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                <title>nehru - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नेहरू पर आधारित फोटो प्रदर्शनी संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ने साहित्य अकादमी संकुल में 27 से 30 मई तक पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का समापन हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/photo-exhibition-based-on-nehru-concluded/article-47253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/630-400-size-(7)2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ने साहित्य अकादमी संकुल में 27 से 30 मई तक पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का समापन हुआ। यह प्रदर्शनी नेहरू के जीवन से संबंधित दुर्लभ चित्रों पर आधारित किताब नेहरू अभिनंदन ग्रंथ पर आधारित थी। किताब 1949 में प्रकाशित हुई थी। अकादमी सचिव राजेंद्र मोहन शर्मा ने बताया सभी चित्र चित्रकार विनय शर्मा की लाइब्रेरी से लिए गए हैं। यह चित्र नेहरू के जीवन को बचपन से लेकर 60 साल तक की उम्र तक संजोते हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 10:24:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आखिर क्या है सेंगोल? क्या है इसका आजादी से कनेक्शन? नए संसद भवन में किया जाएगा स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/what-is-sengol-after-all--will-be-installed-in-the-new-parliament-house-amit-shah-narendra-modi-jawahar-lal-nehru/article-46533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/sengol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नये संसद भवन के राष्ट्र को लोकार्पण के मौके पर आजादी के समय 14 अगस्त 1947 के दिन सत्ता के हस्तांतरण की परंपरा को दोहराते हुए पवित्र 'सेंगोल' को स्वीकार करेंगे जिसे बाद में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के समय प्राचीन भारतीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य से सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल को स्वीकार किया गया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इस विशेष अवसर और परंपरा के लिए वायसराय लार्ड माउंटबेटन को भारत भेजा था। उन्होंंने कहा कि पंडित नेहरू ने अपने आवास पर लार्ड माउंटबेटन की मौजूदगी में तमिलनाडु के अधिनम से आये धार्मिक शिष्टमंडल से सेंगोल को स्वीकार किया था। </p>
<p>शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है। उन्होंंने कहा कि सेंगोल न्याय और नीति पर आधारित शासन के भाव से जुड़ा है। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आगामी रविवार को जब प्रधानमंत्री नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे तो तमिलनाडु के 20 अधिनम के अध्यक्ष मोदी को यह सेंगोल प्रदान करेंगे। बाद में पवित्र सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पवित्र सेंगोल न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था का प्रतीक है इसलिए इसकी जगह संग्रहालय के बजाय संसद भवन होनी चाहिए। </p>
<p>विपक्ष के नेताओं के इस मौके पर उपस्थित नहीं रहने से संबंधित सवाल पर शाह ने कहा कि सरकार ने सबसे विनती की है और सभी नेता अपनी भावना तथा विवेक के आधार पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, राजनीति की अपनी जगह है और इस मौके को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। </p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यह वही सेंगोल है जिसे पंडित नेहरू को प्रदान किया गया था और यह अब तक इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा गया था।</p>
<p><strong>आजादी से जुड़ा है इतिहास<br /></strong>सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। आजाद भारत में इसका बड़ा महत्व है, 14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था। एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है, उस समय सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था।  जब लॉर्ड माउंट बेटन ने पंडित नेहरू से पूछा कि सत्ता का हस्तांतरण कैसे किया जाए, तो पंडित नेहरू ने इसके लिए सी राजा गोपालचारी से मशवरा मांगा। उन्होंने सेंगोल प्रक्रिया के बारे में बताया, इसके बाद इसे तमिलनाडु से मंगाया गया और आधी रात को पंडित नेहरु ने स्वीकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:15:12 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी का आंदोलन तेज करने जब पंडित नेहरू जोधपुर में महाराजा से मिले </title>
                                    <description><![CDATA[ पंडित नेहरू को भारत छोड़ो आंदोलन के बाद भी जेल भेजा गया और एक जून 1945 को छोड़ा गया तो मारवाड़ लोक परिषद ने उन्हें जोधपुर बुलाकर सम्मानित करने का फैसला लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/intensifying-the-freedom-movement-when-pandit-nehru-met-the-maharaja/article-18509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture1.jpg" alt=""></a><br /><p>आम तौर पर इतिहास में पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को राजघरानों का बहुत विरोधी बताया जाता है, लेकिन राजस्थान के आजादी के इतिहास के कुछ पन्ने इस तथ्य को झुठलाते हैं। पंडित नेहरू को भारत छोड़ो आंदोलन के बाद भी जेल भेजा गया और एक जून 1945 को छोड़ा गया तो मारवाड़ लोक परिषद ने उन्हें जोधपुर बुलाकर सम्मानित करने का फैसला लिया। वे अक्टूबर में आए, लेकिन मारवाड़ में नेहरू का स्वागत करने को लोक परिषद से अधिक रजवाड़े उतावले थे। <br />पंडित नेहरू अक्टूबर में जोधपुर जाने के लिए सोजत रेलवे स्टेशन पहुंचे तो महाराजा उम्मेदसिंह के निकट संबंधी कर्नल मोहनसिंह भाटी ने महाराजा की ओर से नेहरू का स्वागत किया। महाराजा खुद नेहरू से मिलने उनके निवास स्थान पर गए। उन्होंने संध्या में नेहरू और उनके साथ गई 28 वर्षीय युवा इंदिरा के सम्मान में भोज दिया। यही नहीं, उन्होंने आजादी के आंदोलन में कांग्रेस के सहयोग के लिए 25,000 रुपए की थैली भी भेंट की।