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                <title>newborn - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नवजात की हत्या का प्रयास : इज्जत बचाने के लिए नाना ने ही मुंह में ठूंसा था पत्थर, पुलिस ने करवाया सीन रीक्रिएट</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी बेटी कुंवारी है और चचेरे भाई से गर्भवती हो गई थी। उसने कहा कि इज्जत बचाने और बेटी की शादी कराने के लिए उसने इस वारदात को अंजाम दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/in-order-to-save-the-attempt-to-kill-the-newborn/article-128131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(6)7.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। जिले के मांडलगढ़ थाना क्षेत्र में नवजात बच्चे को पत्थरों के नीचे दबाने और होंठों पर फेविस्टिक चिपकाने के क्रूर कृत्य को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार बच्चे का नाना (युवती का पिता) और वारदात में शामिल बच्चे की मां (आरोपी की बेटी) से पुलिस ने शनिवार को पूरा सीन रीक्रिएट करवाया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी बेटी कुंवारी है और चचेरे भाई से गर्भवती हो गई थी। उसने कहा कि इज्जत बचाने और बेटी की शादी कराने के लिए उसने इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपी ने बताया कि वह बूंदी से भीलवाड़ा जाते समय बच्चे और बेटी के साथ मांडलगढ़ थाना क्षेत्र के सीता का कुंड मंदिर के पास जंगल के रास्ते में उतर गया। उसने बेटी को पत्थरों के ढेर से थोड़ी दूर खड़ा कर दिया। पहले उसने तौलिया लपेटकर बच्चे को पत्थरों के ढेर के पास रखा। इसके बाद उसने फेविस्टिक ली, पत्थर पर लगाई और मासूम के मुंह में ठूंस दिया। बची फेविस्टिक पत्थर ठूंसने के बाद ऊपर से लगा दी। पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी और उसकी बेटी सड़क पर आए, जहां से उन्होंने ट्रैक्टर में लिफ्ट ली और तिलस्वां महादेव मंदिर पहुंचे। </p>
<p>वहां आरोपी की पत्नी पहले से इंतजार कर रही थी। दर्शन के बाद तीनों ने एक धर्मशाला में कमरा किराए पर लिया और वहीं रुक गए। मांडलगढ़ थाने के एएसआई रामलाल मीणा ने बताया कि इनपुट के आधार पर पुलिस ने घटना के तीसरे दिन आरोपी परिवार को तिलस्वां महादेव मंदिर के पास से पकड़ लिया। जिन्हें पूछताछ के बाद नाना और मां को गिरफ्तार कर लिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 14:58:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रदेश में हर साल 2,886 प्रसूताएं तोड़ रही हैं दम</title>
                                    <description><![CDATA[नवजात को कोख में नौ महीने पालकर जिदंगी देने वाली 8 प्रसूताएं राजस्थान में रोजाना प्रसव के दौरान दम तोड़ रही हैं। हर साल प्रदेश में करीब 17.60 लाख महिलाएं बच्चों को जन्म देती हैं, जिनमें प्रति एक लाख प्रसूताओं पर 164 की मौत हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-2-886-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%AE/article-4219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/prasuta.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 2,886 प्रसूताएं हर साल बच्चे को जन्म देने या प्रसव के दौरान मर रही हैं। हालांकि प्रदेश में 2003 के मुकाबले यह संख्या आधी हो चुकी है, लेकिन अभी भी प्रसूताओं की चिकित्सकीय केयर पर उनके परिजन को जागरूक करने की जरुरत है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सा विभाग की मेटरनिटी हेल्थ की स्कीमों, जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता है।<br /> <strong><br /> रैफरल परिवहन की मजबूती नहीं</strong><br /> चौबीसों घंटे दुर्गम और दूरस्थ डिलेवरी पाइंट पर रैफरल सिस्टम के लिए परिवहन की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उच्च अस्पतालों में परिवहन में देरी भी मौत का एक कारण है।  <br /> <br />                                 <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>प्रसूताओं की मौतें क्यों?</strong></span></span></span><br /> <strong>44.7%महिलाएं प्रसव पूर्व अस्पताल नहीं जाती</strong><br /> नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक राजस्थान में 44.7 फीसदी प्रसूताएं ऐसी हैं जो प्रसव पूर्व जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अस्पताल ही नहीं जाती हैं। गंभीर बात यह है कि गांवों में प्रसूताएं इसे लेकर ज्यादा लापरवाह हैं। शहरों में 39.4 फीसदी और गांवों में 46.1 फीसदी गर्भधारण करने के बाद प्रसव पूर्व जांच नहीं करातीं हैं। इसके चलते उनके शारारिक पोषण, गर्भ से जुड़ी जटिलताओं का पता ही नहीं चलता।<br /> <br /> <strong>46%  में खून-पोषण की कमी</strong><br /> प्रदेश में 46.3 फीसदी महिलाएं गर्भवती होने के दौरान एनीमिक यानी खून की कमी से जूझ रही होती है। गांवों में ऐसी गर्भवती महिलाओं की संख्या 47.5 और शहरों में 41.4 फीसदी है। खून की कमी, कुपोषण, गर्भधारण के बाद जांचें और जटिलताएं ही मौत का बड़ा कारण होती है। वहीं 24 फीसदी गर्भवती महिलाएं तो आयरन की गोलियां भी खून की कमी पूरी करने के लिए नहीं लेती है।<br /> <strong><br /> सिजेरियन डिलेवरी में सुविधाओं का अभाव</strong><br /> प्रदेश में 10.4 फीसदी महिलाओं की सालाना सिजेरियन डिलेवरी होती है। सभी अस्पतालों में डिलेवरी की सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से प्रसव पीड़ा के दौरान रैफर करने की स्थिति बनती है तो जान सांसत में आ जाती है।