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                <title>जर्जर मकानों में जिंदगी खड़ी दांव पर, विजय मार्केट की घटना के बाद भी नहीं चेते लोग और जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने कोटा के कई इलाकों में खड़ी हैं ह्यहादसे की इमारतेंह्ण,कहीं दरारें तो कहीं कमजोर दीवारें बनीं खतरा।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lives-at-stake-in-dilapidated-houses--neither-the-public-nor-the-authorities-have-heeded-the-warning-following-the-vijay-market-incident/article-159707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(4)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की बारिश शहर को राहत देने के साथ पुराने शहर के कई इलाकों में खतरे की घंटी भी बजा रही है। नयापुरा, रामपुरा, कैथूनीपोल, विजय मार्केट, अग्रसेन बाजार सहित पुराने शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई ऐसे पुराने और जर्जर मकान हैं, जिनकी हालत देखकर ही खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। कहीं दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं तो कहीं छज्जे और छतें कमजोर हो चुकी हैं। इसके बावजूद कई परिवार इन्हीं भवनों में रह रहे हैं। ऐसे में तेज बारिश के दौरान कोई मकान या उसका हिस्सा ढहने पर बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। चिंता की बात यह है कि खतरा सामने दिखाई देने के बावजूद न तो कई भवन मालिक समय रहते मरम्मत करा रहे हैं और न ही जर्जर हिस्सों को सुरक्षित तरीके से हटाया जा रहा है।</p>
<p><strong>विजय मार्केट में गिर चुका जर्जर मकान, फिर भी खतरे को हल्के में ले रहे लोग</strong><br />कुछ दिन पहले विजय मार्केट क्षेत्र में एक जर्जर मकान गिरने की घटना सामने आ चुकी है। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में कई पुराने भवन आज भी बदहाल स्थिति में खड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की, इनमें से कई मकान वर्षों से इसी हालत में हैं। समय के साथ बारिश, सीलन और रखरखाव के अभाव में इनकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई, लेकिन मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p><strong>हादसे के बाद कार्रवाई क्यों, पहले क्यों नहीं?</strong><br />हर बार किसी जर्जर भवन के गिरने के बाद राहत-बचाव दल पहुंचते हैं, जांच होती है और जिम्मेदारी तय करने की बातें की जाती हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब खतरा पहले से दिखाई दे रहा है तो हादसे का इंतजार क्यों किया जाए? मानसून में लगातार बारिश से पुरानी दीवारों में नमी बढ़ती है और कमजोर ढांचे के अचानक गिरने का खतरा बढ़ सकता है। अब जिम्मेदारी केवल प्रशासन की ही नहीं, भवन मालिकों और वहां रहने वाले लोगों की भी है। जर्जर मकान में रहना केवल अपनी जान को जोखिम में डालना नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों के लिए भी खतरा पैदा करना है। विजय मार्केट की घटना एक चेतावनी है। यदि इसके बाद भी जर्जर भवनों की पहचान और समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अगली घटना कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।</p>
<p>हर साल बारिश के मौसम में जर्जर भवनों को लेकर चिंता बढ़ जाती है, मानसून बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। कुछ लोग आर्थिक कारणों से मरम्मत नहीं करा पाते तो कुछ खतरे को गंभीरता से नहीं लेते। कई भवन ऐसे भी हैं, जिनमें लोग वर्षों से रह रहे हैं और उन्हें लगता है कि अब तक कुछ नहीं हुआ तो आगे भी कुछ नहीं होगा। यही सोच कभी भी भारी पड़ सकती है।<br /><strong>-सुरज, स्थानीय व्यापारी</strong></p>
<p>इस मकान में वर्तमान में तीन परिवार रह रहे हैं। मकान की हालत लगातार खराब होती जा रही है और कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मकान की मरम्मत और स्थिति सुधारने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन परिवारों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाने के कारण मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका। मरम्मत नहीं हुई तो किसी हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।<br /><strong>-मनीष शर्मा, विजय मार्केट स्थित जर्जर मकान का मालिक</strong></p>
<p>मानसून को देखते हुए शहर में जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर नगर निगम ने करीब 15 दिन पहले ही विशेष सर्वे शुरू करवा दिया था। सर्वे में करीब 100 भवन ऐसे चिह्नित किए गए, जो जर्जर हैं या जिन्हें तत्काल मरम्मत की जरूरत है। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक भवन पुराने कोटा क्षेत्र में स्थित हैं। निगम ने खतरनाक भवनों को हटाने के लिए करीब 50 लाख रुपए के वर्क ऑर्डर भी जारी किए हैं। आयुक्त ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद कई भवन मालिकों ने स्वयं जर्जर हिस्से तोड़ दिए, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मकानों की मरम्मत करवा ली है। जिन भवन मालिकों ने नोटिस के बावजूद न तो जवाब दिया और न ही मरम्मत करवाई, उनके खिलाफ निगम कार्रवाई कर रहा है। ऐसे खतरनाक भवनों को निगम अपने स्तर पर तोड़कर कार्रवाई का खर्च संबंधित भवन मालिक से वसूल करेगा। निगम लगातार सर्वे और कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा भी कर रहा है।<br /><strong>-ओमप्रकाश मेहरा, नगर निगम आयुक्त</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 15:09:54 +0530</pubDate>
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