<br /><br />पंडित नेहरू और महाराजा की इस मुलाकात का असर यह पड़ा कि जोधपुर रियासत के अंग्रेज प्रधानमंत्री सर डोनाल्ड को हटा दिया गया और उनकी जगह इलाहाबाद डिविजन के कमिश्नर सीएस वेंकटाचारी को नियुक्त किया गया। इससे लोकपरिषद और महाराजा के बीच रिश्ते कुछ ठीक हुए। महाराजा उम्मेदसिंह की मृत्यु जून 1947 में माउंट आबू में न हुई होती तो जोधपुर संभवत: राजस्थान की केंद्रीय शक्ति होता। लेकिन उनके जाने के बाद हालात बदलते चले गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 10:48:13 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल में आग, चार बच्चों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[शेष बच्चों को अन्य स्थान पर किया गया शिफ्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%97--%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4/article-2203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/bhopal_hospital-aag.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल। भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल परिसर में कमला नेहरु अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित शिशु वार्ड (स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट) में आग लगने के कारण 4 बच्चों की मौत हो गई और शेष लगभग 36 बच्चों को अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके उनका इलाज किया जा रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित शिशु वार्ड के वेंटीलेटर में सोमवार रात लगभग नौ बजे शार्ट सर्किट के कारण आग लगी और देखते ही देखते यह वार्ड के कुछ हिस्सों में फैल गयी। इस वजह से वार्ड के उपकरण इत्यादि जल गए और उसमें धुंआ फैल गया।</p>
<p>इस बीच चिकित्सकों और नर्स आदि की मदद से बच्चों को वहां से हटाकर अन्य स्थान पर सुरक्षित रखने के प्रयास हुए, लेकिन चार शिशुओं को नहीं बचाया जा सका। इन बच्चों की उम्र एक दिन से लेकर नौ दिन तक है। शेष 36 बच्चों को अस्पताल के प्रभावित वार्ड से शिफ्ट कर दिया गया है और सबका इलाज चल रहा है। आग लगने की सूचना पर दमकल कर्मचारी और पुलिस कर्मचारी मय साजो सामान के साथ पहुंचे और आग पर काबू पाया। घटना के कुछ देर बाद परिसर में मीडिया से चर्चा में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि आग पर काबू पा लिया गया है और सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन कुछ ही देर बाद खबर आयी कि तीन बच्चों की मृत्यु हुयी है। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गयी। <br /> <br /> इस बीच अस्पताल प्रशासन बच्चों की स्थिति पर नजर रखे हुए है। इनमें से लगभग आधा दर्जन बच्चों को बेहतर इलाज के लिए शहर के एक अन्य सरकारी अस्पताल में भेजा गया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देते हुए इसका जिम्मा अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपा है। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।</p>
<p><strong>एसीएस और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे</strong><br /> भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में स्थित कमला नेहरु अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगने की घटना के बाद मंगलवार को इस मामले की जांच के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मोहम्मद सुलेमान और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।   अधिकारियों ने शिशु वार्ड पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा भी की। <br /> <br /> दूसरी ओर इस मामले के प्रभावित परिवारों को चार चार लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की गई है। अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार चार बच्चों की मौत हो गई है और 36 को प्रभावित वार्ड से अन्य स्थान पर शिफ्ट किया गया है। इनमें से भी कुछ बच्चों के आग के कारण प्रभावित होने की खबरें हैं।</p>
<p><strong>अस्पताल में आग का हादसा दुखद - भूपेंद्र</strong><br /> मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री एवं भोपाल जिले के प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने यहां कमला नेहरु अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगने की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। सिंह ने ट्वीट के जरिए कहा कि यह हादसा दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। हादसे में चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। अन्य बच्चों का इलाज जारी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना के उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सिंह ने कहा कि दुख की इस घड़ी में संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।</p>
<p><br /> इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मध्य रात्रि में किए गए ट्वीट में कहा कि आग लगने की सूचना पर वे स्वयं अस्पताल पहुंचे और राहत एवं बचाव देखे। हादसे में चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका। उनके परिजनों को चार चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। अन्य बच्चों का इलाज जारी है और स्थिति पूरी तरह काबू में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 12:17:46 +0530</pubDate>
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