<br /> <strong><br /> चार डिलेवरी केन्द्रों में से औसतन एक पर ही स्त्रीरोग विशेषज्ञ</strong><br /> प्रसूताओं की डिलेवरी के लिए पीएचसी स्तर तक करीब 2 हजार सरकारी अस्पताल में सुविधा हैं, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल मात्र 550 ही हैं। यानी चार अस्पतालों में से एक पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है। मौतों को और कम करने के लिए कम से कम एक अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की जरुरत है। प्रसूताओं की समय पर जांच-चिकित्सा मिले इसलिए हर नाम पीएम मातृत्व सुरक्षा अभियान के लिए विभाग को प्राइवेट चिकित्सक हॉयर करने पड़ते हैं।<br /> <br /> प्रसूताओं की मौतों को रोकने के लिए हाल ही में समीक्षा बैठक की है। सभी को बचाने के हर संभव प्रयास होते हैं।<br /> -<strong>आशुतोष ए.टी.पेडनेकर, शासन सचिव, चिकित्सा</strong><br /> <br /> प्रसूता का एनीमिक होना, प्रसव पूर्व जांच ना कराने से व्याप्त जटिलताओं का पता न लगना ही मौतों का बड़ा कारण है। गर्भवती को प्रसव पूर्व जांचे और चिकित्सकीय परामर्श लेने से काफी हद तक मौतें रोकी जा सकती है।<br /> -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय, जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jan 2022 13:16:10 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल में आग, चार बच्चों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[शेष बच्चों को अन्य स्थान पर किया गया शिफ्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%97--%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4/article-2203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/bhopal_hospital-aag.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल। भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल परिसर में कमला नेहरु अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित शिशु वार्ड (स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट) में आग लगने के कारण 4 बच्चों की मौत हो गई और शेष लगभग 36 बच्चों को अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके उनका इलाज किया जा रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित शिशु वार्ड के वेंटीलेटर में सोमवार रात लगभग नौ बजे शार्ट सर्किट के कारण आग लगी और देखते ही देखते यह वार्ड के कुछ हिस्सों में फैल गयी। इस वजह से वार्ड के उपकरण इत्यादि जल गए और उसमें धुंआ फैल गया।</p>
<p>इस बीच चिकित्सकों और नर्स आदि की मदद से बच्चों को वहां से हटाकर अन्य स्थान पर सुरक्षित रखने के प्रयास हुए, लेकिन चार शिशुओं को नहीं बचाया जा सका। इन बच्चों की उम्र एक दिन से लेकर नौ दिन तक है। शेष 36 बच्चों को अस्पताल के प्रभावित वार्ड से शिफ्ट कर दिया गया है और सबका इलाज चल रहा है। आग लगने की सूचना पर दमकल कर्मचारी और पुलिस कर्मचारी मय साजो सामान के साथ पहुंचे और आग पर काबू पाया। घटना के कुछ देर बाद परिसर में मीडिया से चर्चा में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि आग पर काबू पा लिया गया है और सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन कुछ ही देर बाद खबर आयी कि तीन बच्चों की मृत्यु हुयी है। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गयी। <br /> <br /> इस बीच अस्पताल प्रशासन बच्चों की स्थिति पर नजर रखे हुए है। इनमें से लगभग आधा दर्जन बच्चों को बेहतर इलाज के लिए शहर के एक अन्य सरकारी अस्पताल में भेजा गया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देते हुए इसका जिम्मा अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपा है। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।</p>
<p><strong>एसीएस और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे</strong><br /> भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में स्थित कमला नेहरु अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगने की घटना के बाद मंगलवार को इस मामले की जांच के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मोहम्मद सुलेमान और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।   अधिकारियों ने शिशु वार्ड पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा भी की। <br /> <br /> दूसरी ओर इस मामले के प्रभावित परिवारों को चार चार लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की गई है। अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार चार बच्चों की मौत हो गई है और 36 को प्रभावित वार्ड से अन्य स्थान पर शिफ्ट किया गया है। इनमें से भी कुछ बच्चों के आग के कारण प्रभावित होने की खबरें हैं।</p>
<p><strong>अस्पताल में आग का हादसा दुखद - भूपेंद्र</strong><br /> मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री एवं भोपाल जिले के प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने यहां कमला नेहरु अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगने की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। सिंह ने ट्वीट के जरिए कहा कि यह हादसा दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। हादसे में चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। अन्य बच्चों का इलाज जारी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना के उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सिंह ने कहा कि दुख की इस घड़ी में संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।</p>
<p><br /> इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मध्य रात्रि में किए गए ट्वीट में कहा कि आग लगने की सूचना पर वे स्वयं अस्पताल पहुंचे और राहत एवं बचाव देखे। हादसे में चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। उनके परिजनों को चार चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। अन्य बच्चों का इलाज जारी है और स्थिति पूरी तरह काबू में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 12:17:46 +0530</pubDate>
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