेज ही चलाई जानी चाहिए। वंही, निजी स्कूल संचालकों ने अभिभावकों की इस मांग पर असहमति प्रकट की है। निजी स्कूल प्रबंधकों का तर्क है कि सरकार की अनुमति के बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षा एक साथ चलाना काफी मुश्किल होगा, क्योंकि सभी स्कूलों में स्टाफ  सीमित संख्या में होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 10:55:24 +0530</pubDate>
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                <title>सभी घरेलू उड़ानों में कोरोना जांच रिपोर्ट या पूर्ण टीकाकरण अनिवार्य करेगा एयर न्यूजीलैंड</title>
                                    <description><![CDATA[एयरलाइन प्रारंभिक अवधि में 14 दिसंबर, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक के लिए यह बदलाव करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%89%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A1/article-2202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/air-newzilend.jpg" alt=""></a><br /><p>वेलिंगटन।  न्यूजीलैंड की सरकारी विमानन कंपनी एयर न्यूजीलैंड ने कहा है कि वह दिसंबर के मध्य से सभी यात्रियों को अपनी घरेलू उड़ानों में यात्रा करने से पहले पूर्ण टीकाकरण से संबंधित प्रमाण पत्र या कोविड-19 की जांच रिपोर्ट प्रदान करने के लिए कहेगी। एयर न्यूजीलैंड के मुख्य कार्यकारी ग्रेग फोरान ने कहा कि यह बदलाव कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए किया गया है, क्योंकि गर्मियों में क्रिसमस से पहले यदि लॉकडाउन प्रतिबंधों को कम किया गया तो न्यूजीलैंड के लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में हवाई यात्राएं कर सकते हैं।<br /> <br /> फोरान ने कहा है कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के आने के बाद यह साबित हो गया है कि जिन उपायों ने हमें पहले सुरक्षित रखा था, वे अब पर्याप्त नहीं है और हमें सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत की आवश्यकता है, इसलिए हम न्यूजीलैंड के सभी लोगों को उड़ान भरने की इजाजत देने के साथ ही अपने ग्राहकों को सुरक्षित रखने के लिए एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं।<br /> <br /> एयरलाइन प्रारंभिक अवधि में 14 दिसंबर, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक के लिए यह बदलाव करेगी। यह न्यूजीलैंड के भीतर 'एयर न्यूजीलैंड' की उड़ान से यात्रा करने वाले 12 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी यात्रियों पर लागू होगा। न्यूजीलैंड सरकार द्वारा अनुमोदित सभी टीकों और परीक्षणों को स्वीकार किया जाएगा।<br /> <br /> यात्रियों को सलाह दी गयी है कि वे बुकिंग विवरण के साथ सरकार के 'माई वैक्सीन पास' में अपने टीकाकरण की स्थिति को जोडऩे के लिए एयर न्यूजीलैंड के मोबाइल ऐप का उपयोग करें, जिससे चेक-इन सुचारू तरीके से किया जा सके। जिन लोगों का पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है, उन्हें प्रस्थान से 72 घंटे के भीतर की निगेटिव कोरोना रिपोर्ट देनी होगी।<br /> <br /> गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद देश के सबसे बड़े शहर ऑकलैंड में मंगलवार रात 11:59 बजे कोविड-19 प्रतिबंधों में और ढील दी जायेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश भर में 78 प्रतिशत योग्य लोगों का पूर्ण टीकाकरण कर दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 11:54:38 +0530</pubDate>
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